25 Oct मोदी सरकार का बड़ा ड्रग्स विरोधी अभियान: ऑपरेशन ट्राइडेंट से 18 गिरफ्तार
✎ नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अब केवल खेप की जब्ती नहीं, बल्कि तस्करी नेटवर्क, उसके वित्तीय स्रोतों (हवाला और धन शोधन) और सीमा-पार संपर्कों को एक साथ तोड़ना नीति का केंद्रबिंदु है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (नशीले पदार्थों की तस्करी, सीमा प्रबंधन, संगठित अपराध और केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (धन शोधन, हवाला और काले धन पर नियंत्रण) | GS Paper II — राजव्यवस्था (संघ-राज्य समन्वय, पुलिस और लोक व्यवस्था का विषय) | GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (म्यांमार और बांग्लादेश के साथ सीमा-सहयोग और पड़ोसी देशों से जुड़ी चुनौतियाँ)
- Prelims: नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (NCB): गृह मंत्रालय के अधीन, स्थापना 1986, NDPS अधिनियम के प्रवर्तन की नोडल एजेंसी, मादक पदार्थ और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act, 1985), धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA, 2002) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका, हवाला (Hawala): औपचारिक बैंकिंग के बाहर धन अंतरण की अनौपचारिक प्रणाली, गोल्डन ट्राएंगल (म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) और गोल्डन क्रीसेंट (अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान) की अफीम उत्पादक पट्टियाँ, मुक्त आवाजाही व्यवस्था (Free Movement Regime) और भारत-म्यांमार सीमा, भारत-म्यांमार-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र और असम राइफल्स की सीमा-सुरक्षा भूमिका, धन शोधन के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय मानक निर्धारित करने वाला FATF
- Essay: नशीले पदार्थों की तस्करी: सीमावर्ती राज्यों में आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक स्वास्थ्य पर प्रभाव, अपराध का अनुसरण धन तक: वित्तीय नेटवर्क पर प्रहार क्यों प्रभावी है
त्वरित पुनरावृत्ति: नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अब केवल खेप की जब्ती नहीं, बल्कि तस्करी नेटवर्क, उसके वित्तीय स्रोतों (हवाला और धन शोधन) और सीमा-पार संपर्कों को एक साथ तोड़ना नीति का केंद्रबिंदु है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (NCB) ने 23 अक्टूबर 2026 की सुबह ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के अंतर्गत असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 टीमों के माध्यम से 38 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस अभियान में मिजोरम पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का भी सहयोग रहा। गृह मंत्रालय के अनुसार यह कार्रवाई एक अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल के विरुद्ध थी, जिसमें लगभग 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता चला, 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए गए, 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त हुई, 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद बरामद हुए तथा 18 व्यक्ति गिरफ्तार किए गए। सरकारी विवरण के अनुसार यह नेटवर्क ‘Death Triangle Corridor’ के माध्यम से भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं से नशीले पदार्थों की तस्करी करता था। यह अभियान ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029)’ के अनुरूप बताया गया है, जिसका केंद्रबिंदु केवल खेप जब्त करने के बजाय तस्करी के पूरे नेटवर्क और उसके वित्तीय स्रोतों को नष्ट करना है।
पृष्ठभूमि
- नशीले पदार्थों से संबंधित विधिक ढाँचा मुख्यतः NDPS अधिनियम, 1985 से संचालित होता है। इसी अधिनियम के अंतर्गत नशीले पदार्थों के उत्पादन, कब्जे, व्यापार और तस्करी से जुड़े अपराधों के लिए दंड का प्रावधान है।
- नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो की स्थापना 1986 में हुई। यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और NDPS अधिनियम तथा अन्य संबंधित कानूनों के प्रवर्तन में समन्वय की भूमिका निभाता है।
- भारत की भौगोलिक स्थिति इसे दो प्रमुख अफीम उत्पादक क्षेत्रों, गोल्डन ट्राएंगल और गोल्डन क्रीसेंट, के बीच रखती है। पूर्वोत्तर भारत की सीमाएँ म्यांमार से लगी होने के कारण यह क्षेत्र तस्करी के मार्गों के लिए संवेदनशील माना जाता है।
- भारत-म्यांमार सीमा पर मुक्त आवाजाही व्यवस्था (FMR) लागू है, जिससे सीमा के दोनों ओर के निवासियों को सीमित दूरी तक आवाजाही की छूट मिलती है। इस व्यवस्था के दुरुपयोग और सीमा-प्रबंधन की चुनौतियों पर लगातार चर्चा होती रही है।
- आपराधिक आय को वैध बनाने की प्रक्रिया को धन शोधन कहा जाता है। PMLA, 2002 के अंतर्गत अपराध से अर्जित संपत्ति की कुर्की और जब्ती का प्रावधान है, और इसका प्रवर्तन ED करता है। इसी कारण नशीले पदार्थों के मामलों में वित्तीय जाँच की भूमिका बढ़ी है।
ऑपरेशन ट्राइडेंट और नेटवर्क-आधारित प्रवर्तन क्या है?
- यह NCB के नेतृत्व में केंद्रीय और राज्य एजेंसियों का समन्वित अभियान है, जिसमें मिजोरम पुलिस और ED की भागीदारी रही।
- इसका मूल दृष्टिकोण केवल नशीले पदार्थों की जब्ती तक सीमित न रहकर तस्करों के लॉजिस्टिक्स केंद्रों, संचालन तंत्र और वित्तीय आधार को एक साथ ध्वस्त करना है।
- कई दिनों तक गोपनीय खुफिया सूचनाओं का एकीकरण, संयुक्त रूप से लक्ष्यों की पहचान और उच्चस्तरीय बैठकों के बाद योजना बनाना इस प्रकार के अभियान की विशेषता है।
- हवाला लेनदेन, बैंक खातों का फ्रीजिंग और संपत्ति की जब्ती यह दर्शाती है कि प्रवर्तन का लक्ष्य ‘अपराध के धन’ तक पहुँचना है, जिसे धन शोधन विरोधी ढाँचे से जोड़ा जाता है।
- सीमावर्ती राज्यों में पुलिस का राज्य-विषय होना और नशीले पदार्थों से जुड़े विधिक प्रावधानों का समवर्ती सूची में होना संघ और राज्यों के बीच समन्वय को आवश्यक बनाता है।
- विस्फोटक सामग्री (डेटोनेटर) की बरामदगी यह संकेत देती है कि ऐसे नेटवर्क आपराधिक हिंसा और अन्य गतिविधियों से भी जुड़े हो सकते हैं, इसलिए इसे केवल मादक पदार्थ का मामला मानना पर्याप्त नहीं है।
- नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029) इस दृष्टिकोण को नीति-स्तर पर निर्देशित करने वाला दस्तावेज़ बताया गया है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| ऑपरेशन का स्वरूप | मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (Narcotics Control Bureau – NCB) के नेतृत्व में 38 टीमों ने 38 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की; केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस का संयुक्त अभियान |
| भौगोलिक क्षेत्र | असम, मिजोरम और मणिपुर, जो पूर्वोत्तर के सीमावर्ती राज्य हैं और म्यांमार व बांग्लादेश से सटे हैं |
| वित्तीय कार्रवाई | 100 करोड़ रुपये का हवाला लेनदेन उजागर, 1,424 बैंक खाते फ्रीज और 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त |
| प्रवर्तन परिणाम | 18 गिरफ्तारियां, 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद जब्त |
| नीतिगत आधार | नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029) के अनुरूप; लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक मादक पदार्थ नेटवर्क का उन्मूलन |
| रणनीतिक बदलाव | केवल जब्ती पर केंद्रित कार्रवाई के बजाय नेटवर्क के संचालन तंत्र और वित्तीय स्रोतों को नष्ट करने पर बल |
महत्व
सुरक्षा और आंतरिक शांति
- डेटोनेटर की बरामदगी से संकेत मिलता है कि मादक पदार्थ तस्करी और विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति के बीच संभावित संबंध की जांच आवश्यक है
- सीमावर्ती पूर्वोत्तर क्षेत्र में संगठित अपराध पर नियंत्रण से आंतरिक सुरक्षा की स्थिति सुदृढ़ होती है
- ‘Death Triangle Corridor’ (मृत्यु त्रिकोण गलियारा) जैसे मार्गों को तोड़ना सीमा-पार तस्करी के ढांचे पर सीधा प्रहार है
वित्तीय और आर्थिक
- हवाला लेनदेन और बैंक खातों का फ्रीज होना मादक पदार्थ अर्थव्यवस्था के वित्तीय आधार को कमजोर करता है
- धन शोधन (Money Laundering) की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) की भागीदारी से अपराध की आय का पता लगाने की प्रक्रिया मजबूत होती है
- संपत्ति की जब्ती अपराध से अर्जित आय को वैध अर्थव्यवस्था से अलग करने का साधन है
प्रशासनिक और संघीय
- केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच खुफिया सूचनाओं का एकीकरण सहकारी संघवाद की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है
- पुलिस राज्य सूची का विषय होने के कारण, इस प्रकार का अंतरराज्यीय अभियान केंद्र-राज्य समन्वय का उदाहरण बनता है
- मिजोरम पुलिस और ED के साथ तालमेल से यह स्पष्ट होता है कि बहु-एजेंसी दृष्टिकोण से जटिल अपराधों से निपटा जा सकता है
कूटनीतिक और सीमा प्रबंधन
- म्यांमार और बांग्लादेश से जुड़े तस्करी मार्गों पर कार्रवाई सीमा प्रबंधन और पड़ोसी देशों के साथ कानून प्रवर्तन सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करती है
- अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ कार्टेल से निपटने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग अनिवार्य है
चुनौतियाँ
1. खुली और पारगम्य सीमा
- भारत-म्यांमार सीमा पर मुक्त आवाजाही व्यवस्था (Free Movement Regime – FMR) के कारण सीमा-पार आवाजाही का नियमन कठिन है
- पहाड़ी और घने वन क्षेत्रों में निगरानी के लिए पर्याप्त अवसंरचना का अभाव है
- सीमा-पार तस्करी मार्ग स्थानीय भूगोल और पारंपरिक आवाजाही से जुड़े होने के कारण पहचानना कठिन होता है
यूपीएससी लिंक: सीमा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा (GS-3)
2. अंतरराज्यीय और केंद्र-राज्य समन्वय
- पुलिस राज्य सूची का विषय है, जबकि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय अपराध में केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका बढ़ जाती है
- विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने के मानक प्रोटोकॉल सदैव एकरूप नहीं होते
- समन्वय में विलंब से गिरोहों को सतर्क होने का अवसर मिल सकता है
यूपीएससी लिंक: संघवाद, संविधान की सातवीं अनुसूची और केंद्र-राज्य संबंध (GS-2)
3. वित्तीय नेटवर्क की जटिलता
- हवाला प्रणाली में पारंपरिक और अनौपचारिक माध्यमों के कारण धन का पता लगाना कठिन होता है
- सीमा-पार लेनदेन, बेनामी खाते और परतदार वित्तीय संरचनाएं जांच को जटिल बनाती हैं
- फ्रीज खातों और जब्त संपत्ति पर विधिक प्रक्रिया लंबी हो सकती है
यूपीएससी लिंक: धन शोधन, आंतरिक सुरक्षा और वित्तीय अपराध (GS-3)
4. मादक पदार्थ और विस्फोटक का गठजोड़
- डेटोनेटर जैसी सामग्री की बरामदगी से संगठित अपराध और हिंसक गतिविधियों के बीच संबंध की आशंका बढ़ती है
- ऐसे गठजोड़ में विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति श्रृंखला पर निगरानी आवश्यक है
- सुरक्षा बलों के सामने दोहरी चुनौती होती है: मादक पदार्थ और हथियार-विस्फोटक दोनों पर नियंत्रण
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा में संगठित अपराध और आतंकवाद का संबंध (GS-3)
5. मांग पक्ष और सामाजिक प्रभाव
- केवल आपूर्ति पक्ष पर कार्रवाई से मादक पदार्थों की स्थायी समस्या का समाधान संभव नहीं है
- युवाओं में नशे की लत पुनर्वास और जागरूकता के लिए दीर्घकालिक प्रयासों की मांग करती है
- सीमावर्ती समुदायों में आजीविका के विकल्पों का अभाव तस्करी के जोखिम को बढ़ा सकता है
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, स्वास्थ्य और मानव विकास (GS-2)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सीमा निगरानी | खुली और पहाड़ी सीमा पर पारगम्यता के कारण तस्करी मार्गों को पूरी तरह बंद करना कठिन |
| एजेंसियों के बीच समन्वय | केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच सूचना साझेदारी में विलंब या असमानता का जोखिम |
| वित्तीय जांच | हवाला और सीमा-पार लेनदेन की पहचान व फ्रीज प्रक्रिया की जटिलता |
| विस्फोटक सामग्री | डेटोनेटर जैसी सामग्री का अपराध और हिंसा से संभावित संबंध |
| अभियोजन और न्याय | जब्ती और गिरफ्तारी के बाद मामलों के निस्तारण में समय लगना |
| मांग पक्ष | नशे की लत और पुनर्वास सेवाओं की सीमित उपलब्धता |
आगे की राह
- सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त निगरानी और रियल-टाइम खुफिया सूचना साझेदारी तंत्र को संस्थागत रूप दिया जाए
- हवाला और धन शोधन की जांच में NCB, ED और राज्य पुलिस के बीच नियमित समन्वय बैठकें आयोजित की जाएं
- नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029) के लक्ष्यों की समयबद्ध समीक्षा और निगरानी की जाए
- म्यांमार और बांग्लादेश के साथ कानून प्रवर्तन सहयोग और सूचना आदान-प्रदान को सुदृढ़ किया जाए
- राज्य पुलिस की वित्तीय खुफिया, डिजिटल फॉरेंसिक और सीमा निगरानी की क्षमता का निर्माण किया जाए
- डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ा नियंत्रण लागू किया जाए
- मांग पक्ष पर जागरूकता, उपचार और पुनर्वास सेवाओं का विस्तार किया जाए
- नशीले पदार्थ से जुड़े मामलों में अभियोजन की गति बढ़ाई जाए और संपत्ति जब्ती के विधिक प्रावधानों का प्रभावी उपयोग हो
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नशीले पदार्थों की तस्करी · नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (NCB) · NDPS अधिनियम, 1985 · संपत्ति की जब्ती और अग्रेषण (Forfeiture) · धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) · हवाला लेनदेन · सीमावर्ती सुरक्षा और सीमा प्रबंधन · सहकारी संघवाद और केंद्र-राज्य समन्वय · गोल्डन ट्राएंगल एवं सीमा-पार तस्करी · नशा-मुक्त भारत (आंतरिक सुरक्षा का आयाम)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 246 – विधायी शक्तियों का संघ और राज्यों में विभाजन
- सातवीं अनुसूची – पुलिस (राज्य सूची) और अंतरराज्यीय अपराध का विधायी विभाजन
- अनुच्छेद 355 – सीमावर्ती राज्यों की बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से सुरक्षा का संघ का दायित्व
अवधारणा प्रवाह
पूर्वोत्तर सीमावर्ती क्षेत्र में भारत-म्यांमार-बांग्लादेश गलियारे से सीमा-पार मादक पदार्थ तस्करी का नेटवर्क सक्रिय होता है → खुफिया सूचनाओं का केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच एकीकरण तथा संयुक्त लक्ष्य-निर्धारण किया जाता है → एक साथ 38 स्थानों पर समन्वित छापेमारी की जाती है → हवाला लेनदेन की पहचान होती है, 1,424 बैंक खाते फ्रीज होते हैं और 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त होती है → 18 गिरफ्तारियां होती हैं तथा 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद जब्त होते हैं → नेटवर्क का वित्तीय आधार कमजोर होता है और मामले NDPS अधिनियम, 1985 तथा धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत आगे बढ़ते हैं → नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029) के अनुरूप दीर्घकालिक लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक नेटवर्क के पूर्ण उन्मूलन का है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘नशीले पदार्थ और मनःप्रभावी पदार्थ’ से संबंधित विषय संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) की प्रविष्टि 19 में ‘औषधियाँ और विष’ के अंतर्गत आता है, जो संघ सूची की प्रविष्टि 59 के उपबंधों के अधीन है।
2. NDPS अधिनियम, 1985 में अध्याय VA के अंतर्गत अवैध तस्करी से प्राप्त संपत्ति की जब्ती का प्रावधान है।
3. नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो की स्थापना संसद के एक विधिक अधिनियम द्वारा की गई थी और यह एक वैधानिक निकाय है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: नशीले पदार्थ समवर्ती सूची की प्रविष्टि 19 में आते हैं, जो संघ सूची की प्रविष्टि 59 (अफीम आदि के नियमन) के अधीन है। कथन 2 सही है: NDPS अधिनियम का अध्याय VA (धारा 68-A से 68-X) अवैध तस्करी से अर्जित संपत्ति की जब्ती से संबंधित है। कथन 3 गलत है: NCB की स्थापना 1986 में भारत सरकार के संकल्प (Resolution) द्वारा हुई थी, किसी संसदीय अधिनियम द्वारा नहीं; यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। अतः सही उत्तर ‘केवल दो’ है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): नशीले पदार्थों की तस्करी से अर्जित धन का शोधन धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
कारण (R): NDPS अधिनियम, 1985 के अंतर्गत आने वाले अपराध PMLA, 2002 की अनुसूची में ‘अनुसूचित अपराध’ (Scheduled Offence) के रूप में सम्मिलित हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — कथन (A) सही है: नशीले पदार्थों की तस्करी से अर्जित आय का शोधन PMLA के अंतर्गत आता है और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इसकी जाँच करता है। कारण (R) भी सही है: NDPS अधिनियम PMLA की अनुसूची में शामिल है, इसलिए यह अपराध ‘अनुसूचित अपराध’ है। R, A की वैधानिक आधारशिला है, अतः R, A की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म ‘गोल्डन ट्राएंगल’ (Golden Triangle) क्षेत्र के देशों को सही प्रकार से दर्शाता है, जो अफीम उत्पादन और सीमा-पार नशीले पदार्थ तस्करी के लिए जाना जाता है?
- म्यांमार, लाओस और थाईलैंड
- अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान
- म्यांमार, बांग्लादेश और भारत
- तुर्की, सीरिया और इराक
उत्तर: म्यांमार, लाओस और थाईलैंड — गोल्डन ट्राएंगल में म्यांमार, लाओस और थाईलैंड के सीमावर्ती पर्वतीय क्षेत्र आते हैं। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान का क्षेत्र ‘गोल्डन क्रीसेंट’ कहलाता है। विकल्प ‘C’ में बांग्लादेश और भारत इस क्षेत्र का हिस्सा नहीं हैं, और ‘D’ का क्षेत्र इस संदर्भ से भिन्न है। ऑपरेशन ट्राइडेंट में बताया गया ‘Death Triangle Corridor’ एक विशिष्ट मार्ग-नाम है और उसे गोल्डन ट्राएंगल का पर्याय नहीं समझना चाहिए।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में नशीले पदार्थों की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि सीमा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा का विषय है। इस संदर्भ में संघीय ढाँचे के भीतर केंद्रीय प्रवर्तन एजेंसियों और राज्य पुलिस की भूमिकाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, तस्कर गिरोहों की वित्तीय रीढ़ (हवाला लेनदेन और धन शोधन) पर प्रहार की रणनीति कहाँ तक प्रभावी सिद्ध हो सकती है, इसका मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर संरचना:
1. भूमिका: पूर्वोत्तर में मणिपुर, मिजोरम और असम की म्यांमार व बांग्लादेश से लगी सीमाएँ, खुली सीमा-व्यवस्था और ‘Death Triangle Corridor’ जैसे मार्ग; ऑपरेशन ट्राइडेंट (38 स्थान, 38 टीमें, 18 गिरफ्तारियाँ, ₹100 करोड़ का हवाला लेनदेन, 1,424 बैंक खाते फ्रीज, ₹17.82 करोड़ की संपत्ति जब्त) को उदाहरण के रूप में लेना।
2. संवैधानिक ढाँचा: सातवीं अनुसूची में पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य सूची की प्रविष्टि 1 (राज्य सूची) में; नशीले पदार्थ व औषधियाँ समवर्ती सूची की प्रविष्टि 19 में, जो संघ सूची की प्रविष्टि 59 के अधीन है; अनुच्छेद 355 के अंतर्गत संघ का कर्तव्य कि वह राज्यों को आंतरिक अशांति से संरक्षण दे। इस व्यवस्था से उत्पन्न ‘अधिकारिता के अतिव्यापन’ की चर्चा।
3. केंद्रीय संस्थागत ढाँचा: नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (1986, गृह मंत्रालय के अधीन, नोडल एजेंसी); NCORD (नारकोटिक्स समन्वय केंद्र/राज्य-स्तरीय समन्वय); प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका PMLA 2002 के तहत; FIU-IND की वित्तीय खुफिया भूमिका; सहकारी संघवाद का व्यावहारिक परीक्षण।
4. कानूनी उपकरण: NDPS अधिनियम, 1985 की धारा 37 (जमानत की दोहरी शर्तें), अध्याय VA के अंतर्गत संपत्ति की जब्ती; PMLA के अंतर्गत ‘अपराध की आय’ (proceeds of crime) की कुर्की।
5. नीति-दृष्टिकोण: ‘नशा-मुक्त भारत अभियान’ (सामाजिक न्याय मंत्रालय) द्वारा माँग-पक्ष (demand side) पर बल; जब्ती-केंद्रित से नेटवर्क-केंद्रित रणनीति में परिवर्तन; ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029)’ और 31 दिसंबर 2029 का लक्ष्य।
6. सीमा-प्रबंधन आयाम: भारत-म्यांमार सीमा की मुक्त आवागमन व्यवस्था (FMR) और बाड़ेबंदी पर नीतिगत बहस; सीमा-पार वित्तीय प्रवाह में FATF की मानकों की भूमिका।
7. संतुलित दृष्टिकोण: (क) सुरक्षा-केंद्रित मत, जो कठोर प्रवर्तन और वित्तीय गला घोंटने पर बल देता है; (ख) मानवाधिकार और स्वास्थ्य-केंद्रित मत, जो लत को रोग मानकर उपचार और पुनर्वास पर ज़ोर देता है; (ग) वित्तीय नेटवर्क पर प्रहार की सीमाएँ—हवाला का अनौपचारिक स्वरूप, बेनामी संपत्ति, और सीमित दोषसिद्धि दर।
8. निष्कर्ष: समन्वित संघीय प्रवर्तन, वित्तीय खुफिया, सीमा प्रबंधन और मांग-न्यूनीकरण का समेकित मॉडल; अंतिम मूल्यांकन यह कि प्रभावशीलता दोषसिद्धि और संपत्ति-जब्ती के दीर्घकालिक परिणामों पर निर्भर है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Assam PCS (APSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत ड्रग्स विरोधी अभियान में शामिल नहीं था?
- असम
- मिजोरम
- मणिपुर
- नागालैंड
उत्तर: नागालैंड — ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ में असम, मिजोरम और मणिपुर शामिल थे, जबकि नागालैंड शामिल नहीं था।
Mains: असम में ड्रग्स के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के प्रभावों का विश्लेषण करते हुए, राज्य में ड्रग्स तस्करी की चुनौतियों और उनके निवारण के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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