02 Nov चक्रवात ‘अर्णब’ प्रभावित ओडिशा: मुख्यमंत्री द्वारा विशेष राहत पैकेज की घोषणा
✎ चक्रवात के बाद राहत का ढांचा तीन स्तरों पर चलता है: तत्काल राहत (SDRF से), कृषि व आवास क्षति की भरपाई, और दीर्घकालिक पुनर्वास; आपदा राहत संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका होती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management): चक्रवात, बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण की नीति | GS Paper II — शासन और संघवाद: आपदा राहत पर राज्य और केंद्र की भूमिका, संविधान की समवर्ती सूची और केंद्र-राज्य वित्त व्यवस्था | GS Paper III — कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था: फसल क्षति पर कृषि इनपुट अनुदान और किसानों की आय सुरक्षा
- Prelims: चक्रवात (Cyclone) और बंगाल की खाड़ी में उसकी उत्पत्ति, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (National Disaster Management Act, 2005), राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (State Disaster Response Fund – SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि (National Disaster Response Fund – NDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority – NDMA), भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD), पूर्वी घाट (Eastern Ghats) की भूवैज्ञानिक संवेदनशीलता और भूस्खलन, संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List), प्रविष्टि 45: राहत (Relief of disaster), ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Odisha State Disaster Management Authority – OSDMA)
- Essay: आपदा के बाद राहत से पुनर्निर्माण तक: भारत में आपदा प्रतिरोधी शासन की चुनौतियाँ, जलवायु परिवर्तन और तटीय राज्यों में बढ़ती चक्रवाती तीव्रता: नीति का दायित्व
त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात के बाद राहत का ढांचा तीन स्तरों पर चलता है: तत्काल राहत (SDRF से), कृषि व आवास क्षति की भरपाई, और दीर्घकालिक पुनर्वास; आपदा राहत संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका होती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 2 नवंबर 2026 को चक्रवात अर्नब और उसके बाद हुई भारी वर्षा से प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की। गंजम, गजपति और कंधमाल जिले सबसे अधिक प्रभावित बताए गए हैं। पैकेज में प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 किलोग्राम चावल और ₹2,500 नकद देना, फसल व संपत्ति की क्षति के लिए कृषि इनपुट अनुदान, आवास सहायता, दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए क्षतिपूर्ति तथा मछुआरों के लिए सहायता शामिल है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आंध्र प्रदेश तट की ओर एक और चक्रवाती तूफान बढ़ रहा है, इसलिए नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद राहत पैकेज की फिर से समीक्षा की जाएगी। यह घोषणा राहत वितरण, क्षति आकलन और पुनर्वास, तीनों चरणों में राज्य की आपदा प्रतिक्रिया का व्यावहारिक उदाहरण है।
पृष्ठभूमि
- ओडिशा की लंबी तटरेखा और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले निम्न दाब क्षेत्र इसे चक्रवातों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाते हैं। 1999 का सुपर साइक्लोन इस संवेदनशीलता का सबसे गंभीर उदाहरण है।
- चक्रवात के बाद अक्सर भारी वर्षा से बाढ़ और पहाड़ी जिलों में भूस्खलन होता है। इस बार कंधमाल और गजपति जैसे पहाड़ी और वनीय जिलों में भूस्खलन से जनहानि की खबरें भी आई हैं।
- भारत में आपदा प्रबंधन का वैधानिक आधार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 है, जिसने NDMA, राज्य तथा जिला स्तर पर प्राधिकरणों की संरचना दी। राज्य स्तर पर राहत कार्य मुख्य रूप से राज्य सरकार और उसके आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के माध्यम से होता है।
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (SDRF) से राहत और पुनर्वास के लिए राज्य को धनराशि मिलती है, जबकि गंभीर आपदाओं में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि (NDRF) से अतिरिक्त सहायता दी जा सकती है। राहत के मानदंड और सहायता की दरें केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित होती हैं।
- आपदा राहत को संविधान की समवर्ती सूची में रखा गया है, इसलिए इसमें केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका होती है। राज्य अपने संसाधनों से अतिरिक्त पैकेज भी देते हैं, जिसे राज्य सरकार की अतिरिक्त पहल कहा जाता है।
आपदा राहत पैकेज क्या है?
- आपदा राहत पैकेज आपदा से प्रभावित लोगों को तत्काल भोजन, नकद सहायता और पुनर्वास के लिए दी जाने वाली बहुस्तरीय सहायता है। इसमें आपातकालीन राहत, क्षति की भरपाई और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण, तीनों चरण होते हैं।
- आपदा के तुरंत बाद दी जाने वाली राहत (जैसे चावल, नकद और खाद्य पैकेट) का उद्देश्य जीवन-यापन की न्यूनतम सुरक्षा देना है, जबकि कृषि और आवास सहायता पुनर्वास के लिए होती है।
- कृषि इनपुट अनुदान उस नुकसान की भरपाई के लिए होता है जो बीज, खाद और खेती की तैयारी पर पड़ता है। इस घोषणा में वर्षा-सिंचित और सिंचित भूमि के लिए अलग दरें तय की गई हैं: ₹8,500 और ₹17,000 प्रति हेक्टेयर।
- बहुवर्षीय फसलों जैसे आम और काजू के लिए ₹22,500 प्रति हेक्टेयर की दर तय की गई है, क्योंकि इनमें पौधे को पुनः तैयार होने में कई वर्ष लगते हैं। 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल क्षति वाले छोटे और सीमांत किसान पात्र माने गए हैं।
- खेतों से रेत और गाद हटाने के लिए प्रति किसान ₹18,000 और निःशुल्क 1.75 लाख मिनी किट देने की घोषणा भी की गई है, जो बुवाई के लिए तैयार होने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
- आवास सहायता में पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के मकानों के लिए मैदानी क्षेत्र में ₹1.20 लाख और पहाड़ी क्षेत्र में ₹1.30 लाख दिए जाने हैं। आंशिक क्षति पर पक्के मकान के लिए ₹6,500 और कच्चे मकान के लिए ₹4,000 की सहायता है।
- दुकानदारों और व्यापारियों के लिए छोटी दुकानों व रेहड़ी-पटरी वालों को ₹10,000 और बड़ी दुकानों व वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को ₹25,000 की क्षतिपूर्ति घोषित की गई है। मछुआरों के लिए भी अलग सहायता की घोषणा हुई है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| राहत पैकेज (Relief Package) | प्रभावित परिवारों को प्रति परिवार 50 किलोग्राम चावल और ₹2,500 नकद; तत्काल भोजन और आर्थिक सहारे के लिए |
| फसल क्षति पर कृषि इनपुट सहायता | 33% या अधिक फसल क्षति वाले छोटे और सीमांत किसानों को वर्षा-सिंचित क्षेत्र में ₹8,500 और सुनिश्चित सिंचाई वाले क्षेत्र में ₹17,000 प्रति हेक्टेयर |
| बहुवर्षीय बागवानी फसलें | आम और काजू जैसी फसलों के लिए ₹22,500 प्रति हेक्टेयर; न्यूनतम सहायता ₹2,500 (बहुवर्षीय) और ₹1,000 (असिंचित) |
| खेत से बालू और गाद हटाने की सहायता | प्रत्येक प्रभावित किसान को ₹18,000; साथ में 1.75 लाख मिनी किट निःशुल्क, जिससे बुवाई की पुनः बहाली हो सके |
| आवास और व्यावसायिक क्षति की भरपाई | पूर्ण क्षति पर मैदानी क्षेत्र में ₹1.20 लाख और पहाड़ी क्षेत्र में ₹1.30 लाख; छोटी दुकानों को ₹10,000 और बड़े प्रतिष्ठानों को ₹25,000 |
महत्व
आपदा प्रबंधन और मानवीय पक्ष
- राहत वितरण और बहाली को प्राथमिकता देकर आपदा प्रबंधन के ‘तत्काल प्रतिक्रिया’ चरण को मज़बूत किया गया है
- हेलीकॉप्टर से खाद्य पैकेट गिराना दूरस्थ और कटे हुए क्षेत्रों में राहत पहुँचाने का व्यावहारिक तरीका है
- भूस्खलन और बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण परिवारों के लिए भोजन और नकद सहायता तत्काल जीवन-रक्षा का कार्य करती है
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
- फसल क्षति के आधार पर सहायता की दरें सिंचित और असिंचित क्षेत्रों में अलग रखी गई हैं, जो भूमि-आधारित लक्षित सहायता का उदाहरण है
- बहुवर्षीय फसलों (आम, काजू) के लिए अलग दरें तय करना उद्यानिकी किसानों की दीर्घकालिक आय से जुड़ी चिंता को दर्शाता है
- बालू और गाद हटाने की सहायता से खेती योग्य भूमि की उत्पादकता बहाल होती है
आवास, आजीविका और छोटे व्यवसाय
- पूर्ण और आंशिक क्षति के बीच तथा पक्के और कच्चे मकानों के बीच अंतर करना सहायता को क्षति की गंभीरता से जोड़ता है
- पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के लिए अलग आवास सहायता राशि भौगोलिक लागत के अंतर की स्वीकृति है
- ठेला-फेरी वालों और छोटे दुकानदारों को सहायता देना अनौपचारिक क्षेत्र की आजीविका की सुरक्षा का प्रयास है
राजकोषीय और संघीय व्यवस्था
- राज्य सरकार द्वारा अपने स्तर पर राहत पैकेज की घोषणा राज्य की आपदा-प्रतिक्रिया क्षमता और प्रारंभिक वित्तीय दायित्व को दर्शाती है
- आकलन के बाद पैकेज की समीक्षा की बात सहायता को वास्तविक क्षति के अनुपात में रखने की व्यवस्था है, जो राजकोषीय अनुशासन से जुड़ा है
चुनौतियाँ
1. क्षति आकलन और तत्काल राहत के बीच समन्वय
- क्षति का आकलन चल रहा है, जबकि राहत वितरण पहले शुरू करना पड़ता है; इससे प्रारंभिक और अंतिम सहायता में अंतर आ सकता है
- आगामी चक्रवाती तूफ़ान के कारण पैकेज की समीक्षा फिर से करनी होगी, जिससे प्रशासनिक निरंतरता पर दबाव बढ़ता है
यूपीएससी लिंक: GS3: आपदा प्रबंधन; सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
2. लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन
- पूर्ण/आंशिक क्षति और पक्के/कच्चे मकान जैसे वर्गीकरण के लिए भौतिक सत्यापन आवश्यक है, जिसमें समय लगता है
- सहायता का वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचना और अपात्रों को बाहर रखना, दोनों ही चुनौतियाँ हैं
यूपीएससी लिंक: GS2: सार्वजनिक नीति; लक्षित हस्तांतरण और शासन में पारदर्शिता
3. बार-बार आने वाले चक्रवात और जलवायु जोखिम
- एक के बाद एक चक्रवाती तूफ़ानों से तटीय और वर्षा-आधारित क्षेत्रों पर बार-बार दबाव बनता है
- लगातार होने वाली क्षति से आपदा-पश्चात आर्थिक पुनर्प्राप्ति धीमी पड़ सकती है
यूपीएससी लिंक: GS1: भारत का भूगोल (तटीय चक्रवात); GS3: जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम
4. पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँच
- भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध होने पर राहत सामग्री को हवाई मार्ग से पहुँचाना पड़ता है, जो महँगा और सीमित विकल्प है
- पहाड़ी क्षेत्रों में पुनर्वास और आवास निर्माण की लागत मैदानी क्षेत्रों से अधिक होती है
यूपीएससी लिंक: GS1: भारत की भू-आकृति और पर्वतीय क्षेत्र; GS3: आपदा प्रबंधन
5. राज्य वित्त और संसाधनों पर दबाव
- एक साथ नकद सहायता, इनपुट सहायता, आवास और व्यवसाय-क्षति भरपाई का बोझ राज्य के बजट पर पड़ता है
- सहायता के लिए केंद्र से समय पर धनराशि मिलना प्रशासनिक और वित्तीय समन्वय पर निर्भर करता है
यूपीएससी लिंक: GS3: अर्थव्यवस्था; GS2: केंद्र-राज्य संबंध और राजकोषीय संघवाद
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| क्षति आकलन में देरी | प्रारंभिक राहत और अंतिम सहायता के बीच अंतर; पैकेज की बार-बार समीक्षा से अनिश्चितता |
| लाभार्थी सत्यापन | पक्के/कच्चे मकान और पूर्ण/आंशिक क्षति के वर्गीकरण में त्रुटि या अपवर्जन का जोखिम |
| बार-बार आने वाली आपदाएँ | एक के बाद एक चक्रवात से पुनर्निर्माण की चक्रीय लागत और जलवायु अनुकूलन की आवश्यकता |
| दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्र | भूस्खलन के कारण सड़क संपर्क टूटना; हवाई राहत की उच्च लागत और सीमित क्षमता |
| राज्य का वित्तीय भार | नकद, इनपुट, आवास और व्यवसाय सहायता का संयुक्त दायित्व; केंद्रीय सहायता की समयबद्धता पर निर्भरता |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (State Disaster Response Fund – SDRF)
आगे की राह
- क्षति आकलन को समयबद्ध बनाना और प्रारंभिक राहत के बाद अंतिम सहायता की स्पष्ट प्रक्रिया तय करना
- पक्के/कच्चे मकानों और फसल क्षति के सत्यापन के लिए डिजिटल और भू-स्थानिक (geo-tagged) रिकॉर्ड का उपयोग करना
- सहायता राशि का सीधे खाते में हस्तांतरण सुनिश्चित कर बिचौलियों की भूमिका कम करना
- पहाड़ी और भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों में सड़क संपर्क की वैकल्पिक व्यवस्था और पूर्व-चेतावनी तंत्र को सुदृढ़ करना
- तटीय क्षेत्रों में चक्रवात-रोधी आवास और जल निकासी व्यवस्था में निवेश करना
- छोटे दुकानदारों, ठेला-फेरी वालों और मछुआरों के लिए आपदा बीमा और आजीविका-पुनर्बहाली कार्यक्रम पर विचार करना
- केंद्र और राज्य के बीच राहत निधि के उपयोग और समयबद्ध वितरण के लिए स्पष्ट समन्वय तंत्र बनाना
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) · राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund – SDRF) · आपदा-पूर्व शमन (Disaster Mitigation) · आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) · सेंदाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction, 2015-2030) · कृषि इनपुट सहायता (Agricultural Input Subsidy) · फसल क्षति की 33% सीमा · केंद्र-राज्य वित्तीय साझेदारी और सहकारी संघवाद · चक्रवात-आश्रय एवं प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) · जलवायु-अनुकूल अवसंरचना (Climate-resilient Infrastructure)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 282: राज्य द्वारा विवेकाधीन अनुदान के माध्यम से राहत-व्यय
- अनुच्छेद 21: जीवन और आजीविका के अधिकार के तहत राहत का आधार
अवधारणा प्रवाह
चक्रवात अर्णब (Cyclone Arnab) से भारी वर्षा और बाढ़ का आगमन → भूस्खलन, फसलों, घरों और दुकानों को क्षति; कुछ क्षेत्रों में संपर्क टूटना → तत्काल राहत वितरण और हवाई मार्ग से खाद्य सामग्री पहुँचाना → क्षति का आकलन और सत्यापन (पूर्ण/आंशिक क्षति, पक्के/कच्चे मकान, फसल क्षति का प्रतिशत) → श्रेणीवार राहत पैकेज की घोषणा: नकद, अनाज, कृषि इनपुट, आवास और व्यवसाय सहायता → आगामी तूफ़ान के बाद क्षति के नए आकलन पर पैकेज की समीक्षा → पुनर्वास, फसल पुनर्बहाली और सामान्य स्थिति की वापसी
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उष्णकटिबंधीय चक्रवात के बनने के लिए समुद्र की सतह का तापमान लगभग 26 डिग्री सेल्सियस से अधिक होना सामान्यतः आवश्यक माना जाता है।
2. ऊपरी वायुमंडल में ऊर्ध्वाधर पवन कतरन (Vertical Wind Shear) का कम होना चक्रवात के विकास में सहायक होता है।
3. चक्रवात भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सबसे अधिक बनते हैं, क्योंकि वहाँ कोरिऑलिस प्रभाव सबसे प्रबल होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। चक्रवात के लिए गर्म समुद्री सतह और कम ऊर्ध्वाधर पवन कतरन अनुकूल होते हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि कोरिऑलिस प्रभाव भूमध्य रेखा पर लगभग शून्य होता है और इसी कारण वहाँ चक्रवात सामान्यतः नहीं बनते।
Q2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
2. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है।
3. राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष की स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 के अंतर्गत की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं, क्योंकि अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय प्राधिकरण का अध्यक्ष प्रधानमंत्री और राज्य प्राधिकरण का अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष धारा 48 के अंतर्गत है; धारा 44 राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल से संबंधित है।
Q3. कथन (A): ओडिशा का तटीय क्षेत्र बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवातों से विशेष रूप से प्रभावित होता है।
कारण (R): बंगाल की खाड़ी में मानसून-पश्चात अवधि (अक्टूबर-दिसंबर) में चक्रवात अपेक्षाकृत अधिक बनते हैं।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, परंतु R गलत है।
- A गलत है, परंतु R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — बंगाल की खाड़ी में चक्रवात मानसून-पूर्व (अप्रैल-मई) और मानसून-पश्चात (अक्टूबर-दिसंबर) दोनों समय में बनते हैं, और मानसून-पश्चात अवधि में ये अधिक तीव्र होते हैं। यही समय ओडिशा के तट पर चक्रवात के प्रभाव की दृष्टि से सर्वाधिक जोखिम वाला है, इसलिए R, A की सही व्याख्या है।
Q4. निम्नलिखित सुमेलित कीजिए:
सूची-I (संस्था/कोष)
1. राष्ट्रीय आपदा शमन कोष
2. राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष
3. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल
4. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
सूची-II (कार्य)
a. विशेष प्रशिक्षित बल द्वारा त्वरित बचाव और राहत
b. राज्य स्तर पर तत्काल राहत के लिए निधि
c. दीर्घकालिक शमन परियोजनाओं के लिए निधि
d. आपदा प्रबंधन की नीतियों और दिशा-निर्देशों के लिए शीर्ष निकाय
- 1-c, 2-b, 3-a, 4-d
- 1-b, 2-c, 3-a, 4-d
- 1-c, 2-a, 3-b, 4-d
- 1-c, 2-b, 3-d, 4-a
उत्तर: 1-c, 2-b, 3-a, 4-d — राष्ट्रीय आपदा शमन कोष दीर्घकालिक शमन परियोजनाओं के लिए है (1-c)। राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष तत्काल राहत के लिए राज्य को निधि देता है (2-b)। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल विशेष प्रशिक्षित बल है (3-a), और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण शीर्ष नीति निकाय है (4-d)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में आपदा प्रबंधन का ढाँचा अब भी मुख्यतः आपदा-पश्चात राहत पर केंद्रित दिखाई देता है, जबकि आपदा-पूर्व शमन पर अपेक्षित बल कम है। चक्रवात और बाढ़ से प्रभावित राज्यों द्वारा घोषित राहत-पैकेजों के संदर्भ में इस प्रवृत्ति की समीक्षा कीजिए। आपदा-पूर्व शमन और आपदा-पश्चात राहत के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष की भूमिका तथा केंद्र-राज्य वित्तीय साझेदारी के संदर्भ में क्या सुधार आवश्यक हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना:
(क) परिचय: हाल में ओडिशा में चक्रवात के बाद घोषित राहत उपाय (प्रति परिवार 50 किलोग्राम चावल और ₹2,500 नकद; फसल क्षति पर कृषि इनपुट सहायता, जैसे ₹8,500 प्रति हेक्टेयर वर्षा-आश्रित और ₹17,000 प्रति हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र हेतु; आवास सहायता, जैसे पूर्ण क्षतिग्रस्त पक्के घर हेतु ₹1.20 लाख मैदानी और ₹1.30 लाख पहाड़ी क्षेत्र में) को उदाहरण के रूप में लें।
(ख) संस्थागत ढाँचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (अध्यक्ष प्रधानमंत्री), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (अध्यक्ष मुख्यमंत्री) और जिला प्राधिकरण; राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, राष्ट्रीय आपदा शमन कोष (धारा 46) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (धारा 48)।
(ग) राहत-मानदंड: SDRF/NDRF के अंतर्गत केंद्र द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानदंड, 33% फसल क्षति की सीमा, और राज्यों द्वारा इन न्यूनतम मानदंडों से ऊपर सहायता देने का अधिकार। इस पर बहस कि क्या मानदंड वास्तविक क्षति के अनुरूप हैं।
(घ) शमन का पक्ष: सेंदाई फ्रेमवर्क (2015-2030) के प्राथमिकता-क्रम (जोखिम की समझ, शासन, निवेश, तैयारी) के अनुसार शमन की प्राथमिकता; ओडिशा का 1999 के सुपर साइक्लोन के बाद चक्रवात-आश्रय निर्माण, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और OSDMA का विकास एक सफल उदाहरण के रूप में।
(ङ) संघीय पक्ष: वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार SDRF में केंद्र-राज्य अंशदान, राज्यों की वित्तीय क्षमता, और सहकारी संघवाद के अंतर्गत त्वरित निधि-वितरण की व्यावहारिक चुनौतियाँ।
(च) संतुलित दृष्टिकोण और निष्कर्ष: राहत और शमन परस्पर पूरक हैं; आपदा-पूर्व निवेश को बजटीय प्राथमिकता, जोखिम-मानचित्रण, बीमा-आधारित उपायों और समुदाय-आधारित तैयारी से जोड़ना आवश्यक है। निष्कर्ष में मानदंड-पुनरीक्षण और शमन-निधि के अनुपात पर सुझाव।
स्रोत: The Hindu
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: ओडिशा के मुख्यमंत्री द्वारा चक्रवात ‘अर्णब’ से प्रभावित परिवारों के लिए घोषित विशेष पैकेज का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- A) केवल शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण करना।
- B) प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत और पुनर्वास सहायता प्रदान करना।
- C) राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना।
- D) केवल कृषि ऋण माफ करना।
उत्तर: B) प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत और पुनर्वास सहायता प्रदान करना। — मुख्यमंत्री द्वारा घोषित विशेष पैकेज का मुख्य उद्देश्य चक्रवात ‘अर्णब’ से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत और पुनर्वास सहायता प्रदान करना है।
Mains: ओडिशा के मुख्यमंत्री द्वारा चक्रवात ‘अर्णब’ से प्रभावित परिवारों के लिए घोषित विशेष पैकेज के प्रमुख घटकों और इसके संभावित सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण करें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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