15 Oct राष्ट्रीय means-cum-merit छात्रवृत्ति योजना: शिक्षा मंत्रालय ने कार्यान्वयन की समीक्षा की
✎ NMMSS एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जो कक्षा VIII के योग्य और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को कक्षा IX से XII तक छात्रवृत्ति देकर माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट रोकती है और इसका कार्यान्वयन राज्यों के सहयोग से शिक्षा मंत्रालय द्वारा…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन, सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — संघवाद: केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्र और राज्यों की भूमिका
- Prelims: राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (NMMSS), केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP), अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार), अनुच्छेद 46 (दुर्बल वर्गों के शैक्षिक हित), शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग
- Essay: शिक्षा में समान अवसर: वंचित वर्गों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं की भूमिका और चुनौतियाँ, कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता: सत्यापन और लाभार्थी चयन का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: NMMSS एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जो कक्षा VIII के योग्य और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को कक्षा IX से XII तक छात्रवृत्ति देकर माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट रोकती है और इसका कार्यान्वयन राज्यों के सहयोग से शिक्षा मंत्रालय द्वारा समन्वित होता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) पर एक अभिमुखीकरण-सह-समीक्षा कार्यशाला का आयोजन किया है। इसका उद्देश्य योजना के कार्यान्वयन और सत्यापन प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करना है, ताकि पात्र छात्रों तक छात्रवृत्ति समय पर और सही रूप में पहुँचे। ऐसी कार्यशालाएँ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को दिशा-निर्देशों से अद्यतन रखने, योजना की प्रगति की समीक्षा करने और प्रशासनिक त्रुटियों या दोहराव को कम करने के लिए उपयोगी होती हैं। यह पहल शासन में प्रक्रियागत पारदर्शिता और लाभार्थी-केंद्रित प्रशासन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों में ड्रॉपआउट की समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2008 में यह योजना आरंभ की थी।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 और अनुच्छेद 21A के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष के बच्चों की नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की गारंटी है, जबकि माध्यमिक स्तर पर सहायता के लिए NMMSS जैसी योजनाएँ पूरक भूमिका निभाती हैं।
- यह केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें लागत केंद्र और राज्यों के बीच साझा की जाती है, इसलिए राज्य स्तर पर प्रशासनिक क्षमता और समन्वय योजना की सफलता के लिए निर्णायक है।
- योजना के लाभार्थियों का चयन राज्य स्तरीय चयन परीक्षा के माध्यम से होता है, जिसमें मानसिक क्षमता परीक्षण और विद्यालयी अभिरुचि परीक्षण शामिल होते हैं।
- छात्रवृत्ति का आवेदन और भुगतान राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जिससे सत्यापन की गुणवत्ता सीधे लाभार्थी तक पहुँच को प्रभावित करती है।
राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) क्या है?
- यह योजना कक्षा VIII के योग्य एवं आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को कक्षा IX से XII तक छात्रवृत्ति देकर माध्यमिक स्तर पर शिक्षा जारी रखने में सहायता करती है।
- पात्रता के लिए छात्र सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और स्थानीय निकाय के विद्यालयों में पढ़ने वाले होने चाहिए तथा परिवार की आय निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए।
- चयन राज्य या केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर आयोजित परीक्षा से होता है, और प्रत्येक राज्य को अपनी कुल कक्षा VIII नामांकन संख्या के आधार पर निर्धारित कोटा मिलता है।
- छात्रवृत्ति जारी रखने के लिए छात्रों को पिछली कक्षा में न्यूनतम अंक प्राप्त करने होते हैं, और आरक्षित वर्गों के लिए इस सीमा में रियायत का प्रावधान है।
- यह योजना शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा संचालित होती है, और राज्य सरकारें चयन, सत्यापन तथा भुगतान की प्रक्रियाओं में मुख्य भूमिका निभाती हैं।
- सत्यापन प्रक्रिया का उद्देश्य फर्जी या अपात्र लाभार्थियों को रोकना और वास्तविक पात्र छात्रों का सही चयन सुनिश्चित करना है, जो कल्याणकारी योजनाओं की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।
- यह योजना अनुच्छेद 46 में निहित राज्य के उस दायित्व से जुड़ी है, जिसके अनुसार दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की विशेष रूप से रक्षा की जानी चाहिए।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| योजना का उद्देश्य | सरकारी, सहायता प्राप्त और स्थानीय निकाय विद्यालयों के आर्थिक रूप से कमज़ोर किंतु मेधावी छात्रों को कक्षा IX से XII तक सहायता देकर विद्यालय छोड़ने की दर घटाना और उच्च शिक्षा की ओर उनका मार्ग प्रशस्त करना |
| प्रशासनिक स्वरूप | शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme); चयन और वितरण का क्रियान्वयन राज्य सरकारों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के माध्यम से |
| चयन प्रक्रिया | राज्य स्तरीय चयन परीक्षा के आधार पर, जिसमें मानसिक योग्यता परीक्षा (MAT) और शैक्षिक अभिरुचि परीक्षा (SAT) शामिल हैं; आय-सीमा सहित पात्रता की शर्तें लागू |
| निरंतरता की शर्त | छात्रवृत्ति का नवीनीकरण प्रत्येक वर्ष उत्तीर्ण होने और निर्धारित शैक्षणिक स्तर बनाए रखने पर निर्भर करता है |
| सत्यापन तंत्र | आवेदन, पात्रता और भुगतान के मिलान के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (National Scholarship Portal) तथा राज्य स्तरीय आंकड़ों का उपयोग; अपात्र चयन और दोहरे लाभ को रोकने में केंद्रीय भूमिका |
महत्व
सामाजिक
- आर्थिक कारणों से पढ़ाई बीच में छोड़ने को विवश मेधावी छात्रों को कक्षा IX से XII तक सहारा मिलता है
- ग्रामीण और वंचित वर्गों की बालिकाओं तथा छात्रों के लिए माध्यमिक से उच्च माध्यमिक स्तर पर सहभागिता बढ़ाने में सहायक
- सामाजिक न्याय की संवैधानिक भावना के अनुरूप शिक्षा में अवसरों की समानता को व्यावहारिक रूप देती है
शैक्षिक एवं मानव संसाधन
- उच्च शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण के लिए प्रतिभा-पूल का विस्तार होता है
- कक्षा IX से XII का चरण विद्यालय छोड़ने की दृष्टि से संवेदनशील है; इस अवधि में सहायता से शिक्षा की निरंतरता बनी रहती है
प्रशासनिक एवं शासन-सुधार
- छात्रवृत्ति वितरण में पारदर्शिता और सत्यापन की विश्वसनीयता सार्वजनिक धन के सही उपयोग को सुनिश्चित करती है
- पोर्टल आधारित मिलान और डेटा-सत्यापन ई-शासन की दिशा में एक व्यावहारिक उदाहरण है
संघीय ढाँचा
- केंद्र और राज्यों के बीच साझा क्रियान्वयन यह दर्शाता है कि शिक्षा जैसे विषयों में नीति-निर्माण और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी दोनों स्तरों पर बँटी होती है
- समीक्षा कार्यशालाएँ राज्यों की क्षमता-वृद्धि और नीति-समन्वय का माध्यम बनती हैं
चुनौतियाँ
1. सत्यापन में विलंब और आंकड़ों की असंगति
- विद्यालय, राज्य और केंद्र स्तर के रिकॉर्ड में मेल न होने से पात्र छात्रों की छात्रवृत्ति में देरी होती है
- आधार-आधारित या अन्य पहचान सत्यापन के बिना अपात्र प्रविष्टियाँ बनी रह सकती हैं
यूपीएससी लिंक: प्रशासनिक सुधार; ई-शासन; लोक सेवा वितरण
2. अपात्र एवं दोहरे लाभार्थी
- आय-प्रमाण पत्र और परिवार की स्थिति की जाँच कमज़ोर होने पर लाभ गैर-पात्र लोगों तक पहुँच सकता है
- एक से अधिक योजनाओं से एक ही छात्र को लाभ मिलने का जोखिम रहता है
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय; लाभार्थी-केंद्रित शासन; लोक वित्त प्रबंधन
3. राज्यों की क्रियान्वयन क्षमता और वित्तीय हिस्सेदारी
- केंद्र प्रायोजित योजना में राज्यों का अंशदान होने से वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता राज्यवार भिन्न हो सकती है
- छोटे राज्यों और दूरस्थ क्षेत्रों में प्रशासनिक तंत्र की कमी से समय पर वितरण बाधित होता है
यूपीएससी लिंक: संघवाद; केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध; वित्त आयोग की भूमिका
4. कक्षा IX से XII के बीच विद्यालय छोड़ने की समस्या
- ग्रामीण क्षेत्रों में माध्यमिक स्तर पर विद्यालयों की दूरी और परिवहन की कठिनाई ड्रॉप-आउट बढ़ाती है
- बालिकाओं के मामले में सामाजिक दबाव और घरेलू जिम्मेदारियाँ शिक्षा की निरंतरता में बाधक बनती हैं
यूपीएससी लिंक: शिक्षा में सामाजिक समावेशन; लैंगिक समानता; मानव विकास सूचकांक
5. डिजिटल विभाजन
- पोर्टल आधारित आवेदन और सत्यापन के लिए इंटरनेट, डिजिटल साक्षरता और उपकरणों की आवश्यकता होती है
- दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र और अभिभावक तकनीकी जटिलताओं के कारण प्रक्रिया से बाहर रह सकते हैं
यूपीएससी लिंक: डिजिटल समावेशन; ई-शासन; डिजिटल इंडिया के उद्देश्य
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सत्यापन और डेटा मिलान | विभिन्न स्तरों के रिकॉर्ड में असंगति से भुगतान में विलंब और पात्र छात्रों का छूट जाना |
| अपात्र एवं दोहरा लाभ | आय और पहचान की जाँच कमज़ोर होने पर सार्वजनिक धन का गैर-पात्र उपयोग |
| राज्यों की क्षमता और वित्त | राज्यवार प्रशासनिक क्षमता और अंशदान में अंतर से योजना के एकसमान क्रियान्वयन में बाधा |
| माध्यमिक स्तर पर ड्रॉप-आउट | कक्षा IX से XII के बीच आर्थिक, भौगोलिक और सामाजिक कारणों से छात्रों का विद्यालय छोड़ना |
| डिजिटल पहुँच | दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की कमी से आवेदन प्रक्रिया में असमानता |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (National Means-cum-Merit Scholarship Scheme – NMMSS)
आगे की राह
- विभिन्न स्तरों के आंकड़ों को एकीकृत कर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर वास्तविक समय में सत्यापन की व्यवस्था सुदृढ़ की जाए
- आवेदन के समय और वितरण से पहले आय, पहचान और विद्यालय नामांकन की स्वतंत्र जाँच के मानक तय किए जाएँ
- दोहरे लाभ की पहचान के लिए अन्य केंद्र और राज्य छात्रवृत्ति योजनाओं के डेटा के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) सुनिश्चित की जाए
- राज्यों की क्षमता-वृद्धि हेतु प्रशिक्षण, नियमित समीक्षा और सर्वोत्तम पद्धतियों के आदान-प्रदान को संस्थागत रूप दिया जाए
- कक्षा IX और X में ड्रॉप-आउट के संकेतों की पहचान कर समय पर परामर्श और सहायता देने की व्यवस्था बनाई जाए
- दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में सहायता केंद्र और सुविधा-शिविर लगाकर डिजिटल बाधाएँ कम की जाएँ
- छात्रवृत्ति के वितरण का समय-सारणी आधारित मानक और शिकायत निवारण तंत्र स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाए
- समीक्षा कार्यशालाओं के निष्कर्षों को राज्यवार कार्ययोजना और नियमित प्रगति-रिपोर्ट के रूप में संस्थागत रूप से दर्ज किया जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (National Means-cum-Merit Scholarship Scheme) (NMMSS) · केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) (DBT) · आधार-आधारित सत्यापन (Aadhaar-based Verification) · लक्षित और सार्वभौमिक दृष्टिकोण (Targeted vs Universal Approach) · माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट (Dropout at Secondary Level) · अनुच्छेद 21क (Article 21A): शिक्षा का मौलिक अधिकार · अनुच्छेद 46 (Article 46): दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की उन्नति · अनुच्छेद 45 (Article 45): प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा · समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) · वित्तीय समावेशन और प्रशासनिक पारदर्शिता (Financial Inclusion and Administrative Transparency) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और राज्यों की क्षमता निर्माण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 46: दुर्बल वर्गों के शैक्षिक हितों का संवर्धन
- सातवीं अनुसूची, समवर्ती सूची की प्रविष्टि 25: केंद्र-राज्य साझा शैक्षिक उत्तरदायित्व
अवधारणा प्रवाह
संविधान के अनुच्छेद 46 के अंतर्गत दुर्बल वर्गों की शिक्षा का राज्य का दायित्व निर्धारित है → शिक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना के दिशा-निर्देश और लक्ष्य तय करता है → राज्य सरकारें राज्य स्तरीय चयन परीक्षा और पात्र छात्रों की सूची तैयार कर वितरण में भाग लेती हैं → राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर आवेदन, पात्रता और भुगतान के आंकड़ों का सत्यापन और मिलान होता है → अभिमुखीकरण-सह-समीक्षा कार्यशाला में सत्यापन की कमियों की पहचान कर सुधार की कार्ययोजना बनती है → सुधरी हुई सत्यापन प्रक्रिया से पात्र छात्रों तक समय पर सहायता पहुँचती है और अपात्र लाभ घटता है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) का उद्देश्य कक्षा आठ उत्तीर्ण करने के बाद आर्थिक रूप से दुर्बल वर्ग के मेधावी छात्रों को कक्षा नौ से बारह तक सहायता देना है।
2. यह योजना केंद्र और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच लागत-साझेदारी के आधार पर क्रियान्वित की जाती है।
3. इस छात्रवृत्ति का लाभ केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को ही मिलता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- इनमें से कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि योजना कक्षा आठ के बाद चयनित छात्रों को कक्षा IX से XII तक छात्रवृत्ति देती है। कथन 2 सही है, क्योंकि यह केंद्र प्रायोजित योजना है और इसमें केंद्र-राज्य लागत-साझेदारी का प्रावधान है। कथन 3 गलत है, क्योंकि पात्रता आर्थिक स्थिति और योग्यता पर आधारित है, जाति पर नहीं।
Q2. कथन (A): प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और आधार-आधारित सत्यापन से छात्रवृत्ति योजनाओं में फर्जी या दोहरे लाभार्थियों की पहचान में सहायता मिलती है।
कारण (R): DBT के अंतर्गत धनराशि बिचौलियों को छोड़कर सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही विकल्प चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — DBT का मूल उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका समाप्त करना है, इसलिए धनराशि सीधे खाते में जाती है और लाभार्थी सत्यापन आसान होता है। आधार-आधारित सत्यापन इसी प्रक्रिया को मज़बूत करता है। अतः (R) (A) की सटीक व्याख्या है। यह अभिकथन और कारण का सामान्य चार-विकल्पीय प्रारूप है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन कीजिए:
सूची I (संवैधानिक प्रावधान)
1. अनुच्छेद 21क
2. अनुच्छेद 45
3. अनुच्छेद 46
सूची II (विषय-वस्तु)
a. दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की उन्नति
b. छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा
c. छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-c, 2-b, 3-a
- 1-a, 2-b, 3-c
- 1-c, 2-a, 3-b
- 1-b, 2-c, 3-a
उत्तर: 1-c, 2-b, 3-a — अनुच्छेद 21क (86वें संशोधन, 2002) छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार देता है, अतः 1-c। अनुच्छेद 45 छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा से संबंधित है, अतः 2-b। अनुच्छेद 46 राज्य के नीति निदेशक तत्वों में दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की उन्नति का निर्देश देता है, अतः 3-a।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ केंद्र प्रायोजित राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) में सत्यापन और वितरण की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। क्या सत्यापन की कठोरता से लाभार्थियों के चयन में समावेशिता और पारदर्शिता, दोनों सुनिश्चित हो सकती हैं? आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि सत्यापन में अति-कठोरता से माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट को रोकने का लक्ष्य किस प्रकार प्रभावित होता है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा:
1. भूमिका: NMMSS का उद्देश्य कक्षा आठ के बाद मेधावी किंतु आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों को माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट से बचाना है। इसे केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा लागू किया जाता है, जिसमें केंद्र-राज्य लागत-साझेदारी होती है। सहकारी संघवाद के संदर्भ में राज्यों की प्रशासनिक क्षमता इसकी सफलता की कुंजी है।
2. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21क (छह से चौदह वर्ष तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा), अनुच्छेद 41 (लोक सहायता का अधिकार, सीमित परिस्थितियों में), अनुच्छेद 46 (दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की उन्नति) और अनुच्छेद 39(च) (बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर)। नीति-स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत व्यय का लक्ष्य दोहराया गया है, जिसकी अनुशंसा कोठारी आयोग (1964-66) ने की थी।
3. सत्यापन के पक्ष में तर्क: DBT और आधार-आधारित सत्यापन फर्जी और दोहरे लाभार्थियों को रोकते हैं और सार्वजनिक धन के रिसाव को कम करते हैं। PFMS जैसे प्लेटफॉर्म पर वित्तीय निगरानी से जवाबदेही बढ़ती है। आधार के संदर्भ में के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2018) निर्णय महत्वपूर्ण है, जिसमें आधार की संवैधानिकता को सीमित प्रतिबंधों के साथ स्वीकार किया गया और निजता के अधिकार की सुरक्षा पर बल दिया गया।
4. सत्यापन के विरुद्ध तर्क: अति-कठोर दस्तावेज़ी शर्तों और डिजिटल अपवर्जन (digital exclusion) से वास्तविक ज़रूरतमंद छात्र, विशेषकर दूरदराज़ और जनजातीय क्षेत्रों के छात्र, बाहर रह सकते हैं। अमर्त्य सेन का क्षमता-दृष्टिकोण (Capability Approach) बताता है कि शिक्षा का अवसर केवल औपचारिक पात्रता से नहीं, बल्कि वास्तविक पहुँच से तय होता है। जीन ड्रेज़ लक्षित योजनाओं में ‘अपवर्जन त्रुटि’ (exclusion error) के खतरे की ओर ध्यान दिलाते हैं।
5. लक्षित बनाम सार्वभौमिक दृष्टिकोण: लक्षित चयन संसाधनों की दक्षता बढ़ाता है, पर उसमें अपवर्जन त्रुटि का जोखिम रहता है; सार्वभौमिक व्यवस्था में समावेशिता अधिक, किंतु लागत अधिक होती है। संतुलित मार्ग यह है कि सत्यापन को सहायक प्रक्रिया माना जाए, अंतिम बाधा नहीं।
6. साक्ष्य और सुझाव: UDISE+ जैसे आँकड़ों से ड्रॉपआउट की निगरानी, राज्यों की क्षमता-निर्माण, वैकल्पिक दस्तावेज़ों की व्यवस्था, शिकायत-निवारण तंत्र और सामाजिक लेखा परीक्षा (social audit) को शामिल किया जा सकता है।
7. निष्कर्ष: सत्यापन पारदर्शिता का साधन है, किंतु उसका उद्देश्य समावेशिता को न्यूनतम करना नहीं होना चाहिए। अनुच्छेद 21क और 46 की भावना के अनुरूप प्रक्रिया सरल, सुलभ और शिकायत-निवारण युक्त होनी चाहिए।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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