‘मुरासू’ चक्रवात: आंध्र प्रदेश के लिए नई चुनौती, 5 जिलों में रेड अलर्ट जारी

'मुरासू' चक्रवात: आंध्र प्रदेश के लिए नई चुनौती, 5 जिलों में रेड अलर्ट जारी

‘मुरासू’ चक्रवात: आंध्र प्रदेश के लिए नई चुनौती, 5 जिलों में रेड अलर्ट जारी

Map of Andhra Pradesh, Odisha, Nellore, Narsapur, Yanam highlighted on the map of India — मुरासू चक्रवात आंध्र प्रदेश
मानचित्र: लाल चेतावनी वाले पांच जिले जहां चक्रवात ‘मुरासु’ पहुंचेगा

✎ चक्रवात की पहचान पवन-गति से होती है (गंभीर चक्रवाती तूफ़ान 89-117 किमी/घंटा), जबकि सबसे घातक तत्व प्रायः तूफ़ानी लहर और स्थलपात-बिंदु पर होने वाली तटीय बाढ़ होती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (Physical Geography): उष्णकटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति और बंगाल की खाड़ी की भूमिका  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन: पूर्व-चेतावनी प्रणाली, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय आपदा प्रबंधन संरचना
  • Prelims: गंभीर चक्रवाती तूफ़ान (Severe Cyclonic Storm) का IMD वर्गीकरण और पवन-गति सीमा, अर्नब और मुरासु जैसे नाम: WMO-UNESCAP उष्णकटिबंधीय चक्रवात पैनल की नामकरण प्रणाली, स्थलपात (Landfall) और इसकी भविष्यवाणी में अनिश्चितता, तूफ़ानी लहर (Storm Surge) और तटीय बाढ़, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (SDRF), IMD की रंग-आधारित चेतावनी प्रणाली (हरा, पीला, नारंगी, लाल), उत्तर-पूर्वी मानसून काल में बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की अधिक आवृत्ति
  • Essay: प्राकृतिक आपदाएँ और तटीय समुदायों की सुभेद्यता: विकास बनाम जोखिम न्यूनीकरण, एक ही मौसम में बार-बार आने वाले चक्रवात: पूर्व-चेतावनी से सामुदायिक तैयारी तक

त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात की पहचान पवन-गति से होती है (गंभीर चक्रवाती तूफ़ान 89-117 किमी/घंटा), जबकि सबसे घातक तत्व प्रायः तूफ़ानी लहर और स्थलपात-बिंदु पर होने वाली तटीय बाढ़ होती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी भाग में बने गहरे अवदाब के तीव्र होने से ‘मुरासु’ नामक चक्रवाती तूफ़ान बना, जिसके 2-3 नवंबर 2026 की रात नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश तट से टकराने का अनुमान भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने व्यक्त किया है। इसके अनुसार इसकी हवाएँ 100 से 110 किमी प्रति घंटा और झोंके 120 किमी प्रति घंटा तक पहुँच सकते हैं। यह तूफ़ान उस क्षेत्र में आया है जहाँ लगभग एक सप्ताह पहले 28 अक्टूबर को ‘अर्नब’ (अत्यधिक गंभीर चक्रवाती तूफ़ान) नरसापुर के पास टकराया था और जिसके झोंके 150 किमी प्रति घंटा तक पहुँचे थे। अर्नब से पाँच लोगों की मृत्यु हुई, लगभग 3.5 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई, लगभग 2,425 किमी सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं और लगभग 15,000 बिजली के खंभे गिरे। राज्य सरकार ने इससे हुए नुकसान का अनुमान 4,600 करोड़ रुपये लगाया है। इसी पृष्ठभूमि में आंध्र प्रदेश के कुछ जिलों में लाल चेतावनी जारी की गई है, और स्थलपात-बिंदु के बदल सकने की संभावना के कारण प्रशासन को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है।

पृष्ठभूमि

  • बंगाल की खाड़ी में चक्रवात मुख्य रूप से मानसून से पहले (अप्रैल-मई) और मानसून के बाद (अक्टूबर-दिसंबर) के समय अधिक बनते हैं। अक्टूबर-दिसंबर का समय उत्तर-पूर्वी मानसून से जुड़ा होने के कारण इस क्षेत्र में अधिक सक्रिय रहता है।
  • चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग, एशिया-प्रशांत (UNESCAP) के उष्णकटिबंधीय चक्रवात पैनल द्वारा तय की गई सूची से रखे जाते हैं। इस सूची में भारत सहित कई सदस्य देश नाम प्रस्तावित करते हैं। ‘मुरासु’ नाम भारत के प्रस्तावित नामों से लिया गया है, जिसका अर्थ तमिल में युद्ध-ढोल है।
  • अर्नब के प्रभाव से स्पष्ट होता है कि चक्रवात का खतरा केवल तेज़ हवाओं तक सीमित नहीं है। फसल, सड़क, बिजली और आजीविका पर होने वाला प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है, और ऐसे में पुनर्वास तथा पुनर्निर्माण की चुनौती भी सामने आती है।
  • भारत में आपदा प्रबंधन की वैधानिक नींव आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 है, जिसके तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (State Disaster Management Authority) गठित किए गए हैं। आपदा के समय राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की तैनाती भी की जाती है।
  • भारत सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा (2015-2030) का हस्ताक्षरकर्ता है, जो आपदा-पूर्व तैयारी, प्रारंभिक चेतावनी और सामुदायिक सहभागिता पर बल देता है। इसी कारण चक्रवात-पूर्व चेतावनी और निकासी की व्यवस्था को जोखिम न्यूनीकरण का केंद्रीय तत्व माना जाता है।

चक्रवाती तूफ़ान क्या है?

  • चक्रवाती तूफ़ान एक निम्न वायुदाब वाला बड़ा परिसंचारी वायु-तंत्र है, जिसमें तेज़ हवाएँ केंद्र के चारों ओर चक्कर लगाती हैं। इसे विकसित होने के लिए गर्म समुद्री सतह (आम तौर पर 26 डिग्री सेल्सियस से अधिक), पर्याप्त नमी और कोरिओलिस बल की आवश्यकता होती है, इसलिए यह विषुवत रेखा से कुछ दूरी पर ही बनता है।
  • IMD पवन की अधिकतम गति के आधार पर तूफ़ानों का वर्गीकरण करता है: अवदाब (31-49 किमी/घंटा), गहरा अवदाब (50-61 किमी/घंटा), चक्रवाती तूफ़ान (62-88 किमी/घंटा), गंभीर चक्रवाती तूफ़ान (89-117 किमी/घंटा), अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान (118-165 किमी/घंटा), अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान (166-220 किमी/घंटा) और सुपर चक्रवात (220 किमी/घंटा से अधिक)।
  • चक्रवात से होने वाली क्षति के मुख्य स्रोत तेज़ हवाएँ, मूसलाधार वर्षा, तटीय बाढ़ और तूफ़ानी लहर (Storm Surge) हैं। इनमें से तूफ़ानी लहर, जो समुद्र के जल-स्तर में असामान्य वृद्धि है, प्रायः सबसे अधिक जानमाल की हानि का कारण बनती है।
  • स्थलपात (Landfall) वह बिंदु है जहाँ चक्रवात का केंद्र समुद्र से तट पर पहुँचता है। इसकी भविष्यवाणी में मार्ग-त्रुटि (Track Error) की संभावना रहती है, इसलिए अनुमानित स्थलपात-बिंदु बाद में बदल सकता है, जैसा कि मुरासु के मामले में विशेषज्ञ निगरानी कर रहे हैं।
  • IMD चेतावनियाँ रंगों के माध्यम से दी जाती हैं: हरा (कोई चेतावनी नहीं), पीला (सतर्क रहें), नारंगी (तैयार रहें) और लाल (अत्यधिक सावधानी और तत्काल कार्रवाई)। जिलों के लिए लाल चेतावनी का अर्थ है कि प्रशासन को निकासी, आश्रय और संसाधन-व्यवस्था जैसे कदम तुरंत उठाने होते हैं।
  • भारत में चक्रवात-पूर्व तैयारी में प्रारंभिक चेतावनी का प्रसारण, तटीय क्षेत्रों में चक्रवात आश्रय स्थलों का निर्माण, मछुआरों और तटीय समुदायों के लिए सलाह तथा राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (SDRF) से राहत और पुनर्वास शामिल हैं।
  • तटीय पारिस्थितिकी, जैसे मैंग्रोव वन और तटबंध, तूफ़ानी लहर की ऊँचाई और तट-कटाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं, और इसलिए दीर्घकालिक जोखिम न्यूनीकरण का हिस्सा हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
नामकरण भारत द्वारा दी गई सूची से ‘मुरासु’ नाम लिया गया है, जिसका तमिल में अर्थ ‘युद्ध का नगाड़ा’ है। उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और ESCAP की पैनल प्रणाली के अंतर्गत तय होते हैं।
वर्तमान तीव्रता गहरे अवदाब से चक्रवाती तूफ़ान में बदला और अनुमान है कि यह गंभीर चक्रवाती तूफ़ान बनेगा। स्थलपात के समय हवा की गति 100-110 किमी/घंटा और झोंके 120 किमी/घंटा तक अनुमानित हैं।
संभावित स्थलपात क्षेत्र दक्षिणी आंध्र प्रदेश तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच, 2-3 नवंबर की रात। प्रारंभिक अनुमान में स्थलपात बापटला के निकट बताया गया है, किंतु मौसम मॉडलों के अनुसार यह बिंदु बदल सकता है।
पूर्ववर्ती तूफ़ान अरनब 28 अक्टूबर को नरसापुर (पश्चिम गोदावरी जिला) के निकट तट से टकराया, जिसके झोंके 150 किमी/घंटा तक पहुँचे थे। मुरासु से पहले आए इस तूफ़ान से राज्य अभी उबर नहीं पाया था।
चेतावनी और निगरानी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) के पूर्वानुमान के आधार पर पाँच जिलों में लाल चेतावनी जारी की गई है। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने विभिन्न मॉडलों से प्राप्त संभावित मार्गों को साझा किया है।

महत्व

मौसम विज्ञान और भौगोलिक

  • बंगाल की खाड़ी में अक्टूबर-दिसंबर के उत्तर-पूर्वी मानसून काल में चक्रवात बनने की प्रवृत्ति अधिक रहती है, और इसी काल में पूर्वी तट पर तूफ़ानों का खतरा बढ़ता है।
  • एक ही मौसम में दो गंभीर चक्रवातों का आना यह दर्शाता है कि बंगाल की खाड़ी की ऊष्मा और वायुमंडलीय परिस्थितियाँ लगातार अनुकूल रह सकती हैं।

आपदा प्रबंधन

  • पूर्वानुमान में स्थलपात बिंदु के बदलने की संभावना के कारण समय पर निकासी, आश्रय-स्थल और चेतावनी तंत्र की तैयारी अत्यावश्यक है।
  • लाल चेतावनी से जिला प्रशासन को तटीय बस्तियों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में सहायता मिलती है।

आर्थिक और अवसंरचनात्मक

  • अरनब से राज्य को लगभग 4,600 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है, जिसमें लगभग 3.5 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई और लगभग 2,425 किमी सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं।
  • लगभग 15,000 बिजली के खंभे गिरने से बिजली आपूर्ति बाधित हुई, जिससे पुनर्बहाली के लिए लंबी अवधि और अधिक संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है।

संघीय और प्रशासनिक

  • आपदा प्रबंधन मुख्यतः राज्य सरकार की प्रथम जिम्मेदारी होती है, जबकि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय, तकनीकी सहायता और अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराती है।
  • राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और IMD के बीच सूचना का तीव्र प्रवाह आपदा प्रबंधन की प्रभावशीलता का आधार है।

चुनौतियाँ

1. पूर्वानुमान की अनिश्चितता

  • चक्रवात के स्थलपात बिंदु और तीव्रता में बदलाव की संभावना बनी रहती है, जिससे तैयारी का क्षेत्र निश्चित करना कठिन होता है।
  • मॉडलों के अलग-अलग परिणाम प्रशासन के लिए निर्णय-समय को सीमित कर देते हैं।

2. लगातार आपदाओं से पुनर्वास का दबाव

  • एक सप्ताह के भीतर दो चक्रवातों से राज्य की पुनर्वास क्षमता पर दबाव बढ़ता है।
  • अरनब से हुई क्षति की भरपाई पूरी होने से पहले नई क्षति होने से आजीविका के संकट गहरे हो जाते हैं।

3. अवसंरचना की भेद्यता

  • सड़कों, पुलों और बिजली के खंभों की क्षति से राहत सामग्री और बचाव दलों की पहुँच बाधित होती है।
  • बिजली और संचार व्यवस्था बाधित होने से चेतावनी का प्रसार भी प्रभावित हो सकता है।

4. कृषि और तटीय आजीविका पर प्रभाव

  • फसलों के जलमग्न होने से किसानों की आय और खाद्य आपूर्ति पर अल्पकालिक दबाव आता है।
  • तटीय समुदाय मछली पकड़ने और कृषि पर निर्भर होने के कारण बार-बार की आपदाओं से अधिक असुरक्षित हो जाते हैं।

5. तटीय बस्तियों की निकासी और सुरक्षा

  • बड़ी संख्या में लोगों को समय पर निकालने के लिए पर्याप्त आश्रय-स्थल और परिवहन आवश्यक हैं।
  • कच्चे घरों में रहने वाले परिवार तेज़ हवाओं और बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पूर्वानुमान स्थलपात बिंदु बदलने से तैयारी के क्षेत्र का निर्धारण कठिन होता है।
पुनर्वास का दबाव अरनब की क्षति की भरपाई से पहले नए तूफ़ान से राज्य की वित्तीय और प्रशासनिक क्षमता पर दबाव बढ़ता है।
अवसंरचना क्षति सड़कों और बिजली के खंभों की क्षति से राहत और बचाव कार्य धीमे पड़ते हैं।
कृषि हानि फसलों के जलमग्न होने से किसानों की आय और खाद्य आपूर्ति प्रभावित होती है।
तटीय सुरक्षा सघन तटीय बस्तियों से समय पर निकासी और आश्रय-व्यवस्था चुनौतीपूर्ण है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund – SDRF)
  • राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (National Disaster Response Force – NDRF)

आगे की राह

  • चक्रवात के मार्ग और तीव्रता के पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाने के लिए IMD और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बीच वास्तविक समय में आंकड़ों का साझा तंत्र मज़बूत किया जाए।
  • स्थलपात बिंदु बदलने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए कई संभावित क्षेत्रों के लिए निकासी योजनाएँ पहले से तैयार रखी जाएँ।
  • लाल चेतावनी वाले जिलों में समुदाय-स्तरीय सूचना प्रसार, जैसे स्थानीय भाषा में चेतावनी और सामुदायिक स्वयंसेवक, को सुदृढ़ किया जाए।
  • बिजली, सड़क और संचार की पुनर्बहाली के लिए पहले से चिह्नित आपातकालीन दल और सामग्री का भंडार रखा जाए।
  • अरनब से हुए नुकसान के आकलन और मुआवजे का काम तेज़ी से पूरा कर पुनर्वास को तूफ़ानों की अगली शृंखला से अलग प्राथमिकता दी जाए।
  • तटीय क्षेत्रों में आपदा-रोधी आवास और आश्रय-स्थलों के निर्माण को स्थानीय जोखिम मानचित्र के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।
  • किसानों के लिए फसल क्षति का शीघ्र आकलन और बीमा दावों के निपटान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

चक्रवात (Cyclone) · गहरा अवदाब (Deep Depression) · भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) · प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) · आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority) · राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (State Disaster Management Authority) · राज्य आपदा प्रत्युत्तर निधि (State Disaster Response Fund) · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (National Disaster Response Force) · सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction) · आपदा जोखिम न्यूनीकरण · आपदा-पश्चात पुनर्वास

अवधारणा प्रवाह

बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी भाग में निम्न दबाव क्षेत्र बनता है और गहरे अवदाब में बदलता है।  →  गर्म समुद्री सतह और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों में यह चक्रवाती तूफ़ान के रूप में तीव्र होता है।  →  चक्रवाती तूफ़ान उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए गंभीर चक्रवाती तूफ़ान बनने की ओर अग्रसर होता है।  →  नेल्लोर और नरसापुर के बीच आंध्र प्रदेश तट पर स्थलपात होता है, जिससे तेज़ हवाएँ और भारी वर्षा होती हैं।  →  बाढ़, फसल क्षति, सड़कों के अवरोध और बिजली आपूर्ति बाधित होने से जन-धन की हानि होती है।  →  राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण राहत, निकासी और पुनर्बहाली का समन्वय करता है और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष से संसाधन जुटाए जाते हैं।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के वर्गीकरण से संबंधित हैं:
1. सतही हवाओं की गति 63 से 88 किमी प्रति घंटा होने पर तूफान को चक्रवाती तूफान (Cyclonic Storm) कहा जाता है।
2. सतही हवाओं की गति 89 से 117 किमी प्रति घंटा होने पर तूफान को गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) कहा जाता है।
3. सतही हवाओं की गति 118 से 165 किमी प्रति घंटा होने पर तूफान को गंभीर चक्रवाती तूफान कहा जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: चक्रवाती तूफान की हवा 34-47 नॉट (लगभग 63-88 किमी/घंटा) होती है। कथन 2 सही है: गंभीर चक्रवाती तूफान 48-63 नॉट (लगभग 89-117 किमी/घंटा) का होता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि 118-165 किमी/घंटा की हवा वाले तूफान को अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान (Very Severe Cyclonic Storm) कहा जाता है।

Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक में एक कथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है।

कथन (A): उत्तर हिंद महासागर के चक्रवातों के नाम सदस्य देशों द्वारा प्रस्तावित सूची से रखे जाते हैं।
कारण (R): इस नामकरण प्रणाली का उद्देश्य चक्रवातों की पहचान सरल बनाना और चेतावनी संचार को स्पष्ट करना है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, but (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है — उत्तर हिंद महासागर में चक्रवातों के नाम आठ सदस्य देशों द्वारा दिए गए नामों की सूची से रखे जाते हैं, जिसकी व्यवस्था विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) के पैनल द्वारा की गई है। नामकरण से चेतावनी और संचार सरल होता है, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित स्तंभों का मिलान कीजिए:

स्तंभ I (संस्था)
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
2. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
3. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल
4. भारत मौसम विज्ञान विभाग

स्तंभ II (विशेषता)
a. विशेष प्रशिक्षित बल, जो आपदा के समय बचाव और राहत कार्य करता है
b. इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं
c. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन चक्रवात की पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करता है
d. इसके अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री होते हैं

सही मिलान चुनिए:

  1. 1-b, 2-d, 3-a, 4-c
  2. 1-d, 2-b, 3-c, 4-a
  3. 1-b, 2-c, 3-a, 4-d
  4. 1-a, 2-b, 3-d, 4-c

उत्तर: 1-b, 2-d, 3-a, 4-c — राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं (1-b)। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करते हैं (2-d)। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल विशेष प्रशिक्षित बल है (3-a)। भारत मौसम विज्ञान विभाग पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन चेतावनी जारी करता है (4-c)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ आंध्र प्रदेश के तट पर कुछ ही दिनों के अंतराल में दो गंभीर चक्रवाती तूफानों के आने से राज्य की संवेदनशीलता उजागर हुई है। भारत में चक्रवात-पूर्व प्रारंभिक चेतावनी और आपदा प्रबंधन ढाँचे की प्रभावशीलता का समीक्षात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि आपदा-पश्चात पुनर्वास और आपदा जोखिम न्यूनीकरण को सुदृढ़ करने के लिए और क्या आवश्यक है। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर संरचना:
(क) समसामयिक संदर्भ: 28 अक्टूबर 2026 को चक्रवात अर्नब का पश्चिम गोदावरी के नरसापुर के निकट स्थलीय टकराव, जिसमें हवाएँ 150 किमी/घंटा तक पहुँचीं; राज्य सरकार के अनुसार पाँच मृत्यु, 3.5 लाख हेक्टेयर से अधिक फसल क्षति, लगभग 2,425 किमी सड़कें और लगभग 15,000 बिजली के खंभे प्रभावित, तथा लगभग 4,600 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान। इसके ठीक बाद चक्रवात मुरासु का नेल्लोर-नरसापुर के बीच 100-110 किमी/घंटा (झोंके 120 किमी/घंटा) की गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में तट पार करने का अनुमान।
(ख) प्रारंभिक चेतावनी का आयाम: भारत मौसम विज्ञान विभाग (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन) द्वारा चक्रवात का वर्गीकरण (गहरा अवदाब से अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान तक), पथ-पूर्वानुमान की अनिश्चितता (स्थलीय टकराव बिंदु बदल सकता है), राज्य स्तर पर सूचना-प्रसार की भूमिका; उपलब्धि (पूर्वानुमान में सुधार, समय से पहले निकासी) और सीमाएँ (अंतिम मील तक संचार, स्थानीय जोखिम मानचित्रण)।
(ग) वैधानिक-संस्थागत ढाँचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (अध्यक्ष: प्रधानमंत्री) की नीति-निर्माण भूमिका; राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (अध्यक्ष: मुख्यमंत्री) द्वारा राज्य योजना; जिला स्तर पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण; राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की तैनाती।
(घ) वित्तीय ढाँचा: राज्य आपदा प्रत्युत्तर निधि और राष्ट्रीय आपदा प्रत्युत्तर निधि से राहत; केंद्र-राज्य लागत साझेदारी; राहत-केंद्रित बनाम शमन-केंद्रित व्यय का अंतर; तटीय राज्यों के लिए अग्रिम (पूर्व-शमन) निवेश का तर्क।
(ङ) संघीय आयाम: आपदा प्रबंधन मुख्यतः राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जबकि संघ सहायता, समन्वय और मानक निर्धारण करता है; इस संतुलन पर विचार।
(च) अंतरराष्ट्रीय संदर्भ: सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (2015-2030) की प्राथमिकताएँ, विशेषकर जोखिम की समझ, शासन को सुदृढ़ करना, लचीलेपन में निवेश, और ‘पुनर्निर्माण में बेहतर’ (Build Back Better) का सिद्धांत।
(छ) समीक्षात्मक दृष्टि: केवल पूर्वानुमान की सटीकता पर्याप्त नहीं; अवसंरचना (चक्रवात आश्रय स्थल, पक्के भवन, तटबंध, मैंग्रोव संरक्षण), स्थानीय समुदाय की भागीदारी और जीविका-आधारित पुनर्वास आवश्यक हैं। निष्कर्ष में संतुलित स्थिति लें: प्रारंभिक चेतावनी ने जीवन-हानि घटाने में योगदान दिया है, परंतु आर्थिक क्षति और आजीविका-पुनर्वास के लिए शमन-आधारित दीर्घकालिक निवेश की कमी बनी हुई है।

स्रोत: The Hindu


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