बक्सा टाइगर रिजर्व में पहली बार बाघिन का पुनर्वास: जानिए पूरा मामला

बक्सा टाइगर रिजर्व में पहली बार बाघिन का पुनर्वास: जानिए पूरा मामला

बक्सा टाइगर रिजर्व में पहली बार बाघिन का पुनर्वास: जानिए पूरा मामला

बुक्सा में बाघ पुनर्वास प्रक्रियाबाघों की अनुपस्थितिस्थानीय विलुप्तिपुनर्स्थापन कार्यक्रम NTCA + राज्यबाघों का स्थानांतरणवैज्ञानिक प्रोटोकॉलबुक्सा में पुनर्स्थापननिगरानी सहितपारिस्थितिकी संतुलनखाद्य श्रृंखलाजैव विविधता बढ़ेअंब्रेला प्रजाति
बुक्सा में बाघ पुनर्वास प्रक्रिया

✎ बाघ पुनर्वास कार्यक्रम का उद्देश्य उन क्षेत्रों में बाघों की आबादी को फिर से स्थापित करना है जहाँ वे स्थानीय रूप से विलुप्त हो गए हैं, जिससे जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा मिल सके।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, जैव विविधता और आपदा प्रबंधन  |  GS Paper III — संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन
  • Prelims: बाघ पुनर्वास कार्यक्रम, बुक्सा टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), प्रोजेक्ट टाइगर, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन
  • Essay: भारत में वन्यजीव संरक्षण के प्रयास और चुनौतियाँ, जैव विविधता का महत्व और मानव जीवन पर इसके प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: बाघ पुनर्वास कार्यक्रम का उद्देश्य उन क्षेत्रों में बाघों की आबादी को फिर से स्थापित करना है जहाँ वे स्थानीय रूप से विलुप्त हो गए हैं, जिससे जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा मिल सके।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

यह कदम बुक्सा में बाघों की आबादी को फिर से स्थापित करने और क्षेत्र की जैव विविधता को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है, जो लंबे समय से बाघों की कम संख्या से जूझ रहा था। इस पहल से वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में बाघों की आबादी में गिरावट को रोकने के लिए 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) लॉन्च किया गया था।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) देश में बाघ संरक्षण के प्रयासों के लिए एक वैधानिक निकाय है, जिसका गठन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) के तहत किया गया है।
  • बुक्सा टाइगर रिजर्व पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित है और यह पूर्वी हिमालय के तलहटी में स्थित है। यह क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में यहाँ बाघों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई थी।
  • बाघ पुनर्वास कार्यक्रम का उद्देश्य उन क्षेत्रों में बाघों को फिर से स्थापित करना है जहाँ उनकी स्थानीय आबादी विलुप्त हो गई है या गंभीर रूप से कम हो गई है, ताकि पारिस्थितिक संतुलन (ecological balance) बहाल किया जा सके।
  • यह पुनर्वास कार्यक्रम NTCA और राज्य वन विभाग के सहयोग से चलाया जा रहा है, जिसमें बाघों के स्थानांतरण और उनकी निगरानी के लिए वैज्ञानिक प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है।

बाघ पुनर्वास कार्यक्रम क्या है?

  • बाघ पुनर्वास कार्यक्रम एक संरक्षण रणनीति है जिसका उद्देश्य उन प्राकृतिक आवासों में बाघों की आबादी को फिर से स्थापित करना है जहाँ वे स्थानीय रूप से विलुप्त हो गए हैं या उनकी संख्या बहुत कम हो गई है।
  • इस कार्यक्रम के तहत, स्वस्थ बाघों को उन क्षेत्रों से पकड़ा जाता है जहाँ उनकी आबादी स्थिर है, और उन्हें सावधानीपूर्वक नए आवासों में स्थानांतरित किया जाता है।
  • पुनर्वास से पहले, नए आवास की वहन क्षमता (carrying capacity), शिकार आधार (prey base) की उपलब्धता और मानव-वन्यजीव संघर्ष (human-wildlife conflict) की संभावना का गहन मूल्यांकन किया जाता है।
  • स्थानांतरित किए गए बाघों की निरंतर निगरानी की जाती है, जिसमें रेडियो कॉलर (radio collar) और अन्य तकनीकों का उपयोग करके उनके व्यवहार, आंदोलन और अनुकूलन का अध्ययन किया जाता है।
  • इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य बाघों के आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) को बढ़ाना और उनके प्राकृतिक आवासों में एक व्यवहार्य और आत्म-निर्भर आबादी स्थापित करना है।
  • यह पहल न केवल बाघों के संरक्षण में मदद करती है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) के स्वास्थ्य को भी सुधारती है, क्योंकि बाघ एक शीर्ष शिकारी (apex predator) के रूप में खाद्य श्रृंखला (food chain) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
बाघों का पुनर्स्थापन बुक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी को फिर से स्थापित करने का प्रयास, जो दशकों से अनुपस्थित थे।
आनुवंशिक विविधता अन्य क्षेत्रों से बाघों को लाकर आनुवंशिक विविधता को बढ़ाना और स्थानीय आबादी को मजबूत करना।
पारिस्थितिकी संतुलन बाघों की वापसी से रिजर्व के पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बहाल होगा, क्योंकि वे शीर्ष शिकारी हैं।
पर्यावरण पर्यटन बाघों की उपस्थिति से पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
संरक्षण प्रयासों का विस्तार यह कार्यक्रम भारत में बाघ संरक्षण के व्यापक प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अन्य रिजर्व के लिए एक मॉडल बन सकता है।

महत्व

पर्यावरण और पारिस्थितिकी महत्व

  • बुक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की वापसी से खाद्य श्रृंखला (food chain) में संतुलन स्थापित होगा, जिससे शाकाहारी जीवों की आबादी नियंत्रित होगी और वनस्पति पर दबाव कम होगा।
  • यह जैव विविधता (biodiversity) के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, क्योंकि बाघ एक ‘अंब्रेला प्रजाति’ (umbrella species) हैं, जिनके संरक्षण से कई अन्य प्रजातियों का भी संरक्षण होता है।
  • वन्यजीव गलियारों (wildlife corridors) की बहाली और सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा, जो विभिन्न संरक्षित क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही के लिए आवश्यक हैं।

सामाजिक और आर्थिक महत्व

  • बाघों की उपस्थिति से बुक्सा टाइगर रिजर्व में पर्यावरण पर्यटन (eco-tourism) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करने से मानव-वन्यजीव संघर्ष (human-wildlife conflict) को कम करने में मदद मिलेगी और सह-अस्तित्व को बढ़ावा मिलेगा।
  • यह कार्यक्रम स्थानीय लोगों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता और स्वामित्व की भावना को बढ़ाएगा।

शासन और नीतिगत महत्व

  • यह ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ (Project Tiger) के तहत भारत सरकार और राज्य सरकारों के बीच सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो संघीय ढांचे (federal structure) में पर्यावरण संरक्षण के महत्व को दर्शाता है।
  • यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) के प्रभावी कार्यान्वयन को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध वन्यजीव विरासत की रक्षा करना है।
  • पुनर्स्थापन कार्यक्रम वैज्ञानिक प्रबंधन और निगरानी के महत्व को रेखांकित करता है, जो दीर्घकालिक संरक्षण सफलता के लिए आवश्यक है।

चुनौतियाँ

1. आवास का विखंडन और क्षरण

  • मानवीय गतिविधियों जैसे कृषि, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और अतिक्रमण के कारण बाघों के प्राकृतिक आवास का विखंडन हो रहा है।
  • वन्यजीव गलियारों की कमी या अवरोध से बाघों की आवाजाही बाधित होती है, जिससे उनकी आबादी अलग-थलग पड़ जाती है।

2. मानव-वन्यजीव संघर्ष

  • बाघों के पुनर्स्थापन से स्थानीय समुदायों के साथ संघर्ष की संभावना बढ़ सकती है, खासकर यदि बाघ मानव बस्तियों के करीब आएं।
  • पशुधन पर हमलों से स्थानीय लोगों में बाघों के प्रति नकारात्मक धारणा बन सकती है, जिससे संरक्षण प्रयासों में बाधा आ सकती है।

3. अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार

  • बाघों के अंगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च मांग के कारण अवैध शिकार एक गंभीर खतरा बना हुआ है।
  • प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन की कमी से शिकारी आसानी से बाघों को निशाना बना सकते हैं।

4. आनुवंशिक विविधता और स्वास्थ्य

  • पुनर्स्थापित बाघों की आनुवंशिक विविधता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है ताकि अंतःप्रजनन (inbreeding) से बचा जा सके और आबादी को मजबूत किया जा सके।
  • रोगों का प्रसार भी एक चुनौती हो सकता है, खासकर यदि बाघों को नए वातावरण में लाया जाए।

5. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

  • जलवायु परिवर्तन से बाघों के आवास और शिकार आधार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे उनके अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
  • बदलते मौसम पैटर्न और चरम मौसमी घटनाएं बाघों के व्यवहार और प्रजनन को प्रभावित कर सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पर्याप्त शिकार आधार बुक्सा में बाघों के लिए पर्याप्त शिकार (हिरण, सांभर आदि) उपलब्ध होना चाहिए ताकि वे मानव बस्तियों की ओर न जाएं।
स्थानीय समुदाय का सहयोग पुनर्स्थापन कार्यक्रम की सफलता के लिए स्थानीय समुदायों का विश्वास और सहयोग आवश्यक है, विशेषकर मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन में।
पर्यावास की गुणवत्ता बाघों के लिए उपयुक्त और सुरक्षित आवास सुनिश्चित करना, जिसमें पानी के स्रोत और पर्याप्त आवरण शामिल हों।
दीर्घकालिक निगरानी पुनर्स्थापित बाघों के अनुकूलन, स्वास्थ्य और प्रजनन की निरंतर निगरानी और डेटा संग्रह आवश्यक है।
अवैध शिकार विरोधी उपाय अवैध शिकार को रोकने के लिए प्रभावी गश्त, प्रौद्योगिकी का उपयोग और स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय महत्वपूर्ण है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA)

आगे की राह

  • बुक्सा टाइगर रिजर्व में शिकार आधार को मजबूत करने के लिए शाकाहारी जीवों की आबादी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ नियमित संवाद और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
  • अवैध शिकार को रोकने के लिए गश्त और निगरानी प्रणाली को आधुनिक तकनीकों (जैसे ड्रोन, थर्मल कैमरे) के साथ मजबूत किया जाना चाहिए।
  • बाघों के पुनर्स्थापन के बाद उनके अनुकूलन और स्वास्थ्य की निरंतर वैज्ञानिक निगरानी की जानी चाहिए।
  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए और उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए।
  • बुक्सा टाइगर रिजर्व के आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीव गलियारों की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन किया जाना चाहिए और उसके अनुसार संरक्षण रणनीतियों को अनुकूलित किया जाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

बाघ संरक्षण · बुक्सा टाइगर रिजर्व · बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम · वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 · प्रोजेक्ट टाइगर · राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण · पारिस्थितिक संतुलन · जैव विविधता संरक्षण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

बुक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की अनुपस्थिति  →  बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम की शुरुआत  →  अन्य क्षेत्रों से बाघों का स्थानांतरण  →  बुक्सा में बाघों का पुनर्स्थापन  →  पारिस्थितिकी संतुलन की बहाली  →  जैव विविधता और पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. बुक्सा टाइगर रिजर्व पश्चिम बंगाल में स्थित है।
2. भारत में बाघों की आबादी में वृद्धि के लिए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ 1973 में शुरू किया गया था।
3. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) एक सांविधिक निकाय है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। बुक्सा टाइगर रिजर्व पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित है। कथन 2 सही है। प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में बाघों के संरक्षण और उनकी आबादी बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। कथन 3 सही है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में संशोधन करके एक सांविधिक दर्जा दिया गया है।

Q2. भारत में बाघों के पुनर्स्थापन कार्यक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में बाघों को फिर से स्थापित करना है जहाँ उनकी स्थानीय आबादी विलुप्त हो गई है।
2. यह कार्यक्रम केवल उन बाघों पर केंद्रित है जिन्हें मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण विस्थापित किया गया है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है। बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में बाघों की आबादी को फिर से स्थापित करना है जहाँ वे स्थानीय रूप से विलुप्त हो गए हैं या उनकी संख्या बहुत कम हो गई है, ताकि पारिस्थितिक संतुलन बहाल किया जा सके। कथन 2 गलत है। यह कार्यक्रम केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण विस्थापित हुए बाघों पर केंद्रित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य बाघों की आबादी को बढ़ाना और उनके आवासों को मजबूत करना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में बाघों के पुनर्स्थापन कार्यक्रम के महत्व पर चर्चा कीजिए और इसके सफल कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय और इसका उद्देश्य।
महत्व: पारिस्थितिक संतुलन, जैव विविधता संरक्षण, खाद्य श्रृंखला में भूमिका, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव।
चुनौतियाँ: आवास का विखंडन, मानव-वन्यजीव संघर्ष, अवैध शिकार, स्थानीय समुदायों का विस्थापन और उनकी आजीविका पर प्रभाव, पर्याप्त फंडिंग और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव।
आगे की राह: सामुदायिक भागीदारी, वैज्ञानिक निगरानी, आवास सुधार, अवैध शिकार विरोधी उपायों को मजबूत करना, कॉरिडोर कनेक्टिविटी।
निष्कर्ष: बाघ संरक्षण के समग्र प्रयासों में पुनर्स्थापन कार्यक्रम की भूमिका और सतत विकास के लिए इसका महत्व।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

West Bengal PCS (WBPSC / WBCS) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्वास कार्यक्रम के तहत पहली बार छोड़ी गई मादा बाघिन का नाम क्या है?

  1. A. सुंदरी
  2. B. मंजू
  3. C. सोनम
  4. D. रानी

उत्तर: B. मंजू — मंजू नामक मादा बाघिन को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री द्वारा बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया था।

Mains: बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्वास कार्यक्रम के महत्व और पश्चिम बंगाल के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों पर प्रकाश डालिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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