27 Oct भारत-इंडोनेशिया विशेष बल अभ्यास: सुरक्षा सहयोग में नया आयाम
✎ भारत-इंडोनेशिया विशेष बल संयुक्त अभ्यास रक्षा कूटनीति, सैन्य अंतरसंचालनीयता और हिंद-प्रशांत में आसियान केंद्रित सहयोग का व्यावहारिक उदाहरण है, जो पूर्व की ओर देखो नीति के अंतर्गत आता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (द्विपक्षीय समूह, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, भारत के पड़ोसी और आसियान देशों के साथ संबंध) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और रक्षा (विशेष बलों की भूमिका, सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण, समुद्री सुरक्षा)
- Prelims: विशेष बल (Special Forces) और उनकी तैनाती का स्वरूप, मलक्का जलसंधि (Strait of Malacca) और उसका सामरिक महत्व, आसियान (ASEAN) के सदस्य देश और उनका भौगोलिक विस्तार, पूर्व की ओर देखो नीति (Act East Policy), हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) अवधारणा, भारतीय सशस्त्र बलों की विशेष इकाइयाँ — मार्कोस (MARCOS), पैरा एसएफ (Para SF) और गरुड़ कमांडो बल (Garud Commando Force), इंडोनेशिया का राष्ट्रीय प्रतीक गरुड़ और पंचशील/पंचसिला से भिन्न उसका राष्ट्रीय दर्शन पंचशील (Pancasila)
- Essay: रक्षा कूटनीति सामूहिक सुरक्षा और विश्वास निर्माण का साधन कैसे बनती है, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग-आधारित सुरक्षा ढाँचे की आवश्यकता
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत-इंडोनेशिया विशेष बल संयुक्त अभ्यास रक्षा कूटनीति, सैन्य अंतरसंचालनीयता और हिंद-प्रशांत में आसियान केंद्रित सहयोग का व्यावहारिक उदाहरण है, जो पूर्व की ओर देखो नीति के अंतर्गत आता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत और इंडोनेशिया के विशेष बलों के बीच संयुक्त अभ्यास आयोजित हुआ है, जो दोनों देशों के रक्षा सहयोग का एक व्यावहारिक रूप है। ऐसे अभ्यास सैन्य अंतरसंचालनीयता (Interoperability), आतंकवाद-रोधी और आपदा-प्रतिक्रिया जैसे विषयों पर साझा क्षमता बढ़ाते हैं। इंडोनेशिया भारत के हिंद-प्रशांत नीतिगत ढाँचे और आसियान केंद्रित क्षेत्रीय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण साझेदार है, इसलिए इस अभ्यास को द्विपक्षीय रक्षा संबंधों के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा संदर्भ में भी देखना उपयोगी है। परीक्षा की दृष्टि से अभ्यास के विशिष्ट संस्करण, स्थान और अवधि के विवरण की पुष्टि आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति से अवश्य करें।
पृष्ठभूमि
- भारत और इंडोनेशिया के संबंध ऐतिहासिक सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित हैं, जिसमें रामायण और बाली की सांस्कृतिक परंपरा का विशेष स्थान है। आधुनिक काल में दोनों देश गुटनिरपेक्षता और बांडुंग सम्मेलन (1955) की भावना से जुड़े रहे हैं।
- भारत की पूर्व की ओर देखो नीति (Act East Policy) के अंतर्गत इंडोनेशिया आसियान में भारत का केंद्रीय साझेदार है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक भागीदारी (Strategic Partnership) का ढाँचा पहले से मौजूद है और समय के साथ इसका दायरा रक्षा, समुद्री सहयोग, ऊर्जा और रक्षा उद्योग तक बढ़ा है।
- इंडोनेशिया विश्व का सबसे बड़ा द्वीपीय देश है और उसके समुद्री मार्ग, जैसे मलक्का, सुंडा और लोम्बोक जलसंधियाँ, वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की भौगोलिक निकटता इस क्षेत्र में भारत के सामरिक हितों को समुद्री सुरक्षा से जोड़ती है।
- भारतीय नौसेना का समुद्री सुरक्षा और क्षमता-निर्माण से जुड़ा सहयोग, साथ ही सागर (SAGAR — Security and Growth for All in the Region) जैसी पहल, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को परिभाषित करती हैं।
- संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में शांति-स्थापना और आतंकवाद-विरोधी अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में सहयोग के लिए सैन्य अभ्यास विश्वास निर्माण का एक सामान्य माध्यम माने जाते हैं।
विशेष बल संयुक्त अभ्यास क्या है?
- विशेष बल सैन्य बलों की वे इकाइयाँ हैं जो जटिल, संवेदनशील और उच्च जोखिम वाले अभियानों के लिए प्रशिक्षित होती हैं, जैसे बंधक-मुक्ति, आतंकवाद-रोधी कार्रवाई और विशेष टोही।
- संयुक्त अभ्यास दो या अधिक देशों की सेनाओं के बीच साझा प्रशिक्षण है, जिसका उद्देश्य परिचालन समन्वय, तकनीकी आदान-प्रदान और एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझना है।
- सैन्य अंतरसंचालनीयता (Interoperability) का अर्थ है कि भिन्न देशों की सेनाएँ संयुक्त अभियान में साझा संचार, प्रक्रियाओं और उपकरणों के माध्यम से प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
- रक्षा कूटनीति (Defence Diplomacy) के अंतर्गत ऐसे अभ्यास विश्वास निर्माण, सामरिक संकेत और दीर्घकालिक संबंधों की मज़बूती का काम करते हैं, परंतु इनका निर्णय विदेश नीति और रक्षा मंत्रालय के समन्वय से लिया जाता है।
- भारत में विशेष बलों की प्रमुख इकाइयाँ थल सेना की पैरा एसएफ, नौसेना के मार्कोस और वायुसेना के गरुड़ कमांडो बल हैं। अभ्यास में इनमें से किसी इकाई की भागीदारी उसके प्रशिक्षण और उद्देश्य पर निर्भर करती है।
- आसियान केंद्रितता (ASEAN Centrality) की अवधारणा के अनुसार हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग की रूपरेखा आसियान के नेतृत्व और उसकी सहमति से आगे बढ़नी चाहिए, इसलिए भारत का ऐसे सहयोग को क्षेत्रीय संतुलन और समावेशिता से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
- ऐसे अभ्यास भारत की संतुलित और बहुध्रुवीय विदेश नीति के अनुरूप हैं, जिसमें किसी एक गुट के साथ सीमित न रहकर विभिन्न देशों के साथ सहयोग के बहुआयामी मार्ग खुले रखे जाते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| प्रकृति (Nature) | भारत और इंडोनेशिया के विशेष बलों के बीच द्विपक्षीय संयुक्त अभ्यास, जो सैन्य सहयोग के व्यावहारिक स्वरूप को दर्शाता है। |
| भागीदार बल | दोनों देशों की विशेष बल इकाइयाँ, जिनका कार्य अत्यंत जटिल और संवेदनशील अभियानों को संभालना है। इससे सेना-स्तरीय विश्वास और परिचालन समन्वय बढ़ता है। |
| मुख्य उद्देश्य | सामरिक कौशल का आदान-प्रदान, संयुक्त योजना और कार्यान्वयन की क्षमता का विकास, तथा सूचना साझेदारी के तरीकों को सुदृढ़ करना। |
| भौगोलिक और सामरिक महत्त्व | इंडोनेशिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थित प्रमुख समुद्री देश है। मलक्का जलडमरूमध्य और दक्षिण-पूर्व एशियाई समुद्री मार्गों से जुड़ाव के कारण यह सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में प्रासंगिक है। |
| नीतिगत संदर्भ | भारत की ‘Act East’ नीति (Act East Policy) और हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण के अंतर्गत रक्षा सहयोग को रणनीतिक साझेदारी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में देखा जाता है। |
| अंतरराष्ट्रीय संदर्भ | दोनों देश गैर-पश्चिमी और बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था में संतुलित भूमिका निभाने के पक्षधर हैं; ऐसे अभ्यास द्विपक्षीय विश्वास के साथ बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचे में भी योगदान देते हैं। |
महत्व
सामरिक (Strategic)
- विशेष बलों के बीच सहयोग से आतंकवाद-रोधी (Counter-terrorism) और उग्रवाद-रोधी अभियानों में साझा अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान संभव होता है।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सामरिक उपस्थिति और विश्वसनीय साझेदार के रूप में उसकी छवि सुदृढ़ होती है।
रक्षा कूटनीति (Defence Diplomacy)
- संयुक्त अभ्यास रक्षा कूटनीति का एक प्रभावी माध्यम है, जो सैन्य-स्तरीय संवाद को द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों से जोड़ता है।
- ऐसे आदान-प्रदान से दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच पारस्परिक समझ और भरोसा विकसित होता है।
समुद्री और क्षेत्रीय सुरक्षा (Maritime and Regional Security)
- इंडोनेशिया के साथ सहयोग दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री मार्गों की सुरक्षा के व्यापक ढांचे में योगदान देता है।
- आसियान (ASEAN) केंद्रितता के सिद्धांत के अंतर्गत भारत का रक्षा-सहयोग क्षेत्रीय संतुलन और साझा सुरक्षा हितों को बल देता है।
परिचालन क्षमता (Operational Capability)
- संयुक्त प्रशिक्षण से अंतरसंचालनीयता (Interoperability) का स्तर बढ़ता है, जो बहुराष्ट्रीय अभियानों में उपयोगी है।
- भू-भाग, जलवायु और परिस्थितियों की विविधता में प्रशिक्षण से बलों की अनुकूलनशीलता बढ़ती है।
चुनौतियाँ
1. परिचालन समन्वय की सीमाएँ
- दोनों देशों की सैन्य प्रक्रियाएँ, कमान-संरचना, संचार प्रणालियाँ और मानक संचालन प्रक्रियाएँ भिन्न होती हैं।
- भाषा और प्रशिक्षण-सिद्धांतों के अंतर से वास्तविक अभियानों में तालमेल की चुनौती बनी रहती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा और रक्षा तैयारी
2. सूचना और गोपनीयता का प्रबंधन
- विशेष बलों के अभियानों से जुड़ी खुफिया और परिचालन सूचनाओं का साझा करना अत्यंत संवेदनशील है।
- साझेदारी के बढ़ने के साथ सूचना-सुरक्षा और विश्वसनीय तंत्र सुनिश्चित करना आवश्यक होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा और साइबर/सूचना सुरक्षा
3. हिंद-प्रशांत में संतुलन की आवश्यकता
- इंडोनेशिया गुटनिरपेक्षता की परंपरा का पालन करता है, इसलिए सहयोग को किसी एक गुट से जोड़कर देखना उसकी नीति के अनुरूप नहीं है।
- क्षेत्रीय शक्तियों के बीच संतुलित और पारदर्शी सहयोग बनाए रखना कूटनीतिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत के विदेश संबंध और क्षेत्रीय संगठन
4. समुद्री सुरक्षा के समक्ष गैर-पारंपरिक खतरे
- तस्करी, अवैध मत्स्यन, समुद्री डकैती और मानव-तस्करी जैसे खतरे द्विपक्षीय सहयोग के लिए निरंतर चुनौती हैं।
- केवल सैन्य अभ्यास पर्याप्त नहीं है; तटरक्षक, खुफिया और नौवहन-सहयोग का समन्वित ढांचा आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन
5. नीतिगत निरंतरता और संस्थागत समन्वय
- रक्षा सहयोग का लाभ तभी स्थायी होता है जब उसे संस्थागत तंत्र और नियमित समीक्षा से जोड़ा जाए।
- राजनयिक, सैन्य और आर्थिक पहलों के बीच समन्वय की कमी से सहयोग खंडित हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सरकार की नीतियाँ और हस्तक्षेप
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| प्रक्रियागत अंतर | दोनों सेनाओं के सिद्धांत, प्रशिक्षण मानक और कमान-संरचना में भिन्नता से परिचालन तालमेल प्रभावित हो सकता है। |
| सूचना सुरक्षा | संवेदनशील खुफिया और परिचालन जानकारी के साझाकरण में विश्वास और सुरक्षित तंत्र की आवश्यकता है। |
| क्षेत्रीय संतुलन | इंडोनेशिया की गुटनिरपेक्ष नीति के कारण सहयोग को सीमित और संतुलित रखना पड़ता है। |
| गैर-पारंपरिक खतरे | तस्करी, समुद्री डकैती और अवैध गतिविधियों से निपटने के लिए केवल सैन्य अभ्यास पर्याप्त नहीं है। |
| संस्थागत निरंतरता | अभ्यासों का दीर्घकालिक प्रभाव तभी होगा जब उनके परिणामों का नियमित मूल्यांकन और अनुवर्ती कार्रवाई हो। |
आगे की राह
- प्रशिक्षण और अभ्यासों के बाद सीखे गए पाठों (Lessons Learned) का दस्तावेजीकरण और संयुक्त मूल्यांकन तंत्र विकसित किया जाए।
- मानक संचालन प्रक्रियाओं और संचार प्रणालियों में अंतरसंचालनीयता बढ़ाने के लिए नियमित तकनीकी संवाद स्थापित किया जाए।
- सूचना-साझाकरण के लिए सुरक्षित प्रोटोकॉल और विश्वास-आधारित तंत्र को संस्थागत रूप दिया जाए।
- समुद्री सुरक्षा में तटरक्षक, नौवहन और खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वित सहयोग को अभ्यास के साथ जोड़ा जाए।
- आसियान और हिंद-प्रशांत के बहुपक्षीय मंचों के साथ द्विपक्षीय सहयोग का तालमेल बनाया जाए, ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे।
- आर्थिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को रक्षा सहयोग के समानांतर बढ़ाया जाए, जिससे संबंधों की बहु-आयामी आधारशिला मजबूत हो।
- रक्षा कूटनीति की नीति को नियमित द्विपक्षीय संवाद और उच्च-स्तरीय समीक्षा के माध्यम से निरंतरता दी जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
व्यापक रणनीतिक भागीदारी (Comprehensive Strategic Partnership) · संयुक्त विशेष बल अभ्यास · हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) · एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy) · आसियान केंद्रीयता (ASEAN Centrality) · मलक्का जलसंधि (Strait of Malacca) · समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) · सागर (SAGAR) दृष्टिकोण · अंडमान और निकोबार कमान (Andaman and Nicobar Command) · अंतर-संचालनीयता (Interoperability) · स्वतंत्र एवं सक्रिय विदेश नीति · रक्षा कूटनीति (Defence Diplomacy)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का राज्य का नीति-निर्देश।
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 14: विदेशी देशों के साथ संधियाँ और समझौते करना।
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 1: भारत की रक्षा, सशस्त्र बल और युद्ध-संबंधी विषय।
अवधारणा प्रवाह
भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की रूपरेखा (Act East Policy और हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण) के अंतर्गत पारस्परिक विश्वास का विकास। → दोनों देशों के विशेष बलों की संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधि का आयोजन। → सामरिक कौशल, प्रक्रियाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान। → अंतरसंचालनीयता और परिचालन समन्वय में वृद्धि। → रक्षा कूटनीति के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा-संतुलन का सुदृढ़ीकरण। → आतंकवाद-रोधी, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के साझा हितों में योगदान।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक भागीदारी (Comprehensive Strategic Partnership) स्थापित है।
2. इंडोनेशिया आसियान (ASEAN) का सदस्य देश है।
3. इंडोनेशिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक भागीदारी वर्ष 2018 में स्थापित हुई थी। कथन 2 सही है: इंडोनेशिया आसियान का संस्थापक सदस्य है। कथन 3 गलत है, क्योंकि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य केवल पाँच देश (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, अमेरिका) हैं; इंडोनेशिया इसमें शामिल नहीं है।
Q2. निम्नलिखित अभिकथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): दो देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास से उनकी अंतर-संचालनीयता (Interoperability) बढ़ती है।
कारण (R): संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान दोनों सेनाएँ साझा प्रक्रियाओं, संचार प्रणालियों और परिचालन पद्धतियों का अभ्यास करती हैं।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — अभिकथन सही है, क्योंकि संयुक्त अभ्यास सेनाओं के बीच समन्वय और परिचालन सामंजस्य बढ़ाते हैं। कारण भी सही है और सीधे तौर पर अभिकथन की व्याख्या करता है, क्योंकि साझा प्रक्रियाओं और संचार प्रणालियों के अभ्यास से ही अंतर-संचालनीयता विकसित होती है।
Q3. निम्नलिखित जलसंधियों को उनसे जुड़े भौगोलिक क्षेत्रों से सुमेलित कीजिए:
सूची I (जलसंधि)
A. मलक्का जलसंधि
B. सुंडा जलसंधि
C. लोम्बोक जलसंधि
सूची II (भौगोलिक क्षेत्र)
1. जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच
2. बाली और लोम्बोक द्वीपों के बीच
3. अंडमान सागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ती है
सही सुमेलन चुनिए:
- A-1, B-2, C-3
- A-3, B-1, C-2
- A-2, B-3, C-1
- A-3, B-2, C-1
उत्तर: A-3, B-1, C-2 — मलक्का जलसंधि अंडमान सागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ती है (A-3)। सुंडा जलसंधि जावा और सुमात्रा के बीच है (B-1)। लोम्बोक जलसंधि बाली और लोम्बोक द्वीपों के बीच है (C-2)। इसी कारण यह क्रम सही है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक भागीदारी के अंतर्गत बढ़ता रक्षा सहयोग, जिसमें संयुक्त विशेष बल अभ्यास भी सम्मिलित है, भारत की हिंद-प्रशांत नीति का एक महत्त्वपूर्ण आयाम माना जाता है। इस सहयोग के रणनीतिक आधारों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि सैन्य सहयोग को समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग से जोड़ना क्यों आवश्यक है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर के मुख्य बिंदु: (1) भूमिका: संयुक्त विशेष बल अभ्यास को व्यापक रणनीतिक भागीदारी (2018) और एक्ट ईस्ट नीति (2014 में घोषित) के व्यापक ढाँचे में रखें; हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका और आसियान केंद्रीयता का उल्लेख करें। (2) रणनीतिक आधार: इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति (मलक्का, सुंडा और लोम्बोक जलसंधियों पर नियंत्रण), विश्व व्यापार के समुद्री मार्गों की सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी और समुद्री डकैती-रोधी सहयोग। (3) भारतीय संस्थागत संदर्भ: अंडमान और निकोबार कमान (2001, त्रि-सेवा कमान) की भूमिका; सागर (SAGAR) दृष्टिकोण (2015) के अंतर्गत क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास। (4) सैन्य सहयोग का महत्त्व: अंतर-संचालनीयता, सैनिकों के प्रशिक्षण, सूचना-साझाकरण और रक्षा कूटनीति के माध्यम से विश्वास निर्माण। (5) संतुलित दृष्टिकोण: इंडोनेशिया की स्वतंत्र एवं सक्रिय विदेश नीति को देखते हुए भारत के लिए यह सहयोग गठबंधन नहीं, बल्कि सहभागिता पर आधारित है; सहयोग की सीमाएँ (क्षमता अंतर, सीमित पैमाना, द्विपक्षीय प्राथमिकताओं में अंतर) का उल्लेख करें। (6) समापन: रक्षा सहयोग को आर्थिक, समुद्री और तकनीकी सहयोग के साथ संस्थागत बनाने से दीर्घकालिक रणनीतिक स्थिरता संभव है; सामरिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए संतुलित साझेदारी पर बल दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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