24 Sep आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू 2026: जल सुरक्षा के लिए नवाचार, जलवायु-लचीलेपन और डिजिटल समाधान
✎ भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 ने जलवायु-लचीले जल प्रबंधन, जल जीवन मिशन की सफलता, ग्रेवाटर प्रबंधन, डिजिटल नवाचार और भारत-नीदरलैंड सहयोग के माध्यम से स्थायी जल सुरक्षा प्राप्त करने पर जोर दिया।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय, अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन
- Prelims: भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (IIWW), जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), ग्रेवाटर प्रबंधन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, जलवायु-लचीलापन
- Essay: भारत में जल सुरक्षा: चुनौतियाँ, समाधान और सतत विकास, जलवायु परिवर्तन और जल प्रबंधन: एक समग्र दृष्टिकोण
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 ने जलवायु-लचीले जल प्रबंधन, जल जीवन मिशन की सफलता, ग्रेवाटर प्रबंधन, डिजिटल नवाचार और भारत-नीदरलैंड सहयोग के माध्यम से स्थायी जल सुरक्षा प्राप्त करने पर जोर दिया।
यह खबर चर्चा में क्यों?
9वें भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह (IIWW 2026) का दूसरा दिन नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘क्लाइमेट-रेसिस्टेंट वाटर मैनेजमेंट’ की थीम पर केंद्रित था। इस दौरान जल सुरक्षा, नवाचार और लचीली WASH (जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य) सेवाओं के विभिन्न आयामों पर गहन चर्चाएँ हुईं, जिसमें भारत और नीदरलैंड के बीच सहयोग, ग्रेवाटर प्रबंधन और डिजिटल समाधानों पर विशेष ध्यान दिया गया।
पृष्ठभूमि
- इस वर्ष का आयोजन ‘क्लाइमेट-रेसिस्टेंट वाटर मैनेजमेंट’ की थीम पर केंद्रित था, जो जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के संदर्भ में जल संसाधनों के स्थायी प्रबंधन की आवश्यकता को दर्शाता है।
- नीदरलैंड, जल प्रबंधन में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है, इस आयोजन में एक प्रमुख भागीदार देश रहा, जिसने भारत के साथ जल शासन में सहयोग के दायरे को बढ़ाया।
- जल जीवन मिशन (JJM) का उद्देश्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है, जो जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) (SBM-G) का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कवरेज में सुधार करना है, जिसमें अब ग्रेवाटर प्रबंधन जैसे पहलुओं को भी शामिल किया जा रहा है।
- डिजिटल नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को जल और स्वच्छता सेवाओं के प्रबंधन, निगरानी और रखरखाव को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में देखा जा रहा है।
IIWW 2026 में चर्चा के मुख्य विषय
- जल जीवन मिशन: भारत के अनुभव ने प्रदर्शित किया है कि जल सुरक्षा के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, सामुदायिक स्वामित्व, वैज्ञानिक योजना, जवाबदेह संस्थान और डिजिटल नवाचार की आवश्यकता है। मिशन का ध्यान अब बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर टिकाउपन, सेवा की गुणवत्ता और दीर्घकालिक जल सुरक्षा पर है।
- भारत-नीदरलैंड सहयोग: दोनों देशों ने जल प्रबंधन को केवल एक इंजीनियरिंग चुनौती के बजाय शासन, समुदाय और जलवायु-लचीलेपन की चुनौती के रूप में साझा समझ व्यक्त की। ‘सुजलाम भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ और स्रोत स्थिरता के लिए डिसीजन सपोर्ट सिस्टम जैसी पहलें सहयोग के बढ़ते दायरे को दर्शाती हैं।
- ग्रेवाटर प्रबंधन: ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति कवरेज के विस्तार के साथ ग्रेवाटर (घरेलू अपशिष्ट जल) प्रबंधन का महत्व बढ़ गया है। विकेंद्रीकृत उपचार और पुन: उपयोग मॉडल, ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) में एकीकरण और सामुदायिक सहभागिता पर जोर दिया गया।
- डिजिटल तकनीक, AI और नवाचार: जल और स्वच्छता सेवाओं के प्रबंधन, निगरानी और रखरखाव को मजबूत करने के लिए डिजिटल तकनीकों, AI और नवाचारों के उपयोग पर चर्चा हुई। बिहार में ग्रामीण स्वच्छता के लिए डिजिटल संचार और निगरानी प्रणाली जैसे उदाहरण प्रस्तुत किए गए।
- शासन, सामुदायिक सहभागिता और संस्थागत सुदृढ़ीकरण: WASH सेवाओं की सफलता के लिए प्रभावी शासन, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी और मजबूत संस्थागत ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया गया।
- जलवायु लचीलापन और प्रकृति-आधारित समाधान: जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और जल प्रणालियों को अधिक लचीला बनाने के लिए प्रकृति-आधारित समाधानों और अनुकूलन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
- जल की गुणवत्ता और सुरक्षा: पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, उभरते प्रदूषकों से निपटने और जल सुरक्षा बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| जलवायु-लचीला जल प्रबंधन | यह सुनिश्चित करना कि जल प्रणालियाँ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों (जैसे बाढ़, सूखा) का सामना कर सकें और अनुकूलन कर सकें। |
| डिजिटल नवाचार और AI-सक्षम समाधान | जल प्रबंधन, निगरानी और रखरखाव में दक्षता, पारदर्शिता और सटीकता में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग। |
| सामुदायिक स्वामित्व और सहभागिता | जल सुरक्षा और WASH (जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य) सेवाओं की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना। |
| विकेंद्रीकृत उपचार और पुन: उपयोग मॉडल | स्थानीय स्तर पर अपशिष्ट जल (ग्रेवाटर) का प्रबंधन और पुन: उपयोग करके जल संसाधनों का कुशल उपयोग। |
| स्रोत स्थिरता | जल स्रोतों (जैसे नदियाँ, भूजल) के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और उपलब्धता को सुनिश्चित करना। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- जलवायु-लचीली जल प्रणालियों के माध्यम से प्राकृतिक जल संसाधनों का संरक्षण और संवर्धन।
- ग्रेवाटर प्रबंधन और पुन: उपयोग से जल प्रदूषण में कमी और जल चक्र का संतुलन।
सामाजिक महत्व
- स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल तथा स्वच्छता (WASH) सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
- सामुदायिक सहभागिता और स्वामित्व के माध्यम से जल प्रबंधन में स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में वृद्धि होती है।
आर्थिक महत्व
- जल सुरक्षा से कृषि, उद्योग और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए आवश्यक जल की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
- डिजिटल नवाचार और AI-सक्षम समाधानों से जल प्रबंधन में लागत-दक्षता और परिचालन दक्षता में वृद्धि।
शासन और नीतिगत महत्व
- भारत और नीदरलैंड जैसे देशों के बीच ज्ञान और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान से जल शासन में सुधार।
- जल जीवन मिशन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और जवाबदेह संस्थानों का निर्माण।
चुनौतियाँ
1. जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
- बढ़ती अनियमित वर्षा, सूखा और बाढ़ की घटनाओं से जल संसाधनों पर दबाव।
- जलवायु-लचीली जल प्रणालियों के विकास और कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तपोषण और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन
2. जल गुणवत्ता और प्रदूषण
- औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि अपवाह और अनुपचारित घरेलू सीवेज से जल स्रोतों का प्रदूषण।
- उभरते प्रदूषकों (जैसे फार्मास्यूटिकल्स, माइक्रोप्लास्टिक्स) की पहचान और उनके प्रबंधन की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, स्वास्थ्य
3. बुनियादी ढाँचे का अभाव और रखरखाव
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पर्याप्त जल आपूर्ति और स्वच्छता बुनियादी ढाँचे की कमी।
- मौजूदा बुनियादी ढाँचे के रखरखाव और उन्नयन के लिए सतत वित्तपोषण और तकनीकी क्षमताओं की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, ग्रामीण विकास
4. सामुदायिक सहभागिता और व्यवहार परिवर्तन
- जल संरक्षण, ग्रेवाटर प्रबंधन और स्वच्छता प्रथाओं को अपनाने के लिए समुदायों को प्रेरित करना।
- स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन प्रणालियों के स्वामित्व और रखरखाव को सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास
5. डेटा और प्रौद्योगिकी का एकीकरण
- जल प्रबंधन में डेटा-संचालित निर्णय लेने के लिए विश्वसनीय डेटा संग्रह और विश्लेषण प्रणालियों की आवश्यकता।
- डिजिटल प्रौद्योगिकियों (AI, IoT) को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनके उपयोग के लिए क्षमता निर्माण की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी, ई-शासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जल सुरक्षा | बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता में कमी। |
| ग्रेवाटर प्रबंधन | ग्रामीण क्षेत्रों में अनुपचारित ग्रेवाटर से होने वाला पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी खतरा। |
| स्रोत स्थिरता | भूजल के अत्यधिक दोहन और सतही जल स्रोतों के प्रदूषण से उनकी दीर्घकालिक उपलब्धता पर संकट। |
| संस्थागत क्षमता | जल प्रबंधन से संबंधित विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय की कमी और तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव। |
| वित्तपोषण | जल अवसंरचना के विकास, रखरखाव और नवाचार के लिए पर्याप्त और सतत वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- जल जीवन मिशन (JJM)
- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) (SBM-G)
- सुजलाम भारत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर
आगे की राह
- जलवायु-लचीली जल अवसंरचना (water infrastructure) में निवेश बढ़ाना और प्रकृति-आधारित समाधानों (nature-based solutions) को बढ़ावा देना।
- जल प्रबंधन में डिजिटल प्रौद्योगिकियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नवाचारों का व्यापक उपयोग करना।
- सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय स्वामित्व को मजबूत करके जल संसाधनों के विकेंद्रीकृत और टिकाऊ प्रबंधन को सुनिश्चित करना।
- ग्रेवाटर प्रबंधन के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल प्रभावी समाधान विकसित करना और उनके पुन: उपयोग को बढ़ावा देना।
- जल गुणवत्ता निगरानी प्रणालियों को सुदृढ़ करना और उभरते प्रदूषकों के प्रबंधन के लिए अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना और क्षमता निर्माण करना।
- जल क्षेत्र में वित्तपोषण के नए मॉडल विकसित करना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (public-private partnership) को प्रोत्साहित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जल सुरक्षा · जल जीवन मिशन · ग्रेवाटर प्रबंधन · जलवायु-लचीली जल प्रणालियाँ · सामुदायिक सहभागिता · डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर · स्रोत स्थिरता · स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) · वॉश सेवाएं · ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों को जल प्रबंधन का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं को जल आपूर्ति का अधिकार’}
- {‘article’: ‘राज्य सूची (सूची II), प्रविष्टि 17’, ‘note’: ‘जल आपूर्ति, सिंचाई, नहरें, जल निकासी’}
अवधारणा प्रवाह
जलवायु परिवर्तन का बढ़ता प्रभाव → जल संसाधनों पर दबाव और असुरक्षा → जलवायु-लचीले जल प्रबंधन की आवश्यकता → डिजिटल नवाचार और सामुदायिक सहभागिता → दीर्घकालिक जल सुरक्षा और WASH सेवाएँ → सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर में नल से जल का कनेक्शन प्रदान करना है।
2. ‘सुजलाम भारत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर’ पहल जल प्रबंधन में डेटा-संचालित योजना और जोखिम-सूचित निर्णय लेने में सहायता करती है।
3. ग्रेवाटर प्रबंधन के लिए एक ही समाधान सभी स्थानीय परिस्थितियों पर समान रूप से लागू होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत के सभी घरों में सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। कथन 2 सही है। ‘सुजलाम भारत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर’ जल प्रबंधन में डेटा-संचालित योजना और परिसंपत्ति प्रबंधन में सहायता करता है। कथन 3 गलत है। ग्रेवाटर प्रबंधन के लिए कोई एक ही समाधान सभी पर लागू नहीं होता है, बल्कि समाधानों को स्थानीय परिस्थितियों और समुदाय की जरूरतों के अनुसार अनुकूलित किया जाना चाहिए।
Q2. भारत में जल सुरक्षा और स्वच्छता से संबंधित निम्नलिखित पहलों को उनके मुख्य उद्देश्यों के साथ सुमेलित कीजिए:
सूची-I (पहल)
(A) जल जीवन मिशन
(B) स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)
(C) सुजलाम भारत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर
सूची-II (मुख्य उद्देश्य)
(1) ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन
(2) ग्रामीण घरों में नल से जल का कनेक्शन
(3) जल प्रबंधन में डेटा-संचालित निर्णय लेना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- (A)-1, (B)-2, (C)-3
- (A)-2, (B)-1, (C)-3
- (A)-3, (B)-1, (C)-2
- (A)-2, (B)-3, (C)-1
उत्तर: (A)-2, (B)-1, (C)-3 — जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण घरों में नल से जल का कनेक्शन प्रदान करना है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, विशेषकर ग्रेवाटर प्रबंधन, को बढ़ावा देना है। सुजलाम भारत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर जल प्रबंधन में डेटा-संचालित योजना और जोखिम-सूचित निर्णय लेने में सहायता करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में जल जीवन मिशन की भूमिका का परीक्षण कीजिए। साथ ही, जलवायु-लचीली और टिकाऊ जल प्रणालियों को बढ़ावा देने में ग्रेवाटर प्रबंधन तथा डिजिटल नवाचारों के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में जल सुरक्षा की चुनौती और जल जीवन मिशन (JJM) के महत्व को रेखांकित करें। मुख्य भाग में, JJM के उद्देश्यों, उपलब्धियों (विशेषकर ग्रामीण घरों में नल से जल कनेक्शन) और सामुदायिक स्वामित्व पर इसके जोर का विश्लेषण करें। इसके बाद, ग्रेवाटर प्रबंधन के महत्व को समझाएं, जिसमें विकेंद्रीकृत उपचार और पुन: उपयोग मॉडल, तथा ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) में इसके एकीकरण पर चर्चा करें। अंत में, ‘सुजलाम भारत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर’ जैसे डिजिटल नवाचारों की भूमिका, डेटा-संचालित योजना और जोखिम-सूचित निर्णय लेने में उनकी क्षमता पर प्रकाश डालें। निष्कर्ष में, भारत की जल सुरक्षा रणनीति में इन सभी घटकों के एकीकृत दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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