13 Oct बीआईएमएसटीईसी गृह मंत्रियों की पहली बैठक: भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित
✎ BIMSTEC (1997, बैंकॉक घोषणा; 7 सदस्य; सचिवालय ढाका; चार्टर 2024 से प्रभावी) में सुरक्षा क्षेत्र की अग्रणी जिम्मेदारी भारत के पास है; नई दिल्ली में गृह मंत्रियों की पहली बैठक आतंकवाद, संगठित अपराध और आपदा प्रबंधन सहयोग को राजनीतिक…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध: भारत और उसका पड़ोस, क्षेत्रीय समूह (BIMSTEC), ‘पड़ोसी पहले’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियाँ | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा: आतंकवाद, सीमा-पार संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन | GS Paper II — शासन: विदेश नीति में संघ की भूमिका (संघ सूची, प्रविष्टि 14; अनुच्छेद 51 और 253)
- Prelims: BIMSTEC (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल), बैंकॉक घोषणा, 1997, BIMSTEC चार्टर (2022 में स्वीकृत, 20 मई 2024 से प्रभावी), BIMSTEC सचिवालय, ढाका, सुरक्षा क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका, आतंकवाद से मुकाबले पर BIMSTEC अभिसमय, 2009, आपराधिक मामलों में पारस्परिक विधिक सहायता पर अभिसमय, 2017, बैंकॉक विज़न 2030 और समुद्री परिवहन सहयोग समझौता (छठा शिखर सम्मेलन, 2025), SAARC बनाम BIMSTEC, कलादान बहु-मॉडल पारगमन परियोजना
- Essay: बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में साझा सुरक्षा और साझा समृद्धि: क्षेत्रीय सहयोग की नई दिशा, आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियाँ सीमाओं तक सीमित नहीं रहतीं: पड़ोसी देशों के साथ सहयोग की अनिवार्यता
त्वरित पुनरावृत्ति: BIMSTEC (1997, बैंकॉक घोषणा; 7 सदस्य; सचिवालय ढाका; चार्टर 2024 से प्रभावी) में सुरक्षा क्षेत्र की अग्रणी जिम्मेदारी भारत के पास है; नई दिल्ली में गृह मंत्रियों की पहली बैठक आतंकवाद, संगठित अपराध और आपदा प्रबंधन सहयोग को राजनीतिक स्तर पर संस्थागत बनाती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) के सदस्य देशों के गृह मंत्रियों की पहली बैठक आयोजित हुई। BIMSTEC के सात क्षेत्रों में ‘सुरक्षा’ क्षेत्र की अग्रणी जिम्मेदारी भारत के पास है। इसी कारण भारत ने गृह मंत्री स्तर पर यह नया मंच आयोजित किया। इसके पहले आतंकवाद-निरोध, सीमा-पार अपराध, आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर सहयोग मुख्यतः अधिकारी-स्तरीय तंत्रों (कार्य समूहों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठकों) के माध्यम से चलता रहा है। गृह मंत्रियों की बैठक से इस सहयोग को राजनीतिक स्तर पर संस्थागत रूप मिलता है। यह घटना परीक्षा की दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है कि यह भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा कूटनीति और BIMSTEC के संस्थागत सुदृढ़ीकरण, दोनों से जुड़ी है।
पृष्ठभूमि
- BIMSTEC की स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा द्वारा BIST-EC (बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका, थाईलैंड) के रूप में हुई। उसी वर्ष म्यांमार के जुड़ने पर यह BIMST-EC बना। वर्ष 2004 में नेपाल और भूटान के सदस्य बनने पर इसका वर्तमान नाम BIMSTEC हुआ।
- सात सदस्य देश हैं: बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड। इनमें पाँच दक्षिण एशिया के और दो (म्यांमार, थाईलैंड) दक्षिण-पूर्व एशिया के हैं, इसलिए यह दोनों क्षेत्रों के बीच सेतु का काम करता है। सदस्य देशों में विश्व की लगभग 22 प्रतिशत जनसंख्या रहती है।
- सहयोग के क्षेत्रों का पुनर्गठन कर उन्हें 7 क्षेत्रों में समेटा गया और प्रत्येक की अग्रणी जिम्मेदारी एक सदस्य देश को दी गई। भारत के पास सुरक्षा क्षेत्र है, जिसमें आतंकवाद-निरोध एवं transnational अपराध, आपदा प्रबंधन और ऊर्जा आते हैं। बांग्लादेश के पास व्यापार, निवेश एवं विकास; भूटान के पास पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन; म्यांमार के पास कृषि एवं खाद्य सुरक्षा; नेपाल के पास जन-जन का संपर्क; श्रीलंका के पास विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार; तथा थाईलैंड के पास संपर्क (connectivity) है।
- पाँचवें शिखर सम्मेलन (कोलंबो, मार्च 2022) में BIMSTEC चार्टर अपनाया गया, जिससे संगठन को औपचारिक कानूनी व्यक्तित्व मिला। यह चार्टर 20 मई 2024 से प्रभावी हुआ। सचिवालय ढाका में है और 2014 से कार्यरत है।
- छठा शिखर सम्मेलन अप्रैल 2025 में बैंकॉक में हुआ। इसमें बैंकॉक विज़न 2030 अपनाया गया और समुद्री परिवहन सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इसी क्रम में सुरक्षा सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर बल दिया गया।
- दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की गतिविधियाँ 2016 के बाद से लगभग ठप हैं। इस स्थिति में भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों के लिए BIMSTEC एक व्यावहारिक क्षेत्रीय मंच बन गया है, जिसमें पाकिस्तान शामिल नहीं है।
BIMSTEC के अंतर्गत सुरक्षा सहयोग क्या है?
- BIMSTEC मूलतः आर्थिक और तकनीकी सहयोग का मंच था। आतंकवाद, संगठित अपराध और आपदाओं जैसी साझा चुनौतियों के कारण सुरक्षा इसका प्रमुख स्तंभ बन गई। बंगाल की खाड़ी के तटवर्ती और सीमावर्ती देशों में ये खतरे एक-दूसरे से जुड़े हैं।
- सहयोग के मुख्य विषय हैं: आतंकवाद-निरोध, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध, अवैध हथियार, तटीय और समुद्री सुरक्षा, सीमा प्रबंधन तथा आपदा प्रबंधन।
- विधिक ढाँचे में 2009 का BIMSTEC अभिसमय (आतंकवाद, transnational संगठित अपराध और अवैध मादक पदार्थ तस्करी से मुकाबले हेतु) तथा आपराधिक मामलों में पारस्परिक विधिक सहायता पर अभिसमय (2017) उल्लेखनीय हैं। ये अभिसमय सदस्य देशों की जाँच एजेंसियों के बीच सूचना-साझाकरण और कानूनी सहायता का आधार देते हैं।
- संस्थागत तंत्र में आतंकवाद-निरोध एवं transnational अपराध पर संयुक्त कार्य समूह (JWG-CTTC) और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठकें शामिल हैं। गृह मंत्रियों की बैठक इस ढाँचे के ऊपर राजनीतिक मार्गदर्शन और निर्णय-क्षमता जोड़ती है।
- आपदा प्रबंधन में भारत ने सदस्य देशों के साथ अभ्यास और प्रशिक्षण आयोजित किए हैं। 2017 में नई दिल्ली में BIMSTEC आपदा प्रबंधन अभ्यास हुआ था, जिसमें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की भूमिका रही।
- भारत के लिए आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति एक-दूसरे से जुड़ी हैं। पूर्वोत्तर की सीमाएँ म्यांमार और बांग्लादेश से लगती हैं, और उग्रवाद, तस्करी तथा अवैध प्रवासन जैसी समस्याओं के समाधान के लिए पड़ोसियों का सहयोग आवश्यक है। यह सहयोग संपर्क परियोजनाओं (कलादान बहु-मॉडल परियोजना, भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग) की सुरक्षा के लिए भी उपयोगी है।
- संवैधानिक दृष्टि से विदेशी मामले, संधियाँ और समझौते संघ सूची (प्रविष्टि 10 और 14) में आते हैं। अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के संवर्धन का निर्देश देता है और अनुच्छेद 253 अंतरराष्ट्रीय समझौतों के क्रियान्वयन हेतु संसद को विधि बनाने की शक्ति देता है। पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं, इसलिए अभिसमयों के क्रियान्वयन में केंद्र-राज्य समन्वय आवश्यक है।
- चुनौतियाँ: सदस्य देशों की सुरक्षा प्राथमिकताओं और द्विपक्षीय संबंधों में अंतर; सचिवालय के सीमित संसाधन; 2004 में शुरू हुई मुक्त व्यापार समझौता वार्ता का अब तक पूरा न होना; तथा म्यांमार की आंतरिक अस्थिरता और रोहिंग्या जैसे शरणार्थी प्रश्न।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| बिम्सटेक का स्वरूप | बिम्सटेक (BIMSTEC) का पूरा नाम बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) है। इसकी स्थापना 1997 की बैंकॉक घोषणा से हुई। सदस्य 7 हैं: भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड। इस प्रकार यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक सेतु है। |
| गृह मंत्रियों की पहली बैठक | नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई यह बैठक बिम्सटेक में गृह मंत्री स्तर का पहला औपचारिक मंच है। अब तक सुरक्षा सहयोग मुख्यतः विदेश मंत्रियों, सुरक्षा सलाहकारों और विशेषज्ञ समूहों के स्तर पर चलता रहा है। यह बैठक सहयोग को राजनीतिक और परिचालन, दोनों स्तरों पर मज़बूत करती है। |
| सुरक्षा क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका | बिम्सटेक के क्षेत्रीय सहयोग ढाँचे में आतंकवाद-रोधी और सीमा-पार अपराध (सुरक्षा) क्षेत्र का नेतृत्व भारत के पास है। गृह मंत्रियों की बैठक भारत की इस भूमिका को संस्थागत रूप देती है। |
| सहयोग के प्रमुख विषय | बिम्सटेक के पूर्व सहमत ढाँचे में आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, आपदा प्रबंधन और आपराधिक मामलों में परस्पर विधिक सहायता जैसे विषय शामिल हैं। गृह मंत्री स्तर पर इनके क्रियान्वयन की समीक्षा की जा सकती है। |
| बिम्सटेक चार्टर, 2022 | 2022 में पाँचवें शिखर सम्मेलन में बिम्सटेक चार्टर अपनाया गया। इससे संगठन को औपचारिक कानूनी व्यक्तित्व और स्पष्ट संस्थागत ढाँचा मिला। मंत्री-स्तरीय बैठकों की नियमितता इसी संस्थागत सुदृढ़ीकरण का हिस्सा है। |
| भौगोलिक और सामरिक महत्त्व | बंगाल की खाड़ी के तटवर्ती और निकटवर्ती देश भारत की पूर्वी तटरेखा और पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा से सीधे जुड़े हैं। यह मंच भारत की ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbourhood First) और ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East) नीतियों को आंतरिक सुरक्षा के आयाम से जोड़ता है। |
महत्व
आंतरिक सुरक्षा संबंधी महत्त्व
- भारत की पूर्वी और पूर्वोत्तर सीमाएँ बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल और भूटान से लगती हैं। इन सीमाओं पर उग्रवाद, तस्करी और अवैध प्रवास की चुनौतियाँ पड़ोसी देशों के सहयोग के बिना नहीं सुलझ सकतीं।
- गृह मंत्रियों का सीधा संवाद आतंकवाद, मादक पदार्थों और मानव तस्करी से जुड़े अपराधी नेटवर्कों के विरुद्ध खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को तेज़ कर सकता है।
- साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी और कट्टरपंथ के ऑनलाइन प्रसार जैसे नए खतरों से निपटने के लिए सदस्य देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक है।
सामरिक और कूटनीतिक महत्त्व
- सार्क (SAARC) की निष्क्रियता के बीच बिम्सटेक भारत के लिए ऐसा क्षेत्रीय मंच है जिसमें पाकिस्तान शामिल नहीं है, इसलिए सुरक्षा सहयोग पर आगे बढ़ना अपेक्षाकृत सरल है।
- बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती उपस्थिति के संदर्भ में यह मंच भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था गढ़ने में नेतृत्वकारी भूमिका देता है।
- सुरक्षा क्षेत्र की अग्रणी भूमिका से भारत की ‘प्रथम प्रतिक्रियादाता’ और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता की छवि मज़बूत होती है।
आर्थिक और संपर्क संबंधी महत्त्व
- सुरक्षित सीमाएँ और समुद्री मार्ग व्यापार, पारगमन और बहुविध संपर्क परियोजनाओं की पूर्व-शर्त हैं। सुरक्षा सहयोग से आर्थिक एकीकरण को स्थिर आधार मिलता है।
- पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाली संपर्क परियोजनाओं की सफलता सीमा-पार अपराधों पर नियंत्रण पर निर्भर है।
आपदा और मानवीय सहयोग
- बंगाल की खाड़ी चक्रवात, बाढ़ और सुनामी के प्रति संवेदनशील है। गृह मंत्रालय आपदा प्रबंधन का नोडल मंत्रालय है, इसलिए साझा पूर्व-चेतावनी, खोज एवं बचाव और राहत समन्वय इस मंच के स्वाभाविक विषय हैं।
- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) जैसे बलों के प्रशिक्षण और संयुक्त अभ्यास से क्षेत्रीय क्षमता निर्माण संभव है।
चुनौतियाँ
1. संस्थागत कमज़ोरी और धीमी गति
- बिम्सटेक की स्थापना को लगभग तीन दशक हो चुके हैं, किंतु शिखर सम्मेलन बहुत कम हुए हैं और अनेक समझौते लंबे समय तक अनुसमर्थन की प्रतीक्षा में रहे हैं।
- सचिवालय ढाका में है, पर उसके संसाधन और अधिकार सीमित हैं, इसलिए निर्णयों का अनुवर्तन कमज़ोर रहता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ और क्षेत्रीय समूह
2. पड़ोसी देशों में राजनीतिक अस्थिरता
- म्यांमार में आंतरिक संघर्ष और अन्य सदस्य देशों में राजनीतिक परिवर्तन सहयोग की निरंतरता को प्रभावित करते हैं।
- बदलती सरकारों के कारण सुरक्षा समझौतों के प्रति प्रतिबद्धता अनिश्चित हो जाती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत और उसके पड़ोसी देश
3. खतरे की अलग-अलग धारणा
- सदस्य देश आतंकवाद, उग्रवाद और प्रवासन को अलग-अलग ढंग से परिभाषित करते हैं। भारत की चिंताएँ थाईलैंड या श्रीलंका की प्राथमिकताओं से भिन्न हैं।
- आपसी विश्वास की कमी के कारण खुफिया सूचना साझा करने में हिचक रहती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा पर बाहरी राज्य और गैर-राज्य तत्त्वों का प्रभाव
4. सीमा प्रबंधन और सीमा-पार अपराध
- खुली और दुर्गम सीमाओं, विशेषकर भारत-म्यांमार सीमा, से हथियारों, नशीले पदार्थों और मानव तस्करी का जोखिम बना रहता है। म्यांमार का स्वर्णिम त्रिभुज (Golden Triangle) क्षेत्र मादक पदार्थों के उत्पादन के लिए कुख्यात है।
- सीमावर्ती समुदायों के पारंपरिक आवागमन और सुरक्षा की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाना कठिन है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ और उनका प्रबंधन
5. विधिक और क्षमता संबंधी अंतर
- सदस्य देशों के आपराधिक कानून, प्रत्यर्पण व्यवस्था और साक्ष्य के नियम भिन्न हैं, जिससे परस्पर विधिक सहायता और संयुक्त जाँच में बाधा आती है।
- पुलिस, फ़ोरेंसिक और साइबर क्षमताओं में असमानता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध
6. बाह्य शक्तियों की प्रतिस्पर्धा
- बंगाल की खाड़ी में चीन की अवसंरचना और सामरिक उपस्थिति कुछ सदस्य देशों के निर्णयों को प्रभावित कर सकती है।
- भारत-केंद्रित सुरक्षा ढाँचे के प्रति छोटे देशों में आशंका रह सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सचिवालय की क्षमता | सीमित संसाधन और अधिकार के कारण निर्णयों का अनुवर्तन और निगरानी कमज़ोर |
| अनुसमर्थन में विलंब | हस्ताक्षरित सम्मेलनों का सभी सदस्य देशों द्वारा देर से या अपूर्ण अनुसमर्थन |
| म्यांमार की स्थिति | आंतरिक संघर्ष से सीमा पर अस्थिरता, शरणार्थी प्रवाह और मादक पदार्थों की तस्करी |
| खुफिया सूचना साझा करना | विश्वास की कमी और संवेदनशील सूचना के दुरुपयोग का भय |
| विधिक असमानता | प्रत्यर्पण और परस्पर विधिक सहायता में भिन्न कानूनी प्रक्रियाएँ |
| संघीय समन्वय | पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं, इसलिए सीमावर्ती राज्यों की भागीदारी आवश्यक |
आगे की राह
- गृह मंत्रियों की बैठक को नियमित (वार्षिक या द्विवार्षिक) रूप दिया जाए और उसके निर्णयों की प्रगति की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का स्थायी तंत्र बनाया जाए।
- आतंकवाद, संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी पर हुए सम्मेलनों के अनुसमर्थन और क्रियान्वयन में तेज़ी लाई जाए।
- सदस्य देशों की एजेंसियों के बीच सुरक्षित और संरचित खुफिया सूचना साझा करने की प्रणाली तथा संपर्क अधिकारियों की व्यवस्था विकसित की जाए।
- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और पुलिस अकादमियों के माध्यम से संयुक्त प्रशिक्षण, साइबर फ़ोरेंसिक और आपदा अभ्यासों द्वारा छोटे सदस्य देशों की क्षमता निर्माण किया जाए।
- समुद्री सुरक्षा, तटीय निगरानी और समुद्री अपराधों पर सूचना साझा करने का क्षेत्रीय ढाँचा बनाया जाए।
- बिम्सटेक सचिवालय को पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधन देकर सुदृढ़ किया जाए।
- सीमावर्ती राज्यों को परामर्श प्रक्रिया में शामिल कर केंद्र-राज्य समन्वय सुनिश्चित किया जाए, क्योंकि पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य के विषय हैं।
- सुरक्षा सहयोग को व्यापार, पारगमन और संपर्क परियोजनाओं के साथ जोड़ा जाए ताकि सदस्य देशों को साझा आर्थिक लाभ दिखे और आपसी विश्वास बढ़े।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बिम्सटेक (BIMSTEC) – दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सेतु · पड़ोसी पहले नीति (Neighbourhood First) एवं एक्ट ईस्ट नीति · सीमा-पार संगठित अपराध एवं आतंकवाद-रोधी सहयोग · पारस्परिक विधिक सहायता एवं प्रत्यर्पण · बंगाल की खाड़ी की समुद्री सुरक्षा · मादक पदार्थों एवं मानव तस्करी की रोकथाम · आपदा प्रबंधन एवं साइबर सुरक्षा सहयोग · बिम्सटेक चार्टर, 2022 एवं संस्थागत ढाँचा · सार्क (SAARC) की शिथिलता एवं क्षेत्रीय विकल्प · सुरक्षा-सहयोग में संप्रभुता बनाम साझा हित · खुली सीमा एवं सीमा प्रबंधन (भारत-म्याँमार, भारत-नेपाल, भारत-बांग्लादेश) · क्षेत्रीय संपर्क एवं सुरक्षा का अंतर्संबंध
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51 — अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और सहयोग का संवर्धन
- अनुच्छेद 253 — अंतरराष्ट्रीय करारों के क्रियान्वयन हेतु संसद की विधायी शक्ति
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 10 और 14 — विदेश कार्य, संधियाँ और करार
- सातवीं अनुसूची, राज्य सूची प्रविष्टि 1 और 2 — लोक व्यवस्था और पुलिस राज्य के विषय
अवधारणा प्रवाह
साझा समुद्री और स्थलीय सीमाएँ → साझा सुरक्षा खतरे (आतंकवाद, तस्करी, साइबर अपराध, आपदा) → सार्क की निष्क्रियता → बिम्सटेक का क्षेत्रीय सहयोग मंच के रूप में उभार → बिम्सटेक चार्टर, 2022 → संस्थागत ढाँचे का सुदृढ़ीकरण → भारत की सुरक्षा क्षेत्र में अग्रणी भूमिका → गृह मंत्रियों की पहली बैठक का आयोजन → मंत्री-स्तरीय संवाद → खुफिया सूचना साझा करने, संयुक्त प्रशिक्षण और विधिक सहयोग पर सहमति → सुरक्षित सीमाएँ और समुद्री मार्ग → व्यापार, संपर्क और आर्थिक एकीकरण को स्थिरता → क्षेत्रीय स्थिरता → भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों की सफलता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. बहुक्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग हेतु बंगाल की खाड़ी पहल (BIMSTEC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसकी स्थापना 1997 में बैंकॉक घोषणा-पत्र द्वारा हुई थी।
2. मालदीव इसका सदस्य देश है।
3. इसका सचिवालय ढाका में स्थित है।
4. इसके सभी सात सदस्य देश बंगाल की खाड़ी के तटवर्ती राज्य हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: जून 1997 की बैंकॉक घोषणा से चार सदस्यों के साथ BIST-EC बना, जो आगे चलकर BIMSTEC कहलाया। कथन 2 गलत है: सदस्य बांग्लादेश, भारत, म्याँमार, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल और भूटान हैं, मालदीव नहीं। कथन 3 सही है: सचिवालय ढाका में है। कथन 4 गलत है: नेपाल और भूटान स्थलरुद्ध देश हैं।
Q2. अभिकथन (A): बिम्सटेक को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सेतु माना जाता है।
कारण (R): इसके सदस्यों में नेपाल और भूटान जैसे दक्षिण एशियाई देश तथा म्याँमार और थाईलैंड जैसे आसियान (ASEAN) देश, दोनों सम्मिलित हैं।
निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सही है, किंतु R गलत है
- A गलत है, किंतु R सही है
उत्तर: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है — बिम्सटेक में दक्षिण एशिया के पाँच देश (बांग्लादेश, भारत, नेपाल, भूटान, श्रीलंका) और आसियान के दो देश (म्याँमार, थाईलैंड) हैं। यही संरचना इसे दोनों क्षेत्रों के बीच सेतु बनाती है, इसलिए R, A की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा देश बिम्सटेक का सदस्य नहीं है?
- म्याँमार
- भूटान
- मालदीव
- श्रीलंका
उत्तर: मालदीव — बिम्सटेक के सात सदस्य बांग्लादेश, भारत, म्याँमार, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल और भूटान हैं। मालदीव सदस्य नहीं है। नेपाल और भूटान 2004 में जुड़े थे।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ बिम्सटेक के गृह मंत्रियों की पहली बैठक नई दिल्ली में हुई है। इस संदर्भ में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र की साझा आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में बिम्सटेक की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि इस सहयोग को प्रभावी बनाने में कौन-सी संस्थागत एवं राजनयिक बाधाएँ हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है। (15 Marks)
रूपरेखा: भूमिका: बिम्सटेक की स्थापना 1997 (बैंकॉक घोषणा), सात सदस्य, 2004 में नेपाल और भूटान का प्रवेश। 2022 का बिम्सटेक चार्टर इसे औपचारिक विधिक व्यक्तित्व देता है। सार्क की शिथिलता के बीच यह ‘पड़ोसी पहले’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों का मंच है। गृह मंत्रियों की बैठक का अर्थ है कि सहयोग आर्थिक क्षेत्र से सुरक्षा-शासन तक पहुँच रहा है।
साझा चुनौतियाँ: (1) सीमा-पार आतंकवाद और उग्रवाद; (2) मादक पदार्थों की तस्करी, जिसमें गोल्डन ट्रायंगल और गोल्डन क्रीसेंट से जुड़े मार्ग हैं; (3) मानव तस्करी, हथियारों की तस्करी और जाली मुद्रा; (4) समुद्री सुरक्षा, जिसमें अवैध मत्स्यन, समुद्री डकैती और तस्करी शामिल हैं; (5) साइबर अपराध; (6) चक्रवात और बाढ़ जैसी आपदाएँ; (7) शरणार्थी प्रवाह और खुली सीमाओं का दुरुपयोग।
अब तक का ढाँचा: 14 क्षेत्रों में से आतंकवाद-रोधी एवं सीमा-पार अपराध, आपदा प्रबंधन तथा ऊर्जा में भारत की अग्रणी भूमिका। 2009 का बिम्सटेक अभिसमय (अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, संगठित अपराध और मादक पदार्थ तस्करी के विरुद्ध) एवं आपराधिक मामलों में पारस्परिक विधिक सहायता पर 2019 का अभिसमय। साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठकें और संयुक्त कार्य समूह।
बाधाएँ: (1) संस्थागत क्षमता की कमी, क्योंकि सचिवालय छोटा है और उसके पास संसाधन सीमित हैं; (2) अभिसमयों के अनुसमर्थन एवं क्रियान्वयन में विलंब; (3) द्विपक्षीय विवाद, जैसे रोहिंग्या संकट, सीमा और जल-बँटवारे के मुद्दे; (4) सुरक्षा-सहयोग में संप्रभुता की आशंकाएँ और विश्वास की कमी; (5) म्याँमार की आंतरिक अस्थिरता; (6) सदस्य देशों के बीच विधिक प्रणालियों और प्रत्यर्पण-प्रक्रियाओं की असमानता।
सुझाव: सूचना-साझेदारी एवं खुफिया समन्वय का स्थायी तंत्र; सचिवालय का सुदृढ़ीकरण; अभिसमयों का समयबद्ध अनुसमर्थन; संयुक्त समुद्री एवं आपदा अभ्यास; साझा क्षमता-निर्माण एवं प्रशिक्षण; सीमा-प्रबंधन प्रौद्योगिकी का साझा उपयोग; सुरक्षा को संपर्क (कलादान परियोजना, त्रिपक्षीय राजमार्ग, परिवहन संपर्क मास्टर प्लान) और व्यापार से जोड़ना।
संतुलित निष्कर्ष: सुरक्षा-सहयोग बिम्सटेक को सार्क के विकल्प से आगे ठोस क्षेत्रीय संस्था बना सकता है। इसके लिए भारत को बड़े देश के रूप में विश्वास-निर्माण, पारस्परिकता और समावेशी निर्णय-प्रक्रिया अपनानी होगी।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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