08 Oct पीएम महिला एवं बाल विकास शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में होंगे शामिल
✎ महिला एवं बाल विकास मंत्रालय महिलाओं और बच्चों के समग्र सशक्तिकरण और कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करने हेतु प्रयासरत है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — समाज, महिला सशक्तिकरण | GS Paper II — सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ, केंद्र एवं राज्यों के कार्य | GS Paper III — मानव संसाधन विकास
- Prelims: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, मिशन शक्ति, मिशन वात्सल्य, पोषण 2.0, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, जेंडर बजटिंग
- Essay: भारत में महिला सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और आगे की राह, बच्चों का कल्याण: एक राष्ट्र के भविष्य का निर्माण
त्वरित पुनरावृत्ति: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय महिलाओं और बच्चों के समग्र सशक्तिकरण और कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करने हेतु प्रयासरत है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
यह सत्र महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास और सशक्तिकरण के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी पहलों और नीतियों पर केंद्रित था। इस तरह के उच्च-स्तरीय आयोजनों में प्रधानमंत्री की भागीदारी इन क्षेत्रों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जो लैंगिक समानता (Gender Equality) और बच्चों के कल्याण को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्थापित करती है।
पृष्ठभूमि
- भारत में महिलाओं और बच्चों का कल्याण हमेशा से एक महत्वपूर्ण सामाजिक और विकासात्मक मुद्दा रहा है। संविधान (Constitution) के विभिन्न अनुच्छेद इन वर्गों के लिए विशेष प्रावधानों की अनुमति देते हैं।
- स्वतंत्रता के बाद से, सरकार ने महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा में सुधार के लिए कई योजनाएँ और नीतियाँ लागू की हैं।
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) इन नीतियों के निर्माण और कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी है।
- संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) में भी लैंगिक समानता (SDG 5) और बच्चों के स्वास्थ्य एवं कल्याण (SDG 3, 4) पर विशेष जोर दिया गया है, जिसके प्रति भारत प्रतिबद्ध है।
- हाल के वर्षों में, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, हिंसा से सुरक्षा और बच्चों के पोषण तथा शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की प्रमुख पहलें
- मिशन शक्ति: यह महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए एक एकीकृत मिशन है, जिसमें ‘नारी अदालत’, वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन जैसी योजनाएँ शामिल हैं।
- मिशन वात्सल्य: यह बच्चों के कल्याण और सुरक्षा के लिए एक व्यापक योजना है, जिसमें बाल देखभाल संस्थानों का सुदृढ़ीकरण, गैर-संस्थागत देखभाल को बढ़ावा देना और बच्चों के लिए आपातकालीन आउटरीच सेवाएँ शामिल हैं।
- पोषण 2.0: यह पूरक पोषण कार्यक्रम (Supplementary Nutrition Programme) और पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan) का एक एकीकृत कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य कुपोषण (Malnutrition) को दूर करना और बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण परिणामों में सुधार करना है।
- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (BBBP): यह योजना बाल लिंगानुपात (Child Sex Ratio) में गिरावट को रोकने और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): यह गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को आंशिक वेतन हानि के लिए नकद प्रोत्साहन प्रदान करती है ताकि वे पहले बच्चे के जन्म के दौरान पर्याप्त आराम कर सकें।
- वन स्टॉप सेंटर (OSC): यह हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एकीकृत सहायता और सहायता प्रदान करता है, जिसमें चिकित्सा सहायता, पुलिस सहायता, कानूनी सहायता, मनोसामाजिक परामर्श और अस्थायी आश्रय शामिल है।
- जेंडर बजटिंग (Gender Budgeting): यह एक उपकरण है जो सरकारी बजट में महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संसाधन लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए आवंटित किए गए हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का शिखर सम्मेलन | यह मंत्रालय महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास और सशक्तिकरण के लिए नीतियों और कार्यक्रमों को तैयार करने तथा लागू करने के लिए जिम्मेदार है। |
| समापन सत्र में प्रधानमंत्री की भागीदारी | महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दों पर सरकार की उच्च प्राथमिकता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| नीतिगत चर्चाएँ और सिफारिशें | महिलाओं और बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने और उनके कल्याण को बढ़ावा देने के लिए भविष्य की रणनीतियों और पहलों को आकार देने में सहायक। |
| विभिन्न हितधारकों का एकीकरण | सरकारी अधिकारियों, विशेषज्ञों और नागरिक समाज संगठनों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, जिससे समावेशी और प्रभावी समाधान निकलते हैं। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण से समाज में लैंगिक समानता (Gender Equality) और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलता है।
- बच्चों का स्वस्थ विकास देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे कल के नागरिक और कार्यबल हैं।
- महिला शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता से परिवार और समुदाय दोनों स्तरों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
आर्थिक महत्व
- महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी (Labour Force Participation) में वृद्धि से देश की GDP में उल्लेखनीय योगदान होता है।
- बच्चों में निवेश, जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य पर व्यय, दीर्घकालिक मानव पूंजी निर्माण (Human Capital Formation) में सहायक होता है, जिससे भविष्य में आर्थिक उत्पादकता बढ़ती है।
- महिलाओं के उद्यमशीलता को बढ़ावा देने से नए व्यवसायों का सृजन होता है और आर्थिक विकास को गति मिलती है।
शासन और नीति निर्माण
- यह शिखर सम्मेलन महिलाओं और बच्चों से संबंधित मौजूदा नीतियों की समीक्षा और नई रणनीतियों को तैयार करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
- सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह समाज के सबसे कमजोर वर्गों के कल्याण को प्राथमिकता देती है।
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद करता है ताकि महिला एवं बाल विकास के मुद्दों पर एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
चुनौतियाँ
1. लैंगिक असमानता
- शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाओं और पुरुषों के बीच महत्वपूर्ण अंतर मौजूद हैं।
- भेदभावपूर्ण सामाजिक मानदंड और पितृसत्तात्मक सोच महिलाओं की प्रगति में बाधा डालती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, महिला सशक्तिकरण
2. बाल कुपोषण और स्वास्थ्य
- भारत में अभी भी बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण (Malnutrition), स्टंटिंग (Stunting) और वेस्टिंग (Wasting) से प्रभावित हैं।
- शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) और मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate) में कमी लाना एक सतत चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय
3. बाल विवाह और बाल श्रम
- कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद, ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में बाल विवाह (Child Marriage) अभी भी प्रचलित है।
- गरीबी और जागरूकता की कमी के कारण बच्चे अक्सर खतरनाक परिस्थितियों में श्रम करने को मजबूर होते हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, कमजोर वर्गों का संरक्षण
4. महिलाओं के विरुद्ध हिंसा
- घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और अन्य प्रकार की हिंसा महिलाओं के जीवन और गरिमा को प्रभावित करती है।
- न्याय प्रणाली तक पहुँच और अपराधियों को दंडित करने में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, कमजोर वर्गों का संरक्षण
5. शिक्षा तक पहुँच और गुणवत्ता
- विशेषकर लड़कियों और वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों के लिए शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने के परिणामों में सुधार की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| महिलाओं की कम श्रम शक्ति भागीदारी | आर्थिक विकास की क्षमता का पूर्ण उपयोग न होना और लैंगिक आय असमानता। |
| बच्चों में कुपोषण | दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ, संज्ञानात्मक विकास में बाधा और भविष्य की उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव। |
| महिलाओं के विरुद्ध हिंसा | महिलाओं के मानवाधिकारों का उल्लंघन, उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव। |
| बाल विवाह और बाल श्रम | बच्चों के बचपन, शिक्षा और स्वस्थ विकास से वंचित होना, गरीबी के दुष्चक्र को बढ़ावा देना। |
| डिजिटल साक्षरता में लैंगिक अंतर | महिलाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था और सूचना तक पहुँच से वंचित करना, जिससे उनके सशक्तिकरण में बाधा आती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
- पोषण अभियान
- वन स्टॉप सेंटर योजना
- महिला शक्ति केंद्र योजना
- मिशन शक्ति
आगे की राह
- महिलाओं और बच्चों के लिए लक्षित नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए निवेश बढ़ाना।
- लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक मानदंडों और दृष्टिकोणों में बदलाव लाने हेतु जागरूकता अभियान चलाना।
- महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए कौशल विकास, उद्यमिता और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देना।
- बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके विरुद्ध हिंसा, शोषण तथा भेदभाव को रोकने के लिए कानूनी और संस्थागत ढाँचे को मजबूत करना।
- डेटा संग्रह और विश्लेषण में सुधार करना ताकि महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में प्रगति की निगरानी की जा सके और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण किया जा सके।
- स्थानीय समुदायों, नागरिक समाज संगठनों और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी को मजबूत करना ताकि महिला एवं बाल विकास के प्रयासों को व्यापक बनाया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
महिला सशक्तिकरण · बाल विकास · सरकारी योजनाएँ · लैंगिक समानता · पोषण · स्वास्थ्य · शिक्षा · सामाजिक न्याय · सतत विकास लक्ष्य · नीति निर्माण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 15’, ‘note’: ‘धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘छह से चौदह वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 23’, ‘note’: ‘मानव दुर्व्यापार और बलात् श्रम का प्रतिषेध।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 24’, ‘note’: ‘कारखानों आदि में बच्चों के नियोजन का प्रतिषेध।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(e) और (f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर और गरिमा प्रदान करना।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 42’, ‘note’: ‘काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं तथा प्रसूति सहायता का उपबंध।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करने तथा लोक स्वास्थ्य में सुधार।’}
अवधारणा प्रवाह
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का शिखर सम्मेलन आयोजित → महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा → नीतिगत सिफारिशों और रणनीतियों का निर्माण → प्रधानमंत्री की भागीदारी से उच्च-स्तरीय प्रतिबद्धता → महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण तथा कल्याण को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का गठन 1985 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक विभाग के रूप में किया गया था।
2. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का मुख्य उद्देश्य लिंगानुपात में सुधार और बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना है।
3. पोषण अभियान का लक्ष्य 0-6 वर्ष के बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण को कम करना है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को 2006 में एक पूर्ण मंत्रालय का दर्जा दिया गया था, हालांकि इसकी शुरुआत 1985 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत एक विभाग के रूप में हुई थी। कथन 2 और 3 सही हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना लिंगानुपात में सुधार और बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जबकि पोषण अभियान कुपोषण को कम करने के लिए एक बहु-मंत्रालयी अभिसरण मिशन है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण से संबंधित नहीं है?
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
- वन स्टॉप सेंटर योजना
- उज्ज्वला योजना (पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय)
- महिला शक्ति केंद्र योजना
उत्तर: उज्ज्वला योजना (पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय) — उज्ज्वला योजना (पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय) का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन (LPG) उपलब्ध कराना है, जिसका सीधा संबंध महिला सशक्तिकरण से नहीं है, हालांकि यह महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण पर अप्रत्यक्ष सकारात्मक प्रभाव डालती है। अन्य सभी योजनाएँ सीधे महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और कल्याण से संबंधित हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में महिला एवं बाल विकास के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या ये कदम लैंगिक समानता और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में पर्याप्त रहे हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: महिला एवं बाल विकास के महत्व और इस क्षेत्र में सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता पर संक्षिप्त प्रकाश डालें।
2. सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम: विभिन्न योजनाओं और नीतियों का उल्लेख करें, जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पोषण अभियान, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, वन स्टॉप सेंटर, महिला शक्ति केंद्र, मिशन शक्ति, मिशन वात्सल्य आदि। इनके उद्देश्यों और मुख्य प्रावधानों को संक्षेप में बताएं।
3. आलोचनात्मक परीक्षण (सफलताएँ और चुनौतियाँ):
a. सफलताएँ: लिंगानुपात में सुधार, संस्थागत प्रसव में वृद्धि, पोषण संकेतकों में आंशिक सुधार, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा में कमी लाने के प्रयास, शिक्षा तक पहुंच में वृद्धि आदि। संबंधित डेटा या रिपोर्टों का उल्लेख करें (जैसे NFHS डेटा)।
b. चुनौतियाँ: अभी भी व्याप्त लैंगिक असमानताएँ (आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक), कुपोषण की उच्च दर, बाल विवाह, बाल श्रम, महिलाओं के विरुद्ध अपराध, योजनाओं के क्रियान्वयन में कमियाँ, जागरूकता का अभाव, अंतर-मंत्रालयी समन्वय की समस्याएँ।
4. पर्याप्तता का मूल्यांकन: चर्चा करें कि क्या वर्तमान कदम लक्ष्यों को प्राप्त करने में पर्याप्त हैं या अधिक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता है। नीतिगत कमियों और क्रियान्वयन संबंधी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें।
5. निष्कर्ष: महिला एवं बाल विकास के लिए एक समग्र, बहु-आयामी और सतत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देते हुए आगे की राह सुझाएँ।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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