16 Oct तमिलनाडु सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम योजना 2026: राज्य में निवेश आकर्षित करने की पहल
✎ तमिलनाडु अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र योजना 2026 केंद्र के सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0 के पूरक के रूप में अतिरिक्त राज्य प्रोत्साहन देकर सहकारी संघवाद और अर्धचालक मूल्य श्रृंखला के विस्तार को आगे बढ़ाती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन एवं संघवाद (केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध और राज्य की औद्योगिक नीति) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (औद्योगिक नीति, प्रोत्साहन योजनाएँ, उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण) | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (अर्धचालक, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण)
- Prelims: भारत अर्धचालक मिशन (India Semiconductor Mission), सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0 (Semicon India Programme 2.0), अर्धचालक मूल्य श्रृंखला (Semiconductor Value Chain), वेफर फैब्रिकेशन सुविधा (Wafer Fab), OSAT और ATMP इकाइयाँ, डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (Design Linked Incentive) योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (Electronics Component Manufacturing Scheme), गाइडेंस तमिलनाडु (Guidance Tamil Nadu), राज्य सूची की प्रविष्टि 24 और संघ सूची की प्रविष्टि 52
- Essay: औद्योगिक नीति में केंद्र और राज्य की भूमिका: सहकारी संघवाद की दिशा में एक अध्ययन, सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता: क्या भारत उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण में वैश्विक मूल्य श्रृंखला में स्थान बना सकता है?
त्वरित पुनरावृत्ति: तमिलनाडु अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र योजना 2026 केंद्र के सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0 के पूरक के रूप में अतिरिक्त राज्य प्रोत्साहन देकर सहकारी संघवाद और अर्धचालक मूल्य श्रृंखला के विस्तार को आगे बढ़ाती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई में सचिवालय में तमिलनाडु अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र योजना 2026 का शुभारंभ किया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य को देश के प्रमुख अर्धचालक और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना तथा इस क्षेत्र में नया निवेश आकर्षित करना है। यह योजना केंद्र सरकार के सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0 के संदर्भ में आई है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के स्तर पर 15 जुलाई 2026 को स्वीकृति मिली थी। केंद्र की योजना का लक्ष्य चिप डिज़ाइन, विनिर्माण उपकरण, कच्चा माल, वेफर फैब्रिकेशन, अनुसंधान एवं विकास तथा कौशल विकास सहित पूरी मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करना है। राज्य योजना में प्रोत्साहन दो श्रेणियों में दिए जाएँगे, जिससे राज्य की भूमिका केंद्रीय सहायता के पूरक और उसके अतिरिक्त निवेश परियोजनाओं के समर्थन, दोनों में रेखांकित होती है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने दिसंबर 2021 में भारत अर्धचालक मिशन को मंज़ूरी दी थी, जिसके अंतर्गत सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत फैब, डिस्प्ले, ATMP/OSAT और डिज़ाइन सहित विभिन्न परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया।
- डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना के माध्यम से चिप डिज़ाइन कंपनियों और स्टार्टअप को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है, जिससे देश में डिज़ाइन क्षमता का विकास हो।
- इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (2025) के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स के मध्यवर्ती घटकों के विनिर्माण को प्रोत्साहन दिया गया, जिससे आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार हो।
- सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश, उच्च तकनीकी कौशल और भारी पूंजी व्यय की आवश्यकता होती है, इसलिए कई देश उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन और राज्य स्तरीय समर्थन के संयोजन को अपनाते हैं।
- भारत में औद्योगिक विकास का विषय संविधान में राज्य और संघ दोनों की सूचियों से जुड़ा है, इसलिए राज्य अपनी औद्योगिक नीतियों के माध्यम से निवेश आकर्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
तमिलनाडु अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र योजना 2026 क्या है?
- यह राज्य स्तरीय योजना है, जिसका उद्देश्य तमिलनाडु को अर्धचालक और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
- योजना दो श्रेणियों में लागू होगी: पहली श्रेणी में केंद्र की सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत निवेश परियोजनाओं को केंद्रीय वित्तीय सहायता से अतिरिक्त राज्य प्रोत्साहन मिलेगा।
- दूसरी श्रेणी में उन पात्र निवेश परियोजनाओं को राज्य समर्थन मिलेगा जो केंद्र की योजना में नहीं आतीं, परंतु राज्य के अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
- अर्धचालक मूल्य श्रृंखला में चिप डिज़ाइन, विनिर्माण उपकरण, कच्चा माल, वेफर फैब, अनुसंधान एवं विकास तथा कौशल विकास सम्मिलित हैं।
- वेफर फैब वह सुविधा है जहाँ सिलिकॉन वेफर पर सूक्ष्म परिपथ बनाए जाते हैं, जबकि OSAT और ATMP इकाइयाँ चिपों की असेंबली, परीक्षण और पैकेजिंग का कार्य करती हैं।
- इस योजना का क्रियान्वयन राज्य के औद्योगिक विभाग और निवेश संवर्धन एजेंसी गाइडेंस तमिलनाडु के माध्यम से होता है, जो निवेशकों के लिए एकल खिड़की समन्वय की भूमिका निभाती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| योजना की प्रकृति | राज्य स्तर की प्रोत्साहन योजना, जो केंद्र की अर्धचालक योजनाओं की पूरक है और उनसे स्वतंत्र रूप से भी निवेश को समर्थन देती है |
| दो श्रेणियाँ | पहली श्रेणी में केंद्र की योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं पर अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। दूसरी श्रेणी में वे पात्र परियोजनाएँ आएँगी जो केंद्र की योजना में नहीं आतीं, पर राज्य के अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं |
| केंद्रीय आधार | केंद्र सरकार ने 15 जुलाई 2026 को सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0 (Semicon India Programme 2.0) को मंज़ूरी दी, जिसका उद्देश्य पूरी अर्धचालक मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करना है |
| व्यापक लक्ष्य | चिप डिज़ाइन, अर्धचालक विनिर्माण उपकरण, कच्चा माल, वेफर निर्माण (फैब), अनुसंधान एवं विकास और कौशल विकास, सभी क्षेत्रों को एक साथ लक्ष्य बनाया गया है |
| क्रियान्वयन में राज्य की संस्था | गाइडेंस तमिलनाडु (Guidance Tamil Nadu) राज्य की निवेश संवर्धन एजेंसी के रूप में निवेशकों से समन्वय और परियोजना प्रस्तावों के प्रबंधन की भूमिका निभाती है |
महत्व
आर्थिक
- राज्य में नए निवेश को आकर्षित कर अर्धचालक और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का केंद्र बनाने का लक्ष्य है
- विनिर्माण क्षेत्र में रोज़गार सृजन और राज्य की आर्थिक संवृद्धि में योगदान की संभावना है
- मूल्य शृंखला के ऊपरी और निचले, दोनों चरणों में सहायक उद्योगों के विकास से घरेलू आपूर्ति आधार मज़बूत हो सकता है
तकनीकी और कौशल
- वेफर निर्माण, उपकरण और अनुसंधान एवं विकास में निवेश से उच्च तकनीकी क्षमता विकसित होती है
- कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कौशल विकास को योजना का अंग माना गया है
रणनीतिक
- अर्धचालक के आयात पर निर्भरता घटाना और आपूर्ति शृंखला का विविधीकरण राष्ट्रीय सुरक्षा और औद्योगिक लचीलेपन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है
- इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू क्षमता का विस्तार होता है
संघीय शासन
- केंद्र की योजना के साथ राज्य की पूरक सहायता से केंद्र-राज्य सहयोग का व्यावहारिक उदाहरण सामने आता है
- राज्य द्वारा अपनी औद्योगिक प्राथमिकताएँ तय करने से सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद, दोनों की स्थिति उभरती है
चुनौतियाँ
1. राज्यों के बीच प्रोत्साहन की होड़
- समान प्रकार के निवेश के लिए विभिन्न राज्य अधिक प्रोत्साहन देने लगें तो सार्वजनिक संसाधनों का अपव्यय हो सकता है
- अत्यधिक रियायतें राज्य के राजकोषीय संतुलन पर दबाव डाल सकती हैं और निवेश का स्थान केवल लागत के आधार पर बदल सकता है
यूपीएससी लिंक: संघवाद, राजकोषीय संघवाद और राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धी संघवाद
2. पूर्वानुमेय निवेश प्रवाह बनाए रखना
- अर्धचालक निवेश में भारी पूंजी, लंबी परियोजना-अवधि और वैश्विक तकनीकी चक्र की भूमिका होती है
- वैश्विक आपूर्ति शृंखला में मंदी या भू-राजनीतिक जोखिम से निवेश के निर्णय प्रभावित हो सकते हैं
यूपीएससी लिंक: भारत में विदेशी निवेश, औद्योगिक नीति और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम
3. कुशल मानव संसाधन की कमी
- वेफर निर्माण और उपकरण रखरखाव के लिए विशेष तकनीकी कौशल चाहिए, जो सीमित संख्या में उपलब्ध है
- शैक्षणिक संस्थानों के पाठ्यक्रम और उद्योग की आवश्यकता के बीच अंतर बना रह सकता है
यूपीएससी लिंक: कौशल विकास, उच्च शिक्षा और रोज़गार नीति
4. अवसंरचना और संसाधन की आवश्यकता
- अर्धचालक विनिर्माण में स्थिर बिजली, पर्याप्त जल और विश्वसनीय परिवहन की अधिक आवश्यकता होती है
- इन संसाधनों की उपलब्धता और पर्यावरणीय प्रबंधन में संतुलन बनाना आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: ऊर्जा और अवसंरचना क्षेत्र, साथ ही पर्यावरण संरक्षण
5. पारदर्शी चयन और निगरानी
- दूसरी श्रेणी में केंद्र की योजना से बाहर की परियोजनाओं के लिए स्पष्ट पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया आवश्यक है
- प्रोत्साहन के वास्तविक परिणामों, जैसे निवेश, रोज़गार और निर्यात, की नियमित निगरानी आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: सुशासन, लोक प्रशासन में पारदर्शिता और सार्वजनिक व्यय की निगरानी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता का विषय |
|---|---|
| प्रोत्साहन की होड़ | राज्यों के बीच अत्यधिक रियायतों से राजकोषीय संतुलन और सार्वजनिक संसाधनों पर दबाव |
| निवेश की अस्थिरता | वैश्विक तकनीकी चक्र और भू-राजनीतिक जोखिम से परियोजनाओं की समय-सारणी प्रभावित होना |
| कुशल श्रमशक्ति | वेफर निर्माण और उपकरण संचालन में विशेषज्ञता की सीमित उपलब्धता |
| संसाधन और पर्यावरण | बिजली, जल और भूमि की माँग का पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों के साथ संतुलन |
| पारदर्शिता | दूसरी श्रेणी के प्रोत्साहनों के लिए चयन और परिणाम-मूल्यांकन की स्पष्ट व्यवस्था की आवश्यकता |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0 (Semicon India Programme 2.0)
- भारत अर्धचालक मिशन (India Semiconductor Mission)
आगे की राह
- राज्य और केंद्र की योजनाओं के बीच समन्वय के लिए संयुक्त निगरानी तंत्र बनाया जाए, ताकि दोहराव और असंगति से बचा जा सके
- दूसरी श्रेणी के प्रोत्साहनों के लिए पात्रता, चयन और निवेश-परिणाम के स्पष्ट मानदंड सार्वजनिक किए जाएँ
- प्रोत्साहन को निवेश, रोज़गार और घरेलू मूल्य संवर्धन जैसे परिणामों से जोड़ा जाए, ताकि सार्वजनिक धन का उपयोग प्रभावी हो
- वेफर निर्माण, उपकरण रखरखाव और डिज़ाइन के लिए तकनीकी संस्थानों के साथ पाठ्यक्रम-आधारित कौशल कार्यक्रम विकसित किए जाएँ
- बिजली और जल की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक योजना और पर्यावरणीय मानकों का कठोर पालन सुनिश्चित किया जाए
- सहायक उद्योगों, जैसे कच्चा माल और उपकरण निर्माण, को प्रोत्साहित कर घरेलू आपूर्ति शृंखला को गहरा किया जाए
- राज्यों के बीच प्रोत्साहन की होड़ को सीमित करने के लिए साझा दिशानिर्देश और सर्वोत्तम व्यवहारों का आदान-प्रदान हो
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र (Semiconductor Ecosystem) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) · भारत अर्धचालक मिशन (India Semiconductor Mission) · सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0 (Semicon India Programme 2.0) · वेफर फैब्रिकेशन (Wafer Fabrication) · मूल्य श्रृंखला (Value Chain) · प्रोत्साहन और अनुपूरक सहायता (Incentives and Supplementary Support) · संघ सूची और राज्य सूची (Union List and State List) · अनुच्छेद 282 (Article 282) · वित्त आयोग (Finance Commission) · औद्योगिक निवेश और कौशल विकास (Industrial Investment and Skill Development)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची: राज्य सूची की प्रविष्टि 24 और संघ सूची की प्रविष्टि 52 में उद्योगों पर विधायी विभाजन
- अनुच्छेद 282: राज्य द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अपने राजस्व से व्यय और सहायता
- अनुच्छेद 301: व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता, जो राज्य-स्तरीय प्रोत्साहनों के अंतर-राज्यीय प्रभाव से जुड़ती है
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार द्वारा 15 जुलाई 2026 को सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0 की मंज़ूरी → केंद्र की योजना के अनुरूप राज्य द्वारा तमिलनाडु अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र योजना 2026 की घोषणा → दो श्रेणियों में विभाजन: केंद्र-स्वीकृत परियोजनाओं पर अतिरिक्त सहायता और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर समर्थन → निवेश संवर्धन एजेंसी के माध्यम से निवेशकों का आकर्षण और परियोजना प्रस्तावों का समन्वय → वेफर निर्माण, उपकरण, कच्चा माल और कौशल में क्षमता का विस्तार → मूल्य शृंखला में राज्य की भूमिका का सुदृढ़ होना और आयात पर निर्भरता में क्रमिक कमी
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 52 में उन उद्योगों का उल्लेख है जिनके नियंत्रण को संसद विधि द्वारा लोकहित में समीचीन घोषित करे।
2. राज्य सूची की प्रविष्टि 24 उन उद्योगों से संबंधित है जो संघ सूची की प्रविष्टि 7 और 52 के उपबंधों के अधीन हैं।
3. वित्त आयोग का गठन अनुच्छेद 326 के अंतर्गत किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: संघ सूची की प्रविष्टि 52 संसद को उन उद्योगों पर नियंत्रण की घोषणा का अधिकार देती है जो लोकहित में आवश्यक हों। कथन 2 सही है: राज्य सूची की प्रविष्टि 24 उद्योगों को संघ सूची की प्रविष्टि 7 और 52 के अधीन रखती है। कथन 3 गलत है, क्योंकि वित्त आयोग का उपबंध अनुच्छेद 280 में है; अनुच्छेद 326 मतदाता सूची और लोकसभा तथा विधानसभा के निर्वाचन के सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार से संबंधित है।
Q2. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): अर्धचालक विनिर्माण संयंत्र (फैब) की स्थापना के लिए भारी पूंजी निवेश आवश्यक होता है, इसलिए राज्य और केंद्र की वित्तीय प्रोत्साहन योजनाएँ प्रायः इनकी ओर उन्मुख होती हैं।
कारण (R): वेफर फैब्रिकेशन के लिए अत्यंत स्वच्छ वातावरण और अत्यधिक उन्नत उपकरणों की आवश्यकता होती है, जिनकी लागत बहुत अधिक होती है।
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
- (b) A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- (c) A सही है, किंतु R गलत है
- (d) A गलत है, किंतु R सही है
उत्तर: (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — फैब की स्थापना में भारी पूंजी लागत और स्वच्छ कक्ष (clean room) जैसी अवसंरचना की आवश्यकता होती है, इसलिए प्रोत्साहन योजनाएँ इसी चरण पर केंद्रित होती हैं। अतः R, A की सही व्याख्या करता है। अर्धचालक मूल्य श्रृंखला में डिज़ाइन, विनिर्माण, असेंबली और परीक्षण के चरण अलग-अलग होते हैं, जिनकी पूंजी-गहनता भिन्न होती है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन पर विचार कीजिए:
सूची I (संविधान का अनुच्छेद)
A. अनुच्छेद 280
B. अनुच्छेद 282
C. अनुच्छेद 246
D. अनुच्छेद 293
सूची II (विषय)
1. वित्त आयोग का गठन
2. संघ या राज्य द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनुदान
3. संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण
4. राज्य द्वारा ऋण लेना
सही सुमेलन चुनिए:
- A-2, B-1, C-3, D-4
- A-1, B-3, C-2, D-4
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-4, B-2, C-1, D-3
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — अनुच्छेद 280 वित्त आयोग से संबंधित है (1)। अनुच्छेद 282 संघ या राज्य को ऐसे सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए अनुदान देने की शक्ति देता है जो उनकी विधायी क्षमता से बाहर हों (2)। अनुच्छेद 246 विधायी विषयों का वितरण करता है (3)। अनुच्छेद 293 राज्यों की उधार शक्ति से संबंधित है (4)। अतः सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए केंद्र की सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0 के समानांतर राज्यों द्वारा अपनी अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र योजनाएँ लागू करने की प्रवृत्ति भारतीय संघवाद के सहकारी स्वरूप को किस प्रकार प्रभावित करती है, इसकी समालोचनात्मक विवेचना कीजिए। क्या ऐसे राज्य-स्तरीय प्रोत्साहन केंद्रीय उद्देश्यों को सुदृढ़ करते हैं, या वे राज्यों के बीच प्रोत्साहन की प्रतिस्पर्धी होड़ को जन्म देते हैं? तर्कसंगत मत प्रस्तुत कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर कंकाल (Model Answer Skeleton): (1) भूमिका: जुलाई 2026 में केंद्र द्वारा सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0 की स्वीकृति और अक्टूबर 2026 में तमिलनाडु अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र योजना 2026 का शुभारंभ; भारत अर्धचालक मिशन (India Semiconductor Mission) की भूमिका का उल्लेख। (2) संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची; संघ सूची की प्रविष्टि 52 (लोकहित में संसद द्वारा घोषित उद्योग) और राज्य सूची की प्रविष्टि 24 (उद्योग, जो संघ सूची की प्रविष्टि 7 और 52 के अधीन हैं); अनुच्छेद 282 के अंतर्गत राज्य के व्यय की वैधता। (3) वित्तीय संबंध: अनुच्छेद 280 के अंतर्गत वित्त आयोग की भूमिका; अनुच्छेद 293 के अंतर्गत राज्यों की उधार सीमा; राज्यों के वित्तीय संसाधनों पर प्रभाव। (4) सहकारी संघवाद के पक्ष में तर्क: केंद्र की योजना के अनुपूरक के रूप में राज्य-स्तरीय प्रोत्साहन, क्षेत्रीय कौशल और अवसंरचना का समन्वय, नीति आयोग के माध्यम से अंतर-राज्यीय सहयोग। (5) प्रतिस्पर्धी संघवाद और जोखिम: वालेस ओट्स (Wallace Oates) का राजकोषीय विकेंद्रीकरण सिद्धांत; चार्ल्स टिबाउट (Charles Tiebout) का ‘पैरों से मतदान’ मॉडल; निवेश हेतु राज्यों के बीच प्रोत्साहन की होड़ से ‘नीचे की ओर दौड़’ (race to the bottom) का खतरा और राजकोषीय बोझ। (6) दूसरी श्रेणी के प्रोत्साहन: केंद्र की योजना से बाहर परंतु रणनीतिक महत्व वाली परियोजनाओं को समर्थन; इसकी पारदर्शिता और दोहराव से बचाव का प्रश्न। (7) समाधान और संतुलित मत: प्रोत्साहनों का समन्वय, साझा मानक, पारदर्शी मूल्यांकन, कौशल और अनुसंधान में साझा निवेश, वस्तु एवं सेवा कर परिषद (अनुच्छेद 279A) जैसे मंचों पर सहयोग। निष्कर्ष में तर्कसंगत मत दें कि सहयोगी प्रारूप में राज्य-स्तरीय प्रोत्साहन केंद्रीय लक्ष्यों को सुदृढ़ कर सकते हैं, पर उनकी सफलता समन्वय-तंत्र पर निर्भर है।
स्रोत: The Hindu
Tamil Nadu PCS (TNPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: तमिलनाडु राज्य सरकार द्वारा ‘तमिलनाडु सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम स्कीम 2026’ शुरू करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A. राज्य में सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देना
- B. राज्य की पारंपरिक कृषि पद्धतियों को आधुनिक बनाना
- C. पर्यटन क्षेत्र में विदेशी निवेश आकर्षित करना
- D. राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में तकनीकी शिक्षा अनिवार्य करना
उत्तर: A. राज्य में सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देना — तमिलनाडु सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम स्कीम 2026 का मुख्य उद्देश्य राज्य में सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देना है।
Mains: तमिलनाडु सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम स्कीम 2026 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए तथा इसके माध्यम से राज्य के औद्योगिक विकास एवं रोजगार सृजन पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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