30 Sep भारत के स्वदेशी तकनीक अभियान को मिला बड़ा बढ़ावा: एचडी कुमारस्वामी
✎ भारत का स्वदेशी प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने और देश को वैश्विक नवाचार व विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित विषय
- Prelims: स्वदेशी प्रौद्योगिकी, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र, विनिर्माण क्षेत्र, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, अनुसंधान एवं विकास
- Essay: आत्मनिर्भर भारत: प्रौद्योगिकी, नवाचार और आर्थिक संवृद्धि का संगम, भारत में स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विकास: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत का स्वदेशी प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने और देश को वैश्विक नवाचार व विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
यह रिपोर्ट भारत के स्वदेशी प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन और विनिर्माण क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयासों पर प्रकाश डालती है, जो देश को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Self-Reliant India) अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में स्वदेशीकरण (Indigenisation) को बढ़ावा दे रही है, जिसमें प्रौद्योगिकी और विनिर्माण प्रमुख हैं।
- स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विकास न केवल आयात पर निर्भरता कम करता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक संप्रभुता और रोजगार सृजन में भी योगदान देता है।
- भारी उद्योग मंत्रालय भारत के विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) पहल का उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है, जिसमें स्वदेशी नवाचार और उत्पादन पर विशेष जोर दिया गया है।
- सरकार स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को अनुसंधान एवं विकास (Research and Development – R&D) तथा नवाचार के लिए प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।
स्वदेशी प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन क्या है?
- स्वदेशी प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन एक व्यापक नीतिगत ढाँचा है जिसका उद्देश्य देश के भीतर वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी विकास और नवाचार को बढ़ावा देना है।
- इसका मुख्य लक्ष्य आयातित प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता को कम करना और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।
- इसमें सरकारी वित्तपोषण, कर प्रोत्साहन, बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights – IPR) का संरक्षण और अनुसंधान संस्थानों एवं उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
- यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों का एक अभिन्न अंग है, जो स्थानीय विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने पर केंद्रित है।
- स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विकास रक्षा, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
- यह नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Innovation Ecosystem) को बढ़ावा देता है, जिसमें स्टार्टअप्स, अकादमिक संस्थान और उद्योग सभी मिलकर काम करते हैं।
- इस प्रोत्साहन से उच्च-कौशल वाले रोजगारों का सृजन होता है और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति मजबूत होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास | यह भारत की आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) को बढ़ावा देता है और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता को कम करता है। |
| MHI उद्योग त्वरक प्रभाव रिपोर्ट | यह स्वदेशी नवाचारों के प्रभाव और प्रगति का मूल्यांकन करता है, जिससे भविष्य की नीतियों और निवेशों को दिशा मिलती है। |
| Navigyaan 2026 | यह एक मंच प्रदान करता है जहाँ उद्योग, शिक्षाविद और सरकार स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास के लिए सहयोग कर सकते हैं। |
| उद्योग त्वरक (Industry Accelerator) | यह स्टार्टअप्स और उभरती प्रौद्योगिकियों को आवश्यक सहायता, मार्गदर्शन और संसाधन प्रदान करके उनके विकास को गति देता है। |
| रोजगार सृजन | स्वदेशी प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विकास से उच्च-कुशल नौकरियों का सृजन होता है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- स्वदेशी प्रौद्योगिकी से आयात पर निर्भरता कम होती है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है और व्यापार घाटा (Trade Deficit) कम होता है।
- नवाचार और अनुसंधान एवं विकास (Research & Development) में निवेश से नए उद्योगों का उदय होता है, जो आर्थिक विविधीकरण (Economic Diversification) को बढ़ावा देता है।
- यह भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करता है।
सामरिक महत्व
- महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों जैसे रक्षा, अंतरिक्ष और ऊर्जा में स्वदेशी क्षमताएँ राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) को मजबूत करती हैं।
- प्रौद्योगिकी संप्रभुता (Technological Sovereignty) सुनिश्चित करती है कि भारत अपनी रणनीतिक आवश्यकताओं के लिए बाहरी दबावों पर निर्भर न रहे।
सामाजिक महत्व
- स्वदेशी नवाचार स्थानीय समस्याओं के लिए अनुकूलित समाधान प्रदान कर सकते हैं, जिससे जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
- यह उच्च शिक्षा और कौशल विकास को प्रोत्साहित करता है, जिससे मानव पूंजी का विकास होता है और युवाओं के लिए अवसर बढ़ते हैं।
शासनिक महत्व
- यह सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को बढ़ावा देता है, जिससे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Innovation Ecosystem) मजबूत होता है।
चुनौतियाँ
1. अनुसंधान एवं विकास में निवेश की कमी
- भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का एक छोटा हिस्सा ही अनुसंधान एवं विकास पर खर्च होता है, जो विकसित देशों की तुलना में काफी कम है।
- निजी क्षेत्र द्वारा अनुसंधान एवं विकास में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन और नीतियां अभी भी विकसित की जा रही हैं।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ
2. कौशल अंतर (Skill Gap)
- उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक विशिष्ट कौशल वाले कार्यबल की कमी है।
- उद्योग और शिक्षा जगत के बीच समन्वय की कमी के कारण पाठ्यक्रम अक्सर उद्योग की मांगों के अनुरूप नहीं होते।
यूपीएससी लिंक: कौशल विकास और रोजगार
3. बुनियादी ढाँचे की कमी
- उच्च-स्तरीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं, परीक्षण सुविधाओं और प्रोटोटाइप विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे की कमी है।
- ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल और भौतिक बुनियादी ढाँचे की असमान पहुँच नवाचार को बाधित करती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, हवाई अड्डे, रेलवे
4. बाजार तक पहुँच और व्यावसायीकरण
- स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को अक्सर बड़े पैमाने पर बाजार तक पहुँचने और व्यावसायिक रूप से सफल होने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- उपभोक्ताओं और उद्योगों के बीच स्वदेशी उत्पादों पर विश्वास बनाने में समय लगता है।
यूपीएससी लिंक: उदारीकरण के अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
5. बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR) संरक्षण
- बौद्धिक संपदा के प्रभावी संरक्षण और प्रवर्तन में चुनौतियाँ नवाचार को हतोत्साहित कर सकती हैं।
- पेटेंट फाइलिंग और प्रबंधन की प्रक्रिया अक्सर जटिल और समय लेने वाली होती है।
यूपीएससी लिंक: बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित मुद्दे
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सीमित फंडिंग | स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों के लिए पर्याप्त प्रारंभिक पूंजी और विस्तार निधि तक पहुँच एक बड़ी बाधा है। |
| नियामक बाधाएँ | जटिल और बदलते नियामक ढाँचे नवाचार और व्यापार करने में चुनौतियाँ पैदा करते हैं। |
| वैश्विक प्रतिस्पर्धा | अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में स्थापित खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना, विशेष रूप से लागत और पैमाने के संदर्भ में। |
| प्रौद्योगिकी हस्तांतरण | अनुसंधान संस्थानों से उद्योगों तक प्रौद्योगिकी के प्रभावी हस्तांतरण में अंतराल मौजूद हैं। |
| सार्वजनिक खरीद नीतियाँ | सरकारी खरीद में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने के बावजूद, प्रक्रियात्मक जटिलताएँ बनी हुई हैं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)
- उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive – PLI) योजनाएँ
- स्टार्टअप इंडिया (Startup India)
- अटल इनोवेशन मिशन (Atal Innovation Mission)
आगे की राह
- अनुसंधान एवं विकास में सार्वजनिक और निजी निवेश को बढ़ाना, विशेष रूप से उभरती प्रौद्योगिकियों में।
- उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करना और शिक्षा-उद्योग सहयोग को बढ़ावा देना।
- स्वदेशी स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों के लिए वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुँच को सुगम बनाना।
- बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रभावी संरक्षण और प्रवर्तन के लिए एक मजबूत ढाँचा विकसित करना।
- नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बेहतर बनाना ताकि नवाचार को प्रोत्साहन मिले।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देना ताकि ज्ञान और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को सुगम बनाया जा सके।
- सरकारी खरीद में स्वदेशी उत्पादों और समाधानों को प्राथमिकता देने वाली नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वदेशी प्रौद्योगिकी · आत्मनिर्भर भारत · नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र · अनुसंधान एवं विकास · विनिर्माण क्षेत्र · स्टार्टअप इंडिया · मेक इन इंडिया · आर्थिक संवृद्धि · रोजगार सृजन · तकनीकी आत्मनिर्भरता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A(j)’, ‘note’: ‘उत्कृष्टता के लिए प्रयास करना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्य सूची में विज्ञान’}
अवधारणा प्रवाह
स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास को प्रोत्साहन → MHI उद्योग त्वरक और Navigyaan जैसे मंच → नवाचार और अनुसंधान एवं विकास में वृद्धि → आत्मनिर्भरता और आर्थिक संवृद्धि → राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
2. ‘मेक इन इंडिया’ पहल का मुख्य लक्ष्य भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है।
3. ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल का उद्देश्य भारत में नवाचार और स्टार्टअप्स के विकास के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। कथन 2 सही है। ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) पहल का उद्देश्य भारत को विनिर्माण, डिजाइन और नवाचार का एक वैश्विक केंद्र बनाना है। कथन 3 सही है। ‘स्टार्टअप इंडिया’ (Startup India) पहल का उद्देश्य भारत में स्टार्टअप्स के विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
Q2. अभिकथन (A): भारत सरकार स्वदेशी प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न नीतियों और पहलों को लागू कर रही है।
कारण (R): स्वदेशी प्रौद्योगिकी नवाचार को बढ़ावा देती है और आयात पर निर्भरता कम करती है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Atmanirbhar Bharat) जैसी कई पहलों के माध्यम से स्वदेशी प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दे रही है। कारण (R) भी सही है क्योंकि स्वदेशी प्रौद्योगिकी देश के भीतर नवाचार को प्रोत्साहित करती है और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करती है, जिससे आर्थिक संप्रभुता बढ़ती है। R, A का सही स्पष्टीकरण भी है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में स्वदेशी प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा की गई प्रमुख पहलों का विश्लेषण कीजिए। यह देश के आर्थिक विकास और रणनीतिक स्वायत्तता में कैसे योगदान करती है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** स्वदेशी प्रौद्योगिकी के महत्व और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **प्रमुख सरकारी पहलें:**
* **मेक इन इंडिया (Make in India):** विनिर्माण को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने पर ध्यान।
* **स्टार्टअप इंडिया (Startup India):** नवाचार और उद्यमिता के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण।
* **राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission):** स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता।
* **उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना:** विशिष्ट क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना।
* **रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण:** रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता।
* **अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश:** वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान को प्रोत्साहन।
3. **आर्थिक विकास में योगदान:**
* रोजगार सृजन।
* विनिर्माण क्षमता में वृद्धि।
* निर्यात प्रोत्साहन और आयात प्रतिस्थापन।
* सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि।
* तकनीकी कौशल विकास।
4. **रणनीतिक स्वायत्तता में योगदान:**
* महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता में कमी (जैसे रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा)।
* भू-राजनीतिक दबावों का सामना करने की क्षमता।
* राष्ट्रीय सुरक्षा सुदृढ़ीकरण।
* तकनीकी संप्रभुता।
5. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** वित्तपोषण, बुनियादी ढाँचा, कौशल अंतर जैसी चुनौतियों का संक्षिप्त उल्लेख और उनके समाधान के लिए सुझाव।
6. **निष्कर्ष:** स्वदेशी प्रौद्योगिकी के माध्यम से भारत के वैश्विक शक्ति बनने की क्षमता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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