गृह लक्ष्मी योजना: ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव की प्रेरक कहानियाँ

गृह लक्ष्मी योजना: ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव की प्रेरक कहानियाँ

गृह लक्ष्मी योजना: ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव की प्रेरक कहानियाँ

गृह लक्ष्मी योजना का संचालननीति घोषणाराज्य सरकार द्वाराDBT द्वाराबैंक खाते मेंराशि का उपयोगशिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविकाआर्थिक सशक्तिकरणनिर्णय-क्षमता, सम्मान
गृह लक्ष्मी योजना का संचालन

✎ गृह लक्ष्मी जैसी नकद अंतरण योजनाएँ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से महिलाओं की क्रय-शक्ति और निर्णय-क्षमता बढ़ाती हैं, पर उनकी सार्थकता राजकोषीय संतुलन और राशि के उत्पादक उपयोग पर निर्भर करती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन और सामाजिक न्याय: महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाएँ, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और उनका लक्षित क्रियान्वयन  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था: समावेशी आर्थिक संवृद्धि, वित्तीय समावेशन, स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण आजीविका
  • Prelims: ग्रह लक्ष्मी योजना (Gruha Lakshmi Scheme) — कर्नाटक सरकार की नकद अंतरण योजना, जिसमें परिवार की मुखिया महिला को मासिक राशि दी जाती है, शक्ति योजना (Shakti Scheme) — कर्नाटक में महिलाओं के लिए राज्य सरकार की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer — DBT) और इसका मध्यस्थ-मुक्त स्वरूप, स्वयं सहायता समूह (Self-Help Group — SHG) और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), चिट फंड अधिनियम, 1982 (Chit Funds Act, 1982) — चिट फंड का नियमन, अनुच्छेद 39 (क) — पुरुषों और महिलाओं के लिए समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन (राज्य नीति का निदेशक तत्व), अनुच्छेद 15(3) — महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष उपबंध, संविधान का 73वाँ संशोधन — पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण
  • Essay: नकद अंतरण बनाम सेवा-आधारित कल्याण: महिलाओं के सशक्तीकरण में सरकारी हस्तक्षेप की भूमिका, महिला-नेतृत्व वाला विकास: परिवार की आय और शिक्षा-स्वास्थ्य पर प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: गृह लक्ष्मी जैसी नकद अंतरण योजनाएँ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से महिलाओं की क्रय-शक्ति और निर्णय-क्षमता बढ़ाती हैं, पर उनकी सार्थकता राजकोषीय संतुलन और राशि के उत्पादक उपयोग पर निर्भर करती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

कर्नाटक में गृह लक्ष्मी योजना के तीन वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु में लाभार्थी महिलाओं से संवाद किया। इस संवाद में ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि मासिक नकद राशि से उन्होंने बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च उठाया, बुजुर्ग महिलाओं को दवाइयाँ मिलीं, और स्वयं सहायता समूहों ने पशुपालन और हस्तशिल्प जैसे आजीविका के काम शुरू किए। शक्ति योजना के तहत निःशुल्क बस यात्रा से बच्चों से मिलने-जाने की सुविधा भी बढ़ी। सरकार ने योजना जारी रखने की बात कही और लाभार्थियों को उच्च ब्याज वाले ऋण देने या चिट फंड कारोबार में राशि लगाने से मना किया। बताया गया कि अब तक योजना पर लगभग 86,000 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और 1 लाख करोड़ रुपये पूरे होने पर सभी जिलों में गृह लक्ष्मी सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा हुई है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में नकद अंतरण की नीति का विकास प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से हुआ, जिसमें सब्सिडी या भुगतान सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुँचाया जाता है। इससे रिसाव और बिचौलियों की भूमिका घटाने का लक्ष्य रहा।
  • संविधान के अनुच्छेद 39 (क) में राज्य से अपेक्षा की गई है कि वह पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए जीविका के पर्याप्त साधन सुनिश्चित करे। अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं के लिए विशेष उपबंध बनाने की अनुमति देता है।
  • ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक संगठन का प्रमुख माध्यम स्वयं सहायता समूह हैं, जिनका राष्ट्रीय ढाँचा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत विकसित हुआ है। समूह-आधारित बचत और ऋण से महिलाओं की वित्तीय पहुँच बढ़ी है।
  • चिट फंड और साहूकारी ऋण का अनौपचारिक क्षेत्र ग्रामीण परिवारों के लिए जोखिमपूर्ण माना जाता है। इसी कारण ऐसे कारोबारों का नियमन चिट फंड अधिनियम, 1982 और राज्यों के अपने कानूनों के माध्यम से किया जाता है।
  • कर्नाटक की गृह लक्ष्मी और शक्ति जैसी योजनाएँ चुनावी घोषणा-पत्र से होकर सरकारी नीति का हिस्सा बनीं। ऐसी योजनाओं का मूल्यांकन सामान्यतः राजकोषीय व्यवस्था, लक्षित लाभार्थियों और परिणामों के आधार पर किया जाता है।

गृह लक्ष्मी योजना क्या है?

  • गृह लक्ष्मी योजना कर्नाटक सरकार की एक नकद अंतरण योजना है, जिसके अंतर्गत परिवार की मुखिया महिला को प्रति माह निश्चित राशि उसके बैंक खाते में दी जाती है।
  • यह योजना महिलाओं के हाथ में क्रय-शक्ति और निर्णय-क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई, ताकि घरेलू और पारिवारिक निर्णयों में उनकी भूमिका मजबूत हो।
  • शक्ति योजना के अंतर्गत राज्य की सार्वजनिक बसों में महिलाओं को निःशुल्क यात्रा की सुविधा मिलती है। इससे परिवहन-लागत घटती है और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार तक महिलाओं की पहुँच बढ़ती है।
  • नकद अंतरण के उपयोग में लचीलापन होता है, इसलिए लाभार्थी शिक्षा, दवा, छोटे उद्यम और समूह-आधारित पशुपालन जैसे कार्यों में राशि लगा सकती हैं।
  • आर्थिक दृष्टि से नियमित नकद आय उपभोग को स्थिर रखती है और स्थानीय बाज़ार में मांग बढ़ाती है, जिससे छोटे व्यवसायों को सहारा मिलता है।
  • नीतिगत चुनौतियों में राजकोषीय भार, राशि का उत्पादक उपयोग सुनिश्चित करना और लाभार्थियों को उच्च ब्याज वाले ऋण या जोखिमपूर्ण निवेश से बचाना शामिल हैं।
  • योजना के मूल्यांकन के लिए लाभार्थियों की संख्या, कुल व्यय, उपयोग के स्वरूप और स्वयं सहायता समूहों के आर्थिक परिणामों जैसे संकेतकों का अध्ययन किया जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
योजना का स्वरूप कर्नाटक सरकार की गृह लक्ष्मी योजना में पात्र महिलाओं के खाते में मासिक नकद राशि सीधे जमा की जाती है, जिससे परिवार के भीतर महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता बढ़ती है।
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) का उपयोग लाभ सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुँचता है, इसलिए बिचौलियों की भूमिका घटती है और रिसाव की संभावना कम होती है।
व्यय की स्थिति तीन वर्ष के क्रियान्वयन में लगभग ₹86,000 करोड़ व्यय हुआ है, जो राज्य के बजट में इस योजना के बड़े आकार को दर्शाता है।
शक्ति योजना के साथ संबंध राज्य की शक्ति योजना के अंतर्गत महिलाओं को सार्वजनिक बस में निःशुल्क यात्रा की सुविधा मिलती है। इससे गतिशीलता बढ़ती है और नकद सहायता के साथ मिलकर महिलाओं के जीवन-स्तर पर संयुक्त प्रभाव पड़ता है।
उपयोग के वास्तविक उदाहरण लाभार्थियों ने इस राशि से बच्चों की उच्च शिक्षा, चिकित्सा, पशुपालन और हस्तशिल्प जैसे उत्पादक कार्यों में निवेश किया, जो सामाजिक और आर्थिक दोनों लाभों का संकेत देता है।
मूल्यांकन का तरीका मुख्यमंत्री द्वारा लाभार्थियों के साथ सीधे संवाद से नीति-प्रतिक्रिया (Policy Feedback) की प्रक्रिया दिखती है, जो सुशासन का एक उपयोगी साधन है।

महत्व

सामाजिक महत्त्व

  • महिलाओं के सशक्तीकरण में नकद सहायता से परिवार में निर्णय-क्षमता और सम्मान बढ़ने की संभावना रहती है।
  • वृद्ध महिलाओं द्वारा दवाओं की खरीद के उदाहरण से स्वास्थ्य-व्यय में आत्मनिर्भरता का संकेत मिलता है।
  • बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए धन जुटाने से मानव पूंजी (Human Capital) के निर्माण में योगदान होता है।

आर्थिक महत्त्व

  • नकद अंतरण से ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग माँग बढ़ती है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देती है।
  • स्वयं सहायता समूहों द्वारा सामूहिक निवेश से पशुपालन जैसे आजीविका-आधारित उद्यम विकसित होते हैं, जैसे पाँच भेड़ों से 300 भेड़ों तक का विस्तार।
  • सूक्ष्म उद्यमिता और रोजगार सृजन (पाँच पुरुषों को रोजगार) के उदाहरण ग्रामीण आजीविका के विविधीकरण को दर्शाते हैं।

शासन और प्रशासनिक महत्त्व

  • लाभार्थियों से सीधा संवाद और प्रतिक्रिया लेना नीति-निर्माण में सहभागी शासन (Participatory Governance) का उदाहरण है।
  • योजना की उपलब्धियों को मात्रात्मक आँकड़ों के साथ सार्वजनिक करना पारदर्शिता को बढ़ाता है।

चुनौतियाँ

1. राजकोषीय स्थिरता

  • बड़े पैमाने पर नकद अंतरण से राज्य के बजट पर दीर्घकालिक दबाव पड़ता है और राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) प्रभावित हो सकता है।
  • योजना की निरंतरता के लिए राजस्व स्रोतों का स्थायी आधार आवश्यक है, अन्यथा अन्य विकास व्यय पर असर पड़ सकता है।

2. उत्पादक उपयोग बनाम उपभोग

  • नकद सहायता का उपयोग उपभोग तक सीमित रहे या पूँजी-निर्माण और आजीविका में भी हो, यह बहस का विषय है।
  • लाभार्थियों द्वारा ऊँची ब्याज दर पर ऋण देने या चिट फंड में राशि लगाने से वित्तीय जोखिम बढ़ सकता है।

3. वित्तीय साक्षरता और असंगठित ऋण

  • ग्रामीण महिलाओं में वित्तीय साक्षरता का स्तर असमान है, जिससे अनौपचारिक ऋणदाताओं के शोषण की आशंका रहती है।
  • औपचारिक बैंकिंग और सूक्ष्म वित्त संस्थाओं तक पहुँच बढ़ाए बिना नकद सहायता का दीर्घकालिक प्रभाव सीमित हो सकता है।

4. लक्ष्यीकरण और समावेशन की चुनौती

  • पात्रता के मानदंड, आधार-सत्यापन और डिजिटल पहुँच से कुछ वास्तविक पात्र महिलाएँ छूट सकती हैं।
  • शहरी और ग्रामीण, तथा विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच लाभ-वितरण की समानता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

5. प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन

  • वर्तमान प्रमाण मुख्यतः लाभार्थियों के व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित हैं; स्वतंत्र और मात्रात्मक मूल्यांकन की कमी है।
  • रोजगार, विद्यालयी उपस्थिति और स्वास्थ्य संकेतकों पर दीर्घकालिक प्रभाव का अध्ययन नीति-सुधार के लिए आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता का विषय
राजकोषीय दबाव लगभग ₹86,000 करोड़ के व्यय के बाद दीर्घकालिक वित्तीय संतुलन और राजस्व स्रोतों की स्थिरता का प्रश्न।
ऊँची ब्याज वाले ऋण और चिट फंड नकद राशि का अनौपचारिक ऋण या चिट फंड में उपयोग होने से लाभार्थियों पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है।
वित्तीय साक्षरता का अभाव सीमित वित्तीय ज्ञान के कारण बचत और निवेश के सही विकल्प चुनना कठिन हो सकता है।
पात्रता और सत्यापन तकनीकी बाधाओं या दस्तावेज़ों की कमी से वास्तविक जरूरतमंद महिलाएँ योजना से वंचित रह सकती हैं।
मूल्यांकन के स्वतंत्र प्रमाण उपलब्धियों का आकलन मुख्यतः व्यक्तिगत कहानियों पर आधारित है, इसलिए नीति-सुधार हेतु ठोस आँकड़ों की कमी है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • गृह लक्ष्मी योजना (Gruha Lakshmi Scheme) – कर्नाटक
  • शक्ति योजना (Shakti Scheme) – कर्नाटक

आगे की राह

  • नकद सहायता के साथ वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम जोड़े जाएँ, ताकि राशि का उपयोग बचत, शिक्षा और उत्पादक निवेश में हो।
  • स्वयं सहायता समूहों को औपचारिक बैंकिंग और सूक्ष्म वित्त संस्थाओं से जोड़ा जाए, जिससे ऊँची ब्याज वाले अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता घटे।
  • चिट फंड और अनौपचारिक ऋण संबंधी नियमों के प्रवर्तन को सुदृढ़ किया जाए तथा लाभार्थियों को इनके जोखिमों से अवगत कराया जाए।
  • राजकोषीय योजना में योजना-व्यय के लिए स्पष्ट दीर्घकालिक प्रावधान हों और इसे राज्य के बजट के समग्र ढाँचे में संतुलित रखा जाए।
  • पात्रता सत्यापन की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनाई जाए, ताकि वास्तविक पात्र महिलाएँ बाहर न रहें।
  • योजना के प्रभाव का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आय से जुड़े संकेतकों का नियमित मापन हो।
  • शक्ति जैसी सहायक योजनाओं के साथ समन्वय करके गतिशीलता, रोजगार और सेवाओं तक पहुँच को एकीकृत रूप में देखा जाए।
  • लाभार्थी-प्रतिक्रिया की संस्थागत व्यवस्था बने, ताकि नीति में सुधार निरंतर और साक्ष्य-आधारित रहे।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

लाभार्थी-केंद्रित कल्याण (Beneficiary-centric Welfare) · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer, DBT) · महिला सशक्तिकरण (Women’s Empowerment) · स्वयं सहायता समूह (Self-Help Group, SHG) · लैंगिक बजट (Gender Budgeting) · राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) · राजकोषीय उत्तरदायित्व (Fiscal Responsibility) · मुफ्त उपहार बनाम कल्याणकारी व्यय (Freebies vs Welfare Expenditure) · सूक्ष्म वित्त और अनौपचारिक ऋण (Microfinance and Informal Credit) · अनुच्छेद 15(3) (Article 15(3)) · अनुच्छेद 293 (Article 293) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 15(3) – महिलाओं के लिए विशेष उपबंध की अनुमति
  • अनुच्छेद 39(क) – पर्याप्त जीविका के साधनों का नीति-निदेश

अवधारणा प्रवाह

राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के लिए मासिक नकद सहायता की नीति घोषित और लागू की जाती है।  →  प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से राशि सीधे पात्र महिलाओं के बैंक खातों में जमा होती है।  →  महिलाएँ इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पशुपालन और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में करती हैं।  →  स्वयं सहायता समूह सामूहिक निवेश से आजीविका उद्यम बढ़ाते हैं, जिससे रोजगार और आय में वृद्धि होती है।  →  आय और उपभोग बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक संकेतकों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।  →  इन प्रभावों के साथ राजकोषीय स्थिरता, वित्तीय साक्षरता और स्वतंत्र मूल्यांकन की चुनौतियाँ भी सामने आती हैं।  →  लाभार्थी-प्रतिक्रिया और साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन से नीति में सुधार होता है और योजना की निरंतरता का निर्णय लिया जाता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष उपबंध बनाने की शक्ति देता है।
2. संविधान का अनुच्छेद 282 केंद्र या राज्य को केवल उन्हीं सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए अनुदान देने की अनुमति देता है जो उसकी विधायी सक्षमता के भीतर हों, और इसके लिए वित्त आयोग की पूर्व सिफारिश अनिवार्य है।
3. अनुच्छेद 293 के अंतर्गत राज्य भारत के भीतर उधार ले सकता है, किंतु केवल अपनी संचित निधि की प्रतिभूति पर और ऐसी सीमाओं के अधीन जो राज्य विधानमंडल तय करे, यदि कोई हो।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 15(3) महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष उपबंध की अनुमति देता है। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 282 के अनुदान विधायी सक्षमता तक सीमित नहीं हैं, और इनके लिए वित्त आयोग की पूर्व सिफारिश आवश्यक नहीं है। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 293(1) राज्य के उधार की शर्तें बताता है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): नकद अंतरण यदि महिलाओं के माध्यम से दिया जाए, तो परिवारों में बच्चों की शिक्षा पर व्यय बढ़ने की प्रवृत्ति पाई गई है।
कारण (R): जब आय पर महिलाओं का नियंत्रण होता है, तो उस आय का अधिक हिस्सा बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर व्यय होता है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:

  1. (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (b) (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (c) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (d) (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — नकद अंतरण पर अनेक अध्ययनों में पाया गया है कि महिलाओं के हाथ में आय होने पर परिवार के बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर व्यय अपेक्षाकृत अधिक होता है। यह प्रवृत्ति (R) के तर्क से सीधे जुड़ती है, इसलिए (R) (A) की व्याख्या करता है। सामान्य परिस्थितियों में यही उत्तर सही माना जाता है।

Q3. निम्नलिखित सुमेलन सूची पर विचार कीजिए:
सूची I (संवैधानिक उपबंध)
A. अनुच्छेद 39(क)
B. अनुच्छेद 39(घ)
C. अनुच्छेद 47
D. अनुच्छेद 282

सूची II (विषय)
1. पुरुषों और महिलाओं के लिए समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन
2. पुरुषों और महिलाओं के लिए समान कार्य हेतु समान वेतन
3. पोषण स्तर और जन-स्वास्थ्य का उन्नयन राज्य का कर्तव्य
4. केंद्र या राज्य द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन हेतु अनुदान

सही सुमेलन चुनिए:

  1. A-1, B-2, C-3, D-4
  2. A-2, B-1, C-4, D-3
  3. A-1, B-3, C-2, D-4
  4. A-4, B-2, C-3, D-1

उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — अनुच्छेद 39(क) पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन सुनिश्चित करने का निर्देश देता है। अनुच्छेद 39(घ) समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत है। अनुच्छेद 47 पोषण और जन-स्वास्थ्य के उन्नयन का कर्तव्य देता है। अनुच्छेद 282 केंद्र और राज्य द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन हेतु अनुदान की व्यवस्था करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ प्रत्यक्ष नकद अंतरण योजनाएँ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में कितनी प्रभावी हो सकती हैं, इस पर समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि ऐसी योजनाओं को राज्य के वित्तीय संतुलन को क्षति पहुँचाए बिना चलाने के लिए कौन-से वित्तीय और संस्थागत सुरक्षा-उपाय आवश्यक हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर-संरचना (Model-Answer Skeleton):
1. भूमिका: कर्नाटक की गृह लक्ष्मी योजना (तीन वर्ष पूरे, अब तक लगभग ₹86,000 करोड़ व्यय) जैसे उदाहरण से प्रश्न का संदर्भ स्थापित करें। यह भी स्पष्ट करें कि लाभार्थियों के अनुभव गुणात्मक साक्ष्य हैं, जिन्हें व्यापक मूल्यांकन के रूप में नहीं देखा जा सकता।
2. सशक्तिकरण का पक्ष: अनुच्छेद 15(3) (महिलाओं के लिए विशेष उपबंध), अनुच्छेद 39(क) (पर्याप्त जीविका के साधन) और अनुच्छेद 39(घ) (समान वेतन) का संवैधानिक आधार। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से लीकेज में कमी और महिलाओं के हाथ में आय का नियंत्रण। स्वयं सहायता समूह (SHG) और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के साथ तालमेल से उत्पादक उपयोग (जैसे भेड़पालन, हस्तशिल्प) के उदाहरण। शिक्षा और स्वास्थ्य पर व्यय में वृद्धि के तर्क। अमर्त्य सेन की क्षमता-दृष्टि (Capability Approach) से जोड़ें।
3. चिंता का पक्ष: राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) और राज्य की ऋण-सीमा पर दबाव; अनुच्छेद 293 के अंतर्गत राज्य के उधार की सीमाएँ; राज्यों के FRBM अधिनियम के लक्ष्य; वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) की भूमिका। उच्च-ब्याज ऋण और चिट फंड (Chit Funds Act, 1982) जैसी निर्भरता की जोखिम-स्थितियाँ। ‘मुफ्त उपहार बनाम कल्याणकारी व्यय’ की बहस: सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु राज्य (2013) में सर्वोच्च न्यायालय का दृष्टिकोण कि मुफ्त वितरण को स्वतः भ्रष्ट आचरण नहीं कहा जा सकता; बाद की याचिकाओं में विशेषज्ञ समिति के गठन पर विचार।
4. संतुलित दृष्टिकोण: लक्षित और सत्यापित लाभार्थी चयन, व्यय का लक्ष्य-आधारित मूल्यांकन, परिसंपत्ति-निर्माण से जुड़े प्रावधान, लैंगिक बजट (Gender Budgeting) के माध्यम से निगरानी, और व्यय-सीमा का विधायी नियंत्रण। सहकारी संघवाद के संदर्भ में केंद्र-राज्य समन्वय की आवश्यकता।
5. निष्कर्ष: सशक्तिकरण और वित्तीय अनुशासन को परस्पर विरोधी न मानते हुए सुदृढ़ नीति-ढाँचे का सुझाव।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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