15 Oct जनजातीय भाषाओं के संरक्षण के लिए पहली बैठक: जनजातीय कार्य मंत्रालय
प्रासंगिकता — UPSC & State PCS: Society
**जनजातीय भाषाओं के संरक्षण एवं विकास के लिए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा ‘कार्यकारी समूह’ की पहली बैठक**
हाल ही में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा देश की जनजातीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और उनके विकास के लिए एक ‘कार्यकारी समूह’ का गठन किया गया है। इस समूह की पहली बैठक में जनजातीय भाषाओं से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई, जिसमें इन भाषाओं के लिए शिक्षा, साहित्य, डिजिटल संसाधनों और प्रशासनिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया गया। यह पहल भारत सरकार की ‘जनजातीय गौरव दिवस’ (15 नवंबर) के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे जनजातीय समुदायों की भाषाई विरासत को संरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही, यह प्रयास ‘नई शिक्षा नीति 2020’ के अनुरूप भी है, जिसमें बहुभाषावाद और स्थानीय भाषाओं के विकास पर जोर दिया गया है।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जनजातीय भाषाओं को संवैधानिक मान्यता दिलाने, उनके लिए मानक लिपि विकसित करने और उन्हें शिक्षा तथा प्रशासनिक कार्यों में शामिल करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करना है। विशेष रूप से, अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों की भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से की जा रही है, और इस दिशा में यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इसके अतिरिक्त, जनजातीय भाषाओं के संरक्षण से न केवल उनकी सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि इससे देश की भाषाई विविधता भी सुरक्षित रहेगी।
इस पहल का महत्व राज्य लोक सेवा आयोग (पीसीएस) परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि जनजातीय भाषाओं से संबंधित प्रश्न अक्सर समाज, संस्कृति और शासन के विषयों में पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिए, राज्य स्तर पर जनजातीय भाषाओं के विकास के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम, उनके संरक्षण के कानूनी प्रावधान, या फिर जनजातीय साहित्य और लोकगीतों का महत्व जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसके अलावा, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की मुख्य परीक्षा में भी ‘भाषाई अल्पसंख्यकों और उनकी समस्याएं’, ‘जनजातीय विकास योजनाएं’ या ‘संविधान की आठवीं अनुसूची’ जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जा सकती है।
अंततः, यह पहल न केवल जनजातीय समुदायों के लिए सांस्कृतिक गौरव का विषय है, बल्कि यह देश की भाषाई विविधता को बनाए रखने और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह विषय न केवल समाजशास्त्र और संस्कृति के पाठ्यक्रम का हिस्सा है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता और समावेशिता के व्यापक संदर्भ में भी अत्यंत प्रासंगिक है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
अभ्यास प्रश्न
Q1. जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा जनजातीय भाषाओं पर कार्य समूह की पहली बैठक का आयोजन किस शहर में किया गया था?
- नई दिल्ली
- मुंबई
- रांची
- गुवाहाटी
उत्तर
नई दिल्ली — जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा जनजातीय भाषाओं पर कार्य समूह की पहली बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।
Q2. जनजातीय भाषाओं पर कार्य समूह का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए रणनीति बनाना
- जनजातीय भाषाओं को विदेशी भाषाओं से बदलना
- जनजातीय भाषाओं के लिए नए कानून बनाना
- जनजातीय भाषाओं के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना
उत्तर
जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए रणनीति बनाना — जनजातीय भाषाओं पर कार्य समूह का मुख्य उद्देश्य जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए रणनीति बनाना है।
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