08 Nov दिल्ली में दीपावली पर ‘बहुत खराब’ वायु गुणवत्ता, GRAP 3 प्रतिबंध जारी
✎ GRAP AQI-आधारित चरणबद्ध आपातकालीन योजना है, जिसे CAQM लागू करता है; वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक समाधान स्रोत-नियंत्रण में निहित हैं, केवल आपातकालीन प्रतिबंधों में नहीं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण (वायु प्रदूषण, वायु गुणवत्ता सूचकांक, प्रदूषण नियंत्रण के उपाय) | GS Paper II — शासन (सांविधिक निकाय: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग; केंद्र-राज्य समन्वय; न्यायिक निर्देशों की भूमिका) | GS Paper III — आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित अप्रत्यक्ष पहलू
- Prelims: वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की श्रेणियाँ और उनकी गणना के प्रदूषक, श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) के चरण और उनसे जुड़े उपाय, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), 2021 — गठन, क्षेत्राधिकार और कार्य, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की भूमिका, PM2.5 और PM10 का अंतर तथा स्रोत, राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS), 2009, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, पराली दहन और शीतकालीन तापमान-उलटाव (temperature inversion) का वायु गुणवत्ता पर प्रभाव
- Essay: विकास बनाम पर्यावरण: राजधानी क्षेत्र में स्वच्छ वायु का अधिकार और आर्थिक गतिविधियों का संतुलन, आपातकालीन उपाय बनाम दीर्घकालिक समाधान: वायु प्रदूषण नियंत्रण में सहकारी संघवाद की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: GRAP AQI-आधारित चरणबद्ध आपातकालीन योजना है, जिसे CAQM लागू करता है; वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक समाधान स्रोत-नियंत्रण में निहित हैं, केवल आपातकालीन प्रतिबंधों में नहीं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
दीपावली के दिन दिल्ली की समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सुबह 383 दर्ज किया गया, जो ‘अत्यंत खराब’ श्रेणी में आता है। दोपहर 3 बजे यह मामूली सुधार के साथ 378 पर पहुँचा। कई निगरानी केंद्रों पर स्थिति ‘गंभीर’ बनी रही, जिनमें जहाँगीरपुरी (461) और रोहिणी (447) प्रमुख रहे। इसी परिस्थिति में श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) के चरण-3 से जुड़े प्रतिबंध लागू रहे। यह घटना इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारी काल में पटाखों से होने वाला अतिरिक्त उत्सर्जन, पराली दहन से आने वाला प्रदूषण और शीतकालीन मौसमी दशाएँ एक साथ मिलकर वायु गुणवत्ता को गिरा देती हैं। साथ ही यह दिखाता है कि आपातकालीन उपायों को लागू करने और उन्हें हटाने के बीच नियामक समन्वय कितना आवश्यक है।
पृष्ठभूमि
- वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 वायु और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण के मूल विधिक ढाँचे हैं। राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) 2009 में अधिसूचित किए गए थे।
- दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) तैयार की गई। इसे पहली बार वर्ष 2016 में पर्यावरण प्रदूषण (निवारण और नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) द्वारा विकसित किया गया था।
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) अधिनियम, 2021 के अंतर्गत स्थापित आयोग ने EPCA का स्थान लिया। यह आयोग दिल्ली-एनसीआर और समीपवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के समन्वित प्रबंधन के लिए उत्तरदायी है, और GRAP के चरणों के अनुपालन के निर्देश भी जारी करता है।
- पराली दहन, शीतकाल में कम पवन वेग, तापमान-उलटाव और धूल जैसे कारक सर्दियों में प्रदूषकों को सतह के पास रोक लेते हैं। पंजाब और हरियाणा में पराली प्रबंधन से जुड़े उपायों का प्रभाव सीधे राजधानी की वायु गुणवत्ता पर पड़ता है।
- दीपावली पर पटाखों से निकलने वाले PM2.5 और अन्य प्रदूषकों के कारण अल्पकालिक प्रदूषण में तीव्र वृद्धि होती है। इस संदर्भ में पटाखों पर नियंत्रण से जुड़े न्यायिक और नियामक निर्देश भी प्रासंगिक रहे हैं।
श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (Graded Response Action Plan — GRAP) क्या है?
- GRAP वायु गुणवत्ता में गिरावट की गंभीरता के अनुसार चरणबद्ध कार्रवाई की एक नियामक योजना है। इसका उद्देश्य प्रदूषण बढ़ने पर पूर्व-निर्धारित उपाय तुरंत लागू करना है।
- वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आधार पर इसके चरण तय होते हैं। सामान्यतः ‘खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी तक बढ़ते स्तर पर अधिक कठोर उपाय लागू किए जाते हैं।
- AQI की गणना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा मापे गए आठ प्रदूषकों के आधार पर होती है, जिनमें PM2.5, PM10, NO2, SO2, CO, O3, NH3 और Pb शामिल हैं। सर्वोच्च उप-सूचकांक ही समग्र AQI तय करता है।
- चरण-3 में सामान्यतः निर्माण कार्य पर अस्थायी रोक, कुछ वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध, डीज़ल जनरेटरों के उपयोग पर सीमा और धूल-नियंत्रण उपाय शामिल होते हैं। सटीक सूची समय-समय पर संशोधित होती है, इसलिए परीक्षा के लिए नवीनतम अधिसूचना देखना आवश्यक है।
- एक बार लागू प्रतिबंध तुरंत नहीं हटाए जाते। AQI में स्थायी सुधार की पुष्टि और पूर्वानुमान के आधार पर समिति द्वारा उन्हें क्रमिक रूप से हटाने या बनाए रखने का निर्णय लिया जाता है।
- GRAP केवल तात्कालिक उपाय है। दीर्घकालिक समाधानों में स्वच्छ ईंधन, सार्वजनिक परिवहन, धूल नियंत्रण, औद्योगिक उत्सर्जन मानकों का पालन और पराली प्रबंधन जैसे उपाय आते हैं।
- यह योजना संघीय ढाँचे की व्यावहारिक कसौटी है, क्योंकि प्रदूषण सीमाओं को नहीं मानता और दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राजस्थान के क्षेत्र में समन्वित कार्रवाई आवश्यक होती है।
- अनुच्छेद 21 में स्वच्छ पर्यावरण में जीने के अधिकार की न्यायिक व्याख्या की गई है, जबकि अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण संरक्षण का और अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों को पर्यावरण की रक्षा का कर्तव्य सौंपते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI) | दीपावली के दिन सुबह AQI 383 और दोपहर 3 बजे 378 दर्ज हुआ, जो ‘बहुत खराब’ (301-400) श्रेणी में आता है। सुधार मामूली रहा। |
| गंभीर स्तर वाले निगरानी केंद्र | जहाँगीरपुरी (461) और रोहिणी (447) में AQI ‘गंभीर’ (401-500) श्रेणी में रहा। इससे स्पष्ट है कि शहर के औसत मान के भीतर स्थानीय स्तर पर प्रदूषण की तीव्रता काफी अलग हो सकती है। |
| क्रमिक प्रतिक्रिया कार्य योजना (Graded Response Action Plan – GRAP) के चरण-3 के उपाय | वायु गुणवत्ता के स्तर के अनुसार प्रतिबंधों को चरणबद्ध ढंग से लागू और हटाया जाता है। निर्माण गतिविधियों पर रोक और कुछ वाहनों पर पाबंदी जैसे उपाय तब तक जारी रहते हैं जब तक हवा में स्थायी सुधार न दिखे। |
| वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management in NCR and Adjoining Areas – CAQM) | दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में GRAP लागू करने, राज्यों के बीच समन्वय करने और निर्देश जारी करने का वैधानिक निकाय है। यह वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत कार्य करता है। |
| त्योहारी उत्सर्जन और मौसमी कारक | पटाखों से निकला धुआँ, ठंडी और शांत हवाएँ तथा तापीय प्रतिलोमन (Temperature Inversion) मिलकर प्रदूषकों को सतह के पास रोक लेते हैं, जिससे AQI तेज़ी से बढ़ता है। |
महत्व
स्वास्थ्य (Health)
- PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों और रक्त-प्रवाह तक पहुँचकर श्वसन और हृदय संबंधी रोगों का खतरा बढ़ाते हैं।
- बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से श्वास रोगों से ग्रस्त लोगों पर प्रभाव सबसे अधिक होता है, इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाह और सावधानी आवश्यक हो जाती है।
- लंबी अवधि में ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ स्तर का संपर्क जीवन प्रत्याशा पर भी असर डाल सकता है।
पर्यावरणीय (Environmental)
- वायु प्रदूषण स्थानीय तथा क्षेत्रीय स्तर पर वायुक्षेत्र (Airshed) का साझा मामला है, इसलिए किसी एक शहर के उपाय पर्याप्त नहीं होते।
- धूल, वाहन उत्सर्जन, निर्माण और दहन से निकलने वाले कण मिलकर प्रदूषण का बहु-स्रोत चरित्र बनाते हैं।
प्रशासनिक और शासन (Governance)
- GRAP जैसी आपात-कालीन योजना दर्शाती है कि नीति में पूर्व-चेतावनी, स्तर-आधारित कार्रवाई और निगरानी का समन्वित ढाँचा आवश्यक है।
- CAQM जैसे वैधानिक निकाय के होने से राज्यों के बीच एकसमान मानक और निर्देश लागू करने की संस्थागत व्यवस्था बनती है।
संघीय और अंतर्राज्यीय (Federal and Inter-state)
- दिल्ली के साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ क्षेत्र एक ही वायुक्षेत्र का हिस्सा हैं, इसलिए राज्यों के बीच समन्वय अनिवार्य है।
- पराली दहन जैसे स्रोत दूसरे राज्यों में होते हैं और प्रभाव दिल्ली में महसूस होता है, जिससे अंतर-राज्यीय उत्तरदायित्व का प्रश्न उठता है।
चुनौतियाँ
1. अंतर्राज्यीय वायुक्षेत्र समन्वय की कमी
- प्रदूषण की सीमाएँ प्रशासनिक सीमाओं से मेल नहीं खातीं, जबकि उपाय राज्यों और नगर निकायों में बँटे होते हैं।
- एक राज्य की कार्रवाई का लाभ दूसरे राज्य में तभी मिलता है जब समन्वित योजना और निगरानी हो।
यूपीएससी लिंक: संघवाद एवं अंतर-राज्यीय समन्वय (GS-2, शासन)
2. कृषि अवशेष दहन (पराली जलाना)
- खरीफ फसल के बाद खेतों में अवशेष जलाने से शरद ऋतु में PM2.5 का बड़ा भार बनता है।
- वैकल्पिक प्रबंधन (इन-सिटू और एक्स-सिटू) की लागत और मशीनों की उपलब्धता छोटे किसानों के लिए बाधा बनती है।
यूपीएससी लिंक: कृषि एवं पर्यावरण का संबंध (GS-3, कृषि और पर्यावरण)
3. मौसम विज्ञान संबंधी कारक
- शरद ऋतु में हवा की गति कम होती है और तापीय प्रतिलोमन के कारण ऊपर की ओर उत्सर्जन नहीं फैल पाता।
- यही कारण है कि उत्सर्जन स्रोत समान रहने पर भी कुछ दिनों में AQI अचानक बढ़ जाता है।
यूपीएससी लिंक: भारत का जलवायु और वायुमंडलीय परिसंचरण (GS-1, भूगोल)
4. त्योहारी उत्सर्जन और प्रवर्तन की चुनौती
- दीपावली के समय पटाखों के उपयोग से अल्पकालिक किंतु तीव्र प्रदूषण होता है।
- प्रतिबंधों का वास्तविक पालन स्थानीय प्रवर्तन, निगरानी और जन-जागरूकता पर निर्भर करता है।
यूपीएससी लिंक: नीति कार्यान्वयन और प्रवर्तन (GS-2, शासन)
5. प्रतिबंधों के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
- निर्माण कार्य और कुछ वाहनों पर रोक से दैनिक मज़दूरों और छोटे व्यवसायों की आय प्रभावित होती है।
- पर्यावरणीय उपायों को सामाजिक सुरक्षा और वैकल्पिक आजीविका के साथ जोड़ना आवश्यक है, अन्यथा नीति का विरोध बढ़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय और समावेशी विकास (GS-2 और GS-3)
6. निगरानी नेटवर्क की स्थानिक सीमा
- जहाँगीरपुरी और रोहिणी जैसे अलग-अलग केंद्रों में मान में बड़ा अंतर दिखता है, जो स्थानिक विविधता को दर्शाता है।
- पर्याप्त सघन और वास्तविक-समय निगरानी के बिना स्थानीय स्रोतों की सटीक पहचान कठिन होती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण निगरानी और डेटा प्रणाली (GS-3, पर्यावरण)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| अंतर्राज्यीय समन्वय | एक ही वायुक्षेत्र में कई राज्यों और नगर निकायों की भिन्न प्राथमिकताएँ उपायों की प्रभावशीलता घटाती हैं। |
| पराली दहन | शरद ऋतु में फसल अवशेष जलाना PM2.5 का प्रमुख मौसमी स्रोत बना रहता है। |
| मौसमी और भौगोलिक कारक | कम हवा और तापीय प्रतिलोमन के कारण प्रदूषक फँस जाते हैं, जिससे AQI अचानक बढ़ता है। |
| प्रवर्तन और पालन | पटाखों और प्रतिबंधित गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संसाधन और निगरानी आवश्यक है। |
| सामाजिक-आर्थिक प्रभाव | दैनिक मज़दूरों और छोटे व्यवसायों पर प्रतिबंधों का बोझ पड़ता है, जिसके लिए सहायता तंत्र चाहिए। |
| निगरानी की सघनता | केंद्रों के बीच बड़े अंतर से स्थानीय स्रोत पहचानना और लक्षित कार्रवाई करना कठिन होता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP)
आगे की राह
- वायुक्षेत्र-आधारित संयुक्त योजना बनाकर दिल्ली-एनसीआर के सभी राज्यों में उत्सर्जन स्रोतों का साझा लक्ष्य तय किया जाए।
- पराली प्रबंधन के लिए मशीनों की उपलब्धता, कस्टम हायरिंग केंद्र और किसानों को प्रोत्साहन राशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
- सघन, वास्तविक-समय और स्थानीय स्तर की निगरानी बढ़ाकर AQI के आँकड़ों को सार्वजनिक रूप से पारदर्शी ढंग से उपलब्ध कराया जाए।
- GRAP के चरणों को मौसम पूर्वानुमान के साथ जोड़कर पहले से तैयारी की जाए, ताकि प्रतिबंध समय पर लागू और समय पर हटाए जा सकें।
- दैनिक मज़दूरों और छोटे व्यवसायों के लिए प्रतिबंध-अवधि में आजीविका सहायता का तंत्र बनाया जाए।
- हरित पटाखों के मानकों का सख्त प्रवर्तन और उत्सव के दौरान स्थानीय निगरानी सुनिश्चित की जाए।
- NCAP के अंतर्गत नगर कार्य योजनाओं को स्रोत-आधारित नियंत्रण (सार्वजनिक परिवहन, निर्माण धूल प्रबंधन, स्वच्छ ईंधन) पर केंद्रित किया जाए।
- वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों पर सार्वजनिक जागरूकता और संवेदनशील समूहों के लिए चिकित्सा सलाह का तंत्र मज़बूत किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वायु प्रदूषण (Air Pollution) · वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI) · क्रमबद्ध अनुक्रिया कार्य योजना (Graded Response Action Plan – GRAP) · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) · राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP) · अनुच्छेद 21 और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · सावधानी का सिद्धांत (Precautionary Principle) · तापीय व्युत्क्रमण (Temperature Inversion) · पराली जलाना (Crop Residue Burning) · पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment (Protection) Act, 1986)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- [‘अनुच्छेद 21’, ‘स्वच्छ पर्यावरण में जीने का अधिकार जीवन के अधिकार का अंग’]
- [‘अनुच्छेद 48A’, ‘राज्य का पर्यावरण संरक्षण और सुधार का दायित्व’]
- [‘अनुच्छेद 51क(छ)’, ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार नागरिक कर्तव्य’]
अवधारणा प्रवाह
शरद ऋतु में ठंडी और शांत हवाएँ तथा तापीय प्रतिलोमन (Temperature Inversion) बनते हैं → पराली दहन, वाहन, निर्माण धूल और पटाखों से PM2.5 और PM10 का उत्सर्जन होता है → प्रदूषक सतह के पास जमा होकर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को बढ़ाते हैं → निगरानी केंद्र AQI दर्ज करते हैं और उसी के आधार पर GRAP का चरण तय होता है → CAQM निर्देश जारी करता है और राज्य तथा नगर निकाय प्रतिबंध लागू करते हैं → वायु में सुधार होने पर प्रतिबंध चरणबद्ध ढंग से हटाए जाते हैं → दीर्घकाल में NCAP जैसे स्रोत-आधारित नियंत्रण से मूल कारणों का समाधान किया जाता है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आधार पर 301 से 400 के बीच का मान ‘बहुत खराब’ (Very Poor) श्रेणी में आता है।
2. क्रमबद्ध अनुक्रिया कार्य योजना (GRAP) प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार चरणबद्ध रूप से लागू होने वाले उपायों का समूह है।
3. GRAP के उपाय तभी लागू होते हैं जब दिल्ली के सभी निगरानी केंद्रों पर AQI 500 से अधिक हो।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- इनमें से कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि CPCB के पैमाने पर 301–400 ‘बहुत खराब’ श्रेणी है। कथन 2 सही है, क्योंकि GRAP स्तर-वार आपातकालीन उपायों की योजना है। कथन 3 गलत है, क्योंकि GRAP के उपाय AQI के स्तर और पूर्वानुमान की निरंतरता दोनों पर आधारित होते हैं, और इसके लिए AQI 500 की सीमा नहीं है। अतः केवल दो कथन सही हैं।
Q2. कथन (A): शीत ऋतु में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना दिल्ली के वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
कारण (R): शीत ऋतु में तापीय व्युत्क्रमण और कम पवन गति के कारण भू-सतह के निकट प्रदूषक कण फँसे रहते हैं।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है — पराली जलाना दिल्ली-एनसीआर की शीत ऋतु के प्रदूषण के प्रमुख मौसमी स्रोतों में गिना जाता है, इसलिए (A) सही है। तापीय व्युत्क्रमण में ऊपरी वायु गर्म और निचली वायु ठंडी रहती है, जिससे प्रदूषक ऊपर नहीं उठ पाते; कम पवन गति इसे और बढ़ाती है। अतः (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों का सही मिलान कीजिए:
सूची-I (अधिनियम/कार्यक्रम)
A. वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम
B. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम
C. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम
D. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम
सूची-II (वर्ष)
1. 1981
2. 1986
3. 2021
4. 2019
सही कूट चुनिए:
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-2, B-1, C-3, D-4
- A-1, B-2, C-4, D-3
- A-3, B-2, C-1, D-4
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 में बना। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 में बना। CAQM से संबंधित अधिनियम 2021 में पारित हुआ। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम 2019 में आरंभ हुआ।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ दिल्ली-एनसीआर में शीत ऋतु का वायु प्रदूषण प्रायः आपातकालीन उपायों पर केंद्रित रहता है, जबकि क्रमबद्ध अनुक्रिया कार्य योजना, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम जैसे ढाँचे पहले से मौजूद हैं। भारतीय संवैधानिक और वैधानिक ढाँचे के संदर्भ में इस समस्या की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। क्या स्वच्छ वायु के अधिकार को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत लागू कराना इस समस्या के समाधान के लिए पर्याप्त है? तर्क दीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: आज की घटना के आधार पर दीपावली के दिन दिल्ली का समग्र AQI सुबह 383 और दोपहर 3 बजे 378 दर्ज हुआ, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी है। कई निगरानी केंद्रों पर ‘गंभीर’ स्तर दर्ज हुआ, जिनमें जहांगीरपुरी 461 और रोहिणी 447 प्रमुख हैं। इसी अवधि में GRAP के चरण-3 के प्रतिबंध जारी रहे। संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पर्यावरण को सम्मिलित करने का विकास सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य (1991) से हुआ। अनुच्छेद 48A राज्य पर पर्यावरण संरक्षण का नीति-निर्देशक दायित्व डालता है और अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों पर मौलिक कर्तव्य। MC Mehta वाद श्रृंखला में न्यायालय ने सक्रिय हस्तक्षेप किया। वैधानिक एवं संस्थागत ढाँचा: वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; CAQM अधिनियम, 2021, जिसने NCR और आसपास के क्षेत्रों के लिए एकीकृत प्राधिकरण बनाया और पूर्ववर्ती EPCA की भूमिका को समाहित किया; CPCB और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड; राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT Act, 2010) द्वारा निगरानी। GRAP का स्वरूप: AQI और पूर्वानुमान के आधार पर चरण-वार प्रतिबंध, जो प्रायः प्रतिक्रियात्मक (reactive) हैं। NCAP (2019) दीर्घकालिक, निवारक लक्ष्य रखता है। स्रोत-आधारित विश्लेषण: परिवहन, निर्माण धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, पराली जलाना (पंजाब और हरियाणा में खेत में आग की घटनाएँ), और शीत ऋतु के मौसमी कारक जैसे कम पवन गति और तापीय व्युत्क्रमण। विवेचन: (क) प्रतिक्रियात्मक बनाम निवारक दृष्टिकोण की तुलना। (ख) प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत (Vellore Citizens Welfare Forum वाद, 1996) और सावधानी के सिद्धांत की भूमिका। (ग) सहकारी संघवाद की चुनौती, क्योंकि प्रदूषण अंतर्राज्यीय है और पर्यावरण समवर्ती सूची के विषयों में आता है। (घ) अनुच्छेद 21 के अधिकार की प्रवर्तनीयता बनाम कार्यान्वयन क्षमता; न्यायालय द्वारा निर्देश देने की सीमाएँ। (ड़) आर्थिक आजीविका (परिवहन और निर्माण श्रमिकों) पर प्रतिबंधों का प्रभाव और न्यायसंगत परिवर्तन की आवश्यकता। संतुलित निष्कर्ष: अधिकार लक्ष्य तय करता है, पर समाधान के लिए स्रोत-विभाजित डेटा, समयबद्ध निवारक नीतियाँ, राज्यों के बीच समन्वय और प्रभावी प्रवर्तन आवश्यक हैं।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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