05 Sep उपराष्ट्रपति 6-9 सितंबर 2026 को पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा करेंगे: जानिए पूरी योजना
✎ भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है, जो राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनके कर्तव्यों का निर्वहन करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – संघ एवं राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, संसद और राज्य विधायिका – संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियां एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय। | GS Paper II — शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस – अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और संभावनाएं; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा संस्थागत एवं अन्य उपाय।
- Prelims: उपराष्ट्रपति का पद, अनुच्छेद 63, राज्यसभा का पदेन सभापति, पूर्वोत्तर परिषद (NEC), भारतीय संविधान की छठी अनुसूची, विशेष श्रेणी राज्य
- Essay: भारत के संघवाद में उपराष्ट्रपति की भूमिका: संवैधानिक दायित्व और क्षेत्रीय संतुलन, पूर्वोत्तर भारत का विकास: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है, जो राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनके कर्तव्यों का निर्वहन करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
इस यात्रा के दौरान वे विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे, साथ ही ऐतिहासिक, सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों का दौरा करेंगे। यह यात्रा उपराष्ट्रपति के संवैधानिक कर्तव्यों और पूर्वोत्तर राज्यों के विकास में केंद्र सरकार के प्रयासों को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- उपराष्ट्रपति का पद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 के तहत स्थापित किया गया है, जो भारत के राष्ट्रपति के बाद दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।
- उपराष्ट्रपति राज्यसभा (Council of States) के पदेन सभापति (ex-officio Chairman) के रूप में भी कार्य करते हैं, जो संसद के ऊपरी सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं।
- पूर्वोत्तर भारत, जिसमें असम, मेघालय, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं, रणनीतिक महत्व का क्षेत्र है और केंद्र सरकार के ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- इस क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न केंद्रीय योजनाएं और नीतियां लागू की गई हैं, जिनमें बुनियादी ढांचे का विकास, कनेक्टिविटी में सुधार और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण शामिल है।
- उपराष्ट्रपति की यात्रा का उद्देश्य इन राज्यों में चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा करना, स्थानीय समुदायों के साथ संवाद स्थापित करना और केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना है।
- यह यात्रा संघवाद के सिद्धांत को भी दर्शाती है, जहां केंद्र के उच्च संवैधानिक पदाधिकारी राज्यों के साथ समन्वय और सहयोग स्थापित करते हैं।
- पूर्वोत्तर राज्यों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण संस्थान हैं, जिनका दौरा उपराष्ट्रपति द्वारा किया जाएगा।
उपराष्ट्रपति का पद और संवैधानिक भूमिका
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 63 कहता है कि भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।
- अनुच्छेद 64 के अनुसार, उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा और लाभ का कोई अन्य पद धारण नहीं करेगा।
- उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) द्वारा होता है।
- उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, लेकिन वह इस अवधि से पहले राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकता है।
- राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने के कारण हुए रिक्त पद की स्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है।
- जब उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है, तो वह राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य नहीं करता है और उसे राज्यसभा के सभापति के वेतन और भत्ते नहीं मिलते हैं।
- उपराष्ट्रपति की भूमिका केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि वह देश के विधायी और कार्यकारी कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देता है, विशेषकर राज्यसभा के सभापति के रूप में।
- उच्च संवैधानिक पदाधिकारियों की राज्यों की यात्राएं केंद्र-राज्य संबंधों को मजबूत करती हैं और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक होती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| उपराष्ट्रपति का पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा | पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास और राष्ट्रीय मुख्यधारा में एकीकरण पर सरकार के फोकस को दर्शाता है। |
| शैक्षणिक संस्थानों में भागीदारी | शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता है और क्षेत्र में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देता है। |
| सांस्कृतिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिरकत | क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देता है और स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव को मजबूत करता है। |
| ऐतिहासिक स्थलों का दौरा (जैसे INA संग्रहालय) | राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में पूर्वोत्तर के योगदान को उजागर करता है और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देता है। |
| अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में भागीदारी | संसदीय लोकतंत्र में राज्य विधानसभाओं की भूमिका को रेखांकित करता है और संघीय ढांचे को मजबूत करता है। |
महत्व
क्षेत्रीय विकास और एकीकरण
- उपराष्ट्रपति का दौरा पूर्वोत्तर क्षेत्र के समग्र विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- यह क्षेत्र को राष्ट्रीय मुख्यधारा में एकीकृत करने और इसकी विशिष्ट पहचान को बनाए रखने के प्रयासों को बल देता है।
शैक्षणिक संवर्धन
- विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भागीदारी क्षेत्र में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर देती है।
- यह युवाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान करने के लिए प्रेरित करता है।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी क्षेत्र की विविध विरासत को उजागर करती है और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देती है।
- ऐतिहासिक स्थलों का दौरा राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में पूर्वोत्तर के योगदान को याद दिलाता है और क्षेत्रीय गौरव को बढ़ाता है।
शासन और संघीय संबंध
- राज्य विधानसभा के विशेष सत्र में भागीदारी केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करती है।
- यह सुशासन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनता की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।
चुनौतियाँ
1. बुनियादी ढाँचा और कनेक्टिविटी
- पूर्वोत्तर राज्यों में अभी भी सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी में सुधार की आवश्यकता है, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
- बेहतर बुनियादी ढाँचा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: बुनियादी ढाँचा
2. आर्थिक विकास और रोजगार
- क्षेत्र में पर्याप्त आर्थिक अवसरों का सृजन करना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना एक चुनौती है।
- कृषि, पर्यटन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में क्षमता का पूर्ण दोहन अभी बाकी है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: आर्थिक विकास
3. सीमा सुरक्षा और आंतरिक चुनौतियाँ
- पूर्वोत्तर क्षेत्र कई अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को साझा करता है, जिससे सीमा पार अपराध और घुसपैठ जैसी सुरक्षा चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।
- कुछ क्षेत्रों में आंतरिक सुरक्षा और शांति बनाए रखना भी एक महत्वपूर्ण कार्य है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: आंतरिक सुरक्षा
4. सांस्कृतिक संरक्षण और पहचान
- क्षेत्र की विविध जनजातीय संस्कृतियों और भाषाओं का संरक्षण एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
- आधुनिकीकरण के साथ-साथ पारंपरिक पहचान को बनाए रखना संतुलन का कार्य है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-I: भारतीय संस्कृति
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| भौगोलिक अलगाव | पहाड़ी भूभाग और दुर्गम क्षेत्र विकास परियोजनाओं के कार्यान्वयन को धीमा करते हैं। |
| सीमित औद्योगिक आधार | बड़े उद्योगों की कमी से रोजगार सृजन और आर्थिक विविधीकरण बाधित होता है। |
| आपदा भेद्यता | भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा विकास प्रयासों को प्रभावित करता है। |
| युवाओं का पलायन | बेहतर अवसरों की तलाश में युवाओं का अन्य राज्यों की ओर पलायन क्षेत्र के मानव संसाधन को प्रभावित करता है। |
| जातीय विविधता और सामंजस्य | विभिन्न जातीय समूहों के बीच सामंजस्य बनाए रखना और सभी के हितों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना। |
आगे की राह
- पूर्वोत्तर राज्यों में बुनियादी ढाँचे के विकास, विशेषकर कनेक्टिविटी (सड़क, रेल, हवाई) में तेजी लाना।
- स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर सृजित करना।
- पर्यटन, जैविक कृषि और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करना और उनकी क्षमता का पूर्ण दोहन करना।
- शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करना ताकि युवाओं को रोजगार योग्य बनाया जा सके।
- सीमा प्रबंधन को सुदृढ़ करना और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करना।
- क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय पहचान को संरक्षित और बढ़ावा देना।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोगात्मक संघवाद को और मजबूत करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उपराष्ट्रपति का पद · संघीय व्यवस्था · पूर्वोत्तर भारत का विकास · संविधान के अनुच्छेद · राज्य और केंद्र संबंध · शैक्षणिक संस्थान · सांस्कृतिक विरासत · राष्ट्रीय महत्व के संस्थान · संवैधानिक पदाधिकारी · संसद का विशेष सत्र
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 244’, ‘note’: ‘अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 275’, ‘note’: ‘राज्यों को संघ से अनुदान’}
- {‘article’: ‘छठी अनुसूची’, ‘note’: ‘असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम के जनजातीय क्षेत्र’}
अवधारणा प्रवाह
उपराष्ट्रपति का पूर्वोत्तर दौरा → केंद्र सरकार की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति पर बल → क्षेत्रीय विकास और बुनियादी ढाँचे का मूल्यांकन → शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा → संघीय संबंधों और सहयोगात्मक संघवाद को मजबूती → पूर्वोत्तर क्षेत्र का राष्ट्रीय मुख्यधारा में एकीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत के उपराष्ट्रपति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है।
2. उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
3. उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 गलत है। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों (निर्वाचित और मनोनीत दोनों) द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है। कथन 2 सही है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 64 में वर्णित है। कथन 3 गलत है। उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है और उसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित होना चाहिए तथा लोकसभा की सहमति होनी चाहिए।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद भारत के उपराष्ट्रपति के पद से संबंधित है?
- अनुच्छेद 63
- अनुच्छेद 74
- अनुच्छेद 108
- अनुच्छेद 352
उत्तर: अनुच्छेद 63 — अनुच्छेद 63 में कहा गया है कि भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। अनुच्छेद 74 राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद से संबंधित है। अनुच्छेद 108 कुछ मामलों में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक से संबंधित है। अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपातकाल से संबंधित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के उपराष्ट्रपति की भूमिका केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि यह संघीय ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और पूर्वोत्तर भारत के संदर्भ में उपराष्ट्रपति की हालिया यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** उपराष्ट्रपति के पद का संक्षिप्त परिचय (अनुच्छेद 63) और उनकी दोहरी भूमिका (उपराष्ट्रपति तथा राज्यसभा का पदेन सभापति) का उल्लेख।
2. **उपराष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका:**
* **औपचारिक भूमिका:** राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, त्यागपत्र, महाभियोग या मृत्यु की स्थिति में कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना (अनुच्छेद 65)।
* **राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में:** राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन, सदन में अनुशासन बनाए रखना, विधेयकों पर मतदान में निर्णायक मत देना (अनुच्छेद 64 और 89)।
3. **संघीय ढांचे को मजबूत करने में योगदान:**
* **राज्यों का प्रतिनिधित्व:** राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है और उपराष्ट्रपति इसके सभापति के रूप में राज्यों के हितों की रक्षा में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाते हैं।
* **केंद्र-राज्य संवाद:** उपराष्ट्रपति की राज्यों की यात्राएँ केंद्र और राज्यों के बीच संवाद स्थापित करने में सहायक होती हैं, जिससे संघीय संबंधों में सुधार होता है।
* **विकास और समन्वय:** उपराष्ट्रपति विभिन्न राज्यों के विकास संबंधी मुद्दों को समझने और उन्हें केंद्र सरकार तक पहुँचाने में एक सेतु का कार्य कर सकते हैं।
4. **पूर्वोत्तर भारत के संदर्भ में हालिया यात्रा का महत्व:**
* **क्षेत्रीय विकास पर ध्यान:** असम, मेघालय, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पूर्वोत्तर के विकास पर केंद्र सरकार के विशेष ध्यान को दर्शाती है।
* **शैक्षणिक और सांस्कृतिक जुड़ाव:** शैक्षणिक संस्थानों (जैसे गीता नगर कॉलेज, श्रीमंत शंकरदेव स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, गौहाटी विश्वविद्यालय, सैनिक विद्यालय, डोनी पोलो मिशन विद्यालय) और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी क्षेत्र के युवाओं और संस्कृति को प्रोत्साहन देती है।
* **राष्ट्रीय एकीकरण:** ऐतिहासिक महत्व के स्थानों (जैसे आईएनए संग्रहालय और युद्ध स्मारक) का दौरा राष्ट्रीय भावना को मजबूत करता है।
* **राज्य विधानसभाओं से संवाद:** अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में भागीदारी संघीय ढांचे में राज्यों के विधायी महत्व को रेखांकित करती है और केंद्र-राज्य संबंधों को सुदृढ़ करती है।
* **जनसंपर्क:** सार्वजनिक स्वागत समारोह और छात्रों, संकाय सदस्यों तथा प्रमुख नागरिकों के साथ संवाद से स्थानीय मुद्दों को समझने और विश्वास निर्माण में मदद मिलती है।
5. **निष्कर्ष:** उपराष्ट्रपति का पद केवल संवैधानिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह संघीय व्यवस्था में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय, संवाद तथा विकास को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेषकर पूर्वोत्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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- असम
- मेघालय
- मणिपुर
- अरुणाचल प्रदेश
उत्तर: असम — उपराष्ट्रपति असम के गुवाहाटी में ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।
Mains: उपराष्ट्रपति के पूर्वोत्तर राज्यों के दौरे के दौरान ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। असम राज्य के संदर्भ में, इस पहल के संभावित प्रभावों का विश्लेषण करते हुए एक रिपोर्ट तैयार कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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