31 Oct आईएमडी ने मिशन मौसम के तहत केरल में लगाएंगे विंड प्रोफाइलर राडार
✎ मिशन मौसम (Mission Mausam) का उद्देश्य भारत को ‘मौसम-तैयार’ और ‘जलवायु-सक्षम’ बनाना है; पवन प्रोफाइलर रडार क्षोभमंडल (लगभग 8-17 किलोमीटर) में पवन की गति और दिशा मापकर मानसून के आरंभ, सक्रियता और वापसी को समझने में सहायक है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भारतीय जलवायु, मानसून की प्रणाली, वायुमंडलीय परिसंचरण) | GS Paper III — विज्ञान और प्रौद्योगिकी (पृथ्वी विज्ञान, रडार प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और वायुमंडलीय अनुसंधान); आपदा प्रबंधन (चक्रवात, बाढ़ और वर्षा संबंधी पूर्व चेतावनी)
- Prelims: मिशन मौसम (Mission Mausam) — पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की पहल, 2024 में आरंभ, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) और उसके अधीन भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पवन प्रोफाइलर रडार (Wind Profiler Radar) — ऊर्ध्वाधर दिशा में पवन की गति और दिशा का मापन, क्षोभमंडल (Troposphere) और समताप मंडल (Stratosphere) की संरचना और ऊँचाई, डॉप्लर रडार (Doppler Radar) और उसका मौसम पूर्वानुमान में उपयोग, दक्षिण-पश्चिम मानसून का केरल में आगमन और उसका प्रवेश-बिंदु, राष्ट्रीय मानसून मिशन (National Monsoon Mission, 2012) — मानसून पूर्वानुमान की पूर्ववर्ती पहल, कोचीन विश्वविद्यालय (CUSAT) का वायुमंडलीय रडार अनुसंधान केंद्र (ACARR) और 205 MHz स्ट्रैटोस्फीयर-ट्रोपोस्फीयर रडार
- Essay: ‘मौसम-तैयार और जलवायु-सक्षम भारत’: विज्ञान-आधारित पूर्वानुमान से आपदा-लचीलापन, मानसून की अनिश्चितता के दौर में प्रेक्षण-तंत्र का सुदृढ़ीकरण और सार्वजनिक सेवाओं की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन मौसम (Mission Mausam) का उद्देश्य भारत को ‘मौसम-तैयार’ और ‘जलवायु-सक्षम’ बनाना है; पवन प्रोफाइलर रडार क्षोभमंडल (लगभग 8-17 किलोमीटर) में पवन की गति और दिशा मापकर मानसून के आरंभ, सक्रियता और वापसी को समझने में सहायक है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मिशन मौसम (Mission Mausam) के अंतर्गत केरल के कोझिकोड और तिरुवनंतपुरम में पवन प्रोफाइलर रडार स्थापित करने के लिए उपयुक्त भूमि की खोज आरंभ की है। यह कदम पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश के मौसम और जलवायु प्रेक्षण, उनकी समझ, मॉडलिंग और पूर्वानुमान की क्षमता को बढ़ाना है। सूचना के अनुसार कोझिकोड के लिए लगभग डेढ़ एकड़ और तिरुवनंतपुरम के लिए लगभग एक एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। राज्य सरकार से भूमि आवंटन का औपचारिक अनुरोध किया जा चुका है और विभिन्न सरकारी विभागों तथा विश्वविद्यालयों के साथ विचार-विमर्श जारी है। तिरुवनंतपुरम को दक्षिण-पश्चिम मानसून का मुख्य प्रवेश-बिंदु माना जाता है, जबकि कोझिकोड उन क्षेत्रों में है जहाँ मानसून के दौरान भारी वर्षा होती है।
पृष्ठभूमि
- भारत में मौसम पूर्वानुमान की संस्थागत शुरुआत 1875 में भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना से मानी जाती है, जो देश की सबसे पुरानी वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है। आज यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की स्थापना 2006 में हुई थी। इसके अंतर्गत मौसम, जलवायु, महासागर और भूकंप से संबंधित विज्ञान-कार्यक्रम आते हैं।
- राष्ट्रीय मानसून मिशन (2012) के माध्यम से मानसून के पूर्वानुमान के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन मॉडल और प्रेक्षण-तंत्र विकसित करने पर बल दिया गया था। मिशन मौसम उसी दिशा में प्रेक्षण-आधारित व्यापक विस्तार है।
- मानसून भारतीय कृषि, जल-संसाधनों और जलाशयों की स्थिति को प्रभावित करता है, इसलिए इसके आगमन, सक्रियता और वापसी की सटीक जानकारी आर्थिक और सामाजिक नियोजन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- केरल में पहले से ही कोचीन विश्वविद्यालय (CUSAT) के वायुमंडलीय रडार अनुसंधान केंद्र (ACARR) में 205 MHz स्ट्रैटोस्फीयर-ट्रोपोस्फीयर पवन प्रोफाइल रडार कार्यरत है, जिसे अधिकारी विश्व में इस प्रकार का पहला ऐसा रडार बताते हैं।
पवन प्रोफाइलर रडार क्या है?
- पवन प्रोफाइलर रडार वह प्रेक्षण-उपकरण है जो वायुमंडल में विभिन्न ऊँचाइयों पर हवा की गति (Speed) और दिशा (Direction) का मापन करता है। यह रेडियो तरंगों पर आधारित रडार, ध्वनि तरंगों (Sound Waves) या लेज़र का उपयोग कर सकता है।
- इसका मापन क्षोभमंडल (Troposphere) तक किया जाता है, जो लगभग 8 किलोमीटर से 17 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला है। प्रत्येक किलोमीटर पर पवन का मापन किया जाता है।
- सामान्य रडार की तुलना में यह ऊर्ध्वाधर वायु-संरचना की जानकारी देता है, जिससे वायुमंडलीय गतिविधियों का त्रि-आयामी चित्र बनाने में सहायता मिलती है।
- इससे प्राप्त आँकड़ों का उपयोग मानसून के आरंभ (Onset), उसके सशक्त होने और कमज़ोर पड़ने, तथा उसकी वापसी (Withdrawal) को समझने में होता है।
- इन आँकड़ों से पवन-प्रक्षोभ (Wind Turbulence), वायुमंडलीय विक्षोभ और आँधी-तूफ़ान (Thunderstorms) की निगरानी और पूर्वानुमान में सुधार होता है।
- यह रडार लगभग हर 15 मिनट में आँकड़े उपलब्ध कराने की अपेक्षा के साथ लगाया जाता है, जिससे अल्पावधि पूर्वानुमान और चेतावनी-तंत्र को गति मिलती है।
- कोझिकोड और तिरुवनंतपुरम का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि तिरुवनंतपुरम मानसून का प्रवेश-बिंदु है और कोझिकोड भारी वर्षा वाला क्षेत्र है। इस प्रकार दोनों स्थान मानसून की गतिविधि को समझने के लिए रणनीतिक महत्त्व रखते हैं।
- मिशन मौसम के अंतर्गत ऐसे प्रेक्षण-उपकरणों का नेटवर्क बढ़ाने के साथ-साथ उच्च-निष्पादन कंप्यूटिंग और मॉडलिंग को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता (Feature) | महत्व (Significance) |
|---|---|
| संचालन आवृत्ति | कुसैट के उन्नत वायुमंडलीय रडार अनुसंधान केंद्र में लगा पवन परिलेखी रडार 205 मेगाहर्ट्ज़ पर चलता है। अधिकारियों के अनुसार यह समतापमंडल-क्षोभमंडल पवन परिलेखन करने वाला विश्व का पहला रडार होने का दावा किया गया है। |
| ऊर्ध्वाधर मापन | पवन परिलेखी रडार क्षोभमंडल में लगभग 8 किलोमीटर से 17 किलोमीटर तक, प्रति किलोमीटर की ऊँचाई पर पवन की गति और दिशा मापता है। इससे वायुमंडल की ऊर्ध्वाधर संरचना की जानकारी मिलती है। |
| आँकड़ा आवृत्ति | रडार से हर 15 मिनट पर आँकड़े मिलने की अपेक्षा है। इससे मानसून की गतिविधि और तूफ़ानी परिस्थितियों की लगभग निरंतर निगरानी संभव होती है। |
| स्थान चयन का आधार | तिरुवनंतपुरम को दक्षिण-पश्चिम मानसून का मुख्य प्रवेश बिंदु माना जाता है, जबकि कोझिकोड उन क्षेत्रों में है जहाँ मानसून के दौरान भारी वर्षा होती है। दोनों स्थान मानसून अध्ययन के लिए रणनीतिक हैं। |
| भूमि आवश्यकता | कोझिकोड में लगभग डेढ़ एकड़ और तिरुवनंतपुरम में लगभग एक एकड़ भूमि उपकरण स्थापना के लिए अपेक्षित बताई गई है। भूमि का आवंटन राज्य सरकार के माध्यम से होना है। |
महत्व
वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व
- पवन परिलेखी रडार से वायुमंडल की विभिन्न ऊँचाइयों पर पवन की गति और दिशा का सटीक आँकड़ा मिलता है, जो सतही प्रेक्षणों से संभव नहीं है।
- मानसून की शुरुआत, सशक्त होने, कमज़ोर पड़ने और लौटने (withdrawal) की प्रक्रिया को समझने में ये आँकड़े सहायक हैं।
- मानसून के भीतर होने वाले विचलन और पवन विक्षोभ (wind turbulence) के अध्ययन से मौसम मॉडल की सटीकता बढ़ाई जा सकती है।
मौसम पूर्वानुमान एवं आपदा प्रबंधन
- भारी वर्षा, आँधी और गरज-बौछार (thunderstorms) जैसी घटनाओं के अल्पकालिक पूर्वानुमान में ऊर्ध्वाधर पवन आँकड़े उपयोगी होते हैं।
- समय पर चेतावनी से बाढ़, भूस्खलन और तटीय आपदाओं के जोखिम में कमी लाने में सहायता मिलती है।
- केरल जैसे पश्चिमी घाट से सटे राज्यों में स्थानीय स्तर पर वर्षा के सटीक पूर्वानुमान की आवश्यकता अधिक है।
संस्थागत एवं शासन-संबंधी महत्व
- मिशन मौसम (Mission Mausam) का उद्देश्य भारत को मौसम-तैयार (weather-ready) और जलवायु-स्मार्ट (climate-smart) बनाना है, और यह स्थापना उसी दिशा में एक ठोस कदम है।
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department (IMD)) और राज्य सरकार के बीच भूमि आवंटन की प्रक्रिया अंतर-विभागीय समन्वय का व्यावहारिक उदाहरण है।
- विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी विभागों के साथ चर्चा से शोध और प्रेक्षण के बीच संस्थागत सहयोग बढ़ता है।
चुनौतियाँ
1. भूमि आवंटन और प्रशासनिक समन्वय
- भूमि राज्य सूची का विषय है, इसलिए केंद्रीय एजेंसी को राज्य सरकार से औपचारिक आवंटन पर निर्भर रहना पड़ता है।
- आवंटन में विलंब से परियोजना की समय-सारणी प्रभावित हो सकती है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में उपयुक्त खुली भूमि मिलना कठिन होता है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद और केंद्र-राज्य विधायी एवं प्रशासनिक संबंध (GS-2)
2. उपकरण का स्थान और परिवेशी हस्तक्षेप
- रडार के लिए ऐसा स्थान चाहिए जहाँ भवन, ऊँचे ढाँचे और विद्युत-चुंबकीय हस्तक्षेप कम हों, क्योंकि इससे आँकड़ों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
- तटीय और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अनुकूल स्थल चुनना तकनीकी और सामाजिक दोनों दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन और आधारभूत संरचना का नियोजन (GS-3)
3. आँकड़ों का उपयोग और पूर्वानुमान मॉडल में एकीकरण
- प्रेक्षण तभी उपयोगी है जब वह संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडलों में समेकित हो, अन्यथा आँकड़े केवल संग्रहित रह जाते हैं।
- 15 मिनट के अंतराल वाले विशाल आँकड़ों के भंडारण, विश्लेषण और जनता तक पहुँच के लिए सुदृढ़ डिजिटल ढाँचा आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग और डिजिटल शासन (GS-3)
4. मानसून की परिवर्तनशीलता और जलवायु जोखिम
- मानसून की तीव्र परिवर्तनशीलता, अनियमित वर्षा और चरम मौसमी घटनाएँ बढ़ रही हैं, जिससे पूर्वानुमान की चुनौती गंभीर हुई है।
- क्षोभमंडल के ऊपरी स्तरों के प्रेक्षण की कमी से मानसून की दीर्घकालिक प्रवृत्ति को समझना अभी अपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय मानसून की प्रणाली और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव (GS-1 एवं GS-3)
5. विशेषज्ञ मानव संसाधन और रखरखाव
- ऐसे उन्नत रडार के संचालन, अंशांकन (calibration) और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारी आवश्यक हैं।
- अनुसंधान संस्थानों और मौसम विभाग के बीच दीर्घकालिक सहयोग का ढाँचा स्पष्ट न होने पर परियोजना की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास और अनुसंधान संस्थानों की भूमिका (GS-3)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या (Issue) | चिंता (Concern) |
|---|---|
| भूमि आवंटन | राज्य सरकार से औपचारिक आवंटन में विलंब होने पर स्थापना की समय-सारणी बिगड़ सकती है। |
| स्थल की उपयुक्तता | भवनों, ऊँचे ढाँचों और विद्युत-चुंबकीय हस्तक्षेप से रडार के आँकड़ों की गुणवत्ता घट सकती है। |
| आँकड़ों का समेकन | 15 मिनट के आँकड़ों को पूर्वानुमान मॉडल और चेतावनी प्रणाली में प्रभावी ढंग से जोड़ना आवश्यक है। |
| मानसून की अनिश्चितता | मानसून की बदलती प्रवृत्ति के कारण पूर्वानुमान की सटीकता बनाए रखना कठिन है। |
| कुशल जनशक्ति | उन्नत रडार के संचालन और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की निरंतर उपलब्धता आवश्यक है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मिशन मौसम (Mission Mausam)
आगे की राह
- राज्य सरकार और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के बीच भूमि आवंटन की समय-सीमा तय कर एक समन्वय तंत्र बनाया जाए।
- स्थल चयन से पहले विद्युत-चुंबकीय हस्तक्षेप और भवनों के प्रभाव का तकनीकी मूल्यांकन किया जाए।
- कुसैट जैसे विश्वविद्यालयों के साथ अनुसंधान साझेदारी को औपचारिक रूप देकर शोध और प्रशिक्षण को संस्थागत किया जाए।
- रडार से प्राप्त 15 मिनट के आँकड़ों को संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडलों में समेकित करने हेतु डिजिटल ढाँचा विकसित किया जाए।
- आँकड़ों को सार्वजनिक और आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के लिए सुलभ बनाया जाए, ताकि चेतावनी प्रणाली की प्रभावशीलता बढ़े।
- तिरुवनंतपुरम और कोझिकोड के अनुभव के आधार पर अन्य तटीय एवं पर्वतीय राज्यों के लिए मानक स्थल-चयन दिशानिर्देश तैयार किए जाएँ।
- विशेषज्ञ जनशक्ति के प्रशिक्षण और करियर-पथ के लिए मौसम विज्ञान में दीर्घकालिक मानव संसाधन योजना बनाई जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 246 एवं सातवीं अनुसूची: केंद्र-राज्य विधायी विषयों का विभाजन
- सातवीं अनुसूची, राज्य सूची: भूमि और उस पर अधिकार राज्य का विषय
अवधारणा प्रवाह
दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन और वर्षा का स्वरूप वायुमंडल की ऊर्ध्वाधर पवन संरचना से प्रभावित होता है। → पवन परिलेखी रडार क्षोभमंडल में 8 से 17 किलोमीटर तक पवन की गति और दिशा मापता है। → हर 15 मिनट के आँकड़े मानसून की शुरुआत, सशक्तता, कमज़ोर पड़ने और लौटने की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हैं। → आँकड़े संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडलों में समेकित होकर सटीक पूर्वानुमान और समय पर चेतावनी देते हैं। → समय पर चेतावनी से आपदा प्रबंधन सुदृढ़ होता है और मिशन मौसम के मौसम-तैयार भारत के लक्ष्य की ओर प्रगति होती है।
स्रोत: The Hindu
Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा ‘मिशन मौसम’ के अंतर्गत केरल के किन दो जिलों में पवन प्रोफाइलर राडार स्थापित करने के लिए भूमि की तलाश की जा रही है?
- A. कोझिकोड एवं तिरुवनंतपुरम
- B. कोच्चि एवं त्रिशूर
- C. पालक्काड एवं कन्नूर
- D. मलप्पुरम एवं कोट्टायम
उत्तर: A. कोझिकोड एवं तिरुवनंतपुरम — ‘मिशन मौसम’ के तहत IMD द्वारा केरल के कोझिकोड और तिरुवनंतपुरम जिलों में पवन प्रोफाइलर राडार स्थापित करने के लिए भूमि की तलाश की जा रही है।
Mains: केरल राज्य में ‘मिशन मौसम’ के अंतर्गत पवन प्रोफाइलर राडार स्थापित करने के महत्व और इससे संबंधित चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए, केरल के मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में इसके संभावित योगदान का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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