31 Oct संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल को एलडीसी श्रेणी से बाहर निकलने की तैयारी के लिए 2029 तक का समय दिया

✎ LDC उत्तरण के लिए CDP की सिफारिश, ECOSOC की पुष्टि और UNGA के अंतिम निर्णय के बाद सामान्यतः तीन वर्ष की तैयारी-अवधि मिलती है, और नेपाल की यह अवधि अब 24 नवंबर 2029 तक है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (संयुक्त राष्ट्र की संस्थाएँ और उनकी भूमिका, दक्षिण एशिया) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (समावेशी और सतत विकास, वैश्विक व्यापार में रियायतें)
- Prelims: अल्पविकसित देश (Least Developed Countries — LDC) की पहचान के तीन मानदंड: प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI), मानव संपदा सूचकांक (HAI) और आर्थिक एवं पर्यावरणीय भेद्यता सूचकांक (EVI), संयुक्त राष्ट्र विकास नीति समिति (Committee for Development Policy — CDP) की भूमिका: LDC सूची की त्रैवार्षिक समीक्षा और उत्तरण की सिफारिश, आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) और संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की भूमिका में अंतर, उत्तरण के बाद की तैयारी-अवधि (Preparatory Period), सामान्यतः तीन वर्ष, स्थलरुद्ध विकासशील देश (Landlocked Developing Countries — LLDC) और नेपाल की भौगोलिक स्थिति, एवरीथिंग बट आर्म्स (Everything But Arms — EBA) पहल: LDC देशों को यूरोपीय संघ की शुल्क-मुक्त पहुँच, UNGA संकल्प 81L.8 (81वाँ सत्र) और नेपाल-बांग्लादेश का संयुक्त प्रस्ताव
- Essay: विकास का मापन आय से आगे: समावेशी विकास के सूचकांक और अल्पविकसित देशों की श्रेणी की उपयोगिता, छोटे और भूभाग-बद्ध देशों की विकास चुनौतियाँ और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: LDC उत्तरण के लिए CDP की सिफारिश, ECOSOC की पुष्टि और UNGA के अंतिम निर्णय के बाद सामान्यतः तीन वर्ष की तैयारी-अवधि मिलती है, और नेपाल की यह अवधि अब 24 नवंबर 2029 तक है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से नेपाल की LDC उत्तरण की तैयारी-अवधि को तीन वर्ष बढ़ाकर 24 नवंबर 2029 तक कर दिया है। 2021 के महासभा निर्णय के अनुसार नेपाल का उत्तरण 24 नवंबर 2026 को निर्धारित था। नेपाल ने मई में संयुक्त राष्ट्र की संबंधित एजेंसी को पत्र लिखकर अतिरिक्त समय माँगा था। यह विस्तार नेपाल और बांग्लादेश के संयुक्त प्रस्ताव पर महासभा के 81वें सत्र में संकल्प 81L.8 के रूप में पारित हुआ। नेपाल ने बताया कि इस अवधि का उपयोग उत्पादन क्षमता बढ़ाने, संस्थाओं को सुदृढ़ करने और सामाजिक-आर्थिक रूपांतरण के लिए किया जाएगा। यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि LDC से उत्तरण केवल आय के आँकड़ों पर नहीं, बल्कि संरचनात्मक और संस्थागत तैयारी पर भी निर्भर करता है।
पृष्ठभूमि
- संयुक्त राष्ट्र ने 1971 में अल्पविकसित देशों की श्रेणी बनाई। इस श्रेणी में आने वाले देशों को विशेष अंतरराष्ट्रीय सहायता और व्यापारिक रियायतें मिलती हैं। सूची की समीक्षा संयुक्त राष्ट्र विकास नीति समिति (CDP) हर तीन वर्ष में करती है।
- उत्तरण की प्रक्रिया में किसी देश को दो लगातार त्रैवार्षिक समीक्षाओं में तीन मानदंडों में से कम से कम दो पर निर्धारित सीमा पार करनी होती है। इसके बाद CDP सिफारिश करती है, ECOSOC उसकी पुष्टि करती है और अंतिम निर्णय संयुक्त राष्ट्र महासभा लेती है।
- उत्तरण की घोषणा के बाद सामान्यतः तीन वर्ष की तैयारी-अवधि दी जाती है, ताकि देश आर्थिक परिवर्तन के लिए आवश्यक नीतिगत और संस्थागत सुधार कर सके।
- नेपाल को 2021 के महासभा निर्णय में 24 नवंबर 2026 को उत्तरण की तिथि मिली थी। इसी दौरान नेपाल और बांग्लादेश ने अपनी-अपनी तैयारी-अवधि बढ़ाने के लिए संयुक्त प्रस्ताव रखा।
- उत्तरण से LDC के लिए उपलब्ध विशेष व्यापारिक लाभ, जैसे EBA के अंतर्गत यूरोपीय संघ की शुल्क-मुक्त पहुँच और कुछ रियायती वित्तीय सहायता, धीरे-धीरे समाप्त होते हैं। इसलिए तैयारी-अवधि का महत्व व्यापार और निवेश की निरंतरता से जुड़ा है।
LDC उत्तरण क्या है?
- LDC उत्तरण वह प्रक्रिया है जिसमें संयुक्त राष्ट्र की मान्यता प्राप्त अल्पविकसित देश की श्रेणी से कोई देश बाहर निकलता है। यह निर्णय किसी देश के विकास स्तर में स्थायी सुधार के आधार पर होता है।
- मानदंड तीन हैं: प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI), मानव संपदा सूचकांक (HAI), जो स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और साक्षरता से जुड़ा है, और आर्थिक एवं पर्यावरणीय भेद्यता सूचकांक (EVI), जो झटकों के प्रति संवेदनशीलता को मापता है।
- CDP इन मानदंडों के आधार पर देशों की समीक्षा करती है। सिफारिश के बाद ECOSOC और महासभा की स्वीकृति आवश्यक होती है।
- तैयारी-अवधि का उद्देश्य देश को यह अवसर देना है कि वह उत्तरण के बाद व्यापार, ऋण और निवेश के नए ढाँचे के अनुरूप ढल सके।
- LDC से उत्तरण का अर्थ यह नहीं कि देश ने विकास पूरा कर लिया है। इसका अर्थ है कि वह निर्धारित विकास सीमा पार कर चुका है और अब उसे अपने आर्थिक ढाँचे को अधिक सुदृढ़ करना है।
- नेपाल एक स्थलरुद्ध देश (LLDC) है, जिसकी समुद्री पहुँच नहीं है। इसलिए उसके व्यापार के लिए पारगमन मार्गों और पड़ोसी देशों की सुविधाओं का महत्व अधिक है।
- बांग्लादेश भी इसी प्रकार की तैयारी-अवधि के विस्तार की प्रक्रिया में है, जो दर्शाता है कि दक्षिण एशिया के कई देश उत्तरण की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| स्नातक की नई तिथि | नेपाल के अल्पविकसित देश (Least Developed Countries – LDC) श्रेणी से स्नातक की तिथि 24 नवंबर 2026 से बढ़ाकर 24 नवंबर 2029 कर दी गई है, यानी तीन वर्ष का विस्तार |
| निर्णय की प्रक्रिया | संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly – UNGA) ने अपने 81वें सत्र में संकल्प 81L.8 सर्वसम्मति से अपनाया; यह नेपाल और बांग्लादेश का संयुक्त प्रस्ताव था |
| मूल निर्णय | नवंबर 2021 में महासभा के निर्णय के अंतर्गत नेपाल का स्नातक वर्ष 2026 तय किया गया था |
| विस्तार का अनुरोध | नेपाल के विदेश मंत्री ने 13 और 15 मई को संबंधित संयुक्त राष्ट्र निकाय को पत्र लिखकर संक्रमण की तैयारी हेतु अतिरिक्त समय माँगा था |
| विस्तार का उद्देश्य | इस अवधि में उत्पादन क्षमता बढ़ाना, संस्थाओं को सुदृढ़ करना और सामाजिक-आर्थिक रूपांतरण सुनिश्चित करना है |
महत्व
आर्थिक
- स्नातक के बाद व्यापार में मिलने वाली शुल्क-रियायतें और विकास सहायता की रियायती शर्तें धीरे-धीरे समाप्त होती हैं; अतिरिक्त समय से निर्यात-आधार को प्रतिस्पर्धी बनाने का अवसर मिलता है
- उत्पादन क्षमता और औद्योगिक आधार मज़बूत होने से बाहरी व्यापार घाटे और आयात पर निर्भरता के दबाव को कम करने में सहायता मिल सकती है
विकास नीति
- LDC स्नातक केवल आय-वृद्धि का मामला नहीं है; इसमें मानव संसाधन और आर्थिक सुभेद्यता के सूचकांक भी शामिल हैं, इसलिए संरचनात्मक सुधारों की भूमिका केंद्रीय है
- विस्तार से संस्थागत सुधारों, शासन-क्षमता और सामाजिक क्षेत्र के विकास के लिए समयबद्ध ढाँचा मिलता है
बहुपक्षीय कूटनीति
- नेपाल और बांग्लादेश का संयुक्त प्रस्ताव दर्शाता है कि समान विकास-चरण वाले देश साझा हितों पर बहुपक्षीय मंच पर सहयोग कर सकते हैं
- महासभा द्वारा सर्वसम्मति से निर्णय यह दिखाता है कि संयुक्त राष्ट्र की विकास-व्यवस्था में तर्कसंगत अनुरोधों पर लचीलापन रखा जाता है
चुनौतियाँ
1. स्नातक मानदंडों की बहुआयामी प्रकृति
- LDC पहचान के लिए प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (Gross National Income – GNI), मानव संसाधन सूचकांक (Human Assets Index) और आर्थिक सुभेद्यता सूचकांक (Economic Vulnerability Index) का उपयोग होता है
- स्नातक का निर्णय संयुक्त राष्ट्र की विकास नीति समिति (Committee for Development Policy – CDP) की त्रैवार्षिक समीक्षा पर आधारित होता है, इसलिए केवल आय-वृद्धि पर्याप्त नहीं होती
यूपीएससी लिंक: सामाजिक-आर्थिक विकास के सूचक; GS-II (अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ) और GS-III (समावेशी विकास)
2. व्यापार अधिमान्यताओं के क्षरण का जोखिम
- LDC श्रेणी में रहने से कई विकसित बाज़ारों में शुल्क-मुक्त या कम-शुल्क पहुँच मिलती है, जो स्नातक के बाद सीमित या समाप्त हो सकती है
- निर्यात-प्रधान क्षेत्रों, विशेषकर वस्त्र और कृषि-प्रसंस्करण, पर प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ सकता है
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और व्यापार नीति; GS-III (अर्थव्यवस्था) और GS-II (भारत के पड़ोसी देशों से संबंध)
3. संस्थागत क्षमता और सुधारों का क्रियान्वयन
- संरचनात्मक सुधारों के लिए केवल नीति घोषणा नहीं, बल्कि प्रशासनिक क्षमता, नियामक ढाँचे और निरंतरता की आवश्यकता होती है
- राजनीतिक परिवर्तनों के बीच सुधारों की दिशा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहता है, इसलिए विस्तार के समय का प्रभावी उपयोग अनिवार्य है
यूपीएससी लिंक: शासन और लोक प्रशासन में संस्थागत सुधार; GS-II (शासन व्यवस्था)
4. राजकोषीय और वित्तीय संक्रमण
- स्नातक के बाद रियायती विदेशी ऋण और अनुदान कम होने पर सरकार को बाज़ार-आधारित उधारी की ओर बढ़ना पड़ता है, जिससे ब्याज-भार बढ़ सकता है
- राजकोषीय अनुशासन और बाहरी ऋण प्रबंधन के बिना वित्तीय दबाव विकास-परियोजनाओं को प्रभावित कर सकता है
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय नीति और बाहरी ऋण प्रबंधन; GS-III (अर्थव्यवस्था)
5. पर्वतीय भूगोल और पर्यावरणीय सुभेद्यता
- आर्थिक सुभेद्यता सूचकांक में प्राकृतिक आघातों और पर्यावरणीय जोखिमों का भी स्थान है, और पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन व भूकंप का खतरा अधिक रहता है
- आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना और जलवायु-अनुकूल उत्पादन के बिना सुभेद्यता के सूचक सुधरने में कठिनाई हो सकती है
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन; GS-III (पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| व्यापार रियायतों का अंत | स्नातक के बाद निर्यात-बाज़ारों में शुल्क-लाभ घटने से प्रतिस्पर्धा और निर्यात आय पर असर पड़ सकता है |
| वित्तीय व्यवस्था में बदलाव | रियायती विदेशी सहायता घटने से बाज़ार-आधारित ऋण पर निर्भरता और ब्याज-भार बढ़ने का जोखिम |
| संस्थागत तैयारी | तीन वर्ष के विस्तार के बावजूद प्रशासनिक और नियामक सुधारों की गति पर्याप्त न होने की आशंका |
| उत्पादन क्षमता का सीमित विस्तार | औद्योगिक और कृषि-प्रसंस्करण आधार कमज़ोर रहने पर निर्यात-विविधीकरण में कठिनाई |
| पर्यावरणीय और आपदा जोखिम | पर्वतीय भूगोल और जलवायु संबंधी आघात सामाजिक-आर्थिक सूचकांकों में प्रगति को धीमा कर सकते हैं |
| सुभेद्यता सूचकांक में सुधार | आर्थिक सुभेद्यता सूचकांक में अपेक्षित सुधार के बिना स्नातक की पात्रता बनाए रखना कठिन हो सकता है |
आगे की राह
- संरचनात्मक सुधारों की समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर उसकी नियमित समीक्षा की जाए, ताकि तीन वर्ष की अवधि का प्रभावी उपयोग हो
- निर्यात-क्षेत्रों की पहचान कर उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता-मानकों में निवेश किया जाए, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ शुल्क-रियायतें घट सकती हैं
- स्नातक-पश्चात संक्रमण के लिए व्यापार-समझौतों और द्विपक्षीय साझेदारियों के माध्यम से वैकल्पिक बाज़ार-पहुँच सुरक्षित की जाए
- रियायती और बाज़ार-आधारित वित्त के मिश्रण की रणनीति बनाकर बाहरी ऋण का सतत प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए
- आर्थिक सुभेद्यता सूचकांक को ध्यान में रखते हुए आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना और जलवायु-अनुकूल कृषि को प्राथमिकता दी जाए
- मानव संसाधन सूचकांक में सुधार के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल-विकास में निरंतर निवेश किया जाए
- पड़ोसी देशों के साथ अनुभव-साझाकरण और क्षेत्रीय सहयोग मंचों के माध्यम से सुधार-प्रक्रियाओं को मज़बूत किया जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अल्पविकसित देश (Least Developed Countries – LDC) · LDC श्रेणी से स्नातकता (Graduation) · विकास नीति समिति (Committee for Development Policy – CDP) · सकल राष्ट्रीय आय (GNI) प्रति व्यक्ति सीमा · मानव संपदा सूचकांक (Human Assets Index – HAI) · आर्थिक एवं पर्यावरणीय भेद्यता सूचकांक (Economic and Environmental Vulnerability Index – EVI) · तैयारी अवधि (Preparatory Period) · सुचारु संक्रमण अवधि (Smooth Transition Period) · संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) संकल्प · इस्तांबुल कार्य योजना (Istanbul Programme of Action) · दोहा कार्य योजना (Doha Programme of Action) · सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDGs) · वरीयता व्यापार पहुँच (Preferential Market Access) · संरचनात्मक एवं संस्थागत सुधार
अवधारणा प्रवाह
संयुक्त राष्ट्र की विकास नीति समिति (CDP) त्रैवार्षिक समीक्षा में GNI, मानव संसाधन सूचकांक और आर्थिक सुभेद्यता सूचकांक के आधार पर पात्रता तय करती है → वर्ष 2021 में UNGA ने नेपाल का LDC से स्नातक 24 नवंबर 2026 निर्धारित किया, जिसमें तीन वर्ष की तैयारी अवधि थी → संक्रमण के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता बताते हुए नेपाल ने मई में संबंधित संयुक्त राष्ट्र निकाय को पत्र लिखा → नेपाल और बांग्लादेश के संयुक्त प्रस्ताव पर UNGA ने संकल्प 81L.8 सर्वसम्मति से अपनाया → तैयारी अवधि 24 नवंबर 2029 तक बढ़ी, जिसमें उत्पादन क्षमता, संस्थाओं और सामाजिक-आर्थिक रूपांतरण पर कार्य होना है → स्नातक के बाद आम तौर पर संक्रमण-काल में व्यापार और विकास सहायता की रियायतें क्रमशः समाप्त होती हैं → रियायतों के अंत के साथ निर्यात, वित्त और सुभेद्यता के नए चुनौतीपूर्ण समायोजन की स्थिति बनती है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल्पविकसित देशों (LDC) की पहचान विकास नीति समिति (CDP) द्वारा की जाती है।
2. LDC श्रेणी के मानदंडों में सकल राष्ट्रीय आय (GNI) प्रति व्यक्ति, मानव संपदा सूचकांक (HAI) और आर्थिक एवं पर्यावरणीय भेद्यता सूचकांक (EVI) सम्मिलित हैं।
3. किसी देश को LDC श्रेणी से स्नातक घोषित करने का अंतिम निर्णय सुरक्षा परिषद् द्वारा लिया जाता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: विकास नीति समिति (CDP) LDC की पहचान और समीक्षा करती है, जो हर तीन वर्ष पर होती है। कथन 2 सही है: तीन मानदंड सकल राष्ट्रीय आय प्रति व्यक्ति, मानव संपदा सूचकांक और आर्थिक एवं पर्यावरणीय भेद्यता सूचकांक हैं। कथन 3 गलत है: स्नातकता का निर्णय संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) लेती है, सुरक्षा परिषद् नहीं।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): किसी देश के LDC श्रेणी से स्नातक होने के बाद एक सुचारु संक्रमण अवधि रखी जाती है।
कारण (R): स्नातक देश को LDC-विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय सहायता और वरीयता व्यापार पहुँच का लाभ एकदम समाप्त न होकर धीरे-धीरे समाप्त होता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — सुचारु संक्रमण अवधि का उद्देश्य यही है कि स्नातक देश पर अचानक व्यापारिक और वित्तीय दबाव न पड़े। LDC के लाभ, जैसे वरीयता व्यापार पहुँच और सहायता, चरणबद्ध रूप से समाप्त होते हैं, इसलिए कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा LDC पहचान के लिए प्रयुक्त मानदंड नहीं है?
- सकल राष्ट्रीय आय (GNI) प्रति व्यक्ति
- मानव संपदा सूचकांक (HAI)
- आर्थिक एवं पर्यावरणीय भेद्यता सूचकांक (EVI)
- मानव विकास सूचकांक (Human Development Index)
उत्तर: मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) — LDC पहचान के तीन मानदंड सकल राष्ट्रीय आय प्रति व्यक्ति, मानव संपदा सूचकांक और आर्थिक एवं पर्यावरणीय भेद्यता सूचकांक हैं। मानव विकास सूचकांक (UNDP द्वारा जारी) LDC मानदंड नहीं है, यद्यपि वह भी विकास मापन का सूचकांक है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ किसी अल्पविकसित देश के LDC श्रेणी से स्नातक होने की तैयारी अवधि का विस्तार संरचनात्मक सुधारों के लिए अवसर प्रदान करता है, किंतु यह तभी सार्थक है जब विस्तार का उपयोग उत्पादन क्षमता और संस्थागत सुदृढ़ता में हो। LDC स्नातकता की संस्थागत प्रक्रिया का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या तैयारी अवधि बढ़ाने से स्नातकता के बाद की व्यापारिक और वित्तीय चुनौतियाँ स्वतः कम हो जाती हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना:
1. भूमिका: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा 2021 में घोषित स्नातकता तिथि का उल्लेख करें। नेपाल और बांग्लादेश के संयुक्त प्रस्ताव पर आधारित संकल्प 81L.8 द्वारा नेपाल की तैयारी अवधि 24 नवंबर 2029 तक बढ़ाई गई, जो 24 नवंबर 2026 की मूल तिथि से थी।
2. LDC पहचान की संस्थागत व्यवस्था:
– विकास नीति समिति (CDP) प्रति तीन वर्ष पर समीक्षा करती है।
– तीन मानदंड: सकल राष्ट्रीय आय (GNI) प्रति व्यक्ति, मानव संपदा सूचकांक (HAI) और आर्थिक एवं पर्यावरणीय भेद्यता सूचकांक (EVI)।
– स्नातकता के लिए सामान्यतः दो लगातार समीक्षाओं में सीमा पार करना आवश्यक है, या कुछ शर्तों में एक बार में सीमा का दोगुना होना।
– महासभा का अंतिम निर्णय और तीन वर्ष की डिफ़ॉल्ट तैयारी अवधि।
3. तैयारी अवधि के औचित्य के पक्ष में तर्क:
– भेद्यता का वास्तविक प्रभाव: नेपाल के लिए 2015 के गोरखा भूकंप जैसे प्रकरण EVI की आर्थिक-पर्यावरणीय भेद्यता को स्पष्ट करते हैं।
– संरचनात्मक सुधार (उत्पादन क्षमता, संस्थान, सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन) में समय लगता है।
– इस्तांबुल कार्य योजना (2011) और दोहा कार्य योजना (2022–2031) के लक्ष्यों के अनुरूप सुदृढ़ता।
4. विपक्ष में तर्क और सीमाएँ:
– तैयारी अवधि बढ़ाने से सुधार स्वतः नहीं होते; क्रियान्वयन क्षमता और राजकोषीय गुंजाइश निर्णायक हैं।
– हा-जून चांग (Ha-Joon Chang) की औद्योगिक नीति संबंधी आलोचना के अनुसार विकास प्रक्रिया में संरक्षण और अनुशासन का संतुलन आवश्यक है।
– विस्तार से अनिश्चितता बनी रहती है और निजी निवेश पर प्रभाव पड़ सकता है।
5. स्नातकता के बाद की चुनौतियाँ:
– वरीयता व्यापार पहुँच (जैसे यूरोपीय संघ की Everything But Arms व्यवस्था) और सहायता चरणबद्ध रूप से समाप्त होती है; सुचारु संक्रमण अवधि इसी के लिए है।
– विश्व व्यापार संगठन (WTO) के समझौतों और मूल-नियमों (rules of origin) में अनुपालन की चुनौती।
– सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अंतर्गत नीति-समन्वय।
6. निष्कर्ष: विस्तार एक संरचनात्मक अवसर है, स्वचालित समाधान नहीं। संस्थागत क्षमता, व्यापार-कूटनीति और घरेलू सुधारों का समन्वय ही संक्रमण को सुचारु बनाता है। भारत के संदर्भ में यह LDC संरचना को विकास-सहयोग की दृष्टि से समझने का उदाहरण है, क्योंकि भारत स्वयं LDC श्रेणी में नहीं है।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल को एलडीसी श्रेणी से बाहर निकलने की तैयारी के लिए 2029 तक का समय दिया - October 31, 2026
- Ministry of Parliamentary Affairs Concludes Special Campaign 6.0: Key Highlights for UPSC & State PCS - October 31, 2026
- वायुसेना प्रमुख बने एयर चीफ मार्शल अशुतोष दीक्षित - October 31, 2026

No Comments