एनसीएल द्वारा शुरू हुआ ‘विशेष अभियान 6.0’: स्वच्छता और ई-कचरा प्रबंधन पर जोर

एनसीएल ने कोयला मंत्रालय के तहत 'विशेष अभियान 6.0' के प्रारंभिक चरण का शुभारंभ किया — labelled illustration

एनसीएल द्वारा शुरू हुआ ‘विशेष अभियान 6.0’: स्वच्छता और ई-कचरा प्रबंधन पर जोर

✎ 'विशेष अभियान 6.0' NCL द्वारा स्वच्छता, ई-कचरा प्रबंधन और कार्यकुशलता में सुधार के लिए कोयला मंत्रालय के निर्देशों के तहत एक महत्वपूर्ण पहल है, जो 'स्वच्छ भारत अभियान' के लक्ष्यों को आगे बढ़ाती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू, ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और संभावनाएं  |  GS Paper III — संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन
  • Prelims: विशेष अभियान 6.0, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL), कोयला मंत्रालय, ई-वेस्ट प्रबंधन, स्वच्छता अभियान, रिकॉर्ड प्रबंधन, वेस्ट टू वेल्थ
  • Essay: स्वच्छता और सुशासन: एक अंतर्संबंध, पर्यावरण संरक्षण में सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: ‘विशेष अभियान 6.0’ NCL द्वारा स्वच्छता, ई-कचरा प्रबंधन और कार्यकुशलता में सुधार के लिए कोयला मंत्रालय के निर्देशों के तहत एक महत्वपूर्ण पहल है, जो ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के लक्ष्यों को आगे बढ़ाती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL), जो कोल इंडिया की एक प्रमुख सहायक कंपनी है, ने कोयला मंत्रालय के निर्देशों के तहत ‘विशेष अभियान 6.0’ के प्रारंभिक चरण का शुभारंभ किया है। यह अभियान ई-कचरा प्रबंधन (E-waste management), स्वच्छता, रिकॉर्ड प्रबंधन और अनुपयोगी स्थलों के बेहतर उपयोग पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य कार्यकुशलता और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार विभिन्न मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के माध्यम से नियमित रूप से स्वच्छता और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाती रही है।
  • ‘विशेष अभियान’ श्रृंखला इसी दिशा में एक पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों और परिसरों में स्वच्छता, रिकॉर्ड प्रबंधन और कार्यप्रणाली में सुधार लाना है।
  • यह अभियान ‘स्वच्छ भारत अभियान’ (Swachh Bharat Abhiyan) के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है, जो देश भर में स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाने पर केंद्रित है।
  • ई-कचरा प्रबंधन भारत के लिए एक बढ़ती हुई चुनौती है, जिसके सुरक्षित निपटान और पुनर्चक्रण (Recycling) के लिए प्रभावी नीतियों और अभियानों की आवश्यकता है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका न केवल आर्थिक विकास में है, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय उत्तरदायित्वों (Environmental Responsibilities) को पूरा करने में भी है।
  • डिजिटलीकरण और ई-गवर्नेंस (E-governance) को बढ़ावा देने के लिए रिकॉर्ड प्रबंधन का आधुनिकीकरण और ई-फाइलों का कुशल निपटान महत्वपूर्ण है।

‘विशेष अभियान 6.0’ क्या है?

  • ‘विशेष अभियान 6.0’ कोयला मंत्रालय के तहत नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) द्वारा शुरू किया गया एक व्यापक अभियान है, जिसका उद्देश्य कार्यालय परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता, ई-कचरा प्रबंधन और कार्यकुशलता में सुधार करना है।
  • यह अभियान दो चरणों में कार्यान्वित किया जा रहा है: प्रारंभिक चरण (15-30 सितंबर, 2026) और कार्यान्वयन चरण (2-31 अक्टूबर, 2026)।
  • अभियान के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में ई-कचरे का प्रभावी प्रबंधन और निपटान, कार्यालय परिसरों में स्वच्छता बनाए रखना, रिकॉर्ड प्रबंधन को सुव्यवस्थित करना, स्क्रैप का निपटान और अनुपयोगी स्थलों का बेहतर उपयोग शामिल है।
  • NCL ने 90 चिह्नित स्थलों की सफाई करने और 1,00,000 वर्ग फुट क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाने का लक्ष्य रखा है, साथ ही लगभग 3,500 मीट्रिक टन स्क्रैप का निपटान भी किया जाएगा।
  • रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार के लिए 400 फिजिकल फाइलों और 9,000 ई-फाइलों की समीक्षा का लक्ष्य है, जिससे समय पर निपटान और कार्यकुशलता में वृद्धि हो सके।
  • ‘अडॉप्ट-ए-स्पॉट’ पहल के तहत, स्वच्छता टीमें चिह्नित स्थानों की जिम्मेदारी लेंगी और नियमित सफाई, रखरखाव, पौधारोपण और सौंदर्यीकरण सुनिश्चित करेंगी।
  • ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (Waste to Wealth) की अवधारणा के अनुरूप, अपशिष्ट सामग्रियों के पुन: उपयोग और उनसे उपयोगी संसाधनों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए नवीन पहलें की जाएंगी।
  • अभियान में लंबित संदर्भों, शिकायतों और अन्य मामलों के समयबद्ध निपटान के माध्यम से कार्यकुशलता में सुधार लाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है, साथ ही 5S/3S आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ई-वेस्ट प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देता है।
स्वच्छता अभियान कार्यस्थलों और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करता है।
रिकॉर्ड प्रबंधन दक्षता बढ़ाता है, स्थान बचाता है और सूचना तक पहुंच में सुधार करता है।
अनुपयोगी स्थलों का बेहतर उपयोग संसाधनों का अनुकूलन करता है और उत्पादकता बढ़ाता है।
वेस्ट टू वेल्थ अवधारणा अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधनों में परिवर्तित कर चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।
डिजिटल कार्यप्रणाली कागजी कार्रवाई कम करता है, पारदर्शिता बढ़ाता है और प्रशासनिक दक्षता में सुधार करता है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • यह अभियान ई-कचरा (E-waste), प्लास्टिक अपशिष्ट और अन्य स्क्रैप के व्यवस्थित प्रबंधन और निपटान पर केंद्रित है, जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण कम होता है।
  • ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (Waste to Wealth) अवधारणा को बढ़ावा देकर, यह अपशिष्ट पदार्थों के पुन: उपयोग और उनसे उपयोगी संसाधनों के निर्माण को प्रोत्साहित करता है, जो सतत विकास (Sustainable Development) के लिए महत्वपूर्ण है।
  • वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण गतिविधियों के माध्यम से हरित आवरण में वृद्धि और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में योगदान देता है।

प्रशासनिक दक्षता एवं सुशासन

  • रिकॉर्ड प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने, पुराने फिजिकल रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और ई-फाइलों की समीक्षा से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता आती है।
  • लंबित मामलों, शिकायतों और अन्य संदर्भों के समयबद्ध निपटान पर ध्यान केंद्रित करने से कार्यकुशलता में सुधार होता है और सुशासन (Good Governance) को बढ़ावा मिलता है।
  • कार्यालय परिसरों में 5S/3S आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने से व्यवस्थित कार्यस्थल, संसाधनों का बेहतर उपयोग और कर्मचारियों के लिए अनुकूल माहौल बनता है।

सामाजिक महत्व

  • स्वच्छता अभियान और ‘अडॉप्ट-ए-स्पॉट’ (Adopt-a-Spot) पहल सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देती है और नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करती है।
  • विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों जैसे ‘स्वच्छ विद्यालय अभियान’, वॉकथॉन, नुक्कड़ नाटक आदि के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार प्रथाओं के प्रति जन जागरूकता बढ़ती है।
  • बेहतर कार्यस्थल और स्वच्छ वातावरण कर्मचारियों के मनोबल और उत्पादकता में वृद्धि करता है, जिससे समग्र रूप से सामाजिक कल्याण में योगदान मिलता है।

चुनौतियाँ

1. ई-कचरा प्रबंधन

  • ई-कचरे की बढ़ती मात्रा और उसके सुरक्षित निपटान तथा पुनर्चक्रण के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी।
  • ई-कचरे में मौजूद हानिकारक रसायनों का पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रतिकूल प्रभाव।

2. रिकॉर्ड डिजिटलीकरण

  • पुराने फिजिकल रिकॉर्ड को डिजिटाइज़ करने में आने वाली तकनीकी चुनौतियाँ और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • डिजिटलीकरण प्रक्रिया के लिए आवश्यक प्रशिक्षित मानव संसाधन और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता।

3. अपशिष्ट से धन (Waste to Wealth) पहल

  • अपशिष्ट पदार्थों को उपयोगी संसाधनों में बदलने के लिए नवीन प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं को अपनाना।
  • इन पहलों के लिए बाजार की उपलब्धता और आर्थिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करना।

4. सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता

  • स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन अभियानों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना।
  • व्यवहार परिवर्तन और स्थायी प्रथाओं को अपनाने के लिए निरंतर जागरूकता और शिक्षा की आवश्यकता।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
ई-कचरे का सुरक्षित निपटान पर्यावरण और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव, अपर्याप्त पुनर्चक्रण सुविधाएँ।
रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की गति बड़ी मात्रा में फिजिकल रिकॉर्ड को समय पर और त्रुटि रहित तरीके से डिजिटल करना।
अनुपयोगी स्थलों का प्रभावी रूपांतरण इन स्थलों को उपयोगी और उत्पादक क्षेत्रों में बदलने के लिए योजना और कार्यान्वयन।
अपशिष्ट से धन मॉडल की स्थिरता दीर्घकालिक आर्थिक व्यवहार्यता और तकनीकी नवाचार की आवश्यकता।
जागरूकता कार्यक्रमों की निरंतरता जनता और हितधारकों के बीच स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्थायी व्यवहार परिवर्तन सुनिश्चित करना।

आगे की राह

  • ई-कचरा प्रबंधन के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति विकसित करना, जिसमें संग्रह, पृथक्करण, पुनर्चक्रण और सुरक्षित निपटान के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश हों।
  • रिकॉर्ड डिजिटलीकरण प्रक्रिया को गति देने के लिए आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का उपयोग करना, साथ ही डेटा सुरक्षा उपायों को मजबूत करना।
  • ‘वेस्ट टू वेल्थ’ अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश करना, ताकि अपशिष्ट से मूल्यवान उत्पादों के निर्माण के लिए नवीन और लागत प्रभावी प्रौद्योगिकियां विकसित की जा सकें।
  • स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन अभियानों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को प्रोत्साहित करना, जिससे संसाधनों और विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग हो सके।
  • कर्मचारियों और व्यापक समुदाय के बीच स्वच्छता, ई-कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में निरंतर जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर 5S/3S कार्यप्रणाली को स्थायी रूप से लागू करने के लिए नियमित ऑडिट और मूल्यांकन तंत्र स्थापित करना।
  • अनुपयोगी स्थलों की पहचान कर उन्हें हरित क्षेत्रों, सामुदायिक केंद्रों या अन्य उत्पादक उपयोगों में बदलने के लिए विस्तृत योजनाएँ तैयार करना और उनका कार्यान्वयन करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्वच्छता अभियान · ई-कचरा प्रबंधन · रिकॉर्ड प्रबंधन · अपशिष्ट से धन · पर्यावरण संरक्षण · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम · सतत विकास · डिजिटलीकरण · कार्यस्थल दक्षता · कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

विशेष अभियान 6.0 का शुभारंभ  →  ई-कचरा, स्वच्छता, रिकॉर्ड प्रबंधन पर ध्यान  →  नोडल टीमों का गठन, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान  →  रिकॉर्डों का डिजिटलीकरण, अनुपयोगी स्थलों का उपयोग  →  जागरूकता कार्यक्रम, वेस्ट टू वेल्थ पहल  →  पर्यावरणीय स्थिरता और प्रशासनिक दक्षता में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘विशेष अभियान 6.0’ का उद्देश्य केवल ई-कचरा प्रबंधन और स्वच्छता पर केंद्रित है।
2. यह अभियान कोयला मंत्रालय के तहत नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) द्वारा चलाया जा रहा है।
3. ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (Waste to Wealth) की अवधारणा इस अभियान का एक अभिन्न अंग है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि अभियान ई-कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के साथ-साथ रिकॉर्ड प्रबंधन, अनुपयोगी स्थलों के बेहतर उपयोग और कार्यालय परिसर में सुधार पर भी केंद्रित है। कथन 2 सही है क्योंकि NCL कोयला मंत्रालय के निर्देशों पर यह अभियान चला रहा है। कथन 3 सही है क्योंकि अभियान के तहत ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा के अनुरूप अपशिष्ट सामग्रियों के पुन: उपयोग और उनसे उपयोगी संसाधनों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

Q2. अभिकथन (A): ‘विशेष अभियान 6.0’ के तहत NCL ने अडॉप्ट-ए-स्पॉट (Adopt-a-Spot) पहल शुरू की है।
कारण (R): इस पहल का उद्देश्य चिह्नित स्थानों की नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करना है।
सही विकल्प चुनें:

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि NCL ने ‘अडॉप्ट-ए-स्पॉट’ पहल शुरू की है। कारण (R) भी सही है क्योंकि इस पहल के तहत स्वच्छता टीमें चिह्नित स्थानों की जिम्मेदारी लेंगी और उनकी नियमित सफाई तथा रखरखाव सुनिश्चित करेंगी, जो अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (Public Sector Undertakings – PSUs) द्वारा चलाए जा रहे ‘स्वच्छता अभियानों’ के महत्व पर चर्चा कीजिए। ‘विशेष अभियान 6.0’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से ये उपक्रम पर्यावरण संरक्षण और कार्यस्थल दक्षता में कैसे योगदान करते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियानों का संक्षिप्त परिचय और उनके महत्व का उल्लेख।
मुख्य भाग:
1. स्वच्छता अभियानों का महत्व: राष्ट्रव्यापी स्वच्छता लक्ष्यों में योगदान, कर्मचारियों और हितधारकों में जागरूकता, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility – CSR) का निर्वहन।
2. ‘विशेष अभियान 6.0’ का संदर्भ: NCL के इस अभियान के प्रमुख घटक (ई-कचरा प्रबंधन, रिकॉर्ड प्रबंधन, अनुपयोगी स्थलों का उपयोग, ‘वेस्ट टू वेल्थ’ अवधारणा) का उल्लेख।
3. पर्यावरण संरक्षण में योगदान: ई-कचरा और प्लास्टिक अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान, रिसाइकलिंग, पौधारोपण, सौंदर्यीकरण, ‘वेस्ट टू वेल्थ’ पहल।
4. कार्यस्थल दक्षता में योगदान: रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, फाइलों का समय पर निपटान, अनुपयोगी स्थानों का बेहतर उपयोग, 5S/3S आधारित गतिविधियाँ, लंबित मामलों का निपटान, व्यवस्थित कार्यप्रणाली।
5. व्यापक प्रभाव: सामाजिक जागरूकता, स्वच्छ भारत अभियान में भागीदारी, सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) की प्राप्ति में सहायता।
निष्कर्ष: इन अभियानों के दीर्घकालिक लाभों और देश के समग्र विकास में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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