06 Nov ओडिशा में आदर्श विद्यालय योजना का तीसरा चरण और ₹1,292 करोड़ की परियोजनाएँ
✎ जिला खनिज निधि (DMF) खनन-प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण हेतु बनी निधि है, जिसका उपयोग स्थानीय शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना में भी हो सकता है, जबकि शिक्षा का मौलिक अधिकार अनुच्छेद 21क में निहित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन (सरकारी योजनाएँ, स्थानीय निकायों और विकेंद्रीकरण की भूमिका; शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित नीतियाँ) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — अर्थव्यवस्था (आधारभूत संरचना, रोज़गार सृजन, खनिज-आधारित क्षेत्रीय विकास)
- Prelims: जिला खनिज निधि (District Mineral Foundation — DMF), खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा वर्ष 2015 का संशोधन, प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY), अनुच्छेद 21क — निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार (86वाँ संविधान संशोधन, 2002), शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) — पड़ोस के विद्यालय की अवधारणा, समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha), पीएम श्री स्कूल (PM SHRI), अनुच्छेद 45 — बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (राज्य नीति के निदेशक तत्व)
- Essay: खनिज संपन्न क्षेत्रों में समावेशी विकास: संसाधन-आधारित अर्थव्यवस्था से मानव संसाधन-आधारित विकास तक, विकेंद्रीकृत शासन और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सार्वजनिक सेवा-वितरण
त्वरित पुनरावृत्ति: जिला खनिज निधि (DMF) खनन-प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण हेतु बनी निधि है, जिसका उपयोग स्थानीय शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना में भी हो सकता है, जबकि शिक्षा का मौलिक अधिकार अनुच्छेद 21क में निहित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने केंदुझर ज़िले में गोदाबरीश मिश्र आदर्श प्राथमिक विद्यालय योजना के तीसरे चरण का शुभारंभ किया और लगभग 1,292 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास किया। इस चरण में राज्य भर में 630 आदर्श प्राथमिक विद्यालय लगभग 4,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनाए जाएँगे, जिनमें से 35 केंदुझर ज़िले के लिए निर्धारित हैं। तीनों चरणों में अब तक 952 विद्यालयों की नींव रखी जा चुकी है और राज्य सरकार ने वर्ष 2029 तक 2,200 ऐसे विद्यालय स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसी आयोजन में धरणीधर विश्वविद्यालय का दक्षिण परिसर, 15 मंज़िला टेक-बिज़नेस पार्क की आधारशिला, जिला खनिज निधि के सहयोग से निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग केंद्र, दंत चिकित्सा एवं नर्सिंग महाविद्यालय के शिलान्यास तथा कई अन्य सार्वजनिक सुविधाएँ समर्पित की गईं। ये घटनाएँ शिक्षा, कौशल-आधारित रोज़गार और स्वास्थ्य सेवा के एक साथ विस्तार को दर्शाती हैं, इसलिए परीक्षा की दृष्टि से यह किसी एक योजना से अधिक जिला-स्तरीय विकास-मॉडल का उदाहरण है।
पृष्ठभूमि
- शिक्षा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21क के अंतर्गत मौलिक अधिकार है, जिसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 द्वारा कार्यान्वित किया गया; इस अधिनियम में कक्षा I–V के लिए पड़ोस के विद्यालय की दूरी-आधारित व्यवस्था का प्रावधान है।
- समग्र शिक्षा अभियान विद्यालयी शिक्षा की केंद्र प्रायोजित छत्र-योजना है, जिसमें अवसंरचना, शिक्षक-प्रशिक्षण और गुणवत्ता के घटक एक साथ आते हैं; राज्य अपनी विशिष्ट योजनाएँ इसके समानांतर या पूरक रूप में चला सकते हैं।
- केंदुझर उत्तरी ओडिशा का खनिज-बहुल ज़िला है। खनन से प्राप्त राजस्व का एक भाग जिला खनिज निधि में जाता है, जिसका उपयोग खनन-प्रभावित क्षेत्रों और व्यक्तियों के हित में होता है।
- खनन-आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में युवाओं का रोज़गार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन एक लंबे समय से चली आ रही चुनौती रही है, जिसके समाधान हेतु स्थानीय स्तर पर कौशल और उद्योग-आधारित अवसर विकसित करने पर बल दिया जा रहा है।
- आदर्श विद्यालय जैसी पहलें राज्य-स्तरीय योजनाओं के रूप में विकसित होती हैं, जिनका उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में भौतिक अवसंरचना और सीखने के परिवेश में एकरूपता लाना होता है।
आदर्श प्राथमिक विद्यालय योजना क्या है?
- यह ओडिशा सरकार की राज्य-स्तरीय योजना है, जिसका नामकरण पंडित गोदाबरीश मिश्र के नाम पर किया गया है; बनपुर में पंडित गोदाबरीश मिश्र के जन्मस्थान पर भी विद्यालयों की नींव रखी गई।
- प्रत्येक आदर्श विद्यालय लगभग पाँच एकड़ भूमि पर विकसित किया जाता है और उसका स्थान ऐसा चुना जाता है जहाँ संचार सुविधाएँ पर्याप्त हों।
- योजना तीन चरणों में चल रही है: पहले चरण में 118 विद्यालयों, दूसरे चरण में 204 विद्यालयों और तीसरे चरण में 630 विद्यालयों की योजना है।
- लक्ष्य वर्ष 2029 तक 2,200 विद्यालय स्थापित करने का है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपये बताई गई है।
- तीसरे चरण की अनुमानित लागत (लगभग 4,000 करोड़ रुपये) से स्पष्ट है कि प्रति विद्यालय औसत निवेश बड़े पैमाने पर अवसंरचना पर केंद्रित है, न कि केवल भवन-निर्माण पर।
- जिला खनिज निधि (DMF) के सहयोग से निर्मित सुविधाएँ, जैसे केंदुझर का कैंसर स्क्रीनिंग केंद्र, यह दर्शाती हैं कि खनिज-राजस्व का उपयोग स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है, बशर्ते वह कल्याण-उद्देश्य के अनुरूप हो।
- इस कार्यक्रम में कुल 330 परियोजनाएँ शामिल थीं, जिनमें 198 परियोजनाएँ (लगभग 412 करोड़ रुपये) उद्घाटित की गईं और 132 परियोजनाओं (880 करोड़ रुपये से अधिक) की आधारशिला रखी गई।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| 630 आदर्श प्राथमिक विद्यालय, अनुमानित लागत 4,000 करोड़ रुपये (तीसरा चरण) | राज्य स्तर पर प्राथमिक शिक्षा की भौतिक अवसंरचना को एक साथ बड़े पैमाने पर उन्नत करने का प्रयास। प्रति विद्यालय औसत लागत लगभग 6.3 करोड़ रुपये है। |
| तीनों चरणों में 952 विद्यालयों की आधारशिला रखी गई; 2029 तक 2,200 विद्यालयों का लक्ष्य (अनुमानित लागत 12,000 करोड़ रुपये) | योजना का दीर्घकालिक पैमाना स्पष्ट होता है। लक्ष्य पूरा करने के लिए लगभग 1,248 और विद्यालयों की आधारशिला रखनी होगी। |
| प्रत्येक विद्यालय के लिए पाँच एकड़ भूमि, संचार सुविधा वाले स्थानों पर | विद्यालय परिसर में खेल मैदान, कक्षाएँ और भविष्य के विस्तार की गुंजाइश मिलती है। स्थल चयन में पहुँच को प्राथमिकता दी गई है। |
| जिला खनिज निधि (District Mineral Foundation) से वित्त-पोषित निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग केंद्र (लगभग 6 करोड़ रुपये) | खनन-प्रभावित क्षेत्र के संसाधनों का उपयोग स्वास्थ्य सेवा में होता है। यह खनिज-आधारित क्षेत्रीय विकास की एक व्यावहारिक मिसाल है। |
| 15 मंज़िला तकनीकी-व्यावसायिक पार्क (Tech-Business Park), 5.51 एकड़, लागत 237 करोड़ रुपये | उत्तरी ओडिशा में रोज़गार-सृजन और स्थानीय स्तर पर कौशल-आधारित नौकरियों की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य है। |
| दंत चिकित्सा महाविद्यालय, नर्सिंग महाविद्यालय और सरकारी फार्मेसी महाविद्यालय की घोषणा | उच्च और व्यावसायिक चिकित्सा शिक्षा का विकेंद्रीकरण होता है। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य मानव संसाधन तैयार होता है। |
महत्व
शैक्षिक महत्व
- प्राथमिक स्तर पर विद्यालय की भौतिक गुणवत्ता में सुधार से नामांकन और उपस्थिति बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
- भवन, कक्ष और खेल-सुविधा का मानकीकरण शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 में निर्धारित मानदंडों की दिशा में कदम है।
- आदर्श विद्यालय मॉडल से राज्य के अन्य विद्यालयों के लिए मानक-निर्माण और तुलनात्मक गुणवत्ता की संभावना बनती है।
आर्थिक और रोज़गार महत्व
- तकनीकी-व्यावसायिक पार्क से स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार और उद्यमिता के अवसर बनते हैं।
- निर्माण कार्य और सेवा-क्षेत्र में स्थानीय आर्थिक गतिविधि बढ़ती है, जिससे आय के स्रोत विविध होते हैं।
- सरकार के अनुसार इससे युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन घट सकता है, जो क्षेत्रीय संतुलित विकास का एक पहलू है।
स्वास्थ्य महत्व
- निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग से प्रारंभिक पहचान संभव होती है, जो रोग के उपचार-परिणामों के लिए निर्णायक है।
- चिकित्सा, दंत और नर्सिंग महाविद्यालयों से जिला स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता बढ़ सकती है।
- आधुनिक प्रसूति व शिशु स्वास्थ्य विभाग और मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर से प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होता है।
प्रशासनिक और संघीय महत्व
- खनिज-प्रभावित क्षेत्र में जिला खनिज निधि का उपयोग स्थानीय विकास में होना, खनन से प्रभावित समुदायों के हित में एक प्रशासनिक मॉडल है।
- शिक्षा राज्य सूची का विषय होने से राज्य सरकार की पहल इस क्षेत्र में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
चुनौतियाँ
1. शिक्षक-उपलब्धता और शैक्षिक गुणवत्ता
- भवन निर्माण के साथ योग्य शिक्षकों की नियुक्ति और उनका बने रहना आवश्यक है; केवल भौतिक ढाँचा पर्याप्त नहीं है।
- सीखने के परिणामों में सुधार के लिए पाठ्यक्रम, शिक्षक-प्रशिक्षण और मूल्यांकन तंत्र को भी साथ-साथ सशक्त करना होगा।
- दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षकों को टिकाए रखना अक्सर कठिन होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शिक्षा से संबंधित सरकारी योजनाएँ और उनका कार्यान्वयन; सामाजिक क्षेत्र में सेवा-वितरण
2. वित्तीय दायित्व और निधि प्रवाह
- 2,200 विद्यालयों और 12,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के लिए दीर्घकालिक वित्तीय योजना और बजटीय प्रतिबद्धता आवश्यक है।
- परियोजनाओं के चरणबद्ध होने से लागत-वृद्धि और देरी का जोखिम बना रहता है।
- राजकोषीय संतुलन बनाए रखते हुए प्राथमिकताओं का निर्धारण करना कठिन चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: सार्वजनिक वित्त, राजकोषीय प्रबंधन और सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता
3. खनिज निधि के उपयोग में पारदर्शिता और समुदाय की भागीदारी
- जिला खनिज निधि का उपयोग खनन-प्रभावित लोगों के हित में हो, इसके लिए स्पष्ट लेखा-परीक्षा और सार्वजनिक प्रकटीकरण आवश्यक है।
- परियोजनाओं के चयन में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सीमित होने पर प्राथमिकताएँ वास्तविक आवश्यकता से मेल नहीं खातीं।
- खनन से प्रभावित क्षेत्र में पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव का संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही; GS-3: खनिज संसाधन और पर्यावरण
4. भूमि अधिग्रहण और स्थल चयन
- प्रत्येक विद्यालय के लिए पाँच एकड़ भूमि उपलब्ध कराना, विशेषकर शहरी या संचार-सुविधा वाले क्षेत्रों में, कठिन हो सकता है।
- भूमि-विवाद, वन या वन-भूमि से जुड़े मामलों और स्थानीय विरोध से परियोजनाओं में देरी होती है।
- भूमि के उपयोग-परिवर्तन और पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रियाओं का समन्वय आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: केंद्र-राज्य संबंध और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ; GS-3: भूमि-सुधार और अधिग्रहण के मुद्दे
5. स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा में मानव संसाधन
- नए महाविद्यालयों और संस्थानों के लिए संकाय, प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मी और तकनीशियन की व्यवस्था आवश्यक है।
- भारत में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी प्रायः क्षेत्रीय असमानता के रूप में दिखती है।
- उन्नत स्क्रीनिंग तकनीक का रखरखाव और निरंतर संचालन दीर्घकालिक लागत से जुड़ा है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित योजनाएँ और सेवाएँ; मानव संसाधन की उपलब्धता
6. रोज़गार की गुणवत्ता और कौशल-मेल
- तकनीकी-व्यावसायिक पार्क में रोज़गार का वास्तविक लाभ स्थानीय युवाओं तक पहुँचना सुनिश्चित करना होगा।
- स्थानीय कौशल और उद्योग की आवश्यकता के बीच मेल न होने पर सुविधा का उपयोग सीमित रह सकता है।
- बड़े शहरों की ओर पलायन की मूल वजहें केवल भवन-निर्माण से दूर नहीं होतीं; वेतन, गुणवत्ता और करियर-मार्ग भी निर्णायक हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: रोज़गार और कौशल विकास; GS-3: समावेशी आर्थिक विकास और क्षेत्रीय असमानता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| शिक्षक नियुक्ति और टिकाव | भवन तैयार होने के बावजूद सीखने के परिणाम तभी सुधरेंगे जब योग्य शिक्षक उपलब्ध और स्थिर हों। |
| चरणबद्ध निर्माण में देरी | 952 विद्यालयों की नींव रखी गई है, पर पूरी होने की समय-सीमा और वास्तविक निर्माण गति का मूल्यांकन आवश्यक है। |
| राजकोषीय दायित्व | 2029 तक 12,000 करोड़ रुपये का व्यय राज्य के बजट और अन्य प्राथमिकताओं पर दबाव डाल सकता है। |
| जिला खनिज निधि का पारदर्शी उपयोग | खनन-प्रभावित क्षेत्र की निधि से परियोजनाओं के चयन और लेखा-परीक्षा के स्पष्ट मानदंड होने चाहिए। |
| भूमि और पर्यावरणीय स्वीकृति | पाँच एकड़ भूमि की उपलब्धता और स्थल-चयन में विवाद या स्वीकृति-विलंब परियोजना को धीमा कर सकते हैं। |
| कौशल-आधारित रोज़गार का मेल | तकनीकी-व्यावसायिक पार्क का लाभ तभी मिलेगा जब स्थानीय युवाओं का कौशल उद्योग की माँग से जुड़े। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- गोदाबरीश मिश्र आदर्श प्राथमिक विद्यालय योजना (Godabarish Mishra Adarsha Primary School Scheme)
आगे की राह
- विद्यालय-निर्माण के साथ शिक्षकों की समय पर नियुक्ति और प्रशिक्षण की स्पष्ट योजना बनाई जाए।
- 2029 तक के लक्ष्य के लिए बहुवर्षीय वित्तीय रोडमैप और प्रत्येक चरण की भौतिक-वित्तीय प्रगति का सार्वजनिक प्रकटीकरण किया जाए।
- जिला खनिज निधि के उपयोग में परियोजना-चयन, लेखा-परीक्षा और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के मानक तय किए जाएँ।
- भूमि-चयन के समय न्यूनतम विवाद वाले स्थलों को प्राथमिकता दी जाए और स्वीकृति-प्रक्रिया को समयबद्ध किया जाए।
- आदर्श विद्यालयों के सीखने के परिणामों का स्वतंत्र मूल्यांकन कर अन्य विद्यालयों के लिए मानक-पद्धति विकसित की जाए।
- स्वास्थ्य और चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए संकाय और सहायक कर्मियों की भर्ती का समानांतर कार्यक्रम बनाया जाए।
- तकनीकी-व्यावसायिक पार्क में स्थानीय उद्योगों और कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के साथ साझेदारी से रोज़गार का वास्तविक मेल सुनिश्चित किया जाए।
- निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग के परिणामों और रेफ़रल-तंत्र को स्वास्थ्य प्रणाली के साथ जोड़कर उपचार की निरंतरता बनाई जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मॉडल प्राथमिक विद्यालय · अनुच्छेद 21A (Article 21A) · अनुच्छेद 350A (Article 350A) · शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009) · जिला खनिज प्रतिष्ठान (District Mineral Foundation – DMF) · प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) · खनिज-बहुल जिले और सामाजिक बुनियादी ढांचा · वित्तीय संघवाद (Fiscal Federalism) · राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 (National Education Policy, 2020) · समावेशी आर्थिक विकास और शिक्षा तक समान पहुँच
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21A: छह से चौदह वर्ष के बच्चों की नि:शुल्क शिक्षा का अधिकार
- अनुच्छेद 47: पोषाहार, जन-स्वास्थ्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार का राज्य का कर्तव्य
- सातवीं अनुसूची: शिक्षा राज्य सूची (प्रविष्टि 11) का विषय है
अवधारणा प्रवाह
राज्य सरकार ने आदर्श प्राथमिक विद्यालय योजना के तीसरे चरण का शुभारंभ किया, जिसमें 630 विद्यालय बनेंगे। → तीनों चरणों में 952 विद्यालयों की नींव रखी जा चुकी है और 2029 तक 2,200 विद्यालयों का लक्ष्य है। → प्रत्येक विद्यालय के लिए पाँच एकड़ भूमि और संचार-सुविधा वाले स्थल का चयन किया जाता है। → भौतिक अवसंरचना, शिक्षक-व्यवस्था और सीखने की गुणवत्ता मिलकर शिक्षा के परिणामों को प्रभावित करती हैं। → जिला खनिज निधि जैसे संसाधनों से स्वास्थ्य और तकनीकी-व्यावसायिक अवसंरचना को भी विस्तार मिलता है। → स्थानीय रोज़गार और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से क्षेत्रीय असमानता घटाने और युवाओं के पलायन को कम करने की संभावना बनती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 21A 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में प्रदान करता है।
2. संविधान का अनुच्छेद 350A प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की पर्याप्त सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए राज्यों को निर्देश देता है।
3. राज्य के नीति निदेशक तत्वों में 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का उपबंध अब भी मूल रूप में विद्यमान है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: 86वें संशोधन (2002) द्वारा अनुच्छेद 21A जोड़ा गया, जो 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाता है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 350A (7वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया) प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधा के लिए राज्यों और स्थानीय प्राधिकारियों को निर्देश देता है। कथन 3 गलत है: 86वें संशोधन के बाद यह उपबंध अनुच्छेद 45 से हटकर अनुच्छेद 21A में चला गया, और अनुच्छेद 45 अब 6 वर्ष तक के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा से संबंधित है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): खनन-प्रभावित जिलों में जिला खनिज प्रतिष्ठान के कोष से स्वास्थ्य, पेयजल और शिक्षा जैसी सामाजिक अवसंरचना के कार्य कराए जा सकते हैं।
कारण (R): जिला खनिज प्रतिष्ठान खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में 2015 के संशोधन द्वारा एक गैर-लाभकारी निकाय के रूप में स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य खनन से प्रभावित व्यक्तियों और क्षेत्रों का हित करना है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 9B के अंतर्गत 2015 के संशोधन से अस्तित्व में आया और यह गैर-लाभकारी निकाय है। इसके कोष का उपयोग खनन-प्रभावित लोगों के हित में स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा और अन्य सामाजिक कल्याण कार्यों में होता है, जिसके लिए प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के दिशानिर्देश लागू होते हैं। अतः दोनों कथन सही हैं और कारण अभिकथन की व्याख्या करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ खनिज-बहुल जिलों में प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सार्वजनिक सेवाओं का विस्तार प्रायः खनन से प्राप्त राजस्व पर निर्भर रहता है। ओडिशा की मॉडल प्राथमिक विद्यालय योजना के संदर्भ में इस व्यवस्था का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या इस मॉडल से शिक्षा का अधिकार और क्षेत्रीय समता, दोनों की प्राप्ति सुनिश्चित हो सकती है? अपने तर्कों के साथ उत्तर दीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON: (1) भूमिका: ओडिशा सरकार की ‘गोदाबरीश मिश्र आदर्श प्राथमिक विद्यालय’ योजना के तीसरे चरण का आरंभ (केंद्रपाड़ा नहीं, केंदुझर जिला), 630 विद्यालय, अनुमानित लागत 4,000 करोड़ रुपये (प्रति विद्यालय लगभग 6.3 करोड़ रुपये का अनुमान); तीनों चरणों में 952 विद्यालयों की आधारशिला; 2029 तक 2,200 विद्यालयों का लक्ष्य, 12,000 करोड़ रुपये का अनुमानित व्यय; प्रत्येक विद्यालय के लिए 5 एकड़ भूमि। (2) संवैधानिक और विधिक आधार: अनुच्छेद 21A (86वाँ संशोधन, 2002) और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 6 (पड़ोस में विद्यालय की स्थापना का दायित्व) तथा धारा 8 और 9 (राज्य और स्थानीय प्राधिकारी की जिम्मेदारी); अनुच्छेद 350A (मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा); अनुच्छेद 46 (दुर्बल वर्गों के शैक्षिक हित); अनुच्छेद 275 और 282 के अंतर्गत केंद्र-राज्य वित्तीय अंतरण। (3) नीतिगत संदर्भ: कोठारी आयोग (1964-66) का समान विद्यालय व्यवस्था का विचार; राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में विद्यालय परिसर (School Complex) और मूलभूत चरण की अवधारणा; समग्र शिक्षा के साथ तालमेल। (4) वित्तीय पहलू: जिला खनिज प्रतिष्ठान (MMDR अधिनियम की धारा 9B) और PMKKKY से धन; सर्वोच्च न्यायालय का 2024 का निर्णय (Mineral Area Development Authority बनाम SAIL) जिसमें राज्यों की खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति की पुष्टि हुई; खनिज राजस्व की अस्थिरता से दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर जोखिम; अनुच्छेद 275 के अनुदान तथा राज्य के अपने संसाधनों की भूमिका। (5) समालोचना के बिंदु: पक्ष में—अवसंरचना का विस्तार, नामांकन और ड्रॉपआउट में सुधार की संभावना, ग्रामीण-शहरी और आदिवासी क्षेत्रों के बीच अंतर घटाना। विपक्ष में—शिक्षकों की नियुक्ति और गुणवत्ता, संचालन व्यय (रखरखाव) की व्यवस्था, UDISE+ और ASER जैसे आँकड़ों से परिणाम का सत्यापन, विद्यालय भवन पर अधिक और शिक्षण पर कम ध्यान का जोखिम, पारिस्थितिक तथा विस्थापन से जुड़े खनन-प्रभाव। (6) संतुलित निष्कर्ष: अधिकार की प्राप्ति के लिए भौतिक अवसंरचना के साथ शिक्षक-गुणवत्ता, स्थायी बजट (समेकित निधि आधारित) और खनिज राजस्व पर निर्भरता घटाने की आवश्यकता; सुझाव—राज्य बजट में स्थायी प्रावधान, DMF के उपयोग की सार्वजनिक निगरानी और ग्राम सभा की भागीदारी।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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