सितंबर 2026 के थोक मूल्य सूचकांक: सरकारी आंकड़े जारी

सितंबर 2026 के थोक मूल्य सूचकांक: सरकारी आंकड़े जारी

सितंबर 2026 के थोक मूल्य सूचकांक: सरकारी आंकड़े जारी

डब्ल्यूपीआई से पीपीआई की ओरथोक मूल्य सूचकांकमूल्य परिवर्तन मापअनंतिम सूचकांकप्रारंभिक आँकड़ेअंतिम सूचकांकपूर्ण आँकड़ेउत्पादक मूल्य सूचकांकउत्पादन स्तरसेवाओं सहितअंतरराष्ट्रीय मानक
डब्ल्यूपीआई से पीपीआई की ओर

✎ WPI (आधार वर्ष 2011-12) केवल वस्तुओं की थोक कीमतें मापता है और इसे DPIIT का आर्थिक सलाहकार कार्यालय जारी करता है; PPI उत्पादकों की प्राप्त कीमतें मापता है (आगत PPI अभी परीक्षण-स्तर पर); RBI का मुद्रास्फीति लक्ष्य CPI पर आधारित…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था: मुद्रास्फीति, मूल्य सूचकांक और आर्थिक आँकड़ों की संस्थागत व्यवस्था  |  GS Paper III — समावेशी संवृद्धि, उत्पादन एवं विनिर्माण क्षेत्र की लागत-संरचना  |  GS Paper II — शासन: साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण और सांख्यिकीय संस्थाएँ
  • Prelims: थोक मूल्य सूचकांक (WPI), उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI): निर्गत और आगत, आर्थिक सलाहकार का कार्यालय, DPIIT, आधार वर्ष 2011-12, प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन एवं विद्युत, विनिर्मित उत्पाद (WPI के तीन प्रमुख समूह), अनंतिम और अंतिम सूचकांक, WPI बनाम CPI, मुद्रास्फीति लक्ष्य: 4% (±2%), GDP अपस्फीतिक (Deflator)
  • Essay: मूल्य स्थिरता और आर्थिक संवृद्धि: उत्पादकों की लागत तथा उपभोक्ताओं की क्रय-शक्ति के बीच संतुलन, विश्वसनीय आँकड़े सुशासन की आधारशिला हैं: सांख्यिकीय सुधार और नीति-निर्माण

त्वरित पुनरावृत्ति: WPI (आधार वर्ष 2011-12) केवल वस्तुओं की थोक कीमतें मापता है और इसे DPIIT का आर्थिक सलाहकार कार्यालय जारी करता है; PPI उत्पादकों की प्राप्त कीमतें मापता है (आगत PPI अभी परीक्षण-स्तर पर); RBI का मुद्रास्फीति लक्ष्य CPI पर आधारित है: 4% (±2%)।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के अंतर्गत आर्थिक सलाहकार का कार्यालय हर माह थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index) जारी करता है। इस बार PIB की विज्ञप्ति में सितंबर 2026 के अनंतिम थोक मूल्य सूचकांक, निर्गत उत्पादक मूल्य सूचकांक (Output PPI) और परीक्षण-स्तर के आगत उत्पादक मूल्य सूचकांक (Input PPI) की जानकारी दी गई है। साथ ही जुलाई 2026 का अंतिम सूचकांक भी प्रकाशित किया गया है। उपलब्ध पाठ में केवल वेबसाइट का नेविगेशन मिलता है, सूचकांकों के आँकड़े नहीं, इसलिए यहाँ कोई संख्या नहीं दी गई है। परीक्षा के लिए इस समाचार का महत्त्व इसकी पद्धति में है: WPI के साथ PPI का परीक्षण-स्तर पर प्रकाशन, जो थोक स्तर पर मूल्य-मापन को उत्पादन-स्तर की कीमतों से जोड़ने की दिशा में एक कदम है।

पृष्ठभूमि

  • थोक मूल्य सूचकांक भारत में मूल्य-परिवर्तन मापने का सबसे पुराना सूचकांक है। वर्तमान शृंखला का आधार वर्ष 2011-12 है। इसे आर्थिक सलाहकार का कार्यालय संकलित करता है।
  • WPI तीन प्रमुख समूहों में बँटा है: प्राथमिक वस्तुएँ (भार 22.62%), ईंधन एवं विद्युत (13.15%) और विनिर्मित उत्पाद (64.23%)। प्राथमिक वस्तुओं में खाद्य वस्तुओं का उप-समूह भी आता है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित है। यह लक्ष्य RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZA के अंतर्गत केंद्र सरकार तय करती है: 4% (±2% की सहनशीलता सीमा के साथ)। इसलिए WPI का उपयोग मुख्यतः उत्पादन-स्तर की मूल्य-प्रवृत्ति परखने, अनुबंधों की मूल्य-समायोजन (Escalation) धाराओं और GDP अपस्फीतिक की गणना में होता है।
  • WPI की एक संरचनात्मक सीमा यह है कि इसमें सेवाएँ शामिल नहीं हैं और इसमें कुछ वस्तुओं की कीमतें कई चरणों में गिनी जाने का जोखिम रहता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय व्यवहार के अनुरूप उत्पादक मूल्य सूचकांक (Producer Price Index) लाने की आवश्यकता बताई गई।
  • WPI और PPI की पद्धति को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने कार्य समूह गठित किया था, जिसकी अध्यक्षता NITI Aayog के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने की। इसका उद्देश्य WPI का आधार वर्ष संशोधित करना और PPI की ओर बढ़ना था।
  • अनंतिम सूचकांक माह की समाप्ति के बाद उपलब्ध आरंभिक आँकड़ों पर बनता है। बाद में अधिक पूर्ण सूचनाएँ मिलने पर उसे संशोधित कर अंतिम रूप दिया जाता है। इसीलिए सितंबर का अनंतिम सूचकांक और जुलाई का अंतिम सूचकांक साथ-साथ जारी होते हैं।

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) क्या हैं?

  • थोक मूल्य सूचकांक: यह थोक स्तर पर वस्तुओं के संव्यवहार में औसत मूल्य-परिवर्तन मापता है। इसकी गणना आधार वर्ष की तुलना में की जाती है और मुद्रास्फीति (Inflation) की दर इसके वार्षिक प्रतिशत परिवर्तन से निकलती है। इसमें केवल वस्तुएँ शामिल हैं, सेवाएँ नहीं।
  • उत्पादक मूल्य सूचकांक: यह घरेलू उत्पादकों को अपनी वस्तुओं या सेवाओं की बिक्री पर मिलने वाली कीमतों में औसत परिवर्तन मापता है। यह उत्पादक के दृष्टिकोण से मूल्य मापता है, जबकि CPI उपभोक्ता के दृष्टिकोण से।
  • निर्गत PPI (Output PPI): यह उत्पादकों द्वारा बेचे गए उत्पादन (निर्गत) की कीमतों का सूचकांक है। इससे उद्योग-वार मूल्य-प्रवृत्ति और आपूर्ति शृंखला में उत्पादन-स्तर का मुद्रास्फीतिक दबाव समझा जाता है।
  • आगत PPI (Input PPI): यह उत्पादन में प्रयुक्त कच्चे माल और मध्यवर्ती वस्तुओं की कीमतों में परिवर्तन दर्शाता है। इस विज्ञप्ति में यह परीक्षण-स्तर (Trial) पर है, अर्थात पद्धति अभी परखी जा रही है और इसे अंतिम मानक सूचकांक नहीं माना जाना चाहिए।
  • अनंतिम बनाम अंतिम: सितंबर 2026 के आँकड़े अनंतिम हैं और भविष्य में संशोधित हो सकते हैं। जुलाई 2026 का सूचकांक अंतिम है और इसमें अब परिवर्तन नहीं होता।
  • WPI बनाम CPI: WPI थोक स्तर की कीमतें मापता है और इसमें सेवाएँ नहीं हैं। CPI खुदरा कीमतें मापता है और इसमें सेवाएँ भी आती हैं। CPI का संकलन सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) करता है, जबकि WPI का संकलन DPIIT के अंतर्गत आर्थिक सलाहकार का कार्यालय करता है।
  • नीतिगत उपयोग: आगत और निर्गत कीमतों का अंतर उत्पादकों के लाभ-मार्जिन पर दबाव या राहत का संकेत देता है। यदि आगत लागत बढ़कर निर्गत कीमतों में पूरी तरह नहीं पहुँचती, तो विनिर्माण क्षेत्र का मार्जिन घटता है। यदि वह पहुँचती है, तो आगे चलकर खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका रहती है।
  • सीमा: थोक कीमतें सदैव खुदरा कीमतों में एक-समान रूप से नहीं बदलतीं। इसलिए नीति-निर्माण में WPI, PPI और CPI को साथ पढ़ना आवश्यक है, किसी एक सूचकांक को अकेले निर्णायक मानना उचित नहीं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index – WPI): थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में परिवर्तन का मापक यह उत्पादक या थोक विक्रेता के स्तर पर मूल्य-दबाव का संकेत देता है। इसके तीन प्रमुख समूह हैं: प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन और विद्युत, तथा विनिर्मित उत्पाद। वर्तमान शृंखला का आधार वर्ष 2011-12 है।
प्रकाशन तंत्र: आर्थिक सलाहकार कार्यालय, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय मासिक आँकड़े आमतौर पर अगले माह की 14 तारीख को जारी होते हैं। इससे नीति-निर्माताओं, उद्योग और शोधकर्ताओं को लगभग वास्तविक समय की जानकारी मिलती है।
अनंतिम और अंतिम सूचकांक की दोहरी व्यवस्था (सितंबर 2026 का अनंतिम; जुलाई 2026 का अंतिम) अनंतिम आँकड़े शीघ्र उपलब्ध होते हैं। देर से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर लगभग 10 सप्ताह बाद उनका अंतिम रूप जारी होता है। इसलिए अनंतिम आँकड़ों को संशोधन-योग्य मानना चाहिए।
निर्गत उत्पादक मूल्य सूचकांक (Output PPI): उत्पादकों को मिलने वाली कीमतों का मापक यह WPI की तुलना में बहुस्तरीय गणना (Cascading) की समस्या को घटाने की दिशा में एक अवधारणात्मक सुधार है। इसमें उत्पादन के मूल्य-परिवर्तन पर ध्यान रहता है।
आदान उत्पादक मूल्य सूचकांक (Input PPI): परीक्षणात्मक (Trial) आधार पर जारी यह उत्पादन में लगने वाले कच्चे माल और मध्यवर्ती वस्तुओं की लागत-प्रवृत्ति बताता है। इससे लागत-जनित मुद्रास्फीति (Cost-push Inflation) का पूर्वानुमान संभव होता है। ‘परीक्षणात्मक’ का अर्थ है कि पद्धति अभी परिष्कृत हो रही है।
WPI की सीमा: करों और सेवाओं का बहिष्करण WPI में अप्रत्यक्ष कर शामिल नहीं होते और सेवाएँ भी इसके दायरे से बाहर हैं। इसलिए यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का विकल्प नहीं, पूरक है। इसी कारण PPI की ओर संक्रमण की चर्चा होती है।

महत्व

आर्थिक महत्त्व

  • WPI उत्पादन-स्तर की कीमतों का संकेतक है और अक्सर खुदरा मुद्रास्फीति का अग्रगामी सूचक माना जाता है। थोक कीमतों का दबाव बाद में खुदरा कीमतों में दिख सकता है।
  • सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अवस्फीतिकारक (Deflator) की गणना और राष्ट्रीय लेखा में स्थिर कीमतों पर आँकड़े निकालने में थोक/उत्पादक कीमतों के आँकड़े काम आते हैं।
  • उद्योग और व्यापार के लिए अनुबंधों में मूल्य-समायोजन (Price Variation Clause) प्रायः WPI पर आधारित होता है, इसलिए यह संविदात्मक लेन-देन में भी उपयोगी है।

नीतिगत और संस्थागत महत्त्व

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का मौद्रिक नीति ढाँचा मुख्यतः CPI पर आधारित है (लक्ष्य 4 प्रतिशत, ±2 प्रतिशत की सीमा)। फिर भी WPI और PPI से आपूर्ति-पक्ष के दबावों और लागत-प्रवृत्ति का आकलन होता है।
  • सरकार को ईंधन, उर्वरक और धातुओं जैसे क्षेत्रों में शुल्क, कर और आपूर्ति-संबंधी हस्तक्षेप तय करने के लिए मूल्य-संकेत मिलते हैं।
  • समयबद्ध और पारदर्शी आँकड़ा-प्रकाशन ‘साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण’ को मज़बूत करता है।

सांख्यिकीय सुधार संबंधी महत्त्व

  • Output PPI और Input PPI की शुरुआत भारत के मूल्य-सांख्यिकी तंत्र को अंतरराष्ट्रीय मानकों के निकट ले जाने का प्रयास है।
  • आदान और निर्गत कीमतों की तुलना से विभिन्न क्षेत्रों में लागत-वृद्धि के उपभोक्ताओं तक संचरण (Pass-through) और उत्पादकों के मार्जिन पर दबाव को समझा जा सकता है।
  • PPI के माध्यम से बहुस्तरीय गणना घटने से क्षेत्रवार मूल्य-परिवर्तन का अधिक सटीक चित्र मिलने की संभावना बनती है।

चुनौतियाँ

1. अनंतिम आँकड़ों का संशोधन

  • अनंतिम सूचकांक बाद में अंतिम आँकड़ों में बदलते हैं, इसलिए प्रारंभिक प्रवृत्ति के आधार पर किए गए निर्णय भ्रामक हो सकते हैं।
  • बाज़ार, मीडिया और नीति-विश्लेषण में अनंतिम आँकड़ों को अंतिम मान लेने की प्रवृत्ति रहती है।

2. WPI और CPI के बीच अंतर

  • WPI में सेवाएँ और कर शामिल नहीं हैं, जबकि उपभोक्ता के लिए सेवाओं का हिस्सा बड़ा है।
  • दोनों सूचकांकों की वस्तु-टोकरी और भार भिन्न हैं, इसलिए उनकी दिशा और परिमाण में अंतर रहता है और जनता में भ्रम पैदा होता है।

3. आधार वर्ष और टोकरी का पुराना पड़ना

  • वर्तमान WPI शृंखला 2011-12 आधार पर है। उपभोग और उत्पादन-संरचना में बदलाव के साथ भार और वस्तु-सूची की प्रासंगिकता घटती है।
  • नई वस्तुओं और गुणवत्ता-परिवर्तन को समय पर शामिल करना कठिन होता है।

4. PPI अपनाने में पद्धतिगत कठिनाइयाँ

  • PPI के लिए उत्पादकों से व्यापक और नियमित मूल्य-आँकड़े चाहिए, जबकि अनौपचारिक क्षेत्र और छोटी इकाइयों से आँकड़े जुटाना कठिन है।
  • सेवाओं के लिए मूल्य-संग्रहण और गुणवत्ता-समायोजन जटिल है।
  • Input PPI अभी परीक्षणात्मक चरण में है, अतः उसके आँकड़ों का उपयोग सावधानी से करना होगा।

5. आपूर्ति-पक्ष के झटके और वैश्विक कारक

  • कच्चे तेल, धातुओं और खाद्य वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमतों तथा विनिमय दर का सीधा असर थोक कीमतों पर पड़ता है।
  • मौसम और कृषि उत्पादन में अस्थिरता से प्राथमिक वस्तुओं की कीमतें तेज़ी से बदलती हैं, जिससे सूचकांक में उतार-चढ़ाव आता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अनंतिम बनाम अंतिम आँकड़े संशोधन के कारण प्रारंभिक प्रवृत्ति पर आधारित निर्णय गलत दिशा ले सकते हैं।
WPI बनाम CPI का अंतर सेवाओं और करों के बहिष्करण से WPI उपभोक्ता के वास्तविक अनुभव को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
आधार वर्ष 2011-12 बदली हुई अर्थव्यवस्था की संरचना का सही प्रतिनिधित्व न होने का जोखिम।
PPI में आँकड़ा संग्रहण अनौपचारिक क्षेत्र और सेवाओं से विश्वसनीय मूल्य-आँकड़े जुटाना कठिन।
Input PPI की परीक्षणात्मक स्थिति पद्धति स्थिर होने तक नीतिगत निर्णयों में इसके उपयोग की सीमा।
बाह्य और मौसमी झटके कच्चे तेल, विनिमय दर और कृषि-उत्पादन में उतार-चढ़ाव से सूचकांक अस्थिर।

आगे की राह

  • WPI के आधार वर्ष का समयबद्ध संशोधन करके उसे अद्यतन उत्पादन-संरचना के अनुरूप बनाना।
  • Output PPI और Input PPI को चरणबद्ध ढंग से परीक्षणात्मक चरण से नियमित प्रकाशन तक ले जाना और अंततः सेवाओं को भी शामिल करना।
  • उत्पादकों से मूल्य-आँकड़ों के स्वैच्छिक और डिजिटल संग्रहण के लिए GST और उद्यम-स्तरीय प्रशासनिक आँकड़ों का सुरक्षित उपयोग करना।
  • अनंतिम से अंतिम सूचकांक के संशोधन की मात्रा का नियमित प्रकाशन करना, ताकि उपयोगकर्ता आँकड़ों की विश्वसनीयता का आकलन कर सकें।
  • WPI, PPI और CPI के बीच संबंध समझाने वाली पद्धति-टिप्पणियाँ जारी करना, ताकि जनता और उद्योग में भ्रम घटे।
  • सूचकांक-आधारित अनुबंधों में PPI की उपयुक्तता का आकलन करके उद्योग को क्रमिक संक्रमण का मार्गदर्शन देना।
  • आपूर्ति-पक्ष के झटकों से निपटने के लिए भंडारण, आयात-विविधीकरण और कृषि-आपूर्ति शृंखला में सुधार करना।
  • सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय तथा आर्थिक सलाहकार कार्यालय के बीच समन्वय बढ़ाकर मूल्य-सांख्यिकी का एकीकृत ढाँचा बनाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) · उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) · आगत एवं निर्गत मूल्य सूचकांक · लागत-जनित मुद्रास्फीति · आधार वर्ष (2011-12) · आर्थिक सलाहकार कार्यालय (DPIIT) · उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से अंतर · मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण · प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन एवं विनिर्मित उत्पाद · आपूर्ति-पक्ष दबाव · मूल्य-शृंखला में संचरण · आँकड़ों की विश्वसनीयता एवं संशोधन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • संघ सूची, प्रविष्टि 94 (सातवीं अनुसूची): संघ विषयों हेतु सर्वेक्षण, सांख्यिकी

अवधारणा प्रवाह

कच्चे माल, ऊर्जा और कृषि-उत्पादों की कीमतों में परिवर्तन (आदान लागत)  →  Input PPI उत्पादन-लागत में बदलाव का संकेत देता है  →  उत्पादक लागत का कुछ भाग निर्गत कीमतों में आगे बढ़ाते हैं, जो Output PPI और WPI में दिखता है  →  थोक कीमतों का दबाव समय के साथ खुदरा कीमतों और CPI तक पहुँचता है  →  अनंतिम सूचकांक का प्रकाशन और बाद में नई सूचनाओं से अंतिम सूचकांक में संशोधन  →  RBI और सरकार मौद्रिक और राजकोषीय निर्णयों में इन संकेतों का उपयोग करते हैं  →  आधार वर्ष संशोधन और PPI अपनाने से आँकड़ा-गुणवत्ता में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. WPI का संकलन एवं प्रकाशन उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अंतर्गत आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा किया जाता है।
2. WPI की टोकरी में वस्तुओं के साथ सेवाओं की कीमतें भी सम्मिलित हैं।
3. WPI की वर्तमान शृंखला का आधार वर्ष 2011-12 है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: WPI आर्थिक सलाहकार कार्यालय (DPIIT, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय) जारी करता है। कथन 2 गलत है: WPI केवल वस्तुओं की कीमतें मापता है, सेवाएँ इसमें शामिल नहीं हैं। कथन 3 सही है: वर्तमान शृंखला का आधार वर्ष 2011-12 है।

Q2. अभिकथन (A): WPI-आधारित मुद्रास्फीति और CPI-आधारित मुद्रास्फीति की दरों में प्रायः अंतर दिखाई देता है।
कारण (R): WPI थोक स्तर पर केवल वस्तुओं की कीमतों को मापता है, जबकि CPI खुदरा कीमतों को मापता है और उसमें सेवाएँ भी सम्मिलित होती हैं।
सही विकल्प चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  2. A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
  3. A सही है, परंतु R गलत है
  4. A गलत है, परंतु R सही है

उत्तर: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है — दोनों कथन सही हैं। कीमत के स्तर (थोक बनाम खुदरा) और टोकरी की संरचना (केवल वस्तुएँ बनाम वस्तुएँ व सेवाएँ) में अंतर के कारण WPI तथा CPI की मुद्रास्फीति दरें भिन्न रहती हैं। इसलिए R, A की सही व्याख्या है।

Q3. WPI (आधार वर्ष 2011-12) के प्रमुख समूहों को उनके भारांश से सुमेलित कीजिए:
स्तंभ-I (समूह): A. प्राथमिक वस्तुएँ B. ईंधन एवं विद्युत C. विनिर्मित उत्पाद
स्तंभ-II (लगभग भारांश): 1. 64.23% 2. 22.62% 3. 13.15%

  1. A-2, B-3, C-1
  2. A-1, B-2, C-3
  3. A-3, B-1, C-2
  4. A-2, B-1, C-3

उत्तर: A-2, B-3, C-1 — WPI में प्राथमिक वस्तुओं का भारांश लगभग 22.62%, ईंधन एवं विद्युत का 13.15% और विनिर्मित उत्पादों का 64.23% है। इसलिए विनिर्मित उत्पादों में कीमत-परिवर्तन का WPI पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के साथ निर्गत एवं आगत उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) का प्रायोगिक प्रकाशन मूल्य-आँकड़ों के ढाँचे में किस परिवर्तन का संकेत है? WPI की सीमाओं के संदर्भ में PPI की उपयोगिता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए तथा बताइए कि PPI को मुद्रास्फीति की नीतिगत निगरानी का सक्षम आधार बनाने के लिए क्या कदम आवश्यक हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: भूमिका: आर्थिक सलाहकार कार्यालय (DPIIT) प्रत्येक माह WPI का अनंतिम सूचकांक जारी करता है और दो माह पूर्व का अंतिम सूचकांक भी जारी करता है। अब इसके साथ निर्गत PPI और परीक्षण-स्तर का आगत PPI भी जारी हो रहा है।

भाग 1 – WPI की संरचना और सीमाएँ: आधार वर्ष 2011-12; तीन समूह – प्राथमिक वस्तुएँ (लगभग 22.62%), ईंधन एवं विद्युत (13.15%), विनिर्मित उत्पाद (64.23%)। केवल वस्तुएँ, सेवाएँ नहीं। लेन-देन की कीमत के बजाय थोक कीमत पर आधारित। एक ही वस्तु की कीमत कई चरणों में गिनी जाने (बहु-गणन) की समस्या। कर, व्यापार एवं परिवहन मार्जिन के कारण उत्पादक को वास्तव में मिलने वाली कीमत से अंतर। राष्ट्रीय लेखा (GVA/GDP अपस्फीतिकारक) से सीधा मेल नहीं।

भाग 2 – PPI की अवधारणा और लाभ: निर्गत PPI उत्पादक को मिलने वाली कीमत मापता है; आगत PPI उत्पादकों द्वारा खरीदे जाने वाले आगतों की कीमत मापता है। आगत PPI से लागत-जनित दबाव का अग्रिम संकेत मिलता है और मूल्य-संचरण (आगत से निर्गत और फिर CPI तक) का विश्लेषण संभव होता है। PPI में सेवाओं को जोड़ने की गुंजाइश है। राष्ट्रीय लेखा के अपस्फीतिकारक और आपूर्ति-उपयोग तालिकाओं से बेहतर तालमेल बनता है। अंतरराष्ट्रीय मानक (IMF/ILO का PPI मैनुअल) के अनुरूपता से तुलना सुगम होती है। संदर्भ: WPI की संशोधन-प्रक्रिया में रमेश चंद की अध्यक्षता वाले कार्यसमूह (2017) ने PPI की ओर बढ़ने की सिफारिश की थी (संक्षेप में उल्लेख)।

भाग 3 – चुनौतियाँ: उद्योगों के आँकड़ों के लिए इकाइयों की स्वैच्छिक भागीदारी और आँकड़ों की गुणवत्ता। सेवाओं की कीमत के मापन की जटिलता। भारांश-निर्धारण के लिए नवीनतम आपूर्ति-उपयोग तालिका और आधार वर्ष का अद्यतन होना। प्रारंभिक और अंतिम आँकड़ों में संशोधन की समस्या। निरंतरता बनाए रखने के लिए WPI और PPI का समानांतर प्रकाशन।

भाग 4 – CPI से संबंध और नीतिगत आयाम: RBI का मुद्रास्फीति लक्ष्य CPI (संयुक्त) पर आधारित है (RBI अधिनियम की धारा 45ZA; लक्ष्य 4% ± 2%; उर्जित पटेल समिति 2014 की सिफारिश के अनुरूप)। PPI इस लक्ष्य का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक सूचक है।

आगे की राह: परीक्षण-चरण की अवधि में आँकड़ों का सार्वजनिक परामर्श, आधार वर्ष का संशोधन, उद्योग-स्तर पर पंजीकरण और डिजिटल रिपोर्टिंग (जैसे GST और उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण के आँकड़ों का उपयोग), पद्धति की पारदर्शिता, चरणबद्ध संक्रमण।

निष्कर्ष: PPI मूल्य-आँकड़ों को अधिक विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक बनाता है, पर उसकी सफलता आँकड़ों की गुणवत्ता तथा संक्रमण की स्पष्टता पर निर्भर है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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