03 Oct ओडिशा में वन्यजीव अनुसंधान अनुदान कार्यक्रम शुरू, सिमिलिपाल में 300 कैमरे और बढ़ेंगे
✎ ओडिशा का CM-GROW कार्यक्रम वन्यजीव अनुसंधान को बढ़ावा देने और सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में AI-सक्षम कैमरों के माध्यम से संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने पर केंद्रित है, जो वन्यजीव सप्ताह समारोह के दौरान शुरू किया गया।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता
- Prelims: CM-GROW कार्यक्रम, सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व, वन्यजीव सप्ताह, मानव-वन्यजीव संघर्ष, पारिस्थितिकी पर्यटन, पूर्वी घाट
- Essay: सतत विकास में वन्यजीव संरक्षण की भूमिका, प्रौद्योगिकी और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण
त्वरित पुनरावृत्ति: ओडिशा का CM-GROW कार्यक्रम वन्यजीव अनुसंधान को बढ़ावा देने और सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में AI-सक्षम कैमरों के माध्यम से संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने पर केंद्रित है, जो वन्यजीव सप्ताह समारोह के दौरान शुरू किया गया।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ओडिशा सरकार ने राज्य में वन्यजीव संरक्षण के वैज्ञानिक आधार को मजबूत करने और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए CM-GROW (Chief Minister’s Grant for Research on Odisha’s Wildlife) कार्यक्रम शुरू किया है। यह पहल राज्य-स्तरीय वन्यजीव सप्ताह समारोह के दौरान की गई, जिसमें सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में 300 अतिरिक्त AI-सक्षम और नियमित निगरानी कैमरे लगाने की योजना की भी घोषणा की गई।
पृष्ठभूमि
- वन्यजीव सप्ताह (Wildlife Week) हर साल 2 से 8 अक्टूबर तक पूरे देश में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, अनुसंधान, पारिस्थितिक जागरूकता और जिम्मेदार पारिस्थितिकी पर्यटन (Ecotourism) को मजबूत करना है।
- ओडिशा ने पिछले दो वर्षों में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक, मजबूत प्रशासनिक उपायों और वन कर्मियों तथा स्थानीय समुदायों के समर्पित योगदान से प्रेरित हैं।
- सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व (Similipal Tiger Reserve) ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित है और अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है, जिसमें बाघों की आबादी भी शामिल है।
CM-GROW कार्यक्रम क्या है?
- CM-GROW का पूर्ण रूप ‘Chief Minister’s Grant for Research on Odisha’s Wildlife’ है, जिसका उद्देश्य ओडिशा में वन्यजीव अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
- यह कार्यक्रम राज्य में वन्यजीव संरक्षण के वैज्ञानिक आधार को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- इसके तहत, सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में शिकार की निगरानी और जंगली जानवरों के व्यवहार का अध्ययन करने के लिए 300 अतिरिक्त AI-सक्षम और नियमित निगरानी कैमरे लगाए जाएंगे।
- वर्तमान में सिमिलिपाल में 300 कैमरे लगे हुए हैं, और नए कैमरे इस संख्या को दोगुना कर देंगे।
- यह पहल आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का उपयोग करके वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को बढ़ाने पर केंद्रित है।
- कार्यक्रम का शुभारंभ राज्य-स्तरीय वन्यजीव सप्ताह समारोह के दौरान किया गया, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| CM-GROW कार्यक्रम का शुभारंभ | राज्य में वन्यजीव संरक्षण के वैज्ञानिक आधार को मजबूत करने और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल। |
| सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में 300 AI-सक्षम और नियमित निगरानी कैमरों की स्थापना | शिकार की निगरानी, पशु व्यवहार का अध्ययन और वन्यजीव प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का उपयोग। |
| राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह समारोह | वन्यजीव संरक्षण, अनुसंधान, पारिस्थितिक जागरूकता और जिम्मेदार इकोटूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए वार्षिक आयोजन। |
| इकोटूरिज्म स्थलों का उद्घाटन और नई पहल की आधारशिला | पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन को बढ़ावा देना, स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर पैदा करना और संरक्षण प्रयासों में जनभागीदारी सुनिश्चित करना। |
| मानव-वन्यजीव संघर्ष पीड़ितों को सहायता | वन्यजीवों द्वारा क्षतिग्रस्त घरों के पीड़ितों को मुआवजा प्रदान कर मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना। |
महत्व
पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- वन्यजीव अनुसंधान को बढ़ावा देकर जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) प्रयासों को मजबूत करना।
- आधुनिक निगरानी तकनीकों का उपयोग करके वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके आवासों की निगरानी में सुधार।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को कम करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
शासन और नीति
- राज्य सरकार की वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित नीतियों को बढ़ावा देता है।
- वन्यजीव प्रबंधन में प्रौद्योगिकी के एकीकरण को प्रोत्साहित करता है, जिससे डेटा-आधारित निर्णय लेने में मदद मिलती है।
- इकोटूरिज्म के माध्यम से स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल कर समावेशी विकास को बढ़ावा देना।
सामाजिक और सांस्कृतिक
- वन्यजीव सप्ताह जैसे आयोजनों के माध्यम से जनता में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाना।
- इकोटूरिज्म के विकास से स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार के अवसर पैदा करना।
- मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व के महत्व को रेखांकित करना और संघर्ष के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए समाधान प्रदान करना।
चुनौतियाँ
1. वन्यजीवों का अवैध शिकार और व्यापार
- अवैध शिकार (Poaching) वन्यजीव आबादी के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है, विशेषकर बाघ जैसे लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए।
- वन्यजीव उत्पादों का अवैध व्यापार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है, जिससे प्रभावी नियंत्रण मुश्किल हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन
2. मानव-वन्यजीव संघर्ष
- वन्यजीवों के आवासों के अतिक्रमण और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण संघर्ष बढ़ रहा है, जिससे जान-माल का नुकसान होता है।
- फसलों को नुकसान और पशुधन पर हमले किसानों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बनते हैं, जिससे वन्यजीवों के प्रति नकारात्मक धारणा बनती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन
3. पर्यावास का विखंडन और नुकसान
- विकास परियोजनाओं, कृषि विस्तार और शहरीकरण के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का विखंडन (Fragmentation) हो रहा है।
- वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) का नुकसान प्रजातियों के आवागमन और आनुवंशिक विविधता को प्रभावित करता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन
4. जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change) वन्यजीवों के वितरण, प्रजनन पैटर्न और खाद्य उपलब्धता को प्रभावित कर रहा है।
- बदलते मौसम पैटर्न और चरम मौसमी घटनाएँ (Extreme Weather Events) वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए नए खतरे पैदा कर रही हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: जलवायु परिवर्तन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वन्यजीव संरक्षण के लिए अपर्याप्त धन | वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं, अनुसंधान और बुनियादी ढांचे के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की कमी। |
| प्रशिक्षित कर्मियों की कमी | वन्यजीव प्रबंधन, निगरानी और अनुसंधान के लिए विशेषज्ञता वाले वन कर्मियों और शोधकर्ताओं की कमी। |
| स्थानीय समुदायों की भागीदारी | संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों को प्रभावी ढंग से शामिल करने और उनके समर्थन को सुनिश्चित करने की चुनौती। |
| प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग | AI-सक्षम कैमरों और अन्य आधुनिक तकनीकों के रखरखाव, डेटा विश्लेषण और प्रभावी कार्यान्वयन की चुनौती। |
| नीति कार्यान्वयन में अंतराल | वन्यजीव संरक्षण से संबंधित नीतियों और कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधाएं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मुख्यमंत्री ग्रांट फॉर रिसर्च ऑन ओडिशाज वाइल्डलाइफ (CM-GROW) कार्यक्रम
आगे की राह
- वन्यजीव अनुसंधान और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों (जैसे AI-सक्षम कैमरे, ड्रोन) का व्यापक उपयोग किया जाए।
- वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम और आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएं।
- वन्यजीव गलियारों और महत्वपूर्ण आवासों की पहचान कर उन्हें संरक्षित किया जाए ताकि प्रजातियों का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित हो सके।
- वन्यजीव संरक्षण में लगे वन कर्मियों और शोधकर्ताओं के लिए क्षमता निर्माण (Capacity Building) और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत किया जाए।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी शमन रणनीतियाँ (Mitigation Strategies) विकसित की जाएं, जिसमें त्वरित मुआवजा और निवारक उपाय शामिल हों।
- इकोटूरिज्म को स्थायी और जिम्मेदार तरीके से विकसित किया जाए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ हो और संरक्षण प्रयासों को समर्थन मिले।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करने और वन्यजीवों पर इसके प्रभावों को कम करने के लिए अनुकूलन रणनीतियाँ (Adaptation Strategies) विकसित की जाएं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वन्यजीव संरक्षण · सिमिलिपाल बाघ अभयारण्य · सीएम-ग्रो कार्यक्रम · मानव-वन्यजीव संघर्ष · पारिस्थितिक पर्यटन · वन्यजीव सप्ताह · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · जैव विविधता · पूर्वी घाट · अनुसंधान अनुदान
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन’}
अवधारणा प्रवाह
CM-GROW कार्यक्रम का शुभारंभ → वन्यजीव अनुसंधान को प्रोत्साहन → सिमिलिपाल में AI-कैमरों की स्थापना → शिकार की निगरानी और पशु व्यवहार का अध्ययन → वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन में सुधार → जैव विविधता का संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में वन्यजीव सप्ताह प्रतिवर्ष 2 से 8 अक्टूबर तक मनाया जाता है।
2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देना है।
3. ओडिशा सरकार ने हाल ही में वन्यजीव अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए सीएम-ग्रो (CM-GROW) कार्यक्रम शुरू किया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि वन्यजीव सप्ताह प्रतिवर्ष 2 से 8 अक्टूबर तक मनाया जाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का संबंध हरित हाइड्रोजन उत्पादन से है, न कि सीधे वन्यजीव संरक्षण से। कथन 3 सही है क्योंकि ओडिशा सरकार ने वन्यजीव अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए सीएम-ग्रो कार्यक्रम शुरू किया है।
Q2. सिमिलिपाल बाघ अभयारण्य (Similipal Tiger Reserve) भारत के किस राज्य में स्थित है?
- पश्चिम बंगाल
- ओडिशा
- झारखंड
- छत्तीसगढ़
उत्तर: ओडिशा — सिमिलिपाल बाघ अभयारण्य ओडिशा राज्य के मयूरभंज जिले में स्थित है। यह अपनी जैव विविधता और बाघों की आबादी के लिए जाना जाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ वन्यजीव संरक्षण में अनुसंधान और प्रौद्योगिकी की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। ओडिशा सरकार के सीएम-ग्रो कार्यक्रम के संदर्भ में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में ऐसे प्रयासों के महत्व पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: वन्यजीव संरक्षण के महत्व और वर्तमान चुनौतियों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. अनुसंधान की भूमिका: वन्यजीवों के व्यवहार, जनसंख्या गतिशीलता, आवास आवश्यकताओं और बीमारियों को समझने में अनुसंधान का महत्व। प्रजातियों की पहचान, पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का आकलन और संरक्षण रणनीतियों के विकास में इसकी भूमिका।
3. प्रौद्योगिकी की भूमिका: निगरानी (कैमरा ट्रैप, ड्रोन), डेटा विश्लेषण (AI), अवैध शिकार विरोधी उपाय, आवास प्रबंधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष शमन में प्रौद्योगिकी का उपयोग। उदाहरण के तौर पर AI-सक्षम कैमरों का उल्लेख।
4. सीएम-ग्रो कार्यक्रम का संदर्भ: ओडिशा के सीएम-ग्रो कार्यक्रम का उल्लेख, जिसका उद्देश्य वन्यजीव अनुसंधान को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक आधार को मजबूत करना है। सिमिलिपाल बाघ अभयारण्य में कैमरे लगाने की योजना का विवरण।
5. मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) का शमन: अनुसंधान और प्रौद्योगिकी कैसे संघर्ष के कारणों को समझने (जैसे फसल क्षति, पशुधन पर हमला) और प्रभावी समाधान (जैसे प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, बाड़ लगाना, आवास सुधार) विकसित करने में मदद कर सकते हैं। प्रभावित व्यक्तियों को मुआवजा देने जैसे उपायों का भी उल्लेख।
6. चुनौतियाँ और सीमाएँ: अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के उपयोग में आने वाली चुनौतियाँ जैसे धन की कमी, तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव, स्थानीय समुदायों की भागीदारी की आवश्यकता।
7. निष्कर्ष: एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, प्रशासनिक उपाय और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी शामिल हो।
स्रोत: orissapost.com
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: ओडिशा सरकार द्वारा हाल ही में शुरू किए गए वन्यजीव अनुसंधान अनुदान कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A. राज्य के वन्यजीवों की जनगणना करना
- B. वन्यजीव अनुसंधान परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना
- C. राज्य में नए वन्यजीव अभयारण्यों की स्थापना करना
- D. वन्यजीवों के लिए नए संरक्षण कानून बनाना
उत्तर: B. वन्यजीव अनुसंधान परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना — इस कार्यक्रम का उद्देश्य वन्यजीव अनुसंधान परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर राज्य के वन्यजीवों के अध्ययन और संरक्षण को बढ़ावा देना है।
Mains: ओडिशा सरकार द्वारा सिमिलिपाल में 300 अतिरिक्त कैमरा ट्रैप लगाने की योजना का उद्देश्य क्या है? इसके वन्यजीव संरक्षण प्रयासों पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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