उत्तराखंड राज्यपाल के 5 वर्ष: पांच मिशन और AI क्रांति का लेखा-जोखा

देहरादून:राज्यपाल ने पांच वर्ष में पांच मिशन को धरातल पर उतारा, आज पूरे हो रहे पांच साल, 2021 में संभाला था पद — labelled illustration

उत्तराखंड राज्यपाल के 5 वर्ष: पांच मिशन और AI क्रांति का लेखा-जोखा

✎ राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होने के साथ-साथ केंद्र का प्रतिनिधि भी होता है, जिसकी भूमिका राज्य के विकास और शासन में महत्वपूर्ण होती है, जैसा कि उत्तराखंड में विभिन्न मिशनों के माध्यम से देखा गया।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: राज्यपाल की भूमिका और कार्य  |  GS Paper II — केंद्र-राज्य संबंध  |  GS Paper II — शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में विकास
  • Prelims: राज्यपाल की नियुक्ति, राज्यपाल के विवेकाधीन शक्तियाँ, अनुच्छेद 153, राज्य कार्यपालिका, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), महिला सशक्तिकरण, रिवर्स पलायन
  • Essay: भारत में संघीय व्यवस्था और राज्यपाल की भूमिका, तकनीक और नवाचार के माध्यम से समावेशी विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होने के साथ-साथ केंद्र का प्रतिनिधि भी होता है, जिसकी भूमिका राज्य के विकास और शासन में महत्वपूर्ण होती है, जैसा कि उत्तराखंड में विभिन्न मिशनों के माध्यम से देखा गया।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने हाल ही में अपने पद पर पाँच वर्ष पूरे किए हैं। इस दौरान उन्होंने राज्य में पाँच प्रमुख मिशनों को धरातल पर उतारा, जिनमें रिवर्स पलायन, महिला सशक्तिकरण, बालिका शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीक का उपयोग, जैविक कृषि तथा वेलनेस शामिल हैं। उनके कार्यकाल की उपलब्धियों और विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला गया है, जिससे राज्यपाल के पद की सक्रिय भूमिका और राज्य के विकास में उनके योगदान पर चर्चा हो रही है।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा।
  • राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
  • राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
  • राज्यपाल राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति (Chancellor) भी होता है और उच्च शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • राज्यपाल के पास कार्यकारी, विधायी, वित्तीय और न्यायिक शक्तियाँ होती हैं, साथ ही कुछ विवेकाधीन शक्तियाँ भी होती हैं।
  • समय-समय पर राज्यपालों की भूमिका और केंद्र-राज्य संबंधों में उनके प्रभाव पर बहस होती रही है।

राज्यपाल की भूमिका और उनके प्रमुख मिशन

  • राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख होता है और राज्य के सभी कार्यकारी कार्य उसके नाम पर किए जाते हैं।
  • वह मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की नियुक्ति करता है, राज्य विधानमंडल के सत्र बुलाता है, सत्रावसान करता है और विघटित करता है।
  • राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकता है और राज्य के कानूनों को राष्ट्रपति की सहमति के लिए आरक्षित कर सकता है।
  • उत्तराखंड के राज्यपाल द्वारा शुरू किए गए ‘रिवर्स पलायन’ मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर हो रहे पलायन को रोकना और लोगों को वापस अपने गाँवों में लौटने के लिए प्रेरित करना है।
  • ‘महिला सशक्तिकरण’ और ‘बालिका शिक्षा’ मिशन के तहत बालिका आत्मरक्षा एवं कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए और महिलाओं को कानूनी, कॅरिअर तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान करने के लिए ‘गार्गी नारी शक्ति AI चैटबॉट’ जैसी पहल की गई।
  • ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक’ को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तराखंड AI मिशन-2025’ और ‘AI फॉर ऑल’ जैसी पहलें शुरू की गईं, जिससे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण मिल सके।
  • उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार के लिए ‘वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च’ पहल शुरू की गई और कुलपति चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए इंटरेक्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग भी शुरू की गई।
  • ‘जैविक कृषि’ और ‘वेलनेस’ को बढ़ावा देने के लिए आरोग्यधाम की स्थापना की गई, जहाँ पंचकर्म और फिजियोथेरेपी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं, साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे प्रयास किए गए।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
रिवर्स पलायन पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का प्रयास।
महिला सशक्तीकरण एवं बालिका शिक्षा लैंगिक समानता और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं तकनीक आधुनिक तकनीक को शासन और रोजगार से जोड़कर नवाचार को प्रोत्साहन।
जैविक कृषि एवं वेलनेस सतत कृषि पद्धतियों और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना।
उच्च शिक्षा में सुधार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।

महत्व

सामाजिक विकास

  • महिला सशक्तीकरण और बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान देकर समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया गया है।
  • टीबी, मानसिक स्वास्थ्य और स्तन कैंसर जैसे विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करके जन स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में कार्य किया गया।

तकनीकी नवाचार एवं रोजगार

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को विकास का माध्यम बनाकर ई-ऑफिस और स्मार्ट ऑटोमेशन सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं, जिससे प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि होगी।
  • गार्गी नारी शक्ति AI चैटबॉट जैसी पहल महिलाओं को कानूनी, करियर और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान कर डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देती है।
  • उत्तराखंड AI मिशन-2025 और AI फॉर ऑल जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देकर कौशल विकास में सहायक हैं।

शासन एवं पारदर्शिता

  • कुलपति चयन प्रक्रिया में इंटरेक्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे कदम पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाते हैं।
  • जनता मिलन कार्यक्रमों और शिकायत निवारण अधिकारी की व्यवस्था से नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित होता है।

पर्यावरण संरक्षण

  • रेन वाटर हार्वेस्टिंग और नक्षत्र वाटिका जैसी पहलें पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन के महत्व को दर्शाती हैं।

चुनौतियाँ

1. पलायन की समस्या

  • उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में रिवर्स पलायन एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है।
  • रोजगार के अवसरों की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव पलायन को बढ़ावा देता है।

2. तकनीकी समावेश

  • AI और तकनीक को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाना, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, एक चुनौती है।
  • डिजिटल साक्षरता और आवश्यक बुनियादी ढांचे की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

3. उच्च शिक्षा की गुणवत्ता

  • उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार को बनाए रखना तथा उसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना एक सतत चुनौती है।
  • शिक्षकों की कमी, अनुसंधान के लिए अपर्याप्त धन और पाठ्यक्रम का अद्यतन न होना प्रमुख मुद्दे हैं।

4. महिला सशक्तीकरण का विस्तार

  • महिला सशक्तीकरण के कार्यक्रमों को केवल जागरूकता तक सीमित न रखकर उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी तक पहुंचाना आवश्यक है।
  • पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचनाओं को चुनौती देना और लैंगिक रूढ़िवादिता को दूर करना एक बड़ी चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
रिवर्स पलायन की धीमी गति ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त आर्थिक अवसरों और बुनियादी ढांचे की कमी।
डिजिटल डिवाइड दूरदराज के क्षेत्रों में तकनीकी पहुंच और डिजिटल साक्षरता का अभाव।
उच्च शिक्षा में अनुसंधान का स्तर विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता।
महिला स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और जागरूकता।

आगे की राह

  • रिवर्स पलायन को प्रभावी बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को बढ़ावा दिया जाए तथा स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराए जाएं।
  • डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए।
  • उच्च शिक्षा में ‘वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च’ जैसी पहलों को और अधिक प्रोत्साहन दिया जाए तथा अनुसंधान के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जाए।
  • महिला सशक्तीकरण के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को रोजगार से जोड़ा जाए और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जाए।
  • जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रशिक्षण, प्रमाणन और विपणन सहायता प्रदान की जाए।
  • शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ई-गवर्नेंस (e-Governance) पहलों का विस्तार किया जाए और नागरिक केंद्रित सेवाओं को सुदृढ़ किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राज्यपाल की भूमिका · राज्य प्रशासन · नीतिगत पहल · महिला सशक्तीकरण · बालिका शिक्षा · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · उच्च शिक्षा में सुधार · पर्यावरण संरक्षण · जन शिकायत निवारण · रिवर्स पलायन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 163’, ‘note’: ‘राज्यपाल को सहायता और सलाह’}

अवधारणा प्रवाह

राज्यपाल द्वारा मिशनों का निर्धारण  →  सामाजिक एवं तकनीकी पहलों का क्रियान्वयन  →  महिला सशक्तीकरण, शिक्षा एवं AI पर जोर  →  शासन में पारदर्शिता एवं जन सहभागिता  →  सतत विकास और रोजगार सृजन का लक्ष्य

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य करता है।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा।
3. राज्यपाल को राज्य विधानमंडल द्वारा महाभियोग (Impeachment) के माध्यम से हटाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है। अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल का प्रावधान करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि राज्यपाल को राष्ट्रपति द्वारा हटाया जाता है, न कि राज्य विधानमंडल द्वारा महाभियोग से।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कार्य राज्यपाल के विवेकाधीन शक्तियों में शामिल है/हैं?
1. मुख्यमंत्री की नियुक्ति जब किसी दल को स्पष्ट बहुमत न मिला हो।
2. राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करना।
3. राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता पर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — तीनों कार्य राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों में शामिल हैं। मुख्यमंत्री की नियुक्ति, विधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना और राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करना राज्यपाल के महत्वपूर्ण विवेकाधीन अधिकार हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारतीय संघवाद में राज्यपाल की भूमिका एक दोहरी प्रकृति को दर्शाती है, जहाँ वह राज्य के संवैधानिक प्रमुख होने के साथ-साथ केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य करता है। हाल के घटनाक्रमों के आलोक में, राज्यपाल द्वारा की गई नीतिगत पहलों और उनके संवैधानिक जनादेश के बीच संतुलन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** राज्यपाल की दोहरी भूमिका का संक्षिप्त परिचय दें – राज्य का संवैधानिक प्रमुख (अनुच्छेद 154) और केंद्र का प्रतिनिधि (अनुच्छेद 155)।
2. **संवैधानिक जनादेश:** संविधान के तहत राज्यपाल की शक्तियों और कार्यों का उल्लेख करें, जैसे मुख्यमंत्री की नियुक्ति (अनुच्छेद 164), विधेयकों पर सहमति (अनुच्छेद 200), राष्ट्रपति शासन की सिफारिश (अनुच्छेद 356) और विवेकाधीन शक्तियाँ।
3. **नीतिगत पहलें:** उत्तराखंड के राज्यपाल द्वारा शुरू की गई ‘रिवर्स पलायन’, ‘महिला सशक्तीकरण’, ‘बालिका शिक्षा’, ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग’, ‘उच्च शिक्षा में सुधार’ (वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च), ‘जैविक कृषि’ और ‘वेलनेस’ जैसी पहलों का उदाहरण दें। यह भी बताएं कि ये पहलें किस प्रकार राज्य के विकास में सहायक हो सकती हैं।
4. **संतुलन का समालोचनात्मक परीक्षण:**
* **सकारात्मक पक्ष:** राज्यपाल की सक्रिय भूमिका राज्य के विकास में सहायक हो सकती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ राज्य सरकार का ध्यान कम हो या जहाँ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को बढ़ावा देना हो। ये पहलें ‘राजभवन की पहल’ के रूप में राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान कर सकती हैं।
* **चुनौतियाँ/आलोचना:** राज्यपाल की सक्रिय नीतिगत भूमिका कभी-कभी निर्वाचित राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में हस्तक्षेप के रूप में देखी जा सकती है, जिससे केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव आ सकता है। यह संघवाद की भावना के विरुद्ध भी हो सकता है यदि राज्यपाल अपनी विवेकाधीन शक्तियों का उपयोग राज्य सरकार की नीतियों को दरकिनार करने के लिए करे। सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) और पुंछी आयोग (Punchhi Commission) की सिफारिशों का उल्लेख करें जो राज्यपाल की भूमिका को निष्पक्ष और संवैधानिक सीमाओं के भीतर रखने पर जोर देती हैं।
5. **निष्कर्ष:** एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें कि राज्यपाल को अपनी संवैधानिक भूमिका और केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के बीच सामंजस्य स्थापित करना चाहिए। उनकी पहलें राज्य सरकार के साथ सहयोगपूर्ण होनी चाहिए ताकि संघवाद की भावना और लोकतांत्रिक सिद्धांतों का सम्मान हो सके।

स्रोत: amarujala.com

Uttarakhand PCS (UKPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: उत्तराखंड के राज्यपाल द्वारा पांच वर्षों में ‘धरातल पर उतारे गए पांच मिशन’ में निम्नलिखित में से कौन सा शामिल नहीं है?

  1. 1. पर्यावरण संरक्षण एवं वन संवर्धन मिशन
  2. 2. पर्यटन विकास एवं बुनियादी ढांचा मिशन
  3. 3. शहरी विकास एवं स्मार्ट सिटी मिशन
  4. 4. महिला सशक्तिकरण एवं बाल कल्याण मिशन

उत्तर: 3. शहरी विकास एवं स्मार्ट सिटी मिशन — राज्यपाल द्वारा धरातल पर उतारे गए पांच मिशनों में ‘शहरी विकास एवं स्मार्ट सिटी मिशन’ शामिल नहीं था।

Mains: उत्तराखंड राज्य के विकास में राज्यपाल द्वारा आरंभ किए गए पांच मिशनों के महत्व एवं उनके प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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