ऊर्जा सुरक्षा: राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आर्थिक सुदृढ़ता का आधार, जानें कैसे भारत आत्मनिर्भर बनेगा

ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक सुदृढ़ता से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है: डॉ. जितेंद्र सिंह — diagram

ऊर्जा सुरक्षा: राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आर्थिक सुदृढ़ता का आधार, जानें कैसे भारत आत्मनिर्भर बनेगा

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भारत ऊर्जा सुरक्षा ढांचा

✎ ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक सुदृढ़ता के लिए अनिवार्य है, जिसके लिए भारत परमाणु ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, जैव ईंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था जैसी स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दे रहा है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन
  • Prelims: ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, चक्रीय अर्थव्यवस्था, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR), जैव ईंधन, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, परमाणु ऊर्जा मिशन
  • Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा: चुनौतियाँ और अवसर, सतत विकास के लिए स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण

त्वरित पुनरावृत्ति: ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक सुदृढ़ता के लिए अनिवार्य है, जिसके लिए भारत परमाणु ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, जैव ईंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था जैसी स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दे रहा है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने छठे अंतर्राष्ट्रीय जलवायु शिखर सम्मेलन 2026 में अपने संबोधन में कहा कि ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक सुदृढ़ता से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अस्थिर ऊर्जा बाजारों के बीच भारत के लिए एक आत्मनिर्भर, स्वदेशी, किफायती और प्रौद्योगिकी-उन्नत ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकता पर बल दिया।

पृष्ठभूमि

  • भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताएँ इसकी आर्थिक संवृद्धि और विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान ऊर्जा सुरक्षा को एक प्रमुख चुनौती बनाते हैं।
  • भारत ने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर संक्रमण आवश्यक है।
  • सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई पहलें की हैं।
  • तकनीकी प्रगति और नवाचार, विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में, भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को भारत के महत्वाकांक्षी ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा और भारत की रणनीतियाँ

  • ऊर्जा सुरक्षा का अर्थ है सभी लोगों के लिए सस्ती, विश्वसनीय और पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति की उपलब्धता। यह राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक स्थिरता का आधार है।
  • भारत एक आत्मनिर्भर, स्वदेशी, किफायती और प्रौद्योगिकी-उन्नत ऊर्जा क्षेत्र के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अस्थिर ऊर्जा बाजारों के प्रभावों को कम किया जा सके।
  • परमाणु ऊर्जा को भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।
  • छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (Small Modular Reactors – SMR) जैसी उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियाँ भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होंगी। भारत का लक्ष्य 2033 तक पाँच ऐसे रिएक्टर स्थापित करना है।
  • हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) को स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में एक प्रमुख भूमिका निभाने वाला माना जाता है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
  • जैव ईंधन (Biofuels) और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) भी भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और अगली औद्योगिक क्रांति के महत्वपूर्ण प्रेरक होंगे।
  • कृषि, स्वास्थ्य, सिंचाई, उर्वरक और परिवहन जैसे क्षेत्रों में बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास और अपनाने की गति में वृद्धि आवश्यक है।
  • भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का तेजी से विस्तार हुआ है, जो ऊर्जा और प्रौद्योगिकी नवाचार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना भी एक प्रमुख रणनीति है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक सुदृढ़ता से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई।
आत्मनिर्भर ऊर्जा क्षेत्र भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अस्थिर ऊर्जा बाजारों के बीच भारत के लिए अनिवार्य।
प्रौद्योगिकी-उन्नत ऊर्जा क्षेत्र स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों और AI-संचालित डेटा-सेंटर युग के लिए आवश्यक।
स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण सुरक्षित और सतत ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ने का महत्वपूर्ण चरण।
निजी क्षेत्र की भागीदारी भारत की ऊर्जा और प्रौद्योगिकी क्षमताओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका।
चक्रीय अर्थव्यवस्था और जैव ईंधन अगली औद्योगिक क्रांति के महत्वपूर्ण प्रेरक और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का हिस्सा।

महत्व

राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता

  • ऊर्जा सुरक्षा सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) से जुड़ी है, क्योंकि यह देश को बाहरी दबावों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से बचाती है।
  • आत्मनिर्भर ऊर्जा क्षेत्र विकसित करने से भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए अन्य देशों पर निर्भरता कम कर सकता है, जिससे उसकी विदेश नीति में अधिक लचीलापन आता है।

आर्थिक सुदृढ़ता

  • स्थिर और किफायती ऊर्जा आपूर्ति आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उद्योगों, कृषि और परिवहन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देती है।
  • स्वदेशी और प्रौद्योगिकी-उन्नत ऊर्जा समाधान आयात बिल को कम करते हैं और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, जिससे मुद्रास्फीति (Inflation) पर नियंत्रण में मदद मिलती है।

सतत विकास और जलवायु परिवर्तन

  • स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को अपनाने से भारत अपने जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है।
  • हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) और परमाणु ऊर्जा जैसी प्रौद्योगिकियां कार्बन उत्सर्जन को कम करने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण हैं।

तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम

  • ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी उन्नति और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने से नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम (Startup Ecosystem) को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक विविधीकरण होता है।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी और अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) में निवेश से नई प्रौद्योगिकियों का विकास होता है, जो भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाता है।

चुनौतियाँ

1. भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएँ

  • वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकते हैं, जिससे ऊर्जा की कीमतें अस्थिर हो सकती हैं।
  • भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, जिससे वह वैश्विक बाजार की अस्थिरता के प्रति संवेदनशील है।

2. प्रौद्योगिकी विकास और लागत

  • स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, जैसे हरित हाइड्रोजन और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (Small Modular Reactors) का विकास और बड़े पैमाने पर तैनाती महंगी हो सकती है।
  • प्रौद्योगिकीय उन्नति को किफायती बनाना एक चुनौती है ताकि वे व्यापक रूप से सुलभ हो सकें, विशेषकर AI-संचालित डेटा-सेंटर युग में।

3. निजी क्षेत्र की भागीदारी का विस्तार

  • परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाना और उन्हें निवेश के लिए आकर्षित करना एक चुनौती है।
  • निजी क्षेत्र को अनुसंधान, विकास और बड़े पैमाने पर परियोजनाओं में निवेश करने के लिए अनुकूल नीतिगत और नियामक ढाँचे की आवश्यकता है।

4. ऊर्जा संक्रमण की गति

  • जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर संक्रमण की गति को बनाए रखना एक चुनौती है, खासकर बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करते हुए।
  • कृषि, स्वास्थ्य और परिवहन जैसे क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने के लिए बुनियादी ढाँचे और जागरूकता की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएँ और कीमतों में उतार-चढ़ाव।
स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की उच्च लागत बड़े पैमाने पर तैनाती और किफायती पहुँच सुनिश्चित करना।
निजी क्षेत्र को आकर्षित करना परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश और भागीदारी बढ़ाना।
ऊर्जा मिश्रण का संतुलन बढ़ती मांग को पूरा करते हुए जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण।
बुनियादी ढाँचा और क्षमता निर्माण नई ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे का विकास।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)
  • परमाणु ऊर्जा मिशन

आगे की राह

  • स्वदेशी अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना ताकि ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सके।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल नीतिगत और नियामक ढाँचे विकसित करना, विशेषकर परमाणु ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में।
  • स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, जैसे छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और हरित हाइड्रोजन के विकास और बड़े पैमाने पर तैनाती के लिए निवेश बढ़ाना।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों को अपनाना और जैव ईंधन तथा सतत ईंधन जैसे विकल्पों को बढ़ावा देना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा रुझानों और प्रौद्योगिकीय विकास के साथ तालमेल बिठाना।
  • ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) को बढ़ावा देना और ऊर्जा संरक्षण के उपायों को लागू करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ऊर्जा सुरक्षा · राष्ट्रीय सुरक्षा · रणनीतिक स्वायत्तता · आर्थिक सुदृढ़ता · स्वच्छ ऊर्जा · परमाणु ऊर्जा · हरित हाइड्रोजन · चक्रीय अर्थव्यवस्था · निजी क्षेत्र की भागीदारी · प्रौद्योगिकीय उन्नति

अवधारणा प्रवाह

भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ और अस्थिर ऊर्जा बाजार  →  ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता  →  आत्मनिर्भर, स्वदेशी और प्रौद्योगिकी-उन्नत ऊर्जा क्षेत्र  →  स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और चक्रीय अर्थव्यवस्था  →  राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक सुदृढ़ता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
2. छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उभरती हुई प्रौद्योगिकियां हैं।
3. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है। कथन 2 सही है। छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उभरती प्रौद्योगिकियां हैं। कथन 3 भी सही है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।

Q2. भारत में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता का कारण बन सकती हैं।
2. आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण ऊर्जा क्षेत्र में लचीलापन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
3. निजी क्षेत्र की भागीदारी ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक हो सकती है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकती हैं और कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकती हैं। कथन 2 सही है क्योंकि स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और उत्पादन क्षमताओं से बाहरी झटकों के प्रति देश की भेद्यता कम होती है। कथन 3 भी सही है क्योंकि निजी क्षेत्र निवेश, नवाचार और दक्षता लाकर ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक सुदृढ़ता से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। भारत के ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों, विशेषकर परमाणु ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता तथा आर्थिक सुदृढ़ता के बीच संबंध को स्पष्ट करें।
2. स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का महत्व: भारत के ऊर्जा मिश्रण में स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता और वैश्विक प्रतिबद्धताओं (जैसे COP26) का उल्लेख करें।
3. परमाणु ऊर्जा की भूमिका:
क. लक्ष्य: 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य।
ख. लाभ: आधारभूत भार विद्युत, कार्बन उत्सर्जन में कमी, दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा।
ग. चुनौतियाँ: उच्च प्रारंभिक लागत, सुरक्षा चिंताएँ, सार्वजनिक स्वीकृति, यूरेनियम की आपूर्ति, निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए नियामक ढाँचा।
घ. समाधान: छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) का विकास, निजी क्षेत्र के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को खोलना।
4. हरित हाइड्रोजन की भूमिका:
क. लक्ष्य: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत भारत को वैश्विक केंद्र बनाना।
ख. लाभ: परिवहन, उद्योग और ऊर्जा भंडारण में बहुमुखी अनुप्रयोग, आयात निर्भरता में कमी, डीकार्बोनाइजेशन।
ग. चुनौतियाँ: उत्पादन की उच्च लागत, भंडारण और परिवहन के मुद्दे, आवश्यक बुनियादी ढाँचे का अभाव, प्रौद्योगिकी का विकास।
घ. समाधान: अनुसंधान एवं विकास में निवेश, प्रोत्साहन योजनाएँ, हरित हाइड्रोजन ट्रेन जैसी पहलें।
5. चक्रीय अर्थव्यवस्था और जैव ईंधन: ऊर्जा सुरक्षा में उनके योगदान पर संक्षिप्त चर्चा।
6. निजी क्षेत्र की भागीदारी: ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में निजी क्षेत्र के निवेश और नवाचार के महत्व पर जोर।
7. निष्कर्ष: एक एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें जो विभिन्न स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों, प्रौद्योगिकीय उन्नति और निजी क्षेत्र की भागीदारी को समाहित करे ताकि भारत एक सुरक्षित और सतत ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ सके।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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