24 Oct महाराष्ट्र सरकार ने ‘मिशन मुर्गास’ शुरू किया, जानें कैसे होगा पशुओं का चारा संकट दूर
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महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में लगातार बढ़ते चारे के संकट को दूर करने के लिए ‘मिशन मुर्गास’ (साइलेज मिशन) नामक एक व्यापक अभियान शुरू किया है। राज्य में 358 तालुकाओं में से 305 में सूखे की घोषणा के मद्देनजर पशुपालन विभाग द्वारा शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य किसानों को हरे चारे को साइलेज में परिवर्तित करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि सूखे के दौर में भी पशुओं को पर्याप्त पोषण मिल सके। पशुपालन आयुक्त किरण पाटिल ने बताया कि यह अभियान वैज्ञानिक तरीके से हरे चारे के संरक्षण पर केंद्रित है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को रोका जा सके। चारे की कमी से पशुपालकों की आय प्रभावित होती है, विशेषकर उन परिवारों के लिए जो अपनी आजीविका के लिए पशुपालन पर निर्भर हैं।
राज्य सरकार ने इस समस्या के गंभीरता को देखते हुए 2026-27 के खरीफ सीजन के लिए शुरू में 51.20 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जिसमें से 48.20 करोड़ रुपये जिले वार वार्षिक योजनाओं के तहत चारे के बीज वितरण के लिए और 3 करोड़ रुपये विदर्भ-मराठवाड़ा डेयरी विकास परियोजना के अंतर्गत निर्धारित किए गए थे। हालांकि, बढ़ती कमी को देखते हुए सरकार ने अतिरिक्त 76.41 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिसमें से 66.41 करोड़ रुपये जिले वार वार्षिक योजनाओं और 10 करोड़ रुपये विदर्भ-मराठवाड़ा डेयरी विकास परियोजना के तहत आवंटित किए गए हैं। इस राशि का उपयोग किसानों को साइलेज उत्पादन के लिए प्रशिक्षण देने, उच्च उपज वाली फसलों जैसे मक्का, ज्वार और नेपियर घास की खेती को बढ़ावा देने तथा साइलेज निर्माण की प्रक्रिया में सहायता प्रदान करने के लिए किया जाएगा।
‘मिशन मुर्गास’ के तहत किसानों को साइलेज उत्पादन की तकनीक सिखाई जाएगी, जिसमें फसल की कटाई, कटाई के बाद की प्रक्रिया, संपीड़न और हवाबंद भंडारण शामिल हैं। पशुपालन विभाग के अधिकारी, राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) और महाराष्ट्र के स्मार्ट (एसएमएआरटी) योजना से जुड़े साइलेज उत्पादक तथा विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, दूध सहकारी संघों, ग्राम स्तरीय संगठनों और किसान उत्पादक समूहों को भी गांव स्तर पर जागरूकता फैलाने के लिए शामिल किया जाएगा। प्रत्येक जिले को चारे के बीज वितरण, चारे के उत्पादन और साइलेज निर्माण को कवर करते हुए एक कार्य योजना तैयार करने तथा तत्काल प्रभाव से इसे लागू करने का निर्देश दिया गया है।
इसके साथ ही, विदर्भ और मराठवाड़ा के 19 जिलों में ‘मागेल ट्याला मुर्गास’ (मागेल ट्याला मुर्गास) नामक एक अलग योजना शुरू की गई है, जो विदर्भ-मराठवाड़ा डेयरी विकास परियोजना के दूसरे चरण के अंतर्गत संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत पशुपालकों को प्रति पशु प्रति दिन 5 किलो तक साइलेज खरीदने पर 3 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जो अधिकतम 90 दिनों तक उपलब्ध होगी। सब्सिडी की राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से हस्तांतरित की जाएगी। आवेदन प्रक्रिया परियोजना की वेबसाइट के माध्यम से स्वीकार की जा रही है। यह पहल न केवल चारे की कमी को दूर करने में मदद करेगी, बल्कि पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगी, जिससे राज्य के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
स्रोत: The Indian Express
अभ्यास प्रश्न
Q1. महाराष्ट्र सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘मिशन मुर्गास’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- मुर्गियों की नस्ल सुधारना
- पशुओं के लिए चारा संकट को रोकना
- मुर्गी पालन को बढ़ावा देना
- मुर्गियों के रोगों का निवारण करना
उत्तर
पशुओं के लिए चारा संकट को रोकना — महाराष्ट्र सरकार ने ‘मिशन मुर्गास’ की शुरुआत पशुओं के लिए चारा संकट को रोकने के उद्देश्य से की है। इसका मुख्य लक्ष्य राज्य में चारे की कमी से निपटना है।
Q2. ‘मिशन मुर्गास’ किस राज्य सरकार द्वारा शुरू किया गया है?
- गुजरात
- महाराष्ट्र
- राजस्थान
- मध्य प्रदेश
उत्तर
महाराष्ट्र — ‘मिशन मुर्गास’ महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा शुरू किया गया एक अभियान है, जिसका उद्देश्य पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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