23 Oct विशेष अभियान 6: जल संसाधन विभाग की उपलब्धियाँ, गंगा पुनरुद्धार सहित
✎ जल राज्य सूची का विषय है (प्रविष्टि 17), पर अंतर-राज्यीय नदियों का विनियमन संघ सूची (प्रविष्टि 56) में है, और अंतर-राज्यीय जल विवादों के निर्णय की व्यवस्था अनुच्छेद 262 में है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भारत की प्रमुख नदी प्रणालियाँ, जल संसाधन और उनका वितरण) | GS Paper II — शासन एवं राजव्यवस्था (संघ-राज्य संबंध, अनुच्छेद 262, अंतर-राज्यीय नदी विवाद, मंत्रालयों की भूमिका) | GS Paper III — पर्यावरण और अर्थव्यवस्था (जल संरक्षण, नदी प्रदूषण नियंत्रण, सिंचाई और कृषि उत्पादकता)
- Prelims: अनुच्छेद 262 (अंतर-राज्यीय नदियों के जल से संबंधित विवादों का निर्णय), संघ सूची की प्रविष्टि 56 (अंतर-राज्यीय नदियों का विनियमन और विकास), राज्य सूची की प्रविष्टि 17 (जल, अर्थात् जल आपूर्ति, सिंचाई, नहर, जल निकास और तटबंध), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga, NMCG), नमामि गंगे कार्यक्रम (Namami Gange Programme), बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 (Dam Safety Act, 2021), अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana), केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission, CWC)
- Essay: जल सुरक्षा: नदियों के संरक्षण और सतत उपयोग की चुनौती, संघवाद के संदर्भ में जल संसाधनों का प्रबंधन: सहयोग और विवाद समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: जल राज्य सूची का विषय है (प्रविष्टि 17), पर अंतर-राज्यीय नदियों का विनियमन संघ सूची (प्रविष्टि 56) में है, और अंतर-राज्यीय जल विवादों के निर्णय की व्यवस्था अनुच्छेद 262 में है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रस्तुत स्रोत में मुख्यतः पीआईबी के वेब-पृष्ठ का नेविगेशन ढाँचा और मंत्रालयों की सूची है। परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण यह है कि जल से जुड़ी नीतियाँ और कार्यक्रम केंद्र एवं राज्यों के साझा दायित्व में आते हैं, तथा नदी-संरक्षण, भूजल प्रबंधन और जल आपूर्ति जैसे विषयों पर केंद्र सरकार समन्वय, वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन की भूमिका निभाती है।
पृष्ठभूमि
- संवैधानिक ढाँचा: जल राज्य सूची का विषय है, जबकि अंतर-राज्यीय नदियों के विनियमन और विकास के लिए संघ सूची (प्रविष्टि 56) के अंतर्गत संसद को अधिकार प्राप्त है।
- विधिक व्यवस्था: अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के अंतर्गत न्यायाधिकरण गठित किए जा सकते हैं, और अनुच्छेद 262 के अनुसार ऐसे विवादों पर न्यायालय या संसद की विशिष्ट भूमिका है।
- गंगा संरक्षण की पृष्ठभूमि: गंगा कार्य योजना (1986) से शुरू हुए प्रयासों के बाद नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदूषण नियंत्रण, सीवेज उपचार और नदी-तट विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- नीतिगत आधार: राष्ट्रीय जल नीति, 2012 ने जल को एक सामाजिक-आर्थिक संसाधन मानते हुए एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन और मांग-प्रबंधन पर बल दिया।
- संस्थागत ढाँचा: केंद्रीय जल आयोग, केंद्रीय भूजल बोर्ड और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन जैसी संस्थाएँ तकनीकी, नियामक और क्रियान्वयन स्तर पर कार्य करती हैं।
जल संसाधन प्रशासन क्या है?
- जल संसाधन प्रशासन में नदियों, भूजल, सिंचाई, पेयजल और बाढ़-नियंत्रण से जुड़ी नीतियाँ, संस्थाएँ और कानून सम्मिलित हैं।
- भारत में जल राज्य सूची का विषय है (प्रविष्टि 17), इसलिए राज्य सरकारें सिंचाई और जल आपूर्ति की प्राथमिक जिम्मेदार हैं।
- अंतर-राज्यीय नदियों का विनियमन और विकास संघ सूची (प्रविष्टि 56) के अंतर्गत आता है, जिससे केंद्र की भूमिका निर्णायक होती है।
- अनुच्छेद 262 के अंतर्गत अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के निर्णय हेतु विधि द्वारा व्यवस्था की गई है, और अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 इसी का आधार है।
- बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 बांधों के निरीक्षण, परिचालन और सुरक्षा मानकों के लिए राष्ट्रीय ढाँचा प्रदान करता है।
- भूजल संरक्षण हेतु अटल भूजल योजना जैसे कार्यक्रम सामुदायिक भागीदारी और जल-स्तर प्रबंधन पर केंद्रित हैं।
- नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत सीवेज उपचार संयंत्र, नदी-तट विकास और जैव विविधता संरक्षण जैसे घटक शामिल हैं, जिनका क्रियान्वयन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के माध्यम से होता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| विभागीय ढाँचा (Departmental Structure) | जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग (Department of Water Resources, River Development and Ganga Rejuvenation) 2019 में जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत आया। यह जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरुद्धार से जुड़ी नीतियों और योजनाओं का नोडल विभाग है। स्रोत में विशिष्ट उपलब्धि-आँकड़े नहीं दिए गए हैं, इसलिए परीक्षा-उत्तर के लिए PIB की मूल विज्ञप्ति से आँकड़े सत्यापित करें। |
| प्रमुख कार्यक्रम (Key Programmes) | नमामि गंगे कार्यक्रम (Namami Gange Programme) के माध्यम से गंगा और उसकी सहायक नदियों में प्रदूषण नियंत्रण, घाट विकास और जैव-विविधता संरक्षण; सिंचाई क्षमता सृजन और भूजल प्रबंधन के लिए अलग-अलग योजनाएँ। |
| संस्थागत तंत्र (Institutional Mechanism) | राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga – NMCG) राज्य स्तरीय परियोजनाओं के कार्यान्वयन और निधि-प्रवाह का केंद्रीय साधन है। इससे केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय का संरचित ढाँचा बनता है। |
| जल सुरक्षा (Water Security) | सिंचाई, पेयजल स्रोतों और भूजल पुनर्भरण के बीच संतुलन; जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में टिकाऊ जल उपयोग। यह खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका से सीधे जुड़ा है। |
| अभियान-आधारित शासन (Campaign-based Governance) | एक निश्चित समयावधि में लक्ष्य-केंद्रित कार्य, प्रगति की सार्वजनिक रिपोर्टिंग और जवाबदेही का तरीका। यह प्रशासनिक सुधार के दृष्टिकोण से अध्ययन योग्य है। |
महत्व
आर्थिक (Economic)
- सिंचाई सुविधा के विस्तार से कृषि उत्पादकता बढ़ती है और कृषि आय में स्थिरता आती है, जिसका प्रभाव ग्रामीण मांग और आर्थिक संवृद्धि पर पड़ता है।
- नदी-आधारित अवसंरचना और घाट विकास से पर्यटन तथा स्थानीय रोजगार के अवसर बनते हैं।
- भूजल स्तर में सुधार से सिंचाई और पेयजल की लागत घटती है और जल-आधारित उद्योगों की दीर्घकालिक योजना आसान होती है।
पारिस्थितिक (Ecological)
- नदी प्रदूषण नियंत्रण से जलीय जैव-विविधता, विशेषकर गंगा की डॉल्फिन और मछली प्रजातियों के आवास की रक्षा होती है।
- जल निकायों के पुनरुद्धार से बाढ़ नियंत्रण और भूमि-क्षरण में कमी जैसे लाभ मिलते हैं।
सामाजिक एवं स्वास्थ्य (Social and Health)
- प्रदूषित जल से होने वाले जल-जनित रोगों में कमी लाना सार्वजनिक स्वास्थ्य का प्रत्यक्ष लाभ है।
- गंगा के किनारे बसे करोड़ों लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ी नदी की स्वच्छता सामाजिक सौहार्द और जन-भागीदारी को बढ़ाती है।
संघीय एवं प्रशासनिक (Federal and Administrative)
- अंतर्राज्यीय नदी बेसिन में राज्यों के बीच समन्वय संघीय सहयोग का उदाहरण है, क्योंकि जल राज्य सूची का विषय है जबकि अंतर्राज्यीय नदियों का विनियमन संघ सूची में आता है।
- केंद्र द्वारा राज्यों को वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन देने से सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) व्यवहार में मजबूत होता है।
चुनौतियाँ
1. प्रदूषण का स्रोत-स्तरीय नियंत्रण
- गंगा में प्रदूषण का बड़ा भाग घरेलू सीवेज से आता है; सीवेज उपचार संयंत्र (STP) बनने के बावजूद उनका संचालन और रखरखाव कमजोर रहता है।
- औद्योगिक अपशिष्ट और कृषि रसायनों का प्रवाह भी प्रमुख चुनौती है, जिसके लिए नियामक प्रवर्तन आवश्यक है।
- नगरीकरण की तेज गति के कारण सीवेज अवसंरचना की क्षमता पीछे रह जाती है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: पर्यावरण प्रदूषण और उसका नियंत्रण; GS-II: स्थानीय निकाय और शहरी शासन
2. अंतर्राज्यीय जल विवाद और समन्वय
- नदी जल के बँटवारे को लेकर राज्यों के बीच मतभेद बने रहते हैं, और कई मामले न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित रहते हैं।
- बेसिन-स्तरीय योजना के अभाव में नदी के ऊपरी और निचले हिस्सों के हितों में टकराव होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-II: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध और अंतर्राज्यीय विवाद
3. भूजल का अति-दोहन
- सिंचाई और पेयजल के लिए भूजल का अत्यधिक निष्कर्षण कई क्षेत्रों में भूजल स्तर को लगातार नीचे ले गया है।
- सस्ती या निःशुल्क बिजली और सब्सिडी से जल-गहन फसलों की खेती को बढ़ावा मिलता है, जिससे संसाधन पर दबाव बढ़ता है।
- वर्षा-जल संचयन और पुनर्भरण संरचनाओं का अपर्याप्त उपयोग समस्या को बढ़ाता है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: सिंचाई, कृषि और जल संसाधन प्रबंधन; GS-III: सतत विकास
4. जलवायु परिवर्तन और जल की परिवर्तनशीलता
- अनियमित मानसून, बाढ़ और सूखे की बढ़ती आवृत्ति नदी प्रवाह के पूर्वानुमान और जलाशय संचालन को कठिन बनाती है।
- ग्लेशियर-पोषित हिमालयी नदियों के प्रवाह पैटर्न में बदलाव दीर्घकालिक जल-सुरक्षा के लिए जोखिम है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन; GS-I: भौगोलिक विशेषताएँ और नदी तंत्र
5. सिंचाई दक्षता और अंतिम छोर तक पहुँच
- नहर-आधारित सिंचाई में जल-हानि अधिक होती है और सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) का विस्तार अभी सीमित है।
- सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण पूरा होने के बावजूद खेत के अंतिम छोर तक जल पहुँचाना (Last-mile Connectivity) एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: कृषि अवसंरचना, खाद्य सुरक्षा; GS-III: सूक्ष्म सिंचाई और जल उपयोग दक्षता
6. परियोजनाओं में विलंब और वित्तीय प्रबंधन
- बड़ी जल परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृति और पुनर्वास संबंधी विलंब लागत बढ़ाते हैं।
- राज्यों की अपनी वित्तीय क्षमता और निधि-उपयोग प्रमाणन में असमानता कार्यान्वयन की गति को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: अवसंरचना और सार्वजनिक निवेश; GS-II: शासन में जवाबदेही और सार्वजनिक वित्त
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सीवेज और औद्योगिक प्रदूषण | उपचार क्षमता और उसका वास्तविक संचालन असंतुलित; प्रवर्तन कमजोर |
| अंतर्राज्यीय जल विवाद | बेसिन-स्तरीय सहमति का अभाव; न्यायाधिकरणों में मामलों का लंबित रहना |
| भूजल अति-दोहन | कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में निरंतर गिरावट; जल-गहन फसल पैटर्न |
| जलवायु परिवर्तन | बाढ़-सूखे की बढ़ती आवृत्ति; नदी प्रवाह के पूर्वानुमान में अनिश्चितता |
| सिंचाई दक्षता | नहर-आधारित जल-हानि; सूक्ष्म सिंचाई का सीमित विस्तार |
| परियोजना विलंब | भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृति और लागत-वृद्धि |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- नमामि गंगे कार्यक्रम (Namami Gange Programme) — गंगा पुनरुद्धार का मुख्य कार्यक्रम; राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga – NMCG) इसका कार्यान्वयन तंत्र है
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana – PMKSY) — सिंचाई क्षमता सृजन और जल उपयोग दक्षता के लिए
- अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana) — सामुदायिक भागीदारी द्वारा भूजल प्रबंधन के लिए
आगे की राह
- सीवेज उपचार संयंत्रों का संचालन-और-रखरखाव (O&M) मॉडल सुदृढ़ करें और उपचारित जल के पुनः उपयोग को अनिवार्य प्रोत्साहन दें।
- बेसिन-स्तरीय एकीकृत जल संसाधन योजना बनाएँ, जिसमें ऊपरी और निचले राज्यों के हित संतुलित हों।
- भूजल निष्कर्षण के लिए वैज्ञानिक नियमन और जल-बजट आधारित फसल योजना को बढ़ावा दें।
- सूक्ष्म सिंचाई और ड्रिप-स्प्रिंकलर तकनीक के विस्तार के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और जन-जागरूकता बढ़ाएँ।
- जलवायु-आधारित बाढ़ पूर्वानुमान और जलाशय संचालन प्रणाली को आधुनिक बनाएँ।
- परियोजनाओं के लिए समयबद्ध स्वीकृति-प्रक्रिया और भूमि अधिग्रहण में पारदर्शी पुनर्वास नीति सुनिश्चित करें।
- स्थानीय निकायों और समुदाय को नदी-संरक्षण में भागीदार बनाकर कार्यक्रमों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करें।
- उपलब्धियों के आँकड़ों का स्वतंत्र मूल्यांकन और सार्वजनिक डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी व्यवस्था बनाएँ।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग (Department of Water Resources, River Development and Ganga Rejuvenation) · नमामि गंगे कार्यक्रम (Namami Gange Programme) · राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga) · सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) · राज्य सूची की प्रविष्टि 17 (Entry 17, State List) · संघ सूची की प्रविष्टि 56 (Entry 56, Union List) · अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (Inter-State River Water Disputes Act, 1956) · अनुच्छेद 262 (Article 262) · पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment (Protection) Act, 1986) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana) · राष्ट्रीय जल नीति (National Water Policy)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 262 — अंतर्राज्यीय नदी जल विवादों का न्यायनिर्णयन
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 56 — अंतर्राज्यीय नदियों का विनियमन और विकास
- सातवीं अनुसूची, राज्य सूची प्रविष्टि 17 — जल, सिंचाई, नहर और जलनिकास
अवधारणा प्रवाह
जल संसाधन और नदियों पर बढ़ता दबाव (प्रदूषण, भूजल दोहन, जलवायु परिवर्तन) → केंद्रीय विभाग द्वारा लक्ष्य-आधारित योजना और अभियान के माध्यम से कार्यक्रमों का समन्वय → NMCG और राज्य सरकारों के बीच निधि-प्रवाह और परियोजना कार्यान्वयन → सिंचाई, सीवेज उपचार और भूजल पुनर्भरण जैसे भौतिक परिणामों का निर्माण → नदी जल गुणवत्ता, भूजल स्तर और सिंचाई क्षेत्र में मापने योग्य सुधार → कृषि उत्पादकता, जैव-विविधता और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अप्रत्यक्ष लाभ → निगरानी और मूल्यांकन के आधार पर अगले चरण की नीति में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. नमामि गंगे कार्यक्रम और संबंधित संस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga) को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया है।
2. अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana) भूजल के सतत प्रबंधन के लिए एक केंद्र-प्रायोजित योजना है, जो सात राज्यों के जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में लागू है।
3. गंगा नदी का संपूर्ण प्रवाह-पथ उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत है और इसका संचालन जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत होता है। कथन 2 सही है: अटल भूजल योजना विश्व बैंक की सहायता से चलने वाली केंद्र-प्रायोजित योजना है, जो भूजल-संकटग्रस्त सात राज्यों के चिह्नित क्षेत्रों में लागू है। कथन 3 गलत है: गंगा का प्रवाह-पथ उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरता है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए, जिनमें एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है:
अभिकथन (A): भारत में जल राज्य सूची का विषय है, फिर भी अंतरराज्यीय नदियों के विनियमन और विकास में संघ की विधायी भूमिका संवैधानिक रूप से संभव है।
कारण (R): संघ सूची की प्रविष्टि 56 के अंतर्गत संसद विधि द्वारा घोषित कर सकती है कि अंतरराज्यीय नदियों और नदी-घाटियों का विनियमन और विकास लोकहित में समीचीन है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही विकल्प चुनिए।
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, किंतु R गलत है।
- A गलत है, किंतु R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — जल प्रविष्टि 17 के अंतर्गत राज्य सूची में आता है, इसलिए A का पहला भाग सही है। संघ सूची की प्रविष्टि 56 संसद को विधि द्वारा घोषित करने की शक्ति देती है कि अंतरराज्यीय नदियों का विनियमन और विकास लोकहित में समीचीन है। यही शक्ति संघ की भूमिका का वैधानिक आधार है, इसलिए R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ जल को संविधान के अंतर्गत मुख्यतः राज्य का विषय माना गया है, फिर भी नदी विकास और गंगा कायाकल्प में संघ की भूमिका निरंतर बढ़ी है। इस साझा शासन के संवैधानिक और संस्थागत आधार का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही यह भी उत्तर दीजिए कि क्या नमामि गंगे कार्यक्रम का अनुभव अंतरराज्यीय नदी-तंत्रों के प्रबंधन के लिए कोई सबक प्रदान करता है। (15 Marks)
रूपरेखा: 1. संवैधानिक ढाँचा: सातवीं अनुसूची के अंतर्गत जल राज्य सूची की प्रविष्टि 17 में आता है; संघ सूची की प्रविष्टि 56 संसद को अंतरराज्यीय नदियों के विनियमन और विकास की शक्ति देती है, यदि संसद विधि द्वारा ऐसा घोषित करे। अनुच्छेद 262 अंतरराज्यीय नदी जल-विवादों के न्यायनिर्णयन की व्यवस्था करता है और संसद को ऐसे विवादों पर उच्चतम न्यायालय की अधिकारिता बाहर रखने की शक्ति देता है। इसी के अनुरूप अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 बना, जिसके अंतर्गत न्यायाधिकरण गठित होते हैं।
2. विधिक और संस्थागत उपाय: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के अंतर्गत गंगा संबंधी प्राधिकरण का गठन हुआ। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, नमामि गंगे कार्यक्रम के क्रियान्वयन की प्रमुख संस्था है, जो राज्य गंगा पुनरुद्धार मिशनों के साथ कार्य करती है। राष्ट्रीय जल नीति (2012) एकीकृत जल-संसाधन प्रबंधन और नदी-बेसिन आधारित योजना पर बल देती है। केंद्रीय जल आयोग तकनीकी परामर्श और निगरानी देता है।
3. न्यायिक हस्तक्षेप: गंगा प्रदूषण पर एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ मामलों में उच्चतम न्यायालय ने नियमित निगरानी और औद्योगिक प्रदूषण-नियंत्रण के निर्देश दिए। 2017 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा गंगा और यमुना को विधिक व्यक्ति घोषित करने के निर्णय पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगाई, जो इस विषय की न्यायिक अनिश्चितता दर्शाता है।
4. संतुलित दृष्टिकोण: एक पक्ष मानता है कि नदी-बेसिन स्तर पर एकीकृत प्रबंधन के लिए केंद्रीय नेतृत्व अनिवार्य है, क्योंकि प्रदूषण और प्रवाह राज्य-सीमाएँ नहीं मानते। दूसरा पक्ष सहकारी संघवाद के अंतर्गत राज्यों की संवैधानिक भूमिका, स्थानीय जल-उपयोग और राज्य-क्षमता की कमी पर बल देता है। पुंछी आयोग (2010) की सिफारिशें और अंतरराज्यीय परिषद की भूमिका इस बहस में प्रासंगिक हैं।
5. निष्कर्ष: नमामि गंगे से सीख यह है कि केंद्र की वित्तीय और तकनीकी भूमिका, राज्यों की क्रियान्वयन-भागीदारी, नगरीय सीवेज-अवसंरचना, नियमित निगरानी और जनभागीदारी का समन्वय ही सफल प्रबंधन की कुंजी है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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