दिल्ली के वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए समयबद्ध कार्यवाही की अपील

दिल्ली के वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए समयबद्ध कार्यवाही की अपील

दिल्ली के वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए समयबद्ध कार्यवाही की अपील

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Air Pollution Mitigation

✎ दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बहुआयामी समस्या है जिसके समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वित प्रयास, समयबद्ध कार्य योजना और जनभागीदारी आवश्यक है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (Environment and Ecology)  |  GS Paper II — शासन (Governance), केंद्र-राज्य संबंध (Centre-State Relations)
  • Prelims: वायु प्रदूषण (Air Pollution), राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP), वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI), पराली जलाना (Stubble Burning), वाहनों से होने वाला प्रदूषण (Vehicular Pollution), निर्माण और विध्वंस गतिविधियाँ (Construction and Demolition Activities)
  • Essay: वायु प्रदूषण: एक अदृश्य हत्यारा और सतत विकास की चुनौतियाँ, संघवाद और पर्यावरण संरक्षण: भारत के महानगरों में वायु गुणवत्ता में सुधार की दिशा में चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बहुआयामी समस्या है जिसके समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वित प्रयास, समयबद्ध कार्य योजना और जनभागीदारी आवश्यक है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने दिल्ली की वायु प्रदूषण शमन योजना की समीक्षा की। इस बैठक में मंत्री ने समयबद्ध, समन्वित कार्रवाई और जनभागीदारी का आह्वान किया, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए एक गंभीर और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह बैठक दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग के महत्व को दर्शाती है।

पृष्ठभूमि

  • दिल्ली विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है, जहाँ सर्दियों के महीनों में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी तक पहुँच जाती है।
  • वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से निकलने वाली धूल, पराली जलाना और मौसम संबंधी कारक शामिल हैं।
  • वायु प्रदूषण से श्वसन संबंधी बीमारियाँ, हृदय रोग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भारी बोझ पड़ता है।
  • भारत सरकार ने 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP) शुरू किया था, जिसका उद्देश्य देश भर में वायु प्रदूषण को कम करना है।
  • सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal – NGT) ने समय-समय पर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकारों को निर्देश दिए हैं।
  • दिल्ली और एनसीआर (NCR) में वायु प्रदूषण एक अंतर-राज्यीय मुद्दा है, जिसमें पड़ोसी राज्यों जैसे हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

वायु प्रदूषण क्या है और इसके प्रमुख स्रोत क्या हैं?

  • वायु प्रदूषण (Air Pollution) वातावरण में हानिकारक पदार्थों की उपस्थिति है, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती है।
  • इन हानिकारक पदार्थों में पार्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter – PM2.5 और PM10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (Nitrogen Dioxide – NO2), सल्फर डाइऑक्साइड (Sulphur Dioxide – SO2), कार्बन मोनोऑक्साइड (Carbon Monoxide – CO) और ओजोन (Ozone – O3) शामिल हैं।
  • वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, विशेष रूप से डीजल और पेट्रोल से चलने वाले वाहनों से, शहरी वायु प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है।
  • उद्योगों से निकलने वाले धुएँ और अपशिष्ट पदार्थ, जैसे कि कोयला आधारित बिजली संयंत्र और ईंट भट्टे, वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
  • निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से उत्पन्न होने वाली धूल, विशेषकर बड़े शहरों में, पार्टिकुलेट मैटर के स्तर को बढ़ाती है।
  • कृषि अपशिष्ट (जैसे पराली) को जलाना, विशेषकर फसल कटाई के मौसम में, पड़ोसी राज्यों से दिल्ली की ओर धुएँ और प्रदूषकों का एक बड़ा स्रोत है।
  • घरेलू ऊर्जा के लिए बायोमास और कोयले का उपयोग, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, इनडोर और आउटडोर वायु प्रदूषण दोनों में योगदान देता है।
  • मौसम संबंधी कारक जैसे कम हवा की गति, तापमान का व्युत्क्रमण (Temperature Inversion) और नमी भी प्रदूषकों को वातावरण में फँसाकर वायु प्रदूषण की तीव्रता को बढ़ा सकते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
समन्वित कार्रवाई वायु प्रदूषण एक बहु-क्षेत्रीय समस्या है जिसके समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक है।
समयबद्ध कार्य योजना प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को प्रभावी बनाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निश्चित समय-सीमा के भीतर लक्ष्यों को प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।
जनभागीदारी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के बिना वायु प्रदूषण से निपटना असंभव है, क्योंकि व्यवहारगत परिवर्तन और जन जागरूकता दीर्घकालिक समाधान के लिए आवश्यक हैं।
नियमित समीक्षा योजनाओं की प्रगति और प्रभावशीलता का आकलन करने तथा आवश्यकतानुसार सुधार करने के लिए नियमित समीक्षा बैठकें महत्वपूर्ण हैं।
ठोस कार्य योजना केवल योजनाएँ बनाने के बजाय, उन पर ठोस और प्रभावी तरीके से अमल करना ही वास्तविक परिणाम दे सकता है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • दिल्ली में वायु प्रदूषण का उच्च स्तर न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता है, जो जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित करता है।
  • वायु गुणवत्ता में सुधार से जैव विविधता (Biodiversity) और प्राकृतिक संसाधनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे समग्र पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ होगा।

सामाजिक महत्व

  • खराब वायु गुणवत्ता नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियाँ, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ती हैं।
  • स्वच्छ हवा एक मौलिक मानवाधिकार है, और प्रदूषण को कम करने के प्रयास नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता और कल्याण में सुधार करते हैं।

शासनिक महत्व

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग संघवाद (Federalism) की भावना को मजबूत करता है और साझा समस्याओं के समाधान के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करता है।
  • प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं की प्रभावी समीक्षा और कार्यान्वयन सार्वजनिक प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है।

आर्थिक महत्व

  • वायु प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों से स्वास्थ्य सेवा लागत में वृद्धि होती है और उत्पादकता में कमी आती है, जिससे अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • स्वच्छ ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकियों में निवेश से नए आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं और सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा मिल सकता है।

चुनौतियाँ

1. बहु-क्षेत्रीय समन्वय का अभाव

  • वायु प्रदूषण के कई स्रोत हैं (वाहन, उद्योग, निर्माण, पराली जलाना) और इन सभी को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों और राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसमें अक्सर कमी देखी जाती है।
  • अलग-अलग राज्यों और स्थानीय निकायों की अपनी प्राथमिकताएँ और संसाधन होते हैं, जिससे एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना मुश्किल हो जाता है।

2. प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढाँचे की कमी

  • प्रदूषणकारी उद्योगों और वाहनों के लिए उन्नत उत्सर्जन नियंत्रण प्रौद्योगिकियों को अपनाने में लागत और तकनीकी बाधाएँ आती हैं।
  • सार्वजनिक परिवहन के अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे और चार्जिंग स्टेशनों की कमी इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में बाधा डालती है।

3. जनजागरूकता और व्यवहारगत परिवर्तन

  • नागरिकों में प्रदूषण के स्रोतों और उसके प्रभावों के बारे में जागरूकता की कमी अक्सर व्यक्तिगत स्तर पर प्रदूषण कम करने के प्रयासों में बाधा डालती है।
  • कूड़ा जलाने, वाहनों का अत्यधिक उपयोग करने जैसे व्यवहारों में परिवर्तन लाना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए निरंतर जागरूकता अभियानों की आवश्यकता है।

4. मौसम संबंधी कारक और भौगोलिक स्थिति

  • दिल्ली की भौगोलिक स्थिति (भू-आबद्ध क्षेत्र) और सर्दियों में शांत हवाएँ तथा तापमान का व्युत्क्रमण (Temperature Inversion) प्रदूषकों को वायुमंडल में फँसा लेता है, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।
  • पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने जैसी मौसमी गतिविधियाँ दिल्ली के वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, जिन पर नियंत्रण करना एक अंतर-राज्यीय चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अंतर-राज्यीय समन्वय पड़ोसी राज्यों से आने वाले प्रदूषण (जैसे पराली जलाना) को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी अंतर-राज्यीय सहयोग का अभाव।
बुनियादी ढाँचागत कमी सार्वजनिक परिवहन के अपर्याप्त विकल्प और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग बुनियादी ढाँचे की धीमी प्रगति।
प्रवर्तन और निगरानी प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों के प्रभावी प्रवर्तन और निगरानी में चुनौतियाँ, विशेषकर निर्माण स्थलों और औद्योगिक इकाइयों में।
आर्थिक लागत प्रदूषण नियंत्रण प्रौद्योगिकियों को अपनाने और हरित ऊर्जा स्रोतों में संक्रमण की उच्च प्रारंभिक लागत।
मौसम संबंधी कारक सर्दियों में प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियाँ जो प्रदूषकों को जमा होने देती हैं और वायु गुणवत्ता को खराब करती हैं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP)
  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) द्वारा जारी नीतियाँ और निर्देश

आगे की राह

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक स्थायी अंतर-राज्यीय समिति का गठन किया जाए ताकि वायु प्रदूषण के क्षेत्रीय स्रोतों पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सके।
  • सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए, जिसमें मेट्रो, बस सेवा और अंतिम-मील कनेक्टिविटी का विस्तार शामिल हो, ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो।
  • उद्योगों और निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों के सख्त प्रवर्तन के लिए निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जाए और उल्लंघनकर्ताओं पर कठोर दंड लगाया जाए।
  • पराली जलाने की समस्या के समाधान के लिए किसानों को वैकल्पिक फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों (जैसे इन-सीटू प्रबंधन) के लिए प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग बुनियादी ढाँचे का तेजी से विस्तार किया जाए और खरीद पर सब्सिडी तथा कर प्रोत्साहन दिए जाएँ।
  • जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, जिसमें नागरिकों को प्रदूषण के स्रोतों और व्यक्तिगत स्तर पर इसे कम करने के उपायों के बारे में शिक्षित किया जाए।
  • वायु गुणवत्ता डेटा के संग्रह, विश्लेषण और सार्वजनिक उपलब्धता में सुधार किया जाए ताकि नीतियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जा सके और नागरिकों को सूचित निर्णय लेने में मदद मिल सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वायु प्रदूषण · दिल्ली वायु प्रदूषण · राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) · पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) · ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) · सार्वजनिक भागीदारी · अंतर-राज्यीय समन्वय · सतत विकास · स्वास्थ्य पर प्रभाव · जलवायु परिवर्तन · पराली जलाना

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन के अधिकार में स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार निहित है।
  • अनुच्छेद 48A: राज्य पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन का प्रयास करेगा।
  • अनुच्छेद 256: राज्यों की संघ की कार्यकारी शक्ति का अनुपालन करने की बाध्यता।
  • सातवीं अनुसूची: संघ और राज्य सूची में पर्यावरण से संबंधित विषयों का उल्लेख।

अवधारणा प्रवाह

उच्च वायु प्रदूषण  →  नागरिकों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव  →  पर्यावरण मंत्री द्वारा समीक्षा बैठक  →  समन्वित कार्रवाई और जनभागीदारी पर जोर  →  समयबद्ध कार्य योजना का कार्यान्वयन  →  वायु गुणवत्ता में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक सांविधिक निकाय है जो पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
2. ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) केवल दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में लागू होता है।
3. GRAP के तहत, वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंचने पर निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। CAQM एक सांविधिक निकाय है जिसे वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत स्थापित किया गया है।
कथन 2 गलत है। GRAP दिल्ली और NCR के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी लागू होता है।
कथन 3 सही है। GRAP के चरण III (बहुत खराब वायु गुणवत्ता) के तहत निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाता है।
इसलिए, केवल दो कथन सही हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में से एक है/हैं, विशेषकर सर्दियों के महीनों में?
1. पराली जलाना
2. औद्योगिक उत्सर्जन
3. वाहनों का धुआँ
4. धूल और निर्माण गतिविधियाँ
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — पराली जलाना, औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों का धुआँ और धूल तथा निर्माण गतिविधियाँ, ये सभी वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। विशेषकर सर्दियों में, पराली जलाना और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियाँ दिल्ली-NCR में प्रदूषण को बढ़ाती हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न उपायों पर चर्चा करें। इन उपायों की प्रभावशीलता का आलोचनात्मक परीक्षण करें और इस चुनौती से निपटने के लिए आगे की राह सुझाएँ। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की गंभीरता और इसके कारणों का संक्षिप्त परिचय देकर करें।
मुख्य भाग में, सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न उपायों को विस्तार से बताएँ, जिनमें शामिल हैं:
1. **वैधानिक और संस्थागत ढाँचा:** वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986।
2. **नीतिगत उपाय:** ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के विभिन्न चरण, वाहनों के लिए BS-VI मानक, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन, औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण, निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम।
3. **कृषि संबंधी उपाय:** पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए योजनाएँ, इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन।
4. **सार्वजनिक भागीदारी और जागरूकता:** ‘स्वच्छ वायु’ अभियान, जनभागीदारी के प्रयास।

इसके बाद, इन उपायों की प्रभावशीलता का आलोचनात्मक परीक्षण करें। इसमें शामिल हो सकते हैं:
1. **सकारात्मक प्रभाव:** कुछ हद तक वायु गुणवत्ता में सुधार, जागरूकता में वृद्धि।
2. **चुनौतियाँ और कमियाँ:** अंतर-राज्यीय समन्वय की कमी, कार्यान्वयन में चुनौतियाँ, पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान न होना, अनौपचारिक क्षेत्रों पर नियंत्रण की कठिनाई, आर्थिक लागत।

निष्कर्ष में, इस चुनौती से निपटने के लिए आगे की राह सुझाएँ, जैसे:
1. प्रौद्योगिकी का उपयोग (जैसे स्मॉग टावर, कृत्रिम वर्षा)।
2. पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय और प्रोत्साहन।
3. सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना।
4. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर जोर।
5. दीर्घकालिक और सतत समाधानों पर ध्यान केंद्रित करना।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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