29 Jul आरबीआई गवर्नर ने कहा रुपया है कम मूल्यांकित, जानिए क्या है मतलब और क्यों है महत्वपूर्ण
प्रासंगिकता — UPSC & State PCS: Economy
रुपया के कमज़ोर होने पर आरबीआई गवर्नर के बयान ने अर्थव्यवस्था के लिए नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय रुपया अपनी वास्तविक क्षमता से कमज़ोर है, यानी यह अवमूल्यित (अंडरवैल्यूड) है। इसका मतलब यह है कि अगर रुपया अपनी सही कीमत पर होता, तो यह और मज़बूत होता। यह बात इसलिए अहम है क्योंकि रुपये की कमज़ोरी आयात महंगे कर देती है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा रहता है। साथ ही, निर्यातकों को फायदा होता है, मगर आयात पर निर्भर उद्योगों के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं। गवर्नर का यह बयान वैश्विक अस्थिरता के बीच आया है, जब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमज़ोर हो रहा है। इससे न केवल विदेशी निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है, बल्कि आयात बिल भी बढ़ जाता है, जो चालू खाता घाटे को और गहरा सकता है।
इस बयान का सीधा असर उन परीक्षार्थियों पर पड़ेगा जो यूपीएससी या राज्य पीसीएस के माध्यम से सिविल सेवाओं में शामिल होना चाहते हैं। अर्थव्यवस्था के इस पहलू को समझना न केवल प्रारंभिक परीक्षा बल्कि मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के लिए भी ज़रूरी है। रुपये के अवमूल्यन से जुड़े कारणों जैसे व्यापार घाटा, विदेशी मुद्रा भंडार, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक रुझानों को समझना परीक्षा में आर्थिक नीतियों और उनके प्रभावों पर सवालों का जवाब देने में मदद करेगा। इसके अलावा, आरबीआई की भूमिका, मौद्रिक नीति और विनिमय दर प्रबंधन जैसे विषय भी पाठ्यक्रम में शामिल हैं, जिन पर इस घटना के माध्यम से गहराई से चर्चा की जा सकती है।
राज्य पीसीएस के लिए यह विषय और भी प्रासंगिक है क्योंकि कई राज्य सरकारें निर्यात-आधारित उद्योगों को बढ़ावा दे रही हैं। रुपये के कमज़ोर होने से निर्यातकों को फायदा होता है, मगर राज्य स्तर पर आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से आम आदमी पर बोझ पड़ता है। ऐसे में, राज्य सरकारों को अपने बजट और आर्थिक न
स्रोत: Business Standard
अभ्यास प्रश्न
Q1. आरबीआई गवर्नर द्वारा रुपये को ‘अंडरवैल्यूड’ बताया गया है। निम्नलिखित में से कौन सा कारण रुपये के ‘अंडरवैल्यूड’ होने का प्रमुख कारण नहीं है?
- विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार में अधिक निवेश
- भारत के निर्यात में वृद्धि
- विदेशी मुद्रा भंडार में कमी
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में रुपये की कम मांग
उत्तर
विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार में अधिक निवेश — रुपये के ‘अंडरवैल्यूड’ होने का प्रमुख कारण निर्यात में वृद्धि, विदेशी मुद्रा भंडार में कमी, या अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में रुपये की कम मांग हो सकता है। विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार में अधिक निवेश से रुपये की मांग बढ़ती है, जिससे यह ओवरवैल्यूड हो सकता है, न कि अंडरवैल्यूड।
Q2. रुपये के ‘अंडरवैल्यूड’ होने से निम्नलिखित में से किस क्षेत्र को सर्वाधिक लाभ मिलने की संभावना है?
- सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र
- कृषि क्षेत्र
- निर्यात आधारित उद्योग
- सेवा क्षेत्र
उत्तर
निर्यात आधारित उद्योग — रुपये के ‘अंडरवैल्यूड’ होने से निर्यात आधारित उद्योगों को लाभ मिलता है, क्योंकि उनके उत्पाद विदेशी बाजारों में सस्ते हो जाते हैं, जिससे निर्यात में वृद्धि होती है।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- उत्तराखंड राज्यपाल के 5 वर्ष: पांच मिशन और AI क्रांति का लेखा-जोखा - September 15, 2026
- UPSC Focus: Uttarakhand Governor’s 5-Year Journey & 5 Key Missions Explained - September 15, 2026
- AI का वादा और खतरा: क्या मानवता के लिए खतरा है कृत्रिम बुद्धिमत्ता? - September 15, 2026

No Comments