05 Oct कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता ने जन्मे 5 स्वस्थ शावक, भारत में चीता संख्या पहुंची 60
✎ चीता पुनरुत्पादन परियोजना भारत में विलुप्त हो चुके चीतों की आबादी को पुनः स्थापित करने और देश की जैव-विविधता को समृद्ध करने की एक महत्वपूर्ण पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, जैव-विविधता और आपदा प्रबंधन
- Prelims: चीता पुनरुत्पादन परियोजना, कूनो राष्ट्रीय उद्यान, अफ्रीकी चीता, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, IUCN रेड लिस्ट, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- Essay: भारत में वन्यजीव संरक्षण के प्रयास और चुनौतियाँ, जैव-विविधता का महत्व और मानव-वन्यजीव संघर्ष
त्वरित पुनरावृत्ति: चीता पुनरुत्पादन परियोजना भारत में विलुप्त हो चुके चीतों की आबादी को पुनः स्थापित करने और देश की जैव-विविधता को समृद्ध करने की एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
यह घटना भारत में चीता पुनरुत्पादन परियोजना (Cheetah Reintroduction Project) की सफलता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और देश में वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को बल प्रदान करती है।
पृष्ठभूमि
- भारत में चीतों को वर्ष 1952 में विलुप्त (Extinct) घोषित कर दिया गया था, जिसका मुख्य कारण अत्यधिक शिकार और उनके प्राकृतिक आवास का नुकसान था।
- वर्ष 2022 में, ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुल 20 चीते भारत लाए गए थे, जिन्हें मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया।
- इस परियोजना का उद्देश्य भारत में चीता की आबादी को फिर से स्थापित करना और देश की जैव-विविधता को बढ़ाना है।
- कूनो राष्ट्रीय उद्यान को चीतों के लिए उपयुक्त आवास के रूप में चुना गया था, क्योंकि यहाँ पर्याप्त शिकार आधार और अनुकूल जलवायु परिस्थितियाँ मौजूद हैं।
- यह परियोजना पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) और अन्य हितधारकों के सहयोग से चलाई जा रही है।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature – IUCN) की रेड लिस्ट में चीता को ‘असुरक्षित’ (Vulnerable) श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।
चीता पुनरुत्पादन परियोजना क्या है?
- चीता पुनरुत्पादन परियोजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका लक्ष्य भारत में चीतों की आबादी को पुनः स्थापित करना है, जो लगभग सात दशकों पहले विलुप्त हो गए थे।
- इस परियोजना के तहत, अफ्रीकी चीतों को भारत लाकर उन्हें विशेष रूप से तैयार किए गए आवासों में छोड़ा जा रहा है, ताकि वे यहाँ प्रजनन कर सकें और अपनी संख्या बढ़ा सकें।
- परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य चीतों की एक व्यवहार्य मेटा-जनसंख्या (Meta-population) स्थापित करना है, जो भारत में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करेगी।
- यह परियोजना स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करने और उन्हें इसमें शामिल करने पर भी ध्यान केंद्रित करती है।
- कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अलावा, भविष्य में चीतों के लिए अन्य उपयुक्त स्थलों की पहचान करने की भी योजना है, ताकि उनकी आबादी को विभिन्न क्षेत्रों में फैलाया जा सके।
- यह परियोजना भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) के तहत संरक्षित प्रजातियों के संरक्षण के प्रयासों का एक हिस्सा है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| चीता पुनर्प्रवेश परियोजना | भारत में चीतों की विलुप्त आबादी को फिर से स्थापित करने का प्रयास। |
| कूनो राष्ट्रीय उद्यान | परियोजना के लिए चयनित प्रमुख स्थल, जिसमें चीतों के लिए उपयुक्त पर्यावास (Habitat) है। |
| भारतीय मूल के शावक | भारत में चीता आबादी के प्राकृतिक प्रजनन और वृद्धि का संकेत। |
| आबादी में वृद्धि (60 तक) | परियोजना की प्रारंभिक सफलता और संरक्षण प्रयासों की प्रभावशीलता को दर्शाता है। |
| जैव विविधता संरक्षण | पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में शीर्ष शिकारी की वापसी से संतुलन में सुधार। |
महत्व
पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- चीता, खाद्य श्रृंखला (Food Chain) में एक शीर्ष शिकारी के रूप में, शाकाहारी जानवरों की आबादी को नियंत्रित करने और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- चीतों की वापसी से घास के मैदानों और खुले वनों के पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य बेहतर होगा, जिससे अन्य प्रजातियों को भी लाभ मिलेगा।
- यह परियोजना भारत की जैव विविधता (Biodiversity) को समृद्ध करती है और देश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाती है।
वैज्ञानिक और अनुसंधान
- यह परियोजना वन्यजीव स्थानांतरण (Wildlife Translocation) और पुनर्प्रवेश के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करती है।
- चीतों के व्यवहार, प्रजनन, अनुकूलन और शिकार पैटर्न पर शोध से संरक्षण रणनीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
- आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) और आबादी के स्वास्थ्य की निगरानी से भविष्य के संरक्षण कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण डेटा मिलेगा।
सामाजिक और आर्थिक
- कूनो राष्ट्रीय उद्यान और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- वन्यजीव पर्यटन से प्राप्त राजस्व का उपयोग संरक्षण गतिविधियों और स्थानीय विकास के लिए किया जा सकता है।
- यह परियोजना स्थानीय समुदायों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता और भागीदारी को बढ़ा सकती है।
चुनौतियाँ
1. पर्यावास की वहन क्षमता
- कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त शिकार और सुरक्षित क्षेत्र सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- अन्य शिकारियों जैसे तेंदुए और लकड़बग्घे के साथ चीतों का सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: वन्यजीव संरक्षण
2. मानव-वन्यजीव संघर्ष
- चीतों के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से बाहर निकलने और मानव बस्तियों में प्रवेश करने की संभावना से संघर्ष बढ़ सकता है।
- स्थानीय समुदायों को चीता संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करना और उनकी चिंताओं को दूर करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: संरक्षण के मुद्दे
3. आनुवंशिक विविधता
- पुनर्प्रवेशित चीतों की आबादी में पर्याप्त आनुवंशिक विविधता बनाए रखना दीर्घकालिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
- भविष्य में और चीतों को लाने या आनुवंशिक विनिमय (Genetic Exchange) की संभावनाओं पर विचार करना पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: जैव विविधता: संरक्षण और खतरे
4. रोग और स्वास्थ्य प्रबंधन
- चीतों को स्थानीय बीमारियों और परजीवियों से बचाना एक चुनौती है।
- नियमित स्वास्थ्य निगरानी और पशु चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: वन्यजीव स्वास्थ्य
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पर्याप्त शिकार आधार | चीतों की बढ़ती संख्या के लिए कूनो में पर्याप्त शिकार प्रजातियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
| क्षेत्रीय विस्तार | चीतों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित क्षेत्र बनाए रखना, क्योंकि वे बड़े क्षेत्रों में घूमते हैं। |
| अन्य शिकारियों से प्रतिस्पर्धा | तेंदुए और लकड़बग्घे जैसे अन्य शिकारियों के साथ चीतों की प्रतिस्पर्धा का प्रबंधन। |
| रोगों का जोखिम | स्थानीय बीमारियों और परजीवियों के प्रति चीतों की संवेदनशीलता। |
| आनुवंशिक संकीर्णता | छोटी प्रारंभिक आबादी से उत्पन्न होने वाली आनुवंशिक विविधता की कमी का दीर्घकालिक प्रभाव। |
| जलवायु परिवर्तन का प्रभाव | बदलते मौसम पैटर्न और पर्यावास पर उनके संभावित नकारात्मक प्रभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah)
आगे की राह
- कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के लिए पर्यावास की वहन क्षमता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाए और आवश्यकतानुसार विस्तार या अन्य उपयुक्त स्थलों की पहचान की जाए।
- चीतों के शिकार आधार को मजबूत करने के लिए शाकाहारी जानवरों की आबादी की निगरानी और प्रबंधन किया जाए।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर संवाद, जागरूकता कार्यक्रम और क्षतिपूर्ति तंत्र को मजबूत किया जाए।
- चीतों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाए और बीमारियों तथा परजीवियों के प्रबंधन के लिए प्रभावी पशु चिकित्सा प्रोटोकॉल लागू किए जाएं।
- चीतों के व्यवहार, प्रजनन और अनुकूलन पर दीर्घकालिक वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाए ताकि संरक्षण रणनीतियों को बेहतर बनाया जा सके।
- आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने के लिए भविष्य में आवश्यकतानुसार और चीतों को लाने की संभावनाओं का पता लगाया जाए।
- चीता संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए और उन्हें पर्यटन तथा अन्य संबंधित गतिविधियों के माध्यम से लाभान्वित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
चीता पुनर्प्रवेश परियोजना · कूनो राष्ट्रीय उद्यान · वन्यजीव संरक्षण · पर्यावरण संरक्षण अधिनियम · वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 · IUCN रेड लिस्ट · जैव विविधता संरक्षण · पारिस्थितिक संतुलन · प्रोजेक्ट टाइगर · संरक्षण प्रयास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 48A’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘अनुच्छेद 51A (g)’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
चीता पुनर्प्रवेश परियोजना का शुभारंभ → नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों का स्थानांतरण → कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों का अनुकूलन → भारतीय मूल के शावकों का जन्म → चीता आबादी में वृद्धि और संरक्षण सफलता → जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र का संवर्धन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चीता पुनर्प्रवेश परियोजना का उद्देश्य भारत में चीतों की आबादी को पुनर्जीवित करना है, जिन्हें 1952 में विलुप्त घोषित कर दिया गया था।
2. कूनो राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश, चीता पुनर्प्रवेश परियोजना के लिए चुना गया एकमात्र स्थल है।
3. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत चीता को संरक्षित प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। भारत में चीतों को 1952 में विलुप्त घोषित किया गया था और यह परियोजना उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए है। कथन 2 गलत है क्योंकि कूनो राष्ट्रीय उद्यान एक प्रमुख स्थल है, लेकिन अन्य संभावित स्थलों पर भी विचार किया गया है और भविष्य में विचार किया जा सकता है। कथन 3 गलत है क्योंकि चीता को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है, बल्कि इसे IUCN की रेड लिस्ट में ‘असुरक्षित’ (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
Q2. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. चीता: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I
2. कूनो राष्ट्रीय उद्यान: मध्य प्रदेश
3. प्रोजेक्ट टाइगर: 1973
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — युग्म 1 गलत है। चीता वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध नहीं है। युग्म 2 सही है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में स्थित है। युग्म 3 सही है। प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू किया गया था।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में चीता पुनर्प्रवेश परियोजना के उद्देश्यों और चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। यह परियोजना देश में जैव विविधता संरक्षण के व्यापक प्रयासों में किस प्रकार योगदान करती है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में चीता पुनर्प्रवेश परियोजना का संक्षिप्त विवरण दें और भारत में चीतों की ऐतिहासिक स्थिति का उल्लेख करें। मुख्य भाग में, परियोजना के उद्देश्यों को विस्तार से बताएं, जैसे कि पारिस्थितिक संतुलन बहाल करना, जैव विविधता बढ़ाना और घास के मैदानों के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना। इसके बाद, परियोजना के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालें, जिनमें चीतों का अनुकूलन, शिकार की उपलब्धता, मानव-वन्यजीव संघर्ष, आनुवंशिक विविधता और आवास की क्षमता शामिल है। अंत में, यह बताएं कि यह परियोजना भारत के व्यापक जैव विविधता संरक्षण प्रयासों, जैसे कि प्रोजेक्ट टाइगर और अन्य प्रजाति-विशिष्ट संरक्षण पहलों के साथ कैसे जुड़ती है और उन्हें कैसे मजबूत करती है। निष्कर्ष में, परियोजना के दीर्घकालिक महत्व और सतत संरक्षण रणनीतियों की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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