06 Oct पीएम स्मृति उपहार: सिक्किम की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाया
✎ सिक्किम की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाले प्रधानमंत्री के स्मृति चिन्हों की प्रदर्शनी 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल के तहत राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता के सम्मान को बढ़ावा देती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय संस्कृति: प्राचीन से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू | GS Paper II — संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, विविध संस्कृतियों का संरक्षण
- Prelims: सिक्किम की सांस्कृतिक विरासत, प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह उपहार, एक भारत श्रेष्ठ भारत, पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति, भारत की विविधता में एकता, सांस्कृतिक कूटनीति
- Essay: भारत की सांस्कृतिक विविधता: एकता और विकास का आधार, पूर्वोत्तर भारत का सांस्कृतिक महत्व और राष्ट्रीय एकीकरण में उसकी भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: सिक्किम की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाले प्रधानमंत्री के स्मृति चिन्हों की प्रदर्शनी ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता के सम्मान को बढ़ावा देती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, प्रधानमंत्री को प्राप्त स्मृति चिन्हों की एक प्रदर्शनी में सिक्किम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से संबंधित कई वस्तुएँ प्रदर्शित की गईं। इन स्मृति चिन्हों में सिक्किम के पारंपरिक शिल्प, कलाकृतियाँ और सांस्कृतिक प्रतीक शामिल थे, जो राज्य की विशिष्ट पहचान को दर्शाते हैं। यह पहल ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ (Ek Bharat Shreshtha Bharat) की भावना को मजबूत करती है, जहाँ देश के विभिन्न हिस्सों की संस्कृतियों को नागरिकों के करीब लाया जाता है, जिससे राष्ट्रीय एकता और विविधता का सम्मान बढ़ता है।
पृष्ठभूमि
- सिक्किम भारत के पूर्वोत्तर में स्थित एक हिमालयी राज्य है, जो अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है।
- राज्य में मुख्य रूप से लेप्चा (Lepcha), भूटिया (Bhutia) और नेपाली समुदायों का निवास है, जिनकी अपनी विशिष्ट भाषाएँ, रीति-रिवाज और कला रूप हैं।
- सिक्किम की संस्कृति बौद्ध धर्म से गहराई से प्रभावित है, जिसके कई मठ और स्तूप राज्य भर में फैले हुए हैं।
- पारंपरिक शिल्प जैसे थांगका चित्रकला (Thangka painting), लकड़ी की नक्काशी (wood carving), बांस और बेंत के उत्पाद (bamboo and cane products) तथा पारंपरिक वस्त्र (traditional textiles) सिक्किम की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग हैं।
- प्रधानमंत्री को प्राप्त स्मृति चिन्हों की प्रदर्शनी एक सार्वजनिक पहल है, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री को विभिन्न अवसरों पर मिले उपहारों और स्मृति चिन्हों को प्रदर्शित करना है, जिनमें भारत के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक वस्तुएँ शामिल होती हैं।
- यह प्रदर्शनी देश के विभिन्न क्षेत्रों की कला और शिल्प को बढ़ावा देने तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने का एक मंच प्रदान करती है।
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल क्या है?
- ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा 31 अक्टूबर 2015 को सरदार वल्लभभाई पटेल की 140वीं जयंती के अवसर पर की गई थी।
- इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक समझ और संबंधों को बढ़ावा देना है।
- यह विभिन्न राज्यों के लोगों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ावा देकर राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने पर केंद्रित है।
- इस कार्यक्रम के तहत, प्रत्येक राज्य को एक निश्चित अवधि के लिए किसी अन्य राज्य के साथ जोड़ा जाता है, और वे एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं, भाषाओं और व्यंजनों को सीखते और साझा करते हैं।
- यह पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन को बढ़ावा देने और विभिन्न राज्यों के बीच शैक्षिक व खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करती है।
- इसका लक्ष्य भारत की विविधता में निहित एकता का जश्न मनाना और विभिन्न संस्कृतियों के प्रति सम्मान और सहिष्णुता की भावना विकसित करना है।
- यह पहल नागरिकों को देश के विभिन्न हिस्सों की समृद्ध विरासत से परिचित कराकर राष्ट्रीय पहचान को सुदृढ़ करती है।
- यह भारत के संघीय ढांचे को मजबूत करने और केंद्र-राज्य संबंधों में सांस्कृतिक आयाम को जोड़ने में भी सहायक है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| प्रधानमंत्री स्मृति चिन्ह | यह एक पहल है जिसके तहत प्रधानमंत्री को प्राप्त उपहारों और स्मृति चिह्नों की नीलामी की जाती है। |
| सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन | नीलामी में सिक्किम के सांस्कृतिक प्रतीक और कलाकृतियाँ शामिल हैं, जो राज्य की समृद्ध विरासत को दर्शाती हैं। |
| नागरिकों की भागीदारी | यह नागरिकों को देश की सांस्कृतिक विविधता से जुड़ने और उसका समर्थन करने का अवसर प्रदान करता है। |
| एक भारत श्रेष्ठ भारत | यह पहल ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को पुष्ट करती है, जहाँ विभिन्न राज्यों की संस्कृतियों को बढ़ावा दिया जाता है। |
| राजस्व का उपयोग | नीलामी से प्राप्त आय का उपयोग नमामि गंगे परियोजना जैसे सार्वजनिक हित के कार्यों के लिए किया जाता है। |
महत्व
सांस्कृतिक महत्व
- यह पहल सिक्किम की अनूठी सांस्कृतिक विरासत, जैसे कि बौद्ध कला, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय प्रतीकों को राष्ट्रीय मंच पर लाती है।
- यह देश के विभिन्न हिस्सों के नागरिकों को सिक्किम की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराती है, जिससे अंतर-राज्यीय सांस्कृतिक समझ और सम्मान बढ़ता है।
- यह भारत की विविध सांस्कृतिक टेपेस्ट्री को उजागर करती है और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के आदर्श को मजबूत करती है।
सामाजिक महत्व
- यह नागरिकों को राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में अप्रत्यक्ष रूप से योगदान करने का अवसर प्रदान करती है, जैसे कि नमामि गंगे परियोजना, जिससे उनमें स्वामित्व की भावना आती है।
- यह पहल कला और संस्कृति के संरक्षण और प्रचार के महत्व पर प्रकाश डालती है, जिससे युवा पीढ़ी में अपनी विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
शासन और पारदर्शिता
- प्रधानमंत्री को प्राप्त उपहारों की पारदर्शी नीलामी सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और जवाबदेही के सिद्धांतों को दर्शाती है।
- यह एक ऐसा तंत्र स्थापित करती है जहाँ सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्तियों को प्राप्त उपहारों का उपयोग सार्वजनिक भलाई के लिए किया जा सकता है।
चुनौतियाँ
1. जागरूकता और पहुंच
- दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों और संभावित खरीदारों तक इस पहल की जानकारी पहुंचाना एक चुनौती हो सकती है।
- डिजिटल डिवाइड के कारण सभी इच्छुक व्यक्तियों के लिए ऑनलाइन नीलामी में भाग लेना मुश्किल हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. मूल्यांकन और प्रामाणिकता
- कलाकृतियों और स्मृति चिह्नों का उचित मूल्यांकन सुनिश्चित करना ताकि उनका वास्तविक मूल्य प्राप्त हो सके।
- नीलामी में प्रस्तुत वस्तुओं की प्रामाणिकता और उत्पत्ति को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-I: भारतीय विरासत और संस्कृति
3. सांस्कृतिक संवेदनशीलता
- संवेदनशील या धार्मिक महत्व वाली वस्तुओं की नीलामी करते समय सांस्कृतिक संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक है।
- यह सुनिश्चित करना कि नीलामी प्रक्रिया किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचाए।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-I: भारतीय समाज
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सीमित पहुंच | ऑनलाइन नीलामी में सभी नागरिकों की समान भागीदारी सुनिश्चित करना। |
| वस्तुओं का मूल्यांकन | नीलामी की जाने वाली वस्तुओं का सही और निष्पक्ष मूल्यांकन। |
| सांस्कृतिक संरक्षण | नीलामी के माध्यम से सांस्कृतिक वस्तुओं के व्यावसायिककरण से उनकी पवित्रता पर संभावित प्रभाव। |
| जागरूकता का अभाव | नीलामी और उसके उद्देश्यों के बारे में व्यापक जन जागरूकता पैदा करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- एक भारत श्रेष्ठ भारत (Ek Bharat Shreshtha Bharat)
आगे की राह
- नीलामी की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बहुभाषी प्रचार और जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
- भौतिक प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाए ताकि जो लोग ऑनलाइन पहुंच नहीं रखते वे भी वस्तुओं को देख सकें।
- विशेषज्ञों द्वारा वस्तुओं का निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन सुनिश्चित किया जाए।
- सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील वस्तुओं की नीलामी के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल स्थापित किए जाएं।
- नीलामी से प्राप्त आय के उपयोग के बारे में नियमित और विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- राज्य सरकारों के साथ मिलकर स्थानीय कला और शिल्प को बढ़ावा देने के लिए ऐसी और पहल की जाएं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सांस्कृतिक विरासत · पर्यटन संवर्धन · एक भारत श्रेष्ठ भारत · हस्तशिल्प · स्थानीय कला · आर्थिक सशक्तिकरण · पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास · सांस्कृतिक कूटनीति · संवर्धन · राष्ट्रीय एकता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51A(f): हमारी समन्वित संस्कृति की समृद्ध विरासत का सम्मान और संरक्षण
- अनुच्छेद 51A(j): व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधि के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता के लिए प्रयास
अवधारणा प्रवाह
प्रधानमंत्री को उपहार प्राप्त होते हैं। → ये उपहार सार्वजनिक नीलामी के लिए रखे जाते हैं। → नीलामी में सिक्किम की सांस्कृतिक वस्तुएं शामिल होती हैं। → नागरिक इन वस्तुओं को खरीदकर सांस्कृतिक विरासत से जुड़ते हैं। → नीलामी से प्राप्त आय का उपयोग सार्वजनिक परियोजनाओं (जैसे नमामि गंगे) में होता है। → यह पहल ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को बढ़ावा देती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों के बीच आपसी समझ और जुड़ाव को बढ़ावा देना है।
2. यह कार्यक्रम भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने पर केंद्रित है।
3. इस कार्यक्रम के तहत, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश एक-दूसरे के साथ ‘जोड़ी’ बनाते हैं और भाषा, साहित्य, व्यंजन, त्योहारों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पर्यटन के क्षेत्रों में एक-दूसरे की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1, 2 और 3 तीनों सही हैं। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम वास्तव में भारत की विविधता में एकता का जश्न मनाने और विभिन्न संस्कृतियों के बीच जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और संवर्धन शामिल है।
Q2. सिक्किम के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
2. लेप्चा जनजाति: सिक्किम की स्वदेशी आबादी
3. डोकलाम पठार: भारत, भूटान और चीन के बीच एक त्रि-जंक्शन बिंदु
उपरोक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — युग्म 1 और 2 सही सुमेलित हैं। कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान (Khangchendzonga National Park) एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और लेप्चा सिक्किम की स्वदेशी जनजातियों में से एक है। युग्म 3 गलत है क्योंकि डोकलाम पठार भारत, भूटान और चीन के बीच एक त्रि-जंक्शन बिंदु है, लेकिन यह सिक्किम के संदर्भ में नहीं है, बल्कि भूटान और चीन के बीच विवादित क्षेत्र है जिसके पास भारत की सीमा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ जैसी पहलें किस प्रकार सहायक हैं? पूर्वोत्तर क्षेत्र के विशेष संदर्भ में चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ (Ek Bharat Shreshtha Bharat) पहल का संक्षिप्त परिचय और इसका उद्देश्य।
2. सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भूमिका: यह पहल कैसे सांस्कृतिक आदान-प्रदान, कला रूपों के संवर्धन, भाषा और साहित्य के प्रचार, और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण में मदद करती है।
3. राष्ट्रीय एकता और विविधता में एकता: यह कैसे विभिन्न राज्यों और संस्कृतियों के लोगों को एक साथ लाकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है।
4. पूर्वोत्तर क्षेत्र का विशेष संदर्भ: पूर्वोत्तर भारत की अनूठी सांस्कृतिक विविधता, जनजातीय कला और परंपराओं का उल्लेख। यह पहल कैसे पूर्वोत्तर की मुख्यधारा से दूरी को कम करती है, पर्यटन को बढ़ावा देती है, स्थानीय हस्तशिल्प और कलाकारों को मंच प्रदान करती है, और क्षेत्र के आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान करती है।
5. चुनौतियाँ और आगे का मार्ग: इन पहलों के कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियाँ और उन्हें दूर करने के सुझाव।
6. निष्कर्ष: सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और राष्ट्रीय एकीकरण के लिए ऐसी पहलों के महत्व पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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