03 Nov भारत में स्वास्थ्य, वित्तीय और एआई साक्षरता की कमी: एक गंभीर चुनौती
✎ डिग्री शिक्षा का प्रमाण है, पर वित्तीय, विधिक, स्वास्थ्य और AI साक्षरता जीवन की सुरक्षा और विवेकपूर्ण निर्णय के लिए अलग से अर्जित करनी पड़ती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन एवं सामाजिक क्षेत्र (स्वास्थ्य, शिक्षा, नागरिक अधिकार और उपभोक्ता संरक्षण) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (वित्तीय समावेशन) और विज्ञान-प्रौद्योगिकी एवं साइबर सुरक्षा (AI, डिजिटल ठगी)
- Prelims: जीवन साक्षरता (Life Literacy), वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy), डिजिटल गिरफ्तारी (Digital Arrest) की ऑनलाइन ठगी, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा रणनीति (National Strategy for Financial Education) 2020-25, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission), IndiaAI मिशन, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और अनुच्छेद 39A
- Essay: डिग्री बनाम विवेक: शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य और जीवन के लिए आवश्यक साक्षरताएँ, डिजिटल युग में नागरिक-सशक्तिकरण: सूचना का सत्यापन और तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग
त्वरित पुनरावृत्ति: डिग्री शिक्षा का प्रमाण है, पर वित्तीय, विधिक, स्वास्थ्य और AI साक्षरता जीवन की सुरक्षा और विवेकपूर्ण निर्णय के लिए अलग से अर्जित करनी पड़ती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
एक हालिया लेख में यह तर्क रखा गया है कि उच्च डिग्रियाँ होने के बावजूद बहुत-से भारतीयों में वित्तीय, विधिक, स्वास्थ्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence — AI) साक्षरता का अभाव है। लेख में एक काल्पनिक परिवार के माध्यम से दिखाया गया है कि कैसे डिजिटल गिरफ्तारी जैसी ऑनलाइन ठगी में पेंशन की बचत चली जाती है, शेयर-वायदा (Derivatives) के जोखिम को न समझने से भारी घाटा होता है, भ्रामक संदेशों के कारण चिकित्सकीय जाँच टल जाती है और AI से तैयार सामग्री का सत्यापन नहीं किया जाता। लेख के अनुसार बेंगलुरु के एक निजी दंत चिकित्सालय में 500 वयस्कों पर हुए सर्वेक्षण में लगभग छह-में-से-दस बहिरंग रोगियों की स्वास्थ्य साक्षरता निम्न पाई गई। लेख का मूल तर्क यह है कि कॉलेजों में प्रचलित ‘जीवन कौशल’ प्रायः संप्रेषण और टीमवर्क जैसे व्यक्तित्व-कौशल तक सीमित रहते हैं, जो रोज़गार में सहायक हो सकते हैं, पर वे जीवन की व्यावहारिक साक्षरताओं का विकल्प नहीं हैं।
पृष्ठभूमि
- साक्षरता की पारंपरिक परिभाषा सीमित है: जनगणना में सामान्यतः सात वर्ष और उससे अधिक आयु के उस व्यक्ति को साक्षर माना जाता है, जो समझकर पढ़ and लिख सकता हो। इसमें विषय-ज्ञान या डिजिटल, वित्तीय और स्वास्थ्य संबंधी विवेक की माप शामिल नहीं होती। इसी कारण ‘शिक्षित’ और ‘जीवन-साक्षर’ होने के बीच अंतर दिखाई देता है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा रणनीति (National Strategy for Financial Education) 2020-25 के माध्यम से वित्तीय साक्षरता और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने का ढाँचा प्रस्तुत किया है।
- डिजिटल ठगी से निपटने के लिए गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) कार्यरत है, और नागरिक साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल तथा हेल्पलाइन 1930 पर कर सकते हैं।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy — FLN) पर बल देती है, परंतु वयस्कों में वित्तीय, स्वास्थ्य और AI से जुड़ी व्यावहारिक साक्षरता का व्यापक मूल्यांकन अभी सीमित है।
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission) स्वास्थ्य अभिलेखों और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के ढाँचे से जुड़ा है, किंतु उपयोगकर्ताओं में स्वास्थ्य साक्षरता का स्तर सेवाओं के प्रभावी उपयोग को प्रभावित करता है।
जीवन साक्षरता (Life Literacy) क्या है?
- जीवन साक्षरता वह व्यावहारिक क्षमता है, जिससे व्यक्ति दैनिक जीवन में सूचना को समझकर, उसका मूल्यांकन करके सुरक्षित और विवेकपूर्ण निर्णय ले सके। यह व्यक्तित्व-कौशल (Soft Skills) से भिन्न है, क्योंकि यह तथ्यों, अधिकारों और जोखिमों की समझ पर आधारित है।
- वित्तीय साक्षरता का अर्थ है बचत, ऋण, बीमा और निवेश के मूल सिद्धांतों की समझ तथा जोखिम और धोखाधड़ी की पहचान। जोखिमपूर्ण व्युत्पन्न (Derivatives) व्यापार की प्रकृति समझना इसका महत्वपूर्ण अंग है।
- विधिक साक्षरता का अर्थ है नागरिकों को अपने अधिकारों, कर्तव्यों और कानूनी प्रक्रियाओं की मूल जानकारी होना। अनुच्छेद 39A राज्य को समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता सुनिश्चित करने का निर्देश देता है, और इसके क्रियान्वयन में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत गठित राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की भूमिका है।
- स्वास्थ्य साक्षरता का अर्थ है स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को समझकर उचित उपचार का पालन करना, प्रमाणिक और भ्रामक सूचना में भेद करना तथा कब चिकित्सकीय सलाह या अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता है, यह पहचानना। इसका सीधा संबंध जीवन के अधिकार के अंतर्गत स्वास्थ्य के अधिकार से है, जिसे न्यायिक व्याख्याओं में अनुच्छेद 21 का अंग माना गया है।
- AI साक्षरता का अर्थ है यह समझना कि AI क्या कर सकता है और क्या नहीं, उसके आउटपुट की सीमाएँ क्या हैं, और उसे सत्यापित कैसे किया जाए। इसके बिना AI-जनित त्रुटियाँ और भ्रामक तथ्य शैक्षणिक तथा व्यावसायिक निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं।
- संवैधानिक दृष्टि से अनुच्छेद 21A छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है, जबकि मूल कर्तव्यों में अनुच्छेद 51A(h) वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानववाद के विकास को नागरिक कर्तव्य बनाता है। वयस्क साक्षरता इन्हीं आदर्शों का विस्तार मानी जा सकती है।
- डिजिटल ठगी के मामलों में नागरिक की सतर्कता के साथ-साथ संस्थागत तंत्र (I4C, साइबर अपराध पोर्टल, बैंकिंग शिकायत निवारण) की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। जीवन साक्षरता इन तंत्रों के प्रभावी उपयोग की क्षमता भी देती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| औपचारिक शिक्षा बनाम जीवन-साक्षरता | डिग्री होने से यह सुनिश्चित नहीं होता कि व्यक्ति वित्तीय, स्वास्थ्य, विधिक और AI संबंधी व्यावहारिक निर्णय सही ले सकता है। शिक्षा का परिणाम और व्यावहारिक योग्यता अलग-अलग मापे जाने चाहिए। |
| चार प्रमुख जीवन-साक्षरताएँ | वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy), विधिक साक्षरता (Legal Literacy), स्वास्थ्य साक्षरता (Health Literacy) और AI साक्षरता (AI Literacy) दैनिक जीवन की सुरक्षा और निर्णय-क्षमता का आधार हैं। |
| स्वास्थ्य साक्षरता और उपचार-पालन | बेंगलुरु के एक निजी दंत चिकित्सालय के 500 वयस्कों के सर्वेक्षण में लगभग छह में से चार बाह्य-रोगी (Out-patients) की स्वास्थ्य साक्षरता कम पाई गई। अधिक साक्षरता वाले रोगी निर्धारित दवाओं का पालन अधिक करते हैं। |
| डिजिटल गिरफ़्तारी (Digital Arrest) जैसी साइबर धोखाधड़ी | पुलिस की वर्दी में वीडियो कॉल कर भय उत्पन्न करना और तुरंत धन-हस्तांतरण करवाना, यह दर्शाता है कि सामान्य सतर्कता और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी का अभाव कितना घातक हो सकता है। |
| वित्तीय डेरिवेटिव (Financial Derivatives) में जोखिम की समझ | प्रारंभिक लाभ से प्रेरित होकर जोखिम भरे व्यापार में उतरना और भारी हानि उठाना, निवेश से पहले जोखिम-प्रबंधन की समझ के महत्त्व को रेखांकित करता है। |
| AI उपकरणों का सत्यापन | ChatGPT जैसे उपकरणों से प्राप्त सामग्री में तथ्यात्मक त्रुटियाँ हो सकती हैं। AI की क्षमता, सीमा और उसके आउटपुट के सत्यापन की समझ आवश्यक है। |
महत्व
आर्थिक
- वित्तीय साक्षरता की कमी से साइबर धोखाधड़ी और अनुचित निवेश से परिवारों की बचत सीधे नष्ट होती है, जिससे घरेलू बचत और पेंशन-आधारित सुरक्षा कमजोर होती है।
- निवेश-साक्षरता बढ़ने से बाज़ार में सूचित भागीदारी बढ़ती है और जोखिम-आधारित हानियों में कमी आती है।
स्वास्थ्य
- स्वास्थ्य साक्षरता अधिक होने पर रोगी निर्धारित उपचार का बेहतर पालन करते हैं, जिससे रोग-प्रबंधन और चिकित्सा-परिणाम सुधरते हैं।
- स्वास्थ्य सम्बन्धी भ्रामक संदेशों के कारण आवश्यक जाँच टलने से रोग देर से पकड़ में आता है, इसलिए प्रामाणिक जानकारी का प्रसार आवश्यक है।
सामाजिक और विधिक
- विधिक साक्षरता नागरिकों को अपने अधिकारों और ठगी की प्रक्रिया की पहचान में सक्षम बनाती है, जिससे न्याय तक पहुँच आसान होती है।
- औपचारिक शिक्षा और व्यावहारिक ज्ञान के बीच का अंतर सामाजिक समानता के प्रश्न से भी जुड़ता है, क्योंकि डिजिटल ठगी का सबसे अधिक शिकार वे लोग होते हैं जिनके पास सुरक्षा-उपायों की जानकारी नहीं होती।
शासन और नीति
- जीवन-साक्षरता को पाठ्यक्रम में शामिल करने से शिक्षा-नीति का लक्ष्य केवल रोज़गार-योग्यता तक सीमित न रहकर नागरिक-योग्यता तक विस्तृत होता है।
- AI के उपयोग में नैतिक और सत्यापन-आधारित दृष्टिकोण विकसित करना डिजिटल शासन की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. सॉफ्ट स्किल्स और जीवन-साक्षरता में भ्रम
- अधिकांश महाविद्यालयों में जीवन-कौशल (Life Skills) का अर्थ संचार, टीमवर्क और साक्षात्कार-तैयारी तक सीमित कर दिया गया है।
- सॉफ्ट स्किल्स रोज़गार में सहायक हो सकते हैं, परंतु वे वित्तीय, स्वास्थ्य और विधिक निर्णयों के लिए आवश्यक ज्ञान का विकल्प नहीं हैं।
यूपीएससी लिंक: GS2: शिक्षा और मानव संसाधन विकास से सम्बन्धित विषय
2. साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा
- डिजिटल गिरफ़्तारी जैसे छल में अपराधी वर्दी, भय और तात्कालिकता का प्रयोग कर पीड़ित को सोचने का अवसर नहीं देते।
- पेंशन और बचत जैसे संवेदनशील धन का त्वरित हस्तांतरण पुनर्प्राप्ति को कठिन बना देता है।
यूपीएससी लिंक: GS3: आंतरिक सुरक्षा, साइबर अपराध और उनसे निपटने की चुनौतियाँ
3. स्वास्थ्य सम्बन्धी भ्रांतियाँ और कम स्वास्थ्य साक्षरता
- सोशल मीडिया पर फैलने वाले अप्रमाणित संदेशों से चिकित्सीय जाँच को लेकर भय उत्पन्न होता है।
- कम स्वास्थ्य साक्षरता से दवाओं का अनियमित सेवन और अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता पहचानने में विलंब होता है।
यूपीएससी लिंक: GS2: स्वास्थ्य क्षेत्र से सम्बन्धित सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
4. AI के सत्यापन में कमी
- AI उपकरणों से प्राप्त सामग्री प्रायः आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत होती है, जबकि उसमें तथ्यात्मक त्रुटियाँ हो सकती हैं।
- छात्रों द्वारा बिना सत्यापन के AI-आधारित कार्य प्रस्तुत करने से शैक्षिक ईमानदारी और ज्ञान-निर्माण दोनों प्रभावित होते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास तथा उसके नैतिक पक्ष
5. वित्तीय निवेश में जोखिम की अनदेखी
- प्रारंभिक लाभ से प्रेरित होकर व्यक्ति वित्तीय डेरिवेटिव जैसे जटिल उत्पादों में बिना पर्याप्त समझ के निवेश कर बैठता है।
- जोखिम-प्रबंधन और निवेश-नियमों की जानकारी के बिना हानि की संभावना बढ़ जाती है।
यूपीएससी लिंक: GS3: भारतीय अर्थव्यवस्था, वित्तीय बाज़ार और उनका नियमन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| शिक्षा-प्रणाली का केंद्र | डिग्री और रोज़गार-योग्यता पर बल, जबकि जीवन-साक्षरता पाठ्यक्रम में व्यवस्थित रूप से शामिल नहीं है। |
| स्वास्थ्य संचार | प्रामाणिक चिकित्सीय जानकारी सरल भाषा में पहुँचाने में कमी, जिससे अफवाहें अधिक प्रभावी होती हैं। |
| साइबर अपराध का स्वरूप | अपराधी तकनीक और सामाजिक मनोविज्ञान दोनों का प्रयोग करते हैं, इसलिए पारंपरिक सावधानी पर्याप्त नहीं रहती। |
| AI का अनियंत्रित उपयोग | AI आउटपुट की सत्यता जाँचने की क्षमता न होने से शैक्षिक और व्यावसायिक निर्णयों में त्रुटि की संभावना बढ़ती है। |
| निवेश-जोखिम की समझ | जटिल वित्तीय उत्पादों के जोखिम की जानकारी के अभाव में परिवार बचत का अनुचित उपयोग कर बैठते हैं। |
आगे की राह
- जीवन-साक्षरता (वित्तीय, स्वास्थ्य, विधिक और AI) को उच्च शिक्षा के सामान्य पाठ्यक्रम में अनिवार्य या वैकल्पिक मॉड्यूल के रूप में शामिल किया जाए।
- सॉफ्ट स्किल्स और जीवन-साक्षरता को अलग-अलग अवधारणाओं के रूप में पहचाना जाए, ताकि दोनों का समुचित विकास हो।
- साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal) और हेल्पलाइन 1930 की जानकारी व्यापक रूप से प्रसारित की जाए।
- स्थानीय भाषाओं में सरल और प्रामाणिक स्वास्थ्य-साक्षरता सामग्री तैयार की जाए, ताकि रोगी उपचार-निर्देशों को समझकर उनका पालन कर सकें।
- सरकारी और निजी वित्तीय संस्थाएँ निवेश-उत्पादों के जोखिम को सरल भाषा में स्पष्ट करें और ग्राहकों के लिए जागरूकता-कार्यक्रम चलाएँ।
- AI उपकरणों के उपयोग में सत्यापन, स्रोत-जाँच और नैतिक उपयोग के दिशानिर्देश शैक्षणिक संस्थानों द्वारा विकसित किए जाएँ।
- वयस्कों के लिए सतत जीवन-शिक्षा के अवसर बनाए जाएँ, क्योंकि जीवन-साक्षरता केवल स्कूल या कॉलेज तक सीमित कौशल नहीं है।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वास्थ्य साक्षरता · वित्तीय साक्षरता · डिजिटल साक्षरता · कृत्रिम बुद्धिमत्ता साक्षरता · जीवन कौशल · शिक्षा प्रणाली · जन जागरूकता · नीतिगत हस्तक्षेप · सामाजिक-आर्थिक विकास · नागरिक सशक्तिकरण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन से सम्बन्ध
- अनुच्छेद 47: जन-स्वास्थ्य सुधार का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 51A(h): वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक चिंतन का विकास
अवधारणा प्रवाह
औपचारिक शिक्षा पर बल, परंतु जीवन-साक्षरता (वित्तीय, स्वास्थ्य, विधिक, AI) का व्यवस्थित प्रशिक्षण अनुपस्थित → व्यक्ति भ्रामक संदेश, भय या लाभ के लालच के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है → साइबर धोखाधड़ी, अनुचित निवेश, टली हुई चिकित्सीय जाँच और AI आउटपुट के बिना सत्यापन जैसे निर्णय-दोष उत्पन्न होते हैं → परिवार की बचत नष्ट होती है, रोग गंभीर होता है और शैक्षिक ईमानदारी प्रभावित होती है → सामाजिक-आर्थिक क्षति से बचने के लिए जीवन-साक्षरता को शिक्षा-नीति, सार्वजनिक जागरूकता और नियामकीय संस्थाओं के समन्वय से सुदृढ़ करना आवश्यक हो जाता है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वास्थ्य साक्षरता का अर्थ केवल रोगों के उपचार की जानकारी होना है।
2. वित्तीय साक्षरता व्यक्तियों को अपने धन का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने में मदद करती है।
3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) साक्षरता AI उपकरणों के उपयोग और उनकी सीमाओं को समझने से संबंधित है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि स्वास्थ्य साक्षरता में केवल उपचार ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य को बनाए रखने, बीमारियों को रोकने और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने की व्यापक समझ शामिल है। कथन 2 सही है, वित्तीय साक्षरता व्यक्तियों को बचत, निवेश और ऋण प्रबंधन जैसे वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। कथन 3 भी सही है, AI साक्षरता AI-जनित जानकारी की विश्वसनीयता का आकलन करने और AI के नैतिक निहितार्थों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Q2. अभिकथन (A): आधुनिक शिक्षा प्रणाली अक्सर छात्रों को ‘जीवन कौशल’ प्रदान करने में विफल रहती है जो दैनिक जीवन के लिए आवश्यक होते हैं।
कारण (R): अधिकांश भारतीय कॉलेजों में ‘जीवन कौशल’ को केवल सॉफ्ट स्किल्स (जैसे संचार और टीम वर्क) के पर्याय के रूप में देखा जाता है, न कि स्वास्थ्य, वित्तीय या AI साक्षरता के रूप में।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि डिग्री प्राप्त करने के बावजूद लोग आवश्यक जीवन साक्षरता में कमी महसूस करते हैं। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि यह बताता है कि ‘जीवन कौशल’ की संकीर्ण परिभाषा ही इस कमी का मूल कारण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि व्यक्तियों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक ‘जीवन साक्षरता’ से भी लैस करना है। इस कथन के आलोक में, भारत में स्वास्थ्य, वित्तीय और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) साक्षरता की वर्तमान स्थिति का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए और इन्हें सुधारने हेतु नीतिगत उपायों का सुझाव दीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में शिक्षा के व्यापक उद्देश्य और ‘जीवन साक्षरता’ के महत्व को संक्षेप में बताएं। मुख्य भाग में, भारत में स्वास्थ्य, वित्तीय और AI साक्षरता की वर्तमान स्थिति का आलोचनात्मक विश्लेषण करें, जिसमें कमी के कारणों और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर प्रकाश डाला जाए। इसमें हालिया सर्वेक्षणों या रिपोर्टों (जैसे बेंगलुरु में निजी डेंटल अस्पताल का सर्वेक्षण) का उल्लेख किया जा सकता है। इसके बाद, इन साक्षरताओं को सुधारने के लिए ठोस नीतिगत उपाय सुझाएं, जिनमें पाठ्यक्रम में बदलाव, जन जागरूकता अभियान, डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग, सरकारी योजनाओं का एकीकरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी शामिल हो सकती है। निष्कर्ष में, इन साक्षरताओं के महत्व को दोहराते हुए एक सशक्त और समावेशी समाज के निर्माण में इनकी भूमिका पर बल दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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