अग्नि संकट: एल नीनो के कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी भीषण गर्मी, सूखा और बाढ़

El Nino forecast: UN says record ocean warming could bring dangerous heat, droughts and floods worldwide — concept mind map

अग्नि संकट: एल नीनो के कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी भीषण गर्मी, सूखा और बाढ़

✎ अल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान का असामान्य रूप से गर्म होना है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है और जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर अत्यधिक मौसम की घटनाओं को बढ़ा सकता है।

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El Niño climate system

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भौतिक भूगोल, जलवायु विज्ञान)  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन)
  • Prelims: अल नीनो, ला नीना, ENSO, प्रशांत महासागर, समुद्री सतह का तापमान, वैश्विक तापन, ग्रीनहाउस गैसें, सूखा, बाढ़
  • Essay: जलवायु परिवर्तन: चुनौतियाँ और समाधान, मानव-प्रेरित जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक घटनाओं का अंतर्संबंध

त्वरित पुनरावृत्ति: अल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान का असामान्य रूप से गर्म होना है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है और जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर अत्यधिक मौसम की घटनाओं को बढ़ा सकता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि अल नीनो (El Niño) के तेजी से मजबूत होने और रिकॉर्ड-उच्च वैश्विक समुद्री तापमान के कारण दुनिया खतरनाक गर्मी, सूखे और बाढ़ के एक नए युग में प्रवेश कर रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि यह घटना जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और बढ़ाएगी, जिससे आगामी महीनों में अत्यधिक मौसम की घटनाओं में वृद्धि होगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अल नीनो अब तक के सबसे मजबूत अल नीनो में से एक हो सकता।

पृष्ठभूमि

  • अल नीनो एक प्राकृतिक रूप से होने वाली जलवायु घटना है जो मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में असामान्य रूप से गर्म समुद्री सतह के तापमान से चिह्नित होती है।
  • यह आमतौर पर हर दो से सात साल में विकसित होता है और नौ महीने से एक साल तक रहता है, जिससे वैश्विक मौसम पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं।
  • वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो स्वयं जलवायु परिवर्तन के कारण नहीं होता है, लेकिन जब यह दीर्घकालिक वैश्विक तापन (Global Warming) के साथ जुड़ता है, तो यह अत्यधिक मौसम की घटनाओं को और अधिक गंभीर बना सकता है।
  • इस बार का अल नीनो असामान्य है क्योंकि प्रशांत महासागर का वह क्षेत्र जहाँ इसकी शक्ति मापी जाती है, घटना के गठन के बाद 15वें सप्ताह तक अपने अब तक के सबसे गर्म स्तर पर पहुँच गया है, जो इसके विकास के शुरुआती चरण में एक अभूतपूर्व मील का पत्थर है।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) को उम्मीद है कि यह घटना वसंत 2027 तक बनी रहेगी।
  • संयुक्त राष्ट्र ने चिंता व्यक्त की है कि अल नीनो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Greenhouse Gas Emissions) से प्रेरित रिकॉर्ड-तोड़ वैश्विक समुद्री तापमान की पृष्ठभूमि में सामने आ रहा है।
  • महासागर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से उत्पन्न अधिकांश अतिरिक्त गर्मी को अवशोषित करते हैं। अल नीनो के दौरान, उस संग्रहित गर्मी का एक हिस्सा वायुमंडल में छोड़ा जाता है, जिससे वैश्विक तापमान और भी बढ़ जाता है।

अल नीनो क्या है?

  • अल नीनो दक्षिणी दोलन (Southern Oscillation) के साथ मिलकर ENSO (अल नीनो-दक्षिणी दोलन) चक्र का गर्म चरण है।
  • यह भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि को संदर्भित करता है, विशेष रूप से पेरू और इक्वाडोर के तटों के पास।
  • यह घटना व्यापारिक पवनों (Trade Winds) के कमजोर पड़ने या उलटने के कारण होती है, जिससे गर्म पानी पश्चिमी प्रशांत से पूर्वी प्रशांत की ओर बढ़ता है।
  • अल नीनो के दौरान, मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में वर्षा में वृद्धि होती है, जबकि पश्चिमी प्रशांत, दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
  • यह वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण पैटर्न को बदल देता है, जिससे दुनिया भर में मौसम पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
  • भारत में, अल नीनो आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) को कमजोर करता है, जिससे सूखे और कम कृषि उत्पादन का खतरा बढ़ जाता है।
  • इसके विपरीत, ला नीना (La Niña) ENSO चक्र का ठंडा चरण है, जिसमें पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक ठंडा होता है और व्यापारिक पवनें मजबूत होती हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
एल नीनो मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में असामान्य रूप से गर्म समुद्री सतह का तापमान।
प्राकृतिक घटना यह हर 2 से 7 साल में विकसित होता है और 9 महीने से एक साल तक रहता है, वैश्विक मौसम पैटर्न को बदलता है।
अभूतपूर्व तीव्रता वर्तमान एल नीनो अपनी प्रारंभिक अवस्था में रिकॉर्ड तोड़ रहा है, जो इसे सबसे मजबूत में से एक बना सकता है।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर, एल नीनो अत्यधिक मौसम की घटनाओं को और अधिक गंभीर बना सकता है।
वैश्विक महासागर तापमान रिकॉर्ड-तोड़ वैश्विक महासागर तापमान के बीच एल नीनो का विकास हो रहा है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से प्रेरित है।

महत्व

पर्यावरणीय प्रभाव

  • एल नीनो के कारण दुनिया भर में अत्यधिक गर्मी की लहरें, सूखा, जंगल की आग और भारी वर्षा की घटनाओं में वृद्धि होगी।
  • भारत, इंडोनेशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में सूखे का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे कृषि और जल सुरक्षा प्रभावित होगी।
  • प्रशांत महासागर द्वारा अवशोषित अतिरिक्त गर्मी एल नीनो के दौरान वायुमंडल में छोड़ी जाती है, जिससे वैश्विक तापमान और बढ़ जाता है।

आर्थिक प्रभाव

  • सूखे और बाढ़ से कृषि उत्पादन में कमी आ सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • बुनियादी ढांचे को नुकसान, विशेषकर बाढ़ और भूस्खलन से, आर्थिक गतिविधियों को बाधित कर सकता है और पुनर्निर्माण लागत बढ़ा सकता है।
  • ऊर्जा क्षेत्र पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि गर्मी की लहरें बिजली की मांग बढ़ाएंगी और जलविद्युत उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं।

सामाजिक प्रभाव

  • अत्यधिक गर्मी और सूखे से जल संकट पैदा हो सकता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और विस्थापन बढ़ सकता है।
  • जंगल की आग से वायु गुणवत्ता खराब हो सकती है और समुदायों को खतरा हो सकता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रभावित होगी।
  • खाद्य असुरक्षा और संसाधनों पर तनाव सामाजिक अशांति और संघर्ष को जन्म दे सकता है, विशेषकर कमजोर क्षेत्रों में।

चुनौतियाँ

1. जलवायु परिवर्तन अनुकूलन

  • बढ़ते तापमान, सूखे और बाढ़ के प्रति कृषि प्रणालियों और शहरी बुनियादी ढांचे को अनुकूलित करना।
  • जल संसाधनों का कुशल प्रबंधन और सूखे से निपटने के लिए रणनीतियों का विकास।

2. आपदा प्रबंधन

  • अत्यधिक मौसम की घटनाओं जैसे बाढ़, सूखा और जंगल की आग के लिए पूर्व चेतावनी प्रणालियों और प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना।
  • आपदा-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे का निर्माण और समुदायों की तैयारी को बढ़ाना।

3. खाद्य सुरक्षा

  • कृषि उत्पादन पर एल नीनो के प्रभावों को कम करने के लिए फसल विविधीकरण और जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना।
  • खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता सुनिश्चित करना और कमजोर आबादी के लिए खाद्य सहायता प्रदान करना।

4. सार्वजनिक स्वास्थ्य

  • गर्मी से संबंधित बीमारियों, जल-जनित रोगों और वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों से निपटना।
  • स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना ताकि अत्यधिक मौसम की घटनाओं के दौरान बढ़ती मांगों को पूरा किया जा सके।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
अत्यधिक गर्मी और सूखा कृषि उत्पादन में कमी, जल संकट, जंगल की आग का खतरा।
भारी वर्षा और बाढ़ बुनियादी ढांचे को नुकसान, भूस्खलन, विस्थापन।
खाद्य और जल सुरक्षा फसल की विफलता, पीने के पानी की कमी, पोषण संबंधी चुनौतियाँ।
आर्थिक अस्थिरता कृषि आय में गिरावट, बीमा लागत में वृद्धि, जीडीपी पर नकारात्मक प्रभाव।
पारिस्थितिक संतुलन जैव विविधता का नुकसान, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव, प्रवाल विरंजन।

आगे की राह

  • जलवायु परिवर्तन अनुकूलन रणनीतियों को मजबूत करना, जिसमें सूखा-प्रतिरोधी फसलें और जल संरक्षण तकनीकें शामिल हैं।
  • आपदा पूर्व चेतावनी प्रणालियों और प्रतिक्रिया तंत्रों को उन्नत करना ताकि अत्यधिक मौसम की घटनाओं के प्रभावों को कम किया जा सके।
  • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश में वृद्धि करके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना और जलवायु परिवर्तन के मूल कारणों को संबोधित करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना ताकि एल नीनो और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए वैश्विक प्रतिक्रिया को मजबूत किया जा सके।
  • समुदायों की लचीलापन (resilience) का निर्माण करना, विशेषकर कमजोर क्षेत्रों में, उन्हें जलवायु संबंधी झटकों का सामना करने के लिए तैयार करना।
  • कृषि क्षेत्र में जलवायु-स्मार्ट पद्धतियों को अपनाना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बफर स्टॉक बनाए रखना।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान और मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं को बढ़ाना ताकि एल नीनो जैसे जलवायु पैटर्न की बेहतर समझ और भविष्यवाणी की जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अल नीनो · जलवायु परिवर्तन · वैश्विक तापन · समुद्री सतह का तापमान · अत्यधिक मौसमी घटनाएँ · सूखा · बाढ़ · ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन · विश्व मौसम विज्ञान संगठन · संयुक्त राष्ट्र

अवधारणा प्रवाह

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि  →  वैश्विक महासागर तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि  →  एल नीनो का तीव्र विकास और मजबूती  →  अत्यधिक गर्मी, सूखा, बाढ़ और जंगल की आग  →  कृषि, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है जिसकी विशेषता मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में असामान्य रूप से गर्म समुद्री सतह का तापमान है।
2. अल नीनो हर साल विकसित होता है और आमतौर पर दो साल तक रहता है।
3. वैज्ञानिकों का मानना है कि अल नीनो स्वयं जलवायु परिवर्तन के कारण नहीं होता है, लेकिन वैश्विक तापन के साथ मिलकर यह अत्यधिक मौसमी घटनाओं को और गंभीर बना सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अल नीनो की यह सटीक परिभाषा है। कथन 2 गलत है। अल नीनो आमतौर पर हर दो से सात साल में विकसित होता है और नौ महीने से एक साल तक रहता है। कथन 3 सही है। वैज्ञानिक इस बात पर सहमत हैं कि अल नीनो एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन जलवायु परिवर्तन इसके प्रभावों को बढ़ा सकता है।

Q2. अभिकथन (A): संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि वर्तमान अल नीनो घटना वैश्विक स्तर पर अत्यधिक मौसम को और खराब कर सकती है।
कारण (R): अल नीनो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से प्रेरित रिकॉर्ड-तोड़ वैश्विक समुद्री तापमान की पृष्ठभूमि में हो रहा है, जिससे संग्रहीत गर्मी वायुमंडल में छोड़ी जा रही है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र ने वास्तव में अल नीनो के कारण अत्यधिक मौसम की घटनाओं के बिगड़ने की चेतावनी दी है। कारण (R) भी सही है क्योंकि अल नीनो रिकॉर्ड वैश्विक समुद्री तापमान की पृष्ठभूमि में हो रहा है, और इस प्रक्रिया में समुद्र द्वारा अवशोषित अतिरिक्त गर्मी वायुमंडल में छोड़ी जाती है, जिससे वैश्विक तापमान और बढ़ जाता है। इस प्रकार, R, A की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अल नीनो के बढ़ते प्रभाव और जलवायु परिवर्तन के साथ इसके अंतर्संबंध का परीक्षण कीजिए। भारत और वैश्विक स्तर पर इसके संभावित परिणामों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** अल नीनो को परिभाषित करें (मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में असामान्य रूप से गर्म समुद्री सतह का तापमान) और इसके आवधिक प्रकृति का उल्लेख करें।
2. **अल नीनो और जलवायु परिवर्तन का अंतर्संबंध:**
* बताएं कि अल नीनो स्वयं जलवायु परिवर्तन के कारण नहीं होता, बल्कि एक प्राकृतिक घटना है।
* स्पष्ट करें कि कैसे वैश्विक तापन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से समुद्र द्वारा अवशोषित अतिरिक्त गर्मी अल नीनो के दौरान वायुमंडल में छोड़ी जाती है, जिससे वैश्विक तापमान और अत्यधिक मौसमी घटनाएँ बढ़ जाती हैं।
* संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के ‘अनचार्टेड टेरिटरी’ और ‘प्लेनेट ऑन फायर’ जैसे बयानों का उल्लेख करें।
3. **भारत पर संभावित परिणाम:**
* विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के पूर्वानुमानों के अनुसार भारत में सूखे और कम वर्षा की संभावना।
* कृषि, जल संसाधन और खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव।
* अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आजीविका पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव।
4. **वैश्विक स्तर पर संभावित परिणाम:**
* सूखा और जंगल की आग का बढ़ता जोखिम (इंडोनेशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्से)।
* अत्यधिक वर्षा और बाढ़ का जोखिम (संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिणी यूरोप)।
* भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को नुकसान।
* वैश्विक खाद्य सुरक्षा, विस्थापन और मानवीय संकट पर प्रभाव।
5. **निष्कर्ष:** अल नीनो के बढ़ते प्रभावों का सामना करने के लिए वैश्विक सहयोग, अनुकूलन रणनीतियों और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के महत्व पर बल दें।

स्रोत: Mint


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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