01 Nov गृह क्रेताओं तक जीएसटी लाभ पहुंचाने का आह्वान: किशन रेड्डी
✎ कर में कटौती का लाभ गृहक्रेता तक पहुँचाना धारा 171 का वैधानिक दायित्व है, जबकि पारदर्शिता और क्रेता-संरक्षण RERA, 2016 के माध्यम से सुनिश्चित होते हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान, संघवाद एवं सार्वजनिक नीति (RERA, उपभोक्ता हित, नियामक संस्थाएँ) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (वस्तु एवं सेवा कर, अप्रत्यक्ष कर सुधार, आधारभूत संरचना वित्तपोषण) | GS Paper I — भारत का शहरीकरण एवं नगरीय समस्याएँ (Transit-Oriented Development, सतत नगर)
- Prelims: वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद — अनुच्छेद 279A, अनुच्छेद 246A — GST पर कानून बनाने की संसद और राज्य विधानमंडलों की शक्ति, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 171 (लाभ-अर्जन-रोधी प्रावधान), रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (RERA) — पंजीकरण और पारदर्शिता, RERA प्राधिकरण — राज्य स्तर पर गठन और परियोजना पंजीकरण, NAREDCO — राष्ट्रीय अचल संपदा विकास परिषद (एक उद्योग-निकाय, वैधानिक संस्था नहीं), Transit-Oriented Development (TOD) — परिवहन-आधारित शहरी नियोजन, शहरी चुनौती कोष (Urban Challenge Fund) — ₹1 लाख करोड़, क्षेत्रीय रिंग रोड (Regional Ring Road) और बाह्य रिंग रेल की अवधारणा
- Essay: कर सुधार का लाभ अंतिम उपभोक्ता तक कैसे पहुँचे: बाज़ार, नियमन और नैतिकता का संतुलन, सतत और रहने योग्य नगर: परिवहन, आवास और रोज़गार का समन्वित नियोजन
त्वरित पुनरावृत्ति: कर में कटौती का लाभ गृहक्रेता तक पहुँचाना धारा 171 का वैधानिक दायित्व है, जबकि पारदर्शिता और क्रेता-संरक्षण RERA, 2016 के माध्यम से सुनिश्चित होते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने हैदराबाद में NAREDCO के तेलंगाना प्रॉपर्टी शो के समापन दिवस पर कहा कि GST सुधारों (जिन्हें GST 2.0 कहा गया है) और नई आयकर व्यवस्था से उपभोक्ता क्रय-शक्ति बढ़ी है और निर्माण लागत लगभग 3-5 प्रतिशत घटने का अनुमान है। उन्होंने अचल संपदा उद्योग से आग्रह किया कि यह लाभ गृहक्रेताओं तक पहुँचाया जाए। इसी अवसर पर उन्होंने परिवहन-आधारित शहरी नियोजन (TOD) अपनाने, शहरी चुनौती कोष, क्षेत्रीय रिंग रोड और प्रस्तावित बाह्य रिंग रेल जैसी परियोजनाओं, तथा RERA के अंतर्गत पंजीकरण से पारदर्शिता बढ़ने का उल्लेख किया। यह समाचार कर-सुधार के वितरणात्मक प्रभाव, नियामक ढाँचे की भूमिका और शहरी आधारभूत संरचना की दिशा, तीनों को एक साथ जोड़ता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में वस्तु एवं सेवा कर संविधान के 101वें संशोधन (2016) से लागू हुआ। इसके तहत अनुच्छेद 246A और अनुच्छेद 279A जोड़े गए, जिनसे केंद्र और राज्य दोनों को कर-क्षेत्र में साझा विधायी शक्ति और GST परिषद के माध्यम से सहकारी संघवाद का ढाँचा मिला।
- GST दरों के युक्तिकरण (GST 2.0) के दौरान कई वस्तुओं और सेवाओं पर दरें घटाई या समेकित की गईं। निर्माण सामग्री और आवास से जुड़े इनपुट पर कर-भार घटने से लागत पर असर पड़ने की अपेक्षा रहती है, परंतु इसका अंतिम लाभ बाज़ार की प्रतिस्पर्धा और अनुबंध-शर्तों पर निर्भर करता है।
- धारा 171 के अंतर्गत यह सुनिश्चित करने का प्रावधान है कि कर में कटौती या ITC लाभ का पूरा हिस्सा उपभोक्ता को मिले। पहले इसके लिए राष्ट्रीय लाभ-अर्जन-रोधी प्राधिकरण (National Anti-Profiteering Authority) था; 2022 के संशोधन के बाद इन मामलों का निपटारा प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) द्वारा किया जाता है।
- RERA, 2016 संसद द्वारा पारित केंद्रीय कानून है, जिसके तहत परियोजनाओं का पंजीकरण, क्रेता-विक्रेता अनुबंध में पारदर्शिता और विवाद-समाधान के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण का प्रावधान है। राज्य स्तर पर RERA प्राधिकरण इसे लागू करते हैं।
- शहरी क्षेत्रों में आवास, परिवहन और आधारभूत संरचना के समन्वय के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर शहरी चुनौती कोष जैसी पहलें आई हैं, जिनका उद्देश्य भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों के पुनर्विकास और जल-आपूर्ति व स्वच्छता ढाँचे का विस्तार है।
कर-लाभ हस्तांतरण (Pass-on of Tax Benefits) और RERA क्या है?
- कर-लाभ हस्तांतरण का अर्थ है कि कर-दर में कमी या इनपुट कर क्रेडिट (ITC) से होने वाली लागत-बचत का लाभ विक्रेता या निर्माता अंतिम क्रेता को मूल्य में कमी के रूप में दे।
- वस्तु एवं सेवा कर में यह दायित्व केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 171 से जुड़ा है, जो लाभ-अर्जन (profiteering) को रोकने का प्रावधान करती है।
- अचल संपदा क्षेत्र में पारदर्शिता का मुख्य साधन RERA है, जिसके अंतर्गत आवासीय परियोजनाओं का पंजीकरण अनिवार्य है और क्रेता को परियोजना की स्वीकृति, समय-सीमा और धनराशि की जानकारी मिलती है।
- RERA के तहत निर्धारित समय पर कब्ज़ा न मिलने या अनुबंध-भंग की स्थिति में क्रेता को धनवापसी या क्षतिपूर्ति माँगने का अधिकार है।
- NAREDCO एक उद्योग-संगठन है, जो नीति-संवाद और मानक-निर्माण में योगदान देता है; यह कोई वैधानिक नियामक संस्था नहीं है।
- Transit-Oriented Development (TOD) में आवास, कार्यालय, बाज़ार और सार्वजनिक परिवहन (मेट्रो, बस, रेल) को एक-दूसरे से जोड़कर नियोजित किया जाता है, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता घटती है।
- शहरी चुनौती कोष जैसे वित्तीय साधन नगरों को आर्थिक विकास के इंजन बनाने के लिए पुनर्विकास और जल-आपूर्ति व स्वच्छता अवसंरचना में निवेश को प्रोत्साहित करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता (Feature) | महत्व (Significance) |
|---|---|
| वस्तु एवं सेवा कर (GST) में सुधार (GST 2.0) और नई आयकर व्यवस्था | उपभोक्ता की क्रय शक्ति बढ़ाने और निर्माण लागत में लगभग 3-5 प्रतिशत कमी का अनुमान; इसी लाभ को गृहक्रेताओं तक पहुँचाने की अपेक्षा |
| लाभ का हस्तांतरण (Pass-on of Benefits) | कर-कटौती और निर्माण लागत में कमी का लाभ अंतिम मूल्य में दिखे, इसके लिए बाज़ार की निगरानी आवश्यक |
| रीजनल रिंग रोड (RRR) और प्रस्तावित आउटर रिंग रेल | हैदराबाद महानगरीय क्षेत्र का विस्तार; नए आवासीय और व्यावसायिक केंद्रों के विकसित होने की संभावना |
| पारगमन-उन्मुख विकास (TOD) | आवास, कार्यालय, बाज़ार और सार्वजनिक परिवहन को एक ढाँचे में जोड़कर टिकाऊ और रहने योग्य शहर का नियोजन |
| शहरी चुनौती निधि (Urban Challenge Fund) | ₹1 लाख करोड़ की केंद्रीय मंत्रिमंडल-अनुमोदित निधि; भीड़-भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों के पुनर्विकास और जल आपूर्ति तथा स्वच्छता अवसंरचना के विस्तार हेतु |
| रेरा (RERA) के अंतर्गत पंजीकरण | तेलंगाना में लगभग 10,000 परियोजनाएँ और 4,000 एजेंट पंजीकृत; पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि |
महत्व
आर्थिक
- कर-सुधारों से निर्माण लागत घटने पर आवास की मांग और निर्माण गतिविधि को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र का आर्थिक संवृद्धि में योगदान बढ़ सकता है।
- निर्माण सामग्री और सेवाओं पर कर-भार कम होने से परियोजनाओं की लागत-संरचना बदलती है, जिसका प्रभाव रोज़गार और सहायक उद्योगों पर भी पड़ता है।
- आवास को आर्थिक गतिविधि का वाहक मानने से यह क्षेत्र सीमेंट, इस्पात और परिवहन जैसे क्षेत्रों से जुड़ा रहता है।
उपभोक्ता-केंद्रित
- गृहक्रेता के लिए आवास खरीदना जीवन का सबसे बड़ा वित्तीय निर्णय होता है; कर-लाभ का सीधा हस्तांतरण उसकी क्रय शक्ति को वास्तविक रूप से बढ़ाता है।
- रेरा के अंतर्गत परियोजना-विवरण, समय-सीमा और भुगतान-व्यवस्था का सार्वजनिक खुलासा गृहक्रेता के हितों की रक्षा करता है।
नगरीय नियोजन और अवसंरचना
- पारगमन-उन्मुख विकास से परिवहन और भूमि-उपयोग का समन्वय होता है, जिससे यातायात-भीड़ और वाहन-निर्भरता घट सकती है।
- बाह्य रिंग रोड और रिंग रेल जैसी परियोजनाएँ महानगरीय क्षेत्र को संतुलित रूप से फैलाने में सहायक होती हैं।
- जल आपूर्ति और स्वच्छता अवसंरचना का विस्तार शहरी जीवन-गुणवत्ता और सतत विकास लक्ष्यों से सीधे जुड़ा है।
शासन और संघीय ढाँचा
- वस्तु एवं सेवा कर परिषद (GST Council) के माध्यम से केंद्र और राज्य मिलकर कर-दरें तय करते हैं, इसलिए कर-लाभ का प्रभाव सहकारी संघवाद की कसौटी पर भी परखा जाता है।
- रेरा एक केंद्रीय अधिनियम है, परन्तु इसका क्रियान्वयन राज्य रेरा प्राधिकरणों द्वारा होता है; इससे केंद्र-राज्य समन्वय का महत्व बढ़ता है।
चुनौतियाँ
1. कर-लाभ के हस्तांतरण की निगरानी
- निर्माण लागत में कमी का लाभ कई बार अंतिम मूल्य में पूरी तरह नहीं दिखता; यह बाज़ार-व्यवहार की जटिल समस्या है।
- लाभ-विरोधी प्रावधान (Anti-profiteering) के लिए केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 171 है। राष्ट्रीय लाभ-विरोधी प्राधिकरण का कार्य नवंबर 2022 से भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को सौंपा गया है।
- उपभोक्ता के पास कर-लाभ की गणना और तुलना का पर्याप्त ज्ञान न होने से शिकायत-तंत्र का उपयोग सीमित रह सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: अर्थव्यवस्था (कर सुधार); GS-2: उपभोक्ता संरक्षण और नियामक संस्थाएँ
2. रेरा का असमान क्रियान्वयन
- रेरा (RERA) के अंतर्गत पंजीकरण, शिकायत-निवारण और अपीलीय तंत्र राज्यों में अलग-अलग गति से कार्य करते हैं।
- पंजीकृत परियोजनाओं की संख्या बढ़ने के साथ प्राधिकरणों के पास मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता की कमी एक बड़ी चुनौती है।
- अनेक परियोजनाओं में समय पर कब्ज़ा न मिलना और निधि के उपयोग पर प्रश्न बने रहते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन, नियामक निकाय और उपभोक्ता हित
3. पारगमन-उन्मुख विकास में समन्वय
- TOD के लिए भूमि-उपयोग, परिवहन, आवास और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय आवश्यक है, जबकि ये अलग-अलग प्राधिकरणों के अधीन होते हैं।
- भूमि राज्य सूची का विषय है (सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 18), इसलिए केंद्र की योजनाओं को राज्य कानूनों के अनुरूप ढालना पड़ता है।
- सघन आवास और सार्वजनिक परिवहन के साथ मूल्य-वृद्धि से सस्ते आवास की उपलब्धता घट सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: संघवाद, स्थानीय शासन और नगरीय नियोजन
4. वित्तीय क्षमता और निधि का उपयोग
- शहरी चुनौती निधि जैसी बड़ी निधियों के लिए परियोजना-चयन, मूल्यांकन और व्यय की पारदर्शी प्रक्रिया आवश्यक है।
- स्थानीय निकायों की राजस्व-क्षमता सीमित होने से निधि के साथ राज्य और निजी निवेश का संतुलन बनाना कठिन होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: सार्वजनिक वित्त; GS-2: स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता
5. महानगरीय नियोजन का शासन-ढाँचा
- हैदराबाद जैसे महानगरीय क्षेत्र में कई नगरपालिकाएँ, विकास प्राधिकरण और परिवहन निकाय सक्रिय रहते हैं, जिससे एकीकृत योजना कठिन होती है।
- संविधान का 74वाँ संशोधन महानगर योजना समिति का प्रावधान करता है, परन्तु उसका प्रभावी गठन और कार्य राज्यों पर निर्भर है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: स्थानीय शासन, 74वाँ संविधान संशोधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या (Issue) | चिंता (Concern) |
|---|---|
| कर-लाभ का पारदर्शी हस्तांतरण | निर्माण लागत में कमी का लाभ गृहक्रेता तक पूरी तरह न पहुँचना |
| रेरा का क्रियान्वयन | राज्यों में प्राधिकरणों की क्षमता, शिकायत-निवारण की गति और परियोजना-विलंब |
| भूमि और नियोजन का समन्वय | भूमि राज्य विषय होने से केंद्र और राज्य की योजनाओं में तालमेल की कठिनाई |
| किफायती आवास की उपलब्धता | सघन विकास और परिवहन-केंद्रित मूल्य-वृद्धि से निम्न-आय वर्ग का बाहर होना |
| निधि का प्रभावी उपयोग | शहरी चुनौती निधि के चयन, मूल्यांकन और व्यय में पारदर्शिता |
| महानगरीय शासन | एक से अधिक प्राधिकरणों के बीच जवाबदेही और एकीकृत योजना का अभाव |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- शहरी चुनौती निधि (Urban Challenge Fund)
आगे की राह
- कर-लाभ के हस्तांतरण हेतु बाज़ार-निगरानी को सुदृढ़ करना और लाभ-विरोधी शिकायतों के निवारण के लिए CCI की समन्वित प्रक्रिया स्पष्ट करना।
- गृहक्रेताओं के लिए सरल और सुलभ मूल्य-तुलना उपकरण तथा जागरूकता अभियान चलाना, ताकि कर-लाभ की जानकारी उन तक पहुँचे।
- रेरा प्राधिकरणों की संस्थागत क्षमता, तकनीकी ढाँचा और कर्मचारी-संख्या बढ़ाना तथा शिकायत-निवारण की समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करना।
- पारगमन-उन्मुख विकास के लिए भूमि-उपयोग, परिवहन और आवास नीतियों को एकीकृत करना तथा किफायती आवास के लिए अनिवार्य हिस्सेदारी के प्रावधान अपनाना।
- महानगर योजना समिति के गठन और कार्य को प्रभावी बनाना, ताकि शहरी क्षेत्र की समग्र योजना सम्भव हो सके।
- शहरी चुनौती निधि के उपयोग में परियोजना-मूल्यांकन, सार्वजनिक खुलासे और प्रदर्शन-आधारित वितरण को अपनाना।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नियमित समन्वय तंत्र के माध्यम से सहकारी संघवाद की भावना को व्यवहार में लाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अचल संपदा क्षेत्र (Real Estate Sector) · वस्तु एवं सेवा कर (GST) · लाभविरोधी प्रावधान (Anti-profiteering Provision) · इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) · रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (RERA) · उपभोक्ता संरक्षण (Consumer Protection) · पारगमन-उन्मुख विकास (Transit-Oriented Development) · शहरी योजना (Urban Planning) · शहरी चुनौती निधि (Urban Challenge Fund) · किफायती आवास (Affordable Housing) · गृह-क्रेता संरक्षण (Homebuyer Protection) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 279A: वस्तु एवं सेवा कर परिषद द्वारा कर-दरों की सिफ़ारिश
- अनुच्छेद 243ZE: महानगर योजना समिति, महानगरीय क्षेत्र का समग्र नियोजन
- अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं को नियोजन और विकास की शक्तियाँ
- सातवीं अनुसूची, राज्य सूची प्रविष्टि 18: भूमि और भूमि-अधिकार, रेरा क्रियान्वयन
अवधारणा प्रवाह
केंद्र द्वारा वस्तु एवं सेवा कर में सुधार (GST 2.0) और नई आयकर व्यवस्था लागू होना → उपभोक्ता की क्रय शक्ति बढ़ना और निर्माण लागत में लगभग 3-5 प्रतिशत कमी का अनुमान → निर्माता द्वारा कर-लाभ को अंतिम मूल्य में आगे पहुँचाना (लाभ-हस्तांतरण) → रेरा के अंतर्गत पारदर्शी पंजीकरण और शिकायत-निवारण से गृहक्रेता का विश्वास बढ़ना → रीजनल रिंग रोड, आउटर रिंग रेल और TOD से महानगरीय विस्तार और आवास की नई माँग का सृजन → शहरी चुनौती निधि के माध्यम से पुनर्विकास, जल आपूर्ति और स्वच्छता में निवेश, जिससे आर्थिक संवृद्धि और सतत नगरीय विकास सुनिश्चित हो
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेरा अधिनियम के अंतर्गत ऐसी आवासीय परियोजना का पंजीकरण अनिवार्य है जिसका क्षेत्र 500 वर्ग मीटर से अधिक हो या जिसमें आठ से अधिक अपार्टमेंट हों।
2. रेरा के अंतर्गत एक ही केंद्रीय नियामक प्राधिकरण सभी राज्यों की परियोजनाओं का पंजीकरण करता है।
3. परियोजना में विलंब होने पर गृह-क्रेता ब्याज सहित धनवापसी की मांग कर सकता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: रेरा की धारा 3 के अनुसार 500 वर्ग मीटर या आठ अपार्टमेंट से अधिक वाली परियोजनाओं का पंजीकरण आवश्यक है, जिसमें कुछ अपवाद हैं। कथन 2 गलत है, क्योंकि रेरा प्राधिकरण धारा 20 के अंतर्गत राज्य स्तर पर स्थापित होते हैं, न कि एक केंद्रीय नियामक द्वारा। कथन 3 सही है: धारा 18 के अनुसार विलंब की स्थिति में ब्याज सहित धनवापसी का प्रावधान है।
Q2. निम्नलिखित अभिकथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): पारगमन-उन्मुख विकास (TOD) में आवास, कार्यालय, बाजार और सार्वजनिक परिवहन को एक साथ योजनाबद्ध किया जाता है।
कारण (R): परिवहन नोड के आसपास भूमि-उपयोग और सघनता बढ़ाने से निजी वाहनों पर निर्भरता घटती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — (A) सही है, क्योंकि TOD में आवास, रोजगार, बाजार और परिवहन को एकीकृत योजना में रखा जाता है। (R) भी सही है और यही TOD का मूल तर्क है: परिवहन नोड के निकट सघन उपयोग से पैदल चलने, सार्वजनिक परिवहन और निजी वाहन-उपयोग में कमी को बल मिलता है। अतः (R), (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों का सही मिलान कीजिए:
सूची I (प्रावधान)
A. वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 171
B. रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 18
C. संविधान का अनुच्छेद 243W
D. मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021
सूची II (विषय)
1. कर-कटौती का लाभ आपूर्ति प्राप्तकर्ता तक पहुँचाना
2. विलंबित परियोजना में ब्याज सहित धनवापसी
3. बारहवीं अनुसूची के अंतर्गत नगरपालिकाओं के कार्य, जिनमें शहरी योजना सम्मिलित है
4. किराये के आवास का विनियमन
सही कूट चुनिए:
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-2, B-1, C-4, D-3
- A-1, B-3, C-2, D-4
- A-4, B-2, C-1, D-3
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — धारा 171 CGST अधिनियम में कर-कटौती का लाभ उपभोक्ता तक पहुँचाने का प्रावधान है (A-1)। रेरा की धारा 18 विलंब पर ब्याज सहित धनवापसी देती है (B-2)। अनुच्छेद 243W बारहवीं अनुसूची के माध्यम से नगरपालिकाओं को शहरी योजना सहित कार्य सौंपता है (C-3)। मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 किराये के आवास के विनियमन से संबंधित है (D-4)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ वस्तु एवं सेवा कर में कर-दर में कमी और निर्माण लागत में गिरावट का लाभ अंततः गृह-क्रेता तक पहुँचना सुनिश्चित करना केवल कर-नीति से संभव नहीं है। वस्तु एवं सेवा कर के लाभविरोधी प्रावधान, रेरा और शहरी योजना के उपकरणों की भूमिका की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि यदि निर्माता कर-लाभ आगे नहीं पहुँचाता है, तो गृह-क्रेता के पास कौन-से उपचार उपलब्ध हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना: (1) भूमिका: वस्तु एवं सेवा कर सुधारों से निर्माण लागत में अनुमानित 3-5 प्रतिशत कमी का दावा और गृह-क्रेता तक लाभ पहुँचाने की समस्या। (2) कर-ढाँचा: आवासीय संपत्ति पर कर-दरें (किफायती आवास और अन्य आवास के लिए भिन्न दरें), निर्माणाधीन परियोजनाओं में इनपुट टैक्स क्रेडिट का सीमित उपयोग, और उसका निर्माण लागत पर प्रभाव। (3) लाभविरोधी प्रावधान: CGST अधिनियम, 2017 की धारा 171 और इसके क्रियान्वयन हेतु CGST नियमावली; प्रवर्तन तंत्र का इतिहास, राष्ट्रीय लाभविरोधी प्राधिकरण का कार्यकाल समाप्त होकर कार्य भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को हस्तांतरित होना; मूल्यांकन में कठिनाई के तर्क। (4) रेरा: रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 3 (पंजीकरण), धारा 11 (प्रकटीकरण), धारा 18 (धनवापसी), धारा 31 (शिकायत); राज्य रेरा और अपीलीय अधिकरण (धारा 43); सर्वोच्च न्यायालय का न्यूटेक प्रमोटर्स बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2021) निर्णय, जिसमें रेरा की संवैधानिकता को बनाए रखा गया और इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अतिरिक्त उपचार माना गया। (5) उपभोक्ता संरक्षण: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की भूमिका। (6) शहरी योजना: संविधान का अनुच्छेद 243W तथा बारहवीं अनुसूची, 74वाँ संविधान संशोधन; राष्ट्रीय मेट्रो रेल नीति, 2017 के अंतर्गत पारगमन-उन्मुख विकास; शहरी चुनौती निधि (₹1 लाख करोड़, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित) का उद्देश्य, और भूमि-मूल्य वर्धन (Value Capture) का विचार। (7) संतुलित दृष्टिकोण: उद्योग के तर्क (कार्यशील पूँजी, नियामकीय बोझ) और उपभोक्ता-हित के तर्क; केंद्र-राज्य समन्वय की चुनौती (भूमि और नगर योजना राज्य विषय) तथा सहकारी संघवाद की आवश्यकता। (8) निष्कर्ष: कर-सुधार, नियामकीय प्रवर्तन, पारदर्शी मूल्य-प्रकटीकरण और शहरी अवसंरचना का समन्वित उपाय ही लाभ के वास्तविक हस्तांतरण को सुनिश्चित कर सकता है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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