आईएमडी द्वारा चक्रवात एवं समुद्री मौसम चेतावनी सेवा पर कार्यशाला आयोजित

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आईएमडी द्वारा चक्रवात एवं समुद्री मौसम चेतावनी सेवा पर कार्यशाला आयोजित

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चक्रवात चेतावनी प्रक्रिया

✎ भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा प्रदान की जाने वाली चक्रवात और समुद्री मौसम चेतावनी सेवाएँ आपदा प्रबंधन और तटीय समुदायों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (महत्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ जैसे भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी गतिविधि, चक्रवात आदि)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन (आपदा और आपदा प्रबंधन)
  • Prelims: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), चक्रवात चेतावनी सेवाएँ, समुद्री मौसम, आपदा प्रबंधन, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), भारत में चक्रवात प्रवण क्षेत्र
  • Essay: आपदा प्रबंधन में प्रौद्योगिकी की भूमिका, जलवायु परिवर्तन और भारत पर इसका प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा प्रदान की जाने वाली चक्रवात और समुद्री मौसम चेतावनी सेवाएँ आपदा प्रबंधन और तटीय समुदायों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हाल ही में चक्रवात और समुद्री मौसम चेतावनी सेवाओं पर उपयोगकर्ताओं के लिए एक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य हितधारकों, विशेषकर तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों को मौसम संबंधी खतरों के बारे में जागरूक करना और उन्हें इन चेतावनियों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में सक्षम बनाना था। यह पहल आपदा तैयारियों और शमन के लिए महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि

  • भारत एक लंबी तटरेखा वाला देश है जो बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों से उत्पन्न होने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के प्रति संवेदनशील है।
  • चक्रवात भारत में सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक हैं, जो जान-माल और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के तहत एक प्रमुख एजेंसी है, जो मौसम संबंधी अवलोकन, मौसम पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान के लिए जिम्मेदार है।
  • IMD चक्रवातों की निगरानी और उनके मार्ग का पूर्वानुमान लगाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों, जैसे उपग्रह इमेजरी, रडार और संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल का उपयोग करता है।
  • समुद्री मौसम चेतावनी सेवाएँ मछुआरों, नाविकों और तटीय समुदायों के लिए महत्वपूर्ण हैं ताकि वे सुरक्षित रूप से अपनी गतिविधियों का संचालन कर सकें।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) भारत में आपदा प्रबंधन के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करता है, जिसमें पूर्व-चेतावनी प्रणालियों का महत्व भी शामिल है।

चक्रवात और समुद्री मौसम चेतावनी सेवाएँ क्या हैं?

  • चक्रवात चेतावनी सेवाएँ IMD द्वारा जारी की जाने वाली पूर्व-चेतावनी प्रणालियाँ हैं जो उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के बनने, उनके मार्ग, तीव्रता और संभावित भूस्खलन (landfall) के बारे में जानकारी प्रदान करती हैं।
  • इन चेतावनियों में हवा की गति, वर्षा की तीव्रता और तूफान के बढ़ने की संभावना के बारे में विस्तृत पूर्वानुमान शामिल होते हैं।
  • समुद्री मौसम चेतावनी सेवाएँ समुद्र में काम करने वाले लोगों, जैसे मछुआरों और नाविकों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई हैं, जो उन्हें समुद्र की स्थिति, लहरों की ऊंचाई, हवा की गति और दिशा, और संभावित तूफानों के बारे में सूचित करती हैं।
  • ये सेवाएँ विभिन्न चरणों में जारी की जाती हैं, जिनमें चक्रवात की निगरानी (cyclone watch), चक्रवात चेतावनी (cyclone warning) और चक्रवात के बाद की जानकारी शामिल है, ताकि तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
  • IMD विभिन्न माध्यमों, जैसे रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्र, इंटरनेट और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से इन चेतावनियों का प्रसार करता है।
  • इन सेवाओं का मुख्य उद्देश्य जान-माल के नुकसान को कम करना, तटीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री गतिविधियों के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।
  • प्रशिक्षण कार्यशालाएँ इन चेतावनियों को समझने और उनका प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए हितधारकों की क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
चक्रवात और समुद्री मौसम चेतावनी सेवाएँ भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा प्रदान की जाने वाली ये सेवाएँ तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और समुद्री गतिविधियों से जुड़े समुदायों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
प्रशिक्षण कार्यशाला यह कार्यशाला उपयोगकर्ताओं को इन चेतावनियों को समझने और उनका प्रभावी ढंग से उपयोग करने में सशक्त बनाती है, जिससे आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) में सुधार होता है।
उपयोगकर्ता-केंद्रित दृष्टिकोण IMD का यह प्रयास दर्शाता है कि चेतावनी प्रणालियों को केवल जारी करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि वे लक्षित उपयोगकर्ताओं तक पहुँचें और समझी जाएँ।
तटीय और समुद्री सुरक्षा मछुआरों, बंदरगाह अधिकारियों और तटीय निवासियों के लिए समय पर और सटीक जानकारी जीवन और आजीविका की रक्षा करती है।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग IMD हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवात चेतावनी सेवाओं के लिए एक क्षेत्रीय विशेषीकृत मौसम विज्ञान केंद्र (RSMC) के रूप में कार्य करता है, जो पड़ोसी देशों को भी सेवाएँ प्रदान करता है।

महत्व

आपदा प्रबंधन

  • यह पहल चक्रवात और समुद्री आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक है, जो राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्रयासों का एक अभिन्न अंग है।
  • समय पर चेतावनी और उनका सही उपयोग जीवन और संपत्ति के नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आर्थिक महत्व

  • मछुआरों और समुद्री परिवहन उद्योग के लिए सटीक मौसम संबंधी जानकारी उनकी आजीविका और आर्थिक गतिविधियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
  • बंदरगाहों और तटीय उद्योगों को संभावित खतरों से बचाने में मदद मिलती है, जिससे आर्थिक व्यवधान कम होते हैं।

सामाजिक सुरक्षा

  • तटीय समुदायों, विशेषकर कमजोर वर्गों को, मौसम संबंधी खतरों से बचाने में मदद मिलती है, जिससे उनकी सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित होता है।
  • समुद्री गतिविधियों में संलग्न लोगों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना, जिससे दुर्घटनाओं और जानमाल के नुकसान में कमी आती है।

वैज्ञानिक और तकनीकी उन्नति

  • यह IMD की मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं और चेतावनी प्रणालियों में निरंतर सुधार को दर्शाता है।
  • उपयोगकर्ता प्रतिक्रिया के माध्यम से चेतावनी सेवाओं की प्रभावशीलता में सुधार होता है, जिससे तकनीकी प्रणालियों का अनुकूलन होता है।

चुनौतियाँ

1. चेतावनी का प्रसार और पहुँच

  • दूरदराज के तटीय क्षेत्रों और गहरे समुद्र में मछुआरों तक चेतावनी पहुँचाना एक चुनौती है, खासकर जब संचार बुनियादी ढाँचा कमजोर हो।
  • विभिन्न भाषाओं और साक्षरता स्तरों वाले समुदायों के लिए चेतावनियों को सुलभ और समझने योग्य बनाना।

2. उपयोगकर्ता जागरूकता और प्रतिक्रिया

  • समुदायों में चेतावनियों के प्रति गंभीरता और प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना, क्योंकि कई बार लोग चेतावनियों को नजरअंदाज कर देते हैं।
  • चेतावनी प्रणाली पर विश्वास बनाए रखना और गलत अलार्म के कारण होने वाली ‘चेतावनी थकान’ (Warning Fatigue) से बचना।

3. तकनीकी क्षमता और सटीकता

  • चक्रवातों की तीव्रता, मार्ग और समय का सटीक पूर्वानुमान लगाना अभी भी एक जटिल वैज्ञानिक चुनौती है।
  • समुद्री मौसम की निगरानी के लिए उन्नत सेंसर, उपग्रह और मॉडलिंग तकनीकों की आवश्यकता होती है, जिनमें निवेश की आवश्यकता होती है।

4. समन्वय और सहयोग

  • विभिन्न सरकारी एजेंसियों (जैसे तटरक्षक बल, नौसेना, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) और स्थानीय समुदायों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, विशेषकर हिंद महासागर क्षेत्र में, डेटा साझाकरण और चेतावनी प्रसार के लिए महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अंतिम-मील कनेक्टिविटी दूरस्थ तटीय क्षेत्रों और समुद्र में संचार के अभाव में चेतावनी संदेशों का प्रभावी ढंग से न पहुँचना।
सांस्कृतिक और भाषाई बाधाएँ स्थानीय बोलियों और कम साक्षरता वाले समुदायों के लिए चेतावनियों को समझने में कठिनाई।
डेटा की कमी समुद्री क्षेत्रों से वास्तविक समय के मौसम संबंधी डेटा संग्रह में चुनौतियाँ, जिससे पूर्वानुमान की सटीकता प्रभावित होती है।
मानव संसाधन आपदा प्रबंधन और चेतावनी प्रसार में प्रशिक्षित कर्मियों की कमी, विशेषकर स्थानीय स्तर पर।
बुनियादी ढाँचा तटीय क्षेत्रों में मजबूत और लचीले संचार तथा निकासी बुनियादी ढाँचे का अभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (National Disaster Management Plan)
  • तटीय विनियमन क्षेत्र (Coastal Regulation Zone – CRZ) अधिसूचना

आगे की राह

  • समुद्री संचार प्रणालियों जैसे सैटेलाइट फोन और रेडियो का उपयोग कर अंतिम-मील तक चेतावनी प्रसार को मजबूत करना।
  • स्थानीय भाषाओं और सरल दृश्यों का उपयोग करके जागरूकता अभियान चलाना, विशेषकर मछुआरा समुदायों के बीच।
  • समुद्री मौसम पूर्वानुमान के लिए उन्नत रडार, उपग्रह डेटा और संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (Numerical Weather Prediction) मॉडलों में निवेश बढ़ाना।
  • स्थानीय आपदा प्रबंधन समितियों और स्वयंसेवकों को चक्रवात और समुद्री मौसम चेतावनियों को समझने और प्रसारित करने के लिए प्रशिक्षित करना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच प्रभावी समन्वय तंत्र स्थापित करना।
  • समुद्री मौसम चेतावनियों के लिए एक केंद्रीकृत मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करना जो विभिन्न भाषाओं में जानकारी प्रदान करे।
  • समुद्री बीमा योजनाओं को बढ़ावा देना ताकि मछुआरों और तटीय समुदायों को आपदाओं से होने वाले वित्तीय नुकसान से बचाया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) · चक्रवात चेतावनी सेवाएँ · समुद्री मौसम चेतावनी · आपदा प्रबंधन · तटीय सुरक्षा · पूर्वानुमान सटीकता · जलवायु परिवर्तन · सतत विकास · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) · प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 256’, ‘note’: ‘केंद्र के निर्देशों का पालन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 257’, ‘note’: ‘केंद्र का राज्यों पर नियंत्रण’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (सूची III)’, ‘note’: ‘आपदा प्रबंधन समवर्ती सूची’}

अवधारणा प्रवाह

मौसम संबंधी डेटा संग्रह (उपग्रह, रडार)  →  IMD द्वारा डेटा विश्लेषण और पूर्वानुमान  →  चक्रवात/समुद्री चेतावनी जारी करना  →  प्रशिक्षण कार्यशालाओं द्वारा उपयोगकर्ता सशक्तिकरण  →  चेतावनी को समझना और प्रतिक्रिया देना  →  आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सुरक्षा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
2. IMD चक्रवात और समुद्री मौसम चेतावनी सेवाओं के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है।
3. IMD केवल भारतीय तटरेखा के लिए मौसम संबंधी परामर्श जारी करता है, अंतर्राष्ट्रीय जल के लिए नहीं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है, यह सही है।
कथन 2: IMD चक्रवात और समुद्री मौसम चेतावनी सेवाओं के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है, यह भी सही है।
कथन 3: IMD भारतीय तटरेखा के साथ-साथ पड़ोसी देशों और अंतर्राष्ट्रीय जल के लिए भी मौसम संबंधी परामर्श जारी करता है, इसलिए यह कथन गलत है।

Q2. भारत में चक्रवात चेतावनी प्रणाली के संबंध में, ‘मल्टी-हैज़र्ड वल्नरेबिलिटी एटलस’ (Multi-Hazard Vulnerability Atlas) निम्नलिखित में से किस संगठन द्वारा प्रकाशित किया जाता है?

  1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)
  2. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
  3. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
  4. राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT)

उत्तर: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) — भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक खतरों, जिनमें चक्रवात भी शामिल हैं, से संबंधित ‘मल्टी-हैज़र्ड वल्नरेबिलिटी एटलस’ प्रकाशित करता है। यह एटलस जोखिम मूल्यांकन और आपदा न्यूनीकरण प्रयासों में सहायता करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में चक्रवात और समुद्री मौसम चेतावनी सेवाओं के महत्व पर चर्चा कीजिए। इन सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा किए जा रहे प्रयासों का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर की रूपरेखा:
1. परिचय: भारत की लंबी तटरेखा और चक्रवात तथा समुद्री खतरों के प्रति संवेदनशीलता का उल्लेख करते हुए चक्रवात और समुद्री मौसम चेतावनी सेवाओं का संक्षिप्त परिचय।
2. महत्व: निम्नलिखित बिंदुओं पर महत्व समझाएं:
क. जान-माल की सुरक्षा: मछुआरों, तटीय समुदायों और समुद्री गतिविधियों में लगे लोगों के जीवन की रक्षा।
ख. आर्थिक प्रभाव: कृषि, मत्स्य पालन, पर्यटन और शिपिंग उद्योगों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करना।
ग. आपदा प्रबंधन: समय पर निकासी, राहत और बचाव कार्यों में सहायता।
घ. नीति निर्माण: तटीय विकास और बुनियादी ढांचे के नियोजन में सहायता।
ङ. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: पड़ोसी देशों और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठनों के साथ समन्वय।
3. IMD के प्रयास: IMD द्वारा इन सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का मूल्यांकन करें:
क. अत्याधुनिक तकनीक: उपग्रहों, रडार, स्वचालित मौसम स्टेशनों और सुपरकंप्यूटिंग का उपयोग।
ख. पूर्वानुमान सटीकता: संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल (Numerical Weather Prediction Models) और डेटा आत्मसात्करण तकनीकों में सुधार।
ग. क्षमता निर्माण: उपयोगकर्ताओं और हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं (जैसा कि समाचार में है)।
घ. प्रसार तंत्र: विभिन्न माध्यमों (रेडियो, टीवी, मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया) से चेतावनी का त्वरित और व्यापक प्रसार।
ङ. अनुसंधान और विकास: जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन और नई प्रौद्योगिकियों का विकास।
च. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और अन्य वैश्विक एजेंसियों के साथ समन्वय।
4. चुनौतियाँ और आगे की राह: शेष चुनौतियों (जैसे अंतिम मील कनेक्टिविटी, स्थानीय भाषा में चेतावनी, जलवायु परिवर्तन के कारण अप्रत्याशित घटनाएँ) और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव।
5. निष्कर्ष: इन सेवाओं के सतत सुधार और आपदा-लचीले भारत के निर्माण में उनकी भूमिका पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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