21 Jul अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में ई-ग्राम स्वराज: पेसा अधिनियम और डिजिटल शासन की भूमिका
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — राजव्यवस्था, शासन और सामाजिक न्याय | GS Paper III — अर्थव्यवस्था और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: ई-ग्राम स्वराज पोर्टल, ऑडिटऑनलाइन, पेसा अधिनियम, 1996, संविधान की पांचवीं अनुसूची, अनुच्छेद 243M (4)(b), ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP), राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA), भारतनेट परियोजना, पंचायती राज मंत्रालय, स्थानीय स्वशासन
- Essay: भारत में समावेशी विकास और डिजिटल शासन की भूमिका, पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: ई-ग्राम स्वराज पोर्टल और पेसा अधिनियम, 1996 का एकीकरण अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में डिजिटल शासन और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ग्राम पंचायत विकास योजनाओं के माध्यम से समावेशी विकास को बढ़ावा देता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
पंचायती राज मंत्रालय ने हाल ही में अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के कार्यान्वयन और उपयोग की स्थिति पर प्रकाश डाला है। मंत्रालय ने पेसा (पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996) के प्रावधानों को ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) संरचना में एकीकृत करने और पेसा-विशिष्ट ग्राम विकास योजनाओं की तैयारी, कार्यान्वयन तथा निगरानी के लिए एक समर्पित पेसा-जीपीडीपी पोर्टल लॉन्च करने की जानकारी दी है। यह पहल इन क्षेत्रों में डिजिटल शासन और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- संसद ने संविधान के अनुच्छेद 243M (4)(b) के तहत ‘पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996’ (पेसा) बनाया, ताकि संविधान के भाग IX के प्रावधानों को कुछ अपवादों और बदलावों के साथ पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों तक बढ़ाया जा सके।
- पंचायतें ‘स्थानीय स्वशासन’ होने के नाते राज्य का विषय हैं और संबंधित राज्य के पंचायती राज अधिनियमों के तहत काम करती हैं।
- पंचायती राज मंत्रालय ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना (MMP) के माध्यम से डिजिटल शासन को सुगम बनाता है, जिसमें ई-ग्राम स्वराज और ऑडिटऑनलाइन जैसे एप्लिकेशन शामिल हैं।
- मंत्रालय ने राज्यों द्वारा पेसा के कार्यान्वयन के आकलन को सुगम बनाने के लिए 10 पेसा संकेतक विकसित किए हैं, जिनमें से एक ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर पेसा ग्राम सभाओं की ग्राम पंचायत विकास योजनाओं को अपलोड किए जाने से संबंधित है।
- ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में अपर्याप्त डिजिटल अवसंरचना, रुक-रुक कर मिलने वाली इंटरनेट कनेक्टिविटी और सीमित तकनीकी क्षमता जैसी चुनौतियाँ डिजिटल शासन अनुप्रयोगों को अपनाने में बाधा डालती हैं।
- दूरसंचार विभाग द्वारा कार्यान्वित भारतनेट परियोजना के माध्यम से देशभर की ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराकर इंटरनेट कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जा रहा है।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल और पेसा अधिनियम क्या हैं?
- ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पंचायती राज मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों में योजना, बजट, लेखा और निगरानी सहित विभिन्न कार्यों को डिजिटल बनाना है।
- यह पोर्टल ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) की तैयारी और कार्यान्वयन को सुगम बनाता है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं में पारदर्शिता और दक्षता आती है।
- पेसा अधिनियम, 1996 (पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम) का उद्देश्य संविधान के भाग IX के प्रावधानों को पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों तक विस्तारित करना है, जिससे इन क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों को स्वशासन का अधिकार और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण मिल सके।
- पेसा अधिनियम के तहत ग्राम सभा को महत्वपूर्ण शक्तियाँ प्रदान की गई हैं, जिसमें विकास योजनाओं की स्वीकृति, सामाजिक और आर्थिक विकास कार्यक्रमों पर नियंत्रण तथा स्थानीय विवादों का समाधान शामिल है।
- पंचायती राज मंत्रालय ने पेसा-जीपीडीपी पोर्टल लॉन्च किया है, जो पेसा अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायत विकास योजनाओं की तैयारी, कार्यान्वयन और निगरानी को सुगम बनाने के लिए एक समर्पित मंच है।
- योजना वर्ष 2026-27 में, पेसा को 42 गतिविधियों के साथ ई-ग्राम स्वराज पोर्टल में एक पृथक विषय के रूप में शामिल किया गया है, और पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की ग्राम सभाओं के लिए अपनी GPDP योजना तैयार करते समय पेसा विषय के अंतर्गत कम से कम एक गतिविधि को शामिल करना अनिवार्य किया गया है।
- राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं (PRI) की क्षमता को सुदृढ़ करना और निर्वाचित प्रतिनिधियों तथा अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण प्रदान करके उनकी शासन संबंधी क्षमताओं का विकास करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ई-ग्राम स्वराज पोर्टल | ग्राम पंचायतों की योजना, बजट और लेखांकन प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाना। |
| ऑडिटऑनलाइन | पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के वित्तीय लेखा-जोखा का ऑनलाइन ऑडिट सुनिश्चित करना। |
| पेसा-विशिष्ट ग्राम विकास योजना (GPDP) पोर्टल | अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप ग्राम विकास योजनाओं की तैयारी, कार्यान्वयन और निगरानी को सुगम बनाना। |
| पेसा संकेतक | राज्यों द्वारा पेसा के कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए विकसित 10 संकेतक, जिनमें ई-ग्राम स्वराज पर GPDP अपलोड करना शामिल है। |
| ई-ग्राम स्वराज पोर्टल में पेसा विषय का एकीकरण | योजना वर्ष 2026-27 से पेसा को 42 गतिविधियों के साथ एक पृथक विषय के रूप में शामिल करना, जिसमें पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की ग्राम सभाओं के लिए GPDP तैयार करते समय कम से कम एक पेसा गतिविधि को शामिल करना अनिवार्य है। |
महत्व
शासन और पारदर्शिता
- ई-ग्राम स्वराज और ऑडिटऑनलाइन जैसे डिजिटल अनुप्रयोगों के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं (PRI) में पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि।
- ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के डिजिटलीकरण से स्थानीय स्तर पर योजनाओं के निर्माण और कार्यान्वयन में दक्षता आती है।
समावेशी विकास
- पेसा (Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996) क्षेत्रों में डिजिटल शासन के विस्तार से जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाना और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना।
- पेसा-विशिष्ट GPDP पोर्टल के माध्यम से अनुसूचित क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को मुख्यधारा की विकास योजनाओं में एकीकृत करना।
संघवाद और विकेंद्रीकरण
- पंचायतों को ‘राज्य विषय’ मानते हुए भी, केंद्र सरकार द्वारा डिजिटल उपकरणों और क्षमता निर्माण के माध्यम से राज्यों का समर्थन करना।
- स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना और जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार करना।
तकनीकी सशक्तिकरण
- ग्राम पंचायतों को आधुनिक डिजिटल उपकरणों से लैस करना, जिससे वे अपनी प्रशासनिक और विकासात्मक जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी ढंग से निभा सकें।
- भारतनेट परियोजना जैसी पहलों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल अवसंरचना (Digital Infrastructure) को मजबूत करना।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल अवसंरचना का अभाव
- कुछ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में अपर्याप्त डिजिटल अवसंरचना और रुक-रुक कर मिलने वाली इंटरनेट कनेक्टिविटी।
यूपीएससी लिंक: शासन, ई-गवर्नेंस
2. तकनीकी क्षमता की कमी
- स्थानीय हितधारकों और पंचायत पदाधिकारियों में डिजिटल अनुप्रयोगों के उपयोग के लिए सीमित तकनीकी क्षमता।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास
3. राज्यों के अधिकार क्षेत्र का मुद्दा
- पंचायतें ‘राज्य का विषय’ होने के कारण, पेसा और डिजिटल गवर्नेंस अनुप्रयोगों को लागू करना संबंधित राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिससे एकरूपता में चुनौती आती है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, राज्य सूची
4. जागरूकता और प्रशिक्षण की कमी
- पेसा अधिनियम के प्रावधानों और डिजिटल उपकरणों के उपयोग के बारे में स्थानीय समुदायों और प्रतिनिधियों के बीच जागरूकता की कमी।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक सशक्तिकरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिजिटल डिवाइड | शहरी और ग्रामीण/जनजातीय क्षेत्रों के बीच डिजिटल पहुंच और उपयोग में असमानता। |
| डेटा सुरक्षा और गोपनीयता | डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील डेटा के प्रबंधन में सुरक्षा सुनिश्चित करना। |
| स्थानीय भाषाओं में सामग्री | डिजिटल अनुप्रयोगों और प्रशिक्षण सामग्री को स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की आवश्यकता। |
| तकनीकी सहायता और रखरखाव | डिजिटल प्रणालियों के प्रभावी संचालन के लिए निरंतर तकनीकी सहायता और रखरखाव की आवश्यकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना (MMP)
- राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA)
- भारतनेट परियोजना
आगे की राह
- डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना: भारतनेट परियोजना के तहत सभी ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना और अंतिम-मील कनेक्टिविटी में सुधार करना।
- क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण: पंचायत प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और स्थानीय समुदायों के लिए डिजिटल साक्षरता और ई-पंचायत अनुप्रयोगों के उपयोग पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
- स्थानीयकरण और अनुकूलन: डिजिटल प्लेटफॉर्म को स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराना और जनजातीय क्षेत्रों की विशिष्ट सांस्कृतिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित करना।
- राज्य-केंद्र समन्वय: पंचायती राज मंत्रालय और राज्य सरकारों के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करना ताकि पेसा और डिजिटल गवर्नेंस अनुप्रयोगों के कार्यान्वयन में एकरूपता और दक्षता लाई जा सके।
- जागरूकता अभियान: पेसा अधिनियम के प्रावधानों और ई-ग्राम स्वराज जैसे डिजिटल उपकरणों के लाभों के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाना।
- तकनीकी सहायता का विस्तार: दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में निरंतर तकनीकी सहायता और समस्या-समाधान तंत्र उपलब्ध कराना।
- डेटा सुरक्षा और गोपनीयता: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत प्रोटोकॉल और नीतियां लागू करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल · पेसा अधिनियम 1996 · ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) · पंचायती राज संस्थाएँ (पीआरआई) · पांचवीं अनुसूची क्षेत्र · डिजिटल शासन · स्थानीय स्वशासन · राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) · भारतनेट परियोजना · ग्राम सभा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243M (4)(b)’, ‘note’: ‘पेसा अधिनियम का आधार’}
- {‘article’: ‘पांचवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन’}
- {‘article’: ‘भाग IX’, ‘note’: ‘पंचायतों से संबंधित प्रावधान’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (राज्य सूची)’, ‘note’: “पंचायतें ‘राज्य का विषय'”}
अवधारणा प्रवाह
संसद ने पेसा अधिनियम, 1996 बनाया। → पेसा अधिनियम पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों तक विस्तारित। → पंचायती राज मंत्रालय ने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल लॉन्च किया। → पेसा-विशिष्ट GPDP पोर्टल और ई-ग्राम स्वराज में पेसा विषय का एकीकरण। → डिजिटल अवसंरचना और क्षमता निर्माण की चुनौतियां। → राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान और भारतनेट परियोजना द्वारा सहायता। → जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल शासन और स्थानीय स्वशासन का सुदृढ़ीकरण।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह संविधान के भाग IX के प्रावधानों को पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों तक विस्तारित करता है।
2. यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 243M (4)(b) के तहत संसद द्वारा बनाया गया था।
3. पेसा को लागू करना, जिसमें डिजिटल शासन अनुप्रयोगों को अपनाना शामिल है, केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। पेसा अधिनियम संविधान के भाग IX के प्रावधानों को कुछ अपवादों और बदलावों के साथ पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों तक बढ़ाता है, और इसे अनुच्छेद 243M (4)(b) के तहत संसद द्वारा बनाया गया था। कथन 3 गलत है क्योंकि पेसा को लागू करना, जिसमें डिजिटल शासन अनुप्रयोगों को अपनाना शामिल है, संबंधित राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है।
Q2. ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह पंचायती राज मंत्रालय की ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना (एमएमपी) का एक हिस्सा है।
2. यह ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) की तैयारी, कार्यान्वयन और निगरानी को सुगम बनाता है।
3. पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की ग्राम सभाओं के लिए अपनी जीपीडीपी योजना तैयार करते समय पेसा विषय के अंतर्गत कम से कम एक गतिविधि को शामिल करना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना का हिस्सा है और जीपीडीपी को सुगम बनाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह योजना वर्ष 2026-27 से अनिवार्य किया गया है, न कि वर्तमान में।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण में डिजिटल शासन अनुप्रयोगों, विशेष रूप से ई-ग्राम स्वराज पोर्टल और पेसा अधिनियम, 1996 की भूमिका का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। जनजातीय क्षेत्रों में इन पहलों के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान हेतु किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल और पेसा अधिनियम की भूमिका को स्पष्ट करें, जिसमें स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने और जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाए। दूसरे भाग में, जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल अवसंरचना, कनेक्टिविटी और तकनीकी क्षमता जैसी चुनौतियों का उल्लेख करें। अंत में, इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों, जैसे तकनीकी सहायता, भारतनेट परियोजना और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) का वर्णन करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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