13 Oct छत्तीसगढ़ में 1.17 लाख राशन कार्ड निरस्त, जानिए पात्रता जांच प्रक्रिया और नियम

✎ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में पात्र परिवारों की पहचान का दायित्व राज्यों का है, और राशन कार्ड सत्यापन का उद्देश्य समावेशन त्रुटि (अपात्र का लाभ) घटाना है, परंतु अपवर्जन त्रुटि (पात्र का छूटना) न बढ़े, इसके लिए सुनवाई…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन: कल्याणकारी योजनाएँ, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद्य सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही | GS Paper II — पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका और विकेंद्रीकृत शासन | GS Paper III — अर्थव्यवस्था: खाद्य सब्सिडी, खाद्य प्रबंधन और लक्षित हस्तांतरण | GS Paper II — गरीबी और भूख से जुड़े मुद्दे, कमज़ोर वर्गों के लिए कल्याणकारी तंत्र
- Prelims: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (NFSA), सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और लक्षित PDS, अंत्योदय अन्न योजना (AAY), प्राथमिकता वाले परिवार (Priority Households), प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY), एक राष्ट्र एक राशन कार्ड (ONORC), ई-पॉस (e-PoS) और आधार सीडिंग, समावेशन त्रुटि और अपवर्जन त्रुटि, ग्यारहवीं अनुसूची की प्रविष्टि 28 — सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सामाजिक अंकेक्षण और सतर्कता समिति (NFSA की धारा 24)
- Essay: कल्याणकारी योजनाओं में लक्ष्य-निर्धारण: पात्र को शामिल करना और अपात्र को हटाना, दोनों के बीच संतुलन, भूख से मुक्ति से पोषण सुरक्षा तक: भोजन के अधिकार को सुनिश्चित करने में प्रौद्योगिकी और स्थानीय शासन की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में पात्र परिवारों की पहचान का दायित्व राज्यों का है, और राशन कार्ड सत्यापन का उद्देश्य समावेशन त्रुटि (अपात्र का लाभ) घटाना है, परंतु अपवर्जन त्रुटि (पात्र का छूटना) न बढ़े, इसके लिए सुनवाई, शिकायत निवारण और सामाजिक अंकेक्षण आवश्यक हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
छत्तीसगढ़ के खाद्य विभाग ने गाँवों में गरीबी रेखा श्रेणी के राशन कार्डों की पात्रता जाँचने का सत्यापन अभियान तेज़ कर दिया है। समाचार के अनुसार वर्ष 2024 में 57,371 और वर्ष 2025 में 60,496 अर्थात दो वर्ष में कुल 1,17,867 राशन कार्ड निरस्त किए गए हैं। इस अभियान में ग्राम पंचायतों के सचिवों और सरपंचों को परिवारों की जानकारी जुटाकर जाँच रिपोर्ट खाद्य विभाग को सौंपनी है। विभाग यह देख रहा है कि जिन परिवारों के सदस्य सरकारी या निजी नौकरी में हैं अथवा जिनके आय के अन्य स्रोत विकसित हो चुके हैं, वे पात्रता शर्तें पूरी करते हैं या नहीं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल नौकरीपेशा होने से कोई परिवार स्वतः अपात्र नहीं होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि दस्तावेज़ी या तकनीकी त्रुटि के कारण कोई वास्तविक ज़रूरतमंद परिवार सूची से बाहर न हो। सितंबर 2026 के वितरण आँकड़ों के अनुसार राज्य के ई-पॉस पोर्टल पर कुल 83,31,947 राशन कार्ड दर्ज हैं।
पृष्ठभूमि
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System) भारत की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था है। केंद्र सरकार भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से अनाज की खरीद, भंडारण और राज्यों तक आवंटन करती है। राज्य सरकारें पात्र परिवारों की पहचान करती हैं और उचित मूल्य की दुकानों से वितरण कराती हैं।
- वर्ष 1997 में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) शुरू हुई, जिसमें गरीबी रेखा से नीचे (BPL) और ऊपर (APL) परिवारों का वर्गीकरण किया गया। इस वर्गीकरण में बड़े पैमाने पर समावेशन त्रुटि (अपात्र का शामिल होना) और अपवर्जन त्रुटि (पात्र का छूट जाना) की शिकायतें सामने आईं।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 ने खाद्य सुरक्षा को कानूनी अधिकार का रूप दिया। अधिनियम में BPL-APL के स्थान पर ‘प्राथमिकता वाले परिवार’ और ‘अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार’ की श्रेणियाँ रखी गईं। समाचारों में ‘गरीबी रेखा श्रेणी’ शब्द अब भी प्रचलित है, परंतु कानूनी आधार NFSA की श्रेणियाँ हैं।
- संविधान में भोजन का अधिकार स्पष्ट मौलिक अधिकार के रूप में नहीं है, पर सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के अंतर्गत इसे मान्यता दी है। PUCL बनाम भारत संघ (2001) मामले में न्यायालय ने कई खाद्य योजनाओं को कानूनी अधिकार के रूप में लागू करने के निर्देश दिए। नीति-निर्देशक तत्त्व में अनुच्छेद 47 पोषण स्तर और जीवन स्तर ऊँचा उठाने को राज्य का कर्तव्य बताता है।
- ग्यारहवीं अनुसूची की प्रविष्टि 28 ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ को पंचायतों के कार्यक्षेत्र में रखती है। इसीलिए छत्तीसगढ़ के अभियान में ग्राम पंचायत के सचिवों और सरपंचों से जानकारी जुटाने और रिपोर्ट बनाने का दायित्व लिया जा रहा है।
- पिछले वर्षों में आधार सीडिंग, ई-केवाईसी, ई-पॉस मशीनों और एक राष्ट्र एक राशन कार्ड (ONORC) के माध्यम से कार्डों का डिजिटलीकरण हुआ है। इससे डुप्लीकेट और फ़र्ज़ी कार्ड हटाने में मदद मिली है, पर तकनीकी विफलता से वास्तविक लाभार्थियों के छूटने का जोखिम भी बना रहता है।
राशन कार्ड सत्यापन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 क्या है?
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (National Food Security Act) के अंतर्गत ग्रामीण आबादी के अधिकतम 75 प्रतिशत और शहरी आबादी के अधिकतम 50 प्रतिशत को रियायती अनाज का कानूनी अधिकार है। राज्यवार कवरेज का निर्धारण केंद्र करता है, जबकि राज्य सरकारें लाभार्थी परिवारों की पहचान करती हैं (धारा 10)।
- प्राथमिकता वाले परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम अनाज मिलता है। अधिनियम में निर्धारित मूल्य चावल 3 रुपये, गेहूँ 2 रुपये और मोटा अनाज 1 रुपये प्रति किलोग्राम है। अंत्योदय अन्न योजना के परिवारों को प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम अनाज मिलता है।
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के अंतर्गत जनवरी 2023 से NFSA के लाभार्थियों को अनाज निःशुल्क दिया जा रहा है। जनवरी 2024 से इस निःशुल्क व्यवस्था को पाँच वर्ष के लिए बढ़ाया गया है।
- राशन कार्ड जारी करने के लिए परिवार की सबसे बड़ी आयु की महिला (कम से कम 18 वर्ष) को परिवार की मुखिया माना जाता है। यह प्रावधान महिला सशक्तीकरण से जुड़ा है।
- लक्ष्य-निर्धारण की समस्या दोहरी है। समावेशन त्रुटि में अपात्र परिवार लाभ लेते हैं, जिससे सब्सिडी का रिसाव होता है। अपवर्जन त्रुटि में पात्र परिवार छूट जाते हैं, जिससे भोजन के अधिकार का उल्लंघन होता है। इसलिए सत्यापन में दोनों त्रुटियों को साथ-साथ घटाना आवश्यक है।
- NFSA की धारा 12 में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के उपाय दिए गए हैं: अनाज की घर-द्वार आपूर्ति, सूचना-प्रौद्योगिकी का उपयोग, आधार से जुड़ाव और अभिलेखों की पारदर्शिता। धारा 13 और 14 क्रमशः राशन कार्ड जारी करने और आंतरिक शिकायत निवारण से संबंधित हैं। धारा 15 जिला शिकायत निवारण अधिकारी की व्यवस्था करती है, जबकि धारा 16 राज्य खाद्य आयोग का प्रावधान करती है।
- धारा 24 के अंतर्गत पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए सामाजिक अंकेक्षण और सतर्कता समितियों की व्यवस्था है। सत्यापन के बाद नाम हटाने से पहले नोटिस, सुनवाई का अवसर और अपील की व्यवस्था प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत से जुड़ती है और अपवर्जन त्रुटि रोकने का मुख्य उपाय है।
- छत्तीसगढ़ के मामले में सत्यापन ग्राम पंचायतों की रिपोर्ट पर आधारित है और अंतिम निर्णय सरकारी नियमों व पूर्व निर्धारित शर्तों के अनुसार लिया जाएगा। विभाग का कहना है कि नौकरी मिलना अपने आप में अपात्रता का आधार नहीं है। यह आय और पात्रता मानदंडों पर आधारित मूल्यांकन की ओर संकेत करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| निरस्तीकरण का पैमाना | 2024 में 57,371 और 2025 में 60,496 यानी दो वर्ष में कुल 1,17,867 राशन कार्ड निरस्त हुए। ई-पॉस पोर्टल पर सितंबर 2026 के वितरण आँकड़ों में 83,31,947 कार्ड दर्ज हैं। निरस्त कार्ड इस संख्या का लगभग 1.4 प्रतिशत हैं, इसलिए यह पूरी व्यवस्था की सफ़ाई से अधिक लक्ष्य-निर्धारण में सुधार का प्रयास है। |
| पंचायत आधारित सत्यापन | ग्राम पंचायतों के सचिव और सरपंच परिवारों की जानकारी जुटाकर जाँच रिपोर्ट खाद्य विभाग को देते हैं। इससे स्थानीय ज्ञान का उपयोग होता है और विकेंद्रीकृत शासन को बल मिलता है। साथ ही स्थानीय पक्षपात और दबाव का जोखिम भी रहता है। |
| पात्रता का आधार | नौकरी या अतिरिक्त आय के स्रोत की जानकारी जुटाई जा रही है। विभाग के अनुसार केवल किसी सदस्य के नौकरीपेशा होने से परिवार स्वतः अपात्र नहीं होगा। अंतिम निर्णय सरकार द्वारा तय नियमों और शर्तों के आधार पर होगा। |
| दो-स्तरीय जाँच | पंचायत की रिपोर्ट के बाद खाद्य विभाग उसका विस्तृत परीक्षण करता है। इससे केवल एक स्तर की रिपोर्ट पर नाम कटने का जोखिम घटता है और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ती है। |
| अपवर्जन से सुरक्षा | विभाग का कहना है कि दस्तावेज़ या तकनीकी त्रुटि के कारण किसी वास्तविक ज़रूरतमंद का नाम सूची से बाहर न हो, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है। यह समावेशन त्रुटि और अपवर्जन त्रुटि के बीच संतुलन की चुनौती को दिखाता है। |
| प्रौद्योगिकी का आधार | ई-पॉस पोर्टल पर वितरण के आँकड़े उपलब्ध हैं। इनसे सक्रिय और निष्क्रिय कार्डों की पहचान, उपयोग के पैटर्न का विश्लेषण और सत्यापन की प्राथमिकता तय करना संभव होता है। |
महत्व
आर्थिक और राजकोषीय
- खाद्यान्न सब्सिडी सीमित संसाधन है। अपात्र कार्ड हटने से वही अनाज वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुँच सकता है और रिसाव घटता है।
- लक्ष्य-निर्धारण बेहतर होने पर खाद्य सब्सिडी पर होने वाले व्यय की दक्षता बढ़ती है। इससे राजकोषीय संसाधन अन्य कल्याणकारी मदों के लिए बच सकते हैं।
- समावेशन त्रुटि (Inclusion Error) घटने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System) में सरकारी भंडारण और परिवहन पर अनावश्यक भार कम होता है।
सामाजिक न्याय और खाद्य सुरक्षा
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (National Food Security Act, 2013) के अंतर्गत खाद्यान्न एक कानूनी अधिकार है। सही पात्र की पहचान से इस अधिकार का वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है।
- जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधर चुकी है, उनके स्वैच्छिक या प्रशासनिक रूप से बाहर होने पर सबसे वंचित परिवारों के लिए स्थान बनता है।
- कार्ड सूची के नियमित अद्यतन से प्रवासन, मृत्यु और विवाह जैसे बदलावों के कारण होने वाली विसंगतियाँ भी दूर होती हैं।
शासन और प्रशासनिक
- पंचायतों की भागीदारी से स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और सामाजिक निगरानी बढ़ती है।
- आँकड़ों पर आधारित जाँच से कल्याणकारी योजनाओं में साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को बढ़ावा मिलता है।
- पात्रता की जाँच में प्रक्रियात्मक स्पष्टता से पारदर्शिता आती है। यह प्रशासनिक विवेक के दुरुपयोग को भी सीमित करती है।
संघीय ढाँचा
- खाद्य सुरक्षा अधिनियम में लाभार्थियों की पहचान का दायित्व राज्य सरकारों पर है। छत्तीसगढ़ का अभियान इसी राज्य-स्तरीय भूमिका का उदाहरण है।
- राज्य अपने स्थानीय सामाजिक-आर्थिक संदर्भ के अनुसार सत्यापन की पद्धति तय कर सकते हैं। इससे सहकारी संघवाद के अंतर्गत नीतिगत लचीलापन बना रहता है।
चुनौतियाँ
1. अपवर्जन त्रुटि का जोखिम
- सत्यापन में दस्तावेज़ों की कमी, आधार या ई-केवाईसी में गड़बड़ी और रिपोर्ट की ग़लती से वास्तविक ज़रूरतमंद का नाम कट सकता है।
- अशिक्षित और दूरस्थ क्षेत्रों के परिवारों में अपनी शिकायत दर्ज करने की क्षमता कम होती है।
- खाद्य सुरक्षा में अपवर्जन का सीधा असर भुखमरी और कुपोषण पर पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: कल्याणकारी योजनाएँ, भूख और कुपोषण से जुड़े मुद्दे
2. पात्रता मानदंडों की अस्पष्टता
- नौकरी या आय के स्रोत को कौन-सा पैमाना माना जाए, इसमें स्पष्टता न हो तो अलग-अलग क्षेत्रों में असमान निर्णय होते हैं।
- निजी या अनौपचारिक नौकरी और अस्थायी आय का प्रमाण जुटाना कठिन होता है।
- गरीबी रेखा की पुरानी सूचियाँ और वर्तमान आर्थिक स्थिति में अंतर बना रहता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: लक्ष्य-निर्धारण और गरीबी मापन
3. स्थानीय स्तर पर पक्षपात और दबाव
- पंचायत पदाधिकारियों पर सामाजिक और स्थानीय दबाव पड़ सकता है, जिससे रिपोर्ट निष्पक्ष न रहे।
- सत्यापन की ज़िम्मेदारी पंचायत सचिवों पर पहले से बहुत अधिक कार्यभार के साथ आती है।
- स्वतंत्र पुनरीक्षण के अभाव में ग़लत रिपोर्ट सीधे निर्णय बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: विकेंद्रीकरण और पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका
4. शिकायत निवारण तंत्र की कमज़ोरी
- निरस्तीकरण के बाद प्रभावित परिवार को सूचना, सुनवाई का अवसर और अपील की सरल व्यवस्था न मिले तो प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन होता है।
- खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत जिला शिकायत निवारण अधिकारी और राज्य खाद्य आयोग की व्यवस्था है, पर जागरूकता और सक्रियता सीमित रहती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: संवैधानिक अधिकार, जवाबदेही और शिकायत निवारण
5. प्रौद्योगिकी और डेटा की सीमाएँ
- ई-पॉस, बायोमेट्रिक सत्यापन और नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्याएँ ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में बाधा बनती हैं।
- अलग-अलग विभागों के आँकड़ों (रोज़गार, आय, भूमि) का एकीकरण न होने से अपात्रता का पता लगाना कठिन होता है।
- डेटा की निजता और सुरक्षा भी एक चिंता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: शासन में प्रौद्योगिकी का उपयोग; GS-2: ई-गवर्नेंस
6. सार्वजनिक वितरण प्रणाली में संरचनात्मक रिसाव
- अपात्र कार्ड के अतिरिक्त फ़र्जी कार्ड, दुकान स्तर पर अनाज की हेराफेरी और कालाबाज़ारी जैसी समस्याएँ भी हैं।
- केवल कार्ड निरस्त करने से इन सब का समाधान नहीं होता। इसके लिए आपूर्ति शृंखला में सुधार आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: खाद्य भंडारण, वितरण और सब्सिडी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| समावेशन बनाम अपवर्जन त्रुटि | अपात्र को हटाने की कोशिश में पात्र परिवार के बाहर हो जाने का जोखिम बना रहता है। |
| पात्रता की स्पष्ट कसौटी | केवल नौकरी या आय के स्रोत से अपात्रता तय करना विवादास्पद हो सकता है, इसलिए मानदंड स्पष्ट और प्रकाशित होने चाहिए। |
| पंचायत रिपोर्ट की विश्वसनीयता | स्थानीय दबाव और कार्यभार से रिपोर्ट की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। |
| सुनवाई और अपील | निरस्तीकरण से पहले सूचना और अपील की स्पष्ट प्रक्रिया न हो तो अधिकारों का हनन होता है। |
| डेटा और डिजिटल अवसंरचना | विभागीय आँकड़ों का अभाव और तकनीकी बाधाएँ सत्यापन की सटीकता घटाती हैं। |
| पारदर्शिता | निरस्त सूची और कारण सार्वजनिक न होने से जनता का विश्वास कमज़ोर पड़ता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (National Food Security Act, 2013): ग्रामीण आबादी के 75 प्रतिशत और शहरी आबादी के 50 प्रतिशत तक को सब्सिडी वाला खाद्यान्न पाने का कानूनी अधिकार देता है। पात्र परिवारों की पहचान का दायित्व राज्य का है।
- लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Targeted Public Distribution System): राशन कार्ड के माध्यम से उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न वितरण की मुख्य व्यवस्था, जिसकी सूची का सत्यापन इस समाचार का विषय है।
- अंत्योदय अन्न योजना (Antyodaya Anna Yojana): सबसे निर्धन परिवारों के लिए प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न की श्रेणी, जो अधिनियम के अंतर्गत आती है।
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana): अधिनियम के अंतर्गत पात्र परिवारों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराती है, इसलिए पात्रता सूची की शुद्धता इस पर भी असर डालती है।
- छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम, 2012 (Chhattisgarh Food and Nutritional Security Act, 2012): राज्य का अपना खाद्य सुरक्षा कानून, जिसके अंतर्गत राज्य में राशन पात्रता की व्यवस्था संचालित होती है।
आगे की राह
- निरस्तीकरण से पूर्व संबंधित परिवार को लिखित सूचना, कारण और जवाब देने का उचित समय देना चाहिए, ताकि प्राकृतिक न्याय का पालन हो।
- पात्रता और अपात्रता के मानदंड सरल भाषा में सार्वजनिक किए जाएँ, ताकि पंचायत और विभाग दोनों समान पैमाने पर निर्णय लें।
- पंचायत की रिपोर्ट का सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) ग्राम सभा में कराया जाए, जिससे पक्षपात की गुंजाइश घटे।
- आय, रोज़गार और भूमि संबंधी विभागीय आँकड़ों का एकीकरण कर क्रॉस-सत्यापन किया जाए, ताकि केवल मैनुअल रिपोर्ट पर निर्भरता घटे।
- निरस्त कार्डों की सूची और कारण पारदर्शी रूप से सार्वजनिक किए जाएँ, और जिला शिकायत निवारण अधिकारी तथा राज्य खाद्य आयोग को सक्रिय किया जाए।
- आधार और ई-केवाईसी की त्रुटियों के कारण छूटे वास्तविक लाभार्थियों के लिए विशेष शिविर और वैकल्पिक सत्यापन की व्यवस्था हो।
- सत्यापन को एक बार का अभियान न मानकर आवधिक और निरंतर प्रक्रिया बनाया जाए, जिसमें नए पात्र परिवारों को जोड़ने का काम भी साथ चले।
- आपूर्ति शृंखला में पारदर्शिता, जैसे ई-पॉस से तौल और रियल-टाइम निगरानी, को मज़बूत किया जाए, ताकि रिसाव के अन्य स्रोत भी बंद हों।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) · राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 · भोजन का अधिकार (अनुच्छेद 21) · समावेशन त्रुटि एवं बहिष्करण त्रुटि · प्राथमिकता वाले परिवार एवं अंत्योदय अन्न योजना · आधार सीडिंग एवं ई-पॉस · सामाजिक अंकेक्षण · शिकायत निवारण तंत्र · लक्ष्यीकरण (Targeting) · पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका · रिसाव (Leakage) · प्राकृतिक न्याय एवं सुनवाई का अवसर
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: भोजन का अधिकार जीवन के अधिकार का अंग
- अनुच्छेद 47: पोषण-स्तर और जन-स्वास्थ्य सुधार का दायित्व
- अनुच्छेद 14: निर्णयों में मनमानी और अनुचित अपवर्जन निषिद्ध
- अनुच्छेद 243छ और ग्यारहवीं अनुसूची (प्रविष्टि 28): पंचायतों के कार्य, सार्वजनिक वितरण प्रणाली
अवधारणा प्रवाह
लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गरीबी रेखा सूची बनती है और परिवारों को राशन कार्ड जारी होते हैं → समय के साथ किसी सदस्य को नौकरी मिलने या आय के अन्य स्रोत बनने से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति बदल जाती है → सूची अद्यतन न होने से अपात्र परिवार लाभ लेते रहते हैं (समावेशन त्रुटि) और पात्र परिवारों के लिए संसाधन घटते हैं → राज्य का खाद्य विभाग सत्यापन अभियान शुरू करता है और ग्राम पंचायतों से जाँच रिपोर्ट मँगवाता है → विभाग रिपोर्ट का विस्तृत परीक्षण करता है और नियमों के अनुसार अपात्र पाए गए कार्ड निरस्त करता है (2024-25 में 1,17,867) → अपवर्जन से बचाव के लिए दस्तावेज़ और तकनीकी त्रुटियों की पुनर्जाँच तथा शिकायत निवारण की व्यवस्था रखी जाती है → परिणामस्वरूप खाद्यान्न वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुँचता है और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दक्षता व पारदर्शिता बढ़ती है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राथमिकता वाले परिवार के प्रत्येक सदस्य को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रतिमाह 5 किलोग्राम खाद्यान्न पाने का अधिकार है।
2. अंत्योदय अन्न योजना के परिवारों को प्रतिमाह प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न की पात्रता है।
3. प्राथमिकता वाले परिवारों की पहचान का दायित्व सीधे केंद्र सरकार का है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: प्राथमिकता वाले परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रतिमाह 5 किग्रा खाद्यान्न मिलता है। कथन 2 सही है: अंत्योदय परिवारों को प्रति परिवार 35 किग्रा मिलता है। कथन 3 गलत है: अधिनियम की धारा 10 के अनुसार पात्र परिवारों की पहचान राज्य सरकारें करती हैं, केंद्र केवल राज्यवार कवरेज तय करता है।
Q2. अभिकथन (A): राशन कार्डों के सत्यापन में बहिष्करण त्रुटि को समावेशन त्रुटि से अधिक गंभीर माना जाता है।
कारण (R): बहिष्करण त्रुटि में वास्तविक पात्र परिवार अपने वैधानिक खाद्य अधिकार से वंचित हो जाते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सही है, किंतु R गलत है
- A गलत है, किंतु R सही है
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 पात्र परिवारों को कानूनी अधिकार देता है तथा अनुच्छेद 21 के अंतर्गत भोजन का अधिकार मान्य है। पात्र परिवार का नाम सूची से कटने पर उसकी भोजन-सुरक्षा सीधे प्रभावित होती है। इसलिए R, A की सही व्याख्या करता है।
Q3. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धाराओं (स्तंभ I) का उनके विषय (स्तंभ II) से मिलान कीजिए:
स्तंभ I: A. धारा 12 B. धारा 13 C. धारा 15 D. धारा 16
स्तंभ II: 1. जिला शिकायत निवारण अधिकारी 2. राज्य खाद्य आयोग 3. लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार (सूचना-प्रौद्योगिकी का उपयोग, आधार आदि) 4. राशन कार्ड हेतु परिवार की सबसे बुजुर्ग महिला (18 वर्ष या अधिक) मुखिया
- A-3, B-4, C-1, D-2
- A-4, B-3, C-1, D-2
- A-3, B-4, C-2, D-1
- A-1, B-4, C-3, D-2
उत्तर: A-3, B-4, C-1, D-2 — धारा 12 में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुधार, धारा 13 में सबसे बुजुर्ग महिला को परिवार का मुखिया मानने, धारा 15 में जिला शिकायत निवारण अधिकारी तथा धारा 16 में राज्य खाद्य आयोग का प्रावधान है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ “राशन कार्डों का सत्यापन सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दक्षता के लिए आवश्यक है, किंतु इसकी प्रक्रिया में की गई चूक भोजन के अधिकार को क्षति पहुँचा सकती है।” छत्तीसगढ़ में दो वर्षों में 1.17 लाख से अधिक राशन कार्ड निरस्त किए जाने के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही सुझाइए कि पात्र परिवारों को बाहर होने से बचाने के लिए कौन-से सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: भूमिका: छत्तीसगढ़ के आँकड़े दें: 2024 में 57,371 और 2025 में 60,496 कार्ड निरस्त, कुल 1,17,867; ई-पॉस पर सितंबर 2026 में 83,31,947 कार्ड दर्ज। ग्राम पंचायत सचिव और सरपंच की रिपोर्ट के आधार पर खाद्य विभाग जाँच करता है। विभाग का स्पष्टीकरण है कि केवल नौकरी होने से परिवार स्वतः अपात्र नहीं होता।
सत्यापन के पक्ष में तर्क: (1) संसाधन सीमित हैं और लक्ष्यीकरण से अनुचित लाभ रुकता है, जिसे समावेशन त्रुटि कहते हैं। (2) आय-स्थिति बदलती रहती है, इसलिए सूचियों का आवधिक अद्यतन जरूरी है। (3) शांता कुमार समिति (2015) ने रिसाव का अनुमान लगभग 46.7% (NSSO 2011-12) बताया था। (4) आधार सीडिंग, ई-पॉस और राशन कार्ड डिजिटलीकरण से फर्जी और दोहरे कार्ड हटे हैं। (5) छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2012 तथा राज्य की पीडीएस सुधारों की पहचान।
चिंताएँ: (1) बहिष्करण त्रुटि: पात्र परिवार का नाम कटना भोजन के अधिकार (अनुच्छेद 21; PUCL बनाम भारत संघ, 2001 के अंतरिम आदेश, जिनसे खाद्य योजनाएँ कानूनी हक बनीं) का हनन है। (2) NFSA में कवरेज राज्यवार तय है (ग्रामीण 75%, शहरी 50%) और राज्य पात्रता का निर्धारण धारा 10 के अंतर्गत करते हैं। (3) कार्डों का निरस्तीकरण बिना सुनवाई के होने पर प्राकृतिक न्याय का प्रश्न उठता है। (4) पंचायत स्तर पर स्थानीय पक्षपात और सूचना की अशुद्धि की संभावना। (5) आधार या बायोमेट्रिक विफलता से वंचन, जैसे झारखंड के कुछ प्रकरण। (6) प्रवासी श्रमिक और अनौपचारिक आय का निर्धारण कठिन है।
सुरक्षा उपाय: (1) निरस्तीकरण से पहले नोटिस, सुनवाई और अपील का अवसर। (2) ग्राम सभा में सूची का सार्वजनिक पाठ और आपत्ति की व्यवस्था। (3) कई स्रोतों से आँकड़ों का मिलान, जैसे SECC और राज्य के डेटाबेस, न कि केवल नौकरी की स्थिति। (4) धारा 14-16 के अंतर्गत आंतरिक शिकायत तंत्र, जिला शिकायत निवारण अधिकारी और राज्य खाद्य आयोग को सशक्त करना। (5) धारा 28-29 के अंतर्गत सामाजिक अंकेक्षण और सतर्कता समितियाँ। (6) निरस्त कार्डों का सार्वजनिक डैशबोर्ड और कारण सहित प्रकाशन। (7) ‘एक राष्ट्र एक राशन कार्ड’ के अंतर्गत पोर्टेबिलिटी।
निष्कर्ष: लक्ष्य दक्षता और समावेशन के बीच संतुलन है। सुझाव: पारदर्शी और विधि-सम्मत प्रक्रिया, ‘किसी पात्र को बाहर न करना’ का सिद्धांत, तथा मानवीय और तकनीकी त्रुटि सुधारने की सुगम व्यवस्था।
स्रोत: amarujala.com
Chhattisgarh PCS (CGPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: छत्तीसगढ़ राज्य में पिछले दो वर्षों में लगभग 1.17 लाख राशन कार्ड निरस्त किए गए हैं। इसके संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. निरस्तीकरण मुख्यतः गांवों में चल रहे सत्यापन अभियान के कारण हुआ है। 2. यह अभियान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत चलाया जा रहा है। 3. निरस्त कार्डों में अधिकांशतः दोहरे कार्ड शामिल हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — छत्तीसगढ़ में निरस्त किए गए 1.17 लाख राशन कार्डों में अधिकांशतः दोहरे कार्ड शामिल हैं। निरस्तीकरण गांवों में चल रहे सत्यापन अभियान के कारण हुआ है, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है।
Mains: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे राशन कार्ड सत्यापन अभियान के महत्व एवं इसके प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए, राज्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों की चर्चा कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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