09 Oct तमिलनाडु में सड़क सुरक्षा मिशन: नीति और कार्यान्वयन का महत्व

✎ तमिलनाडु का 'मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा मिशन' एक समन्वित और प्रौद्योगिकी-संचालित दृष्टिकोण के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जो विभिन्न हितधारकों को एक साझा मंच पर लाता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से उत्पन्न विषय | GS Paper III — आपदा प्रबंधन
- Prelims: सड़क सुरक्षा, मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा मिशन, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), एएनपीआर कैमरे, सेफ सिस्टम एप्रोच, दुर्घटना-प्रवण स्थान
- Essay: भारत में सड़क सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान, मिशन-मोड दृष्टिकोण: सार्वजनिक नीति के कार्यान्वयन में प्रभावशीलता
त्वरित पुनरावृत्ति: तमिलनाडु का ‘मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा मिशन’ एक समन्वित और प्रौद्योगिकी-संचालित दृष्टिकोण के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जो विभिन्न हितधारकों को एक साझा मंच पर लाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, तमिलनाडु सरकार ने विधानसभा में ‘मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा मिशन’ की घोषणा की है, जिसके लिए प्रति वर्ष लगभग ₹500 करोड़ का वार्षिक आवंटन प्रस्तावित है। यह घोषणा सड़क सुरक्षा प्रयासों को मजबूत करने और विभिन्न हितधारकों को एक साझा मंच पर लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती है। यह कदम सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर आया है, जिसने देश भर में, विशेषकर तमिलनाडु में, गंभीर चिंताएँ उत्पन्न की हैं।
पृष्ठभूमि
- सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी 2024 के आँकड़ों के अनुसार, देश भर में 4,87,707 सड़क दुर्घटनाएँ और 1,77,175 मौतें दर्ज की गईं।
- इन आँकड़ों में, तमिलनाडु में 67,526 दुर्घटनाएँ और 18,449 मौतें दर्ज की गईं, जो सभी राज्यों में सड़क दुर्घटनाओं की उच्चतम संख्या है।
- सड़क सुरक्षा के लिए एक समन्वित और निरंतर प्रतिक्रिया की आवश्यकता है, जिसे अक्सर ‘मिशन-मोड’ दृष्टिकोण के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है, जैसा कि जटिल सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में देखा गया है।
- सड़क सुरक्षा नेटवर्क के सदस्य के रूप में सिटीजन कंज्यूमर एंड सिविक एक्शन ग्रुप (CAG) ने पहले राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा के साथ एक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा मिशन की आवश्यकता पर चर्चा की थी, जिसे बाद में संसद में उठाया गया।
- वर्तमान में, तमिलनाडु में सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर कई संस्थाएँ, समितियाँ और पहलें कार्यरत हैं, जिनमें परिवहन, पुलिस, राजमार्ग/लोक निर्माण विभाग (PWD), स्वास्थ्य और शहरी विकास विभाग शामिल हैं।
- इन प्रयासों को एक सामान्य ढाँचे के तहत लाना, राजनीतिक स्वामित्व, साझा लक्ष्य, स्पष्ट विभागीय जवाबदेही, निरंतर वित्तपोषण और नियमित समीक्षा के साथ, मिशन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा मिशन (तमिलनाडु) क्या है?
- यह तमिलनाडु सरकार द्वारा घोषित एक पहल है जिसका उद्देश्य राज्य में सड़क सुरक्षा प्रयासों को मजबूत करना और एकीकृत करना है।
- मिशन के लिए प्रति वर्ष लगभग ₹500 करोड़ का वार्षिक आवंटन प्रस्तावित है, जो इसके कार्यान्वयन के लिए समर्पित संसाधनों को सुनिश्चित करेगा।
- घोषित उपायों में प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रवर्तन शामिल है, जैसे कि स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (ANPR) कैमरों का उपयोग।
- आपातकालीन प्रतिक्रिया को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का उन्नयन और उन्हें दुर्घटना-प्रवण स्थानों से जोड़ना शामिल है।
- मिशन का मुख्य मूल्य विभिन्न मौजूदा प्रयासों को एक सामान्य ढाँचे के तहत लाना है, जिसमें राजनीतिक स्वामित्व, साझा लक्ष्य और स्पष्ट विभागीय जवाबदेही होगी।
- यह मिशन राज्य भर में ‘सेफ सिस्टम एप्रोच’ (Safe System Approach) को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करेगा, जिसमें गति प्रबंधन, सुरक्षित सड़क अवसंरचना और वाहन, कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं और बच्चों की सुरक्षा, प्रभावी प्रवर्तन, और दुर्घटना के बाद की देखभाल शामिल है।
- विभागों की समीक्षा केवल की गई गतिविधियों के आधार पर नहीं, बल्कि मौतों और गंभीर चोटों को कम करने में प्राप्त मापने योग्य परिणामों के आधार पर की जाएगी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मिशन-मोड दृष्टिकोण | सड़क सुरक्षा चुनौतियों के लिए समन्वित और निरंतर प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है, जिससे पृथक हस्तक्षेपों की तुलना में अधिक प्रभावी परिणाम मिलते हैं। |
| ₹500 करोड़ का वार्षिक आवंटन | सड़क सुरक्षा पहलों के लिए समर्पित और पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराता है, जिससे दीर्घकालिक योजनाओं का क्रियान्वयन संभव होता है। |
| प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रवर्तन | ANPR कैमरों जैसी तकनीकों का उपयोग करके यातायात नियमों के प्रवर्तन को मजबूत करता है, जिससे उल्लंघन कम होते हैं और सुरक्षा बढ़ती है। |
| आपातकालीन प्रतिक्रिया का सुदृढ़ीकरण | सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को उन्नत करके और उन्हें दुर्घटना-संभावित स्थानों से जोड़कर दुर्घटना के बाद की देखभाल और प्रतिक्रिया में सुधार करता है। |
| बहु-एजेंसी समन्वय | परिवहन, पुलिस, राजमार्ग, स्वास्थ्य और शहरी विकास जैसे विभिन्न विभागों को एक साझा ढांचे के तहत लाता है, जिससे एकीकृत प्रयास सुनिश्चित होते हैं। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करके मानव जीवन की रक्षा करता है।
- दुर्घटनाओं के कारण होने वाले सामाजिक-आर्थिक बोझ को कम करता है, जिसमें चिकित्सा व्यय, उत्पादकता का नुकसान और भावनात्मक आघात शामिल हैं।
- नागरिकों के लिए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है।
प्रशासनिक महत्व
- विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय और जवाबदेही को बढ़ाता है, जिससे शासन की दक्षता में सुधार होता है।
- सड़क सुरक्षा के लिए एक व्यापक और एकीकृत नीतिगत ढांचा प्रदान करता है, जिससे अलग-थलग प्रयासों से बचा जा सकता है।
- मापनीय लक्ष्यों और नियमित समीक्षा के माध्यम से कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन और परिणामों की निगरानी सुनिश्चित करता है।
आर्थिक महत्व
- सड़क दुर्घटनाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान (जैसे संपत्ति का नुकसान, चिकित्सा लागत, कार्य दिवसों का नुकसान) को कम करता है।
- सुरक्षित सड़कें व्यापार और वाणिज्य के लिए बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करती हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
- स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों पर दुर्घटनाओं के बोझ को कम करता है, जिससे संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग होता है।
चुनौतियाँ
1. उच्च दुर्घटना दर
- भारत में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या बहुत अधिक है, तमिलनाडु में भी यह चुनौती गंभीर है।
- यह न केवल मानवीय त्रासदी का कारण बनता है बल्कि स्वास्थ्य सेवा और अर्थव्यवस्था पर भी भारी बोझ डालता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, आपदा प्रबंधन
2. बहु-एजेंसी समन्वय का अभाव
- सड़क सुरक्षा कई विभागों (परिवहन, पुलिस, राजमार्ग, स्वास्थ्य) के दायरे में आती है, जिससे अक्सर समन्वय की कमी होती है।
- यह एकीकृत दृष्टिकोण के अभाव में प्रयासों को खंडित कर देता है और प्रभावशीलता को कम करता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, लोक प्रशासन
3. सीमित संसाधन और प्रवर्तन
- सड़क सुरक्षा पहलों के लिए अक्सर समर्पित संसाधनों और प्रभावी प्रवर्तन तंत्र की कमी होती है।
- प्रौद्योगिकी-आधारित प्रवर्तन और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों के उन्नयन की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
4. डेटा-आधारित निगरानी और जवाबदेही
- केवल गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, सड़क दुर्घटनाओं में कमी जैसे मापनीय परिणामों पर विभागों की जवाबदेही तय करना महत्वपूर्ण है।
- प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन प्रणालियों का अभाव प्रगति को बाधित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, डेटा शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सड़क दुर्घटनाओं की उच्च संख्या | मानव जीवन की हानि, गंभीर चोटें और सामाजिक-आर्थिक बोझ। |
| विभागों के बीच समन्वय की कमी | सड़क सुरक्षा प्रयासों का खंडित होना और प्रभावशीलता में कमी। |
| प्रवर्तन में चुनौतियाँ | यातायात नियमों के उल्लंघन को रोकने और सुरक्षित ड्राइविंग आदतों को बढ़ावा देने में कठिनाई। |
| आपातकालीन प्रतिक्रिया की गुणवत्ता | दुर्घटना के बाद की तत्काल चिकित्सा देखभाल और सहायता की अपर्याप्तता। |
| बुनियादी ढांचे की सुरक्षा | सड़क डिजाइन, रखरखाव और कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षा उपायों में कमियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा मिशन (Chief Minister’s Road Safety Mission)
आगे की राह
- सड़क सुरक्षा के लिए एक व्यापक राज्य कार्य योजना (State Road Safety Action Plan) विकसित की जाए, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य और समय-सीमा हों।
- विभिन्न हितधारकों (परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी) के बीच प्रभावी समन्वय और साझा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा स्थापित किया जाए।
- ANPR कैमरों और अन्य स्मार्ट प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके यातायात नियमों के प्रवर्तन को मजबूत किया जाए।
- दुर्घटना-संभावित स्थानों की पहचान कर आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों (जैसे सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का उन्नयन और लिंकेज) को सुदृढ़ किया जाए।
- सड़क सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता अभियानों को बढ़ावा दिया जाए, विशेषकर कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं और बच्चों के लिए।
- सड़क डिजाइन और बुनियादी ढांचे में सुधार किया जाए, जिसमें सुरक्षित गति प्रबंधन, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित स्थान शामिल हों।
- विभागों की समीक्षा केवल गतिविधियों के आधार पर नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं में कमी जैसे मापनीय परिणामों के आधार पर की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सड़क सुरक्षा · मिशन मोड · बहु-एजेंसी समन्वय · तमिलनाडु सड़क सुरक्षा मिशन · सड़क दुर्घटनाएँ · मृत्यु दर · प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रवर्तन · आपातकालीन प्रतिक्रिया · सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण · सतत निगरानी · राजमार्ग विभाग · स्वास्थ्य विभाग
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘राज्य सूची के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 254’, ‘note’: ‘संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति’}
अवधारणा प्रवाह
उच्च सड़क दुर्घटनाएँ और मौतें → समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता → मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा मिशन की घोषणा → प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रवर्तन और आपातकालीन प्रतिक्रिया → बहु-एजेंसी समन्वय और साझा लक्ष्य → दुर्घटनाओं और मौतों में कमी
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में देश में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है।
2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का उद्देश्य सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रवर्तन को बढ़ावा देना है।
3. सड़क सुरक्षा पहल के लिए परिवहन, पुलिस, राजमार्ग/लोक निर्माण विभाग (PWD) और स्वास्थ्य जैसे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि MoRTH के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में 67,526 दुर्घटनाएँ दर्ज की गईं, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का संबंध हरित हाइड्रोजन उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने से है, न कि सड़क सुरक्षा से। सड़क सुरक्षा में प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रवर्तन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा मिशन जैसी पहल हैं। कथन 3 सही है क्योंकि सड़क सुरक्षा एक बहु-क्षेत्रीय मुद्दा है जिसके लिए कई विभागों के समन्वय की आवश्यकता होती है।
Q2. मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह तमिलनाडु सरकार द्वारा ₹500 करोड़ के वार्षिक आवंटन के साथ शुरू किया गया है।
2. इसका उद्देश्य केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया को मजबूत करना है और इसमें प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रवर्तन शामिल नहीं है।
3. यह मौजूदा सड़क सुरक्षा प्रयासों को एक सामान्य ढांचे के तहत लाने और राजनीतिक स्वामित्व, साझा लक्ष्यों और स्पष्ट विभागीय जवाबदेही के साथ एकीकृत करने का प्रयास करता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि तमिलनाडु सरकार ने विधानसभा में मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा मिशन की घोषणा की है, जिसमें प्रति वर्ष लगभग ₹500 करोड़ का वार्षिक आवंटन किया गया है। कथन 2 गलत है क्योंकि मिशन में प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रवर्तन (जैसे ANPR कैमरे) और आपातकालीन प्रतिक्रिया दोनों शामिल हैं। कथन 3 सही है क्योंकि मिशन का मूल्य मौजूदा प्रयासों को एक सामान्य ढांचे के तहत लाना, राजनीतिक स्वामित्व, साझा लक्ष्यों और स्पष्ट विभागीय जवाबदेही के साथ एकीकृत करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सड़क सुरक्षा संकट की गंभीरता पर चर्चा कीजिए और तमिलनाडु सरकार द्वारा शुरू किए गए मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा मिशन जैसे ‘मिशन-मोड’ दृष्टिकोण की आवश्यकता का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत में सड़क सुरक्षा संकट की वर्तमान स्थिति और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर प्रकाश डालिए। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के नवीनतम आंकड़ों का उल्लेख कीजिए, जिसमें दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या शामिल हो।
मुख्य भाग:
1. सड़क सुरक्षा संकट की गंभीरता: भारत में सड़क दुर्घटनाओं की उच्च दर, मृत्यु दर और गंभीर चोटों पर चर्चा कीजिए। तमिलनाडु जैसे राज्यों में स्थिति की भयावहता को उजागर कीजिए। इसके कारणों में खराब सड़क अवसंरचना, यातायात नियमों का उल्लंघन, वाहनों की सुरक्षा में कमी और अपर्याप्त आपातकालीन प्रतिक्रिया शामिल हो सकते हैं।
2. ‘मिशन-मोड’ दृष्टिकोण की आवश्यकता: समझाइए कि क्यों सड़क सुरक्षा के लिए एक ‘मिशन-मोड’ दृष्टिकोण आवश्यक है। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हो सकते हैं:
* सतत ध्यान और बहु-एजेंसी समन्वय: यह कैसे विभिन्न विभागों (परिवहन, पुलिस, राजमार्ग, स्वास्थ्य, शहरी विकास) को एक साथ लाता है।
* समर्पित संसाधन और मापनीय लक्ष्य: विशिष्ट वित्तीय आवंटन (जैसे तमिलनाडु के लिए ₹500 करोड़) और स्पष्ट, मापनीय लक्ष्यों का महत्व।
* निरंतर निगरानी और जवाबदेही: गतिविधियों के बजाय परिणामों (मृत्यु दर और गंभीर चोटों में कमी) पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता।
* व्यापक कार्य योजना: एक सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण (Safe System approach) को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है, जिसमें गति प्रबंधन, सुरक्षित सड़क अवसंरचना, सुरक्षित वाहन, कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और दुर्घटना के बाद की देखभाल शामिल है।
3. मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा मिशन का आलोचनात्मक परीक्षण:
* सकारात्मक पहलू: मिशन के घोषित उपायों (ANPR कैमरे, आपातकालीन प्रतिक्रिया को मजबूत करना, स्वास्थ्य सुविधाओं का उन्नयन) और इसके संभावित लाभों का विश्लेषण कीजिए। यह कैसे मौजूदा प्रयासों को एकीकृत कर सकता है और राजनीतिक स्वामित्व प्रदान कर सकता है।
* चुनौतियाँ और सीमाएँ: मिशन के सफल कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों पर चर्चा कीजिए, जैसे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी, धन का प्रभावी उपयोग, डेटा संग्रह और विश्लेषण की गुणवत्ता, और सार्वजनिक जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता।
निष्कर्ष: सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए ‘मिशन-मोड’ दृष्टिकोण के महत्व को दोहराइए और इसके सफल कार्यान्वयन के लिए एक समग्र और एकीकृत रणनीति की आवश्यकता पर बल दीजिए।
स्रोत: The Hindu
Tamil Nadu PCS (TNPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: तमिलनाडु में ‘सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा’ (Road Safety Life Saving) मिशन के अंतर्गत हाल ही में शुरू किए गए प्रमुख उपायों में से एक कौन सा है?
- A. राज्यव्यापी ‘सड़क सुरक्षा सप्ताह’ का आयोजन
- B. ‘सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा’ मोबाइल ऐप का शुभारंभ
- C. सभी जिलों में ‘सड़क सुरक्षा क्लब’ की स्थापना
- D. राष्ट्रीय राजमार्गों पर ‘गति सीमा 120 किमी/घंटा’ लागू करना
उत्तर: B. ‘सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा’ मोबाइल ऐप का शुभारंभ — तमिलनाडु सरकार द्वारा ‘सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा’ मिशन के तहत ‘सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा’ मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है, जिससे आम नागरिक सड़क दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग और सुरक्षा सुझाव देने में सक्षम होंगे।
Mains: तमिलनाडु में ‘सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा’ मिशन के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए, राज्य सरकार द्वारा अपनाई जा रही रणनीतियों का मूल्यांकन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- मध्य प्रदेश में 3800 करोड़ की मैक्केन फूड परियोजना: 2000 रोज़गार सृजन - October 9, 2026
- NTA Reforms: Parliamentary Panel’s 382nd Report Key Recommendations - October 9, 2026
- आंध्र प्रदेश के पीएम स्मृति चिन्ह: सांस्कृतिक विरासत से राष्ट्रीय उद्देश्य तक - October 9, 2026

No Comments