केरल सरकार ने वन्यजीव संघर्ष पीड़ितों के मुआवज़े में 25% की बढ़ोतरी की

केरल सरकार ने वन्यजीव संघर्ष पीड़ितों के मुआवज़े में 25% की बढ़ोतरी की

मानव-वन्यजीव संघर्ष में मुआवजा प्रक्रियाविवाद/घटनामानव-वन्यजीव संघर्षपीड़ित आवेदनराज्य सरकार कोमुआवजा निर्धारणनई दरों के अनुसारत्वरित सहायताआर्थिक राहत पहुंचाना
मानव-वन्यजीव संघर्ष में मुआवजा प्रक्रिया

✎ मानव-वन्यजीव संघर्ष में प्रतिकर एक नीतिगत (गैर-वैधानिक) सहायता है, जिसका स्थायी समाधान संरक्षण, वन्यजीव गलियारों और आजीविका-संतुलन में निहित है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (राज्य सरकारों की नीतियाँ, सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाएँ, दिव्यांगजन अधिकार)  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष)
  • Prelims: मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict), वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife (Protection) Act, 1972) और इसकी अनुसूचियाँ, प्रोजेक्ट एलिफेंट (Project Elephant), 1992 — केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (Chief Minister’s Distress Relief Fund — CMDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund — SDRF), बेंचमार्क दिव्यांगता (Benchmark Disability) — दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार 40 प्रतिशत या अधिक, अनुग्रह राशि (Solatium) और प्रतिकर में अंतर, वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridors)
  • Essay: मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व: संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन, कल्याणकारी राज्य में आपदा और क्षति के प्रति राज्य का उत्तरदायित्व

त्वरित पुनरावृत्ति: मानव-वन्यजीव संघर्ष में प्रतिकर एक नीतिगत (गैर-वैधानिक) सहायता है, जिसका स्थायी समाधान संरक्षण, वन्यजीव गलियारों और आजीविका-संतुलन में निहित है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केरलम सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों के लिए प्रतिकर और चिकित्सा सहायता में 25 प्रतिशत की वृद्धि की है। वन्यजीव हमलों में मृत्यु पर अधिकतम प्रतिकर ₹14 लाख से बढ़ाकर ₹17.5 लाख किया गया है, जबकि हाथी, जंगली सूअर और मधुमक्खी के हमलों में मृत्यु पर अनुग्रह राशि ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख की गई है। स्थायी दिव्यांगता के मामलों में भी दरें बढ़ाई गई हैं। यह संशोधन राज्य सरकार के 100-दिवसीय कार्य कार्यक्रम के अंतर्गत लागू किया गया है। इसलिए यह समाचार राज्य स्तर पर संघर्ष-पीड़ितों की वित्तीय सुरक्षा और सहायता प्रक्रिया के सरलीकरण से जुड़ा है।

पृष्ठभूमि

  • वन क्षेत्रों के घटते आकार, आवास के विखंडन और परंपरागत वन्यजीव गलियारों में बाधा के कारण हाथी, जंगली सूअर और बाघ जैसे जीव मानव बस्तियों और कृषि क्षेत्रों के निकट आ रहे हैं, जिससे जान-माल की हानि बढ़ी है।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 मुख्य रूप से वन्यजीवों के संरक्षण और अवैध शिकार पर केंद्रित है; इसमें मानव-हानि के लिए प्रतिकर का कोई एकरूप वैधानिक ढाँचा नहीं दिया गया है, इसलिए राज्य अपनी नीतियों और शासनादेशों के माध्यम से सहायता तय करते हैं।
  • केंद्र सरकार द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों के लिए सहायता के दिशानिर्देश जारी किए जाते हैं, परंतु राज्य अपने वित्तीय संसाधनों से इन्हें बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हैं।
  • आपदा प्रबंधन ढाँचे में SDRF से सहायता मुख्यतः राज्य द्वारा अधिसूचित आपदाओं पर दी जाती है; इसलिए वन्यजीव-जनित क्षति के लिए राज्य अक्सर अपने बजट और आकस्मिक निधियों का उपयोग करते हैं।
  • दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में बेंचमार्क दिव्यांगता की परिभाषा (40 प्रतिशत या अधिक) दी गई है, और यही मानक राज्य की विभिन्न सहायता श्रेणियों के निर्धारण में उपयोगी संदर्भ बनता है।
  • केरलम में इस निर्णय के साथ वृद्धि और अस्पताल-आधारित सहायता में सरलीकरण का उद्देश्य पीड़ित परिवारों तक त्वरित और पारदर्शी राहत पहुँचाना बताया गया है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष और प्रतिकर व्यवस्था क्या है?

  • मानव-वन्यजीव संघर्ष वह स्थिति है जब वन्यजीवों के हमलों, फसल-क्षति या संपत्ति-हानि से मानव जीवन, आजीविका और वन्यजीव संरक्षण दोनों प्रभावित होते हैं।
  • इसके प्रमुख कारणों में आवास का विखंडन, वन्यजीव गलियारों का अवरुद्ध होना, खाद्य स्रोतों की कमी और मानव बस्तियों का वन क्षेत्रों तक विस्तार शामिल हैं।
  • प्रतिकर और अनुग्रह राशि (Solatium) राज्य द्वारा पीड़ित परिवारों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता है; यह वैधानिक अधिकार के रूप में नहीं, बल्कि नीतिगत प्रावधान के रूप में दी जाती है।
  • मृत्यु, स्थायी दिव्यांगता और चोट—तीनों श्रेणियों के लिए अलग-अलग दरें तय की जाती हैं, जिनमें दिव्यांगता का प्रतिशत एक मुख्य आधार होता है।
  • चिकित्सा सहायता का एक हिस्सा मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (CMDRF) से दिया जाता है, जबकि सामान्य अस्पताल-सहायता राज्य के मानक प्रावधानों से मिलती है।
  • प्रोजेक्ट एलिफेंट (1992) जैसे केंद्रीय कार्यक्रम हाथी-मानव संघर्ष के प्रबंधन पर केंद्रित हैं, जिनमें आवास प्रबंधन और संघर्ष-शमन उपाय शामिल हैं।
  • प्रतिकर के साथ-साथ शमन उपाय, जैसे त्वरित प्रतिक्रिया दल, पूर्व-चेतावनी प्रणाली और सुरक्षात्मक बाड़ेबंदी, संघर्ष को कम करने के लिए आवश्यक हैं।
  • नीतिगत दृष्टि से प्रतिकर केवल पीड़ित को राहत देता है; स्थायी समाधान के लिए संरक्षण, आजीविका और भूमि-उपयोग नियोजन का समन्वय ज़रूरी है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
अधिकतम मुआवज़ा मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) में मृत्यु के मामलों में मुआवज़ा ₹14 लाख से बढ़ाकर ₹17.5 लाख किया गया। हाथी, जंगली सूअर और मधुमक्खी के हमलों से मृत्यु पर यह ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख किया गया है।
स्थायी विकलांगता पर मुआवज़ा 40% से 60% तक की विकलांगता, जिसमें अंग या आँख की हानि शामिल है, के लिए ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹2.5 लाख। 60% से अधिक विकलांगता पर ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹3.125 लाख।
मुख्यमंत्री राहत कोष (CMDRF) से सहायता सामान्य सहायता के अतिरिक्त ₹1 लाख तक का अनुदान स्वीकृत किया जा सकता है। ₹2.25 लाख से अधिक व्यय वाले दुर्लभ और गंभीर मामलों में चिकित्सक के प्रमाणपत्र के आधार पर वास्तविक लागत अलग सरकारी आदेश के बिना स्वीकृत हो सकती है।
अस्पताल में भर्ती पर सहायता एक सप्ताह से अधिक भर्ती रहने वाले पीड़ितों के लिए अधिकतम सीमा ₹1.25 लाख तय की गई है। एक सप्ताह से कम भर्ती पर ₹5,400 से ₹1 लाख तक की सहायता मानक प्रावधानों के अंतर्गत जारी रहेगी।
कार्यान्वयन का ढाँचा यह संशोधन राज्य सरकार के 100-दिवसीय कार्य कार्यक्रम के अंतर्गत लागू किया गया है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाने का संकेत मिलता है।

महत्व

मानवीय और सामाजिक

  • मृतक पर आश्रित परिवारों को तात्कालिक आर्थिक सहारा मिलता है, जिससे परिवार की आजीविका पर पड़ने वाला संकट कुछ हद तक कम होता है।
  • स्थायी विकलांगता से कार्यक्षमता घटने पर पीड़ित और उसके परिवार को उपचार तथा पुनर्वास के लिए अधिक संसाधन मिल सकते हैं।
  • वन्यजीव हमलों को केवल पर्यावरणीय समस्या न मानकर मानव जीवन की सुरक्षा से जोड़कर देखने की नीतिगत स्वीकृति प्रकट होती है।

प्रशासनिक और शासन

  • चिकित्सक के प्रमाणपत्र के आधार पर CMDRF से व्यय स्वीकृत करने की व्यवस्था से अलग सरकारी आदेश की आवश्यकता घटती है और सहायता में विलंब कम हो सकता है।
  • मुआवज़ा दरों को एक ही आदेश में संशोधित करने से प्रावधानों में एकरूपता आती है और पात्रता संबंधी भ्रम घटता है।
  • राज्य सरकार के 100-दिवसीय कार्य कार्यक्रम के अंतर्गत यह कदम शासन में त्वरित परिणाम दिखाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

वित्तीय

  • मुआवज़ा दरों में 25% की वृद्धि से राज्य के आकस्मिक और आपदा-सम्बन्धी व्यय पर दबाव बढ़ता है।
  • CMDRF जैसे राहत कोष का उपयोग राज्य के बजट में आपातकालीन सहायता के लिए लचीला साधन उपलब्ध कराता है।
  • वार्षिक बजट में ऐसे दायित्वों का पूर्वानुमान लगाना राजकोषीय योजना के लिए आवश्यक हो जाता है।

संवैधानिक और पर्यावरणीय

  • जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा का मूल अधिकार राज्य की कल्याणकारी भूमिका को सुदृढ़ करता है।
  • मानव और वन्यजीव सह-अस्तित्व की व्यवस्था में मुआवज़ा केवल प्रतिक्रियात्मक उपाय है, इसलिए इसे संरक्षण नीति के साथ जोड़कर देखना आवश्यक है।

चुनौतियाँ

1. वित्तीय भार और संसाधनों का प्रबंधन

  • मुआवज़ा दरों में बार-बार वृद्धि से राज्य के वार्षिक दायित्व बढ़ते हैं, जबकि इनके लिए स्थायी और पूर्वानुमेय वित्तीय स्रोत स्पष्ट होना चाहिए।
  • आपदा-राहत कोष पर निर्भरता बढ़ने से अन्य विकास मदों के लिए संसाधन सीमित हो सकते हैं।

2. निवारण बनाम प्रतिकार

  • मुआवज़ा नुकसान की भरपाई करता है, किंतु संघर्ष की घटनाओं को रोकने का कार्य नहीं करता।
  • हाथी और जंगली सूअर जैसे जीवों के हमलों की रोकथाम के लिए बाड़ेबंदी, प्रारंभिक चेतावनी और फसल संरक्षण जैसे उपायों की निरंतर आवश्यकता रहती है।

3. दावों का सत्यापन और प्रशासनिक विलंब

  • तीव्र भुगतान के लिए घटना, मृत्यु या विकलांगता का प्रमाणन विश्वसनीय और शीघ्र होना चाहिए।
  • दुर्गम क्षेत्रों में दस्तावेज़ जुटाना कठिन होता है, जिससे पात्र व्यक्तियों तक सहायता पहुँचने में देर हो सकती है।

4. आवास-विखंडन और संघर्ष के मूल कारण

  • वनों के विखंडन, वन-सीमा पर बस्तियों के विस्तार और भोजन के स्रोतों में बदलाव से वन्यजीवों का मानव-बस्तियों की ओर आना बढ़ता है।
  • मूल कारणों का समाधान किए बिना मुआवज़ा बढ़ाना दीर्घकालिक समाधान नहीं दे पाता।

5. केंद्र और राज्य के बीच विधिक-प्रशासनिक समन्वय

  • वन्यजीव संरक्षण की विधायी शक्ति मुख्यतः राज्य सूची में है, किंतु कई संरक्षित क्षेत्रों और नियमों के लिए केंद्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
  • राज्यों के बीच मुआवज़ा दरों में अंतर से सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक असमानता उत्पन्न हो सकती है।

6. राहत कोष में पारदर्शिता और जवाबदेही

  • सीधे कोष से व्यय स्वीकृति में विवेकाधिकार बढ़ता है, इसलिए स्वीकृति के मानदंड स्पष्ट और सार्वजनिक होने चाहिए।
  • लेखा-परीक्षण और सार्वजनिक प्रकटीकरण से यह सुनिश्चित होता है कि सहायता वास्तविक पीड़ितों तक पहुँचे।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वित्तीय दायित्व मुआवज़ा दरों में वृद्धि से राज्य के आवर्ती व्यय पर दीर्घकालिक दबाव बढ़ सकता है।
संघर्ष की रोकथाम केवल मुआवज़े से हमलों की संख्या कम नहीं होती, इसलिए निवारक उपायों का पूरक होना आवश्यक है।
दावा प्रक्रिया सत्यापन और भुगतान में विलंब से राहत का उद्देश्य कमज़ोर पड़ सकता है।
आवास और भूमि उपयोग वन-सीमा पर बस्तियों का विस्तार और वन क्षरण संघर्ष के मूल कारण बने रहते हैं।
राहत कोष का उपयोग विवेकाधीन व्यय में पारदर्शी मानदंडों और सार्वजनिक जवाबदेही की कमी से असमानता की आशंका रहती है।
क्षेत्रीय असमानता अन्य राज्यों के साथ मुआवज़ा दरों में अंतर से सीमावर्ती और समान पारिस्थितिकी वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक असंतुलन हो सकता है।

आगे की राह

  • मुआवज़ा प्रक्रिया के लिए समयसीमा और दावा-निपटान के स्पष्ट मानक तय किए जाएँ, ताकि भुगतान में विलंब न हो।
  • हाथी, जंगली सूअर और मधुमक्खी जैसे प्रमुख संघर्षकारी जीवों के लिए क्षेत्रवार निवारक योजना बनाई जाए, जिसमें बाड़ेबंदी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली शामिल हो।
  • वन-सीमा के गाँवों में फसल-क्षति के लिए बीमा जैसे पूरक वित्तीय उपायों पर विचार किया जाए, ताकि प्रतिकार का भार केवल राहत कोष पर न रहे।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष के हॉटस्पॉट की मानचित्रण और नियमित निगरानी की जाए, ताकि संसाधनों का लक्षित उपयोग हो सके।
  • CMDRF से स्वीकृत व्यय के मानदंड, राशि और लाभार्थियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए, जिससे पारदर्शिता बढ़े।
  • स्थानीय निकायों और ग्राम स्तरीय समितियों की भूमिका बढ़ाकर प्रमाणन और सूचना-प्रसार को सुदृढ़ किया जाए।
  • वन-क्षेत्र के आवास-संरक्षण और गलियारों के संरक्षण को भूमि-उपयोग नियोजन से जोड़ा जाए।
  • राज्यों के बीच अनुभव-साझाकरण और मुआवज़ा-दरों के तुलनात्मक अध्ययन से नीतिगत समरूपता पर विचार किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) · अनुग्रह राशि (Ex gratia) · सांत्वना राशि (Solatium) · मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (Chief Minister’s Distress Relief Fund) · आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) · वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wild Life (Protection) Act, 1972) · अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) · अनुच्छेद 48क और 51क(ज) (पर्यावरण संरक्षण) · सहवर्ती सूची (Concurrent List) · प्रोजेक्ट एलीफैंट (Project Elephant) · आवास विखंडन (Habitat Fragmentation) · सहअस्तित्व-आधारित संरक्षण (Coexistence-based Conservation)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार
  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का राज्य दायित्व
  • अनुच्छेद 51A(g): वन्यजीवों की रक्षा का मूल कर्तव्य
  • सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 17: वन्य जीव संरक्षण का विषय

अवधारणा प्रवाह

वन-क्षेत्र का विखंडन और मानव बस्तियों का विस्तार, जिससे मानव और वन्यजीवों का आमना-सामना बढ़ता है।  →  हाथी, जंगली सूअर और मधुमक्खी जैसे जीवों के हमलों में मृत्यु, विकलांगता या चोट की घटनाएँ होती हैं।  →  पीड़ितों और आश्रितों के लिए राज्य सरकार द्वारा मुआवज़ा दरों में 25% की वृद्धि की जाती है।  →  विकलांगता की श्रेणी के अनुसार स्थायी सहायता और अस्पताल में भर्ती की अवधि के अनुसार उपचार-सहायता तय की जाती है।  →  गंभीर मामलों में CMDRF से चिकित्सकीय प्रमाणपत्र के आधार पर वास्तविक व्यय या अनुदान स्वीकृत किया जाता है।  →  सहायता वितरण से आर्थिक संकट में कमी आती है, किंतु संघर्ष की रोकथाम के लिए निवारक उपायों की आवश्यकता बनी रहती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वन्य पशु और पक्षियों का संरक्षण संविधान की सहवर्ती सूची (Concurrent List) में आता है।
2. संविधान का अनुच्छेद 48क राज्य को वनों और वन्यजीवों की रक्षा और उनमें सुधार के लिए प्रयास करने का निर्देश देता है।
3. वन्यजीव हमलों में मृत्यु के लिए राज्य द्वारा दी जाने वाली अनुग्रह राशि भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से ही दी जा सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: प्रविष्टि 17ख (वन्य पशु और पक्षियों का संरक्षण) सहवर्ती सूची में है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 48क राज्य नीति का निदेशक तत्व है। कथन 3 गलत है: राज्य अपनी संचित निधि और आपदा राहत कोषों से अनुग्रह राशि देते हैं; केंद्र से संचित निधि का प्रयोग सामान्यतः इसी रूप में नहीं होता। अतः सही उत्तर केवल दो है।

Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए दिए गए कथन A और कारण R पर विचार कीजिए:
कथन (A): राज्य सरकारों द्वारा आपदा या वन्यजीव हमले के पीड़ितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि पीड़ितों का कानूनी अधिकार नहीं है।
कारण (R): अनुग्रह राशि कार्यपालिका के विवेक पर आधारित होती है और इसके भुगतान की कोई वैधानिक बाध्यता नहीं होती।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — अनुग्रह राशि विधिक दायित्व नहीं, बल्कि प्रशासनिक विवेक से दी जाती है, इसलिए पीड़ित इसे अधिकार के रूप में मांग नहीं सकते। यही कारण A की सही व्याख्या करता है। कई राज्य नीतियों या सरकारी आदेशों के माध्यम से इसे नियमित रूप देते हैं, पर इससे यह विधिक अधिकार नहीं बन जाती।

Q3. निम्नलिखित सूचियों का मिलान कीजिए:
सूची I (अनुच्छेद)
A. अनुच्छेद 21
B. अनुच्छेद 48क
C. अनुच्छेद 51क(ज)

सूची II (प्रावधान)
1. प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और जीवों के प्रति दया भाव रखना नागरिकों का मूल कर्तव्य है
2. वनों और वन्यजीवों की रक्षा का राज्य द्वारा निदेशक सिद्धांत
3. जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार

सही मिलान चुनिए:

  1. A-3, B-2, C-1
  2. A-1, B-2, C-3
  3. A-2, B-1, C-3
  4. A-3, B-1, C-2

उत्तर: A-3, B-2, C-1 — अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार से संबंधित है, जिसकी व्याख्या में पर्यावरण और वन्यजीव-मानव संबंधों को भी शामिल किया गया है। अनुच्छेद 48क राज्य के लिए निदेशक तत्व है, जबकि अनुच्छेद 51क(ज) नागरिकों का मूल कर्तव्य है। अतः सही मिलान A-3, B-2, C-1 है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हाल में केरलम (Keralam) सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों के लिए मुआवजे और चिकित्सा सहायता में 25 प्रतिशत वृद्धि की है। मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन में मुआवजा नीति की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या केवल मुआवजे से इस संघर्ष का स्थायी समाधान संभव है, और इसके लिए किन निवारक उपायों की आवश्यकता है। (15 Marks)

रूपरेखा: 1. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) की न्यायिक व्याख्या में वन्यजीव-जनित मृत्यु और चोट से सुरक्षा का प्रश्न; अनुच्छेद 48क (राज्य का निदेशक तत्व) और अनुच्छेद 51क(ज) (मूल कर्तव्य); प्रविष्टि 17ख के कारण वन्य पशु संरक्षण सहवर्ती सूची में होने से केंद्र और राज्य की साझा भूमिका।
2. विधिक और प्रशासनिक ढांचा: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और इसका 2022 का संशोधन; आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत कुछ राज्यों द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष को राज्य-विशिष्ट आपदा के रूप में अपनाने का विकल्प; राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष की भूमिका; अनुग्रह राशि बनाम वैधानिक अधिकार का अंतर।
3. केरलम (Keralam) का उदाहरण: मृत्यु पर अधिकतम मुआवजा 14 लाख रुपये से बढ़ाकर 17.5 लाख रुपये; हाथी, जंगली सूअर और मधुमक्खी हमलों में 4 लाख से 5 लाख रुपये की सांत्वना राशि; 40 से 60 प्रतिशत और 60 प्रतिशत से अधिक विकलांगता पर वृद्धि; 1 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता; 2.25 लाख रुपये से अधिक के दीर्घकालीन इलाज के लिए सीधे कोष से भुगतान। इसे 100-दिवसीय कार्य-योजना के अंग के रूप में देखना।
4. मुआवजे की सीमाएं: समस्या का लक्षण-उपचार, मूल कारण का नहीं; आवास विखंडन, गलियारों (corridors) का अभाव, फसल क्षति, भूमि-उपयोग परिवर्तन; मुआवजे में विलंब और दावों का सत्यापन; मानव जीवन की क्षतिपूर्ति का कोई पूर्ण विकल्प नहीं; नैतिक जोखिम (moral hazard) की आशंका।
5. निवारक उपाय: प्रोजेक्ट एलीफैंट (1992) के अंतर्गत हाथी गलियारों और आवास प्रबंधन का संदर्भ; फसल बीमा और सौर बाड़ जैसे तकनीकी उपाय; प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और रैपिड रिस्पांस टीमें; समुदाय-आधारित सहअस्तित्व मॉडल और स्थानीय जागरूकता; भूमि-उपयोग योजना में वन्यजीव कॉरिडोर का समावेश।
6. संतुलित दृष्टिकोण: मुआवजा सामाजिक न्याय और राज्य की नैतिक जिम्मेदारी का साधन है, जबकि स्थायी समाधान के लिए पारिस्थितिक संतुलन, विकास-नीति और संरक्षण का समन्वय आवश्यक है। निष्कर्ष में दोनों के संयोजन की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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