02 Sep केरल बाल अधिकार आयोग ने आंगनवाड़ी बच्चों के लिए न्यूट्रिमिक्स में चीनी का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया
✎ केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने आंगनवाड़ी बच्चों के लिए अमृतम न्यूट्रीमिक्स में अत्यधिक चीनी के उपयोग पर चिंता व्यक्त की है, जो WHO दिशानिर्देशों के विरुद्ध है और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय (Social Justice) | GS Paper II — स्वास्थ्य (Health) | GS Paper II — शासन (Governance) | GS Paper II — बच्चों से संबंधित मुद्दे (Issues related to children)
- Prelims: केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (Kerala State Commission for Protection of Child Rights), अमृतम न्यूट्रीमिक्स (Amrutham Nutrimix), आंगनवाड़ी (Anganwadi), कुटुंबश्री (Kudumbashree), पोषण ट्रैकर ऐप (Poshan Tracker App), WHO दिशानिर्देश (WHO Guidelines)
- Essay: बच्चों का स्वास्थ्य और पोषण: एक राष्ट्रीय प्राथमिकता, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने आंगनवाड़ी बच्चों के लिए अमृतम न्यूट्रीमिक्स में अत्यधिक चीनी के उपयोग पर चिंता व्यक्त की है, जो WHO दिशानिर्देशों के विरुद्ध है और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (Kerala State Commission for Protection of Child Rights) ने महिला एवं बाल विकास (WCD) निदेशक को आंगनवाड़ियों के माध्यम से वितरित किए जाने वाले अमृतम न्यूट्रीमिक्स में चीनी के उपयोग से पूरी तरह बचने का निर्देश दिया है। यह निर्देश एक शिकायत के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि न्यूट्रीमिक्स में 20% चीनी है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के विरुद्ध है और बच्चों में जीवनशैली संबंधी बीमारियों का कारण बन सकती है।
पृष्ठभूमि
- आंगनवाड़ी बच्चों को पूरक पोषण प्रदान करने के लिए एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत स्थापित केंद्र हैं।
- अमृतम न्यूट्रीमिक्स केरल में आंगनवाड़ियों के माध्यम से वितरित किया जाने वाला एक कम लागत वाला खाद्य पूरक है, जिसका उद्देश्य बच्चों की दैनिक कैलोरी और प्रोटीन आवश्यकताओं को पूरा करना है।
- इस न्यूट्रीमिक्स का उत्पादन कुटुंबश्री (Kudumbashree) इकाइयों द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – केंद्रीय बागान फसल अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPCRI) द्वारा विकसित एक फॉर्मूलेशन के आधार पर किया जाता है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) बच्चों के आहार में अतिरिक्त चीनी की मात्रा को सीमित करने के लिए दिशानिर्देश जारी करता है ताकि मोटापे और अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सके।
- बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के तहत स्थापित राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन के लिए कार्य करते हैं।
- पोषण ट्रैकर ऐप (Poshan Tracker App) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा पोषण सेवाओं की निगरानी और लाभार्थियों तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक डिजिटल उपकरण है।
केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग
- यह आयोग बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 (Commissions for Protection of Child Rights Act, 2005) के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है।
- इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, संवर्धन और उल्लंघन की जाँच करना है।
- आयोग बच्चों से संबंधित कानूनों, नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी करता है।
- यह बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों की जाँच करता है और आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश करता है।
- आयोग राज्य सरकार को बच्चों के अधिकारों से संबंधित मामलों पर सलाह देता है।
- यह बच्चों के अधिकारों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए भी कार्य करता है।
- आयोग के पास सिविल न्यायालय की शक्तियाँ होती हैं, जो उसे गवाहों को समन करने और दस्तावेज़ों की माँग करने की अनुमति देती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अमृतम न्यूट्रीमिक्स में चीनी की मात्रा | केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (Kerala State Commission for Protection of Child Rights) ने आंगनवाड़ियों में वितरित होने वाले अमृतम न्यूट्रीमिक्स में चीनी की मात्रा पर चिंता व्यक्त की है। |
| WHO दिशानिर्देशों का उल्लंघन | शिकायत के अनुसार, न्यूट्रीमिक्स में 20% चीनी है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के विरुद्ध है और बच्चों में जीवनशैली संबंधी बीमारियों का कारण बन सकती है। |
| चीनी के स्थान पर गुड़ का उपयोग | आयोग ने महिला एवं बाल विकास (WCD) निदेशक को चीनी के स्थान पर कम मात्रा में गुड़ के उपयोग की संभावना का वैज्ञानिक परीक्षण करने का निर्देश दिया है। |
| पोषण संबंधी जानकारी का प्रदर्शन | आयोग ने बच्चों के खाद्य पदार्थों के लेबल पर सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और बच्चों को दी जाने वाली मात्रा को मुद्रित करने के निर्देश दिए हैं। |
| आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण | आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों को पोषण ट्रैकर ऐप (Poshan Tracker app) या व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से स्वस्थ आदतों और खाद्य पदार्थों को पकाने के तरीकों के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया गया है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह पहल बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है, विशेषकर कम उम्र में अत्यधिक चीनी के सेवन से होने वाली बीमारियों को रोकने में सहायक होगी।
- यह बच्चों के लिए पौष्टिक और सुरक्षित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उनके समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा।
शासन और नीतिगत महत्व
- यह राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की भूमिका को रेखांकित करता है, जो बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करता है।
- यह खाद्य सुरक्षा मानकों और पोषण दिशानिर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए सरकारी एजेंसियों, जैसे महिला एवं बाल विकास विभाग और खाद्य सुरक्षा आयुक्त, के बीच समन्वय को बढ़ावा देता है।
स्वास्थ्य और पोषण महत्व
- अत्यधिक चीनी का सेवन बचपन में मोटापे, मधुमेह और अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है; इस पहल से इन जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी।
- यह बच्चों के लिए संतुलित आहार के महत्व पर जोर देता है और स्वस्थ खाने की आदतों को बढ़ावा देने में सहायक है, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करेगा।
चुनौतियाँ
1. वैज्ञानिक मूल्यांकन और विकल्प
- चीनी के स्थान पर गुड़ जैसे विकल्पों का वैज्ञानिक रूप से मूल्यांकन करना ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे बच्चों की आयु और स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त हैं।
- न्यूट्रीमिक्स के पोषण संबंधी घटकों को वैज्ञानिक रूप से निर्धारित करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करना।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य, पोषण, सरकारी नीतियां
2. उत्पादन और वितरण में परिवर्तन
- कुटुम्बश्री इकाइयों द्वारा उत्पादित न्यूट्रीमिक्स के निर्माण प्रक्रिया में बदलाव करना ताकि चीनी को हटाया जा सके या प्रतिस्थापित किया जा सके।
- परिवर्तित न्यूट्रीमिक्स की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को बनाए रखना।
यूपीएससी लिंक: खाद्य प्रसंस्करण, आपूर्ति श्रृंखला
3. जागरूकता और अनुपालन
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों के बीच नए दिशानिर्देशों और स्वस्थ आदतों के बारे में जागरूकता पैदा करना।
- बच्चों के खाद्य पदार्थों पर सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी को सही ढंग से मुद्रित करना और उसका अनुपालन सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक कल्याण, जन जागरूकता
4. निगरानी और प्रवर्तन
- यह सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी निगरानी प्रणाली स्थापित करना कि न्यूट्रीमिक्स में चीनी की मात्रा WHO दिशानिर्देशों के अनुरूप हो।
- खाद्य सुरक्षा आयुक्त और स्वास्थ्य सेवा निदेशक के साथ मिलकर नियमित जांच और प्रवर्तन सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: नियामक निकाय, सार्वजनिक स्वास्थ्य
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अमृतम न्यूट्रीमिक्स में 20% चीनी | विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन और बच्चों में जीवनशैली संबंधी बीमारियों का संभावित जोखिम। |
| वैज्ञानिक मूल्यांकन का अभाव | वर्तमान न्यूट्रीमिक्स फॉर्मूलेशन में प्रत्येक घटक, विशेषकर चीनी, बच्चों की आयु और स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त है या नहीं, इसका वैज्ञानिक परीक्षण नहीं किया गया है। |
| पोषण संबंधी जानकारी की कमी | बच्चों के खाद्य पदार्थों के लेबल पर सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और बच्चों को दी जाने वाली मात्रा का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं होना। |
| जागरूकता का अभाव | आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों के बीच स्वस्थ आदतों और खाद्य पदार्थों को पकाने के सही तरीकों के बारे में पर्याप्त जागरूकता की कमी। |
| विकल्पों का कार्यान्वयन | चीनी के स्थान पर गुड़ जैसे विकल्पों को प्रभावी ढंग से और वैज्ञानिक आधार पर लागू करने में चुनौतियाँ। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (Integrated Child Development Services – ICDS)
आगे की राह
- चीनी के स्थान पर गुड़ जैसे स्वस्थ विकल्पों का वैज्ञानिक रूप से मूल्यांकन किया जाए और उन्हें न्यूट्रीमिक्स में शामिल किया जाए।
- बच्चों के खाद्य पदार्थों के लेबल पर सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और आयु-उपयुक्त मात्रा को स्पष्ट रूप से मुद्रित करना अनिवार्य किया जाए।
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों के लिए पोषण ट्रैकर ऐप या व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से स्वस्थ आदतों और खाद्य पदार्थों को पकाने के तरीकों पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं।
- महिला एवं बाल विकास विभाग, खाद्य सुरक्षा आयुक्त और स्वास्थ्य सेवा निदेशक सहित संबंधित विभागों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाए ताकि बच्चों के पोषण मानकों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित हो सके।
- न्यूट्रीमिक्स के पोषण संबंधी घटकों की नियमित समीक्षा और मूल्यांकन के लिए एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए।
- WHO और अन्य राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों द्वारा निर्धारित पोषण दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बाल अधिकार संरक्षण आयोग · पोषण अभियान · आंगनवाड़ी सेवाएं · बच्चों का स्वास्थ्य · जीवनशैली संबंधी रोग · खाद्य सुरक्षा मानक · सार्वजनिक वितरण प्रणाली · पोषण ट्रैकर ऐप · महिला एवं बाल विकास मंत्रालय · WHO दिशानिर्देश
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘शिक्षा का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
केरल बाल अधिकार आयोग को शिकायत → अमृतम न्यूट्रीमिक्स में अत्यधिक चीनी → WHO दिशानिर्देशों का उल्लंघन, जीवनशैली रोगों का जोखिम → आयोग का WCD निदेशक को निर्देश → चीनी हटाने, गुड़ के विकल्प पर विचार, लेबलिंग में सुधार → बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार का लक्ष्य
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) एक सांविधिक निकाय है जो महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
2. राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR) बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच कर सकता है।
3. पोषण अभियान का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण और एनीमिया को कम करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के तहत स्थापित एक सांविधिक निकाय है, लेकिन यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है। कथन 2 सही है, SCPCR बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच करने के लिए अधिकृत हैं। कथन 3 सही है, पोषण अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में कुपोषण और एनीमिया को कम करना है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन ‘अमृतम न्यूट्रीमिक्स’ के संबंध में सही है/हैं?
1. यह केरल में आंगनवाड़ियों के माध्यम से वितरित किया जाने वाला एक कम लागत वाला खाद्य पूरक है।
2. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – केंद्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPCRI) ने इसका निर्माण किया है।
3. केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इसमें चीनी की मात्रा को लेकर चिंता व्यक्त की है।
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है, अमृतम न्यूट्रीमिक्स केरल में आंगनवाड़ियों के माध्यम से वितरित किया जाने वाला एक कम लागत वाला खाद्य पूरक है। कथन 2 गलत है, ICAR-CPCRI ने इसका फॉर्मूलेशन विकसित किया है, जबकि इसका उत्पादन कुदुम्बश्री इकाइयों द्वारा किया जाता है। कथन 3 सही है, केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इसमें चीनी की मात्रा को लेकर चिंता व्यक्त की है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR) की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, बच्चों के लिए खाद्य पूरकों में चीनी जैसे अवयवों के उपयोग से जुड़े नैतिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR) की स्थापना और उसके जनादेश का संक्षिप्त परिचय। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालें।
2. **SCPCR की भूमिका:**
* बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच।
* बाल कल्याण नीतियों और कार्यक्रमों की निगरानी।
* सरकार को बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से संबंधित मामलों पर सिफारिशें देना।
* जागरूकता फैलाना और बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना।
* हालिया मामले (जैसे अमृतम न्यूट्रीमिक्स में चीनी का मुद्दा) का उदाहरण दें जहां SCPCR ने हस्तक्षेप किया है।
3. **नैतिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं:**
* **नैतिक चिंताएं:** बच्चों को स्वस्थ विकल्प प्रदान करने की जिम्मेदारी, कमजोर वर्ग के बच्चों पर मीठे खाद्य पदार्थों के दीर्घकालिक प्रभावों का विचार।
* **सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताएं:** WHO दिशानिर्देशों का उल्लंघन, जीवनशैली संबंधी बीमारियों (मधुमेह, मोटापा) का बढ़ता जोखिम, बच्चों के दांतों के स्वास्थ्य पर प्रभाव।
* कुपोषण के साथ-साथ ‘अदृश्य भूख’ (hidden hunger) और ‘दोहरे बोझ’ (double burden) की अवधारणा को समझाएं।
4. **आगे की राह/सुझाव:**
* खाद्य पूरकों के वैज्ञानिक फॉर्मूलेशन की आवश्यकता।
* सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी का स्पष्ट लेबलिंग।
* आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों के बीच जागरूकता बढ़ाना।
* नियमित निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली।
* सरकार, नागरिक समाज और विशेषज्ञों के बीच समन्वय।
5. **निष्कर्ष:** बच्चों के समग्र विकास के लिए पोषण और स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: The Hindu
Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा ‘न्यूट्रिमिक्स’ में चीनी की मात्रा को कम करने का मुख्य कारण क्या है?
- A. बच्चों में मोटापे और मधुमेह के जोखिम को कम करना
- B. उत्पादन लागत में कमी लाना
- C. स्वाद में सुधार करना
- D. राज्य सरकार द्वारा निर्धारित पोषण मानकों का पालन करना
उत्तर: A. बच्चों में मोटापे और मधुमेह के जोखिम को कम करना — केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने ‘न्यूट्रिमिक्स’ में चीनी की अधिक मात्रा के कारण बच्चों में मोटापे और मधुमेह के जोखिम को ध्यान में रखते हुए इसे कम करने की सिफारिश की है।
Mains: केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा ‘न्यूट्रिमिक्स’ में चीनी की मात्रा को कम करने के लिए उठाए गए कदमों तथा इसके पीछे के प्रमुख कारणों की विवेचना कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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