09 Sep गंगा निर्मलता: पर्यावरण मंत्री का जनभागीदारी पर जोर, जानें प्रमुख बिंदु
✎ गंगा नदी का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने से ही संभव है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (Environment and Ecology) | GS Paper I — भारतीय विरासत और संस्कृति (Indian Heritage and Culture) | GS Paper II — सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप (Government Policies and Interventions)
- Prelims: नमामि गंगे कार्यक्रम, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, गंगा नदी बेसिन, जल प्रदूषण, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जनभागीदारी
- Essay: नदियाँ: सभ्यता की जीवनरेखा और संरक्षण की चुनौती, पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: गंगा नदी का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने से ही संभव है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री अरुण सक्सेना ने ‘निर्मल गंगा-प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश’ कार्यक्रम में कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि आस्था और जीवन से जुड़ी धरोहर है। उन्होंने गंगा की निर्मलता के लिए जनभागीदारी को सबसे बड़ी ताकत बताया और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली (Lifestyle for Environment – LiFE) अपनाने पर जोर दिया।
पृष्ठभूमि
- गंगा नदी भारत की सबसे लंबी और पवित्र नदियों में से एक है, जिसका सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व अत्यधिक है।
- यह नदी लाखों लोगों के लिए पेयजल, सिंचाई और आजीविका का स्रोत है।
- औद्योगीकरण, शहरीकरण और कृषि अपवाह के कारण गंगा नदी गंभीर प्रदूषण का सामना कर रही है।
- सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने और उसके कायाकल्प के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए हैं।
- इन प्रयासों में सीवेज उपचार संयंत्रों का निर्माण, औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण और नदी तटों पर वृक्षारोपण शामिल हैं।
- जनभागीदारी को इन कार्यक्रमों की सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है, क्योंकि यह जमीनी स्तर पर जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देती है।
नमामि गंगे कार्यक्रम
- नमामि गंगे कार्यक्रम (Namami Gange Programme) जून 2014 में केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित एक एकीकृत संरक्षण मिशन है।
- इसका मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के प्रदूषण को प्रभावी ढंग से कम करना और उसके संरक्षण एवं कायाकल्प को सुनिश्चित करना है।
- यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga – NMCG) और इसके राज्य समकक्ष संगठनों द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।
- कार्यक्रम के तहत सीवेज उपचार अवसंरचना, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, नदी-सतह की सफाई, जैव-विविधता संरक्षण और वनीकरण जैसे विभिन्न कार्य किए जाते हैं।
- जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को भी इस कार्यक्रम का एक अभिन्न अंग माना गया है।
- यह कार्यक्रम ‘अर्थ गंगा’ मॉडल पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य गंगा नदी के साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जिससे नदी के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ सके।
- इसका लक्ष्य गंगा नदी को ‘निर्मल’ (स्वच्छ) और ‘अविरल’ (अबाधित प्रवाह) बनाना है।
- यह कार्यक्रम गंगा नदी के बेसिन में स्थित सभी राज्यों को कवर करता है, जिसमें उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| गंगा एक आस्था का विषय | धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है, जो जनभागीदारी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। |
| निर्मलता के लिए जनभागीदारी | सरकारी प्रयासों के साथ-साथ सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल देता है, जिससे कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित हो सके। |
| जीवन के लिए जल का महत्व | नदियों को जीवन की धमनियों के रूप में देखता है, उनके संरक्षण को एक साझा जिम्मेदारी बनाता है। |
| पर्यावरण के लिए जीवनशैली (Lifestyle for Environment) | व्यक्तिगत व्यवहार और आदतों में बदलाव लाकर पर्यावरणीय स्थिरता प्राप्त करने पर जोर देता है। |
| प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश | राज्य स्तर पर व्यापक पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें गंगा की निर्मलता एक प्रमुख घटक है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- गंगा नदी भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है, और इसकी निर्मलता पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
- नदी प्रदूषण से जल-जनित बीमारियाँ फैलती हैं और जलीय जीवन (Aquatic Life) को खतरा होता है, इसलिए इसका संरक्षण जैव विविधता (Biodiversity) के लिए महत्वपूर्ण है।
- स्वच्छ जल संसाधनों का होना जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने और जल सुरक्षा (Water Security) सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व
- गंगा नदी करोड़ों भारतीयों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र है, और इसकी पवित्रता बनाए रखना सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage) का सम्मान है।
- नदी के किनारे बसे समुदायों की आजीविका (Livelihood) और जीवनशैली सीधे नदी के स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है।
- जनभागीदारी के माध्यम से नदी संरक्षण अभियान सामाजिक एकजुटता (Social Cohesion) और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देते हैं।
शासन और नीतिगत महत्व
- गंगा की निर्मलता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न योजनाएँ और कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जैसे नमामि गंगे कार्यक्रम।
- सरकारी एजेंसियों, स्थानीय निकायों और नागरिक समाज (Civil Society) के बीच समन्वय (Coordination) नदी संरक्षण प्रयासों की प्रभावशीलता के लिए महत्वपूर्ण है।
- पर्यावरण कानूनों और नियमों का प्रभावी प्रवर्तन (Enforcement) प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. औद्योगिक और शहरी प्रदूषण
- शहरों से निकलने वाला अनुपचारित सीवेज (Untreated Sewage) और औद्योगिक अपशिष्ट (Industrial Effluents) गंगा में सीधे प्रवाहित होते हैं, जिससे जल की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होती है।
- अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों (Wastewater Treatment Plants) की अपर्याप्त क्षमता और उनका खराब रखरखाव एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण
2. कृषि अपवाह और रासायनिक प्रदूषण
- कृषि क्षेत्रों से बहकर आने वाले कीटनाशक (Pesticides) और उर्वरक (Fertilizers) नदी के जल में मिलकर यूट्रोफिकेशन (Eutrophication) और रासायनिक प्रदूषण का कारण बनते हैं।
- जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देने और रासायनिक उपयोग को कम करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रभाव आकलन
3. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
- नदी के किनारों पर और नदी में प्लास्टिक तथा अन्य ठोस कचरा (Solid Waste) फेंकना एक आम समस्या है, जो नदी पारिस्थितिकी तंत्र (River Ecosystem) को नुकसान पहुँचाता है।
- ई-कचरा (E-waste) और बैटरियों जैसे विशेष कचरे का सुरक्षित निस्तारण (Safe Disposal) एक उभरती हुई चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन
4. जनजागरूकता और व्यवहार परिवर्तन की कमी
- नदी को स्वच्छ रखने के महत्व के बारे में आम जनता में जागरूकता की कमी है, जिससे प्रदूषणकारी व्यवहार जारी रहते हैं।
- व्यक्तिगत स्तर पर ‘पर्यावरण के लिए जीवनशैली’ (Lifestyle for Environment) को अपनाने में चुनौतियाँ हैं।
यूपीएससी लिंक: मानव विकास
5. सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय का अभाव
- जल निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय निकायों जैसी विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय की कमी से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आती है।
- दीर्घकालिक योजना और निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन के महत्वपूर्ण पहलू
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट | नदी में अनुपचारित कचरे का सीधा प्रवाह, जल की गुणवत्ता में गिरावट और जलीय जीवन को खतरा। |
| कृषि रसायन | कीटनाशकों और उर्वरकों का नदी में मिलना, यूट्रोफिकेशन और रासायनिक प्रदूषण। |
| ठोस कचरा | प्लास्टिक और अन्य अपशिष्टों का नदी में जमाव, पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान। |
| जनभागीदारी की कमी | नदी संरक्षण के प्रति जागरूकता का अभाव, प्रदूषणकारी आदतों का जारी रहना। |
| एजेंसियों में समन्वय | विभिन्न सरकारी विभागों के बीच तालमेल की कमी, परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- नमामि गंगे कार्यक्रम (Namami Gange Programme)
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी और ग्रामीण) (Swachh Bharat Mission (Urban and Rural))
आगे की राह
- सीवेज उपचार क्षमता का विस्तार और मौजूदा संयंत्रों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना।
- औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल के सख्त उपचार और नियमों के उल्लंघन पर कठोर दंड का प्रावधान करना।
- कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम करने के लिए जैविक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों (Sustainable Agricultural Practices) को बढ़ावा देना।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करना, जिसमें कचरा संग्रहण, पृथक्करण (Segregation) और पुनर्चक्रण (Recycling) शामिल है, विशेषकर नदी के किनारे वाले क्षेत्रों में।
- ई-कचरा और अन्य खतरनाक अपशिष्टों के सुरक्षित संग्रह और निस्तारण के लिए प्रभावी नीतियां और बुनियादी ढाँचा विकसित करना।
- जनजागरूकता अभियान चलाना और स्कूलों तथा समुदायों में पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देना ताकि ‘पर्यावरण के लिए जीवनशैली’ को अपनाया जा सके।
- केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न एजेंसियों, स्थानीय निकायों और नागरिक समाज संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
गंगा नदी संरक्षण · नमामि गंगे कार्यक्रम · जनभागीदारी · पर्यावरण संरक्षण · जल प्रदूषण नियंत्रण · सतत विकास · अपशिष्ट प्रबंधन · गंगा कार्य योजना · राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन · नदी कायाकल्प
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51क (छ)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का कर्तव्य’}
अवधारणा प्रवाह
गंगा नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व → प्रदूषण के कारण नदी की निर्मलता में कमी → पर्यावरण और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव → जनभागीदारी और सरकारी प्रयासों की आवश्यकता → नदी संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय → स्वच्छ गंगा और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘नमामि गंगे कार्यक्रम’ का उद्देश्य गंगा नदी का संरक्षण और कायाकल्प करना है।
2. यह कार्यक्रम केवल केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है और इसमें राज्य सरकारों की कोई भूमिका नहीं है।
3. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार प्रमुख संस्था है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ‘नमामि गंगे कार्यक्रम’ का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी का संरक्षण और कायाकल्प है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है, लेकिन इसमें राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कथन 3 सही है क्योंकि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार प्रमुख संस्था है।
Q2. गंगा नदी के प्रदूषण के प्रमुख कारणों में निम्नलिखित में से कौन-सा/से शामिल है/हैं?
1. अनुपचारित औद्योगिक अपशिष्ट का निर्वहन
2. शहरी सीवेज का सीधा प्रवाह
3. कृषि अपवाह और कीटनाशकों का उपयोग
4. धार्मिक अनुष्ठानों से उत्पन्न ठोस अपशिष्ट
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — गंगा नदी के प्रदूषण के सभी चार कारण – अनुपचारित औद्योगिक अपशिष्ट, शहरी सीवेज, कृषि अपवाह और कीटनाशक, तथा धार्मिक अनुष्ठानों से उत्पन्न ठोस अपशिष्ट – प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ गंगा नदी के संरक्षण में जनभागीदारी के महत्व का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संबंध में सरकार द्वारा किए गए प्रमुख प्रयासों और उनकी सफलताओं तथा चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** गंगा नदी के सांस्कृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **जनभागीदारी का महत्व:**
* स्थानीय समुदायों की भूमिका (उदाहरण: घाटों की सफाई, जागरूकता अभियान)।
* व्यवहार परिवर्तन और ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ (LiFE) का महत्व।
* प्रदूषण नियंत्रण में नागरिक समाज संगठनों (CSOs) और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की भूमिका।
* निगरानी और जवाबदेही में नागरिकों का योगदान।
3. **सरकारी प्रयास:**
* **नमामि गंगे कार्यक्रम:** उद्देश्य, घटक (सीवेज उपचार, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, नदी-तट विकास, जैव-विविधता संरक्षण)।
* **राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG):** इसकी संगठनात्मक संरचना और भूमिका।
* **गंगा कार्य योजना (GAP):** इसकी पृष्ठभूमि और सीख।
* अन्य संबंधित योजनाएँ (जैसे, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम)।
4. **सफलताएँ:**
* सीवेज उपचार क्षमता में वृद्धि।
* औद्योगिक प्रदूषण में कमी के कुछ उदाहरण।
* जनजागरूकता में वृद्धि।
* गंगा में जलीय जीवन में सुधार के संकेत।
5. **चुनौतियाँ:**
* अपर्याप्त सीवेज उपचार अवसंरचना।
* औद्योगिक अपशिष्टों का अप्रभावी प्रवर्तन।
* कृषि अपवाह और गैर-बिंदु स्रोत प्रदूषण।
* धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं से उत्पन्न प्रदूषण।
* अंतर-राज्यीय समन्वय का अभाव।
* दीर्घकालिक वित्तपोषण और रखरखाव की समस्याएँ।
6. **निष्कर्ष:** जनभागीदारी और सरकारी प्रयासों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए एक सतत और समग्र दृष्टिकोण का सुझाव।
स्रोत: amarujala.com
Uttar Pradesh PCS (UPPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में गंगा नदी की निर्मलता सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई प्रमुख पहल कौन सी है?
- A. गंगा जल गुणवत्ता मॉनिटरिंग अभियान
- B. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के अंतर्गत ‘गंगा आमंत्रण अभियान’
- C. लखनऊ नगर निगम द्वारा ‘स्वच्छ गंगा अभियान’
- D. उत्तर प्रदेश पर्यावरण विभाग द्वारा ‘गंगा निर्मलता योजना’
उत्तर: B. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के अंतर्गत ‘गंगा आमंत्रण अभियान’ — राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के अंतर्गत ‘गंगा आमंत्रण अभियान’ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में गंगा निर्मलता के लिए प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य जनभागीदारी को बढ़ावा देना है।
Mains: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में गंगा नदी की निर्मलता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों का वर्णन करते हुए, राज्य की प्रशासनिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से इसकी आवश्यकता एवं प्रभावों पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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