01 Nov अमित शाह ने चंडीगढ़ में 258 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास
✎ चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र है, जिसका प्रशासन अनुच्छेद 239 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक करता है; यह पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी है, जिसका निर्माण पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 से जुड़ा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — राजव्यवस्था: संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासन (अनुच्छेद 239), पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 और केन्द्र-राज्य तथा संघ-राज्यक्षेत्र संबंध | GS Paper I — भूगोल/समाज: नियोजित शहर (Planned City) की अवधारणा और नगरीय विकास | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा: पुलिस आधुनिकीकरण, पुलिस कल्याण और पुलिस आवास | GS Paper II — शासन: लोक सेवा वितरण में नागरिक संतुष्टि मापन और सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना
- Prelims: संघ राज्यक्षेत्र और अनुच्छेद 239 (प्रशासक की नियुक्ति), अनुच्छेद 240 (कुछ संघ राज्यक्षेत्रों के लिए राष्ट्रपति की विनियम बनाने की शक्ति), पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 और चंडीगढ़ की स्थिति, चंडीगढ़ — पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी, ले कॉर्बूज़िए (Le Corbusier) और चंडीगढ़ का नियोजित नगर स्वरूप, राष्ट्रपति निशान (Presidential Colours) — पुलिस/सशस्त्र इकाइयों को दिया जाने वाला सम्मान, आधुनिकीकरण योजना (Modernisation of Police Forces — MPF), गृह मंत्रालय, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023) — लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण
- Essay: विकेन्द्रीकृत शासन और संघ राज्यक्षेत्रों की विशिष्ट भूमिका: राजधानी-नगर और प्रशासनिक संतुलन, नियोजित शहरों में सार्वजनिक परिवहन, आवास और नागरिक संतुष्टि: सुशासन की कसौटी
त्वरित पुनरावृत्ति: चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र है, जिसका प्रशासन अनुच्छेद 239 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक करता है; यह पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी है, जिसका निर्माण पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 से जुड़ा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
1 नवंबर 2026 को केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने चंडीगढ़ प्रशासन की लगभग 258 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। ये परियोजनाएँ शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, प्रशासन, अनुसंधान और नवाचार से जुड़ी हैं। इनमें 68 करोड़ रुपये की लागत से सिटी-यू बस डिपो का शुभारंभ और 68 करोड़ रुपये की लागत से पुलिसबलों के लिए बने टाइप-3 आवास शामिल हैं। इसी अवसर पर चंडीगढ़ पुलिस के लिए आवासीय संतुष्टि दर में 2029 से पहले देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया। कार्यक्रम को चंडीगढ़ की स्थापना की वर्षगांठ (1 नवंबर 1966) से भी जोड़ा गया, जब चंडीगढ़ संघ राज्यक्षेत्र और हरियाणा राज्य अस्तित्व में आए थे। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया इस अवसर पर उपस्थित थे। इस प्रकार यह घटना संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासन, शहरी अवसंरचना और पुलिस कल्याण से जुड़ी शासन-प्रक्रिया को समझने का अवसर देती है।
पृष्ठभूमि
- चंडीगढ़ का निर्माण स्वतंत्र भारत की प्रमुख नियोजित नगर परियोजनाओं में गिना जाता है। इसकी रूपरेखा फ्रांसीसी वास्तुकार ले कॉर्बूज़िए (Le Corbusier) की अवधारणा से जुड़ी है, जिसमें सेक्टर-आधारित संरचना और हरित क्षेत्र प्रमुख हैं।
- पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 (Punjab Reorganisation Act, 1966) के तहत 1 नवंबर 1966 को पंजाब से हरियाणा राज्य बना और चंडीगढ़ को संघ राज्यक्षेत्र का दर्जा दिया गया। चंडीगढ़ को दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी के रूप में व्यवस्थित किया गया।
- चंडीगढ़ का प्रशासन अनुच्छेद 239 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक करता है। प्रशासक की नियुक्ति प्रायः किसी निकटवर्ती राज्य के राज्यपाल को अतिरिक्त प्रभार के रूप में दी जाती है, और यही व्यवस्था यहाँ लागू है।
- महिलाओं के लिए 33% आरक्षण हेतु नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पारित हुआ है। इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
- नशा मुक्ति के लिए केन्द्र सरकार ने नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan) 2020 में आरंभ किया था, जो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के माध्यम से संचालित होता है।
संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन और नियोजित शहरी विकास क्या है?
- संघ राज्यक्षेत्र (Union Territory) वह प्रशासनिक इकाई है जो सीधे भारत सरकार के नियंत्रण में होती है। संविधान के भाग VIII (अनुच्छेद 239–242) में इनके प्रशासन का प्रावधान है।
- अनुच्छेद 239 के अनुसार राष्ट्रपति संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासन उस रूप में चलाते हैं जैसा वे उचित समझें, और इसके लिए प्रशासक नियुक्त कर सकते हैं। विधानसभा वाले संघ राज्यक्षेत्रों में सीमित विधायी व्यवस्था भी होती है।
- अनुच्छेद 240 राष्ट्रपति को कुछ संघ राज्यक्षेत्रों के लिए शांति, प्रगति और सुशासन हेतु विनियम (Regulations) बनाने की शक्ति देता है। चंडीगढ़ इस श्रेणी में नहीं, बल्कि अनुच्छेद 239 के अधीन आता है।
- चंडीगढ़ एक संयुक्त राजधानी है, जो पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी का कार्य करती है। इसलिए इसका प्रशासन संघ के अधीन रहता है और दोनों राज्यों के हितों का संतुलन आवश्यक होता है।
- नियोजित नगर में सेक्टर-आधारित विकास, सार्वजनिक परिवहन और सुसंगत अवसंरचना शासन की प्रमुख चुनौतियाँ हैं। सिटी बस सेवा जैसे परिवहन ढाँचे शहरी गतिशीलता और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा से जुड़े होते हैं।
- पुलिसबलों के लिए आवास (Police Housing) पुलिस कल्याण और मनोबल का महत्वपूर्ण घटक है। आवासीय सुविधा के स्तर को संतुष्टि-सूचकांक से मापना सेवा-वितरण में नागरिक एवं कर्मचारी संतुष्टि के आकलन की पद्धति को दर्शाता है।
- राष्ट्रपति निशान (Presidential Colours) एक औपचारिक सम्मान है, जो राष्ट्रपति द्वारा विशिष्ट सेवा और उत्कृष्ट योगदान के लिए किसी इकाई को प्रदान किया जाता है। इसकी प्राप्ति इकाई के गौरव और अनुशासन का प्रतीक मानी जाती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 258 करोड़ रूपए की बहु-क्षेत्रीय परियोजनाएँ (Multi-sectoral Projects) | शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, प्रशासन, अनुसंधान और नवाचार जैसे क्षेत्रों में एक साथ निवेश, जिससे केंद्र शासित प्रदेश के शासन ढाँचे का समग्र विकास होता है। |
| सिटी-यू बस डिपो (City-U Bus Depot), लागत 68 करोड़ रूपए | सार्वजनिक परिवहन के आधारभूत ढाँचे को मज़बूत करता है और शहरी गतिशीलता तथा परिवहन सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाता है। |
| पुलिस बल के लिए टाइप-3 आवास (Type-3 Housing), लागत 68 करोड़ रूपए | पुलिसकर्मियों के आवासीय कल्याण से जुड़ा है। सरकार ने 2029 तक आवासीय संतुष्टि दर में देश में प्रथम स्थान का लक्ष्य रखा है। |
| राष्ट्रपति निशान (President’s Colour) की प्राप्ति | चंडीगढ़ पुलिस की सेवा-उत्कृष्टता की मान्यता है। यह पुलिस बल के मनोबल और संस्थागत पहचान से जुड़ा पहलू है। |
| चंडीगढ़ की स्थापना (1966) | पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 (Punjab Reorganisation Act, 1966) के अंतर्गत चंडीगढ़ को पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी के रूप में स्थापित किया गया। यह केंद्र शासित प्रदेश का ऐतिहासिक आधार है। |
| प्रशासक के रूप में पंजाब के राज्यपाल | केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन राष्ट्रपति के नाम पर प्रशासक द्वारा चलाया जाता है। इससे केंद्र और प्रदेश के प्रशासनिक संबंध की व्यवस्था स्पष्ट होती है। |
महत्व
प्रशासनिक एवं संवैधानिक महत्व
- चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है, जहाँ अनुच्छेद 239 के अंतर्गत राष्ट्रपति प्रशासक नियुक्त करते हैं। यह व्यवस्था केंद्र के सीधे प्रशासनिक नियंत्रण को दर्शाती है।
- पंजाब के राज्यपाल का प्रशासक के रूप में कार्य करना दोहरी भूमिका का उदाहरण है, जिससे संवैधानिक पदों के बहुउद्देश्यीय उपयोग की व्यवस्था समझी जा सकती है।
- केंद्र शासित प्रदेश में विकास परियोजनाओं का सीधा क्रियान्वयन प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही की परीक्षा होता है।
शहरी विकास एवं आधारभूत ढाँचा
- चंडीगढ़ को ले कॉर्बूज़िए (Le Corbusier) की नगर-योजना के लिए जाना जाता है। ऐसे नियोजित शहर में नई परियोजनाओं को मौजूदा मास्टर प्लान के अनुरूप रखना आवश्यक होता है।
- सार्वजनिक परिवहन डिपो जैसी सुविधाएँ शहरी भीड़ और वायु-प्रदूषण की समस्या से निपटने में सहायक हो सकती हैं।
सुरक्षा बल कल्याण एवं शासन-सुधार
- पुलिस आवास की गुणवत्ता कर्मचारियों के मनोबल, कार्यक्षमता और कार्य-जीवन संतुलन को प्रभावित करती है।
- आवासीय संतुष्टि जैसे मापनीय लक्ष्य शासन में परिणाम-आधारित मूल्यांकन (Outcome-based Evaluation) की ओर संकेत करते हैं।
सामाजिक सेवाएँ और ज्ञान-आधारित विकास
- शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और अनुसंधान से जुड़ी परियोजनाएँ मानव विकास सूचकांकों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण होती हैं।
- नवाचार और अनुसंधान से जुड़े निवेश से शहर को शैक्षणिक और तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना बनती है।
चुनौतियाँ
1. केंद्र शासित प्रदेश का संघीय ढाँचा
- चंडीगढ़ पर पंजाब और हरियाणा दोनों का दावा और साझा राजधानी की व्यवस्था, प्रशासनिक निर्णयों को जटिल बनाती है।
- केंद्र शासित प्रदेश में स्थानीय निर्वाचित सरकार के अभाव में स्थानीय जनभागीदारी सीमित रहती है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन
2. परियोजना क्रियान्वयन और समय-सीमा
- बड़ी धनराशि की परियोजनाओं में देरी और लागत-वृद्धि आम समस्या है।
- शिलान्यास से लोकार्पण तक की प्रक्रिया में निविदा, भूमि-अधिग्रहण और पर्यावरणीय स्वीकृतियों के चरण शामिल होते हैं।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक वित्त प्रबंधन, परियोजना मूल्यांकन और शासन में दक्षता
3. शहरी नियोजन और जनसंख्या दबाव
- नियोजित शहर होने के बावजूद चंडीगढ़ में आवास, परिवहन और जल-आपूर्ति पर बढ़ता दबाव है।
- पुरानी नगर-योजना को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालना एक संतुलित चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शहरीकरण की चुनौतियाँ और शहरी नियोजन
4. सार्वजनिक परिवहन का उपयोग
- बस डिपो बनने के बाद भी सेवाओं की आवृत्ति, मार्ग-योजना और किराया-नीति पर परिवहन की प्रभावशीलता निर्भर करती है।
- निजी वाहनों पर निर्भरता घटाए बिना शहरी प्रदूषण पर नियंत्रण कठिन है।
यूपीएससी लिंक: शहरी परिवहन, पर्यावरण और सतत विकास
5. सेवा-मापन और लक्ष्यों की विश्वसनीयता
- आवासीय संतुष्टि दर जैसे लक्ष्यों के मापन की पद्धति, सर्वेक्षण की वैज्ञानिकता और स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।
- घोषित लक्ष्यों और वास्तविक परिणामों के बीच अंतर को कम करना चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: प्रशासनिक सुधार, लोक सेवा वितरण और परिणाम-आधारित शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| प्रशासनिक संरचना | निर्वाचित स्थानीय सरकार के अभाव में जनभागीदारी और जवाबदेही सीमित रहती है। |
| वित्तीय क्रियान्वयन | बड़ी परियोजनाओं में लागत-वृद्धि और विलंब से सार्वजनिक धन का उपयोग प्रभावित होता है। |
| शहरी दबाव | नियोजित शहर में भी आवास, जल और परिवहन की माँग बढ़ रही है। |
| परिवहन प्रभावशीलता | बस डिपो का लाभ सेवा-आवृत्ति और मार्ग-नेटवर्क पर निर्भर है। |
| लक्ष्य-मापन | आवासीय संतुष्टि जैसे लक्ष्यों के लिए स्वतंत्र और पारदर्शी मापन आवश्यक है। |
आगे की राह
- परियोजनाओं के लिए भौतिक और वित्तीय प्रगति का सार्वजनिक डैशबोर्ड बनाकर पारदर्शिता बढ़ाई जाए।
- पुलिस आवास और अन्य कल्याण परियोजनाओं में स्वतंत्र सर्वेक्षण द्वारा आवासीय संतुष्टि का वैज्ञानिक मापन किया जाए।
- सिटी-यू बस डिपो को मार्ग-योजना और सेवा-आवृत्ति के साथ एकीकृत कर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाया जाए।
- शहरी नियोजन में ले कॉर्बूज़िए की विरासत के संरक्षण और आधुनिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित किया जाए।
- स्थानीय हितधारकों के परामर्श की औपचारिक व्यवस्था बनाकर केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन में जनभागीदारी बढ़ाई जाए।
- परियोजना-चक्र में निविदा, भूमि-अधिग्रहण और स्वीकृतियों की समयबद्धता के लिए एकीकृत निगरानी तंत्र अपनाया जाए।
- शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और अनुसंधान के निवेश को मानव विकास सूचकांकों के मापदंडों से जोड़कर प्रभाव का आकलन किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) · प्रशासक (Administrator) · अनुच्छेद 239 (Article 239) · पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 (Punjab Reorganisation Act, 1966) · संयुक्त राजधानी (Joint Capital) · चंडीगढ़ नगर नियोजन (Chandigarh Master Plan) · नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Nari Shakti Vandan Adhiniyam, 2023) · अनुच्छेद 334क (Article 334A) · पुलिस आधुनिकीकरण (Police Modernisation) · नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan) · संघवाद (Federalism) · सरकार बनाम भारत संघ, दिल्ली (2018) (Government of NCT of Delhi v. Union of India)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 239: केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासक द्वारा शासन
- अनुच्छेद 240: केंद्र शासित प्रदेशों के लिए राष्ट्रपति के विनियम
अवधारणा प्रवाह
चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, प्रशासन और नवाचार से जुड़ी 258 करोड़ रूपए की परियोजनाओं का प्रस्ताव → केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक के रूप में पंजाब के राज्यपाल द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति और निगरानी (अनुच्छेद 239 के अंतर्गत) → केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा सिटी-यू बस डिपो और पुलिस आवास जैसी परियोजनाओं का लोकार्पण तथा शिलान्यास → सार्वजनिक परिवहन और पुलिस कल्याण में सुधार से शहरी सेवा-वितरण में वृद्धि → सेवा-वितरण के परिणाम का मापन, जैसे आवासीय संतुष्टि दर से शासन की प्रभावशीलता का आकलन → मापन-आधारित समीक्षा से नीति-समायोजन और अगले चरण की परियोजनाओं का निर्धारण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंडीगढ़ की स्थापना 1 नवंबर 1966 को पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के अंतर्गत हुई थी, और यह पंजाब तथा हरियाणा की संयुक्त राजधानी है।
2. चंडीगढ़ के पास अपना निर्वाचित विधानमंडल है, जैसा कि पुडुचेरी और दिल्ली के पास है।
3. चंडीगढ़ का प्रशासक प्रायः पंजाब का राज्यपाल होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: चंडीगढ़ 1 नवंबर 1966 को अस्तित्व में आया और पंजाब व हरियाणा की संयुक्त राजधानी है। कथन 2 गलत है: चंडीगढ़ के पास विधानमंडल नहीं है, जबकि पुडुचेरी (अनुच्छेद 239क) और दिल्ली (अनुच्छेद 239कक) के पास निर्वाचित विधानमंडल हैं। कथन 3 सही है: पंजाब के राज्यपाल चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में कार्य करते हैं। अतः सही उत्तर ‘केवल दो’ है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): 106वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 द्वारा लोक सभा और राज्य विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है, परंतु यह आरक्षण तत्काल प्रभावी नहीं है।
कारण (R): संविधान का अनुच्छेद 334क इस आरक्षण के प्रभावी होने को एक नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन के पूर्ण होने से जोड़ता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है। — 106वें संशोधन द्वारा अनुच्छेद 330क (लोक सभा), 332क (राज्य विधान सभाएँ) और 334क जोड़े गए। अनुच्छेद 334क के अनुसार आरक्षण का लागू होना प्रथम जनगणना के प्रकाशन और परिसीमन के बाद ही आरंभ होता है, इसलिए कथन (R) कथन (A) की विलंबित प्रभावशीलता को स्पष्ट करता है। अतः (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में कुछ केंद्र शासित प्रदेशों को निर्वाचित विधानमंडल प्रदान किया गया है, जबकि चंडीगढ़ जैसे प्रदेश प्रशासक के माध्यम से शासित होते हैं, और यह पद प्रायः किसी राज्य के राज्यपाल को सौंप दिया जाता है। इस व्यवस्था का चंडीगढ़ के संदर्भ में समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या एक ही व्यक्ति को राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक का दोहरा दायित्व सौंपना संघीय शासन की दृष्टि से उचित है? (15 Marks)
रूपरेखा: 1. भूमिका: 1 नवंबर 1966 को पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के अंतर्गत चंडीगढ़ का गठन; पंजाब व हरियाणा की संयुक्त राजधानी के रूप में इसकी स्थिति; 60 वर्षों बाद (2026) वर्षगाँठ और शहर का नगरीय नियोजन (ले कॉर्बूज़िए, पियरे जीनरे, मैसिएज नोविकी की नियोजन परंपरा) इसकी पहचान।
2. संवैधानिक ढाँचा: संघ राज्य क्षेत्र की परिभाषा (अनुच्छेद 1 व प्रथम अनुसूची); अनुच्छेद 239 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा प्रशासक के माध्यम से प्रशासन; अनुच्छेद 239क (पुडुचेरी) और अनुच्छेद 239कक (दिल्ली) के अपवाद; अनुच्छेद 240 के अंतर्गत राष्ट्रपति का विनियम-निर्माण अधिकार; अनुच्छेद 241 के अंतर्गत उच्च न्यायालय।
3. चंडीगढ़ मॉडल का परीक्षण: निर्वाचित विधानमंडल का अभाव, नागरिक सहभागिता की सीमा, नगरपालिका व पुलिस जैसे विषयों पर केंद्र का नियंत्रण; पुलिस व्यवस्था, आवास और नगर सेवाओं में प्रशासनिक दक्षता के लाभ; लोकतांत्रिक जवाबदेही की कमी का तर्क।
4. दोहरे दायित्व का प्रश्न: राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका (अनुच्छेद 153, 163) बनाम प्रशासक की केंद्र-नियुक्त भूमिका; सरकारिया आयोग (1988) और प्रशासनिक सुधार आयोग की संघीय संतुलन पर चर्चा का संदर्भ; एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) में संघवाद को संविधान के मूल ढाँचे से जोड़ने का सिद्धांत।
5. तुलनात्मक संदर्भ: गवर्नमेंट ऑफ एनसीटी ऑफ दिल्ली बनाम भारत संघ (2018) में संवैधानिक पीठ का निर्णय, जिसमें निर्वाचित सरकार और उपराज्यपाल के अधिकारों का संतुलन तय किया गया; यह दिखाता है कि निर्वाचित सरकार के अभाव वाले प्रदेशों में जवाबदेही का प्रश्न अधिक प्रबल होता है।
6. तर्कों का संतुलन और निष्कर्ष: प्रशासनिक दक्षता बनाम लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व; सुझाव — स्थानीय निकायों को सशक्त करना, प्रशासक और राज्यपाल के पद को पृथक करने पर विचार, तथा संघीय सहमति के माध्यम से सुधार।
7. समापन: संविधान की संघीय भावना और सहकारी संघवाद के आलोक में संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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