10 Sep चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा: BRICS शिखर सम्मेलन में भागीदारी

✎ BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण मंच है जो वैश्विक शासन में सुधार और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास करता है, और इसकी आगामी शिखर बैठक भारत-चीन संबंधों तथा व्यापक भू-राजनीतिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — अर्थव्यवस्था
- Prelims: BRICS, भारत-चीन संबंध, वैश्विक शासन, बहुपक्षीय सहयोग, पूर्वी लद्दाख गतिरोध, सीमा विवाद
- Essay: उभरती अर्थव्यवस्थाओं का वैश्विक व्यवस्था में बढ़ता प्रभाव, भारत की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंध
त्वरित पुनरावृत्ति: BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण मंच है जो वैश्विक शासन में सुधार और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास करता है, और इसकी आगामी शिखर बैठक भारत-चीन संबंधों तथा व्यापक भू-राजनीतिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत का दौरा करेंगे, जो नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। यह यात्रा लगभग सात वर्षों में शी जिनपिंग की भारत की पहली यात्रा होगी और इसे दोनों एशियाई शक्तियों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के चल रहे प्रयासों के साथ-साथ अस्थिर वैश्विक स्थिति, विशेष रूप से पश्चिम एशिया संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच BRICS सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि
- भारत वर्तमान में BRICS समूह की अध्यक्षता कर रहा है और 12 से 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
- राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह यात्रा 2020 के पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद भारत और चीन द्वारा संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों के बीच हो रही है।
- यात्रा से पहले, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा मुद्दे और द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के कदमों पर व्यापक बातचीत की थी।
- 25 अगस्त को बीजिंग में हुई विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता के दौरान, दोनों पक्ष आठ-सूत्रीय सहमति पर पहुंचे और सीमा परिसीमन तथा सीमा प्रबंधन पर ‘शीघ्र और ठोस प्रगति’ के लिए चर्चा को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए।
- BRICS शिखर सम्मेलन में विश्व की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएँ – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका – एक साथ आएंगी, जिसमें बहुपक्षीय सहयोग समूह के एजेंडे के मूल में रहने की उम्मीद है।
- शी जिनपिंग ने पिछली बार 2019 में मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत का दौरा किया था। उन्होंने 2016 में BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए गोवा का दौरा किया था और सितंबर 2014 में अपनी पहली भारत यात्रा की थी।
- शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बैठक होने की उम्मीद है, जिस पर भारत-चीन संबंधों के भविष्य के संकेतकों के लिए बारीकी से नजर रखी जाएगी।
BRICS क्या है?
- BRICS विश्व की पाँच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका – का एक संक्षिप्त रूप है।
- यह एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और वैश्विक आर्थिक तथा राजनीतिक मुद्दों पर समन्वय स्थापित करना है।
- BRICS की अवधारणा 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील द्वारा ‘BRIC’ के रूप में गढ़ी गई थी, जिसमें दक्षिण अफ्रीका 2010 में शामिल हुआ और इसे BRICS बना दिया।
- यह समूह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 24 प्रतिशत और विश्व की आबादी का 41 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करता है।
- BRICS ने वैश्विक शासन में अधिक प्रतिनिधित्व की वकालत करने, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार करने, व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने तथा सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में विकसित किया है।
- समूह के प्रमुख उद्देश्यों में आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना, और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना शामिल है।
- BRICS ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (New Development Bank – NDB) और आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (Contingent Reserve Arrangement – CRA) जैसी संस्थाओं की स्थापना की है, जो वैश्विक वित्तीय वास्तुकला में इसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 18वाँ BRICS शिखर सम्मेलन | भारत द्वारा नई दिल्ली में आयोजित, वैश्विक बहुपक्षीय सहयोग का मंच। |
| चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा | सात वर्षों में भारत की पहली यात्रा, द्विपक्षीय संबंधों के स्थिरीकरण के लिए महत्वपूर्ण। |
| द्विपक्षीय बैठकें | शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच संभावित बैठक, भारत-चीन संबंधों की दिशा तय करने में सहायक। |
| पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद संबंध | संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों के बीच यात्रा, सीमा विवाद पर चर्चा की संभावना। |
| वैश्विक भू-राजनीतिक संदर्भ | पश्चिम एशिया संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच BRICS सहयोग का महत्व। |
महत्व
कूटनीतिक महत्व
- यह यात्रा भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के चल रहे प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर प्रदान करती है, विशेष रूप से 2020 के पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद।
- BRICS शिखर सम्मेलन वैश्विक शासन में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, और इस यात्रा से बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
आर्थिक महत्व
- BRICS समूह के भीतर व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा होने की संभावना है, जिससे सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ेगा।
- यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार और वैश्विक व्यापार प्रणालियों को मजबूत करने के BRICS के एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।
भू-रणनीतिक महत्व
- यह यात्रा एक अस्थिर वैश्विक स्थिति (पश्चिम एशिया संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध) के बीच हो रही है, जो BRICS देशों के बीच समन्वय और सहयोग को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
- सीमा मुद्दे पर हाल की वार्ताओं के बाद, यह बैठक सीमा प्रबंधन और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए आगे की राह पर संकेत दे सकती है।
चुनौतियाँ
1. भारत-चीन सीमा विवाद
- पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद से सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
- सीमा के सीमांकन (delimitation) और प्रबंधन पर ‘शीघ्र और ठोस परिणाम’ प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत और उसके पड़ोसी-संबंध
2. द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास की कमी
- सीमा विवाद और अन्य भू-राजनीतिक मुद्दों के कारण दोनों देशों के बीच विश्वास का स्तर कम हुआ है।
- संबंधों को सामान्य बनाने के लिए विश्वास बहाली के उपायों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव
3. वैश्विक भू-राजनीतिक दबाव
- रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संघर्ष जैसी वैश्विक घटनाओं के कारण BRICS के भीतर भी अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं।
- इन दबावों के बीच BRICS की एकजुटता और साझा एजेंडे को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियां और मंच-उनकी संरचना, अधिदेश
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पूर्वी लद्दाख गतिरोध | दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध और सीमा पर तनाव। |
| सीमा प्रबंधन | वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखने में कठिनाई। |
| द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन | चीन के पक्ष में भारत का बढ़ता व्यापार घाटा। |
| वैश्विक शासन में प्रतिनिधित्व | अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधारों पर BRICS सदस्यों के बीच आम सहमति बनाना। |
आगे की राह
- सीमा विवादों के समाधान के लिए रचनात्मक संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखना।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए विश्वास बहाली के उपाय (CBMs) लागू करना।
- द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन को कम करने और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नए रास्ते तलाशना।
- BRICS मंच का उपयोग वैश्विक शासन में सुधारों की वकालत करने और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए करना।
- आपसी हितों के क्षेत्रों, जैसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी, भुगतान प्रणालियों, और सतत विकास लक्ष्यों में सहयोग बढ़ाना।
- क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भारत-चीन संबंधों में प्रगतिशील सामान्यीकरण की दिशा में काम करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
BRICS शिखर सम्मेलन · भारत-चीन संबंध · पूर्वी लद्दाख गतिरोध · वैश्विक शासन सुधार · बहुपक्षीय सहयोग · सीमा विवाद · उभरती अर्थव्यवस्थाएँ · अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ · सतत विकास लक्ष्य · कूटनीतिक जुड़ाव
अवधारणा प्रवाह
चीनी राष्ट्रपति की भारत यात्रा → 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भागीदारी → द्विपक्षीय संबंधों के स्थिरीकरण के प्रयास → सीमा विवाद और अन्य मुद्दों पर चर्चा → BRICS सहयोग का सुदृढ़ीकरण → वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिरता में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. BRICS समूह में वर्तमान में पाँच सदस्य देश शामिल हैं: ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका।
2. BRICS का मुख्य उद्देश्य वैश्विक शासन में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाना है।
3. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) BRICS समूह द्वारा स्थापित एक बहुपक्षीय विकास बैंक है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। कथन 2 सही है। BRICS का एक प्रमुख लक्ष्य वैश्विक शासन और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को बढ़ाना है। कथन 3 सही है। न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को BRICS देशों द्वारा बुनियादी ढाँचा और सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने हेतु स्थापित किया गया था।
Q2. अभिकथन (A): भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण बाधा बना हुआ है।
कारण (R): हाल ही में, दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और विदेश मंत्रियों के बीच सीमा मुद्दे पर व्यापक बातचीत हुई है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सीमा विवाद भारत-चीन संबंधों में एक केंद्रीय मुद्दा है। कारण (R) भी सही है क्योंकि हाल ही में उच्च-स्तरीय वार्ताएँ हुई हैं, जो सीमा मुद्दे के महत्व को दर्शाती हैं। ये वार्ताएँ इस बात का प्रमाण हैं कि सीमा विवाद संबंधों में बाधा है, और उसे हल करने के प्रयास किए जा रहे हैं, इसलिए R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ BRICS समूह उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए वैश्विक शासन में अधिक प्रतिनिधित्व की वकालत करने हेतु एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और भारत-चीन संबंधों पर BRICS शिखर सम्मेलन के संभावित प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: BRICS की संक्षिप्त पृष्ठभूमि और इसके गठन के पीछे का उद्देश्य (वैश्विक शासन में उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व)।
2. BRICS की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण:
क. सफलताएँ: वैश्विक मंच पर सामूहिक आवाज, न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA) जैसे संस्थानों का निर्माण, दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा, व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करना।
ख. चुनौतियाँ/सीमाएँ: सदस्य देशों के बीच आंतरिक मतभेद (विशेषकर भारत-चीन), सर्वसम्मति तक पहुँचने में कठिनाई, पश्चिमी प्रभुत्व वाली संस्थाओं को चुनौती देने की सीमित क्षमता, वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव की वास्तविक सीमा।
3. भारत-चीन संबंधों पर BRICS शिखर सम्मेलन का प्रभाव:
क. सकारात्मक प्रभाव: द्विपक्षीय वार्ता के लिए एक मंच प्रदान करना (जैसे शिखर सम्मेलन के इतर बैठकें), तनाव कम करने और विश्वास बहाली के उपायों पर चर्चा का अवसर, साझा वैश्विक हितों पर सहयोग।
ख. चुनौतियाँ: पूर्वी लद्दाख गतिरोध जैसे अनसुलझे सीमा मुद्दे, भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, BRICS मंच पर भी दोनों देशों के बीच शक्ति असंतुलन का प्रभाव।
4. निष्कर्ष: BRICS की प्रासंगिकता और भारत-चीन संबंधों के लिए इसके निहितार्थों का संतुलित मूल्यांकन, जिसमें आगे के रास्ते का सुझाव भी शामिल हो।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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