08 Aug केरल सरकार द्वारा वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए वायनाड में 60 किमी सोलर बाड़ लगाने की घोषणा

✎ केरल सरकार की वायनाड में 60 किलोमीटर सौर बाड़ लगाने की पहल और भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा वहन क्षमता अध्ययन, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता | GS Paper III — आपदा प्रबंधन | GS Paper II — सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप
- Prelims: मानव-वन्यजीव संघर्ष, सौर बाड़, वन्यजीव संस्थान, वहन क्षमता अध्ययन, केरल सरकार की 100-दिवसीय कार्य योजना, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
- Essay: विकास बनाम संरक्षण: मानव-वन्यजीव संघर्ष का समाधान, सतत सह-अस्तित्व: पर्यावरण और मानव कल्याण के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: केरल सरकार की वायनाड में 60 किलोमीटर सौर बाड़ लगाने की पहल और भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा वहन क्षमता अध्ययन, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केरल सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को कम करने के प्रयासों के तहत वायनाड जिले में वन क्षेत्रों के किनारे 60 किलोमीटर लंबी सौर बाड़ (Solar Fencing) लगाने की घोषणा की है। यह परियोजना राज्य सरकार की 100-दिवसीय कार्य योजना के तहत लागू की जाएगी। इसके अतिरिक्त, भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India – WII) को वायनाड के वनों की वहन क्षमता (Carrying Capacity) का अध्ययन करने का कार्य सौंपा गया है, ताकि मानव बस्तियों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को समझा जा सके।
पृष्ठभूमि
- वायनाड केरल का एक ऐसा जिला है जो मानव-वन्यजीव संघर्ष से सबसे अधिक प्रभावित है, जहाँ मानव बस्तियाँ अक्सर वन क्षेत्रों के करीब स्थित हैं।
- इस संघर्ष के मुख्य कारणों में वनों का विखंडन, वन्यजीवों के आवासों का नुकसान, मानव बस्तियों का विस्तार और वन्यजीव गलियारों में बाधाएँ शामिल हैं।
- सौर बाड़ एक प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल तरीका है जो वन्यजीवों को कृषि क्षेत्रों और मानव बस्तियों में प्रवेश करने से रोकता है, जिससे फसलों और जीवन को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
- भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) एक प्रमुख स्वायत्त संस्थान है जो वन्यजीव अनुसंधान और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखता है, और इसका वहन क्षमता अध्ययन इस क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन को समझने में मदद करेगा।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष न केवल वन्यजीवों के लिए खतरा है, बल्कि किसानों और स्थानीय समुदायों के लिए भी गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियाँ पैदा करता है।
- सरकार ने मौजूदा 25 किलोमीटर सौर बाड़ की मरम्मत का भी निर्णय लिया है और वन्यजीव प्रबंधन को मजबूत करने के लिए रैपिड रिस्पांस टीमों (Rapid Response Teams) और अतिरिक्त उपकरणों की तैनाती की योजना बनाई है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष क्या है?
- मानव-वन्यजीव संघर्ष तब होता है जब मानव और वन्यजीव आबादी के बीच संसाधनों और स्थान को लेकर प्रतिस्पर्धा होती है, जिससे दोनों को नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
- यह संघर्ष अक्सर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों के अतिक्रमण, कृषि विस्तार, शहरीकरण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण उत्पन्न होता है।
- इसके परिणामों में फसलों का विनाश, पशुधन की हानि, मानव जीवन का नुकसान, वन्यजीवों का शिकार या उन्हें मारना, और वन्यजीवों के व्यवहार में परिवर्तन शामिल हैं।
- भारत में, हाथी, बाघ, तेंदुए और जंगली सूअर जैसे जानवर अक्सर इस संघर्ष में शामिल होते हैं, खासकर वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदायों के साथ।
- संघर्ष को कम करने के लिए विभिन्न रणनीतियाँ अपनाई जाती हैं, जैसे कि सौर बाड़ लगाना, वन्यजीव गलियारों का संरक्षण, जागरूकता कार्यक्रम, फसल क्षतिपूर्ति योजनाएँ और रैपिड रिस्पांस टीमें।
- वहन क्षमता अध्ययन किसी विशेष क्षेत्र में वन्यजीवों की अधिकतम संख्या का आकलन करता है जिसे पर्यावरण बिना किसी स्थायी क्षति के बनाए रख सकता है, जो संघर्ष प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
- इस समस्या के समाधान के लिए वन विभाग, स्थानीय समुदायों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता होती है।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) वन्यजीवों और उनके आवासों की सुरक्षा के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है, जो इस संघर्ष को कम करने में भी सहायक है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| वायनाड में 60 किलोमीटर सौर बाड़ लगाना | मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को कम करने का प्रयास। |
| वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India – WII) द्वारा वहन क्षमता अध्ययन | वन क्षेत्रों के निकट मानव बस्तियों की संख्या को देखते हुए बाघों और हाथियों की आबादी का आकलन। |
| मौजूदा 25 किलोमीटर सौर बाड़ की मरम्मत | वर्तमान सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता को बढ़ाना और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना। |
| चार त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (Rapid Response Teams) की तैनाती | वन्यजीव प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया को मजबूत करना। |
| वन विभाग सड़कों पर वनस्पति की सफाई | वन्यजीवों की आवाजाही पर निगरानी में सुधार और संघर्ष की घटनाओं को कम करना। |
| वन विभाग द्वारा ‘अदालत’ का आयोजन | लंबित शिकायतों का समाधान और हितधारकों के बीच विश्वास का निर्माण। |
महत्व
पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- सौर बाड़ लगाने से वन्यजीवों को मानव बस्तियों में प्रवेश करने से रोका जा सकेगा, जिससे फसलों को नुकसान और जान-माल के नुकसान में कमी आएगी।
- वहन क्षमता अध्ययन से वनों में वन्यजीवों की संख्या और उनके आवास की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन होगा, जो प्रभावी संरक्षण रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण है।
सामाजिक और आर्थिक
- मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी से किसानों और स्थानीय समुदायों की आजीविका सुरक्षित होगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।
- तेज प्रतिक्रिया टीमों की तैनाती और बेहतर उपकरण वन कर्मचारियों की सुरक्षा और दक्षता बढ़ाएंगे, जिससे संघर्ष की स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
शासन और नीति
- यह परियोजना राज्य सरकार के 100-दिवसीय कार्य कार्यक्रम का हिस्सा है, जो मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- विभिन्न हितधारकों – किसानों, वन विभाग, स्थानीय निकायों और जन निगरानी समितियों के समन्वित प्रयासों पर जोर, एक समावेशी दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
चुनौतियाँ
1. मानव-वन्यजीव संघर्ष
- वन क्षेत्रों के निकट बढ़ती मानव बस्तियां और कृषि विस्तार वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को कम कर रहा है, जिससे वे भोजन और पानी की तलाश में मानव क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं।
- वन्यजीवों द्वारा फसलों को नुकसान और पशुधन पर हमले से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होता है, जिससे संघर्ष और बढ़ जाता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन
2. वहन क्षमता का निर्धारण
- किसी विशेष क्षेत्र में वन्यजीवों की अधिकतम संख्या का सटीक आकलन करना जटिल है, खासकर जब मानव बस्तियां वनों के करीब हों।
- अध्ययन के परिणामों के आधार पर प्रबंधन रणनीतियों को लागू करना, जैसे कि वन्यजीवों का स्थानांतरण, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता
3. बुनियादी ढांचा और संसाधन
- सौर बाड़ और अन्य सुरक्षा उपायों के रखरखाव के लिए पर्याप्त धन और मानव संसाधनों की आवश्यकता होती है।
- वन कर्मचारियों के लिए उन्नत प्रशिक्षण और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक सतत चुनौती है, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन
4. सामुदायिक भागीदारी
- स्थानीय समुदायों, विशेषकर किसानों का विश्वास और सहयोग प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे संघर्ष से सीधे प्रभावित होते हैं।
- शिकायतों का प्रभावी ढंग से समाधान करना और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना एक समावेशी दृष्टिकोण के लिए आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: शासन, सामाजिक न्याय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वन्यजीवों का मानव बस्तियों में प्रवेश | फसलों को नुकसान, पशुधन पर हमला, मानव जीवन का जोखिम। |
| वन्यजीवों के आवास का संकुचन | मानव अतिक्रमण, कृषि विस्तार, बुनियादी ढांचा विकास। |
| मौजूदा सुरक्षा उपायों की अपर्याप्तता | पुरानी बाड़, अपर्याप्त निगरानी, सीमित प्रतिक्रिया क्षमता। |
| हितधारकों के बीच समन्वय की कमी | वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और समुदायों के बीच प्रभावी सहयोग का अभाव। |
| जलवायु परिवर्तन के प्रभाव | पानी और भोजन की कमी से वन्यजीवों का पलायन, संघर्ष में वृद्धि। |
आगे की राह
- मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए एक एकीकृत और बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाना।
- वन्यजीवों के आवासों को बहाल करने और उनके लिए पर्याप्त भोजन और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना।
- स्थानीय समुदायों को संघर्ष प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल करना और उन्हें क्षतिपूर्ति तंत्र के बारे में जागरूक करना।
- वन कर्मचारियों के लिए उन्नत प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और पर्याप्त जनशक्ति सुनिश्चित करना।
- वन्यजीवों के व्यवहार और उनके आवासों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करना।
- वन्यजीवों के स्थानांतरण जैसे वैज्ञानिक प्रबंधन उपायों को सामाजिक और राजनीतिक सहमति के साथ लागू करना।
- वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) की पहचान और संरक्षण करना ताकि वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मानव-वन्यजीव संघर्ष · सौर बाड़ लगाना · वहन क्षमता अध्ययन · वन्यजीव संरक्षण · पर्यावरण प्रबंधन · स्थानीय समुदायों की भागीदारी · सतत विकास · जैव विविधता · वन्यजीव संस्थान · राज्य कार्य योजना
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51क (छ)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन नागरिक कर्तव्य’}
अवधारणा प्रवाह
मानव बस्तियों का वन क्षेत्रों के निकट विस्तार → वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का संकुचन → भोजन और पानी की तलाश में वन्यजीवों का मानव क्षेत्रों में प्रवेश → मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि → सौर बाड़ और अन्य उपायों से संघर्ष को कम करने का प्रयास → स्थानीय समुदायों और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए केरल सरकार वायनाड जिले में 60 किलोमीटर सौर बाड़ लगाएगी।
2. भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) को वायनाड के जंगलों की वहन क्षमता का अध्ययन करने का कार्य सौंपा गया है।
3. यह परियोजना राज्य सरकार के 100-दिवसीय कार्य कार्यक्रम के तहत लागू की जाएगी।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि केरल सरकार वायनाड में 60 किलोमीटर सौर बाड़ लगाने की योजना बना रही है। कथन 2 सही है क्योंकि भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) को वायनाड के जंगलों की वहन क्षमता का अध्ययन करने का कार्य सौंपा गया है। कथन 3 भी सही है क्योंकि यह परियोजना राज्य सरकार के 100-दिवसीय कार्य कार्यक्रम का हिस्सा है।
Q2. अभिकथन (A): मानव-वन्यजीव संघर्ष भारत में एक गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौती है।
कारण (R): वन्यजीवों के आवासों का अतिक्रमण और मानव बस्तियों का वनों के करीब विस्तार इस संघर्ष के प्रमुख कारण हैं।
सही विकल्प चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि मानव-वन्यजीव संघर्ष वास्तव में एक गंभीर चुनौती है। कारण (R) भी सही है क्योंकि मानव बस्तियों का विस्तार और आवासों का अतिक्रमण इस संघर्ष के मुख्य कारण हैं। R, A की सही व्याख्या भी है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मानव-वन्यजीव संघर्ष भारत में एक बढ़ती हुई चुनौती है, जिसके पर्यावरणीय और सामाजिक दोनों निहितार्थ हैं। इस कथन के आलोक में, मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों की विवेचना कीजिए और इसके शमन के लिए अपनाई जा सकने वाली विभिन्न रणनीतियों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: मानव-वन्यजीव संघर्ष की परिभाषा और भारत में इसकी बढ़ती प्रासंगिकता का संक्षिप्त उल्लेख।
2. संघर्ष के कारण: निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करें:
क. आवास का नुकसान और विखंडन (वनोन्मूलन, कृषि विस्तार, शहरीकरण)।
ख. वन्यजीव गलियारों का अवरोध।
ग. मानव बस्तियों का वनों के करीब विस्तार।
घ. शिकार के आधार में कमी और वन्यजीवों का भोजन की तलाश में मानव बस्तियों में प्रवेश।
ङ. जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएँ।
च. स्थानीय समुदायों में जागरूकता की कमी।
3. शमन रणनीतियाँ: निम्नलिखित उपायों का विश्लेषण करें:
क. तकनीकी समाधान: सौर बाड़, बायो-फेंसिंग, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली।
ख. पारिस्थितिक प्रबंधन: वन्यजीव गलियारों का संरक्षण, आवास सुधार, वहन क्षमता अध्ययन (वायनाड का उदाहरण)।
ग. सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय लोगों को शामिल करना, जागरूकता कार्यक्रम, क्षतिपूर्ति तंत्र।
घ. नीतिगत और कानूनी उपाय: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का प्रभावी कार्यान्वयन, वन विभाग और अन्य हितधारकों के बीच समन्वय।
ङ. रैपिड रिस्पांस टीमें और वन रक्षकों को प्रशिक्षण।
च. पुनर्वास और स्थानांतरण नीतियां।
4. निष्कर्ष: एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें जो संरक्षण, सामुदायिक विकास और तकनीकी नवाचार को एकीकृत करता हो।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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