02 Nov चक्रवात ‘मुरसु’ से पूर्व ओडिशा में जलाशय प्रबंधन
✎ चक्रवात-पूर्व जलाशय प्रचालन का मूल सिद्धांत है कि बाढ़ आने से पहले जलाशय में बाढ़ नियंत्रण भंडारण गुंजाइश बनाई जाए और नियंत्रित निस्तारण से उसका भंडारण स्तर घटाया जाए।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (नदी तंत्र, उष्णकटिबंधीय चक्रवात) | GS Paper III — आपदा प्रबंधन, जल संसाधन और बाढ़ नियंत्रण
- Prelims: हीराकुंड बांध (Hirakud Dam) और महानदी तंत्र, ऋषिकुल्या-बाहुदा द्रोणी (Rushikulya-Bahuda Basin), जलाशय का भंडारण स्तर और बाढ़ नियंत्रण गुंजाइश, स्पिलवे (Spillway) और बांध के गेट, क्यूमेक्स (Cumecs): घन मीटर प्रति सेकंड बहाव की इकाई, चक्रवात का वर्गीकरण (भारत मौसम विज्ञान विभाग, IMD), अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
- Essay: आपदा प्रबंधन में जलाशय प्रचालन की भूमिका: बाढ़ और सूखे के बीच संतुलन, पूर्व-चेतावनी और तैयारी से आपदा-लचीलापन: चक्रवात प्रबंधन का भारतीय मॉडल
त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात-पूर्व जलाशय प्रचालन का मूल सिद्धांत है कि बाढ़ आने से पहले जलाशय में बाढ़ नियंत्रण भंडारण गुंजाइश बनाई जाए और नियंत्रित निस्तारण से उसका भंडारण स्तर घटाया जाए।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ओडिशा सरकार ने आने वाले चक्रवात मुरासु और भारी वर्षा की आशंका को देखते हुए जल संसाधन विभाग के माध्यम से राज्य भर के प्रमुख जलाशयों में पहले से जल-स्तर नियमन के उपाय शुरू किए हैं। इसका उद्देश्य आने वाले अंतर्वाह को सुरक्षित रूप से नियंत्रित करना और बाढ़ की स्थिति में निचले क्षेत्रों में जल-प्लावन की संभावना कम करना है। इसी के समानांतर चक्रवात के बाद के राहत, पुनर्स्थापन और आपातकालीन कार्यों को प्रभावित शहरी क्षेत्रों में तेज़ किया गया है, जिसमें आवश्यक सेवाओं की बहाली को प्राथमिकता दी गई है। हीराकुंड बांध के पांच गेट खोले गए हैं और बघलाटी तथा घोड़ाहाड़ा जलाशयों से नियंत्रित निस्तारण आरंभ हुआ है। बड़ानाला और हरभंगी जलाशयों के लिए चरणबद्ध निस्तारण योजना बनाई गई है, ताकि उनका भंडारण स्तर लगभग 60 प्रतिशत तक लाया जा सके और आगामी वर्षा के अतिरिक्त प्रवाह को समाने की जगह बने।
पृष्ठभूमि
- ओडिशा की प्रमुख नदी प्रणाली महानदी है, जिस पर हीराकुंड बांध स्थित है। यह स्वतंत्रता के बाद बनी आरंभिक बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं में से एक है, जो बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन के लिए जानी जाती है।
- दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश की सीमा के आसपास की ऋषिकुल्या-बाहुदा द्रोणी में बघलाटी और घोड़ाहाड़ा जैसे जलाशय हैं। इस द्रोणी के जलाशयों का प्रचालन स्थानीय नदी प्रवाह और निचले क्षेत्र की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है।
- बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवात भारत के पूर्वी तट पर वर्षा और तेज़ हवाओं के साथ बाढ़ का बड़ा कारण बनते हैं। मौसम विभाग (IMD) चक्रवातों को गहरा अवदाब, चक्रवाती तूफ़ान, गंभीर चक्रवाती तूफ़ान और अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत करता है।
- महानदी के जल-बंटवारे को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच विवाद रहा है, जिसके समाधान हेतु अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के अंतर्गत महानदी जल विवाद अधिकरण गठित किया गया है।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) राज्य स्तर पर तैयारी, चेतावनी और राहत कार्यों का समन्वय करता है। ओडिशा में यह भूमिका राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (OSDMA) निभाता है।
जलाशय प्रचालन और चक्रवात-पूर्व बाढ़ प्रबंधन क्या है?
- जलाशय प्रचालन का अर्थ है बांध और जलाशय से जल-निस्तारण का नियोजित नियमन, ताकि भंडारण और बाढ़ नियंत्रण दोनों उद्देश्य संतुलित रहें।
- बाढ़ नियंत्रण भंडारण गुंजाइश वह खाली स्थान है जो आने वाले अतिरिक्त प्रवाह को रोकने के लिए जलाशय में पहले से सुरक्षित रखा जाता है। इसे बनाए रखने के लिए जलाशय का स्तर पहले से घटाया जाता है।
- रूल कर्व (Rule Curve) वह मार्गदर्शक सीमा-रेखा है जो मौसम के अनुसार जलाशय के अधिकतम अनुमेय भंडारण स्तर को निर्धारित करती है। मानसून और चक्रवात के समय इसके अनुपालन का महत्व बढ़ जाता है।
- स्पिलवे और बांध के गेट के माध्यम से जल का निस्तारण किया जाता है। नियंत्रित निस्तारण में बहाव की मात्रा (क्यूमेक्स में) तय और निगरानी में रखी जाती है, जबकि अनियंत्रित निस्तारण से निचले क्षेत्रों में अचानक बाढ़ का खतरा होता है।
- चरणबद्ध निस्तारण का उद्देश्य जलाशय को धीरे-धीरे खाली करना है, जिससे डाउनस्ट्रीम नदी पर दबाव और जान-माल की हानि का जोखिम घटे।
- बांधों की सुरक्षा के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 लागू है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) बांधों के सुरक्षा मानक और निगरानी का ढांचा देखता है। राज्य स्तर पर परिचालन मानक प्रक्रिया (SOP) का पालन अनिवार्य है।
- चक्रवात के बाद का चरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आवश्यक सेवाओं की बहाली, प्रभावित परिवारों तक सहायता और आपातकालीन प्रतिक्रिया आपदा प्रबंधन के पुनर्प्राप्ति चरण का हिस्सा हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| हीराकुड बांध के पाँच द्वार खोलना (Hirakud Dam Gates) | ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से बढ़ते अंतर्प्रवाह को नियंत्रित करने और महानदी प्रणाली में अतिरिक्त भंडारण स्थान बनाने के लिए सावधानीपूर्वक निस्सरण किया जा रहा है |
| बघलाटी और घोड़ाहाडा जलाशय | क्रमशः 85 और 115 घन मीटर प्रति सेकंड (cumecs) के निस्सरण से भंडारण स्तर लगभग 60 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है |
| बडानाला और हरभंगी जलाशय | चरणबद्ध निस्सरण योजना के अंतर्गत उत्प्लव मार्ग (Spillway) से वर्तमान प्रवाह को क्रमशः 175 और 360 cumecs तक बढ़ाने की योजना है |
| मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन | निस्सरण अतिरिक्त मुख्य अभियंता, रुशिकुल्या-बहुदा बेसिन की उपस्थिति में और सुरक्षा सावधानियों के साथ किया जा रहा है |
| अंतर-राज्यीय सूचना तंत्र | निस्सरण की सूचना श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश) के कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को दी गई है, ताकि निचले क्षेत्र में समन्वय बना रहे |
महत्व
आपदा प्रबंधन (Disaster Management)
- चक्रवात से पूर्व जलाशयों का जल-स्तर घटाकर बाढ़ नियंत्रण गुंजाइश (Flood Cushion) बनाना निवारक उपाय का व्यावहारिक उदाहरण है
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की ‘आपदा-पूर्व तैयारी’ की भावना इस कार्रवाई में स्पष्ट दिखती है
- राहत एवं पुनर्स्थापन कार्यों के समानांतर संचालन से जीवन और संपत्ति दोनों की हानि घटती है
जल संसाधन प्रबंधन (Water Resources Management)
- जलाशयों का भंडारण और निस्सरण एक ही प्रणाली में संतुलित करना बहु-उद्देशीय बांध संचालन की मूल चुनौती है
- महानदी प्रणाली और रुशिकुल्या बेसिन जैसे जलग्रहण क्षेत्रों में बेसिन-स्तरीय योजना की आवश्यकता रेखांकित होती है
सामाजिक-आर्थिक प्रभाव (Socio-Economic Impact)
- समय पर निस्सरण से खड़ी फसलों और कृषक परिवारों की आजीविका पर होने वाली हानि कम की जा सकती है
- आवश्यक सेवाओं की शीघ्र बहाली से प्रभावित शहरी क्षेत्रों में सामान्य जीवन जल्दी लौटता है
शासन एवं प्रशासनिक समन्वय (Governance and Coordination)
- जल संसाधन विभाग, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र के बीच सूचना-प्रवाह निर्णय-प्रक्रिया की कुंजी है
- मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) से संचालन में मनमानी की गुंजाइश घटती है और जवाबदेही तय होती है
चुनौतियाँ
1. बांध-जनित बाढ़ का जोखिम
- चक्रवात से पूर्व निस्सरण का उद्देश्य निचले क्षेत्रों को बाढ़ से बचाना है, परंतु अत्यधिक वर्षा होने पर वही निस्सरण निचले इलाकों में बाढ़ बढ़ा सकता है
- निस्सरण की मात्रा और समय का सटीक निर्धारण वर्षा के पूर्वानुमान की गुणवत्ता पर निर्भर करता है
यूपीएससी लिंक: GS-3: आपदा प्रबंधन; बांधों की सुरक्षा
2. पूर्वानुमान की अनिश्चितता
- चक्रवात की दिशा, तीव्रता और स्थलपात का बिंदु बदल सकता है, जिससे जलाशय संचालन की योजना बार-बार संशोधित करनी पड़ती है
- जलग्रहण क्षेत्र की वर्षा और अंतर्प्रवाह का वास्तविक समय में अनुमान लगाना तकनीकी रूप से कठिन है
यूपीएससी लिंक: GS-1: भौगोलिक घटनाएँ (चक्रवात); GS-3: आपदा पूर्व-चेतावनी प्रणाली
3. अंतर-राज्यीय समन्वय
- रुशिकुल्या और बहुदा जैसे बेसिन दो राज्यों के भूभाग से होकर बहते हैं, इसलिए निचले राज्य को पूर्व सूचना देना आवश्यक हो जाता है
- नदी जल संबंधी विवादों और सूचना-साझाकरण के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासनिक चुनौती है
यूपीएससी लिंक: GS-2: संघवाद और अंतर-राज्यीय संबंध; अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद
4. भंडारण और बाढ़ नियंत्रण का द्वंद्व
- सिंचाई और पेयजल के लिए जलाशय को अधिक भरा रखने की आवश्यकता होती है, जबकि बाढ़ नियंत्रण के लिए उसे खाली रखना पड़ता है
- ऐसे में जल-स्तर का निर्णय उपयोगिता और सुरक्षा के बीच संतुलन का प्रश्न बन जाता है
यूपीएससी लिंक: GS-3: सिंचाई एवं बहु-उद्देशीय परियोजनाएँ; आपदा प्रबंधन
5. आपदा-पश्चात पुनर्स्थापन
- चक्रवात के बाद आवश्यक सेवाओं (बिजली, जल आपूर्ति, परिवहन) की बहाली में समय लगता है
- प्रभावित कृषकों की फसल हानि और घरों की क्षति का आकलन और सहायता वितरण व्यवस्थित ढंग से करना चुनौतीपूर्ण है
यूपीएससी लिंक: GS-3: आपदा प्रबंधन; GS-2: सामाजिक क्षेत्र की योजनाएँ और सेवा-वितरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| निस्सरण से निचले क्षेत्र में बाढ़ | अत्यधिक वर्षा की स्थिति में जलाशय से छोड़ा गया जल बाढ़ की स्थिति बिगाड़ सकता है |
| वर्षा पूर्वानुमान की सीमा | चक्रवात का मार्ग और वर्षा की मात्रा अनिश्चित होने से संचालन-योजना में बदलाव की आवश्यकता होती है |
| अंतर-राज्यीय समन्वय | रुशिकुल्या-बहुदा बेसिन में पड़ोसी राज्य को समय पर सूचना देना और साझा जल-प्रबंधन सुनिश्चित करना |
| उपयोगिता बनाम सुरक्षा | सिंचाई और जल-भंडारण के हित तथा बाढ़ नियंत्रण की आवश्यकता के बीच संतुलन |
| आपदा-पश्चात सेवा बहाली | बिजली, पेयजल और परिवहन की शीघ्र बहाली तथा प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुँचाना |
आगे की राह
- जलाशय संचालन के लिए वर्षा और अंतर्प्रवाह का वास्तविक-समय पूर्वानुमान सुदृढ़ करने हेतु भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission) के आंकड़ों का समेकित उपयोग किया जाए
- जलाशयों में स्वचालित जल-स्तर सेंसर और दूरमिति (Telemetry) प्रणाली लगाकर निस्सरण के निर्णय को तथ्य-आधारित बनाया जाए
- नदी बेसिन स्तर पर पड़ोसी राज्यों के साथ सूचना-साझाकरण और निस्सरण-प्रोटोकॉल को औपचारिक रूप दिया जाए
- निचले क्षेत्रों में बाढ़-पूर्व चेतावनी को समुदाय तक स्थानीय भाषा में पहुँचाया जाए, ताकि निकासी समय पर हो सके
- राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुरूप बांधों के नियमित निरीक्षण और आपातकालीन कार्य योजना (Emergency Action Plan) को अद्यतन रखा जाए
- बाढ़ मैदान (Flood Plain) में निर्माण पर नियंत्रण और जल-निकासी नालों के रखरखाव को प्राथमिकता दी जाए
- चक्रवात के बाद सेवा बहाली और फसल-हानि आकलन के लिए जिला स्तर पर पूर्व-निर्धारित प्रोटोकॉल तैयार रखे जाएँ
- सिंचाई, पेयजल और बाढ़ नियंत्रण के उद्देश्यों के बीच संतुलन हेतु बहु-उद्देशीय जलाशय संचालन-नियमावली की समीक्षा की जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
चक्रवात प्रबंधन · जलाशय प्रबंधन · आपदा जोखिम न्यूनीकरण · बाढ़ नियंत्रण · जल संसाधन विभाग · हीराकुंड बांध · महानदी नदी प्रणाली · मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) · जलवायु परिवर्तन अनुकूलन · राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- सातवीं अनुसूची: राज्य सूची की प्रविष्टि 17
- अनुच्छेद 246: राज्यों की विधायी शक्ति
अवधारणा प्रवाह
चक्रवात मुरासु के गठन और भारी वर्षा का पूर्वानुमान → ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से जलाशयों में अंतर्प्रवाह में वृद्धि → जलाशयों के द्वार खोलकर चरणबद्ध निस्सरण और भंडारण स्तर में कमी → जलाशयों में बाढ़ नियंत्रण गुंजाइश (Flood Cushion) का निर्माण → चक्रवाती वर्षा के दौरान अतिरिक्त प्रवाह को जलाशयों में समाहित करना → निचले क्षेत्रों में बाढ़ जोखिम में कमी के साथ आपातकालीन राहत और पुनर्स्थापन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हीराकुंड बांध महानदी नदी पर स्थित है और ओडिशा राज्य में है।
2. चक्रवात के दौरान जलाशयों से पानी छोड़ने का मुख्य उद्देश्य बिजली उत्पादन बढ़ाना है।
3. भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्थापना की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। हीराकुंड बांध महानदी नदी पर स्थित है और ओडिशा में है। कथन 2 गलत है। चक्रवात के दौरान जलाशयों से पानी छोड़ने का मुख्य उद्देश्य बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए अतिरिक्त भंडारण क्षमता बनाना है, न कि बिजली उत्पादन बढ़ाना। कथन 3 सही है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत की गई थी।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन चक्रवात के प्रभाव को कम करने के लिए जलाशय प्रबंधन के प्राथमिक उद्देश्यों में से एक है?
- जलाशय के जल स्तर को अधिकतम करना ताकि सूखे की स्थिति में उपयोग के लिए पानी बचाया जा सके।
- डाउनस्ट्रीम (अनुप्रवाह) क्षेत्रों में बाढ़ की संभावना को कम करने के लिए अतिरिक्त जल प्रवाह को समायोजित करने हेतु पर्याप्त बाढ़ कुशन (storage capacity) बनाना।
- जलाशय से पानी के निर्वहन को पूरी तरह से रोकना ताकि पानी को बाद में सिंचाई के लिए बचाया जा सके।
- केवल बिजली उत्पादन के लिए पानी छोड़ना, चाहे डाउनस्ट्रीम में बाढ़ का जोखिम कुछ भी हो।
उत्तर: डाउनस्ट्रीम (अनुप्रवाह) क्षेत्रों में बाढ़ की संभावना को कम करने के लिए अतिरिक्त जल प्रवाह को समायोजित करने हेतु पर्याप्त बाढ़ कुशन (storage capacity) बनाना। — चक्रवात के दौरान जलाशय प्रबंधन का प्राथमिक उद्देश्य डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए अतिरिक्त जल प्रवाह को समायोजित करने हेतु पर्याप्त बाढ़ कुशन बनाना है। यह जल स्तर को नियंत्रित करके और आवश्यकतानुसार पानी छोड़कर किया जाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जलाशय प्रबंधन की भूमिका और महत्व का परीक्षण कीजिए। भारत में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) में यह किस प्रकार सहायक है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** चक्रवात जैसी आपदाओं में जलाशय प्रबंधन की संक्षिप्त परिभाषा और महत्व।
2. **जलाशय प्रबंधन की भूमिका:**
* **बाढ़ नियंत्रण:** अतिरिक्त जल प्रवाह को समायोजित करने के लिए ‘बाढ़ कुशन’ बनाना।
* **नियंत्रित जल निकासी:** डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में बाढ़ को रोकने के लिए चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ना।
* **बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा:** बांधों और अन्य जल संरचनाओं पर दबाव कम करना।
* **पूर्व-खाली उपाय:** अग्रिम रूप से जल स्तर को कम करके आगामी भारी वर्षा के लिए जगह बनाना।
* **समन्वय:** विभिन्न विभागों और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय का महत्व (जैसे ओडिशा-आंध्र प्रदेश)।
3. **आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सहायता:**
* **जीवन और संपत्ति की सुरक्षा:** बाढ़ के कारण होने वाले नुकसान को कम करके।
* **आजीविका की सुरक्षा:** कृषि भूमि और बुनियादी ढाँचे को बचाने में मदद करना।
* **आर्थिक स्थिरता:** आपदा के बाद पुनर्निर्माण और बहाली की लागत को कम करना।
* **लचीलापन बढ़ाना:** समुदायों को भविष्य की आपदाओं का सामना करने के लिए अधिक तैयार करना।
* **प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली:** प्रभावी जलाशय प्रबंधन प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों का एक अभिन्न अंग है।
4. **चुनौतियाँ और समाधान:**
* **चुनौतियाँ:** सटीक मौसम पूर्वानुमान की कमी, अंतर-राज्यीय जल विवाद, पुराने बुनियादी ढाँचे, गाद जमा होना।
* **समाधान:** आधुनिक तकनीक (रिमोट सेंसिंग, AI), बेहतर अंतर-राज्यीय समन्वय, नियमित रखरखाव और आधुनिकीकरण, क्षमता निर्माण।
5. **निष्कर्ष:** प्रभावी जलाशय प्रबंधन को आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में रेखांकित करते हुए, भविष्य की चुनौतियों के लिए एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देना।
स्रोत: orissapost.com
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: चक्रवात ‘मुरसु’ के आगमन से पहले ओडिशा सरकार द्वारा जलाशय प्रबंधन में तेजी लाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A. जलाशयों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना।
- B. बाढ़ के जोखिम को कम करना और पानी के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करना।
- C. मत्स्य पालन उत्पादन में वृद्धि करना।
- D. सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी का भंडारण करना।
उत्तर: B. बाढ़ के जोखिम को कम करना और पानी के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करना। — ओडिशा सरकार द्वारा चक्रवात ‘मुरसु’ से पहले जलाशय प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य बाढ़ के जोखिम को कम करना और पानी का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना है।
Mains: चक्रवात ‘मुरसु’ के संदर्भ में, ओडिशा सरकार द्वारा जलाशय प्रबंधन में उठाए गए कदमों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें और बताएं कि ये कदम राज्य में बाढ़ नियंत्रण और जल सुरक्षा में कैसे योगदान करते हैं।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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