इसरो अकेला नहीं कर सकता देश की अंतरिक्ष जरूरतों को पूरा, जानिए क्यों जरूरी है निजी क्षेत्र

‘ISRO alone can’t meet country’s needs’: Dr Narayanan on criticism over privatisation of space sector — labelled illustration

इसरो अकेला नहीं कर सकता देश की अंतरिक्ष जरूरतों को पूरा, जानिए क्यों जरूरी है निजी क्षेत्र

✎ भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र का निजीकरण देश की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने, नवाचार को बढ़ावा देने और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS पेपर III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  |  GS पेपर III — अर्थव्यवस्था
  • Prelims: अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार, IN-SPACe, न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), गगनयान कार्यक्रम, EOS-05
  • Essay: भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम: आत्मनिर्भरता से वैश्विक नेतृत्व की ओर, निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से आर्थिक संवृद्धि और नवाचार

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र का निजीकरण देश की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने, नवाचार को बढ़ावा देने और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण को लेकर हो रही आलोचना का जवाब देते हुए कहा है कि देश की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ISRO अकेला पर्याप्त नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित होना चाहिए ताकि उपग्रहों और संबंधित सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।

पृष्ठभूमि

  • भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अपनी स्थापना के बाद से मुख्य रूप से ISRO के नेतृत्व में रहा है, जिसने देश को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाया है।
  • पिछले कुछ वर्षों में, उपग्रहों, प्रक्षेपण सेवाओं और अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसे केवल ISRO के संसाधनों से पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
  • सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई सुधारों की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में नवाचार और आर्थिक संवृद्धि को गति देना है।
  • इन सुधारों में निजी कंपनियों को ISRO की सुविधाओं और विशेषज्ञता तक पहुंच प्रदान करना तथा उन्हें अपनी स्वयं की अंतरिक्ष क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।
  • हाल ही में GSLV-F17 द्वारा EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो ISRO की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है।
  • गगनयान कार्यक्रम, भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, भी योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है, जिसका लक्ष्य इस वर्ष पहला मानवरहित मिशन शुरू करना है।
  • वर्तमान में भारत के पास 56 उपग्रह हैं, जबकि देश की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सैकड़ों उपग्रहों की आवश्यकता है।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी से अंतरिक्ष क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
  • ISRO निजी क्षेत्र को आवश्यक सहायता प्रदान कर रहा है ताकि देश में अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र का विकास सुनिश्चित हो सके।

भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण के प्रमुख पहलू

  • भारत सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए जून 2020 में ऐतिहासिक सुधारों की घोषणा की।
  • इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बढ़ाना और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की हिस्सेदारी में वृद्धि करना है।
  • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) की स्थापना की गई है, जो निजी क्षेत्र की संस्थाओं को ISRO की सुविधाओं का उपयोग करने और अंतरिक्ष गतिविधियों में भाग लेने के लिए एकल-खिड़की इंटरफ़ेस के रूप में कार्य करता है।
  • न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL), ISRO की वाणिज्यिक शाखा, निजी उद्योगों को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करती है और अंतरिक्ष उत्पादों तथा सेवाओं को बढ़ावा देती है।
  • निजी क्षेत्र को उपग्रहों, प्रक्षेपण यानों और अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों के डिजाइन, विकास और प्रक्षेपण में शामिल होने की अनुमति दी गई है।
  • यह कदम अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देगा, नई प्रौद्योगिकियों के विकास को गति देगा और रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
  • निजीकरण से भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं का विस्तार होगा, जिससे देश की बढ़ती उपग्रह और संचार आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।
  • यह भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा, जिससे निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
निजी क्षेत्र की भागीदारी देश की बढ़ती उपग्रह (satellite) और संबंधित सेवाओं की मांग को पूरा करने के लिए आवश्यक।
अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का विस्तार अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
ISRO की भूमिका निजी क्षेत्र को आवश्यक सहायता प्रदान करेगा और मार्गदर्शन करेगा।
GSLV-F17 का सफल प्रक्षेपण EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (Earth observation satellite) को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया; GSLV Mark II की क्षमता में वृद्धि का प्रदर्शन।
कुलशेखरपट्टिनम अंतरिक्ष बंदरगाह (spaceport) परियोजना निर्माण कार्य प्रगति पर है, मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद।
गगनयान कार्यक्रम योजना के अनुसार प्रगति पर है, पहला मानव रहित मिशन इसी वर्ष लक्षित।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी से अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का विस्तार होगा, जिससे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि होगी।
  • उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण सेवाओं और संबंधित प्रौद्योगिकियों में निवेश से नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  • उन्नत उपग्रह सेवाओं से कृषि, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और संचार जैसे क्षेत्रों को लाभ होगा, जिससे समग्र आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

सामरिक महत्व

  • अंतरिक्ष क्षेत्र का निजीकरण भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा, जिससे इसकी भू-राजनीतिक स्थिति मजबूत होगी।
  • स्वदेशी क्षमता में वृद्धि से बाहरी निर्भरता कम होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी से अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में नवाचार के मामले में अग्रणी बनने में मदद मिलेगी।

सामाजिक महत्व

  • अधिक उपग्रहों की उपलब्धता से दूरदराज के क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी और डिजिटल समावेशन सुनिश्चित होगा।
  • पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों से प्राप्त डेटा कृषि उत्पादकता बढ़ाने और प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन में सहायक होगा, जिससे लाखों लोगों के जीवन में सुधार आएगा।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रगति युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगी।

चुनौतियाँ

1. नियामक ढाँचा (Regulatory Framework)

  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और कुशल नियामक ढाँचे की आवश्यकता है।
  • लाइसेंसिंग, स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा प्रोटोकॉल से संबंधित नियमों को सुव्यवस्थित करना महत्वपूर्ण है।

2. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण

  • ISRO से निजी कंपनियों को संवेदनशील प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित और प्रभावी हस्तांतरण को सुनिश्चित करना।
  • निजी क्षेत्र में आवश्यक कौशल और विशेषज्ञता विकसित करने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की आवश्यकता।

3. वित्तपोषण और निवेश

  • अंतरिक्ष क्षेत्र में अनुसंधान, विकास और बुनियादी ढाँचे के लिए पर्याप्त निजी और सार्वजनिक निवेश आकर्षित करना।
  • उच्च प्रारंभिक निवेश और लंबे समय तक रिटर्न की अवधि के कारण निजी निवेशकों को आकर्षित करना एक चुनौती हो सकती है।

4. प्रतिस्पर्धा और बाजार पहुंच

  • घरेलू निजी कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने और समान अवसर प्रदान करने में सहायता करना।
  • छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए बाजार पहुंच सुनिश्चित करना ताकि नवाचार को बढ़ावा मिल सके।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
नियामक अस्पष्टता निजी खिलाड़ियों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों और प्रक्रियाओं की कमी निवेश को हतोत्साहित कर सकती है।
प्रौद्योगिकी सुरक्षा संवेदनशील अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के निजी हाथों में जाने से राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
वित्तपोषण की कमी अंतरिक्ष परियोजनाओं के लिए आवश्यक बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाना निजी कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
मानव संसाधन अंतरिक्ष क्षेत्र में विशेषज्ञता वाले कुशल कार्यबल की कमी निजी क्षेत्र के विकास को बाधित कर सकती है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में स्थापित खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना भारतीय निजी कंपनियों के लिए कठिन हो सकता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe)
  • न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL)

आगे की राह

  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए एक व्यापक और गतिशील अंतरिक्ष नीति विकसित करना।
  • IN-SPACe और NSIL जैसी संस्थाओं को मजबूत करना ताकि वे निजी क्षेत्र के लिए एकल खिड़की (single window) के रूप में कार्य कर सकें।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को प्रोत्साहित करना।
  • निजी कंपनियों को वित्तीय सहायता, कर प्रोत्साहन और आसान ऋण सुविधाएँ प्रदान करना।
  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए एक स्पष्ट और सुरक्षित तंत्र स्थापित करना।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में कुशल कार्यबल विकसित करने के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निवेश करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देना ताकि भारतीय निजी कंपनियाँ वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधार · निजीकरण · भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) · अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था · उपग्रह सेवाएँ · आत्मनिर्भर भारत · रोज़गार सृजन · तकनीकी प्रगति · सार्वजनिक-निजी भागीदारी · राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 51A(j)’: ‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना’}
  • {‘अनुच्छेद 246’: ‘संघ सूची में अंतरिक्ष अनुसंधान’}

अवधारणा प्रवाह

देश की बढ़ती उपग्रह आवश्यकताएँ  →  ISRO अकेले मांग पूरी करने में असमर्थ  →  सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार  →  निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन  →  अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी तंत्र का विकास  →  रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. GSLV-F17 मिशन ने EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया।
2. GSLV Mark II वाहन की क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
3. गगनयान कार्यक्रम का पहला मानव रहित मिशन इस वर्ष के लिए लक्षित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। GSLV-F17 ने EOS-05 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया और GSLV Mark II की क्षमता में वृद्धि हुई है। कथन 3 गलत है क्योंकि गगनयान का पहला मानव रहित मिशन इस वर्ष के लिए लक्षित है, लेकिन यह मानव रहित नहीं बल्कि एक परीक्षण मिशन है।

Q2. कथन (A): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अकेला देश की बढ़ती अंतरिक्ष आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता है।
कारण (R): सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सुधारों की घोषणा की है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — कथन A सही है क्योंकि ISRO अध्यक्ष ने स्वयं कहा है कि ISRO अकेला देश की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकता। कारण R भी सही है और यह कथन A का सही स्पष्टीकरण है, क्योंकि निजी भागीदारी ही ISRO के बोझ को कम कर सकती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए गए सुधारों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस निजीकरण से देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और रोज़गार सृजन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी की आवश्यकता और ISRO पर बढ़ते दबाव का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **सुधारों का समालोचनात्मक परीक्षण:**
* **सकारात्मक पक्ष:** अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदम (जैसे IN-SPACe की स्थापना, नई अंतरिक्ष नीति का मसौदा)।
* **उद्देश्य:** आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार, उपग्रह सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करना।
* **चुनौतियाँ/आलोचना:** सुरक्षा चिंताएँ, एकाधिकार का डर, ISRO की भूमिका का संभावित क्षरण, नियामक ढाँचे की स्पष्टता का अभाव।
3. **अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:**
* **संवृद्धि:** निजी कंपनियों के प्रवेश से अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का विस्तार, नए बाज़ारों का विकास।
* **नवाचार:** प्रतिस्पर्धा से तकनीकी नवाचार को बढ़ावा।
* **लागत-प्रभावशीलता:** निजी क्षेत्र की दक्षता से लागत में कमी।
4. **रोज़गार सृजन पर प्रभाव:**
* **प्रत्यक्ष रोज़गार:** निजी कंपनियों में वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों के लिए नए अवसर।
* **अप्रत्यक्ष रोज़गार:** सहायक उद्योगों और सेवाओं में रोज़गार का सृजन।
* **कौशल विकास:** अंतरिक्ष क्षेत्र की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता।
5. **निष्कर्ष:** निजी भागीदारी के महत्व को स्वीकार करते हुए, एक संतुलित नियामक ढाँचे और ISRO के साथ समन्वय की आवश्यकता पर बल देना ताकि भारत एक वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बन सके।

स्रोत: orissapost.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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