AI युग में शासन बदलाव की जरूरत: अगले 20 साल भारत के लिए महत्वपूर्ण- चंद्रबabu नायडू

AI युग में शासन बदलाव की जरूरत: अगले 20 साल भारत के लिए महत्वपूर्ण- चंद्रबabu नायडू

AI युग में शासन बदलाव की जरूरत: अगले 20 साल भारत के लिए महत्वपूर्ण- चंद्रबabu नायडू

✎ मिशन कर्मयोगी सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जो iGOT प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे आधुनिक युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा संस्थागत एवं अन्य उपाय।  |  GS Paper IV — लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नैतिकता: स्थिति तथा समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोत के रूप में विधि, नियम, विनियम तथा अंतरात्मा; जवाबदेही तथा नैतिक शासन; शासन में नैतिक तथा मानवीय मूल्य—मजबूत नैतिक लोकाचार, शासन में ईमानदारी, लोक सेवा की अवधारणा; शासन में दार्शनिक आधार-क्षमता निर्माण।
  • Prelims: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ई-गवर्नेंस, मिशन कर्मयोगी, क्षमता निर्माण आयोग, iGOT प्लेटफॉर्म, सिविल सेवा सुधार, शासन में नवाचार
  • Essay: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में भारत का शासन: चुनौतियाँ और अवसर, 21वीं सदी में सिविल सेवाओं का आधुनिकीकरण: मिशन कर्मयोगी की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन कर्मयोगी सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जो iGOT प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे आधुनिक युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विजयवाड़ा में क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) द्वारा आयोजित एक मिशन कर्मयोगी कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) के युग में भारत की शासन प्रणालियों को लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने अगले 20 वर्षों को देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया और शासन में क्रांतिकारी परिवर्तनों पर जोर दिया।

पृष्ठभूमि

  • मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों, एक बड़ी युवा आबादी और बढ़ती आकांक्षाओं के साथ अपार अवसर हैं।
  • उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शासन प्रणालियाँ और संस्थाएँ इन आकांक्षाओं पर कितनी प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देती हैं, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
  • केंद्र सरकार ने इसी उद्देश्य के साथ क्षमता निर्माण आयोग के माध्यम से iGOT-मिशन कर्मयोगी कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका लक्ष्य सरकारी कर्मचारियों के कौशल को लगातार उन्नत करना है।
  • उन्होंने कहा कि राज्य स्तर से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक के अधिकारियों और कर्मचारियों को सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए नियमित प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
  • उन्होंने भारत को भी अपनी क्षमताओं का पूर्ण उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया।

मिशन कर्मयोगी क्या है?

  • मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi) भारत सरकार का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण करना है। इसे ‘सिविल सेवा क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम’ (National Programme for Civil Services Capacity Building – NPCSCB) के रूप में भी जाना जाता है।
  • इसका मुख्य लक्ष्य सरकारी कर्मचारियों को भविष्य के लिए तैयार करना और उन्हें अधिक रचनात्मक, कल्पनाशील, सक्रिय, प्रगतिशील, पेशेवर, ऊर्जावान, परिवर्तनकारी और सक्षम बनाना है।
  • यह कार्यक्रम ‘नियम-आधारित’ से ‘भूमिका-आधारित’ मानव संसाधन प्रबंधन में बदलाव लाने पर केंद्रित है, जिससे सिविल सेवकों को उनकी भूमिकाओं के अनुरूप कौशल, ज्ञान और दृष्टिकोण से लैस किया जा सके।
  • मिशन कर्मयोगी एक एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण (iGOT) कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जो सिविल सेवकों के लिए एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म है। यह उन्हें विभिन्न डोमेन-विशिष्ट और व्यवहारिक दक्षताओं में प्रशिक्षण प्रदान करता है।
  • क्षमता निर्माण आयोग इस मिशन के कार्यान्वयन के लिए एक केंद्रीय नियामक निकाय के रूप में कार्य करता है, जो सभी सरकारी विभागों में क्षमता निर्माण योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन करता है।
  • यह कार्यक्रम सिविल सेवाओं में निरंतर सीखने, कौशल उन्नयन और प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का प्रयास करता है, जिससे सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार हो सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का युग शासन प्रणालियों में क्रांतिकारी परिवर्तन की आवश्यकता, दक्षता और जन-केंद्रित सेवाओं में वृद्धि।
अगले 20 वर्ष भारत के विकास के लिए निर्णायक अवधि, तीव्र आर्थिक संवृद्धि और वैश्विक नेतृत्व के अवसर।
युवा जनसंख्या और बढ़ती आकांक्षाएँ तकनीकी प्रगति को अपनाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल जनसांख्यिकीय लाभांश।
अनावश्यक विनियमन हटाना नवाचार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार।
सरकारी कर्मचारियों का निरंतर प्रशिक्षण मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोक सेवकों की क्षमता निर्माण और कौशल उन्नयन।
क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) लोक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण हेतु एक केंद्रीय संस्था।

महत्व

शासन और लोक सेवाएँ

  • AI-संचालित शासन से सेवाओं की डिलीवरी में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ेगी।
  • लोक सेवकों के निरंतर कौशल उन्नयन से बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशासन को ढालने में मदद मिलेगी।
  • अनावश्यक नियमों को हटाने से नौकरशाही बाधाएँ कम होंगी और नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा मिलेगा।

आर्थिक संवृद्धि और विकास

  • AI और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने से उत्पादकता बढ़ेगी और भारत की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
  • अगले दो दशकों में भारत की विकास यात्रा वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में महत्वपूर्ण होगी।
  • चीन के आर्थिक परिवर्तन से सीख लेकर भारत अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर सकता है।

मानव संसाधन विकास

  • मिशन कर्मयोगी जैसे कार्यक्रम सरकारी कर्मचारियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे।
  • युवा जनसंख्या को कौशल प्रदान करने से उन्हें AI युग में रोजगार के अवसर मिलेंगे।
  • क्षमता निर्माण से लोक सेवकों की कार्यकुशलता बढ़ेगी, जिससे बेहतर नीति निर्माण और कार्यान्वयन होगा।

तकनीकी अनुकूलन और नवाचार

  • AI को शासन में एकीकृत करने से निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार होगा और डेटा-आधारित नीतियाँ बनेंगी।
  • भारत के पास उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने और नवाचार के लिए विशाल अवसर हैं।
  • तकनीकी प्रगति को अपनाने से भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकता है।

चुनौतियाँ

1. डिजिटल डिवाइड और समावेशिता

  • AI-आधारित शासन प्रणालियों तक सभी नागरिकों की समान पहुँच सुनिश्चित करना एक चुनौती है, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में।
  • तकनीकी साक्षरता की कमी से कुछ वर्ग AI-संचालित सेवाओं का लाभ उठाने में पीछे रह सकते हैं।

2. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

  • AI प्रणालियों द्वारा बड़ी मात्रा में डेटा के उपयोग से नागरिकों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
  • साइबर हमलों और डेटा उल्लंघनों से बचाव के लिए मजबूत सुरक्षा ढाँचे की आवश्यकता है।

3. लोक सेवकों का कौशल उन्नयन

  • सरकारी कर्मचारियों को AI और नई तकनीकों के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना एक बड़ी और निरंतर प्रक्रिया है।
  • बदलते तकनीकी परिदृश्य के साथ तालमेल बिठाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नियमित रूप से अद्यतन करना होगा।

4. नियामक ढाँचा और नैतिक मुद्दे

  • AI के उपयोग के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी नियामक ढाँचा विकसित करना महत्वपूर्ण है, जिसमें नैतिक दिशानिर्देश भी शामिल हों।
  • AI में पूर्वाग्रह (bias) और जवाबदेही जैसे नैतिक मुद्दों का समाधान करना आवश्यक है।

5. बुनियादी ढाँचा और निवेश

  • AI-आधारित शासन प्रणालियों को लागू करने के लिए मजबूत डिजिटल बुनियादी ढाँचे और पर्याप्त निवेश की आवश्यकता है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों तक उच्च गति इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
तकनीकी अनुकूलन सरकारी प्रणालियों और कर्मचारियों द्वारा AI जैसी नई तकनीकों को अपनाने की गति।
विनियमन का बोझ अनावश्यक नियमों और प्रक्रियाओं का नवाचार और दक्षता पर नकारात्मक प्रभाव।
क्षमता निर्माण की निरंतरता बदलते तकनीकी परिदृश्य के साथ लोक सेवकों के कौशल को लगातार अद्यतन रखना।
डेटा शासन AI के उपयोग में डेटा गोपनीयता, सुरक्षा और नैतिक विचारों का प्रबंधन।
संस्थागत परिवर्तन शासन प्रणालियों और संस्थानों में क्रांतिकारी बदलाव लाने की आवश्यकता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi)
  • iGOT-मिशन कर्मयोगी (iGOT-Mission Karmayogi)

आगे की राह

  • AI और उभरती प्रौद्योगिकियों को शासन के सभी स्तरों पर एकीकृत करने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति विकसित करना।
  • लोक सेवकों के लिए व्यापक और निरंतर क्षमता निर्माण कार्यक्रम लागू करना, जिसमें AI और डेटा एनालिटिक्स शामिल हों।
  • शासन में अनावश्यक नियमों और प्रक्रियाओं की पहचान कर उन्हें समाप्त करना, ताकि नवाचार को बढ़ावा मिले।
  • डेटा गोपनीयता, सुरक्षा और AI नैतिकता से संबंधित एक मजबूत नियामक और कानूनी ढाँचा स्थापित करना।
  • डिजिटल बुनियादी ढाँचे में निवेश बढ़ाना, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, ताकि डिजिटल डिवाइड को कम किया जा सके।
  • नागरिकों को AI-संचालित सेवाओं का लाभ उठाने के लिए डिजिटल साक्षरता और कौशल प्रदान करना।
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए एक मंच स्थापित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 309: संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तें।
  • अनुच्छेद 312: अखिल भारतीय सेवाएँ (All India Services) – लोक सेवकों के महत्व को दर्शाता है।
  • अनुच्छेद 335: सेवाओं और पदों के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावों पर विचार।

अवधारणा प्रवाह

AI युग का आगमन  →  शासन प्रणालियों में परिवर्तन की आवश्यकता  →  लोक सेवकों का क्षमता निर्माण (मिशन कर्मयोगी)  →  अनावश्यक विनियमों का उन्मूलन  →  दक्षता और पारदर्शिता में वृद्धि  →  नागरिक-केंद्रित शासन  →  भारत का तीव्र विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता निर्माण करना है।
2. iGOT (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) प्लेटफॉर्म मिशन कर्मयोगी का एक महत्वपूर्ण घटक है।
3. क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) मिशन कर्मयोगी के कार्यान्वयन की देखरेख करता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन कर्मयोगी का प्राथमिक उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को भविष्य के लिए तैयार करना और उनकी क्षमता का निर्माण करना है। कथन 2 सही है क्योंकि iGOT प्लेटफॉर्म मिशन कर्मयोगी के तहत ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करने का मुख्य माध्यम है। कथन 3 भी सही है क्योंकि क्षमता निर्माण आयोग को मिशन कर्मयोगी के समग्र कार्यान्वयन और निगरानी के लिए स्थापित किया गया है।

Q2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में शासन में परिवर्तन के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सबसे उपयुक्त है/हैं?
1. AI को अपनाने से सरकारी प्रक्रियाओं में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ सकती है।
2. AI के कारण अनावश्यक नियमों को समाप्त करने और कर्मचारियों के निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
3. AI केवल निजी क्षेत्र के लिए प्रासंगिक है और इसका शासन पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा।

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1 और 2 दोनों — कथन 1 सही है क्योंकि AI डेटा विश्लेषण, निर्णय लेने और सेवा वितरण में सुधार करके सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक कुशल और पारदर्शी बना सकता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि AI के आगमन से पुराने नियमों को हटाने और सरकारी कर्मचारियों को नई तकनीकों के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। कथन 3 गलत है क्योंकि AI का शासन सहित सभी क्षेत्रों पर गहरा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में शासन में आवश्यक परिवर्तनों पर चर्चा कीजिए और भारत में लोक सेवा वितरण में सुधार के लिए मिशन कर्मयोगी की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते महत्व और शासन पर इसके संभावित प्रभाव का संक्षिप्त परिचय। भारत के लिए अगले 20 वर्षों के महत्व का उल्लेख।
2. **AI युग में शासन में आवश्यक परिवर्तन:**
* **डिजिटल अवसंरचना का उन्नयन:** AI-आधारित समाधानों के लिए मजबूत और सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकास।
* **डेटा-संचालित निर्णय:** नीति निर्माण और कार्यान्वयन में बड़े डेटा और AI विश्लेषण का उपयोग।
* **नियामक सुधार:** AI नवाचार को बढ़ावा देने और अनावश्यक नियमों को हटाने के लिए कानूनों और विनियमों का आधुनिकीकरण।
* **मानव संसाधन का कौशल उन्नयन:** सरकारी कर्मचारियों को AI उपकरणों और तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित करना।
* **नागरिक-केंद्रित सेवाएं:** AI का उपयोग करके सेवाओं को अधिक सुलभ, कुशल और व्यक्तिगत बनाना।
* **नैतिक और सुरक्षा संबंधी विचार:** AI के उपयोग में गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और नैतिक दिशानिर्देशों का पालन।
3. **मिशन कर्मयोगी की भूमिका का मूल्यांकन:**
* **उद्देश्य:** मिशन कर्मयोगी (National Programme for Civil Services Capacity Building) का परिचय और इसके मुख्य उद्देश्य (जैसे क्षमता निर्माण, कौशल उन्नयन, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल)।
* **iGOT प्लेटफॉर्म:** iGOT (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन प्रशिक्षण और निरंतर सीखने के अवसर।
* **क्षमता निर्माण आयोग:** आयोग की भूमिका और यह कैसे मिशन के कार्यान्वयन और निगरानी में मदद करता है।
* **लोक सेवा वितरण में सुधार:** मिशन कैसे कर्मचारियों को नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति अधिक संवेदनशील और कुशल बनाकर सेवा वितरण में सुधार कर सकता है।
* **चुनौतियाँ और सुझाव:** मिशन के कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियाँ (जैसे डिजिटल साक्षरता, प्रतिरोध, संसाधनों की कमी) और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव।
4. **निष्कर्ष:** AI और मिशन कर्मयोगी के सहयोगात्मक प्रभाव पर बल देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष, जो भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में शासन के परिवर्तन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करे।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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