गुजरात सरकार द्वारा मालधारियों के स्थानांतरण की घोषणा, जानिए पूरा विवरण

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गुजरात सरकार द्वारा मालधारियों के स्थानांतरण की घोषणा, जानिए पूरा विवरण

गुजरात सरकार द्वारा मालधारियों के स्थानांतरण की घोषणा, जानिए पूरा विवरण — मालधारियों के स्थानांतरण योजना की प्रक्रिया
आरेख: मालधारियों के स्थानांतरण योजना की प्रक्रिया

✎ यह योजना बर्दा वन्यजीव अभयारण्य से मालधारी समुदाय के स्वैच्छिक पुनर्वास के माध्यम से एशियाई शेरों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जिसमें प्रति परिवार 15 लाख रुपये की वित्तीय सहायता और आवास…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता  |  GS Paper I — भारतीय समाज और मानव भूगोल
  • Prelims: बर्दा वन्यजीव अभयारण्य, मालधारी समुदाय, एशियाई शेर, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) दिशानिर्देश, स्वैच्छिक पुनर्वास योजना
  • Essay: मानव-वन्यजीव संघर्ष और सह-अस्तित्व की चुनौतियाँ, विकास बनाम संरक्षण: संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता

त्वरित पुनरावृत्ति: यह योजना बर्दा वन्यजीव अभयारण्य से मालधारी समुदाय के स्वैच्छिक पुनर्वास के माध्यम से एशियाई शेरों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जिसमें प्रति परिवार 15 लाख रुपये की वित्तीय सहायता और आवास के लिए भूखंड का प्रावधान है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बर्दा वन्यजीव अभयारण्य से मालधारी (अर्ध-खानाबदोश पशुपालक) समुदाय के स्वैच्छिक पुनर्वास के लिए एक योजना की घोषणा की है। यह अभयारण्य एशियाई शेरों के ‘दूसरे घर’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस योजना के तहत, पात्र लाभार्थियों को अभयारण्य क्षेत्र के बाहर स्वैच्छिक पुनर्वास के लिए प्रति परिवार 15 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी।

पृष्ठभूमि

  • बर्दा वन्यजीव अभयारण्य पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिलों में 192.31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • मालधारी समुदाय पारंपरिक रूप से इस क्षेत्र में निवास करने वाला एक पशुपालक समुदाय है।
  • वन्यजीव अभयारण्यों में मानव बस्तियों की उपस्थिति अक्सर मानव-वन्यजीव संघर्ष को जन्म देती है और वन्यजीवों के आवास पर जैविक दबाव (biotic pressure) डालती है।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) के दिशानिर्देशों में बाघ अभयारण्यों और अन्य संरक्षित क्षेत्रों से स्वैच्छिक पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता और अन्य सुविधाओं का प्रावधान है, जिन्हें इस योजना में भी अपनाया गया है।

बर्दा वन्यजीव अभयारण्य से मालधारी पुनर्वास योजना क्या है?

  • यह योजना बर्दा वन्यजीव अभयारण्य से मालधारी समुदाय के स्वैच्छिक पुनर्वास के लिए है, जिसे एशियाई शेरों के ‘दूसरे घर’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  • योजना के तहत, पात्र लाभार्थी परिवार को अभयारण्य क्षेत्र के बाहर स्वैच्छिक पुनर्वास के लिए 15 लाख रुपये की राशि एकमुश्त किश्त में प्रदान की जाएगी।
  • पुनर्वास के बाद, परिवारों के बर्दा क्षेत्र में कोई अन्य अधिकार या हित मान्य नहीं होंगे।
  • राज्य सरकार की योजना के अनुसार, प्रत्येक पुनर्वासित परिवार को आवास के लिए 100 वर्ग गज का भूखंड निःशुल्क आवंटित किया जाएगा, जो लागू नियमों के अधीन होगा।
  • संबंधित कलेक्टर/जिला-स्तरीय समिति अभयारण्य और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र की सीमाओं के बाहर तथा नगर निगम की सीमा से 10 किलोमीटर और नगर पालिका की सीमा से 5 किलोमीटर की दूरी पर किसी भी गाँव के पास निःशुल्क भूमि प्रदान कर सकती है।
  • यदि किसी परिवार के पास पशुधन है, तो उनकी आवश्यकता के अनुसार 100 वर्ग गज तक का भूखंड प्रदान किया जा सकता है, जिसकी बाजार मूल्य के बराबर राशि 15 लाख रुपये की सहायता से काट ली जाएगी।
  • योजना के तहत ‘परिवार’ की परिभाषा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशानिर्देशों के अनुसार मानी जाएगी।
  • समग्र योजना के मार्गदर्शन और समीक्षा के लिए प्रधान सचिव, वन एवं पर्यावरण विभाग की अध्यक्षता में एक राज्य-स्तरीय समिति और संबंधित जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में जिला-स्तरीय समितियों का गठन किया गया है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
स्वैच्छिक पुनर्वास योजना एशियाई शेरों के लिए ‘दूसरे घर’ के रूप में विकसित किए जा रहे बारदा अभयारण्य से मालधारी समुदाय का स्वैच्छिक स्थानांतरण।
वित्तीय सहायता पात्र लाभार्थी परिवारों को अभयारण्य क्षेत्र के बाहर स्वैच्छिक पुनर्वास के लिए प्रति परिवार 15 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता।
आवासीय भूखंड पुनर्वासित परिवारों को आवास के लिए 100 वर्ग गज का भूखंड निःशुल्क आवंटित किया जाएगा।
पशुधन के लिए भूखंड पशुधन रखने वाले परिवारों को उनकी आवश्यकतानुसार 100 वर्ग गज तक का अतिरिक्त भूखंड, जिसका बाजार मूल्य 15 लाख रुपये की सहायता से काटा जाएगा।
राज्य स्तरीय समिति वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में योजना के मार्गदर्शन और समीक्षा के लिए गठित।
जिला स्तरीय समितियाँ संबंधित जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में जिला स्तर पर योजना के कार्यान्वयन के लिए गठित।

महत्व

पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण

  • बारदा वन्यजीव अभयारण्य में मानव अतिक्रमण (biotic pressure) से होने वाले जैविक दबाव को कम करना, जिससे वन्यजीवों के लिए अधिक क्षेत्र उपलब्ध होगा।
  • एशियाई शेरों के लिए एक नए उपग्रह आबादी क्षेत्र (satellite population) के रूप में बारदा को विकसित करने में सहायता, जिससे उनकी संख्या और भौगोलिक वितरण में वृद्धि होगी।

सामाजिक-आर्थिक विकास

  • पुनर्वासित परिवारों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना, जिससे उन्हें बेहतर आजीविका के अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार तक पहुंच मिलेगी।
  • मालधारी समुदाय के जीवन स्तर में सकारात्मक और परिवर्तनकारी बदलाव लाना।

नीतिगत निहितार्थ

  • वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष (human-wildlife conflict) प्रबंधन के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करना, जहाँ स्थानीय समुदायों की भागीदारी और उनके अधिकारों का सम्मान किया जाता है।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) के दिशानिर्देशों के अनुरूप पुनर्वास नीतियों का कार्यान्वयन।

चुनौतियाँ

1. पुनर्वास का सफल कार्यान्वयन

  • पुनर्वासित परिवारों के लिए नए स्थानों पर आजीविका के स्थायी स्रोत सुनिश्चित करना।
  • समुदाय के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने को बनाए रखते हुए उन्हें मुख्यधारा में एकीकृत करना।

2. मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व

  • पुनर्वास के बाद भी अभयारण्य के आसपास के क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना।
  • वन्यजीवों के लिए सुरक्षित गलियारों (corridors) और पर्यावास (habitat) का प्रबंधन करना।

3. भूमि आवंटन और उपयोग

  • पुनर्वासित परिवारों को आवंटित भूखंडों की उपयुक्तता और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • पशुधन रखने वाले परिवारों के लिए चारागाह और जल स्रोतों की व्यवस्था करना।

4. समुदाय की स्वीकार्यता

  • मालधारी समुदाय के बीच योजना के प्रति विश्वास और स्वीकार्यता बढ़ाना।
  • पुनर्वास प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
आजीविका सुरक्षा पुनर्वास के बाद मालधारी परिवारों के पारंपरिक पशुपालन आधारित आजीविका विकल्पों का विस्थापन।
सामाजिक एकीकरण नए स्थानों पर पुनर्वासित परिवारों का स्थानीय समुदायों के साथ एकीकरण और संभावित सामाजिक तनाव।
पारिस्थितिक संतुलन अभयारण्य से मानव दबाव हटने के बाद वन्यजीवों की बढ़ती संख्या का प्रबंधन और उनके नए क्षेत्रों में विस्तार।
योजना का वित्तपोषण दीर्घकालिक वित्तीय सहायता और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पर्याप्त और सतत धन की उपलब्धता।
कानूनी और प्रशासनिक बाधाएँ भूमि अधिग्रहण, आवंटन और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय में संभावित चुनौतियाँ।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वैच्छिक पुनर्वास योजना (गुजरात सरकार)
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority) के दिशानिर्देश

आगे की राह

  • पुनर्वासित परिवारों के लिए कौशल विकास और वैकल्पिक आजीविका के अवसरों का सृजन करना।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत विकास योजनाएँ लागू करना।
  • पुनर्वास प्रक्रिया में मालधारी समुदाय के प्रतिनिधियों को शामिल कर उनकी चिंताओं और आवश्यकताओं को संबोधित करना।
  • वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और अबाधित पर्यावास सुनिश्चित करने हेतु अभयारण्य के भीतर और आसपास प्रभावी प्रबंधन रणनीतियाँ अपनाना।
  • पुनर्वासित क्षेत्रों में सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए जागरूकता कार्यक्रम और सामुदायिक संवाद आयोजित करना।
  • योजना के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करना और आवश्यकतानुसार नीतिगत समायोजन करना।
  • मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण में भागीदार बनाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

बर्दा वन्यजीव अभयारण्य · एशियाई शेर · मल्धारी समुदाय · स्वैच्छिक पुनर्वास योजना · वन्यजीव संरक्षण · मानव-वन्यजीव संघर्ष · पारिस्थितिक संवेदी क्षेत्र · राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण · पर्यावरण और विकास · आजीविका के अवसर

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 48A’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘अनुच्छेद 51A (g)’: ‘पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन’}

अवधारणा प्रवाह

बारदा अभयारण्य में एशियाई शेरों का ‘दूसरा घर’ विकास  →  मानव अतिक्रमण (मालधारी समुदाय) से जैविक दबाव  →  स्वैच्छिक पुनर्वास योजना की घोषणा  →  वित्तीय सहायता और आवासीय भूखंडों का प्रावधान  →  मालधारियों का अभयारण्य से पुनर्वास  →  वन्यजीवों के लिए अधिक सुरक्षित पर्यावास  →  पुनर्वासित परिवारों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बर्दा वन्यजीव अभयारण्य एशियाई शेरों के ‘दूसरे घर’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
2. मल्धारी समुदाय अर्ध-खानाबदोश चरवाहे हैं जो पारंपरिक रूप से अभयारण्य क्षेत्रों में रहते हैं।
3. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की दिशानिर्देशों के अनुसार पुनर्वास सहायता प्रदान की जाती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि बर्दा वन्यजीव अभयारण्य को एशियाई शेरों के लिए ‘दूसरे घर’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। कथन 2 भी सही है क्योंकि मल्धारी पारंपरिक रूप से इन क्षेत्रों में रहने वाले अर्ध-खानाबदोश चरवाहे हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि पुनर्वास योजना NTCA के दिशानिर्देशों के अनुसार सहायता प्रदान करती है।

Q2. गुजरात सरकार द्वारा मल्धारी समुदाय के स्वैच्छिक पुनर्वास योजना के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. पुनर्वास के लिए प्रति परिवार 10 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।
  2. पुनर्वासित परिवारों को अभयारण्य क्षेत्र के भीतर ही भूमि आवंटित की जाएगी।
  3. यह योजना मानव अतिक्रमण के कारण होने वाले जैविक दबाव को कम करने में मदद करेगी।
  4. पुनर्वास के बाद परिवारों को बर्दा क्षेत्र में अन्य अधिकार या हित प्राप्त होंगे।

उत्तर: यह योजना मानव अतिक्रमण के कारण होने वाले जैविक दबाव को कम करने में मदद करेगी। — विकल्प C सही है। योजना का उद्देश्य मानव अतिक्रमण से होने वाले जैविक दबाव को कम करना है। विकल्प A गलत है क्योंकि प्रति परिवार 15 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। विकल्प B गलत है क्योंकि भूमि अभयारण्य क्षेत्र के बाहर आवंटित की जाएगी। विकल्प D गलत है क्योंकि पुनर्वास के बाद परिवारों के कोई अन्य अधिकार या हित नहीं होंगे।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने में स्वैच्छिक पुनर्वास योजनाओं की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। गुजरात में मल्धारी समुदाय के पुनर्वास योजना के संदर्भ में इसके संभावित लाभों और चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों के सह-अस्तित्व के महत्व पर प्रकाश डालें। स्वैच्छिक पुनर्वास योजनाओं की आवश्यकता का संक्षिप्त उल्लेख करें।
2. **स्वैच्छिक पुनर्वास योजनाओं की भूमिका:**
* **लाभ:** मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी, वन्यजीव आवासों का विस्तार, पारिस्थितिक संतुलन की बहाली, स्थानीय समुदायों के लिए बेहतर आजीविका और सुविधाओं तक पहुंच।
* **चुनौतियाँ:** सांस्कृतिक विस्थापन, पारंपरिक आजीविका का नुकसान, पुनर्वासित क्षेत्रों में नए संघर्ष, पर्याप्त मुआवजे और पुनर्वास सुविधाओं का अभाव, योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता की कमी।
3. **गुजरात में मल्धारी समुदाय के पुनर्वास योजना का संदर्भ:**
* **योजना के प्रावधान:** प्रति परिवार 15 लाख रुपये की सहायता, 100 वर्ग गज का भूखंड, पशुधन के लिए अतिरिक्त भूखंड (यदि आवश्यक हो), NTCA दिशानिर्देशों का पालन।
* **संभावित लाभ:** बर्दा वन्यजीव अभयारण्य में एशियाई शेरों के लिए ‘दूसरे घर’ का विकास, जैविक दबाव में कमी, मल्धारी समुदाय के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर।
* **संभावित चुनौतियाँ:** मल्धारी समुदाय की पारंपरिक जीवनशैली और संस्कृति का संरक्षण, नए स्थानों पर सामाजिक एकीकरण, आजीविका के नए साधनों का सफल अनुकूलन, योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी।
4. **निष्कर्ष:** वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों के सतत विकास के लिए समावेशी और संवेदनशील पुनर्वास नीतियों की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: The Indian Express

Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा शुरू की गई योजना के अंतर्गत मालधारियों को सिंहों के ‘दूसरे घर’ से स्थानांतरित करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. A. सिंहों के संरक्षण क्षेत्र का विस्तार करना
  2. B. मानव-सिंह संघर्ष को कम करना
  3. C. मालधारियों के लिए बेहतर आवास सुविधाएं प्रदान करना
  4. D. पर्यटन को बढ़ावा देना

उत्तर: B. मानव-सिंह संघर्ष को कम करना — इस योजना का मुख्य उद्देश्य मानव-सिंह संघर्ष को कम करना है, ताकि दोनों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व सुनिश्चित किया जा सके।

Mains: गुजरात सरकार द्वारा मालधारियों को सिंहों के ‘दूसरे घर’ से स्थानांतरित करने की योजना के प्रभावों का विश्लेषण करते हुए, इसके सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक पहलुओं पर प्रकाश डालिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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