मद्रास उच्च न्यायालय ने डीवीएसी को पिछले पांच वर्षों के निरीक्षण/छापे का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया

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मद्रास उच्च न्यायालय ने डीवीएसी को पिछले पांच वर्षों के निरीक्षण/छापे का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया

DVAC रिपोर्ट प्रक्रियान्यायालय निर्देशDVAC को आदेशरिपोर्ट तैयारपिछले 5 वर्षनकदी सीमा निर्धारणनया G.O.
DVAC रिपोर्ट प्रक्रिया

✎ मद्रास उच्च न्यायालय ने DVAC को भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाइयों पर रिपोर्ट देने और सरकार को सरकारी कर्मचारियों द्वारा ड्यूटी पर रखी जा सकने वाली नकदी की सीमा पर समान दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दिया है, जो भ्रष्टाचार मुक्त शासन की…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, संस्थागत और अन्य उपाय  |  GS Paper IV — लोक प्रशासन में सत्यनिष्ठा और जवाबदेही, भ्रष्टाचार के निहितार्थ
  • Prelims: सतर्कता निदेशालय (DVAC), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, उच्च न्यायालय के निर्देश, सरकारी कर्मचारी आचार संहिता, न्यायिक समीक्षा, भ्रष्टाचार विरोधी उपाय
  • Essay: भ्रष्टाचार मुक्त शासन की दिशा में न्यायिक सक्रियता, सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: मद्रास उच्च न्यायालय ने DVAC को भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाइयों पर रिपोर्ट देने और सरकार को सरकारी कर्मचारियों द्वारा ड्यूटी पर रखी जा सकने वाली नकदी की सीमा पर समान दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दिया है, जो भ्रष्टाचार मुक्त शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

मद्रास उच्च न्यायालय ने सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) को पिछले पाँच वर्षों में किए गए औचक निरीक्षणों/छापों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने सरकारी कर्मचारियों द्वारा ड्यूटी के दौरान रखी जा सकने वाली अधिकतम नकदी की सीमा निर्धारित करने के लिए समान दिशानिर्देश या सरकारी आदेश (G.O.) जारी करने पर सरकार के विचारों की भी अपेक्षा की है।

पृष्ठभूमि

  • मद्रास उच्च न्यायालय ने DVAC से निरीक्षणों के दौरान बरामद राशि, शुरू किए गए अभियोजन (prosecution) की संख्या और उनकी स्थिति, तथा अनुशासनात्मक कार्यवाही (disciplinary proceedings) की सिफारिशों का विवरण मांगा है।
  • न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि राज्य में सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए कोई सामान्य दिशानिर्देश या G.O. नहीं है जो ड्यूटी के दौरान नकदी रखने की सीमा को नियंत्रित करता हो।
  • न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल भुगतान के युग में, कार्यालय में बड़ी मात्रा में नकदी ले जाने की आवश्यकता को संबोधित किया जाना चाहिए और एक उचित सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।
  • एक निर्धारित सीमा भ्रष्टाचार को रोकने में मदद कर सकती है और साथ ही सरकारी कर्मचारियों को अनावश्यक उत्पीड़न से भी बचा सकती है।
  • सरकार का उद्देश्य भ्रष्टाचार का उन्मूलन करना है, और इस संबंध में बनाए गए दिशानिर्देश भ्रष्टाचार मुक्त शासन के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं।
  • यह निर्देश न्यायिक सक्रियता (judicial activism) का एक उदाहरण है जहाँ न्यायपालिका शासन में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कार्यपालिका को निर्देश देती है।

सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) तथा भ्रष्टाचार निवारण के उपाय

  • सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (Directorate of Vigilance and Anti-Corruption – DVAC) एक राज्य-स्तरीय एजेंसी है जो सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों की जांच करती है।
  • इसका मुख्य कार्य सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करना, औचक निरीक्षण करना और दोषी पाए जाने पर अभियोजन शुरू करना है।
  • DVAC भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के प्रावधानों के तहत कार्य करता है, जो सार्वजनिक सेवकों द्वारा भ्रष्टाचार से संबंधित अपराधों से निपटने के लिए एक व्यापक कानून है।
  • न्यायिक समीक्षा (judicial review) के तहत, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय कार्यपालिका के निर्णयों और कार्यों की संवैधानिकता तथा वैधता की जांच कर सकते हैं, जैसा कि इस मामले में देखा गया है।
  • सरकारी कर्मचारियों के लिए आचार संहिता (Code of Conduct) और सेवा नियम उनकी ड्यूटी के दौरान व्यवहार और वित्तीय लेनदेन को नियंत्रित करते हैं।
  • भ्रष्टाचार मुक्त शासन के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी निगरानी तंत्र आवश्यक हैं, जिसमें DVAC जैसी संस्थाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना और नकदी लेनदेन को सीमित करना भ्रष्टाचार को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत उपकरण हो सकता है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
DVAC रिपोर्ट का निर्देश भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
पिछले पाँच वर्षों के निरीक्षण/छापे भ्रष्टाचार के मामलों की पहचान और उनके निवारण में निदेशालय की प्रभावशीलता का आकलन।
बरामद राशि का विवरण भ्रष्टाचार के वित्तीय आयामों को समझना और अवैध धन के प्रवाह को रोकना।
अभियोजन और अनुशासनात्मक कार्यवाही न्यायिक प्रक्रिया और आंतरिक अनुशासनात्मक तंत्र की दक्षता का मूल्यांकन।
सरकारी कर्मचारियों द्वारा नकदी रखने की सीमा कार्यालयों में भ्रष्टाचार को कम करने और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने का प्रयास।
समान दिशानिर्देशों की आवश्यकता भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों में एकरूपता और निष्पक्षता लाना।

महत्व

शासन और पारदर्शिता

  • यह निर्देश सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण है।
  • यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि भ्रष्टाचार निरोधक इकाइयाँ प्रभावी ढंग से कार्य करें और उनके कार्यों की नियमित समीक्षा हो।

भ्रष्टाचार उन्मूलन

  • न्यायालय का यह कदम भ्रष्टाचार उन्मूलन के सरकारी उद्देश्य को मजबूत करता है।
  • सरकारी कर्मचारियों द्वारा कार्यालय में नकदी रखने की सीमा निर्धारित करने से भ्रष्टाचार के अवसरों में कमी आ सकती है।

न्यायिक सक्रियता

  • यह न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) का एक उदाहरण है, जहाँ न्यायपालिका शासन में सुधार के लिए कार्यपालिका को निर्देश देती है।
  • यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और सुशासन सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन

  • नकदी रखने की सीमा निर्धारित करने का सुझाव डिजिटल भुगतान (Digital Payments) को अपनाने को प्रोत्साहित कर सकता है।
  • यह नकदी-आधारित लेनदेन से जुड़े भ्रष्टाचार को कम करने में सहायक होगा।

चुनौतियाँ

1. कार्यान्वयन में एकरूपता

  • पूरे राज्य में सभी सरकारी विभागों के लिए समान दिशानिर्देशों को लागू करना एक चुनौती हो सकती है।
  • विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली और आवश्यकताओं में भिन्नता को ध्यान में रखना होगा।

2. कर्मचारी उत्पीड़न की संभावना

  • नकदी रखने की सीमा निर्धारित करने से सरकारी कर्मचारियों के अनावश्यक उत्पीड़न की संभावना हो सकती है।
  • दिशानिर्देशों को इस प्रकार तैयार करना होगा जिससे निष्पक्षता बनी रहे और उत्पीड़न से बचा जा सके।

3. प्रशासनिक इच्छाशक्ति

  • न्यायालय के निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन करने के लिए मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति (Administrative Will) की आवश्यकता होगी।
  • रिपोर्ट प्रस्तुत करने और दिशानिर्देशों को लागू करने में देरी या शिथिलता एक चुनौती हो सकती है।

4. डिजिटल साक्षरता और पहुंच

  • डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सभी सरकारी कर्मचारियों और नागरिकों के बीच डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) और पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे की कमी एक बाधा हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
समान दिशानिर्देशों का अभाव भ्रष्टाचार निरोधक प्रयासों में असंगति और मनमानी की संभावना।
नकदी रखने की सीमा का निर्धारण व्यवहार्यता, कर्मचारियों की वास्तविक आवश्यकताएं और उत्पीड़न की संभावना।
DVAC की रिपोर्ट का विश्लेषण रिपोर्ट की गुणवत्ता, डेटा की सटीकता और उसके आधार पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना।
अभियोजन की स्थिति भ्रष्टाचार के मामलों में धीमी न्यायिक प्रक्रिया और कम दोषसिद्धि दर।
डिजिटल भुगतान को अपनाना तकनीकी पहुंच, डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताएं।

आगे की राह

  • सरकार को न्यायालय के निर्देशों का त्वरित और प्रभावी ढंग से पालन करना चाहिए।
  • सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए नकदी रखने की सीमा पर एक समान और स्पष्ट दिशानिर्देश या सरकारी आदेश (G.O.) जारी किया जाना चाहिए।
  • दिशानिर्देशों को तैयार करते समय कर्मचारियों के वैध हितों और व्यवहारिक चुनौतियों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • DVAC को अपनी रिपोर्ट में मांगी गई सभी जानकारियों को पूरी पारदर्शिता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना चाहिए।
  • भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन प्रक्रिया को तेज करने और दोषी व्यक्तियों को दंडित करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।
  • डिजिटल भुगतान प्रणालियों को बढ़ावा देने और उनके उपयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए।
  • भ्रष्टाचार निरोधक इकाइयों की स्वायत्तता और उनकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय · न्यायिक सक्रियता · सरकारी कर्मचारी · सतर्कता · भ्रष्टाचार · मद्रास उच्च न्यायालय · समान दिशानिर्देश · डिजिटल भुगतान · प्रशासनिक सुधार · जवाबदेही · सुशासन · राज्यों में भ्रष्टाचार

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 226’, ‘note’: ‘उच्च न्यायालय की रिट जारी करने की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार (भ्रष्टाचार मुक्त शासन)’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 309’, ‘note’: ‘राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तें’}

अवधारणा प्रवाह

मद्रास उच्च न्यायालय का DVAC को निर्देश  →  पिछले 5 वर्षों के निरीक्षण/छापों की रिपोर्ट  →  बरामद राशि, अभियोजन, अनुशासनात्मक कार्यवाही का विवरण  →  सरकारी कर्मचारियों द्वारा नकदी रखने की सीमा पर दिशानिर्देश की अपेक्षा  →  भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और पारदर्शिता बढ़ाने का लक्ष्य

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के अधीन एक केंद्रीय एजेंसी है।
2. उच्च न्यायालयों को न्यायिक समीक्षा की शक्ति प्राप्त है, जिसके तहत वे सरकारी एजेंसियों को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दे सकते हैं।
3. भारत में सरकारी कर्मचारियों के लिए ड्यूटी पर नकदी रखने की अधिकतम सीमा निर्धारित करने हेतु कोई समान केंद्रीय दिशानिर्देश नहीं हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। DVAC एक राज्य स्तरीय एजेंसी है, जो आमतौर पर राज्य सरकार के गृह विभाग के अधीन कार्य करती है, न कि केंद्रीय सतर्कता आयोग के अधीन। कथन 2 सही है। उच्च न्यायालयों को न्यायिक समीक्षा की शक्ति प्राप्त है और वे शासन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऐसे निर्देश दे सकते हैं। कथन 3 गलत है। हालांकि कुछ विभागों में दिशानिर्देश हो सकते हैं, लेकिन सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए ड्यूटी पर नकदी रखने की कोई समान केंद्रीय दिशानिर्देश नहीं हैं, जैसा कि मद्रास उच्च न्यायालय ने भी इंगित किया है।

Q2. अभिकथन (A): मद्रास उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) को पिछले पांच वर्षों में किए गए निरीक्षणों/छापों पर एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
कारण (R): न्यायालय का मानना है कि ड्यूटी पर सरकारी कर्मचारी द्वारा रखी जा सकने वाली अधिकतम राशि निर्धारित करने के लिए समान दिशानिर्देशों या एक सरकारी आदेश (G.O.) की आवश्यकता है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सत्य है, क्योंकि मद्रास उच्च न्यायालय ने DVAC को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। कारण (R) भी सत्य है, क्योंकि न्यायालय ने स्वयं यह विचार व्यक्त किया है कि भ्रष्टाचार को रोकने और कर्मचारियों के उत्पीड़न से बचने के लिए ऐसे समान दिशानिर्देशों की आवश्यकता है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि न्यायालय का निर्देश इसी व्यापक चिंता से प्रेरित है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश होने चाहिए।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ न्यायिक सक्रियता के संदर्भ में, मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) को दिए गए हालिया निर्देश का आलोचनात्मक परीक्षण करें। क्या ऐसे निर्देश सुशासन को बढ़ावा देने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में सहायक हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत न्यायिक सक्रियता की संक्षिप्त परिभाषा और उसके महत्व से करें। मद्रास उच्च न्यायालय के विशिष्ट निर्देश (DVAC रिपोर्ट, नकदी रखने के दिशानिर्देश) का उल्लेख करें। इसके बाद, ऐसे न्यायिक निर्देशों के सकारात्मक पहलुओं पर चर्चा करें, जैसे पारदर्शिता, जवाबदेही, प्रशासनिक सुधारों को बढ़ावा देना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना। इसमें न्यायिक समीक्षा की भूमिका और कार्यपालिका को उसकी जिम्मेदारियों के प्रति सचेत करने की क्षमता शामिल होनी चाहिए। फिर, आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करें, जिसमें न्यायिक सक्रियता की संभावित सीमाओं या नकारात्मक पहलुओं को उजागर किया जाए, जैसे कि शक्तियों के पृथक्करण का उल्लंघन, कार्यपालिका के क्षेत्र में हस्तक्षेप, संसाधनों पर बोझ और नीति निर्माण में विशेषज्ञता की कमी। अंत में, एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें कि कैसे न्यायिक सक्रियता, जब संयम और विवेक के साथ प्रयोग की जाती है, सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, लेकिन साथ ही कार्यपालिका को अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभानी चाहिए।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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