कृष्णा जल नीति पर YSRCP का सरकार पर हमला: किसानों को क्यों राहत चाहिए?

Krishna water releases: YSRCP criticises government policy — concept mind map

कृष्णा जल नीति पर YSRCP का सरकार पर हमला: किसानों को क्यों राहत चाहिए?

Map of Andhra Pradesh, Telangana highlighted on the map of India — Krishna water policy Andhra Pradesh UPSC
मानचित्र व माइंड-मैप: Krishna Water Dispute: Andhra vs Telangana

✎ कृष्णा नदी जल विवाद भारत में अंतर-राज्यीय जल विवादों के प्रबंधन की जटिलताओं और संघवाद की चुनौतियों का एक प्रमुख उदाहरण है, जिसके समाधान के लिए संवैधानिक प्रावधानों और सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का पालन आवश्यक है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, अंतर-राज्यीय जल विवाद  |  GS Paper III — कृषि: सिंचाई प्रणाली, फसल पैटर्न, जल संसाधन
  • Prelims: कृष्णा नदी, अंतर-राज्यीय जल विवाद, कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण (KWDT), जलयुक्त शिवार, श्रीशैलम परियोजना, नागार्जुन सागर परियोजना, पुलिचिंतला परियोजना, हैंड्री-नीवा परियोजना, मुचूमर्री लिफ्ट योजना
  • Essay: भारत में जल विवाद: संघवाद और सहकारी संघवाद की चुनौतियाँ, जल सुरक्षा और कृषि संकट: एक विकासात्मक परिप्रेक्ष्य

त्वरित पुनरावृत्ति: कृष्णा नदी जल विवाद भारत में अंतर-राज्यीय जल विवादों के प्रबंधन की जटिलताओं और संघवाद की चुनौतियों का एक प्रमुख उदाहरण है, जिसके समाधान के लिए संवैधानिक प्रावधानों और सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का पालन आवश्यक है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, वाईएसआरसीपी (YSRCP) के महासचिव एम.वी.एस. नागि रेड्डी ने आंध्र प्रदेश सरकार की कृष्णा डेल्टा क्षेत्र के किसानों को खरीफ मौसम के दौरान धान की खेती न करने की सलाह देने की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार उपलब्ध कृष्णा नदी जल का उपयोग सूखे से प्रभावित क्षेत्रों और कृष्णा डेल्टा में सिंचाई के लिए करने में विफल रही है, जबकि तेलंगाना विभिन्न लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के माध्यम से पानी का उपयोग कर रहा है। यह घटना एक बार फिर अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के प्रबंधन और उनके कृषि तथा आर्थिक प्रभावों पर प्रकाश डालती है।

पृष्ठभूमि

  • कृष्णा नदी जल विवाद भारत के सबसे पुराने और सबसे जटिल अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों में से एक है, जिसमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना (आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद) राज्य शामिल हैं।
  • कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण (Krishna Water Disputes Tribunal – KWDT) की स्थापना 1969 में अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत की गई थी ताकि नदी के पानी के बंटवारे से संबंधित विवादों का समाधान किया जा सके।
  • KWDT-I ने 1973 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें राज्यों के बीच जल आवंटन को परिभाषित किया गया था, जिसे 1976 में प्रकाशित किया गया।
  • KWDT-II का गठन 2004 में किया गया था ताकि जल आवंटन की समीक्षा की जा सके और नए आवंटन पर निर्णय लिया जा सके, विशेष रूप से सूखे की स्थिति और नए सिंचाई परियोजनाओं के संदर्भ में।
  • कृष्णा नदी बेसिन में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ हैं जैसे श्रीशैलम, नागार्जुन सागर और पुलिचिंतला, जो सिंचाई और पेयजल दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद, तेलंगाना भी कृष्णा नदी जल के आवंटन में एक हितधारक बन गया है, जिससे विवाद की जटिलता और बढ़ गई है।

अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद और उनका समाधान

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 262 संसद को अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है।
  • इस अनुच्छेद के तहत, संसद ने दो कानून बनाए हैं: नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 और अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956।
  • नदी बोर्ड अधिनियम का उद्देश्य अंतर-राज्यीय नदियों के विनियमन और विकास के लिए नदी बोर्डों की स्थापना करना है, हालांकि अभी तक कोई भी नदी बोर्ड प्रभावी ढंग से स्थापित नहीं किया गया है।
  • अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम केंद्र सरकार को अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के समाधान के लिए एक न्यायाधिकरण (Tribunal) स्थापित करने का अधिकार देता है।
  • इन न्यायाधिकरणों के निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होते हैं, और किसी भी न्यायालय, यहाँ तक कि सर्वोच्च न्यायालय, के पास भी इन विवादों पर अधिकार क्षेत्र नहीं होता है।
  • जल विवादों के मुख्य कारण पानी की उपलब्धता में कमी, राज्यों के बीच ऐतिहासिक उपयोग के दावों में अंतर, नई सिंचाई परियोजनाओं का विकास, और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएँ हैं।
  • सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और राज्यों के बीच संवाद इन विवादों के स्थायी समाधान के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • केंद्र सरकार की भूमिका इन विवादों में मध्यस्थता करने और न्यायाधिकरणों के निर्णयों को लागू करने में महत्वपूर्ण होती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
कृष्णा नदी जल विवाद यह दक्षिण भारत के राज्यों के बीच जल-बंटवारे के सबसे जटिल और लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों में से एक है।
जुरला परियोजना यह कृष्णा नदी पर एक महत्वपूर्ण परियोजना है जो तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों के लिए जल आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
श्रीशैलम जलाशय यह कृष्णा नदी पर एक प्रमुख बहुउद्देशीय जलाशय है जो सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।
हैंड्री-नीवा और मुचुमर्री लिफ्ट योजनाएँ ये आंध्र प्रदेश में सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो कृष्णा डेल्टा से जल प्राप्त करती हैं।
पुलिचंतला परियोजना कृष्णा डेल्टा को स्थिर करने और सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराने के लिए डिज़ाइन की गई है।
पट्टिसीमा परियोजना गोदावरी नदी के अधिशेष जल को कृष्णा नदी बेसिन में मोड़ने के लिए निर्मित, जिससे कृष्णा डेल्टा की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलती है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • कृष्णा डेल्टा क्षेत्र में धान, गन्ना और जलीय कृषि प्रमुख आर्थिक गतिविधियाँ हैं। जल की अनुपलब्धता से किसानों की आय और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • सिंचाई के लिए जल की कमी से कृषि उत्पादन में गिरावट आती है, जिससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है और कृषि निर्यात क्षमता कम होती है।
  • हजारों बटाईदार किसानों (tenant farmers) ने पहले ही खेती में निवेश कर दिया है, और जल की अनुपलब्धता से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान होगा, जिससे ग्रामीण ऋणग्रस्तता बढ़ सकती है।

सामाजिक महत्व

  • जल विवाद और कृषि संकट से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक अशांति और विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं, जिससे कानून और व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
  • किसानों के लिए आजीविका का नुकसान ग्रामीण-शहरी प्रवासन को बढ़ा सकता है, जिससे शहरी क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो सकता है।
  • पेयजल की आवश्यकता और सिंचाई की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है ताकि दोनों समुदायों की बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

प्रशासनिक एवं नीतिगत महत्व

  • राज्यों के बीच जल-बंटवारे के मुद्दों को हल करने के लिए प्रभावी अंतर-राज्यीय समन्वय और सहयोग की आवश्यकता है।
  • सरकार की जल प्रबंधन नीतियों की आलोचना से सार्वजनिक विश्वास कम हो सकता है और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
  • दीर्घकालिक जल प्रबंधन रणनीतियाँ, जैसे कि जल संरक्षण, कुशल सिंचाई पद्धतियाँ और वैकल्पिक फसल पैटर्न को बढ़ावा देना, भविष्य के संकटों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

चुनौतियाँ

1. अंतर-राज्यीय जल विवाद

  • कृष्णा नदी जल विवाद आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के बीच एक जटिल मुद्दा है।
  • प्रत्येक राज्य अपनी आवश्यकताओं के अनुसार जल के अधिक हिस्से का दावा करता है, जिससे जल-बंटवारे पर सहमति बनाना मुश्किल हो जाता है।

2. जल प्रबंधन और आवंटन

  • जलाशयों में उपलब्ध जल का कुशल प्रबंधन और विभिन्न उपयोगों (सिंचाई, पेयजल, बिजली) के लिए इसका उचित आवंटन एक चुनौती है।
  • सरकार की नीतियों पर अक्सर आरोप लगते हैं कि वे सभी हितधारकों की जरूरतों को पूरा करने में विफल रहती हैं, जिससे असंतोष पैदा होता है।

3. कृषि संकट और किसान कल्याण

  • सिंचाई के लिए जल की अनुपलब्धता से किसानों को भारी नुकसान होता है, खासकर उन बटाईदारों को जिन्होंने पहले ही निवेश कर दिया है।
  • धान जैसी प्रमुख फसलों के लिए वैकल्पिक खेती की सलाह देना तब तक अव्यावहारिक है जब तक कि किसानों को व्यवहार्य विकल्प और समर्थन प्रदान न किया जाए।

4. जलवायु परिवर्तन और जल सुरक्षा

  • मानसून की अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन के कारण जल उपलब्धता में उतार-चढ़ाव आते हैं, जिससे जल प्रबंधन और भी जटिल हो जाता है।
  • भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों और बुनियादी ढांचे के विकास की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कृष्णा डेल्टा में धान की खेती के लिए जल की कमी क्षेत्र की प्रमुख आर्थिक गतिविधि प्रभावित, किसानों को भारी नुकसान।
जलाशयों में जल होने के बावजूद वितरण में देरी कुशल जल प्रबंधन और आवंटन पर सवाल।
हैंड्री-नीवा और के.सी. नहर जैसी योजनाओं को जल नहीं मिलना सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई की आवश्यकता पूरी नहीं हो रही।
पुलिचंतला परियोजना के जल का उपयोग केवल पेयजल के लिए सिंचाई आवश्यकताओं की उपेक्षा, कृषि संकट गहराने का जोखिम।
बटाईदार किसानों का निवेश और संभावित नुकसान ग्रामीण ऋणग्रस्तता और सामाजिक अशांति का खतरा।

आगे की राह

  • अंतर-राज्यीय जल विवादों को सुलझाने के लिए एक स्थायी तंत्र स्थापित करना और राज्यों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।
  • कृष्णा नदी बेसिन में जल के कुशल और न्यायसंगत आवंटन के लिए एक व्यापक जल प्रबंधन नीति विकसित करना।
  • किसानों को समय पर और पर्याप्त सिंचाई जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना, विशेषकर खरीफ मौसम में।
  • कृषि विविधीकरण (agricultural diversification) को बढ़ावा देना और किसानों को वैकल्पिक फसलों के लिए आवश्यक सहायता, प्रशिक्षण और बाजार संपर्क प्रदान करना।
  • जल संरक्षण तकनीकों, जैसे सूक्ष्म सिंचाई (micro-irrigation) और वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting) को प्रोत्साहित करना।
  • पेयजल और सिंचाई की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट प्राथमिकता ढांचा तैयार करना।
  • जल बुनियादी ढांचे, जैसे नहरों और जलाशयों के रखरखाव और आधुनिकीकरण में निवेश करना ताकि जल रिसाव और बर्बादी को कम किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 262’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का न्यायनिर्णयन’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (राज्य सूची)’, ‘note’: ‘जल आपूर्ति, सिंचाई, नहरें, जल निकासी’}

अवधारणा प्रवाह

कृष्णा नदी बेसिन में जल की उपलब्धता  →  राज्य सरकार की जल प्रबंधन नीतियां और आवंटन  →  सिंचाई के लिए जल की अपर्याप्त या विलंबित आपूर्ति  →  कृष्णा डेल्टा और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में कृषि संकट  →  किसानों की आजीविका और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव  →  सरकार की नीतियों की आलोचना और राजनीतिक विवाद

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कृष्णा नदी का उद्गम पश्चिमी घाट में महाबलेश्वर के निकट होता है।
2. श्रीशैलम परियोजना कृष्णा नदी पर स्थित है।
3. भीमा लिफ्ट सिंचाई योजना आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी पर एक प्रमुख परियोजना है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। कृष्णा नदी का उद्गम पश्चिमी घाट में महाबलेश्वर के निकट होता है और श्रीशैलम परियोजना कृष्णा नदी पर स्थित है। कथन 3 गलत है क्योंकि भीमा लिफ्ट सिंचाई योजना तेलंगाना में स्थित है, आंध्र प्रदेश में नहीं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी परियोजनाएँ कृष्णा नदी जल विवाद से संबंधित हैं?
1. जुराला परियोजना
2. श्रीशैलम जलाशय
3. पुलिचंतला परियोजना
4. पट्टिसीमा परियोजना
सही विकल्प चुनें:

  1. केवल 1, 2 और 3
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — जुराला, श्रीशैलम और पुलिचंतला परियोजनाएँ सीधे कृष्णा नदी बेसिन में स्थित हैं और इसके जल प्रबंधन से संबंधित हैं। पट्टिसीमा परियोजना गोदावरी नदी के जल को कृष्णा डेल्टा में मोड़ने के लिए बनाई गई है, लेकिन यह कृष्णा जल विवाद के प्रबंधन में भी एक भूमिका निभाती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के समाधान में केंद्र सरकार की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। कृष्णा नदी जल विवाद के संदर्भ में, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच जल बँटवारे से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत में अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों की पृष्ठभूमि और उनके महत्व का संक्षिप्त परिचय।
2. **केंद्र सरकार की भूमिका:**
* **संवैधानिक प्रावधान:** अनुच्छेद 262 और अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 का उल्लेख।
* **जल विवाद न्यायाधिकरण:** न्यायाधिकरणों के गठन, कार्यप्रणाली और निर्णयों की बाध्यकारी प्रकृति पर चर्चा।
* **समन्वय और मध्यस्थता:** केंद्र द्वारा राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने और मध्यस्थता करने के प्रयासों का उल्लेख।
* **चुनौतियाँ:** न्यायाधिकरणों के निर्णयों के कार्यान्वयन में देरी, राजनीतिक हस्तक्षेप और राज्यों के बीच सहयोग की कमी जैसी चुनौतियों का समालोचनात्मक विश्लेषण।
3. **कृष्णा नदी जल विवाद:**
* **ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:** कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण (KWDT-I और KWDT-II) के गठन और प्रमुख आवंटन का उल्लेख।
* **आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच मुद्दे:**
* पुनर्गठन के बाद जल बँटवारे का मुद्दा।
* विभिन्न परियोजनाओं (जैसे जुराला, श्रीशैलम, पुलिचंतला, भीमा, हंड्री-नीवा) से जल निकासी और उपयोग पर विवाद।
* पेयजल और सिंचाई आवश्यकताओं के बीच संतुलन।
* कृष्णा डेल्टा में धान की खेती के लिए जल की उपलब्धता।
* पट्टिसीमा परियोजना जैसी अंतर-बेसिन जल अंतरण परियोजनाओं की भूमिका।
* **वर्तमान स्थिति:** हालिया समाचारों के संदर्भ में जल प्रबंधन और नीतिगत आलोचनाओं का उल्लेख।
4. **निष्कर्ष:** अंतर-राज्यीय जल विवादों के स्थायी समाधान के लिए सहकारी संघवाद, वैज्ञानिक जल प्रबंधन और समयबद्ध कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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