14 Aug LAC पर बढ़ा तनाव: जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले चीन की सोची-समझी रणनीति क्या है?
✎ भारत-चीन सीमा पर तनाव अक्सर चीन की दबाव आधारित कूटनीति का हिस्सा होता है, जिसका उद्देश्य शीर्ष-स्तरीय वार्ताओं से पहले अपनी मोलभाव की स्थिति को मजबूत करना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC), ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन, दोकलम गतिरोध, गलवान झड़प, तवांग सेक्टर, दबाव आधारित कूटनीति, अरुणाचल प्रदेश
- Essay: भारत की विदेश नीति में चुनौतियाँ और अवसर, सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत-चीन सीमा पर तनाव अक्सर चीन की दबाव आधारित कूटनीति का हिस्सा होता है, जिसका उद्देश्य शीर्ष-स्तरीय वार्ताओं से पहले अपनी मोलभाव की स्थिति को मजबूत करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित भारत यात्रा से ठीक पहले अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव की खबरें सामने आई हैं। यह घटनाक्रम चीन की उस कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहाँ वह शीर्ष-स्तरीय वार्ताओं से पहले सीमा पर आक्रामकता दिखाकर अपनी मोलभाव की स्थिति को मजबूत करने का प्रयास करता है।
पृष्ठभूमि
- भारत और चीन के बीच एक लंबी और विवादित सीमा है, जिसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) प्रमुख है, जो दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमांकन रेखा के रूप में कार्य करती है।
- दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का कोई स्पष्ट समाधान नहीं है, जिसके कारण समय-समय पर सीमा पर झड़पें और गतिरोध होते रहते हैं।
- चीन की ‘दबाव आधारित कूटनीति’ उसकी विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू रही है, जिसमें वह राजनयिक वार्ताओं से पहले सैन्य तनाव बढ़ाकर अपने प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाने की कोशिश करता है।
- वर्ष 2017 में दोकलम (Doklam) गतिरोध और 2020 में गलवान (Galwan) घाटी में हिंसक झड़प जैसी घटनाएं चीन की इसी रणनीति का प्रमाण रही हैं।
- भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संबंधों को चीन अपने लिए एक चुनौती के रूप में देखता है और अक्सर ऐसे समय में हिमालयी सीमा पर आक्रामक रुख अपनाता है।
- ब्रिक्स (BRICS) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकातें सीमा तनाव के बावजूद संवाद के अवसर प्रदान करती हैं।
भारत-चीन सीमा विवाद और कूटनीतिक पैटर्न
- भारत और चीन के बीच सीमा विवाद मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में केंद्रित है: पश्चिमी क्षेत्र (लद्दाख), मध्य क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) और पूर्वी क्षेत्र (अरुणाचल प्रदेश)।
- वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) एक स्पष्ट रूप से सीमांकित रेखा नहीं है, जिससे दोनों पक्षों के गश्ती दल अक्सर आमने-सामने आ जाते हैं, जिससे तनाव बढ़ता है।
- चीन की कूटनीति में अक्सर ‘सलामी स्लाइसिंग’ (Salami Slicing) रणनीति का उपयोग देखा जाता है, जहाँ वह छोटे-छोटे कदमों से धीरे-धीरे यथास्थिति को बदलने का प्रयास करता है।
- शीर्ष-स्तरीय वार्ताओं से पहले सीमा पर तनाव बढ़ाना चीन की एक सोची-समझी रणनीति है, जिसका उद्देश्य वार्ता की मेज पर अपनी स्थिति को मजबूत करना है।
- यह रणनीति प्रतिद्वंद्वी देश को रक्षात्मक स्थिति में लाने और उसे अपनी शर्तों पर बातचीत करने के लिए मजबूर करने पर आधारित होती है।
- भारत ने हमेशा सीमा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और राजनयिक माध्यमों से बातचीत पर जोर दिया है, जबकि अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध रहा है।
- भारत-अमेरिका संबंधों में किसी भी प्रकार का तनाव या खिंचाव चीन के लिए हिमालयी सीमा पर आक्रामक रुख अपनाने का अवसर बन जाता है, ताकि भारत पर रणनीतिक दबाव बनाया जा सके।
- सीमा विवादों के बावजूद, दोनों देशों के बीच व्यापार और अन्य क्षेत्रों में संबंध जारी रहते हैं, जो जटिल भू-राजनीतिक समीकरणों को दर्शाते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| LAC पर तनाव का पैटर्न | चीन द्वारा उच्च-स्तरीय वार्ताओं से पहले सीमा पर तनाव बढ़ाना एक सोची-समझी रणनीति है। |
| दबाव आधारित कूटनीति | चीन अपनी विदेश नीति में दबाव का उपयोग करके वार्ता की मेज पर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। |
| यथास्थिति में बदलाव | चीन सीमा पर यथास्थिति को बदलकर या तनाव पैदा करके अपनी शर्तों पर मोलभाव करना चाहता है। |
| भारत-अमेरिका संबंधों का लाभ | चीन भारत के वैश्विक गठबंधनों, विशेषकर अमेरिका के साथ संबंधों में तनाव का फायदा उठाता है। |
| दोहरे मोर्चे का रणनीतिक दबाव | चीन हिमालयी सीमा पर आक्रामक रुख अपनाकर भारत पर रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करता है। |
महत्व
सामरिक महत्व
- यह भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के लिए एक निरंतर चुनौती प्रस्तुत करता है, जिसके लिए निरंतर सतर्कता और मजबूत रक्षा तैयारियों की आवश्यकता है।
- सीमा पर तनाव का यह पैटर्न भारत को अपनी विदेश नीति और रक्षा रणनीति में चीन के इरादों को ध्यान में रखने के लिए बाध्य करता है।
कूटनीतिक महत्व
- यह चीन की ‘सलामी स्लाइसिंग’ रणनीति (Salami Slicing Strategy) का हिस्सा हो सकता है, जहाँ वह छोटे-छोटे कदमों से धीरे-धीरे क्षेत्रीय लाभ प्राप्त करने का प्रयास करता है।
- यह भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन के आक्रामक व्यवहार को उजागर करने और समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
भू-राजनीतिक महत्व
- यह घटनाक्रम भारत-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित करता है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौतियां पैदा करता है।
- यह भारत को अपनी ‘पड़ोसी पहले’ नीति और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत क्षेत्रीय भागीदारों के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रेरित करता है।
चुनौतियाँ
1. सीमा प्रबंधन और सुरक्षा
- वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लगातार चीनी घुसपैठ और आक्रामकता भारतीय सेना के लिए निरंतर चुनौती बनी हुई है।
- पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में बुनियादी ढांचे का विकास और सैनिकों की तैनाती एक बड़ी logistical चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन
2. कूटनीतिक संतुलन
- चीन के साथ वार्ता और सीमा पर तनाव के बीच संतुलन बनाए रखना भारत के लिए एक जटिल कूटनीतिक कार्य है।
- भारत को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता किए बिना चीन के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखना होगा।
यूपीएससी लिंक: भारत के पड़ोसी देशों से संबंध
3. अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- चीन की आक्रामक रणनीति भारत के वैश्विक गठबंधनों, विशेषकर अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को प्रभावित कर सकती है।
- भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए विभिन्न भू-राजनीतिक ध्रुवों के साथ अपने संबंधों को सावधानीपूर्वक प्रबंधित करना होगा।
यूपीएससी लिंक: भारत और उसके पड़ोस-संबंध
4. बुनियादी ढांचा विकास
- सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन द्वारा तेजी से बुनियादी ढांचे का विकास भारत के लिए एक रणनीतिक चुनौती है, जिसके लिए भारत को भी अपनी गति बढ़ानी होगी।
- सड़कें, पुल और हवाई पट्टियां बनाने से सेना की आवाजाही और रसद में सुधार होता है, जो सीमा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे आदि
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| LAC पर बार-बार तनाव | चीन द्वारा वार्ता से पहले दबाव बनाने की सोची-समझी रणनीति। |
| दबाव आधारित कूटनीति | चीन का अपनी शर्तों पर मोलभाव करने के लिए सैन्य दबाव का उपयोग। |
| भारत-अमेरिका संबंधों का लाभ | चीन द्वारा भारत के वैश्विक गठबंधनों में तनाव का फायदा उठाना। |
| दोहरे मोर्चे का दबाव | हिमालयी सीमा पर आक्रामक रुख अपनाकर भारत पर रणनीतिक दबाव बनाना। |
| सीमा पर यथास्थिति में बदलाव | चीन द्वारा जमीन पर स्थिति बदलकर क्षेत्रीय लाभ प्राप्त करने का प्रयास। |
आगे की राह
- सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाना, जिसमें सड़कें, पुल और हवाई पट्टियां शामिल हैं, ताकि सैनिकों की आवाजाही और रसद को मजबूत किया जा सके।
- चीन के साथ सैन्य और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से निरंतर संवाद बनाए रखना, ताकि गलतफहमी और तनाव को कम किया जा सके।
- सीमा पर निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमताओं को बढ़ाना, जिसमें उन्नत तकनीक और उपग्रह इमेजरी का उपयोग शामिल है।
- अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर चीन के आक्रामक व्यवहार को उजागर करना और समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग बढ़ाना, जैसे कि क्वाड (QUAD) जैसे समूह।
- भारतीय सेना का आधुनिकीकरण और क्षमता निर्माण जारी रखना, ताकि किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी ढंग से जवाब दिया जा सके।
- सीमावर्ती आबादी के साथ विश्वास और सहयोग बढ़ाना, ताकि उन्हें सुरक्षा प्रयासों में भागीदार बनाया जा सके और खुफिया जानकारी साझा की जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) · भारत-चीन संबंध · सीमा विवाद · दबाव आधारित कूटनीति · भू-राजनीतिक रणनीति · ब्रिक्स शिखर सम्मेलन · गलवान घाटी झड़प · डोकलाम गतिरोध · तवांग झड़प · अरुणाचल प्रदेश
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में रक्षा और विदेश मामले’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 352’, ‘note’: ‘युद्ध या बाहरी आक्रमण की स्थिति में आपातकाल’}
अवधारणा प्रवाह
उच्च-स्तरीय वार्ता प्रस्तावित → चीन द्वारा LAC पर तनाव बढ़ाना → दबाव आधारित कूटनीति का उपयोग → वार्ता की मेज पर लाभ प्राप्त करने का प्रयास → भारत पर रणनीतिक दबाव
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) भारत और चीन के बीच एक सीमांकन रेखा है जो दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण वाले क्षेत्रों को दर्शाती है।
2. डोकलाम गतिरोध 2017 में भारत और चीन के बीच हुआ था, जिसमें दोनों देशों की सेनाएं 73 दिनों तक आमने-सामने थीं।
3. गलवान घाटी झड़प 2020 में पूर्वी लद्दाख में हुई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि LAC भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण वाली सीमा को परिभाषित करती है। कथन 2 सही है क्योंकि डोकलाम गतिरोध 2017 में हुआ था और यह 73 दिनों तक चला था। कथन 3 सही है क्योंकि गलवान घाटी झड़प 2020 में हुई थी, जिसके बाद सैन्य और राजनयिक वार्ता हुई थी।
Q2. अभिकथन (A): चीन अक्सर भारत के साथ शीर्ष स्तरीय वार्ताओं से पहले सीमाई इलाकों में तनाव बढ़ाता है।
कारण (R): यह चीन की दबाव आधारित कूटनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वार्ता की मेज पर अपनी स्थिति मजबूत करना है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि चीन का यह एक स्थापित पैटर्न रहा है। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि चीन इस रणनीति का उपयोग अपनी राजनयिक स्थिति को मजबूत करने के लिए करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत-चीन सीमा पर हालिया तनाव को चीन की ‘दबाव आधारित कूटनीति’ के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और भारत के लिए इसके भू-राजनीतिक निहितार्थों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत-चीन सीमा पर तनाव के पैटर्न का संक्षिप्त परिचय और ‘दबाव आधारित कूटनीति’ की अवधारणा।
2. **दबाव आधारित कूटनीति की व्याख्या:** चीन द्वारा वार्ता से पहले सीमा पर तनाव बढ़ाने के ऐतिहासिक उदाहरण (जैसे डोकलाम 2017, गलवान 2020, तवांग 2022) और इसके पीछे के उद्देश्य (वार्ता में ऊपरी हाथ हासिल करना, यथास्थिति बदलना)।
3. **समालोचनात्मक परीक्षण:**
* क्या यह हमेशा एक ‘सोचा-समझा पैटर्न’ है या कभी-कभी स्थानीय गतिरोध भी होते हैं?
* चीन के आंतरिक राजनीतिक या आर्थिक दबावों की भूमिका।
* भारत के वैश्विक गठबंधनों (जैसे अमेरिका के साथ) पर चीन की प्रतिक्रिया के रूप में तनाव।
4. **भारत के लिए भू-राजनीतिक निहितार्थ:**
* **रक्षा और सुरक्षा:** सीमा पर निरंतर सैन्य तैयारी की आवश्यकता, बुनियादी ढांचे का विकास।
* **कूटनीतिक चुनौतियाँ:** चीन के साथ संवाद बनाए रखते हुए अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना।
* **आर्थिक प्रभाव:** व्यापार असंतुलन और चीन पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता।
* **बहुपक्षीय मंच:** ब्रिक्स जैसे मंचों पर संबंधों का प्रबंधन।
* **वैश्विक छवि:** एक जिम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति के रूप में भारत की स्थिति।
5. **निष्कर्ष:** भारत को चीन की रणनीति का मुकाबला करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण (सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक) अपनाने की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: amarujala.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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