यूपीएससी तैयारी: गुजरात में गोडावण संरक्षण के लिए नया केंद्र, जानें क्या हुआ

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने गुजरात के कच्छ में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड प्राकृतिक वास केन्‍द्र का दौरा किया; सयारा वन कवच मे — diagram

यूपीएससी तैयारी: गुजरात में गोडावण संरक्षण के लिए नया केंद्र, जानें क्या हुआ

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गोडावण संरक्षण प्रयास

✎ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) भारत की एक गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति है, जिसके संरक्षण के लिए पर्यावास सुधार, प्रजनन कार्यक्रम और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें हाल ही में कच्छ में सॉफ्ट…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव-विविधता  |  GS Paper I — भूगोल (भारत का भूगोल)
  • Prelims: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण), सॉफ्ट रिलीज़ सेंटर, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, IUCN रेड लिस्ट, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, मैंग्रोव वृक्षारोपण, कच्छ का रण, प्रजनन कार्यक्रम
  • Essay: भारत में जैव विविधता संरक्षण: चुनौतियाँ और सामुदायिक भागीदारी का महत्व, पर्यावरण संतुलन और सतत विकास में वन्यजीवों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) भारत की एक गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति है, जिसके संरक्षण के लिए पर्यावास सुधार, प्रजनन कार्यक्रम और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें हाल ही में कच्छ में सॉफ्ट रिलीज़ सेंटर का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण कदम है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने हाल ही में गुजरात के कच्छ स्थित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) प्राकृतिक वास केंद्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने गोडावण के संरक्षण प्रयासों की समीक्षा की, सयारा वन कवच में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सॉफ्ट रिलीज़ सेंटर का उद्घाटन किया और मैंग्रोव वृक्षारोपण (Mangrove Plantation) पहलों का भी जायजा लिया। इस दौरे का उद्देश्य इस गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण के लिए किए जा रहे उपायों को सुदृढ़ करना था।

पृष्ठभूमि

  • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) भारत के सबसे गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षियों में से एक है, जिसकी वैश्विक आबादी बहुत कम बची है।
  • इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) की अनुसूची I में सूचीबद्ध किया गया है, जो इसे उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में इसे ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) श्रेणी में रखा गया है।
  • यह मुख्य रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क घास के मैदानों में पाया जाता है, जो भारत में तेजी से घट रहे हैं।
  • इसके संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न कार्यक्रम चला रही हैं, जिनमें प्रजनन कार्यक्रम और पर्यावास सुधार शामिल हैं।
  • कच्छ का क्षेत्र गोडावण के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक वास है, जहाँ इसके संरक्षण के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) और संरक्षण के प्रयास

  • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) भारतीय उपमहाद्वीप का एक बड़ा, स्थलीय पक्षी है, जो अपने आकार और विशिष्ट रूप के लिए जाना जाता है।
  • यह भारत के शुष्क घास के मैदानों और झाड़ीदार भूमि का एक महत्वपूर्ण संकेतक प्रजाति है, जो स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का प्रतीक है।
  • इसके पर्यावास के नुकसान, बिजली लाइनों से टकराने, शिकार और कृषि विस्तार के कारण इसकी आबादी में तेजी से गिरावट आई है।
  • सॉफ्ट रिलीज़ सेंटर एक विशेष सुविधा है जिसे संकटग्रस्त प्रजातियों को कैद में पालने के बाद धीरे-धीरे उनके प्राकृतिक पर्यावास में अनुकूलित करने और छोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • कच्छ में प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा (विलायती कीकर) से क्षरित लगभग 11 वर्ग किलोमीटर घास के मैदान का पुनरुद्धार किया गया है, जो गोडावण के लिए महत्वपूर्ण है।
  • शिकारी-रोधी बाड़ का निर्माण और संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम के तहत ‘जंप-स्टार्ट पहल’ जैसे उपाय किए जा रहे हैं, जिसमें जंगली मादाओं के बांझ अंडों को व्यवहार्य अंडों से बदला जाता है।
  • समुदाय-आधारित संरक्षण प्रयासों पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें स्थानीय चरवाहा और कृषि समूह गोडावण के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
  • मैंग्रोव वृक्षारोपण तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करता है, जिसका अप्रत्यक्ष लाभ वन्यजीवों को भी मिलता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) प्राकृतिक वास केंद्र का दौरा अत्यंत संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण प्रयासों की समीक्षा और उन्हें अधिकतम सुरक्षा प्रदान करने पर जोर।
सॉफ्ट रिलीज सेंटर का उद्घाटन GIB को प्राकृतिक वातावरण में धीरे-धीरे अनुकूलित करने और सुरक्षित रूप से छोड़ने के लिए विशेष सुविधा।
मैंग्रोव वृक्षारोपण प्रयासों की समीक्षा तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण।
खटाला सभा में जन प्रतिनिधियों से संवाद सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय समुदायों के सहयोग से संरक्षण प्रयासों को मजबूत करना।
प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा (विलायती कीकर) से क्षरित घास के मैदानों का पुनरुद्धार GIB के प्राकृतिक आवास की बहाली और खाद्य श्रृंखला को बनाए रखने में सहायक।
संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम और जंप-स्टार्ट पहल प्रजाति की आबादी बढ़ाने और गुजरात में GIB के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण प्रगति।

महत्व

पर्यावरण और पारिस्थितिकी

  • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) शुष्क घास के मैदानों के पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। इसके संरक्षण से इन अद्वितीय आवासों की जैव विविधता (Biodiversity) बनी रहती है।
  • मैंग्रोव (Mangrove) वृक्षारोपण तटीय क्षेत्रों को कटाव से बचाता है, समुद्री जैव विविधता का समर्थन करता है और कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • GIB के संरक्षण प्रयास अन्य घास भूमि प्रजातियों के लिए भी सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे समग्र पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है।

सामाजिक और सांस्कृतिक

  • GIB भारत की शुष्क विरासत का एक अनूठा सांस्कृतिक प्रतीक है, जिसके संरक्षण से क्षेत्रीय पहचान और विरासत को बढ़ावा मिलता है।
  • स्थानीय समुदायों, विशेषकर चरवाहा और कृषि समूहों की भागीदारी, संरक्षण प्रयासों की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है और सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा देती है।
  • संरक्षण गतिविधियों से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर और वैकल्पिक आजीविका के साधन उत्पन्न हो सकते हैं।

शासन और नीति

  • यह दौरा सरकार की पर्यावरण संरक्षण और प्रजाति संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, विशेषकर संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए।
  • विभिन्न सरकारी विभागों (पर्यावरण मंत्रालय, वन विभाग) और अनुसंधान संस्थानों (भारतीय वन्यजीव संस्थान) के बीच समन्वय संरक्षण प्रयासों को प्रभावी बनाता है।
  • सामुदायिक भागीदारी पर जोर, जैसा कि ‘खटाला सभा’ में देखा गया, सहभागी शासन (Participatory Governance) के सिद्धांतों के अनुरूप है।

चुनौतियाँ

1. आवास का नुकसान और विखंडन

  • कृषि विस्तार, शहरीकरण और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के कारण GIB के प्राकृतिक घास के मैदानों का लगातार नुकसान हो रहा है।
  • आवासों का विखंडन (Habitat Fragmentation) GIB की आबादी को अलग-अलग छोटे समूहों में बांट देता है, जिससे उनकी आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) कम होती है और प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।

2. बिजली लाइनों से टकराव

  • GIB जैसी बड़ी और भारी उड़ने वाली प्रजातियाँ अक्सर उच्च-तनाव वाली बिजली लाइनों से टकरा जाती हैं, जिससे उनकी मृत्यु दर बढ़ जाती है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, विशेषकर पवन ऊर्जा फार्मों के विस्तार से GIB के आवासों में बिजली लाइनों का जाल बढ़ रहा है।

3. शिकार और अवैध व्यापार

  • हालांकि GIB संरक्षित है, फिर भी कुछ क्षेत्रों में शिकार और अवैध व्यापार का खतरा बना रहता है, जिससे उनकी आबादी पर दबाव पड़ता है।
  • शिकारी-रोधी बाड़ का निर्माण इस चुनौती का एक समाधान है, लेकिन व्यापक निगरानी और प्रवर्तन की आवश्यकता है।

4. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

  • जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा पैटर्न में बदलाव, सूखे की बढ़ती आवृत्ति और तापमान में वृद्धि GIB के आवास और खाद्य स्रोतों को प्रभावित कर सकती है।
  • मैंग्रोव जैसे तटीय पारिस्थितिकी तंत्र भी समुद्र के बढ़ते स्तर और चरम मौसमी घटनाओं से खतरे में हैं।

5. सामुदायिक सहयोग और जागरूकता

  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना महत्वपूर्ण है, लेकिन अक्सर उनके पारंपरिक आजीविका के तरीकों और संरक्षण लक्ष्यों के बीच संघर्ष उत्पन्न हो सकता है।
  • GIB के महत्व और संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जागरूकता की कमी भी एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सीमित आबादी GIB की संख्या अत्यंत कम है, जिससे वे विलुप्ति के कगार पर हैं और किसी भी प्रतिकूल घटना से उनकी आबादी को गंभीर खतरा हो सकता है।
आनुवंशिक विविधता की कमी छोटी आबादी में आनुवंशिक विविधता कम होती है, जिससे वे बीमारियों और पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
मानव-वन्यजीव संघर्ष GIB के आवासों में मानवीय गतिविधियों का विस्तार उनके लिए खतरा पैदा करता है और संघर्ष को जन्म देता है।
प्रजनन दर में कमी GIB की प्रजनन दर स्वाभाविक रूप से कम होती है, जिससे उनकी आबादी को बढ़ाना एक धीमी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है।
संरक्षण के लिए धन और संसाधनों की कमी व्यापक संरक्षण प्रयासों के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की निरंतर आवश्यकता होती है, जो हमेशा उपलब्ध नहीं होते।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिष्टी योजना (MISHTI Scheme)

आगे की राह

  • GIB के प्रमुख आवासों को ‘इको-सेंसिटिव जोन’ घोषित कर उन्हें कानूनी सुरक्षा प्रदान करना और मानवीय हस्तक्षेप को नियंत्रित करना।
  • बिजली लाइनों को भूमिगत करने या बर्ड डायवर्टर (Bird Diverters) लगाने जैसे उपायों को प्राथमिकता देना, विशेषकर GIB के उड़ान मार्गों में।
  • संरक्षण प्रजनन कार्यक्रमों को और मजबूत करना, जिसमें इन-सीटू (In-situ) और एक्स-सीटू (Ex-situ) दोनों संरक्षण रणनीतियाँ शामिल हों।
  • स्थानीय समुदायों को GIB संरक्षण में सक्रिय भागीदार बनाना और उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना।
  • GIB के आवासों में प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा जैसी आक्रामक प्रजातियों को हटाकर मूल घास भूमि पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करना और GIB के आवासों को जलवायु-लचीला (Climate-resilient) बनाने के लिए अनुकूलन रणनीतियाँ विकसित करना।
  • GIB संरक्षण के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, जिसमें अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान शामिल हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड · गोडावण संरक्षण · संकटग्रस्त प्रजातियाँ · पर्यावास प्रबंधन · सॉफ्ट रिलीज़ सेंटर · सामुदायिक भागीदारी · वन्यजीव संरक्षण · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन · मैंग्रोव वृक्षारोपण · जैव विविधता संरक्षण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

GIB की आबादी में गिरावट  →  आवास का नुकसान और विखंडन  →  संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता  →  सॉफ्ट रिलीज सेंटर और प्रजनन कार्यक्रम  →  सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता  →  GIB का पुनरुद्धार और पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप के शुष्क और अर्ध-शुष्क घास के मैदानों में पाया जाता है।
2. IUCN की रेड लिस्ट में इसे ‘संकटग्रस्त’ (Endangered) श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।
3. ‘प्रोजेक्ट गोडावण’ भारत सरकार द्वारा इस प्रजाति के संरक्षण के लिए शुरू की गई एक पहल है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत के शुष्क और अर्ध-शुष्क घास के मैदानों का एक स्थानिक पक्षी है। कथन 2 गलत है। IUCN की रेड लिस्ट में इसे ‘अत्यंत संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है, न कि केवल ‘संकटग्रस्त’। कथन 3 गलत है। ‘प्रोजेक्ट गोडावण’ नाम से कोई विशिष्ट केंद्रीय पहल नहीं है, हालांकि इसके संरक्षण के लिए कई परियोजनाएं और कार्यक्रम चल रहे हैं, जैसे कि वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा ‘प्रजाति रिकवरी कार्यक्रम’।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का सबसे अच्छा वर्णन करता है?

  1. इसके प्राकृतिक आवासों में केवल बाड़ लगाना और शिकारियों से बचाना।
  2. कृत्रिम प्रजनन कार्यक्रम और सॉफ्ट रिलीज़ केंद्रों के माध्यम से जंगली आबादी को बढ़ाना।
  3. केवल स्थानीय समुदायों को शामिल किए बिना सरकारी एजेंसियों द्वारा संरक्षण प्रयास।
  4. ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को अन्य देशों में स्थानांतरित करके उनकी आबादी बढ़ाना।

उत्तर: कृत्रिम प्रजनन कार्यक्रम और सॉफ्ट रिलीज़ केंद्रों के माध्यम से जंगली आबादी को बढ़ाना। — ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए कृत्रिम प्रजनन कार्यक्रम और सॉफ्ट रिलीज़ केंद्र महत्वपूर्ण हैं। ये केंद्र पक्षियों को प्राकृतिक वातावरण में धीरे-धीरे अनुकूलित करने में मदद करते हैं, जिससे उनकी उत्तरजीविता दर बढ़ती है। अन्य विकल्प अधूरे या गलत हैं, क्योंकि संरक्षण में बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है जिसमें आवास प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी और प्रजनन कार्यक्रम शामिल होते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) जैसी अत्यंत संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में ‘सॉफ्ट रिलीज़ सेंटर’ की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, वन्यजीव संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. परिचय: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) की स्थिति (अत्यंत संकटग्रस्त, IUCN) और भारत में इसके संरक्षण की आवश्यकता का संक्षिप्त परिचय।
2. सॉफ्ट रिलीज़ सेंटर की भूमिका: इसकी अवधारणा, उद्देश्य (कृत्रिम रूप से पाले गए या बचाए गए पक्षियों को प्राकृतिक आवास में अनुकूलित करना), कार्यप्रणाली (धीरे-धीरे जंगली वातावरण में छोड़ना), और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण में इसकी विशिष्ट प्रासंगिकता (जैसे गुजरात के कच्छ में केंद्र का उदाहरण) का विस्तृत वर्णन। इसकी सफलताओं और चुनौतियों (जैसे उच्च मृत्यु दर, अनुकूलन में कठिनाई) का आलोचनात्मक विश्लेषण।
3. सामुदायिक भागीदारी का महत्व: वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका (जैसे जानकारी साझा करना, अवैध शिकार रोकना, आवास प्रबंधन में सहायता, पारंपरिक ज्ञान का उपयोग) पर जोर। ‘खटाला सभा’ जैसे पारंपरिक सामाजिक संवादों के माध्यम से समुदाय को शामिल करने के उदाहरण। सामुदायिक भागीदारी के बिना संरक्षण प्रयासों की सीमाओं पर चर्चा।
4. निष्कर्ष: संरक्षण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता, जिसमें वैज्ञानिक हस्तक्षेप (सॉफ्ट रिलीज़ सेंटर) और सामाजिक-सांस्कृतिक जुड़ाव (सामुदायिक भागीदारी) दोनों शामिल हों, पर बल देते हुए निष्कर्ष।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री द्वारा गुजरात के किस स्थान पर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) के लिए ‘सयारा वन कवच’ में ‘सॉफ्ट रिलीज सेंटर’ का दौरा किया गया?

  1. A. कच्छ
  2. B. गिर सोमनाथ
  3. C. बनासकांठा
  4. D. पाटन

उत्तर: A. कच्छ — केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने गुजरात के कच्छ जिले में स्थित ‘सयारा वन कवच’ में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए ‘सॉफ्ट रिलीज सेंटर’ का दौरा किया।

Mains: गुजरात में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) के संरक्षण के लिए स्थापित ‘सॉफ्ट रिलीज सेंटर’ की भूमिका एवं महत्व पर 250 शब्दों में चर्चा कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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